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SunnyJanuary 12, 2019
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जिस शख्स का हम जिक्र कर रहे हैं उनकी कहानी कुछ पुरानी है, लेकिन आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे किया गया संघर्ष हर युवा में कुछ कर गुजरने का जोश भर देगा. हम बात कर रहे हैं IAS ऑफिसर वरुण बरनवाल की, जो कभी साइकिल के पंक्चर की दुकान में काम करते थे. जानिए- पैसों की कमी, बिना किसी सुविधा के कैसे ये शख्स बना सबके लिए मिसाल.

वरुण महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार के रहने वाले हैं, जिन्होंने 2013 में हुई यूपीएससी की परीक्षा में 32वां स्थान हासिल किया. इनकी कहानी आम कहानी जैसी नहीं है. वरुण की जिंदगी में उनकी मां, दोस्त और रिश्तेदारों का अहम रोल है.

कभी गरीबी में बनाना पड़ा था साइकिल का पंक्चर

वरुण ने अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए कहा- जीवन बेहद ही गरीबी में बीता. पढ़ने का मन था लेकिन पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे. 10वीं की पढ़ाई करने के बाद मन बना लिया था अब साइकिल की दुकान पर काम ही करूंगा. क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटा पाना मुश्किल था. पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. उन्होंने बताया 2006 में 10वीं की परीक्षा दी थी. परीक्षा खत्म होने के तीन दिन बाद पिता का निधन हो गया. जिसके बाद मैंने सोच लिया था कि अब पढ़ाई छोड़ दूंगा. लेकिन जब 10वीं का रिजल्ट आया मैंने स्कूल में टॉप किया था.

उन्होंने बताया मेरे घरवालों ने काफी सपोर्ट किया. मां ने कहा ‘हम सब काम करेंगे, तू पढ़ाई कर’. उन्होंने बताया 11वीं-12वीं मेरे जीवन के सबसे कठिन साल रहे हैं. मैं सुबह 6 बजे उठकर स्कूल जाता था, जिसके बाद 2 से रात 10 बजे तक ट्यूशन लेता था और उसके बाद दुकान पर हिसाब करता था..

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नहीं थे फीस के पैसे… यहां से मिली मदद

वरुण ने बताया 10वीं में एडमिशन के लिए हमारे घर के पास एक ही अच्छा स्कूल था. लेकिन उसमें एडमिशन लेने के लिए 10 हजार रुपये डोनेशन लगता है. जिसके बाद मैंने मां से कहा रहने दो पैसे नहीं है. मैं 1 साल रुक जाता हूं. अगले साल दाखिला ले लूंगा.. लेकिन उन्होंने बताया मेरे पिता का जो इलाज करते थे, वह डॉक्टर हमारी दुकान के बाहर से जा रहे थे. जिसके बाद उन्होंने मुझसे सारी बात पूछी और फिर तुरंत 10 हजार रुपये निकाल कर दिए और कहा जाओ दाखिला करवा लो.

कभी पढ़ाई पर नहीं खर्चा 1 रुपया

वरुण खुद को बड़ा किस्मत वाला मानते हैं उन्होंने बताया मैंने कभी 1 रुपये भी अपनी पढ़ाई पर खर्च नहीं किया है. कोई न कोई मेरी किताबों, फॉर्म, फीस भर दिया करता था. मेरी शुरुआती फीस तो डॉक्टर ने भर दी, लेकिन इसके बाद टेंशन ये थी स्कूल की हर महीने की फीस कैसे दूंगा. जिसके बाद ‘मैंने सोच लिया अच्छे से पढ़ाई करूंगा और फिर स्कूल के प्रिंसिपल से रिक्वेस्ट करूंगा कि मेरी फीस माफ कर दें’. और हुआ भी यही. उन्होंने बताया घर की स्थिति देखते हुए मेरे दो साल की पूरी फीस मेरे टीचर ने दी.

फिर इंजीनियिरिंग में पहले साल की 1 लाख रुपये फीस कैसे भी करके उनकी मां ने भर दी. जिसके बाद फिर वहीं हुआ, बाकी सालों की फीस कैसे भरें. उन्होंने फिर से सोचा मैं अच्छे से पढ़ाई करुंगा, जिसके बाद कॉलेज के टीचर से रिक्वेस्ट करूंगा. उन्होंने बताया मैंने 86 प्रतिशत अंक हासिल किए जो कॉलेज का रिकॉर्ड था. उसके बाद एक टीचर की नजर में आया और उन्होंने मेरी सिफारिश प्रोफेसर, डीन, डायरेक्टर से की. हालांकि सेकंड ईयर तक मेरी बात उन तक नहीं पहुंची, जिसके बाद फीस मेरे दोस्तों ने दी.

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ऐसे शुरू की UPSC की तैयारी

वरुण ने बताया मेरी प्लेसमेंट तो काफी अच्छी हो गई थी. काफी कंपनी के नौकरी के ऑफर मेरे पास थे, लेकिन जब तक सिविल सर्विसेज परीक्षा देने का मन बना लिया था. वरुण ने मन तो बना लिया था लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि मैं तैयारी कैसे करनी है.

जिसके बाद उनकी मदद उनके भइया ने की. उन्होंने बताया, जब यूपीएससी प्रिलिम्स का रिजल्ट आया तो ‘मैंने भइया से पूछा कि मेरी रैंक कितनी आई है- जिसके बाद उन्होंने कहा 32. ये सुनकर वरुण की आंखों में आंसू आ गए हैं. उन्हें यकीन था अगर मेहनत और लगन सच्ची हो बिना पैसों के भी आप दुनिया का हर मुकाम हासिल कर सकते हैं.

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SunnyJanuary 10, 2019
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चल रहे समय में सब पैसे को ज्यादा अहमियत देते हैं। सीखने से ज्यादा सब पैसे कमाने में लगे रहते हैं। यहां हम बात एक ऐसी महिला की कर रही हैं जिसने कम उम्र में अपना हाथ खो दिया।  आइये जानते हैं कैसे उन्होंने अपने जीवन में सफलता को प्राप्त किया।

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SunnyJanuary 10, 2019
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रिलिजन डेस्क। भगवान श्रीकृष्ण में ऐसे अनेक गुण थे, जो उन्हें परफेक्ट बनाते थे। दोस्ती निभाना हो या दांपत्य जीवन में खुशहाली, जीवन के हर क्षेत्र में उन्होंने सामंजस्य बनाए रखा था। आज हम आपको श्रीकृष्ण के कुछ ऐसे ही गुणों के बारे में बता रहे हैं, जिसे अपना कर हम भी अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं…

1. मित्रता निभाना

अर्जुन, सुदामा व श्रीदामा श्रीकृष्ण के प्रमुख मित्र थे। जब-जब इनमें से किसी पर भी कोई मुसीबत आई, श्रीकृष्ण ने उनकी हरसंभव मदद की। आज भी श्रीकृष्ण और अर्जुन की मित्रता की मिसाल दी जाती है।

2. सुखी दांपत्य

ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण की 16108 रानियां थीं। इनमें से 8 प्रमुख थीं। श्रीकृष्ण के दांपत्य जीवन में आपको कहीं भी अशांति नहीं मिलेगी। वे अपनी हर पत्नी को संतुष्ट रखते थे ताकि उनमें कोई मन-मुटाव न हो।

3. रिश्ते निभाना

भगवान श्रीकृष्ण ने अपना हर रिश्ता पूरी ईमानदारी से निभाया। यहां तक कि अपने परिजन व अन्य लोगों के लिए द्वारिका नगरी ही बसा दी। माता-पिता, बहन, भाई श्रीकृष्ण ने हर रिश्ते की मर्यादा रखी।

4. युद्धनीति

महाभारत के युद्ध में जब-जब पांडवों पर कोई मुसीबत आई, श्रीकृष्ण ने अपनी युद्ध नीति से उसका हल निकाला। भीष्म, द्रोणाचार्य आदि अनेक महारथियों के वध का रास्ता श्रीकृष्ण ने ही पांडवों को सुझाया था। युद्ध का अर्थ आज के समय में विषम परिस्थितियों से है। चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल हो, धैर्य और समझ-बूझ के साथ उसका हल निकाला जा सकता है।

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SunnyJanuary 1, 2019
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रिलिजन डेस्क। दुनिया का हर इंसान सुखी जीवन जीना चाहता है। मगर सभी के जीवन में कुछ न कुछ दुख जरूर रहता है। इंसान जाने-अनजाने में ही कई बार ऐसे काम कर बैठता है, जिसकी वजह से आने वाले समय में उसे परेशानियां झेलनी पड़ती है। धर्म ग्रंथों में भी इन कामों के बारे में बताया गया है कि किस परिस्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। आज हम आपको सुखी जीवन के 3 सूत्र बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं-

1. खुशी में वचन न दें
2. क्रोध में उत्तर न दें
3. दुख में निर्णय न लें

राजा दशरथ का वरदान बना दुखी का कारण
राजा दशरथ ने देव-असुर संग्राम में देवताओं का साथ दिया था। उनके साथ पत्नी कैकयी भी थी। कैकयी की वीरता से प्रसन्न होकर राजा दशरथ ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा था। कैकयी ने कहा था कि समय आने पर वो ये वरदान मांग लेंगी। यही वरदान बाद में राजा दशरथ की परेशानी का कारण बने और श्रीराम को वनवास जाना पड़ा।

दुर्योधन का क्रोध बना कौरवों के विनाश का वजह
युद्ध से पहले जब भगवान श्रीकृष्ण शांति का प्रस्ताव लेकर दुर्योधन के पास गए तो उसने क्रोधित होकर बिना सोचे-समझे ही उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसका नतीजा ये हुआ कि दुर्योधन सहित पूरा कौरव वंश ही समाप्त हो गया। अगर दुर्योधन क्रोध में आकर ऐसा न करता तो शायद महाभारत का युद्ध ही नहीं होता।

कर्ण के बारे में जानकर दुखी हो गए थे युधिष्ठिर
महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब युधिष्ठिर को पता चला कि कर्ण उनके बड़े भाई थे तो ये जानकर उन्हें बहुत दुख हुआ। युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर का राजा बनने से भी इंकार कर दिया। तब भगवान श्रीकृष्ण और अन्य पांडवों ने युधिष्ठिर को समझाया कि दुख में सोचने-समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। इसलिए सोच-विचारकर ही कोई निर्णय लें। श्रीकृष्ण के समझाने पर युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर का राजा बनना स्वीकार किया।

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SunnyJanuary 1, 2019
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Publish Date:Tue, 01 Jan 2019 12:04 PM (IST)

रायपुर। बीता साल नक्सल मोर्चे पर फोर्स के लिए सफलता की बड़ी इबारत लिख गया। अब नए साल में उम्मीद की जा रही है कि माओवाद खत्म होगा और बस्तर समेत समूचे दंडकारण्य में शांति और विकास की ताजा बयार बहने लगेगी। 2018 में फोर्स नक्सलियों की मांद तक जाकर हमले करने में सफल रही। नक्सल नेटवर्क के तीन अहम सदस्यों को पकड़ा गया।

सैकड़ों इनकाउंटर, गिरफ्तारी, सरेंडर हुए। खुद माओवादियों ने माना कि सालभर में उनके 230 साथी मारे गए हैं। जुलाई में बस्तर पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा-खत्म हो रहा माओवाद। हालांकि फोर्स के तमाम प्रयासों के बावजूद नक्सली बीच-बीच में सिर उठाते रहे पर अब नए साल में नई सरकार पहले से ही इस समस्या का स्थायी समाधान करने का फार्मूला तलाश रही है। उम्मीद की जा रही है कि अब माओवाद के अंतिम दिन चल रहे हैं।

2018 में नक्सलियों ने सबसे बड़ी वारदात किस्टारम इलाके में की। 13 मार्च को उन्होंने पालोड़ी कैंप जा रहे सीआरपीएफ की माइन प्रोटेक्टेड गाड़ी भारी विस्फोटक से उड़ा दी। इन घटना में 9 जवान शहीद हो गए थे।

इसी साल 20 मई को उन्होंने दंतेवाड़ा जिले के चोलनार में जवानों की कार उड़ाई थी जिसमें जिला बल के सात जवान शहीद हो गए थे। यह घटना तब हुई जबकि देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह सीआरपीएफ की नई बस्तरिया बटालियन की पासिंग आउट परेड के लिए अंबिकापुर पहुंचे हुए थे।

इस घटना के बाद राजनाथ ने बयान दिया कि नक्सली नेताओं की संपत्ति जब्त की जाएगी। छिटपुट घटनाएं तो रोज ही दर्ज की गईं पर बीते साल राहत की बात यह रही कि फोर्स ने बड़ी संख्या में नक्सलियों को मार गिराने में भी सफलता हासिल की। 24 अप्रैल को बीजापुर से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के जंगलों में फोर्स ने नक्सलियों की मांद में घुसकर हमला किया। इस घटना में 39 नक्सली मारे गए।

इससे पहले चार मार्च को तेलंगाना के ग्रेहाउंड्स ने बीजापुर जिले के पुजारी कांकेर में नक्सलियों को घेरकर हमला किया और 10 को मार गिराया। 6 अगस्त को सुकमा जिले के नुलकातोंग में नक्सली कैंप पर पुलिस ने रेड की और 15 नक्सलियों को मार गिराया। 27 अप्रैल को बीजापुर से सटे तेलंगाना में आठ नक्सली मारे गए। इन सफलताओं से नक्सली लगातार बैकफुट में रहे।

चुनाव में गड़बड़ी की कोशिशों में सफल न हो सके-

नक्सलियों ने चुनाव के दौरान दहशत मचाने की बहुत कोशिश की लेकिन सफल न हो सके। 30 अक्टूबर को उन्होंने दंतेवाड़ा के नीलावाया में डीडी न्यूज के कैमरामैन और दो जवानों को मार दिया। 27 अक्टूबर को बीजापुर के मुरदंडा कैंप पर हमला किया जिसमें सीआरपीएफ के चार जवान शहीद हो गए।

12 नवंबर को चुनाव के दिन सुकमा में दो मुठभेड़ में सात नक्सलियों को मार गिराया गया। दो शव भी बरामद किए गए। चुनाव से लौट रहे मतदान दलों पर हमले की कोशिशें की गईं। मोदकपाल में बीएसएफ की ट्रक ब्लास्ट में टुकड़ों में बंट गई लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। मतदान खत्म होने के बाद फोर्स ने पलटवार किया। 26 नवंबर को सुकमा जिले में तीन मुठभेड़ में 11 नक्सलियों को मार गिराया।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पहुंचे बस्तर-

बीते साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय आयुष्मान योजना का शुभारंभ बीजापुर के नक्सल प्रभावित जांगला गांव से किया। मोदी के आने से पहले नक्सलियों ने कुटरू में जवानों की एक बस उड़ाई जिसमें दो शहीद हुए। हालांकि माओवादी मंसूबे पूरे न हो सके और मोदी वहां पहुंचे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी जुलाई में बस्तर पहुंचे। मुख्यमंत्री और राज्यपाल का प्रवास भी होता रहा। नेताओं ने संदेश दिया कि माओवाद अब समाप्ति की ओर है।

नक्सल नेटवर्क भी ध्वस्त हुआ-

बीते साल फोर्स ने नक्सलियों के तीन बड़े नेटवर्क को तोड़ने में सफलता हासिल की। 7 फरवरी को नक्सली टेक्निकल विंग का बड़ा नेता टेक रमन्ना और 12 जून को नक्सल प्रवक्ता विकल्प उर्फ अभय को पकड़ा गया। साल के आखिर में 23 दिसंबर को फोर्स ने महाराष्ट्र से नक्सली नेटवर्क चलाने वाले केंद्रीय सेवा के एक अधिकारी एन वेंकट राव को धर दबोचा। शहरी नक्सल नेटवर्क चलाने वाले अन्य कई भी शिकंजे में फंसे।

इन वारदातों की भी रही चर्चा-

23 मई को कांकेर सांसद विक्रम उसेंडी का फार्म हाउस उड़ाया। 20 मई को गृहमंत्री राजनाथ ने पहली बस्तरिया बटालियन की सलामी परेड ली। 28 नवंबर को नक्सल कमांडर बासव राजू ने चार्ज लिया और अगले दिन सुकमा में पुतलों से फोर्स को फांसने की कोशिश की गई। जवान सतर्क रहे। 24 मार्च को दंतेवाड़ा जेल ब्रेक की कोशिश प्रहरियों ने विफल की। 23 सितंबर को बस्तर से लगे आंध्र के अरकू में नक्सलियों ने तेदेपा के एक विधायक और एक पूर्व विधायक की हत्या कर दी। 20 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी डीएम अवस्थी ने चार्ज लिया।

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SunnyDecember 31, 2018
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सपना चौधरी, पवन सिंह और खेसारीलाल यादव
ये देसी रॉकस्टार हैं। इनके शो में उसी तरह का जुनून और पागलपन होता है, जैसा हम पहले किसी बड़े रॉक स्टार के शो में देखते थे। इनके देसी शो सुपरहिट हैं तो सोशल मीडिया पर भी इनके जलवे हैं। अपनी माटी के गीत गाने वाले इन देसी स्टारों ने मनोरंजन के आयाम बदल दिए हैं। ऐसे ही तीन स्टारों की सक्सेस स्टोरी जानते हैं अजय दीप लाठर और रवि प्रकाश से:

1.) सपने पूरे हो रहे सपना के

हरियाणा जैसे राज्य में, लड़कियों के लिए कई तरह की बंदिशें रही हैं, जब सपना चौधरी ने हरियाणवी गीतों पर डांस करना शुरू किया तो तालियों से ज्यादा सवाल उठते थे। कभी सपना ने हवा के उलट रास्ता चुना था, आज वह देशभर में छा चुकी हैं। वह आज देश की सबसे लोकप्रिय डांसर है। उनके शो की डिमांड किसी बॉलिवुड स्टार से कम नहीं है।

बेहद साधारण परिवार से संबंध रखने वालीं सपना चौधरी हरियाणवी गानों पर डांस करते-करते देश के करोड़ों दिलों की धड़कन बन चुकी हैं। हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा से सटे राजस्थान के इलाके से बाहर निकलकर देश के सात राज्यों में हरियाणवी गानों पर शो कर चुकीं सपना की उनके प्रशंसकों में इस कदर दीवानगी है कि वे आयोजन की सूचना भर मिलते ही हजारों की संख्या में पहुंच जाते हैं। आयोजकों और पुलिस के लिए दीवानों की इस भीड़ को कंट्रोल करना मुश्किल होने लगा है। साल 2008 के आखिर में पिता के देहांत के बाद सपना चौधरी ने पहली बार स्टेज पर परफॉर्म किया था ताकि परिवार को चला सकें। उस वक्त हरियाणा जैसे राज्य में स्टेज पर लड़कियों के आने पर अघोषित प्रतिबंध था, फिर भी सपना ने यह रास्ता चुना। कुछ साल के अंदर ही सपना वहां पहुंच गई हैं जहां उनकी कहानी किसी परिकथा-सी लगती है। अब वह इतनी बड़ी स्टार हैं कि नजफगढ़ स्थित उनका घर सुरक्षा कारणों से पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से लैस है।

वह बताती हैं, ‘साल 2008 में पिता की मौत के बाद परिवार चलाने की जिम्मेदारी आ गई। मैं अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थी। छोटी इतनी थी कि जॉब कर नहीं सकती थी और कोई ऐसा काम नजर नहीं आया जो कर सकूं तो स्टेज पर परफॉर्म करने लगी। मैं अकेली ऐसी सफल डांसर हूं जो सिर्फ हरियाणवी गानों पर परफॉर्म करती है। मैंने साल 2008 के आखिर में जब पहली बार स्टेज पर डांस किया था तो 1500 रुपये मिले थे।’

आज सपना को लाखों रुपये बस एक डांस के लिए मिलते हैं। अब तक सपना का सबसे पॉप्‍युलर गाना ‘तेरी आंख्या का वो काजल’ है। वह खुद कहती हैं कि हरियाणा में वह सबसे अच्छे पैसे ले रही हूं। बकौल सपना, ‘मैं तो हरियाणा में हर आर्टिस्ट को बोलती हूं कि आप शो के लिए पैसे की डिमांड करो। फ्री के शो करने बंद करो।’

सपना अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि तब प्रोग्राम रात में 9 बजे शुरू होता था। कई बार सुबह के 5-6 भी बज जाते थे। एक रात में 4-4 घंटे तक उन्हें डांस करना पड़ता था लेकिन सुबह जब पैसे मिलते थे तो उनका दिल टूट जाता था मगर आज वह किसी वजह से स्टेज पर नहीं आतीं तो लाखों लोगों के दिल टूट जाते हैं। हरियाणा तो क्या, पिछले दिनों बिहार के बेगूसराय में भी उन्हें सुनने लाखों लोगों की भीड़ आ गई और दुर्भाग्य से भीड़ बेकाबू हो गई। उनके एक फैन की मौत भी हो गई। उनकी किस अदा पर लोग दीवाना हो रहे हैं, यह पूछने पर सपना कहती हैं, ‘मैं तो लोगों से खुद पूछती हूं कि आपको क्या अच्छा लगता है? कुछ बोलते हैं कि आपकी सादगी पसंद आती है, कुछ कहते हैं कि आपका पहनावा बहुत अच्छा है, कई बोलते हैं कि आप डांस बहुत अच्छा करती हैं। इसी तरह कुछ लोगों को मेरे हावभाव बहुत अच्छे लगते हैं तो बहुत सारी चीजें हैं जो अलग-अलग तरह से लोगों को पसंद आती हैं। उन्होंने मुझे और मेरे काम को पसंद किया इसीलिए सफलता का श्रेय मैं पब्लिक को दूंगी। भगवान करे, हरियाणवी कल्चर अभी और ज्यादा फैले।’

सपना चौधरी

उम्र: 28 साल

इंस्टाग्राम फॉलोअर्स: 14 लाख

यू-ट्यूब व्यू: 17.3 करोड़

2.) सात समंदर पार तक छाया आरा का छोरा

लंदन में भोजपुरी सिंगर पवन सिंह को कुछ लोग पहचान लेते हैं। वे उनसे उनका सुपरहिट गीत गाने की फरमाइश करते हैं। वह अपना सुपरहिट गाना ‘लॉलीपॉप लागेलु’ गाते हैं और यह विडियो इंटरनेट पर अपलोड होता है। इसके बाद पवन के शोज दर्जनों देशों में होते हैं और उनका यह गाना बिहार-यूपी में पार्टियों में बजने वाला सबसे पसंदीदा गाना बन जाता है।


स्‍टारडम अब सिर्फ इलीट कहे जाने वालों के पीछे ही नहीं घूमता, गांव की गलियों में भी पलता है। भोजपुरी फिल्मों के ऐसे ही दो स्टार हैं पवन सिंह और खेसारीलाल यादव। लोग इनकी गायकी के दीवाने हैं तो ऐक्टिंग के भी। पवन सिंह की फिल्में हाउसफुल जाती हैं और इनके लाइव कन्‍सर्ट में हजारों की भीड़ उमड़ती है। लोग नाचते हैं, झूमते हैं और फिर यही भीड़ इन्हें स्टारडम देती है। इनके शो में ऐसी भीड़ होती है कि बॉलिवुड के बड़े कलाकार भी रश्क करें। उनके स्टारडम ने अंग्रेजों को भी भोजपुरी गाने पर कमर लचकाने पर मजबूर कर दिया है। भोजपुरी गाने ग्लोबल पार्टी में भी बजने लगे हैं। उनके गानों में आरा है, मोहनिया है, छपरा है, पटना है और यहां के गंवई लोग हैं। उनकी अधूरी इच्छाएं हैं और पर्सनल टच है। लाखों लोग पवन सिंह के गानों और फिल्मों की डीवीडी खरीदते हैं और आईआईटी के लड़के भी ‘लगावे लु…’ या ‘सानिया मिर्जा कट नथुनिया जान मारेला’ पर ठुमके लगाते हैं।

पवन सिंह

उम्र: 32 साल

इंस्टाग्राम फॉलोअर्स: 19 लाख

यू-ट्यूब सबस्क्राइबर्स: 6.9 लाख

एफबी फॉलोअर्स: 7.38 लाख

3.) खेसारीलाल
के भोजपुरी रैप पर युवा करने लगते हैं नागिन डांस

खेसारीलाल का नया गाना अपलोड होने के दो दिन के अंदर इंटरनेट पर 1 करोड़ से ज्यादा लोग उसे देख लेते हैं। उनके शो में आने वाली भीड़ को संभालना मुश्किल होता है और कई बार हालात बेकाबू भी हो जाते हैं। उनकी भोजपुरी फिल्में खूब पैसा कमा रही हैं।


ऐसा ही हाल खेसारीलाल यादव का है। छपरा जिले के रसूलपुर पट्टी गांव का खेसारी आज की तारीख में भोजपुरी फिल्मों का सुपरस्टार है। जब वह ‘नून रोटी खाएंगे, जिंदगी संग ही बिताएंगे’ गाकर ‘ठीक है’ पूछते हैं तो बिहार के लड़के नागिन डांस करने लगते हैं। यह भोजपुरी रैप है जो कस्बे के समारोह से लेकर पब तक में लोगों को नचा रहा है। कभी ‘ए ड्राइवर सइयां जाएके बा नैयहर, बलेरो लेकर आवअ…’ गाकर शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचने वाले खेसारीलाल यादव का नाम आज भोजपुरी फिल्मों के हिट होने की गारंटी माना जाता है। वह हॉट पैंट पहनने वाली लड़की से स्क्रीन पर रोमांस करते हैं तो बिहार के सिनेमाघरों में सीटियां बजने लगती हैं। लोग कुर्सियों पर चढ़कर गमछा उछालने लगते हैं। जब वह ‘शादी होते जान भुला जइबू का हो…’ जैसे गाने गाते हैं तो स्पोर्ट्स बाइक पर जींस पहनकर घूमने वाले गंवई लड़कों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। ‘राजा कइल बिआह त मोटा जइब हो खाइब मेहरी के हाथ त मोटा जइब हो…’ गाने पर नाचने वाले लोग सिर्फ मोतिहारी या बेतिया में ही नहीं रहते, इसे पसंद करने वालों में महानगरों के इलीट भी हैं। उन्हें भोजपुरी गाने गाते हुए नौ साल हो चुके हैं। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रंजन सिन्हा बताते हैं कि खेसारीलाल की लोकप्रियता काफी बढ़ी है और उनके सभी गाने सुपरहिट होते हैं। खेसारीलाल अब विदेशों में भी लाइव कन्‍सर्ट करते हैं और वहां रहने वाले बिहार के लोग महंगे टिकट लेकर उनका शो देखने आते हैं।

खेसारीलाल यादव

उम्र: 32 साल

इंस्टाग्राम फॉलोअर्स: 1.68 लाख

यू-ट्यूब सबस्क्राइबर्स: 6.8 लाख

एफबी फॉलोअर्स: 1.70 लाख

कहां से आता है स्टारडम
आखिर ऐसा क्या है कि ये लोग इतने पॉप्‍युलर हैं? इसे जानना-समझना हो तो भोजपुरी गानों की लाइनों पर ध्यान दीजिए। दरअसल, हर भोजपुरी गायक अपने गीत में गांव-घर की चर्चा करता है। फिल्मों में उनका किरदार भदेस किस्म का होता है। इनकी फिल्में और गाने मिडल और लोअर मिडल क्लास की हसरतों, उनके सपनों और उनकी पीड़ाओं की बात करते हैं, उनके शहरों-गांवों की बात करते हैं इसलिए वे सुपरहिट हैं। इन देसी रॉकस्टारों के फैंस खुद को उनके गानों और फिल्मों से कनेक्ट कर पाते हैं। इनके गानों की थिरकने वाली बीट्स इन्हें कई बार शहरी युवाओं का पसंदीदा भी बना देती हैं, तभी ये करोड़ों कमा रहे हैं और अपने गंवई स्टारडम से इलीट स्टारडम को खुली चुनौती दे रहे हैं।

सवाल भी हैं

ऐसा नहीं है कि इनकी देसी सफलता पर सवाल नहीं उठे। इनके कंटेंट को लेकर सवाल उठते रहे हैं। खेसारीलाल यादव पर द्विअर्थी गीत गाकर भीड़ जुटाने का आरोप लगा तो सपना चौधरी पर भी सवाल उठे। इस मसले पर विवाद और बहस अब भी जारी है लेकिन लोगों में अपने बीच के ही देसी स्टार को पसंद करने के ट्रेंड को खारिज नहीं किया जा सकता।

म्यूजिक से पॉलिटिक्स तक
हाल के दिनों में ऐसे क्षेत्रीय कलाकारों के बढ़ते रसूख का असर राजनीति पर भी पड़ने लगा है। खास इलाके के लोगों में इन कलाकारों की लोकप्रियता को भुनाने के लिए राजनीतिक दल मौके की खोज में रहते हैं। खेसारीलाल भी हाल में अपने राजनीतिक बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। कभी इसी रास्ते स्टारडम के सफर पर जाने वाले मनोज तिवारी अब सांसद बन चुके हैं और भोजपुरी फिल्मों के स्टार रवि किशन भी राजनीति की दुनिया में आ चुके हैं। पिछले दिनों सपना चौधरी भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह कोई भी पार्टी जॉइन नहीं करेंगी।

बहरहाल, राजनीति का जादू इनके सर चढ़कर बोलेगा या नहीं, यह बेशक अभी बहुत साफ नहीं है लेकिन यह बात बिलकुल साफ है कि इनका जादू सबके सिर चढ़कर बोल रहा है!

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SunnyDecember 31, 2018
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Publish Date:Wed, 19 Dec 2018 11:12 PM (IST)

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के लिए जागरूक करने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रथम श्रेणी अधिकरियों को स्कूल अलॉट कर दिए हैं। अधिकारी वार्षिक परीक्षा शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए जागरूक करेंगे। 20 अधिकारियों को 20 सीनियर सेकेंडरी स्कूल अलॉट किए गए हैं। अधिकारी स्कूलों में एक घंटा विद्यार्थियों के साथ बिताएंगे।

स्कूलों में जाकर अधिकारी खुद की सक्सेस स्टोरी बताएंगे कि किस तरह वे चुनौतियों का सामना करके इस पद पर पहुंचे हैं। अधिकारियों की आवभगत के लिए प्रत्येक स्कूल को दो हजार रुपये का बजट भी जारी किया गया है।

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प्रथम श्रेणी अधिकारी स्कूल अलॉट

जयवीर यादव, सीइओ डीआरडीए राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल बीघड़

रघुबीर ¨सह डीएफओ राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल दरियापुर

अनुभव मैहता डीडीपीओ राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल धांगड़

बालकिशन डीआरओ राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल एमपी रोही

जगबीर ¨सह एक्सइन पीडब्ल्यूडी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल फतेहाबाद

दयानंद सिहाग डीइओ राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल भूना

एनआर राणा एक्सइन पब्लिक हेल्थ राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल जांडली कलां

आदर्श ¨सगला एक्सइन पब्लिक हेल्थ राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल सनियाना

बलवंत ¨सह डीडीए राजकीय सीनियर सेकेंडरी भट्टूकलां

प्रमोद कुमार डीएफएससी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल ¨ढगसरा

शमशेर ¨सह एक्सइन बिजली निगम राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल किरढ़ान

छेलुराम तहसीलदार रतिया राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल अहरवां

हेमंत मितल एचएसएएमबी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल नागपुर

देवीलाल सिहाग राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल रतिया

डा.धर्मपाल पूनिया आयुवेदिक अधिकारी राजकीय मिडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल इंदाछुई

सुरजीत ¨सह नैन एसडीएम टोहाना राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल टोहाना

धूप ¨सह एक्सइन ¨सचाई विभाग टोहाना राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल गाजूवाला

डीएस कुंडू डीइइओ राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल जाखल

जय¨सह बैनीवाल एक्सइन डीएचबीवीएन टोहाना राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल म्योंदकलां

संगीता बिश्नोई ¨प्रसीपल डाइट राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोरखपुर

———

प्रथम श्रेणी अधिकारियों को स्कूल अलॉट कर दिए गए है। अधिकारी वार्षिक परीक्षा शुरू होने से पहले स्कूलों में जाएंगे और विद्यार्थियों को जागरूक करेंगे। विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए यह फैसला विभाग ने लिया है।

– दयानंद सिहाग

जिला शिक्षा अधिकारी फतेहाबाद ।

Posted By: Jagran

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SunnyDecember 31, 2018
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ल 2018 कई गुमनाम खिलाड़ियों के लिए बेहतर रहा। भागलपुर की मिट्टी में पढ़े-बढ़े इन खिलाड़ियों ने अपने फन की जादूगरी से सबको चौकाया। क्रिकेट में बरहपुरा निवासी रहमतुल्लाह उर्फ शाहरूख, एशियन मुए थाई में साध्वी ठाकुर, वॉलीबॉल में मुस्कान, खो-खो में सोनू कुमार, बॉल बैडमिंटन में नवगछिया की अंजलि, महिला क्रिकेट में चंपानगर की रोहिणी ने सफलता के परचम फहरा कर बुलंदियों को छुआ। इन खिलाड़ियों ने नेशनल लेवल पर बिहार का नाम तो ऊंचा किया ही, भागलपुर का भी मान बढ़ाया।

क्रिकेट, वॉलीबाॅल, बॉल बैडमिंटन, खो-खो और मुए थाई तक में बजाया जिले का डंका

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SunnyDecember 31, 2018
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1min240

भास्कर संवाददाता | कुंडेश्वर

जवाहर नवोदय स्कूल में रविवार को पूर्व छात्रों का सम्मेलन रखा गया। जिसमें वर्ष 1986 से वर्ष 2000 तक के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 32 साल बाद स्कूल में जुटे छात्र एक दूसरे से मिलकर भूली बिसरी यादों को ताजा करने में जुट गए।

देश भर से आए 150 छात्र- छात्राओं ने स्कूल में अध्ययनरत छात्रों से मुलाकात कर सफलता के टिप्स बताए। सम्मेलन में शामिल हुए कई छात्र वर्तमान में ऊंचे पदों पर पहुंच गए हैं। उन्होंने स्कूल में पढ़ रहे छात्रों से अपने अनुभव साझा किए और मार्गदर्शन किया।

दो छात्रों को किया सम्मानित

एल्युमिनी समिति ने कक्षा 10 में प्रथम स्थान हासिल करने वालों में प्रवेन्द्र कुमार एवं श्रृद्धा घोष को 5-5 हजार रुपए का चैक देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में शिक्षकों का भी सम्मान किया गया। स्कूल के पूर्व छात्रों ने अपने गुरुजनों को शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। संस्था की प्राचार्या संध्या कटियार ने कहा कि जिस तरह छात्रों को शिक्षक याद रहते हैं, उसी तरह अच्छे छात्र शिक्षकों को भी हमेशा याद रहते हैं। एल्युमिनी समिति के पदाधिकारियों ने संस्था के उप प्राचार्य एमके श्रीवास्तव का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया। इस अवसर पर आरके रघुवंशी, एच प्रसाद, एमके श्रीवास्तव, जीडी कोरी, अजय बहरोलिया, राकेश यादव, ओपी भारद्वाज, संदीप जैन, प्रशांत जैन, पिंकी सिंह, राजकुमारी भदौरिया सहित बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं मौजूद थे। जूनियर स्कूली छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मनोरंजन किया।

भास्कर संवाददाता | कुंडेश्वर

जवाहर नवोदय स्कूल में रविवार को पूर्व छात्रों का सम्मेलन रखा गया। जिसमें वर्ष 1986 से वर्ष 2000 तक के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 32 साल बाद स्कूल में जुटे छात्र एक दूसरे से मिलकर भूली बिसरी यादों को ताजा करने में जुट गए।

देश भर से आए 150 छात्र- छात्राओं ने स्कूल में अध्ययनरत छात्रों से मुलाकात कर सफलता के टिप्स बताए। सम्मेलन में शामिल हुए कई छात्र वर्तमान में ऊंचे पदों पर पहुंच गए हैं। उन्होंने स्कूल में पढ़ रहे छात्रों से अपने अनुभव साझा किए और मार्गदर्शन किया।

दो छात्रों को किया सम्मानित

एल्युमिनी समिति ने कक्षा 10 में प्रथम स्थान हासिल करने वालों में प्रवेन्द्र कुमार एवं श्रृद्धा घोष को 5-5 हजार रुपए का चैक देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में शिक्षकों का भी सम्मान किया गया। स्कूल के पूर्व छात्रों ने अपने गुरुजनों को शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। संस्था की प्राचार्या संध्या कटियार ने कहा कि जिस तरह छात्रों को शिक्षक याद रहते हैं, उसी तरह अच्छे छात्र शिक्षकों को भी हमेशा याद रहते हैं। एल्युमिनी समिति के पदाधिकारियों ने संस्था के उप प्राचार्य एमके श्रीवास्तव का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया। इस अवसर पर आरके रघुवंशी, एच प्रसाद, एमके श्रीवास्तव, जीडी कोरी, अजय बहरोलिया, राकेश यादव, ओपी भारद्वाज, संदीप जैन, प्रशांत जैन, पिंकी सिंह, राजकुमारी भदौरिया सहित बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं मौजूद थे। जूनियर स्कूली छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मनोरंजन किया।

दोस्तों के साथ मौज मस्ती करने से पढ़ाई का बेहतर माहौल मिला : बड़गैयां

पूर्व छात्र डॉ. हरिवल्लभ बड़गैयां ने बताया कि स्कूल के दिन उन्हें आज भी याद हैं। दोस्तों के साथ मौज मस्ती करने के साथ पढ़ाई का बेहतर माहौल मिला। सभी पास आउट छात्रों ने स्कूल में पढ़ रहे छात्रों को प्रोत्साहित किया। 32 साल बाद आए पूर्व छात्रों ने विद्यालय की अन्य गतिविधियों का भी जायजा लिया। जिससे पढ़ाई, साफ- सफाई, खेल कूद एवं पर्यावरण जैसी व्यवस्थाओं को देखा। इस अवसर पर पूर्व छात्रों में खेमचंद्र कुशवाहा, बृजभूषण शुुक्ला, रामकिशोर यादव, शिवनारायण सोनी, देवेंद्र भास्कर, नटवर सिंह, राकेश घोष, राजा अवधेश भास्कर, अमित श्रीवास्तव, राजीव साहू सहित 150 वरिष्ठ छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

भास्कर संवाददाता | कुंडेश्वर

जवाहर नवोदय स्कूल में रविवार को पूर्व छात्रों का सम्मेलन रखा गया। जिसमें वर्ष 1986 से वर्ष 2000 तक के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 32 साल बाद स्कूल में जुटे छात्र एक दूसरे से मिलकर भूली बिसरी यादों को ताजा करने में जुट गए।

देश भर से आए 150 छात्र- छात्राओं ने स्कूल में अध्ययनरत छात्रों से मुलाकात कर सफलता के टिप्स बताए। सम्मेलन में शामिल हुए कई छात्र वर्तमान में ऊंचे पदों पर पहुंच गए हैं। उन्होंने स्कूल में पढ़ रहे छात्रों से अपने अनुभव साझा किए और मार्गदर्शन किया।

दो छात्रों को किया सम्मानित

एल्युमिनी समिति ने कक्षा 10 में प्रथम स्थान हासिल करने वालों में प्रवेन्द्र कुमार एवं श्रृद्धा घोष को 5-5 हजार रुपए का चैक देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में शिक्षकों का भी सम्मान किया गया। स्कूल के पूर्व छात्रों ने अपने गुरुजनों को शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। संस्था की प्राचार्या संध्या कटियार ने कहा कि जिस तरह छात्रों को शिक्षक याद रहते हैं, उसी तरह अच्छे छात्र शिक्षकों को भी हमेशा याद रहते हैं। एल्युमिनी समिति के पदाधिकारियों ने संस्था के उप प्राचार्य एमके श्रीवास्तव का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया। इस अवसर पर आरके रघुवंशी, एच प्रसाद, एमके श्रीवास्तव, जीडी कोरी, अजय बहरोलिया, राकेश यादव, ओपी भारद्वाज, संदीप जैन, प्रशांत जैन, पिंकी सिंह, राजकुमारी भदौरिया सहित बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं मौजूद थे। जूनियर स्कूली छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मनोरंजन किया।

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