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adminMarch 23, 2018


Sure, this one isn’t exactly advertising related, but if you’re after some motivation then it’ll tick all the boxes. In a guest post, Alan Manly (pictured below), founder of Group Colleges Australia and author of The Unlikely Entrepreneur, takes a look at some wonderful Aussie success stories and the humble beginnings in which they were born…

Entrepreneurs and the famous often appear in our lives oozing success. However, like anyone will tell you, success rarely happens overnight and there are often fascinating stories behind them. So, what can we learn from four of Australia’s most high profile? Let’s take a look.

It’s never too late

Few folks in their seventies feel like getting involved in a startup. There is one great Australian that did just that. Len Ainsworth is recognised as one of Australia’s great success stories. He was the driving force behind the Aristocrat poker machine empire, when at the age of seventy two, was advised that he had one year to live. It goes without saying that is a traumatic situation.  Len divided his fortune into nine equal portions and distributed to his seven children, ex-wife and current wife. As fate would have it Len made a full recovery from his illness. So there he was at seventy two years of age alive and well and decided that he would start again. The result of that decision was the new poker machine company Ainsworth Game Technology that was recently sold for $470 million.  Now at 94 years old Len is still Chairman of the company. If ever there was proof that you are never too old for a startup Len Ainsworth is living testimony.

Girl Power

Many have dreamed of inheriting the family fortune. Blessed with a famous family name and a legend of a father being Lang Hancock of mining industry fame, Gina as the only child ultimately inherited the bulk of the family fortune. Along with the fortune came a mountain of debt and an aggrieved step mother.  Being rich, deeply in debt and famous the story made headlines for years. To add a further challenge it would be readily agreed that the mining industry is hardly top of the pops for a girl wishing to build a career. In a classic quote Gina declared where she was coming from. There is no monopoly on becoming a millionaire. If you’re jealous of those with more money, don’t just sit there and complain – do something to make more money yourself.” Fate blessed and cursed Gina with a complex situation that only pure determination could overcome. The Forbes Australia billionaires report lists Gina as the wealthiest woman in Australia.

Never say die

A dinner party story John Symond loves telling (which I’ve been present for) is that during a lower moment in business narrowly avoiding bankruptcy, he visited the David Jones store in Parramatta. Upon selecting a tie he tendered his credit card as payment. The nice girl behind the counter scanned the card, took out a pair of scissors and in full public view cut the credit card in half. It always gets a laugh from those sitting around the dining table for 20 in his 100 million dollar mansion.  After the tie cutting event John borrowed money from his brother and worked long hours offering after hours home loans consulting to purchasers. He built an empire by offering something the banks were disinterested in offering. Home loan applications service in your home. Aussie Home Loans call sign of “we’ll save you” worked for his customers and saved John from any risk of further financial troubles.  John eventually sold Aussie Home Loans to the Commonwealth Bank.

If you can’t make, it fake it

Dick Smith is a famous Australian often heard in the media declaring his views on issues that affect Australia. Having started his business in 1968 with $610 (approximately $4000 in today’s money) he took an idea form overseas, being self-service in shops as opposed to counter service. This innovation was a boom for his business as clientele of electronic hobbyists could browse and not require staff interaction. This was a breakthrough in the late 1960s. Business success sometimes requires a nudge in the form of a public relations event and Dick really hit the PR jackpot by getting major media attention for towing a fake iceberg into Sydney harbour. The cost of the barge covered with plastic and white firefighting foam was minor compared to the total radio and TV coverage. Dick Smith became a big name in the community long before serious financial success was realised.

These entrepreneurial journeys involved events and experiences only a few steps more daring than the average punter.  The takeaway? A brave approach, and maybe a little pretence of more confidence than usual, and your aspiration for success may be one big step closer

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adminMarch 21, 2018


Publish Date:Wed, 21 Mar 2018 09:38 PM (IST)

धनबाद : स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2017 के लिए चयनित होने वाले स्कूलों की सक्सेस स्टोरी बनेगी। इससे दूसरे स्कूल भी सीख लेंगे, जो यह पुरस्कार पाने से वंचित रह गए। स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए जिले के 40 विद्यालयों का चयन हुआ। इन सभी स्कूलों को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पुरस्कृत किया जाएगा। डीईओ और डीएसई को पत्र जारी कर झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक ने स्कूलों की सक्सेस स्टोरी तैयार कर राज्य कार्यालय को भेजने को कहा है। राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए एक बुकलेट तैयार किया जा रहा है, इसमें इन विद्यालयों की सक्सेस स्टोरी प्रकाशित की जाएगी। प्रत्येक चयनित विद्यालयों को एक-दो पेज का सक्सेस स्टोरी तैयार कर आवश्यक रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इसके आठ महत्वपूर्ण बिंदु निर्धारित किए गए हैं। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार के लिए धनबाद से महज एक विद्यालय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय झरिया का चयन किया गया। इस विद्यालय को 95.60 फीसद अंक मिला है।


इस आधार पर तैयार की जानी है सक्सेस स्टोरी

– विद्यालय का नाम एवं पता।

– 2016 के पूर्व एवं बाद में विद्यालय में क्या परिवर्तन हुआ।

– बाल संसद की क्या भूमिका रही।

– शिक्षकों-विद्यालय प्रबंध समिति, माता समिति, पंचायत प्रतिनिधि की भूमिका।

– नामांकन, ठहराव में बढ़ोतरी, खासकर बालिका वर्ग।

– मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि, अभिभावक आदि का वक्तव्य।

– पेयजल श्रोत, बालक-बालिका हेतु शौचालय, दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय, हाथ धुलाई की व्यवस्था, जल जांच का प्रमाणपत्र।

– प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र, वर्षा जल संरक्षण, बागवानी, बाल संसद, प्रार्थना, विद्यालय का मुख्य द्वार, बच्चों की अन्य गतिविधियों की तस्वीर।

By Jagran

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adminMarch 20, 2018


स्टूडेंट्स और टीचर्स के बीच में गहरी बांडिंग होती है। यही वजह है कि जो टीचर्स स्टूडेंट्स को समझाते हैं, उन्हें अच्छे से समझ में आता है। लेकिन कई बार स्टडी के दौरान साइंस और मैथ्स से जुड़े ऐसे नीरस टॉपिक आ जाते हैं। जिन्हें पढ़ने या समझने में स्टूडेंट्स का मन नहीं लगता। ऐसे में जरूरी है कि स्टूडेंट्स को किसी टॉपिक पर ठहराने के लिए अनोखे ढंग से समझाया जाए। इसमें स्टूडेंट्स को पढ़ाने से पहले किसी साइंटिस्ट की सक्सेस स्टोरी सुनाई जा सकती है। यह बात दिल्ली से आए सुधीर मिश्रा ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के जूलॉजी डिपार्टमेंट में आयोजित टीचर्स वर्कशॉप में कही।

Teachers ‌‌Workshop

एक्सपर्ट ने कहा कि क्लास को थ्योरी की जगह प्रायोगिक से शुरू किया जा सकता है।

टॉपिक ऐसे पढ़ाएं, स्टूडेंट्स के माइंड से कनेक्ट करे: उन्होंने बताया कि टॉपिक को थ्योरी से पढ़ाने की बजाए ऑडियो विजुअल प्रजेंटेशन से पढ़ाया जा सकता है। विजुअल मीडियम का सीधा कनेक्शन स्टूडेंट्स के माइंड से होता है।

आज होगा साइंटिफिक डेमोंस्ट्रेशन: कार्यक्रम के दूसरे दिन टेक्निकल सेशन होंगे। इसमें सुबह 10.30 बजे से स्टूडेंट्स और टीचर्स का ग्रुप डेमोंस्ट्रेशन देगा। इसमें टीचर्स को रोचकता से मैथ्स और साइंस पढ़ाने के तरीके बताए जाएंगे।

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adminMarch 20, 2018


अजय देवगन की फिल्म रेड ने रिलीज के 4 दिनों में ही बंपर कमाई करते हुए 47 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है. पद्मावत, पैडमैन और सोनू के टीटू की स्वीटी के बाद रेड की कमाई से बॉक्स ऑफिस एक बार फिर गुलजार नजर आ रहा है. रेड की सक्सेस ने साबित कर दिया कि अगर कंटेंट में दम है तो बिना शोर शराबे के अच्छा कलेक्शन निकाला जा सकता है. आइए नजर डालते हैं वीकेंड में रेड की रिकॉर्डतोड़ सक्सेस की वजहों पर…

1. रियलिस्टिक फिल्म, मनोरंजन कंटेट हुआ हिट

साल 2018 में बहुत सारी फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन इनमें सबसे बड़ी हि‍ट बनी पद्मावत, पैडमैन, सोनू के टीटू की स्वीटी और रेड. इन फिल्मों ने ही बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई की है. अभी भी पद्मावत और सोनू के टीटू की स्वीटी की कमाई जारी है. बॉक्स ऑफिस सक्सेस के अलावा एक और खास बात है जो तीन फिल्मों में नजर आती है- वह है फिल्म की स्टोरी लाइन जो कि सच्ची घटनाओं पर आधारित है. सोनू के टीटू की स्वीटी का कलेक्शन के पीछे एंटरटेनिंग कंटेंट होना है.

बॉक्स ऑफिस पर दूसरी सबसे बड़ी ओपनर बनी RAID, कमाई 40 करोड़ के पार

पद्मावत: पीरियड वॉर ड्रामा, पैडमैन-सेाशल ड्रामा और रेड-एक क्राइम थ्रि‍लर बेस्ड फिल्में हैं. तीनों फिल्मों की कहानी वास्तिवक घटनाओं पर आधारित है. इस जॉनर की फिल्मों के लिए दर्शकों में बढ़ रहा क्रेज ही शायद फिल्ममेकर्स को नई कहानियों की बजाए असल जिंदगी में घटी घटनाओं पर अधारित फिल्में बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.

2. विदेशी ऑडियंस के लिए नहीं है रेड फिर भी कमाई 

रिलीज के पहले वीकेंड करीब 47 करोड़ रुपये की कमाई करने वाली फिल्म रेड आगे भी बढ़िया कलेक्शन करने वाली है. सोमवार को फिल्म 6.26 करोड़ रुपये की कमाई की है. इस तरह से फिल्म की चार दिन में कुल कमाई 47.27 करोड़ रुपये हो चुकी है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श का मानना है कि फिल्म आने वाले वीकडेज में भी कमाई के अच्छे आंकड़े दर्ज करवाएगी.

अजय देवगन के 7 साल के बेटे ने फिल्म RAID का दिया ये मजेदार रिव्यू

ट्रेड  एक्सपर्ट्स ने अजय देवगन की फिल्म को विदेशों में मिल रहे रिस्पॉन्स पर हैरानी भी जताई है. तरण ने ट्वीट कि‍या कि रेड फिल्म ओवरसीज फ्रेंडली जॉनर फिल्म नहीं है. बावजूद फिल्म का विदेशों में कलेक्शन बढ़िया है. विदेशी बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने पहले वीकेंड में 11.74 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है.इस तरह वीकेंड में फिल्म का कुल कलेक्शन 59 करोड़ से पार हो चुका है.

3. मसाला फिल्मों से दर्शकों को चाहिए ब्रेक

रेड से पहले रिलीज हुई फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ बॉक्स ऑफिस पर पहले ही क्र‍िटिक्स को अपने कलेक्शन से चौंका चुकी है.  100 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली साल की दूसरी फिल्म में रोमांटिक कॉमेडी के तड़के ने दर्शकों को खूब एंटरटेन किया. फिल्म की कमाई जारी है. रेड की सक्सेस की एक वजह ये भी हो सकती है कि दर्शक मसाला डोज के बाद कुछ अलग तरह की एंटरटेनमेंट तलाश रहे थे. शायद यही वजह है कि नॉन मसाला फिल्म होने के बावजूद रेड को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला.

4. फेवरेट स्टारकास्ट

बॉलीवुड फैन्स के बीच उनके फेवरेट स्टार्स का स्टारडम हावी रहता ही है. कई बार स्टार के नाम पर ही सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ती है. अजय देवगन की बात करें तो रेड के फिल्म मेकर्स ने अजय की पिछली हिट को ध्यान में रखते हुए ही इस बार लीड पेयर का चुनाव किया. बादशाहो फिल्म में इलियाना और अजय की जोड़ी को खूब पसंद किया गया था. यहां तक कि मीडिया में अजय की लीड एक्ट्रेस को लेकर फैन की पंसद पूछी गई. दर्शकों ने करीना, काजोल की बजाय इलियाना को ही अजय की एक्ट्रेस के रोल में देखना चाहा. इसी वजह से रेड में एक बार फिर दोनों की केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया.

बताते चलें कि रेड में मारधाड़ या उस तरह का मसाला नहीं है आमतौर पर जो बॉलीवुड फिल्मों में दिखाई देता है. अजय की ये फिल्म अपने कंटेंट के दम पर इस साल बॉक्स ऑफिस के कई सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है.

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adminMarch 20, 2018


संकलन: राधा नाचीज

अनंतपुर में राजा रामदत्त का राज था। वह विद्वानों, कवियों और कलाकारों का बड़ा सम्मान करते थे। अनंतपुर में ही एक शिल्पी भी रहता था। नाम था गंगादास। वह राज्य की सीमा के पास वाली पहाड़ी पर पत्थर काटकर मूर्तियां बनाया करता था। उसकी बनाई मूर्तियां बड़ी सुंदर होती थीं। एक दिन राजा रामदत्त शिकार के लिए जंगल गए। वहां एक मृग के पीछे उन्होंने अपना घोड़ा दौड़ाया।

मृग डरकर पहाड़ी की ओर भागा। रामदत्त उसके पीछे-पीछे चलते गए। पहाड़ी पर गंगादास को मूर्तियां बनाते देख रामदत्त ठिठक गए। इतनी सुंदर मूर्तियां उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। रामदत्त ने गंगादास से कहा, ‘मैं चाहता हूं कि तुम मेरी भी एक सुंदर मूर्ति बनाओ।’ गंगादास ने सिर झुकाते हुए कहा, ‘महाराज, मैं आपकी मूर्ति अवश्य बनाऊंगा।’ गंगादास ने राजा की मूर्ति बनानी शुरू की। कई दिन बीत गए, परंतु मूर्ति तैयार नहीं हुई। गंगादास मूर्तियां बनाता और तोड़ देता। जैसी मूर्ति की कल्पना गंगादास ने की थी, वैसी बन ही नहीं पा रही थी।

निराश होकर गंगादास टूटी मूर्तियों के समीप बैठ गया। अचानक उसकी नजर एक चींटी पर पड़ी, जो गेहूं के एक दाने को दीवार के उस पार ले जाना चाहती थी। इस कोशिश में वह बार-बार गिर रही थी फिर भी कोशिश कर रही थी। आखिरकार चींटी की कोशिशें रंग लाईं और वह गेहूं का दाना लेकर दीवार के उस पार चली गई।

यह दृश्य देख गंगादास ने सोचा, जब यह छोटी-सी चींटी निरंतर प्रयास से सफलता पा सकती है, तो मैं क्यों नहीं? वह फिर से मूर्ति बनाने के काम में जुट गया। इस बार गंगादास सफल रहा। राजा रामदत्त ने जब मूर्ति को देखा तो देखते रह गए। उन्हें प्रशंसा के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे। रामदत्त ने गंगादास को बहुमूल्य वस्त्र, आभूषण और हजारों स्वर्ण मुद्राएं इनाम में दी और गंगादास को राज शिल्पी घोषित कर दिया।

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adminMarch 20, 2018


सिटी रिपोर्टर | रायपुर

आंत्रप्रेन्योर आर्गनाइजेशन (ईओ) रायपुर चैप्टर की ओर से रिंग रोड स्थित एक शो रूम में टॉक शो रखा गया। कार्यक्रम में बतौर चीफ स्पीकर फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के प्रेसीडेंट जॉन के पॉल शामिल हुए। उन्होंने शहर के नामी बिजनेसमैन और यंग आंत्रप्रेन्योर्स से अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर की और बिजनेस में ग्रोथ करने के टिप्स दिए। जॉन के पाल ने कहा कि पुश्तैनी बिजनेस को और बड़ा करना चाहते हैं तो नए जमाने के साथ नई सोच, इनोवेशन होना जरूरी है। मैंने इंजीनियरिंग के बाद फैमिली बिजनेस जॉइन किया। लेकिन मैंने अलग करने की कोशिश की। एक व्हीकल कंपनी की डीलरशिप लेकर सबसे अलग करने के लिए खुद का ट्रेनिंग स्कूल, बॉडी बिल्डिंग स्कूल व पेंटर स्कूल शुरू किया। इन कामों के लिए दूसरे डीलर को पैसे देने के बजाय मैंने अपना ही सेंटर डेवलप कर लिया। मेरे लिए सक्सेस का सबसे बड़ा मंत्र है जीतने और नया करने की सोच रखना। सक्सेस वही होता है जो कोशिश करता है। फेल वो होता है जो डर से कुछ नया नहीं करता। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल ईओ के मेंबर्स और अन्य लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। इस मौके पर बैंड परफार्मेंस भी हुई।

ईओ रायपुर चैप्टर के प्रशांत धारीवाल ने बताया कि ईओ से दुनियाभर के 53 से ज्यादा देशों के 12 हजार से ज्यादा नामी बिजनेसमैन जुड़े हुए हैं। रायपुर चैप्टर में 42 मेंबर्स हैं। कार्यक्रम में अमित अग्रवाल, विशाल सिंह, हिमांशु अग्रवाल, रोहितांश खंडूजा व अन्य मौजूद रहे।

ईओ रायपुर चैप्टर ने रखा टॉक शो

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adminMarch 19, 2018


FRISCO, Texas — On Saturday, the Dallas Cowboys cut cornerback Orlando Scandrick. On Monday, the veteran signed with the Washington Redskins on a two-year deal that is worth a max of $10 million.

That Scandrick opted to remain in the NFC East should not surprise anybody. His whole career has been about proving people wrong, so the fact that he will see the Cowboys twice a year could have played some sort of part in his decision to sign with Washington.

Scandrick does not leave the Cowboys with anger. More than just about any player on the roster, he understands the business. He thanked the Cowboys in a tweet Sunday.

The Cowboys can only hope to find another fifth-round pick to last as long as Scandrick and produce as well as he produced from 2008-17. Since taking Scandrick with the 143rd pick out of Boise State in 2008, the Cowboys have made eight selections in the fifth round: DeAngelo Smith (2009), Michael Hamlin (2009), David Buehler (2009), Josh Thomas (2011), Danny Coale (2012), Joseph Randle (2013), Devin Street (2014) and Ryan Russell (2015).

See any keepers there? Randle had the chance to become the starting running back after DeMarco Murray’s departure in free agency in 2015 but saw his life fall apart. Street has bounced around a number of teams. Russell has been a backup for the Tampa Bay Buccaneers.

In 2008, the Cowboys selected Mike Jenkins in the first round with the No. 25 overall pick. He made one Pro Bowl in his time with the team, but Scandrick outplayed him almost from the start.

He came to the Cowboys with a massive chip on his shoulder and played that way for 10 years. He developed into one of the league’s better slot players earning a $27 million extension in 2011 despite not starting more than four games in a season. In 2013, he became a starter. He never had more than two picks in a season but he played a vital role on defense. He had an excellent ability to time his blitzes off the slot and had 11.5 sacks. Yes, the Cowboys would have liked more interceptions, more plays on the ball.

He missed the 2015 season with torn anterior cruciate and medial collateral ligaments. He missed four games in 2016 because of a hamstring injury. He missed one game last year with a broken hand and the final four games with two transverse process fractures in his back.

The Cowboys opted to move on to younger secondary players in Chidobe Awuzie, Jourdan Lewis and Xavier Woods. This offseason they are looking at moving Byron Jones back to cornerback.

By late in the season, Scandrick knew his time with the Cowboys was coming to an end.

The end came Saturday. A new beginning came Monday.

The Cowboys know what to expect from Scandrick when they see him in a Washington uniform next season.

It’s what they loved about him for 10 years.

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adminMarch 19, 2018



It saddens me to see shops owned by black people shutting down every day.

Small businesses play a key role in creating jobs; they also contribute in growing the economy of our country. But, at the rate at which these businesses are closing, I feel we are letting ourselves down.

As much as most people would love to start their own businesses, it is important that they start by researching their target market before opening for business.

In many communities, there’s a trend of renting out these businesses to foreign nationals. This is as a result of laziness and not being fully prepared to face head-on the challenges that come with running a business. What is more depressing is noticing how the foreign nationals turn these businesses into success stories.

Black business people must stop neglecting their businesses.

Meshack Mathe

Mtititi village

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adminMarch 19, 2018


The decline in cancer of the intestines – colorectal cancer – is one of the major success stories of the past 30 years in Europe say researchers, as they predict that in 2018 death rates from the disease will continue to fall by around seven per cent compared to 2012.

In a study published in the leading cancer journal Annals of Oncology [1] today (Monday), researchers predict that death rates in the European Union (EU) for most cancers will continue to fall this year, compared to 2012. The exceptions are cancers of the pancreas and lung in women, which will continue to rise.

Carlo La Vecchia (MD), Professor at the Faculty of Medicine, University of Milan (Italy), who led the research, says: “Colorectal cancer is the most common cause of cancer death among non-smokers in both men and women. The fall in mortality that we are predicting for 2018, has been one of the major success stories in clinical oncology. This improvement in death rates in Europe comes in the absence of a single major breakthrough and is due to improved diagnosis and management of the disease.”

In their predictions for cancer deaths in the EU for 2018, Prof La Vecchia and his colleagues from Italy, Switzerland and the USA predict that colorectal cancer will account for the second highest number of deaths with 177,400 (98,000 in men, 79,400 in women) dying from the disease. The numbers of deaths have risen since 2012 due to the growing population of elderly people; however, compared with 2012, the age standardised rates [2] will fall by 6.7% in men to 15.8 per 100,000 of the population and 7.5% in women to 9.2 per 100,000.

The researchers looked at cancer death rates in the EU 28 Member States [3] as a whole and also in the six largest countries – France, Germany, Italy, Poland, Spain and the UK – for all cancers, and, individually, for stomach, intestines, pancreas, lung, breast, uterus (including cervix), ovary, prostate, bladder and leukaemias for men and women [4]. This is the eighth consecutive year the researchers have published these predictions. Prof La Vecchia and his colleagues had collected data on deaths from the World Health Organization from 1970 to 2012.

Prof La Vecchia says: “In the EU, deaths from colorectal cancer have been declining since 1993 in men, and over the whole period since 1970 in women. Factors that increase the risk of colorectal cancer include tobacco, alcohol, obesity, diabetes, a sedentary lifestyle and an unhealthy diet. However, in women the use of oral contraceptives and hormone replacement therapy may partly explain their decreased risk. In both men and women, the use of aspirin, mainly taken to prevent heart attacks and strokes, and effective screening are likely to have contributed to a decrease in the incidence of the disease. The availability of colonoscopy for investigating bleeding and other early symptoms has improved early diagnosis across Europe.”

The researchers predict that the number of people to die from any cancer in 2018 will be nearly 1.4 million, up from 1.3 million in 2012. However, the death rates have fallen over this period by 10.3% in men and 5% in women, giving age standardised death rates of 130 per 100,000 men and 84 per 100,000 women in 2018.

They say that in 2018 alone, about 392,300 cancer deaths will be avoided compared to the highest rates in the 1980s – 275,000 in men and 117,000 in women. When they looked at the difference between the peak rate in 1988 and 2018, they found that the continued decline in cancer deaths over these 31 years, meant that nearly five million deaths from the disease had been avoided: 3.3 million in men and 1.6 million in women.

The highest predicted death rates in the EU are for lung cancer in both men and women: 32 per 100,000 men and 15 per 100,000 women. However, since 2012 there has been a 13% fall in these death rates in men, but a 6% rise in women. The researchers predict that 183,100 men and 94,500 women will die from the disease this year, which is about 20% of all deaths from cancer.

Predicted death rates from pancreatic cancer are also continuing to rise in women, whereas they have stabilised in men. In 2018, there will be 44,400 deaths among women – a rise of 2.8% – and 44,500 deaths in men (no percentage change), giving a death rate of 8 per 100,000 men and 5.6 per 100,000 women.

“in 2018, deaths from pancreatic cancer will be close to 90,000,” says Prof La Vecchia. “This is close to the figure for breast cancer, where there will be 92,000 deaths, and lower only to lung and colorectal cancers for both sexes.” Smoking is a known risk factor for pancreatic cancer, and overweight, obesity and diabetes are also thought to play a role.

Co-author, Fabio Levi (MD), Emeritus Professor at the Faculty of Biology and Medicine, University of Lausanne, (Switzerland), said: “In women, the overall pattern is characterised by continuous improvement in breast cancer due to better management and screening, and in ovarian cancer due to the use of oral contraceptives and better treatment, but an increase in the tobacco-related lung cancer epidemic.”

Editor-in-chief of Annals of Oncology, Professor Fabrice André, Professor in the Department of Medical Oncology, Institut Gustave Roussy, Villejuif, France, commented: “While this study suggests that improving cancer detection and quality of care translates into better outcome, it also reminds everyone that 1.4 million patients in Europe will die because of cancer in 2018 and that research efforts need to be amplified.”



[1] “European cancer mortality predictions for the year 2018 with focus on colorectal cancer”, by M. Malvezzi et al. Annals of Oncology. doi:10.1093/annonc/mdy033

[2] Age-standardised rates per 100,000 of the population reflect the annual probability of dying.

[3] The EU now has 28 member states, with Croatia joining in 2013.

[4] The paper contains individual tables of cancer death rates for each of the six countries.

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adminMarch 18, 2018


कभी -कभी कचरे के ढेर से भी कुछ लोगों को उनके काम की चीज मिल जाती है। सोशल मीडिया पर कुत्ते बिल्ल्यिों के फनी वीडियो देखने और वॉट्सएप का नोटीफिकेशन बार बार देखने या निराशा में डूबे रहने से अच्छा है कि आप कुछ प्रेरक कहानियां पढ़ें शायद अपने कोई नया नजरिया मिले, आपको कोई आशा की किरण दिखे। ये प्रेरक कहानियां आपको वर्तमान की मुसीबत से निकाल सकती हैं और आपके चेहरे पर मुस्कान बिखेर सकते हैं-

एक बार की बात है। एक आदमी अपने खच्चर के साथ कहीं जा रहा था कि अचानक उसका खच्चर रास्ते में मौजूद एक गड्ढे में गिर गया। चूकिं वहां उसकी मदद के लिए कोई नहीं था फिर भी उसने उसे बाहर निकालने की कोशिश की पर वह खच्चर बाहर नहीं निकल सका। इसके अंत में उसने सोचा कि खच्चर अब तो छटपटा-छटपटा का मर जाएगा। लेकिन इसे छोड़कर जाने से अच्छा है कि इसके ऊपर मिट्टी डालकर दफना देना चाहिए।

आदमी धीरे-धीरे खच्चर के ऊपर गढ्ढे में मिट्टी डालने लगा। लेकिन जैसे खच्चर के ऊपर इकट्ठी होती वह अपना शरीर हिला देता। ऐसा करते करते ऐसा समय आया कि गड्ढा आधे से ज्यादा भर गया और खच्चर मिट्टी के ऊपर ही बना रहा। इस प्रकार खच्चर के मालिक के थोड़ी देर के और प्रयास से देखते ही देखते खच्चर सकुशल गड्ढे से बाहर निकल आया।

कहानी का सार- आप अपना कर्तव्य मानकर प्रयास करते रहिए हो सकता है आगे परिस्थिति बदल जाए।

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