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Stories Archives - Sunnywebmoney.com

SunnyJune 21, 2018
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सोन से इतनी तारीफ पाने वाले रितेश अग्रवाल शायद आज इस काबिल न होते अगर बचपन में रिश्तेदारों के यहां उनके हाथ टीवी रिमोट लग जाता। यह बात आपको भले ही मजाक लग रही हो लेकिन सच है। 2015 में रितेश अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ओयो रूम्स की प्रेरणा के पीछे टीवी रिमोट एक कारण है।

ओयो रूम्स के सीईओ रितेश अग्रवाल। (फोटो सोर्स- फेसबुक)

जापान के सबसे रईस लोगों में से एक सॉफ्टबैंक के मासायोशी सोन से तारीफ और 93 बिलियन डॉलर विजन फंड के माध्यम से निवेश पाकर ओयो रूम्स के सीईओ रितेश अग्रवाल सुर्खियों में हैं। रितेश अग्रवाल महज 23 वर्ष के हैं और इस उम्र में वह दुनिया को अपना मनवा चुके हैं।पड़ोसी मुल्क चीन में ओयो ने सेवाएं शुरू कर दी हैं। टोक्यो मुख्यालय में स्ट्रैटजिक होल्डिंग कंपनी की 38वीं सालाना आम बैठक में मासायोशी सोन ने रितेश अग्रवाल की तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोन ने रितेश के लिए कहा, ”होटल बिजनस में यह बड़ा प्लेयर है। यह करीब एक लाख कमरों का मालिक है। यह बहुत तेजी से बढ़ रहा है। मुझे लगता है कि हर महीने हिसाब से कमरों की संख्या या नेट ग्रोथ 10,000 से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ने जा रही है। यह इंटरनेट सर्विस का यूज करने वाली नेक्स्ट जनरेशन होटल चेन है।”

सोन से इतनी तारीफ पाने वाले रितेश अग्रवाल शायद आज इस काबिल न होते अगर बचपन में रिश्तेदारों के यहां उनके हाथ टीवी रिमोट लग जाता। यह बात आपको भले ही मजाक लग रही हो लेकिन सच है। 2015 में रितेश अग्रवाल ने टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि ओयो रूम्स की प्रेरणा के पीछे टीवी रिमोट एक कारण है। रितेश ने बताया था कि बचपन में जब वह रिश्तेदारों के यहां रहते थे तो टीवी रिमोट का कंट्रोल उनके हाथ में नहीं था। वह अपने मन का चैनल नहीं देख पाते थे। रिश्तेदार डेली सोप देखना चाहते थे और वह कार्टून नेटवर्क देखना चाहते थे। टीवी के रिमोट पर कंट्रोल रखने की इच्छा के कारण वह ओयो रूम्स की शुरुआत करने के लिए प्रेरित हुए।

रितेश अग्रवाल ने बताया था कि OYO मतलब होता है ‘OnYour Own’। ऑन योर ओन यानी खुद से, जब आप किसी चीज पर नियंत्रण रख सकें। मजे की बात यह रही कि जब रितेश की कंपनी ग्रोथ करने लगी तो वह उसमें एक मात्र कॉलेज ड्रॉपआउट थे। उस वक्त आईआईएम के 10-12 लोगों और आईआईटी, हार्वर्ड बिजनस स्कूल के करीब 200 लोगों की टीम उनके नेतृत्व में काम कर रही थी। इंटरव्यू में रितेश ने कहा था, ”मैंने स्मार्ट और हाई क्वॉलिटी वाले ड्रॉपआउट्स नहीं देखे हैं। उम्मीद है, अगले कुछ वर्षों में हम बहुत हाईक्वॉलिटी वाले ड्रॉपआउट्स देखेंगे। जब मैं कॉलेज की चर्चाओं में जाता हूं, मैं छात्रों को ड्रॉपआउट के लिए प्रोत्साहित करता हूं।”

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SunnyJune 21, 2018
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जिस उम्र में लड़के अपना लक्ष्य तय नहीं कर पाते उस उम्र में इस शख्स ने कंपनी शुरू कर दी। स्कूल तक की पढ़ाई की लेकिन कॉलेज ड्रॉपआउट कर दिया। सिम बेचकर काम चलाया। 22 की उम्र तब हुई जब अरबपति बन गया। किराये पर बजट होटल रूम्स उपलब्ध कराने में मशहूर हो चुके 'ओयो रूम्स' के सीईओ रितेश अग्रवाल की सफलता की कहानी काफी दिलचस्प तो है ही, प्रेरक भी है।

जिस उम्र में लड़के अपना लक्ष्य तय नहीं कर पाते उस उम्र में इस शख्स ने कंपनी शुरू कर दी। स्कूल तक की पढ़ाई की लेकिन कॉलेज ड्रॉपआउट कर दिया। सिम बेचकर काम चलाया। 22 की उम्र तब हुई जब अरबपति बन गया। किराये पर बजट होटल रूम्स उपलब्ध कराने में मशहूर हो चुके ‘ओयो रूम्स’ के सीईओ रितेश अग्रवाल की सफलता की कहानी काफी दिलचस्प तो है ही, प्रेरक भी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जापान के सबसे रईसों में से एक सॉफ्टबैंक के मासायोशी सोन ओयो रूम्स के साथ पार्टनरशिप करने की सोच रहे हैं। ओयो रूम्स ने विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में अपनी सेवा शुरू कर दी है। हाल ही में सोन ने टोक्यो स्थित अपनी कंपनी के मुख्यालय में आयोजित 38वीं आम बैठक में 23 वर्षीय रितेश अग्रवाल की दिल खोलकर तारीफ की। सोन ने कहा, ”मैं आप सभी को इस कंपनी के बारे में वाकई बताना चाहूंगा। इसका संस्थापक आज 23 वर्ष का है। जब वह 19 वर्ष का था तब उसने कंपनी शुरू की थी। महज चार वर्षों में कंपनी तेजी बढ़ रही है।”

रितेश अग्रवाल व्यवसाय वाले परिवार से ही हैं और वह दक्षिण ओडिशा एक छोटे से कस्बे बिस्सनकटक, जो कि एक नक्सल प्रभावित इलाका है, वहां से आते हैं। कॉलेज की पढाई छोड़कर वह एक लाख डॉलर की पीटर थिएल फेलोशिप पाने के पात्र बने। पीटर थिएल फेलोशिप पूर्व फेसबुक निवेशक और पेपल के सह-संस्थापक पीटर थिएल के नाम पर उन लोगों को दी जाती है जो 20 साल के कम उम्र के होते हैं और जो कुछ नया शुरू करने के लिए दो साल के लिए कॉलेज की पढ़ाई छोड़ देते हैं। यह फेलोशिप पाने से पहले 18 वर्ष की उम्र में रितेश अग्रवाल ने हॉस्पिटेलिटी की सेवाएं देने वाली अमेरिकी कंपनी AirBnB की तर्ज पर Oravel Stays की स्थापना की थी।

नए व्यवसाइयों को मॉनीटरिंग की सेवा देने वाले VentureNursery का साथ पाकर रितेश मुंबई आए और तीन महीने के कार्यक्रम के बाद 30 लाख रुपये का मूलधन जुटा लिया। ओरावेल चलाते समय रितेश सौ से ज्यादा बेड और ब्रेकफास्ट रूम्स में ठहरे और खामियों का पता लगाया। रितेश अग्रवाल ने एकबार टीओआई को बताया था कि ओरावेल के जरिये जिन पोर्ट्ल की वे सेवाएं दे रहे थे उन्हें स्टैंडर्डाइज्ड (मानकीकृत) नहीं किया गया था। उसी वक्त उन्हें थिएल फेलोशिप के लिए चुन लिया गया। इस फेलोशिप से मिली धनराशि का ज्यादातर हिस्सा कारोबार में लगाकर रितेश ने कहा था कि ”थिएल फेलोशिप की बड़ी सीख यह थी कि बड़ा सोचो और बड़ा असर पैदा करो बिना यह सोचे कि यह काम पहले किसी ने किया है।”

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SunnyJune 21, 2018

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मनोरंजन | Arbind Verma | Jun 21, 2018 11:09 AM IST


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यामी गौतम 'लस्ट स्टोरीज' की सक्सेस पार्टी में हॉट अंदाज में आईं नजर

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यामी गौतम ‘लस्ट स्टोरीज’ की सक्सेस पार्टी में हॉट अंदाज में आईं नजर

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यामी गौतम ‘लस्ट स्टोरीज’ की सक्सेस पार्टी में हॉट अंदाज में आईं नजर


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मनीषा कोईराला ने भी इस फिल्म में किया है काम

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मनीषा कोईराला ने भी इस फिल्म में किया है काम

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मनीषा कोईराला ने भी इस फिल्म में किया है काम


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इस फिल्म में कई बेड सीन्स हैं

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इस फिल्म में कई बेड सीन्स हैं

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इस फिल्म में कई बेड सीन्स हैं


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अंगद बेदी अपनी पत्नी नेहा धूपिया के साथ

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अंगद बेदी अपनी पत्नी नेहा धूपिया के साथ

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अंगद बेदी अपनी पत्नी नेहा धूपिया के साथ


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कियारा आडवाणी ने इस फिल्म में मास्टरबेशन का सीन किया है

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कियारा आडवाणी ने इस फिल्म में मास्टरबेशन का सीन किया है

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कियारा आडवाणी ने इस फिल्म में मास्टरबेशन का सीन किया है


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कियारा आडवाणी और करण जौहर

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कियारा आडवाणी और करण जौहर

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कियारा आडवाणी और करण जौहर


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सिकंदर खेर

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सिकंदर खेर

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सिकंदर खेर


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इस फिल्म में कई बेड सीन्स हैं

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इस फिल्म में कई बेड सीन्स हैं

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इस फिल्म में कई बेड सीन्स हैं


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सिद्धार्थ रॉय कपूर

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सिद्धार्थ रॉय कपूर

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सिद्धार्थ रॉय कपूर


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बोनी कपूर और अनुराग कश्यप

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बोनी कपूर और अनुराग कश्यप

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बोनी कपूर और अनुराग कश्यप

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SunnyJune 20, 2018
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आज के दौर में बालों को सुरक्षित और साफ रखने में शैंपू का अहम योगदान है। लेकिन आज से 30 साल पहले ऐसा नहीं था। उस समय तमिलनाडु के एक छोटे से कस्मे से निकले 22 साल के नौजवान ने सोच नहीं था कि उसका एक इरादा काफी आएगा। रंगनाथन…ये वहीं नाम है जो घर से 15 हजार रुपये लेकर निकला था। उसका इरादा खुद का बिजनेस खोलने का था। आज उनकी ऐसी किस्मत है कि सालाना टर्नओवर 1450 करोड़ से ऊपर का हो गया है।

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SunnyJune 20, 2018
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नई दिल्ली: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) ने एमबीबीएस एंट्रेस परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें बठिंडा कि रहने वाली रमनीक कौर ने दूसरा स्थान हासिल किया है. पढाई में शुरू से ही काफी सीरियस रहने वाली रमनीक को बचपन ने उनके माता पिता ने फैंसी ड्रेस कम्पटीशन में डॉक्टर का रोले प्ले करने को कहा था और आज रमनीक में असल ज़िन्दगी में डॉक्टर बनने के सपने को साकार कर दिया. रमनीक एनडीटीवी को बताती हैं कि लोग सोचते है कि बड़े शहरो में रहकर ही अच्छी कोचिंग और पढ़ाई हो सकती है परन्तु ऐसा नहीं है. उन्होंने बठिंडा में रहकर ही कोचिंग और तैयारी की और ये मुकाम हासिल किया. रमनीक हर दिन सुबह चार बजे उठ जाती थी और पढाई में जुट जाती थी. वो सेल्फ स्टडी के साथ-साथ कोचिंग भी जाती थी और बचे हुए वक़्त में मॉक टेस्ट देती थी. रमनीक बताती हैं कि जो छात्र अगर किसी वजह से बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग नहीं कर सकते वह तब भी स्कॉलरशिप के जरिये उस कोचिंग इंस्टीट्यूट का मटेरियल फ्री में ले सकते हैं जिसके उनको काफी मदद मिल सकती है.

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रमनीक मानती है की चाहे वो AIIMS  कि परीक्षा हो या NEET की, छात्रों को NCERT की किताबों को बेहद ध्यान से पढ़ना चाहिए और अपने कॉन्सेप्ट्स क्लियर रखने चाहिए. साथ ही साथ वह आज तक स्मार्ट फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करती है और कहती हैं कि उन्हें समझ नहीं आता की लोग सोशल मीडिया क्यों इस्तेमाल करते हैं. उनका मानना है कि अगर आपको अपना लक्ष्य हासिल करना है तो आपको 2 साल तक सिर्फ पढाई पर ध्यान देना चाहिए और अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए. रमनीक से एकदम विपरीत कहानी है महक अरोरा कि जिन्होंने मस्ती करते हुए पढाई की और AIIMS जैसी कठिन परीक्षा में तीसरा रैंक हासिल किया. वह बताती है कि उन्होंने हमेशा बिना परेशान हुए पढाई की और इस पूरी तैयारी में कोई फिक्स टाईम टेबल नहीं सेट किया. महक को डॉक्टर बनने की प्रेरणा उनके पिता से मिली जो चाहते थे कि उनकी बेटी डॉक्टर बने और आज उन्होंने अपने पिता का सपना पूरा कर दिया.
 

रमनीक (फाइल फोटो)

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महक कहती हैं कि अगर आपको AIIMS में अच्छी रैंक हासिल करनी है, तो फिजिक्स पर ज्यादा जोर देना होगा क्यूंकि फिजिक्स में काफी मुश्किल होती है, जिसके लिए काफी प्रैक्टिस की जरुरत होती है. केमिस्ट्री कि लिए उनका मानना है ज्यादातर छात्र आसान चैप्टर्स को छोड़ देते हैं, जो की उन्हें नहीं करना चाहिए क्यूंकि AIIMS के एग्जाम में हम कोई भी टॉपिक नहीं छोड़ सकते अगर हमें अच्छी रैंक हासिल करनी चाहिए. इस बार AIIMS की परीक्षा में टॉप थ्री रैंक्स पर लड़कियों ने कब्ज़ा किया है.
 

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महक (फाइल फोटो)

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वहीं, चौथे स्थान पर बठिंडा की रहने वाले मनराज सरां हैं, जिन्होंने भी 100 पर्सेंटाइल हासिल किया है. इस साल 100 पर्सेंटाइल के साथ चार कैंडिडेट्स ने टॉप किया है जिसमे से मनराज सरां भी हैं. मनराज सेल्फ स्टडी पर यकीन रखते हैं और उन्होंने हर दिन करीब 10 घंटे सेल्फ स्टडी की और ये मुकाम हासिल किया . मनराज ने किसी एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से तैयारी नहीं की बल्कि अलग-अलग एक्सपर्ट के पास ट्यूशन लिया और अपनी गलतियों को हमेशा सुधारा और एक जगह लिखा ताकि वह देख सके की उनसे क्या गलती होती है.
 

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मनराज (फाइल फोटो)

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मनराज भी महक की तरह फिजिक्स पर जोर देने को कहते हैं और उनका मानना है की छात्रों को आईआईटी जेईई  की लेवल की फिजिक्स तैयार करनी चाहिए ताकि एग्जाम में टाइम न बर्बाद हो क्यूंकि फिजिक्स के सवाल कभी कभी आउट ऑफ़ कोर्स भी आते हैं. मनराज का कहना है कि उन्हें डॉक्टर बनने का मोटिवेशन सबसे ज्यादा अपने  माता-पिता से मिला जो की खुद डॉक्टर्स हैं. टेस्ट सीरीज को मनराज बेहद अहम् बताते हैं और कहते है की टेस्ट सीरीज का फ़ायदा तब है जब आप हर बार खुद में सुधार करे . मनराज ने खुद को सोशल मीडिया  से भी दूर रखा ताकि उनका सारा ध्यान पढाई पर रहे और ये ही अंत में उनकी सफलता का कारण भी बना.

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SunnyJune 19, 2018
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एम्स 2018 के चारों टॉपर दे रहे हैं बड़े काम के टिप्स, टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। बस कुछ बातें ध्यान रखें और आपका एग्जाम क्लीयर हो जाएगा। एग्जाम में चारों स्टूडेंट्स ने 100 पर्सेंटाइल अंक हासिल किए, लेकिन बायोलॉजी में 100 पर्सेंटाइल स्कोर करने पर एलिजा को टॉपर घोषित किया गया।

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SunnyJune 19, 2018
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AIIMS 2018 की ऑल इंडिया टॉपर एलिजा ने खुद अपनी कामयाबी का राज खोला और बताया कि आखिर उन्होंने कैसे ये इतिहास रचा। पंजाब के संगरूर जिले के लहरागागा की एलिजा का ओवरऑल पर्सेंटाइल 100 प्रतिशत रहा।

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SunnyJune 18, 2018
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नई दिल्ली: पंजाब के दीपक गुप्ता ने अपने सपने को पूरा करने के लिए सिंगापुर में स्थापित करियर को छोड़ दिया और देश लौटकर डेयरी का अपना काम शुरू किया. स्वदेश लौटने के दो साल बाद वह हिमालयन क्रीमरी नाम की कंपनी बनाकर अपने सपने को मुकाम देने में सफल हो चुके हैं. गुप्ता ने कहा कि उन्हें स्थापित करियर छोड़ने का कोई अफसोस नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘अफसोस क्यों होना चाहिए ?’’
 

AIIMS Result 2018: MBBS एंट्रेंस एग्जाम के नतीजे जारी, ऐसे करें चेक

उन्होंने 20 एकड़ जमीन में डेयरी स्थापित की है जिसमें होल्सटीन फ्रीजिएन तथा जर्सी नस्ल की 350 गायें हैं.
गुप्ता ने कहा, ‘‘मेरा सपना था कि मैं उपभोक्ताओं को अनछुआ दूध उपलब्ध कराऊं. यह नया नहीं है बल्कि दुनिया भर में ‘फार्म टू टेबल’ डेयरी कारोबार के नाम से काफी प्रचलित है जिसे उपभोक्ता पसंद भी करते हैं.’’

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उन्होंने कहा कि उनकी डेयरी में दूध को हाथ से छुआ भी नहीं जाता और सीधे कोल्ड स्टोरेज में स्टोर किया जाता है. इसके बाद दूध को रेफ्रिजरेटेड ट्रकों के जरिये उपभोक्ताओं को सप्लाई किया जाता है. उन्होंने कहा कि गायों के चारे के लिए वह फार्म में जैविक पद्धति से उगे गेहूं और सब्जियों का इस्तेमाल करते हैं. गायों के वेस्ट का इस्तेमाल कर बायोगैस और उर्वरक भी तैयार किया जाता है.

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SunnyJune 18, 2018
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1min30

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पिछले कई महीनों से मेरे पिता काम नहीं कर रहे हैं। यों कहें कि वह अब काम कर भी नहीं सकते, क्योंकि मिल में काम करते हुए एक दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए हैं। वह हमारे चार सदस्यीय परिवार में इकलौते कमाने वाले शख्स थे। हमारे पूरे परिवार की जिंदगी बदल देने वाली उस दुर्घटना के बाद मेरा स्कूल छूट गया। मैं चाहकर भी अब स्कूल नहीं जा सकता था। परिवार का पेट पालने के लिए जरूरी था कि घर का कोई न कोई सदस्य काम करे।

मेरे परिवार में पिता के बाद मेरी मां ही इकलौती वयस्क सदस्य थीं। मेरी बहन तो मुझसे बहुत छोटी थी। वह केवल पांच साल की है। मेरी मां की इच्छा थी कि मैं भीख मांगना शुरू करूं, क्योंकि परिस्थितियों के हिसाब से यह सबसे आसान काम था। लेकिन मेरे अपंग पिता इस बात के लिए कभी राजी नहीं हुए कि उनका बेटा भीख मांगे। उनका साफ कहना था कि मैं भीख में मिले चावल खाने से पहले मरना पसंद करूंगा।


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SunnyJune 17, 2018
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं बोर्ड के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस परीक्षा में 1,31,493 बच्चों ने 90 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए हैं, जबकि 27,476 फीसदी बच्चों ने 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं. इसमें हर जिले और अलग अलग वर्ग के टॉपर शामिल हैं. इसमें लड़कियों का पास प्रतिशत 88.67 फीसदी रहा और 85.32 फीसदी लड़के पास हुए हैं. इस साल भले ही चार टॉपर्स रहे हैं, लेकिन कई ऐसे छात्र भी हैं, जिन्होंने टॉप ना करके भी सफलता की कहानी लिखी है.

वहीं जालंधर की रहने वाली खुशी गुप्ता परीक्षा से दो महीने पहले स्कूल की चौथी मंजिल से नीचे गिर गई थी, जिसकी वजह से उन्हें काफी चोट आई थी. उसके बाद वह परीक्षा के लिए भी स्ट्रेक्चर पर ही जाती थीं. अब उन्होंने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है और 73 फीसदी अंक हासिल किए हैं. उन्हें उस दौरान कई फ्रैक्चर और अन्य गंभीर चोट लगी थी. उन्हें परीक्षा में एक राइटर भी दिया गया था, जिसके माध्यम से उन्होंने एग्जाम दिया था.

CBSE: फिर आया 8 साल पुराना पैटर्न, 2 लाख फेल, 3 ने की खुदकुशी

देश के इन हजारों होनहारों में बुलंदशहर की तनिषा अग्रवाल का नाम भी शामिल है, जिन्होंने 98.4 फीसदी अंक हासिल किए हैं. बुलंदशहर जिले से पहला स्थान हासिल करने वाली तनिषा का कहना है, ‘मुझे ये उम्मीद नहीं थी कि मैं जिले में टॉप करुंगी, लेकिन वो शुरुआत से ही अच्छा प्रदर्शन करना चाहती थी. तनिषा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दे रही है. उनके पिता का कहना है कि तनिषा ने कड़ी मेहनत से पूरे परिवार का मान बढ़ाया है.’

CBSE 10वीं में प्रखर ने किया टॉप, कहा- EXAM का टेंशन नहीं लिया

गुरुग्राम के प्रखर मित्तल, बिजनौर की रिमझिम अग्रवाल, शामली की नंदिनी गर्ग और कोच्चि की श्रीलक्ष्मी ने पहला स्थान हासिल किया. वहीं दिव्यांग वर्ग में गुरुग्राम की अनुष्का पांडा ने 489 अंकों के साथ टॉप किया है. साथ ही गाजियाबाद की सान्या गांधी ने 489 अंक हासिल किए हैं. इस परीक्षा में 1624682 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 1408594 फीसदी परीक्षार्थी पास हुए हैं.

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