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SunnyJanuary 16, 2019
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1min20

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2019, 02:36 PM IST

बॉलीवुड डेस्क (आकाश खरे). आमतौर पर सेलेब्रिटीज की लैविश लाइफ स्टाइल देखकर हम यही सोचते हैं कि, वाह क्या लाइफ है। पर क्या हम कभी यह गौर करते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया होगा। दैनिक भास्कर मोबाइल ऐप एक ऐसी युवा एक्ट्रेस के संघर्ष के दिनों से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिसने आम मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर सिनेमा की चमकीली दुनिया में अपने लिए जगह बनाई। पढ़िए ‘दंगल’ में गीता फोगाट का किरदार निभा चुकीं एक्ट्रेस फातिमा सना शेख के संघर्ष के दिनों की तीन कहानियां।

हर शो मिलते थे 80 से 100 रुपए

  1. कदमों से ही नाप लिया शहर

    “जब मेरे पास काम नहीं था, तब पैसे बचाने के लिए मैंने एक तरीका अपनाया। घर से कहीं भी जाना होता तो हमेशा पैदल ही जाती थी। उस समय मैं थिएटर करती थी। मुझे हर शो के 80 से 100 रुपए तक मिल जाते थे। यह रकम मेरे लिए बहुत कीमती होती थी। मुझे मॉर्निंग का शो करना होता था। समय पर थिएटर पहुंचने के लिए मैं अलसुबह ही घर से निकल जाती। घर से थिएटर के बीच की 10 किमी की दूरी में रोज पैदल ही नापती। एक घंटे चलकर मैं थिएटर पहुंचती और अपना शो निपटाती। उसके बाद मुझे जो 80 रुपए मिलते, वे मेरे लिए लाखों से बढ़कर होते थे।”

  2. कतारों में घंटों धक्के खाए

    “शुरू में मेरी ख्वाहिश इतनी बड़ी नहीं थी। एक अदद रोल पाकर पहली सीढ़ी चढ़ना ही मेरा लक्ष्य था। जगह-जगह होने वाले एक्टिंग ऑडिशंस के लिए मैं दौड़ती-भागती थी। जगह-जगह से आए लोगों के साथ लंबी-लंबी लाइनों में खड़े रहकर धक्के खाती। अपनी बारी आने का घंटों इंतजार करती थी। इन लाइनों में खड़ी पसीने से लथपथ हूं या फिर सर्द हवाएं झेल रही हूं, आंखों में बस एक ही सपना था कि एक दिन रुपहले परदे पर दिखना है। ऐसे मैंने कई ऑडिशंस की खाक छानी है। बहुत दौड़ाया है सक्सेस ने, यह ऐसे ही नहीं मिली है पर अभी तो बहुत आगे जाना है।”

  3. दिल में एक्टिंग, हाथ में कैमरा

    “एक्टिंग तो मेरा पैशन था, पर पैशन फॉलो करने के लिए जेब में पैसे भी तो चाहिए होते हैं। अर्निंग के लिए मैंने फोटोग्राफी शुरू की। जब मेरे पास थिएटर या एक्टिंग का काम नहीं होता था तो लोगों की शादियों में जाकर उनके फोटो खींचती थी। थोड़ी बहुत कमाई इसी से हो जाती। बाकी के समय मैं अपने पहले प्यार एक्टिंग पर ही पूरा फोकस करती थी। वह वक्त मुझे आज भी याद है। दिल में अभिनय की लौ जली होती थी और काम क्या… हाथ में कैमरा थामकर लोगों की शादियों में फोटोग्राफी करना। सच है जिंदगी भी आपको क्या-क्या रंग दिखाती है।”

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SunnyJanuary 13, 2019
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1min110

खैरथल| कस्बे में स्थित इंजीनियर्स पाेइंट स्कूल में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपनी पाॅकेट मनी बचाकर 250 निर्धन विद्यार्थियाें काे जर्सियां बांटी। विद्यालय के निदेशक अाजाद चाैधरी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विद्यार्थियों ने अपने पाॅकेट मनी से बचाए गए रुपयों से जर्सियां खरीदकर भंडवाडा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 8वीं तक के 250 छात्र-छात्राअाें काे जर्सियां बांटी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी उमरैण जगदीश प्रसाद जाटव तथा अध्यक्षता प्रधानाचार्य मेहताब सिंह चाैधरी ने की। इस दौरान गिरीश त्यागी, भामाशाह जगदीश प्रसाद, एसएमसी अध्यक्ष रोहिताश कुमार, संजय कुमार सहित विद्यालय स्टाफ व अनेक ग्रामीण मौजूद रहे। व्यवस्था प्रधानाचार्य मेहताब सिंह चाैधरी एवं समस्त अध्यापकों ने संभाली।

रैणी: गांव भजेड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल मे अध्ययनरत सभी 341 बच्चों को पोषाक वितरण कार्यक्रम मुख्य अतिथि राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ विधायक जौहरी लाल मीणा के आतिथ्य मे हुआ कार्यक्रम की अध्यक्षता भजेड़ा सरपंच दीपा अग्रवाल ने की कार्यक्रम के स्कूल के बालक बालिकाओं को गर्म वस्त्र वितरण किये गये। कक्षा 1 से 12 के सभी 341 बालक बालिकाओं के लिए गांव भजेड़ा के भामाशाह शिवराम मीणा एईएन पीडब्लूडी की ओर से गर्म वस्त्र, मंगलराम मीणा मास्टर की ओर से जूते मोजे, सियाशरण जांगिड़ की ओर से टाई, बेल्ट व आई कार्ड दिये। ं कार्यक्रम मे खेल प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधायक जौहरी लाल मीणा, रैणी प्रधान अनिता ओमप्रकाश सैनी, एसीबीईओ अशोक शर्मा, प्रधानाचार्य फूलचंद यादव, दिलीप मीणा, रैणी ब्लाक अध्यक्ष विजय हलवाई, लखनलाल मीणा, शिवचरण शर्मा, पूरणसिंह मीणा आदि मौजूद रहे।

किशनगढ़बास: गांव मनोठडी के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में 136 बालिकाओं को स्कूल की शिक्षिका ने ही स्वेटर वितरित किए। प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने बताया कि विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका प्रियंका यादव ने 136 बालक-बालिकाओं को गर्म स्वेटर वितरित किए। इस अवसर पर गांव के गणमान्य लोग, विद्यालय स्टॉफ, देवीदत्त अटल सहित स्कूल स्टॉफ व बालिकाएं मौजूद थी।

रैणी. स्कूल में बच्चों को गर्म वस्त्र वितरित करते विधायक व अन्य।

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SunnyJanuary 11, 2019
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Air India ने निकाला घाटे से उबरने का रास्‍ता, फ्लाइट में भोजन पर ऐसे बचाएगी पैसा | Zee Business Hindi

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SunnyJanuary 10, 2019
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1min180

लखनऊ. बढ़ती महंगाई के इस दौर में पैसा कमाना जितना जरूरी है, बचत करना भी उतना ही जरूरी है। कहते हैं कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते, लेकिन आपको अपने जेब खर्च से ही सुनहरे भविष्य के लिए रकम बचानी पड़ेगी। आर्थिक जानकार कुल कमाई की कम से 30 फीसदी रकम बचाने की सलाह देते हैं। जरूरी है इच्छाशक्ति की। कम उम्र में इनवेस्टमेंट बेहतर रिजल्ट दिला सकता है। वैसे तो मार्केट में कई स्कीमें हैं, लेकिन आज हम आपको एसआईपी (सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान) के बारे में बता रहे हैं, जिससे आप बेहतर रिटर्न ले सकते हैं।

एसआईपी (सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान)- प्रूडेंड, लखनऊ के मैनेजर विकास गुप्ता बताते हैं कि अगर आपकी उम्र 25 वर्ष है और आप प्रति महीने पांच हजार रुपये निवेश करते हैं अगर यह राशित प्रस्तावक की 60 साल की उम्र पूरी होने तक जमा किया जाती है तो रिटायरमेंट तक यह राशि करीब दो करोड़ रुपये हो सकती है। इस दौरान कम से कम 10 फीसदी ब्याज मिलता है। यह सुविधा लगभग हर बैंकों में उपलब्ध है। इस स्कीम के तहत आप कभी भी अपना पूरा या आंशिक रकम निकाल सकते हैं। अगर आप चाहें तो प्रतिमाह 500 रुपये भी जमा कर सकते हैं। एक साल बाद कभी भी पूरा पैसा निकाल सकते हैं।

आपके लिये यह भी स्कीमें हैं फायदेमंद
भारत सरकार ने पोस्ट ऑफिस के जरिये कई स्कीमें निकाली हुई हैं। इनमें सेविंग्स अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट, टाइम डिपॉजिट स्कीम, मंथली इनकम स्कीम, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, एनएससी, किसान विकास पत्र और पीपीएफ शामिल हैं। अलग-अलग स्कीमों में ब्याज दर, परिपक्वता अवधि (मैच्योरिटी पीरियड) अलग-अलग होते हैं। किसी भी बैंक में आप न्यूनतम साल भर के लिए ही रिकरिंग डिपॉजिट कर सकते हैं, जो बाद में आपको ब्याज समेत एकमुश्त रकम मिलेगी।

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SunnyJanuary 8, 2019
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2min220

सेवा कर के साथ ही बचत योजनाओं पर भी असर
– फोटो : Getty

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जिंदगी में बचत की आदत हो, तो कई तरह की मुश्किलें आसान हो जाती हैं। लेकिन, नए जमाने में बचत के तौर-तरीके भी बदलते जा रहे हैं। उन तौर-तरीकों को भी जान लेना जरूरी है।

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महिलाओं ने समाज में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। आज हर क्षेत्र में महिलाएं उच्च स्थानों पर काबिज हैं और हमारे देश के सुनहरे भविष्य के निर्माण में योगदान दे रही हैं। परंतु छोटे शहरों और गांवों की अधिकांश महिलाएं घर की जिम्मेदारियां निभाने तक ही सीमित हैं। आप कह सकते हैं कि वे आर्थिक रूप से एक सीमा तक अपने पति पर निर्भर हैं, लेकिन सीमित पैसे में जिस तरह वे घर संभालती हैं, वह सराहनीय है। सबसे बड़ी बात यह है कि वे इन पैसों में से भी कुछ पैसे बचा लेती हैं, जो बुरे समय पर परिवार के काम आए। आज के दौर में यह बेहद जरूरी है कि महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, अनुशासित और स्वस्थ जीवनशैली जिएं। इसके लिए जरूरी है कि वे अपनी दिनचर्या में बचत की आदतों को शामिल करें।

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बचत की आदत डालें

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SunnyJanuary 6, 2019
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Publish Date:Sat, 05 Jan 2019 02:00 PM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। नया साल आ गया है। इस वर्ष में आप कई नए काम की शुरुआत करेंगे। साथ ही आपका जोर कमाई से लेकर पैसे बचाने पर भी रहेगा। आप चाहेंगे कि आपके सारे कर्ज खत्म हो जाएं और आप अपने लिए कुछ फंड इकठ्ठा कर सकेंगे। नए साल में पैसे बचाने को लेकर आपको वित्तीय तौर पर कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। हम इस खबर में आपको पांच ऐसी ट्रिक बता रहे हैं जो आपक पैसे बचाने में मददगार होगी।

गोल सेट करें

सबसे पहले तो आप वित्तीय लक्ष्य को सेट करें। 2019 में आर्थिक तौर पर मजबूत होने के लिए अपने गोल को सेट करने के बाद आपके आगे का समय सुखमय बीतेगा। इसकी तैयारी आपको साल के पहले दिन से शुरू कर देना चाहिए। अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करें। जहां जरूरी हों वहीं पैसा खर्च करें। लॉन्ग टर्म प्लान के तहत निवेश करें। इसके लिए आप एसआईपी चुन सक्कते हैं।

इमरजेंसी फंड

अपने अन्य गोल को सेट करने से पहले एक इमरजेंसी फंड तैयार करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि घर पर या अल्पकालिक फंड में एक निश्चित राशि रखने से आपात स्थिति के दौरान आपको इससे मदद मिलेगी।

क्रेडिट कार्ड खर्च पर नियंत्रण

ज्यादातर लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह इमरजेंसी के वक़्त पैसे का एक बेहतर साधन है। नए साल में कोशिश करें कि इसका कम से कम इस्तेमाल हो। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि आप एक महीने में जितना भुगतान कर सकते हैं, उससे अधिक उधार खर्च न करें।

ऋण से छुटकारा

नए साल में आपको अपने सभी ऋणों से बाहर निकल जाना चाहिए। आपके पास अभी जो कैश बचा है उसका इस्तेमाल आप लोन चुकाने में करें। क्रेडिट कार्ड पेमेंट के वक़्त कोशिश करें कि सारा बिल एक बार में देय हो जाए। अगर आपने मिनिमम बिल का भुगतान किया तो बाकी बचे रकम पर आपको ब्याज चुकाना होगा।

Posted By: Nitesh

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SunnyJanuary 4, 2019

2min280

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लुभावने विज्ञापनों को देखा या बंपर सेल के बैनर पर नजर गई और आप सामान खरीदने निकल गईं। लेकिन कभी सोचा है आपने कि जो खरीद कर ले आईं, क्या सचमुच उसकी जरूरत थी आपको? क्रिसमस की घंटियों की रुनझुन कानों में दस्तक देने लगी है, मन में उत्साह-उमंग जाग रहे हैं, क्योंकि क्रिसमस, पार्टी, शॉपिंग और उपहारों का त्योहार है। आपका कोई अपना आपके लिए सैंटा बनकर यादगार उपहार देता है और आप भी किसी न किसी के लिए सैंटा बनती होंगी।

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गिफ्ट देना हो या पाना, बाजार में आना-जाना तो लगा ही रहता है। वैसे भी, इस मौसम में बाजार की रौनक देखते ही बनती है। रंग-बिरंगी लाइटों और क्रिसमस ट्री से सजे-धजे बाजार, लुभावने विज्ञापन, बंपर सेल के बड़े-बड़े बैनर। इन प्रलोभनों के जाल में फंसता हमारा नासमझ मन। फिर कोई बचे तो भला कैसे? वैसे त्योहार खुशियों के प्रतीक होते हैं, मगर हमारी नासमझी इन्हें फिजूलखर्ची और बिगड़े बजट का प्रतीक बना देती है। त्योहार में हम इतने मस्त हो जाते हैं कि बिगड़े बजट का होश ही नहीं रहता, लेकिन बाद में बैठकर पछताते हैं। हमें ऐसा न करना पड़े, इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है।

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SunnyJanuary 2, 2019
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1min310

Publish Date:Sun, 23 Dec 2018 06:38 PM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अगर हम नई चीजें खरीदने के बजाए उसे किराए पर लें तो इसमें हमारा अच्छा खासा पैसा बच जाएगा। चाहे वो कपड़े हो, वाहन हो, घर हो या कोई अन्‍य चीज। आजकल किराए पर लगभग सब कुछ मिल रहा है। हालांकि आपको किराए पर मिलने वाली चीजों के बारे में पता होना चाहिए ताकि आपको यह पता लग सके कि आपको पैसा कैसे बचाना है। 

ऑफिस आने-जाने के लिए करें ये काम: अगर आप ऑफिस जाने के लिए खुद की गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं तो इसमें आपको ज्यादा खर्च आएगा। अगर आप बड़े शहरों में रहते हैं तो आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कई सारी सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए आप प्राइवेट कैब या टैक्‍सी की जगह ओला और उबर में राइड शेयर सर्विस का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। अगर आप अकेले यात्रा करेंगे तो आपको ज्यादा पैसा चुकाना होगा लेकिन शेयरिंग में आपको कम खर्च करना होगा। आजकल ओला उबर जैसे कई कैब इसकी सुविधा देते हैं।

कपड़ों पर न करें पैसे बर्बाद:  अगर आप महंगे और ब्रैंडेड कपड़े पहने का शौक रखते हैं तो यह तरकीब आपके काम आएगी। अगर आप किसी शादी में शामिल होने जा रहे हैं और आप इसके लिए कोई नया ब्रैंडेड कपड़ा खरीदेंगे तो आपको यह काफी महंगा पड़ेगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि आजकल ब्रैंडेड कपड़े भी किराए पर मिलते हैं और इससे आप काफी सारा पैसा भी बचा सकते हैं। इसके लिए कई ऑनलाइन वेबसाइट भी हैं जैसे Flyrobe, Rent IT Bae, Liberent आदि। आप इन वेबसाइट से कपड़े किराए पर घर मंगा सकते हैं और फिर डिलीवरी बॉय उसे वापस लेने भी आ जाएगा।

घर के बाहर यात्रा: अगर आप कहीं घूमने जा रहे हैं तो किसी बड़े होटल में डायरेक्‍ट रुम बुक करने के बजाए ओयो या ट्रिप एडवाइजर, होम स्‍टे डॉट कॉम के जरिए रूम बुक करें। इससे आप अच्छा खासा पैसे बचा सकते हैं।

काम की जगह: यदि आपके पास कोई छोटा बिजनेस या स्टार्ट अप है तो उसके लिए आप चाहें तो वर्किंग स्‍पेस भी शेयर कर सकते हैं। आपको Awfis, Innov8 Wework जैसी कई साइटों पर को-वर्किंग स्‍पेस मिल जाएंगे।

घरेलू फर्नीचर: यदि आपको जॉब किसी एक शहर के बजाए कई शहरों में करनी पड़ रही है तो इसके लिए आपको बार-बार फर्नीचर खरदीने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आप किराए पर फर्नीचर लें और उसका इस्तेमाल करें। कई वेबसाइट ऑनलाइन रेंट पर फर्नीचर देती हैं। 

Posted By: Nitesh

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SunnyJanuary 1, 2019
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7min290

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अगर आप अपना काम सावधानी पूर्वक करते हैं, तो आप अपनी बीमा लागतों में सैकड़ों बचत करना शुरू कर सकते हैं। यहां पर आपको ऐसे ही कुछ टिप्‍स बतायेंगे जिससे आप यह खोज सकते हैं कि कैसे अपने पॉकेट में पैसे बचा सकते हैं यानी कि वह इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी जो कि आपको चाहिए।

नीचे सूचीबद्ध कुछ चीजें हैं जिससे आप अपनी बीमा लागत कम कर सकते हैं: 

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उच्च कटौती प्राप्त करें

उच्‍च कटौती का मतलब यहां पर यह है कि अपनी इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी लेने से पहले कितनी रकम आप देते हैं। अगर आप ज्‍यादा से ज्‍यादा यह कर सकते हैं तो शौक से करिए क्‍योंकि इससे कोई नुकसान नहीं हो रहा है। चाहे फिर कार के लिए इंश्‍योरेंस हो, घर के लिए हो या फिर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस हो आप जितनी ज्‍यादा उच्‍च कटौती करेंगे उतनी आपकी मंथली प्रीमियम कम होगी।

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अच्‍छा हो क्रेडिट रिकॉर्ड

अच्‍छा हो क्रेडिट रिकॉर्ड

अपना क्रेडिट रिकॉर्ड अच्‍छा बनाकर रखिये। इसमें आपके बीमा लागत में कटौती करने की क्षमता है, विशेषकर मोटर बीमा पॉलिसियों के लिए। क्योंकि मोटर या ऑटो बीमा पॉलिसी देने के दौरान, बीमा कंपनी वाले पॉलिसी की कीमतों के लिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग जानकारी के लिए करते हैं। अच्‍छा क्रेडिट रिकॉर्ड रखने के लिए क्रेडिट का बिल समय-समय पर जमा करें और प्रॉपर बैलेंस रखें।

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एक साथ रखें सभी इंश्‍योरेंस

एक साथ रखें सभी इंश्‍योरेंस

जितने भी इंश्‍योरेंस करवायें एक ही व्‍यक्ति और एक ही कंपनी से करायें ताकि समय की बचत हो और परेशानियां भी कम उठानी पडें। इसके अलावा एक ही जगह से बीमा कराने पर आपको चीजें कम रेट में भी मिल जायेंगी। क्‍योंकि कुछ इंश्‍योरेंस के लोग एक साथ एक से ज्‍यादा बीमा करवाने पर कई ऑफर भी देते हैं।

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पता करें और भी कंपनी के बीमा योजनाओं को

पता करें और भी कंपनी के बीमा योजनाओं को

जब भी कार, घर या फिर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस लेने वाले हों तुरंत ही दूसरे कंपनी के इंश्‍योरेंस पॉलिसी और ऑफर को पता करें। हो सकता है कि आपको कम रेट में वही इंश्‍योरेंस दूसरी कंपनी से मिल जाए। अगर ऐसा होता है तो तुरंत ही उस दूसरी कंपनी से इंश्‍योरेंस लेने में न घबरायें।

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SunnyDecember 31, 2018
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2min260

Publish Date:Sat, 29 Dec 2018 06:07 PM (IST)

लंदन, एजेंसी। न्यू ईयर पर बहुत से लोग कुछ नया करने और कुछ पुरानी बुरी आदतों को छोड़ने का प्रण लेते हैं। ऐसे में अगर आप शराब छोड़ने का मन बना रहे हैं तो ये सबसे सही समय है। लंदन में हुए एक ताजा शोध में पता चला है कि अगर आप नए साल पर जनवरी में शराब न पीने का चैलेंज लेते हैं तो ये साल भर आपकी शराब की लत को नियंत्रित करने में मददगार साबित होता है। इससे आपको शराब पीने और शराब पर खर्च करने पर नियंत्रण मिलता है। साथ ही स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।

लंदन की एक यूनिवर्सिटी में किए गए इस शोध में 800 ऐसे लोगों पर अध्ययन किया गया जिन्होंने जनवरी 2018 में शराब न पीने का प्रण लिया था। अध्ययन में पता चला कि इनमें से ज्यादातर लोगों ने अगस्त-2018 तक बहुत कम शराबी पी या बिल्कुल नहीं पी। इससे प्रति माह इनके नशे में रहने की अवधि भी कम हो गई। साफ है कि जनवरी में शराब छोड़ने का वादा आपको लंबे समय तक बहुत कम शराब पीने या बिल्कुल भी न पीने के लिए प्रेरित करता है। इस वादे का मानसिक असर अगस्त महीने तक बरकरार रहता है।

खुद से किए गए इस वादे के कुछ तात्कालिक फायदे भी हैं। दस में से नौ लोग इस वादे के साथ अपने खर्चों में काफी बचत करते हैं। दस में से सात लोगों को नींद अच्छी आती है और पांच में से तीन लोगों को अपना वजन कम करने में मदद मिलती है। इस तरह का परिवर्तन उन प्रतिभागियों में भी देखा गया है जो खुद को पूरे महीने (जनवरी में) शराब पीने से नहीं रोक सके। शराब छोड़ने की उनकी अवधि अन्य प्रतिभागियों की तुलना में काफी कम रही। हालांकि उनमें आया परिवर्तन थोड़ा कम रहा। शोधकर्ताओं के अनुसार इससे हमें नए साल पर शराब का सेवन बंद करने का प्रण लेने के फायदे साफ तौर पर नजर आते हैं। शोध में पता चला है कि 88 प्रतिशत प्रतिभागियों ने रुपये बचाए। 70 फीसद का स्वास्थ्य अच्छा हुआ। 71 प्रतिशत ने बढ़िया नींद ली और 58 प्रतिशत ने अपना वजन कम किया।

नए साल पर लें स्वस्थ्य जीवन का प्रण, हुंजा वैली में छिपा है राज
नए साल पर बहुत से लोग अपने स्वास्थ्य में सुधार लाने का भी प्रण लेते हैं। इसके लिए कोई योगा करने तो कोई सैर करने तो कोई खान-पान सुधारने का प्रण लेता है। अगर आप भी अपने स्वास्थ्य में सुधार लाना चाहते हैं तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) की हुंजा वैली आपके लिए सटीक उदाहरण हो सकती है। ये हुंजा घाटी गिलगित-बाल्टिस्तान के पहाड़ों में है। ये भारत और पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा के पास है। इस हुंजा घाटी को युवाओं का नखलिस्तान कहा जाता है।

हुंजा वैली में स्वस्थ्य और लंबी उम्र का राज छिपा है। यहां के लोगों की जीवनशैली इतनी अच्छी है कि उन्होंने दुनिया की ज्यादातर गंभीर बीमारियों का नाम भी नहीं सुना है। यहां के लोगों की औसत आयु 120 वर्ष तक है। माना जाता है कि हुंजा वैली में दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाएं रहती हैं, जो 60-65 वर्ष की आयु में भी 20 वर्ष की लगती हैं और इस उम्र में भी आसानी से बच्चों के जन्म दे लेती हैं। यहां के लोगों की लंबी और स्वस्थ जिंदगी देखकर दुनिया के कई देश यहां पर रिसर्च कर चुके हैं।

ये है हुंजा वैली का राज
इन रिसर्च में कहा गया है कि हुंजा वैली में प्रदूषण बिल्कुल नहीं है। वहां की हवा और पानी एकदम शुद्ध है। वैली में बहुत ज्यादा विकास नहीं हुआ है, इस वजह से लोगों को काफी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। यहां के लोग बहुत मेहनती होते हैं। ये लोग कुछ महीने तक केवल खुबानी खाकर रहते हैं। ये लोग खूबानी के अलावा मेवे, सब्जियां और अनाज में जौ, बाजरा और कूटू खाते हैं। इन सभी चीजों से उन्हें फाइबर और प्रोटीन के साथ-साथ शरीर के लिए जरूरी सभी मिनरल्स मिलते हैं। साफ है कि यहां के लोग प्रकृति के काफी करीब हैं और ज्यादातर प्राकृतिक चीजें ही खाते हैं। इनके खाने में प्रोटीन व मिनरल्स की भरमार होती है। इन सबके अलावा ये बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं। इसीलिए इस घाटी में अब तक मोटापा भी नहीं आया है।

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CBI अब भी पिंजरे में बंद ‘तोता’ है, जानें- क्या है हकीकत और कैसे बनी ये स्थिति
बांग्लादेश चुनाव की अहमियत, भविष्य में भारत के संबंधों की दशा-दिशा नए सिरे से होगी तय

Posted By: Amit Singh

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