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SunnySeptember 19, 2018
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3min20

नई दिल्‍ली:  

किसान विकास पत्र (Kisan Vikas Patra) पोस्‍ट ऑफिस (Post Office) की लघु बचत योजनाओं (Small Saving Schemes) में से एक है. अच्छी ब्याज दर के साथ सरकारी Guarantee वाली इस योजना Investment करके बढ़िया ब्‍याज कमाया जा सकता है. इस योजना पर इस वक्‍त 7.3 फीसदी ब्‍याज मिल रहा है. इस ब्‍याज दर से निवेश किया गया पैसा 118 महीने में दोगुना हो जाता है.
किसान विकास पत्र क्या है (What is Kisan Vikas Patra)
Kisan Vikas Patra या KVP एक प्रकार का भारत सरकार का बांड हैं, जो आपको निवेश प्रमाणपत्रों (Investment Certificate) के रूप में जारी किया जाता है. इस वक्‍त KVP 1000 रुपए और इसके गुणांक (Denominations) में उपलब्‍ध हैं. इसे पोस्‍ट ऑफिस (Post Office) से खरीदा जा सकता है.

और पढ़े : Post Office RD : ये स्‍कीम बना देती है 1000 रुपए महीने की जमा को 1 लाख रुपए
ऑनलाइन (Online) भी ले सकते हैं किसान विकास पत्र
1 अप्रैल 2016 से National Saving Certificate (NSC) और किसान विकास पत्र (KVP) इलेक्‍ट्रॉनिक रूप में भी मिलना शुरू हो गए हैं. इसके पहले यह सिर्फ छपे हुए प्रमाणपत्र (Printed Certificate) के रूप में मिलते थे.
किसान विकास पत्र पर ब्याज दर और भुगतान (Interest Rate On KVP)
Kisan Vikas Patra के माध्यम से जमा की गई रकम पर Government, फिलहाल (जनवरी 2018 में) 7.3 फीसदी सालाना की दर से ब्याज (Interest) दे रही है. इस ब्‍याज दर के हिसाब से Kisan Vikas Patra में जमा आपका पैसा 118 महीने (9 साल, 10 महीने) में दोगुना (double) हो जाता है. पोस्‍ट आफिस (Post Office) की यह खास बचत योजना है.

और पढ़ें : Post Office Time Deposit Account (TD) : ज्‍यादा ब्‍याज के साथ पाएं दोहरा फायदा
न्यूनतम और अधिकतम जमा की सीमा (Minimum And Maximum deposit In KVP)
Kisan Vikas Patra में न्‍यूनतम 1000 रुपए जमा किया जा सकता है. अधिकतम जमा रकम पर कोई प्रतिबंध नहीं है. आप चाहे जितनी बड़ी रकम तक इनमें पैसा लगा सकते हैं.
कौन खरीद सकता है किसान विकास पत्र (Who Can Open KVP)
कोई भी वयस्क व्यक्ति (adult) अपने नाम पर या नाबालिग (minor) यानी बच्चे के नाम पर इसे खरीद सकता है. कोई भी दो वयस्क (Adult) व्यक्ति मिलकर संयुक्त रूप से भी Kisan Vikas Patra खरीद सकते हैं.

और पढ़े : National Savings Certificates (NSC) : टैक्‍स बचाए और पैसा बढ़ाए
नोमिनी की सुविधा भी (Facility of nomination is available)
KVP खरीदते वक्त आप उनमें अपना Nominee भी दर्ज करा सकते हैं. Nominee, वह व्यक्ति होता है, जिसे खाताधारक के न रहने की स्थिति में KVP का पैसा मिलेगा.
किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर भी कर सकते हैं?
आप जरूरत समझने पर अपने Kisan Vikas Patra को किसी दूसरे व्यक्ति के नाम Transfer भी कर सकते हैं. इसके लिए आपको Post Office में जाकर आवेदन करना होता है.
दूसरे पोस्ट ऑफिस में भी ट्रांसफर संभव
आप अपना निवास स्थान (Residence) बदलने पर या अन्य किसी कारणवश जरूरी होने पर अपने Account का दूसरे Post Office में ट्रांसफर भी करा सकते हैं.
किसान विकास पत्र पहले भी कैश कराने की सुविधा (Encashment Of KVP Before Maturity Period)
जरूरत पड़ने पर आप Kisan Vikas Patra को Maturity Period के पहले भी कैश करा सकते हैं. लेकिन ऐसा आप तभी कर सकते हैं, जबकि आपके Kisan Vikas Patra का कम से कम ढाई साल का समय पूरा हो चुका हो.

और पढ़ें : Post Office Monthly Income Scheme (MIS) : हर माह बैंक FD से ज्‍यादा पाएं ब्‍याज
Kisan Vikas Patra खरीदते वक्‍त रखें कुछ सावधानियां
Kisan Vikas Patra, वैसे तो आप अपनी सुविधानुसार किसी भी मूल्य-वर्ग (Denomination) के ले सकते हैं. लेकिन, अगर आप किसी बड़ी रकम का Investment इनमें करना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि छोटे छोटे मूल्‍य वर्ग के (Denominations) के Kisan Vikas Patra खरीदें. ऐसा करने से अगर कभी इन्‍हें समय से पहले कैश कराना पड़े तो एक एक के करके बांड कैश कराए जा सकते हैं.


First Published: Wednesday, September 19, 2018 10:33 AM

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SunnySeptember 16, 2018
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आदमी एक और जिंदगी दोहरी। पहले दोस्त बनकर जानकारियां जुटाते हैं, फिर उसे उसके दुश्मनों तक पहुंचाते हैं। कई लोग तो महज सनसनी या थ्रिल की खातिर मुखबिरी पर उतर आते हैं। ये वे लोग हैं जो दोहरी जिंदगी जीते हैं। एक तरफ तो वे किसी अपराधी गिरोह के लिए काम करते हैं, दूसरी तरफ पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों को अपने नियोक्ताओं के बारे में पल-पल की खबर देते रहते हैं। इन्हें मुखबिर के नाम से जाना जाता है। हालांकि बॉलीवुड में उनके लिए खबरी शब्द का इस्तेमाल होता है। 

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आम जनता की नजरों से पूरी तरह ओझल ये लोग पुलिस और खुफिया एजेंसियों के आंख और कान हैं। इन्हीं की मदद से ये एजेंसियां सही मायनों में काम कर पाती हैं। कोई भी एजेंसी चाहे जितनी विशाल और कार्य कुशल क्यों न हो, उसकी पहुंच पूरी वांछित जानकारी तक हो ही नहीं सकती। चाहे वो पाकिस्तान, बांग्लादेश या भूटान में आतंकवादियों के अड्डे हों, उच्चस्तरीय राजनीतिक जानकारी का संकलन हो, देश के भीतर जासूसों के कामकाज का अवरोध हो या फिर अपराधों की रोकथाम हो, ‘टारगेट’ तक सीधी पहुंच रखने वाले लोग ही मुखबिर बनाए जाते हैं। 

मुखबिरों की दुनिया में कदम-कदम पर खतरा है। टारगेट से दोस्ती कर उन्हें बेनकाब कर देना एक ऐसा खतरनाक दोहरा खेल है, जिसे काफी सावधानी से खेला जाना होता है। देश के बाहर की खबर रखने वाली खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के कुछ मुखबिर तो चालीस से पचास हजार रुपये हर महीने कमाते हैं। कुछ के लिए तो यह रोजी रोटी का एकमात्र जरिया है। भारत की आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आई. बी.) में भी मुखबिरों को मासिक तौर पर पैसा दिया जाता है। ऐसा कभी-कभी ही होता है कि पैसा रिपोर्ट के आधार पर मिले। आई. बी. और आर्थिक खुफिया एजेंसियों के लिए तो मुखबिर रखने और भुगतान करने के कायदे कानून हैं, पुलिस के लिए ऐसा कोई बंधन नहीं है। न ही पुलिस थाना स्तर पर मुखबिर बनाने और उन्हें पालने के लिए 'सोर्स मनी' के नाम पर कोई राशि अलग रखती है।  

ये होते कौन हैं? 

शोध छात्र, पत्रकार, बड़े-बड़े व्यापारी, वे बुद्धिमान लोग, जिनके पास एक कुदरती आवरण हो और जो स्थितियों का आकलन कर सकें, आई. बी. द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। आई. बी. का असली सरोकार जासूसी  करना और राजनीतिक खुफियागिरी है। पत्रकारों या शोध छात्रों की किसी भी स्थिति तक पहुंच ही उनकी ताकत है। वहीं, समाज के उच्च वर्ग में बड़े व्यापारी का उठना बैठना उसे उपयोगी बनाता है। ऐसा नहीं है कि बुद्धिजीवी वर्ग ही आई. बी. का कीमती मुखबिर होता है। किसी दूतावास के महत्वपूर्ण पद पर बैठे राजनयिक का निजी सचिव, दूतावास का कर्मचारी, किसी मंत्री के निवास का टाइपिस्ट या फिर हवाई सफर करने वाला कोई ज्योतिषी भी अच्छी तनख्वाह पा सकते हैं। लेकिन यहां भी कमजोरियों से फायदा उठाया जाता है। 

पैसे और शराब का शौक तो आम बात है और कुछ अच्छे-खासे, खाते-कमाते लोग खुद को बहुत सस्ते में बेच देते हैं। राजनेता और राजनीतिक दलों के पदाधिकारी चंद हजार रुपयों की खातिर आई. बी. के लिए काम करते देखे गए हैं। ऐसा इसलिए भी होता है कि कई लोग महज सनसनी या थ्रिल की खातिर मुखबिरी पर उतर आते हैं। उनकी रोजमर्रा की जिंदगी इस कदर उबाऊ और नीरस हो जाती है कि उन्हें कुछ उत्तेजना की जरूरत होती है। लिहाजा वे मुखबिरी शुरू कर देते हैं। इस वर्ग में पेज थ्री क्लास की कई महिलाएं और अन्यथा सफल लोग आते हैं। पैसा उनके लिए कोई मायने नहीं रखता।

आई. बी. के एक पूर्व संयुक्त निदेशक के अनुसार, निम्न वर्ग के 95 प्रतिशत मुखबिर शराब खरीदने के लिए काम करते हैं। क्लर्क और चौकीदार जैसे लोग तो मात्र सफारी सूट के कपड़े जैसी भेंट में ही निपटा दिए जाते हैं, जबकि उन्हें हैंडल करने वाले एजेंट मुखबिरों के मासिक भुगतान के नाम पर नियमित पैसा डकार जाते हैं। मुखबिरों से बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से काम लेना काफी असाधारण बात है। ऊंची किस्म के जानकार मुखबिर बहुत कम होते हैं। आई. बी. के एजेंटों द्वारा टारगेट ग्रुप के भेदन या फिर किसी मकसद की खातिर मुखबिरों को विशेष कवर मुहैया करवाने के मामले बहुत कम देखने में आए हैं। हालांकि, कुछ दमदार अफसर हैं जरूर। एक मामला काफी दिलचस्प है। 

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SunnySeptember 15, 2018
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नई दिल्ली। पैसा कमाने के कई तरीके होते हैं। कोई पूरी जिंदगी नौकरी करके भी करोड़पति नहीं बन पाता तो किसी को विरासत में इतना पैसा मिलता है कि उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। लेकिन अगर आप सही रणनीति और थोड़ा निवेश के अलग अलग माध्यम के बारे में सोचेंगे तो आप भी आसानी से बड़ी रकम कमा सकते हैं। यूं तो निवेश करने के कई माध्यम हैं जैसे – शेयर बाजार, रियल एस्टेट, सोना-चांदी, म्युअुचल फंड। लेकिन इन सभी माध्यमों में ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे आपका पैसा केवल 2 से 5दिन में डबल हो जाएं। लेकिन बाजार में ही निवेश का ऐसा तरीका है जहां यह संभव है। आइए जानते हैं क्या है ये तरीका और कैसे करते हैं इसमें निवेश…

इस तरीके से कर सकते हैं डबल कमाई

निवेश करने के इस तरीके का नाम है आईपीओ। इस निवेश के जरिए आप महज 2 से 5 दिन में ही अपने पैसे को डबल बना सकते हैं। मान लिजिए आपने किसी कंपनी का आईपीओ 225रुपए के भाव से खरीदा, आपने उसके 50 आईपीओ ले लिए, तो आपको 11250 रुपए खर्च करने पड़े। वहीं २ दिन बाद जब उस कंपनी की लिस्टिंग करीब 450 रुपए में हुई तो केवल दो दिन में ही आपका 11250रुपया 22500 में तब्दील हो गया।

क्या होता है आईपीओ

आईपीओ यानि इनीशियल पब्लिक ऑफर और इसे पब्लिक इश्यू भी कहते हैं। आईपीओ के जरिए कंपनियां पूंजी जुटाती हैं। और जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबार को बढ़ाने में करती है। आईपीओ में निवेश नए निवेशक के लिए फायदेमंद है। आईपीओ निवेश के जरिए नया निवेशक अपने मनपसंद कारोबार में हिस्सेदार बन सकता है। आईपीओ के फायदे यह होते है कि आपको मनपसंद कारोबार में हिस्सेदारी मिलती है। साथ ही आईपीओ में मुनाफा कमाने के मौके भी होते है।

कैसे होता है इसमें निवेश

आईपीओ में निवेश ब्रोकर के जरिए किया जाता है। जिसमें ब्रोकर के जरिए इसमें पैसा लगाएं। ऑनलाइन आईपीओ निवेश भी संभव है। आईपीओ 3 कामकाजी दिन तक ही खुलता है। आईपीओ की प्राइस प्रोमोटर्स और मर्चेंट बैंकर मिलकर तय करते हैं। शेयर प्राइसिंग 2 तरह से तय होती है। फिक्स प्राइसिंग और प्राइस बैंड। फिक्स प्राइसिंग पर आईपीओ अब बहुत कम होते हैं। प्राइस बैंड अधिकतम 20 फीसदी का हो सकता है।

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SunnyJuly 11, 2018
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A bull outlined against a field
A bull outlined against a field
<p class="canvas-atom canvas-text Mb(1.0em) Mb(0)–sm Mt(0.8em)–sm" type="text" content="The last time I covered JD Wetherspoon (LSE: JDW) I concluded that the City’s outlook for the group was too pessimistic. With earnings growth of just 1.8% for 2018 projected at the time, analysts didn’t seem to be expecting much from the group, which has come to dominate the UK high street. ” data-reactid=”22″>The last time I covered JD Wetherspoon (LSE: JDW) I concluded that the City’s outlook for the group was too pessimistic. With earnings growth of just 1.8% for 2018 projected at the time, analysts didn’t seem to be expecting much from the group, which has come to dominate the UK high street. 

However, as the year has progressed, analysts have become more positive on the outlook for the company — no doubt helped by its better than expected trading performance. 

Sales growth 

Helped by England’s performance in the World Cup, and the fantastic summer weather we’ve been having, today Spoon’s reported a 5.2% rise in same-store sales for the 10 weeks to July 8. 

As analysts plug these figures into their valuation models, it looks as if the company could see substantial growth upgrades in the weeks and months ahead. Prior to today, the City had already upgraded its full-year EPS growth target to 6.9% for 2018. 

No matter what you think of its Brexit-loving boss Tim Martin, he is managing to successfully steer the group through a tough trading environment. Rising costs are eating away at the pub industry’s margins and at the same time, economists are becoming increasingly concerned about the health of the UK consumer’s wallet.

And while the industry has benefited from hot weather over the summer, and the World Cup over the past few months, we still don’t know what’s going to happen throughout the rest of the year.

Cautious outlook 

<p class="canvas-atom canvas-text Mb(1.0em) Mb(0)–sm Mt(0.8em)–sm" type="text" content="For its part, the company has adopted a cautious stance. As well as toasting its summer sales growth, Tim Martin also warned today that the group will be facing “considerable cost increases next year, in areas including business rates, the sugar tax, utility taxes and wages.“” data-reactid=”30″>For its part, the company has adopted a cautious stance. As well as toasting its summer sales growth, Tim Martin also warned today that the group will be facing “considerable cost increases next year, in areas including business rates, the sugar tax, utility taxes and wages.

For investors, this warning will come as no surprise. Martin has a reputation for underpromising and overdelivering. He issued a similar warning in 2015, 2016, 2017 and at the beginning of this year. On every single occasion, the business has been able to mitigate rising costs by streamlining or through improved sales figures. 

For example, to help offset cost pressures, the group is buying freeholds and renovating existing sites to attract new customers. It has also introduced new menu offerings such as pizza and a mobile app so customers can order drinks (as well as food) without having to go to the bar. 

Fail to prepare, prepare to fail

I believe Martin’s continual cautious outlook has helped Spoon’s stay ahead of the competition, and as long as the business tries to improve continually, growth should follow. 

Indeed, growing EPS have helped push the shares higher by 100% over the past two years.

The group has enjoyed steadily rising earnings over the past five years, with EPS up from 46.2p in 2013 to 70.8p last year. Analysts expect EPS of 75.2p by 2019. 

Even though I’m positive on the outlook for the shares, the one thing that concerns me is the P/E multiple of 16.5. This is higher than I’d like personally, but I’d be willing to make an exception here because of the firm’s widely recognisable brand, innovative nature and history of growth. In fact, I believe there’s a strong chance the shares could go on to double again over the next few years.

<p class="canvas-atom canvas-text Mb(1.0em) Mb(0)–sm Mt(0.8em)–sm" type="text" content="More reading” data-reactid=”38″>More reading

<p class="canvas-atom canvas-text Mb(1.0em) Mb(0)–sm Mt(0.8em)–sm" type="text" content="Rupert Hargreaves owns no share mentioned. The Motley Fool UK has no position in any of the shares mentioned. Views expressed on the companies mentioned in this article are those of the writer and therefore may differ from the official recommendations we make in our subscription services such as Share Advisor, Hidden Winners and Pro. Here at The Motley Fool we believe that considering a diverse range of insights makes us better investors.” data-reactid=”46″>Rupert Hargreaves owns no share mentioned. The Motley Fool UK has no position in any of the shares mentioned. Views expressed on the companies mentioned in this article are those of the writer and therefore may differ from the official recommendations we make in our subscription services such as Share Advisor, Hidden Winners and Pro. Here at The Motley Fool we believe that considering a diverse range of insights makes us better investors.

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SunnyJuly 9, 2018
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A coalition of organizations is working to launch a large-scale Double Up Food Bucks program soon in Houston. (Pxhere)

July 9, 2018

LUBBOCK, Texas — One-in-four Texas children is food insecure, meaning he or she frequently doesn’t know where the next meal will come from. But a program launched in Detroit to help more struggling families access healthy food is starting to take root in Texas.

Double Up Food Bucks” lets recipients of SNAP – formerly known as food stamps – double their benefits, up to $20 per visit, if they buy locally grown fruits and vegetables at participating farmers markets. Andy Black, regional director at Baylor University’s Texas Hunger Initiative in Lubbock, called the program a “triple win.”

“It stretches the dollars of low-income SNAP recipients. But it also, you know, grows the customer base, it provides an economic boost for local farmers, especially at farmers markets,” Black said. “And overall it’s a boost to the entire community.”

Since many SNAP recipients live in areas known as food deserts, where fresh produce isn’t readily available, Black noted the Double Up program – if expanded to more markets across the state – could help more Texans eat nutritious meals.

Critics of SNAP claim the program encourages unemployment, and the U.S. House recently passed a farm bill that would expand work requirements in order to receive benefits. The requirement was dropped in the U.S. Senate’s version of the bill.

Black said he believes there are many misconceptions about SNAP recipients, noting that many farmers selling their produce at markets are either currently receiving the benefits or have received them in the not-so-distant past.

“But the reality is the vast majority of SNAP recipients are children, they’re the elderly, seniors, they’re people with disabilities,” he said. “They’re people with jobs, sometimes multiple jobs, jobs that don’t pay enough to sustain a stable lifestyle.”

Currently, the only farmers markets officially participating in Double Up are near Amarillo, Lubbock and Waco. The Fair Food Network, the national organization behind the program, also has provided support for efforts in Austin, San Antonio and Houston, where a coalition of organizations hopes to launch a large-scale program soon.

Eric Galatas, Public News Service – TX

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