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SunnyJanuary 16, 2019
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how to double your money in less time in post office schemeNSC यानी नेशनल सेविंग ​सर्टिफिकेट के तहत खाता को देश की किसी भी पोस्ट ऑफिस ब्रांच से लिया जा सकता है. (PTI)

हर कोई चाहता है कि उसके पास एक अच्छा-खासा फंड हो. ऐसे में कई लोग कम वक्त में पैसा जल्दी डबल करने वाले इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट खोजते हैं. साथ ही यह भी चाहते हैं कि जोखिम कम रहे. लिहाजा ज्यादातर लोग इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बैंक FD को चुनते हैं. लेकिन एक स्कीम बैंक FD से भी ज्यादा जल्दी आपका पैसा डबल करती है. यह स्कीम है पोस्ट ऑफिस की NSC.

NSC यानी नेशनल सेविंग ​सर्टिफिकेट के तहत खाता को देश की किसी भी पोस्ट ऑफिस ब्रांच से लिया जा सकता है. NSC का मैच्योरिटी पीरियड 5 साल होता है. इस पर इस वक्त 8 फीसदी सालाना का ब्याज मिल रहा है. NSC स्मॉल सेविंग्स में आती है और सरकार हर 3 महीने पर स्मॉल सेविंग्स के लिए ब्याज दर रिवाइज करती है.

8 फीसदी की ब्याज दर के हिसाब से अगर आप 1 लाख रुपये की NSC खरीदते हैं तो आपका पैसा 9 सालों में डबल होगा. वहीं अगर आप SBI, ICICI बैंक, HDFC बैंक, PNB जैसे बैंकों में FD कराते हैं तो यहां आपका पैसा डबल होने में 10.5 साल तक का वक्त लगेगा.

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प्रमुख बैंकों की FD में कितने वक्त में पैसा होगा डबल

वह ऐसे कि SBI और PNB में इस वक्त 1 साल रुपये अमाउंट वाली FD पर सबसे ज्यादा ब्याज दर 6.85 फीसदी है. ऐसे में इस दर से 1 लाख रुपये का अमाउंट डबल होने में 10.5 साल का वक्त लगेगा.

ICICI बैंक में FD पर 1 लाख रुपये से कम के अमाउंट की FD के लिए हाईएस्ट ब्याज दर 7.50 फीसदी और HDFC बैंक में 7.40 फीसदी सालाना है. इस लिहाज से आपका पैसा डबल होने में 9.6 साल और 9.7 साल का वक्त लगेगा.

कैसे ले सकते हैं NSC

​एक सिंगल होल्डर टाइप सर्टिफिकेट कोई भी एडल्ट अपने नाम से या अपने बच्चे के नाम से खरीद सकता है. NSC में 100, 500, 1000, 5000, 10,000 या इससे ज्यादा के सर्टिफिकेट मिलते हैं. इसमें नि‍वेश करने की कोई सीमा नहीं है. आप अपनी क्षमता के मुताबिक कि‍तनी भी धनराशि का NSC खरीद सकते हैं.

फायदे

  • NSC में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्‍स छूट मिलती है. हालांकि यह छूट 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही मिलती है.
  • NSC के VIII इश्यू को किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर किया जा सकता है. हालांकि ऐसा इसके मैच्योर होने से पहले केवल एक ही बार किया जा सकता है.
  • सर्टिफिकेट ट्रांसफर करने पर पुराने सर्टिफिकेट्स और इसकी परचेज एप्लीकेशन पर पर ही पुराने होल्डर का नाम काटकर नए होल्डर का नाम लिख दिया जाता है. इस दौरान ऑथराइज्ड पोस्टमास्टर के सिग्नेचर, उसकी डेजिग्नेशन यानी पोस्ट की स्टांप और पोस्ट ऑफिस की डेट स्टांप लगाई जाती है.

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कैसे है पूरे पैसे की सेफ्टी की गारंटी

अगर कोई बैंक डिफॉल्‍ट कर जाता है या दिवालिया हो जाता है तो ऐसे में DICGC यानी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन बैंक में कस्टमर्स के सिर्फ 1 लाख रुपये की सुरक्षा की गारंटी देता है. यह नियम बैंक की सभी ब्रांच पर लागू होता है. इसमें मूलधन और ब्‍याज दोनों को शामिल किया जाता है. यानी अगर किसी बैंक में आपका कुल जमा 4 लाख है तो बैंक के डिफॉल्ट करने पर आपके सिर्फ 1 लाख रुपये ही सुरक्षित माने जाएंगे. बाकी के पैसे मिलने की गारंटी नहीं होगी. अगर एक से ज्यादा अकाउंट हैं तो सभी अकाउंट का बैलेंस जोड़कर केवल 1 लाख तक जमा को ही सुरक्षित माना जाएगा.

पोस्ट ऑफिस कैसे 100% सुरक्षित

अगर पोस्टल डिपार्टमेंट रकम लौटाने में फेल हो तो पोस्ट ऑफिस के जमा पैसों पर सॉवरेन गारंटी होती है. यानी किसी परिस्थिति में अगर पोस्टल डिपार्टमेंट निवेशकों की रकम लौटाने में फेल हो जाए तो यहां सरकार आगे बढ़कर निवेशकों के पैसों की गारंटी लेती है. किसी स्थिति में आपका पैसा फंसने नहीं पाता है. पोस्ट ऑफिस स्कीम में जमा पैसों का इस्तेमाल सरकार अपने कामों के लिए करती है. इसी वजह से इन पैसों पर सरकार गारंटी भी देती है.

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SunnyJanuary 14, 2019
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बेमेतरा. जिले में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ की गई शिकायतों के आधार पर तीन साल में 91 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। अब तक इनमें से 48 प्रकरण में 111 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिले में रकम दोगुना करने एवं अधिक लाभ देने के नाम पर तरह-तरह की स्कीम का झांसा देकर हजारों लोगों से कई चिटफंड कंपनियों ने करोड़ों रुपए का निवेश करवाया है। कंपनी के एजेंटों एवं डायरेक्टरों ने निवेश करने वालों को रकम वापसी के लिए मियाद निर्धारित की थी। इसके बाद रकम नहीं मिलने पर थानों में शिकायत के आधार पर तीन साल में धारा 420, 409 एवं 456 इनामी चिटफंड एवं धन परिचालन स्कील पाबंदी अधिनियम 1978 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

2016 से अब तक दर्ज मामले
2016 के दौरान जिले के थानों में 19 प्रकरण दर्ज किए गए थे। जिसमें सभी प्रकरणों में विवेचना की गई है, जिसके बाद 13 प्रकरणो मे 43 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी प्रकरण न्यायालय में लंबित है। वहीं 3 प्रकरण लंबित हैं। दो प्रकरणों का खात्मा किया गया है। वहीं एक प्रकरण को धारा 299 की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें तीन आरोपी हैं। जिले में वर्ष 2017 के दौरान सर्वाधिक 50 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिसमें 3 प्रकरण का खात्मा किया गया है। बाकी 47 प्रकरण में सें 29 प्रकरणों में 60 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। बाकी 20 प्रकरणों में से 4 आरोपियों की तलाश जारी है। 2018 में जिले के विभिन्न थानों में 22 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जिसमें अब तक 6 मामलों में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 16 प्रकरण मेें आरोपियों की तलाश की जा रही है। 6 प्रकरणों के सभी 9 आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा चुका है। न्यायालय के निर्देश के बाद दीगर जिलों के अलावा जिले के निवेशकों को भी रकम वापसी की उम्मीद होने पर 20 जुलाई से 9 अगस्त तक हजारों लोगों ने 226 आवेदन पेश किया है, जहां से प्रदेश के दीगर थानों से संबंधित मामलों को थाने में पेश किया गया है।

नांदघाट थाने में भी दर्ज है तीन मामले
जिले के नांदघाट थाने में तीन चिटफंड कंपनी से जुड़े तीन प्रकरण दर्ज हैं। जिसमें गरिमा रिवर स्टेट, बीन एन गोल्ड व जीन एन डेयरीज में तीनों में पांच आरोपी पकड़े गए हैं। चिटफंड से जुड़े सबसे ज्यादा मामले बेमेतरा थाने में दर्ज हैं। इनके अलावा एमआई स्टाइल के प्रकरण में चार लोगों की गिरफ्तारी की गई है। एचबीएन कंपनी के प्रकरण में एजेंट पर कार्रवाई की गई है। डायरेक्टर फरार है। ड्रीम पावर कंपनी व बीएन गोल्ड के मामलों में संचालकों की तलाश जारी है। साई प्रकाश प्रॉपर्टी रीवां के मामले में संचालक पुष्पेंद्र की तलाश जारी है। एचआईसीएल कंपनी के खिलाफ दर्ज मामले में डायरेक्टर फरार है। जांच दुर्ग अपराध शाखा कर रही है। बेरला थाने में प्रिम रोज मार्केटिंग के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया है।

खम्हरिया में दर्ज मामले में पांच की गिरफ्तारी
खम्हरिया थाने में रिच लाइफ कंपनी के खिलाफ की गई शिकायत में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। साजा में जीएन गोल्ड कंपनी के खिलाफ की गई शिकायत में डायरेक्टर सतनाम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। सतनाम सिंह ने 4 करोड़ का निवेश कराने की बात पुलिस को दिए गए बयान में कही है। दो प्रकरणों में न्यायालय के निर्देश के बाद मामला दर्ज किया गया है।

पीएससीएल में निवेश की रकम वापसी की उम्मीद
आल इंवेस्टर्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन के जिला अध्यक्ष बुधराम साहू, कामता सिन्हा, मोहन साहू व अन्य के अनुसार जिले में उसके संगठन से जुड़े निवेशकों ने पीएससीएल में करोड़ों की रकम निवेश किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार निवेशकों को राहत देने के लिए पीएससीएल कंपनी की संपत्ति नीलाम कर निवेशकों को भुगतान करने के निर्देश दिए थे। जिसका आज तक पालन नहीं किया गया है। जिले में भी कंपनी में लोगों का करोड़ों रुपए है, जिसकी वापसी की प्रक्रिया प्रांरभ की जानी चाहिए। संगठन इस बारे में लगातार मांग कर रहा है। बहरहाल किसानों को राहत के बाद नए सत्ताधारी दल से भी लोगों को निवेश की गई रकम वापस मिलने की उम्मीद है।

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SunnyJanuary 12, 2019
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जबलपुर . मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी व उसके सहयोगियों पर दुष्टतापूर्वक ठगी के जरिए जनता के गाढ़े पसीने की कमाई हड़पने का आरोप है। लिहाजा उसे जमानत नहीं दी जा सकती। यह कहते हुए जस्टिस राजीव कुमार दुबे की सिंगल बेंच ने चिटफंट कंपनी के संचालक की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

news facts-

हाईकोर्ट ने कहा…
दुष्टतापूर्वक जनता की कमाई ठगने का आरोप, नहीं दे सकते जमानत
चिटफंट कंपनी जीएन गोल्ड के नई दिल्ली निवासी संचालक की अर्जी खारिज

नई दिल्ली निवासी सतनाम सिंह रंधावा पर आरोप है कि वह भोपाल जिले में लोगों को अधिक लाभ का लालच देकर उनसे वित्तीय योजनाओं में तगड़ी रकम निवेश करवाने के बाद बोरिया-बिस्तर लपेट कर गायब गया था। एसटीएफ भोपाल थाने में 2016 में रामभूषण रघुवंशी की शिकायत पर आरोपी रंधावा व अन्य के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 409, 409, 120 बी व मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 6,नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138, प्राइज चिट एंड मनी सर्कुलेशन बैनिंग एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
अभियोजन के अनुसार रंधावा जीएन गोल्ड, जीएन डेयरीज व जीएनडी इंडिया लिमिटेड नामक कंपनियों का संचालक था। उसने अपने एजेंटों के जरिए मेच्योरिटी अवधि के बाद कई गुना रकम वापस देने का लालच देकर लोगों से विभिन्न वित्तीय योजनाओं में लाखों रुपए निवेश करा लिए। इसके बाद वह कार्यालय बंद कर चंपत हो गया। रंधावा को एसटीएफ ने 7 अक्टूबर 2016 को गिरफ्तार किया था। तभी से वह जेल में है। इसी मामले में जमानत पाने के लिए रंधावा की ओर से यह अर्जी दायर की थी।

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SunnyJanuary 10, 2019
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Publish Date:Wed, 09 Jan 2019 04:30 PM (IST)

बरेली [दीपेंद्र प्रताप सिंह]। एक तरफ पूरी दुनिया पर्यावरण प्रदूषण से जूझ रही है, दूसरी तरफ इससे बचने के उपाय भी हमारे आसपास ही प्रकृति में मौजूद हैं। पर्यावरणविदों ने अब एक ऐसे पौधे को खोजा है जो अन्य पेड़-पौधों की तुलना में प्रदूषण पर दोगुना वार करता है। इसकी खासियत ये है कि ये अन्य पेड़-पौधों की तुलना में बहुत छोड़ा और बेहद खूबसूरत है। इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि ये पौधा मनुष्य के लिए कहीं अधिक भरोसेमंद पर्यावरण मित्र साबित हो सकता है।

प्रदूषण का दोगुना खात्मा करने वाले इस पौधे को मॉस प्लांट कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये पौधा वातावरण में मौजूद पॉर्टिक्यूलेट मैटर (पीएम) के कणों और कार्बन कणों को भी लगभग दोगुनी रफ्तार से अवशोषित करता है। ये पौधा इतना छोटा होता है कि इसे गमले में लगाकर कमरे के अंदर भी रखा जा सकता है।

एक कमरे के लिए चार ही पौधे हैं पर्याप्त
कमरे में इस पौधे के बस चार गमले रखकर निश्चिंत हो जाया जा सकता है। प्रदूषक तत्वों को यह नन्हा फाइटर चुन-चुन कर खत्म कर देगा। एक रिसर्च के दौरान कमरे में चार पौधे रखे जाने के कुछ ही देर बाद कमरे में मौजूद प्रदूषक तत्वों में 15 फीसद तक कमी दर्ज की गई है।

ये केवल सजावट के लिए नहीं है
यह घासनुमा पौधा दिखने में बेहद छोटा मगर बेशुमार खूबियों के साथ बड़ा काम करने में सक्षम है। दरअसल, मॉस प्लांट अन्य पौधों जैसे स्नेक प्लांट, मनी प्लांट या अन्य सजावटी पौधों की तरह केवल सजावट की वस्तु कतई नहीं है। इसलिए इसे घर में रखने से अंदर के पर्यावरण को भी स्वच्छ रखने में बहुत मदद मिलती है।

मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट
पर्यावरणविद् और बरेली कॉलेज से रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना ने मॉस प्लांट पर रिसर्च कर इसकी और भी कई खूबियों को जाना है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण अवशोषित करने वाले अन्य पौधों की तुलना में इसकी खूबियां कहीं अधिक हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया है कि अधिकांश पौधे दिन में प्रदूषण के कण अवशोषित करते हैं, जबकि मॉस प्लांट की खूबी इसका रात में भी एक्टिव होना है।

एलईडी की रोशनी से भी काम कर लेता है
यह पौधा सूरज की रोशनी पर ही निर्भर नहीं रहता है। एलईडी की हल्की रोशनी में भी मॉस प्लांट अपना काम करता है। मनी प्लांट या प्रदूषण सोखने वाले अन्य पौधों की तुलना में मॉस प्लांट का रखरखाव बेहद आसान है। इसे अन्य पौधों की तुलना में काफी कम पानी की जरूरत होती है। यहां तक कि कुछ दिन पानी न मिले तो भी मॉस प्लांट पर खास असर नहीं पड़ता। इस पौधे पर फंगस या बैक्टीरिया भी जल्द अटैक नहीं करता।

ये हैं पौधे की खूबियां
1. वातावरण में मौजूद पॉर्टिक्यूलेट मैटर (पीएम) के कणों को अन्य की तुलना में दोगुनी रफ्तार से अवशोषित करता है।
2. कार्बन सहित अन्य प्रदूषक तत्वों को भी लगभग साफ कर देता है।
3. छोटा इतना कि आसानी से गमले में रखा जा सकता है।
4. सुंदर इतना कि कमरे के अंदर सजा कर भी रखा जा सकता है।
5. सूरज की रोशनी पर ही निर्भर नहीं।
6. रात में भी प्रदूषण को कम करने का काम जारी रखता है।
7. पानी की जरूरत अन्य पौधों की तुलना में काफी कम।
8. फंगस या बैक्टीरिया भी जल्द अटैक नहीं करता।
9. लॉन या पार्क में फैलने पर अपनी नमी से प्रदूषित कणों को ऊपर नहीं उठने देता।

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Posted By: Amit Singh

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SunnyJanuary 7, 2019
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सर्विसलांस टीम की सूचना पर एसओजी और शहर कोतवाली पुलिस ने रेलवे स्टेसन के पास से सत्ता के झंडा लगे सफेद स्कार्पियो के साथ नोट बदलने व पैसे दुगना करने आए 4 लोगों को धर पकड़ा.

लखनऊ:  

उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में रविवार को पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी. सर्विसलांस टीम  की सूचना पर एसओजी और शहर कोतवाली पुलिस ने रेलवे स्टेसन के पास से सत्ता के झंडा लगे सफेद स्कार्पियो के साथ नोट बदलने व पैसे दुगना करने आए 4 लोगों को धर पकड़ा. टीम ने उनके पास से नकली नोट व साथ में चोरी की सफेद स्कार्पियो को जब्त कर लिया है. आपको बता दें कि जनपद में नकली नोट देकर चूरन वाले नोट दिए जाने की कई ऐसी घटनाएं हो चुकी थीं जिससे पुलिस के माथे पर बल पड़ गए थे. ऐसे में पुलिस अधीक्षक की नेतृत्व में एक अलग से टीम का गठन किया गया जिसका नेतृत्व अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी मऊ कर रहे थे.

कई दिन से सर्विलांस पर संदिग्ध नंबरों की रेकी किए जाने के बाद बीते शाम सर्विलांस टीम को एक संदिग्ध नंबर से असली नोट के बदले नकली नोट दिए जाने के बातचीत सुनाई दी. जिसके बाद पूरी की पूरी टीम सक्रीय हो गई और कॉल किये गए नंबरों को ट्रेस करते हुए उनकी डिटेल निकाली तो पता लगा कि यह एक अंतर प्रांतीय ग्रुप है, जो कि बिहार से लगे बलिया, गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ और मिर्जापुर में भी सक्रिय रहा है.

यह भी पढ़ें- CBI जांच पर अखिलेश यादव ने तोड़ी चुप्पी, BSP से गठबंधन रोकने के लिए मोदी सरकार डराने की कर रही है कोशिश

इनका काम यह होता था कि यह लोग पहले शिकार को अपने जाल में कुछ नकली नोट प्रिंटिंग मशीन से छापे गए दिखा कर उसकी सत्यता को परखवा लेते थे. फिर उसके बाद डील तय हो जाती थी कि एक लाख असली के बदले दो लाख के नकली नोट आपको दिए जाएंगे और शिकार नकली नोट को असली की तरह देखकर उनके झांसे में आ जाता था. फिर होती थी इनके बीच में रस्साकशी की कैसे इस नकली दो लाख को भी बचाया जाए. इसके लिए उन्होंने भारतीय बच्चों का बैंक जिसे कि हम आम बोलचाल में “चूरन वाले नोट” कहा जाता है का उपयोग करते थे यह लोग ऊपर और नीचे प्रिंटिंग मशीन के द्वारा छापे गए दो- दो हजार के नोट उसके बाद बीच में चूरन वाले नोट लगाकर गड्डी तैयार करते थे. उसके बाद शिकार से पहले एक लाख के असली नोट लेकर दो लाख के नकली नोट थमा कर तुरंत फ़ुर्र हो जाते थे.

हालांकि पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन लोगों का पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास या कहीं पर कोई मुकदमा अब तक दर्ज नहीं है. लेकिन यह काफी अरसे से इस कार्य में लिप्त थे और ठगा हुआ व्यक्ति बदनामी के डर से सामने नहीं आ पाता था. अब इनसे पूछताछ की जा रही है शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल गाड़ी सीज कर दी गई है और अभियुक्तों को संबंधित धाराओं में जेल भेजा जा रहा है.

First Published: Sunday, January 06, 2019 03:58 PM

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SunnyJanuary 6, 2019
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    SunnyJanuary 2, 2019
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    उज्जैन| तीन साल में राशि दोगुना करने का लालच देकर दो चिटफंड कंपनियों ने 2 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी कर ली। ये कंपनियां ग्लोरिया प्रॉपर्टी और रिलायबल के नाम से चल रही थी। इन्होंने 355 लोगों से ठगी की। दोनों ही केस में चिटफंड कंपनी के 19 लोगों के खिलाफ नामजद कार्रवाई की। लोगों को पैसा डबल कर लौटाने का प्रलोभन देने वाले कंपनी के कर्ताधर्ता एफआईआर दर्ज होने से पहले ही फरार हो गए। ईओडब्ल्यू एसपी राजेश रघुवंशी को धोखाधड़ी के शिकार लोगों ने आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी, जिसमें जांच के बाद केस दर्ज किया। एसपी ने कहा आरोपियों को भी धरपकड़ कर जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

    ईओडब्ल्यू की कार्रवाई

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    SunnyJanuary 1, 2019
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    1min220

    Publish Date:Tue, 25 Dec 2018 10:55 AM (IST)

    जबलपुर( नईदुनिया प्रतिनिधि)। भूत बनकर नोट डबल करने का लालच देकर धोखाधड़ी करने वाले आरोपित को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी। हाईकोर्ट के जस्टिस राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अवकाशकालीन पीठ में यह निर्णय दिया गया। यह मामला पूरे दिन हाईकोर्ट परिसर में चर्चा का विषय बना रहा।

    आदेगांव निवासी नरेश मसकोले ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि आदेगांव के बाजार में उसे एक व्यक्ति मिला, जिसने उससे कहा कि वह नोट डबल करना जानता है। उसकी बात मानकर जब उसके साथ गया तो वह उसे वीरान जगह पर ले गया। जहां लगभग एक घंटे पूजा की गई जिसके बाद एक भूत प्रकट हुआ। भूत को उस व्यक्ति ने रुपए से भरा बैग दिया। भूत ने उसे नोट डबल करके दे दिए। इसके बाद भूत गायब हो गया।

    12 जुलाई 2018 को वह एक बार फिर एक लाख 51 हजार रुपए लेकर उस व्यक्ति के साथ उसी वीरान जगह पर गया। पूजा करने के बाद भूत प्रकट हुआ। उसने नोटों से भरा बैग भूत के हाथ में दे दिया, लेकिन इस बार काफी इंतजार करने के बाद भी भूत वापस नहीं आया। पुलिस ने इस मामले में आदेगांव निवासी भागचंद चौकसे, गणेश गोसाई और गुट्टूलाल गोसाई को धारा 420 और 120 बी के तहत 30 सितंबर को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

    आरोपियों की ओर से अधिवक्ता जयंत नीखरा ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता नोट डबल कराना चाहता है। इसलिए शिकायतकर्ता की भी मंशा साफ नहीं थी। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत दे दी।

    Posted By: Sanjeev Tiwari

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    SunnyDecember 31, 2018
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    1min320

    जयपुर|पकड़े गए आरोपी समीर उल्ला बेग व साली रेहाना बेग स्वेज फार्म सोढ़ाला के रहने वाले है। एसआई कमलेश शर्मा ने बताया कि इस संबंध में पिछले साल नाई की थड़ी निवासी नसीम ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरोपियों ने टोंक फाटक के पास एक ऑफिस खोल रखा था। जहां पर धन दुगना करने का झांसा देकर 43 हजार रुपए हड़प लिए। आरोपियों के खिलाफ कमिश्नरेट के कई थानों में मुकदमे दर्ज है।

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