Jobs & Employment Archives - earn money online hindi news: Sunnywebmoney.com

SunnyNovember 17, 2018
BJP_Shivraj.PNG

3min110

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है. बीजेपी ने अपने घोषणापत्र को ‘दृष्टि पत्र’ नाम दिया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की मौजूदगी में राजधानी भोपाल में पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया.

शिवराज सरकार ने सूबे की सत्ता में वापसी के लिए पार्टी के घोषणा पत्र में तमाम नए वादे किए हैं. इनमें युवाओं को हर साल 10 लाख नए रोजगार, युवा उद्यमियों को स्टार्टअप की सुविधाएं, 12वीं में 75 फीसदी अंक हासिल करने वाली छात्राओं को स्कूटी, किसानों को बोनस जैसे कई वादे किए गए हैं.

BJP ने घोषणा पत्र में जनता से किए ये वादेः

  • हर साल 10 लाख रोजगार, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास
  • युवा उद्यमियों को स्टार्ट-अप की सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे
  • नए इंडस्ट्रियल टाउनशिप स्थापित करेंगे.
  • व्यापारी कल्याण कोष की स्थापना करने का लक्ष्य
  • महिला सशक्तिकरण के लिए स्वसहायता समूहों, तेजस्विनी द्वारा स्वरोजगार को अभियान बनाया जाएगा
  • नर्मदा एक्सप्रेस वे, चंबल एक्सप्रेस वे और औद्योगिक कॉरीडोर विकसित करने का लक्ष्य
  • बिजली क्षमता को 14000 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य
  • मेट्रो प्रोजेक्ट प्रस्तावित है
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के लिए नलजल योजना
  • पारंपरिक व्यवसायों संबंधी प्रशिक्षण और इन व्यवसायों को अन्य कौशल कार्यक्रमों के समकक्ष बनाने हेतु एक राज्यस्तरीय ‘कारीगर यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की जाएगी
  • हम आर्थिक रूप से पिछड़े हुए सामान्य वर्ग के छात्रों को शिक्षा संबंधी आर्थिक सहायता और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने और नई योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु ‘समग्र सशक्तिकरण योजना’ की शुरुआत करेंगे
  • विश्व स्तरीय स्कूली शिक्षा प्रदान करने के लिए डिजिटल कक्षाओं, टिंकरिंग प्रयोगशालाओं और आधुनिक आवासीय सुविधाओं से सुसज्जित 100 नए ‘विद्या उपसना स्मार्ट विद्यालयों’ की स्थापना की जाएगी
  • हम निर्बाध सड़क संचार के लिए ‘अटल समृद्धि माला’ नामक एक व्यापक कनेक्टिविटी योजना शुरू करेंगे जिसका मुख्य उद्देश्य बाजारों और सामाजिक सेवाओं को सुलभ बनाना होगा
  • हमारे छोटे किसान जिन्हें कृषक समृद्धि योजना या भावांतर भुगतान योजना का लाभ नहीं मिल पाता है, उनके लिए ‘लघु किसान स्वावलंबन योजना’ के माध्यम से, उनकी कृषि भूमि के रकबे के मान से संबंधित फसल के उत्पादन अनुरूप कृषक समृद्धि योजना के समानुपातिक बोनस का लाभ देंगे.
  • खाद्य प्रसंस्करण संबंधी तकनीकी सहायता, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक ‘मध्यप्रदेश फूड प्रोसेसिंग यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की जाएगी
  • प्रदेश की कृषि उपज और अन्य औद्योगिक उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित बंदरगाह की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु समुद्र किनारे जमीन प्राप्त कर ‘मध्यप्रदेश समृद्धि पोर्ट’ का निर्माण किया जायेगा.

BJP के घोषणापत्र में किसानों के लिए क्या है?

घोषणा पत्र जारी करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘ हमने कृषक समृद्धि योजना बनाई. लेकिन इस योजना से छोटे किसानों को लाभ नहीं मिल पाता. छोटे किसान इस योजना के लाभ से वंचित ना रहें, इसलिए हमने दृष्टि पत्र में तय किया कि किसानों के अनुपात के अनुसार उनके खाते में राशि डाली जाएगी.’

शिवराज ने कहा, ‘मूल्य स्थिरीकारण कोश जो पहले 500 करोड़ रुपये से आरंभ हुआ था. हमने इसे बढ़ाकर 2000 करोड़ करने का निर्णय लिया, ताकि बाजार मूल्य गिरने की दशा में किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सके. सिंचाई का रकबा 80 लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य है.’

उन्होंने कहा, ‘हमारे छोटे किसान जिन्हें कृषक समृद्धि योजना या भावांतर भुगतान योजना का लाभ नहीं मिल पाता है, उनके लिए ‘लघु किसान स्वावलंबन योजना’ के माध्यम से, उनकी कृषि भूमि के रकबे के मान से संबंधित फसल के उत्पादन अनुरूप कृषक समृद्धि योजना के समानुपातिक बोनस का लाभ देंगे.’

ये भी पढ़ें : मध्य प्रदेश चुनावः यहां देखिए BJP के 177 उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट

(यहां क्लिक कीजिए और बन जाइए क्विंट की WhatsApp फैमिली का हिस्सा. हमारा वादा है कि हम आपके WhatsApp पर सिर्फ काम की खबरें ही भेजेंगे.)

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 17, 2018
jobs_2_1542359805.jpg

1min90

तीसरा एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच

दक्षिण अफ्रीका320/5(50.0)

ऑस्ट्रेलिया280/9(50.0)

दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को 40 रनों से हराया

Sun, 11 Nov 2018 08:20 AM IST

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 17, 2018
mpcg-172338506-large.jpg

1min100

जिले में कौशल विकास योजना के तहत युवाओं की ट्रेनिंग पर पिछले छह साल में करीब 25 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन रोजगार केवल 8 हजार युवाओं को मिले। जबकि 22 हजार युवाओं को ट्रेनिंग दी गई थी। करीब 40 प्रतिशत यानि 32 सौ युवाओं ने जॉब छोड़ भी दी। हालत यह है कि कौशल विकास योजना शुरू होने पर जिले में बेरोजगारों की संख्या घटने के बजाय और बढ़ गई।

2013 में जब यह योजना शुरू हुई थी, बेरोजगारों की संख्या 40 हजार थी, विभागीय जानकारी के अनुसार अब 60 हजार के पार हो चुकी है। भास्कर ने जब इतने भारी भरकम खर्च के बावजूद योजना की इस हालत की पड़ताल की तो पता चला कि जॉब दिलाना एक औपचारिकता भर थी। ताकि कागजों पर आंकड़े दर्शाए जा सकें। दिलाई गई जॉब सही है या नहीं, युवा जॉब कर रहे हैं या नहीं इसकी चिंता अधिकारियों ने नहीं की। और तो और जॉब छोड़ने वाले युवाओं की जानकारी भी नहीं रखी। कंपनियों ने भी विभाग को जानकारी नहीं दी। कौशल विकास योजना के तहत ट्रेनिंग देने के बाद प्लेसमेंट के जरिए बेरोजगारों को नौकरी दिलाई जाती है। पिछले एक साल में ही 30 प्लेसमेंट कैंप लगाए गए। इसमें 2 हजार लोगों को नौकरी मिली। ज्यादातर नौकरियां सिक्योरिटी गार्ड और वेटर, सेल्स एक्जीक्यूटिव के थे। इनमें से भी अनेक लोगों ने नौकरी छोड़ दी है।

90% ट्रेनिंग ग्रामीणों को

कौशल विकास योजना में 8वीं पास बेरोजगार ट्रेनिंग ले सकते हैं। योजना में सिक्योरिटी गार्ड, होटल मैनेजमेंट, ब्यूटी पार्लर, सिलाई मशीन, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिकल, ड्रायवर, कम्प्यूटर, टीवी रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग सहित 22 ट्रेड में ट्रेनिंग दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्र के 90 प्रतिशत युवाओं ने ट्रेनिंग ली है। कई लोगों ने तो प्लेसमेंट में नौकरी लगने के बाद छोड़ दी और घर पर ही छोटे-मोटे दुकान डाल दी।

जॉ़ब छो़ड़ने के मुख्य कारण

कार्यालय में हर महीने 150 से अधिक नए बेरोजगारों का पंजीयन हो रहा।

जॉब छोड़ने वालों की परेशानियों को आप ऐसे समझें

2016 में सिक्यूरिटी गार्ड की ट्रेनिंग लेने वाले ग्राम सोरम के लक्ष्य साहू, छाती के विकास ध्रुव, अछोटा के युगेंद्र देवांगन ने बताया कि प्लेसमेंट के समय नौकरी स्थल रायपुर बताया गया, कुछ महीने काम लेने के बाद दूसरे जिलों में जाने के लिए कहा गया। ऐसे मेंं ज्यादा तनख्वाह मिलनी चाहिए लेकिन नहीं मिलती।

केस-1

सिर्फ वीटीपी सेंटर संचालकों की ही हुई कमाई

नगरी निवासी खिलेन्द्र नेताम, युगल ठाकुर ने बताया कि 2017 में कंपोजिट बिल्डिंग में प्लेसमेंट कैंप लगा था। फील्ड वर्कर की नौकरी में प्लेसमेंट हुआ, लेकिन दूसरे काम भी करा रहे थे। टीए, डीए भत्ता भी नहीं मिल रहा था। इसकी मांग की तो विवाद की स्थिति बन गई अंत में काम छोड़ना पड़ा।

केस-2

सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने कौशल विकास याेजना चलाई। वास्तव में इसका लाभ बेरोजगारों को कम और वीटीपी सेंटर संचालकों को ज्यादा मिला। सेंटर संचालकों की ही ज्यादा कमाई हुई। एक बेरोजगार को ट्रेनिंग दिलाने के लिए लगभग 8 से 10 हजार रुपए खर्च किए गए।

पूरे जिले में 60 हजार लोग हैं बेरोजगार


पिछले 2 साल में 60 प्रतिशत का प्लेसमेंट हुआ

कौशल विकास विभाग के सहायक संचालक शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि पिछले 2 साल में 60 प्रतिशत ट्रेनिंग लेने वालों का प्लेसमेंट कराया गया है। पहले प्लेसमेंट कम हो रहे थे, इसलिए यदि 5 साल का औसत निकालते हैं, तो प्लेसमेंट की संख्या कम ही आएगी। जनवरी से अक्टूबर 2018 के बीच बड़े रूप में प्लेसमेंट कैंप भी कराया गया था।

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 17, 2018
NBT.jpg

1min110

एनबीटी, अंबिकापुर/बिलासपुर: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एमपी के देवरी सागर में रैली के दौरान कहा, ‘मोदी जी आते हैं। 15 लाख का वायदा करेंगे, 2 करोड़ युवाओं को रोजगार का वादा करेंगे। लेकिन अपने भाषण में इस बारे में एक शब्द नहीं बोलते की साढ़े 4 साल कितने युवाओं को रोजगार दिया। इस बारे में कोई रेकार्ड नहीं बताते। मध्य प्रदेश की सरकार ने 15 साल और केंद्र ने 4 साल में कितनों को रोजगार दिया, किसी को नहीं बताया।’

राहुल ने कहा कि मोदी जी ने साढ़े 4 साल में तीन लाख 50 हजार करोड़ रुपया हिंदुस्तान के सबसे अमीर लोगों का माफ किया है। मनरेगा को चलाने में 33 हजार करोड़ रुपये लगते हैं, इससे 10 गुना पैसा मोदी जी ने अपने चुने हुए उद्योगपतियों को दे दिया।

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 16, 2018
mpcg-172338240-large.jpg

1min70

जिले में कौशल विकास योजना के तहत युवाओं की ट्रेनिंग पर पिछले छह साल में करीब 25 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन रोजगार केवल 8 हजार युवाओं को मिले। जबकि 22 हजार युवाओं को ट्रेनिंग दी गई थी। करीब 40 प्रतिशत यानि 32 सौ युवाओं ने जॉब छोड़ भी दी। हालत यह है कि कौशल विकास योजना शुरू होने के बाद जिले में बेरोजगारों की संख्या घटने के बजाय और बढ़ गई।

वर्ष 2013 में जब यह योजना शुरू हुई थी, बेरोजगारों की संख्या 40 हजार थी, विभागीय जानकारी के अनुसार अब 60 हजार के पार हो चुकी है। भास्कर ने जब इतने भारी भरकम खर्च के बावजूद योजना की इस हालत की पड़ताल की तो पता चला कि जॉब दिलाना एक औपचारिकता भर थी। ताकि कागजों पर आंकड़े दर्शाए जा सकें। दिलाई गई जॉब सही है या नहीं, युवा जॉब कर रहे हैं या नहीं इसकी चिंता अधिकारियों ने नहीं की। और तो और जॉब छोड़ने वाले युवाओं की जानकारी भी नहीं रखी। कंपनियों ने भी विभाग को जानकारी नहीं दी। कौशल विकास योजना के तहत ट्रेनिंग देने के बाद प्लेसमेंट के जरिए बेरोजगारों को नौकरी दिलाई जाती है। पिछले एक साल में ही 30 प्लेसमेंट कैंप लगाए गए। इसमें 2 हजार लोगों को नौकरी मिली। ज्यादातर नौकरियां सिक्योरिटी गार्ड और वेटर, सेल्स एक्जीक्यूटिव के थे।

ट्रेनिंग लेने वालों में 90 प्रतिशत ग्रामीण

कौशल विकास योजना में 8वीं पास बेरोजगार ट्रेनिंग ले सकते हैं। योजना में सिक्योरिटी गार्ड, होटल मैनेजमेंट, ब्यूटी पार्लर, सिलाई मशीन, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिकल, ड्रायवर, कम्प्यूटर, टीवी रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग सहित 22 ट्रेड में ट्रेनिंग दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्र के 90 प्रतिशत युवाओं ने ट्रेनिंग ली है। कई लोगों ने तो प्लेसमेंट में नौकरी लगने के बाद छोड़ दी और घर पर ही छोटे-मोटे दुकान डाल दी।

जॉ़ब छो़ड़ने के मुख्य कारण ये सामने आए


जिला रोजगार कार्यालय में हर महीने 150 से अधिक का पंजीयन हो रहा।

जॉब छोड़ने वालों की परेशानियों को आप ऐसे समझें

2016 में सिक्योरिटी गार्ड की ट्रेनिंग लेने वाले ग्राम सोरम के लक्ष्य साहू, छाती के विकास ध्रुव, अछोटा के युगेंद्र देवांगन ने बताया कि प्लेसमेंट के समय नौकरी स्थल रायपुर बताया गया, लेकिन कुछ महीने काम लेने के बाद दूसरे जिलों में जाने के लिए कहा गया। दूसरी जगह काम करने पर ज्यादा तनख्वाह मिलनी चाहिए।

केस-1

सिर्फ वीटीपी सेंटर संचालकों की ही हुई कमाई

सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने कौशल विकास याेजना चलाई। वास्तव में इसका लाभ बेरोजगारों को कम और वीटीपी सेंटर संचालकों को ज्यादा मिला। सेंटर संचालकों की ही ज्यादा कमाई हुई। एक बेरोजगार को ट्रेनिंग दिलाने के लिए लगभग 8 से 10 हजार रुपए खर्च किए गए।

नगरी निवासी खिलेन्द्र नेताम, युगल ठाकुर ने बताया कि 2017 में कंपोजिट बिल्डिंग में प्लेसमेंट कैंप लगा था। फील्ड वर्कर की नौकरी में प्लेसमेंट हुआ, लेकिन दूसरे काम भी करा रहे थे। टीए, डीए भत्ता भी नहीं मिल रहा था। इसकी मांग की तो विवाद की स्थिति बन गई अंत में काम छोड़ना पड़ा।

केस-2

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 16, 2018

1min60

सीएम योगी आदित्यनाथ
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले पांच साल में प्रदेश में ढाई लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराए जाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर में पांच साल में 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे प्रदेश का औद्योगिक स्वरूप बदलेगा। यहां नौकरियों की भरमार होगी। सरकार इस लक्ष्य को हर हाल में हासिल करेगी। 

आईआईए और यूपीडा की ओर से सीएसए परिसर में आयोजित तीन दिवसीय यूपी डिफेंस एक्सपो-18 के समापन पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने रक्षा प्रतिष्ठानों और उद्यमियों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके बाद उद्यमियों और प्रदर्शनी देखने आई आम जनता को संबोधित किया। बोले, अगले कुछ महीनों में प्रदेश की बदली हुई तस्वीर आपके सामने होगी।

अगले महीने दिसंबर में यहां एक लाख करोड़ रुपये से लगने वाले उद्योगों का भूमि पूजन होगा। इसके बाद जनवरी में डिफेंस कॉरिडोर में निवेश करने वाले उद्यमियों की इकाइयों के भूमि पूजन की तैयारी है। आने वाले वर्षों में प्रदेश को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों में नंबर एक बनाने का प्रयास है। इसी तरह यूपी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी देश में नंबर-एक पर होने का लक्ष्य हासिल करेगा।

 
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि प्रदेश में सरकार बनने के एक साल के भीतर ही उन्होंने यहां इन्वेस्टर्स समिट किए जाने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया था। तब वे स्वयं आश्चर्यचकित थे कि इतनी जल्दी यह सब कैसे संभव होगा। आखिरकार प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताया और नतीजा सभी के सामने है। प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए अब तक 21 तरह की औद्योगिक नीतियों की घोषणा की जा चुकी है। मानव हस्तक्षेत्र रहित निवेश मित्र पोर्टल की शुरुआत इसलिए की गई है ताकि उद्यमियों की फाइल महीनों सरकारी दफ्तरों में न फंसी रहे। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में आसान उद्यमिता के लक्ष्य को साकार किया जाए। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी डिफेंस एक्सपो-18 का आयोजन प्रदेश में रक्षा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को और बढ़ाएगा। यह पहला मौका है जब रक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले, उन पर अनुसंधान करने वाले और रक्षा उपकरणों को बनाने वाले सरकारी उपक्रम व उद्यमी एक छह के नीचे आए। हर पक्ष ने अपनी जरूरतों को समझा और समस्याओं और संभावनाओं को साझा किया। इस प्रयास के लिए उन्होंने डिफेंस कॉरिडोर के नोडल विभाग उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की तारीफ की। कहाकि दोनों संस्थान डिफेंस कॉरिडोर परियोजना को आगे बढ़ाने में इसी मनोभाव से जुटे रहें। 

 
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका नगण्य है। कुछ गिने चुने उद्यमी ही अपने बल पर इस तरह का प्रयास कर रहे हैं। सरकार उन्हें अब प्रोत्साहित करेगी। भारत रक्षा उपकरणों के आयात के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है। घरेलू बाजार से महज 30 फीसदी ही आपूर्ति हो पा रही है। इसलिए इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि भारतीय सेना 100 फीसदी स्वदेशी उपकरणों और हथियारों का इस्तेमाल करे। यह सपना डिफेंस कॉरिडोर परियोजना से ही पूरा हो सकेगा। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले पांच साल में प्रदेश में ढाई लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराए जाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर में पांच साल में 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे प्रदेश का औद्योगिक स्वरूप बदलेगा। यहां नौकरियों की भरमार होगी। सरकार इस लक्ष्य को हर हाल में हासिल करेगी। 

आईआईए और यूपीडा की ओर से सीएसए परिसर में आयोजित तीन दिवसीय यूपी डिफेंस एक्सपो-18 के समापन पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने रक्षा प्रतिष्ठानों और उद्यमियों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके बाद उद्यमियों और प्रदर्शनी देखने आई आम जनता को संबोधित किया। बोले, अगले कुछ महीनों में प्रदेश की बदली हुई तस्वीर आपके सामने होगी।

अगले महीने दिसंबर में यहां एक लाख करोड़ रुपये से लगने वाले उद्योगों का भूमि पूजन होगा। इसके बाद जनवरी में डिफेंस कॉरिडोर में निवेश करने वाले उद्यमियों की इकाइयों के भूमि पूजन की तैयारी है। आने वाले वर्षों में प्रदेश को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों में नंबर एक बनाने का प्रयास है। इसी तरह यूपी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी देश में नंबर-एक पर होने का लक्ष्य हासिल करेगा।

 

विज्ञापन


आगे पढ़ें

तब वे स्वयं आश्चर्यचकित थे कि इतनी जल्दी यह सब कैसे संभव होगा…


Source link


SunnyNovember 16, 2018
1542362042_Master.jpg

3min140

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार झुंझुनू जिले की काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, यहां कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोगों ने रैली में काले झंडे दिखाए थे। बताया गया कि ये संविदा कर्मचारी थे जो रेग्युलर करने की मांग कर रहे थे। इस घटना से वसुंधरा राजे सरकार को बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी। ऐसे में लोगों की दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि जिले में वोटों का गणित क्या है और किन उम्मीदवारों में सीधी टक्कर है? आइए विस्तार से समझते हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार झुंझुनू जिले की काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, यहां कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोगों ने रैली में काले झंडे दिखाए थे। बताया गया कि ये संविदा कर्मचारी थे जो रेग्युलर करने की मांग कर रहे थे। इस घटना से वसुंधरा राजे सरकार को बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी। ऐसे में लोगों की दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि जिले में वोटों का गणित क्या है और किन उम्मीदवारों में सीधी टक्कर है? आइए विस्तार से समझते हैं।


 

पाइए इन्फोग्राफिक्स समाचार(Infographics News in Hindi)सबसे पहले नवभारत टाइम्स पर। नवभारत टाइम्स से हिंदी समाचार (Hindi News) अपने मोबाइल पर पाने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App और रहें हर खबर से अपडेट।

Infographics
News
 से जुड़े हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए NBT के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें
Web Title jhunjhunu lack of jobs in shekhawati

(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)


Source link


SunnyNovember 15, 2018
16_11_2018-15ktl16_18640911_1493.jpg

1min140

Publish Date:Fri, 16 Nov 2018 01:48 AM (IST)

सुरेंद्र सैनी, कैथल

स्वास्थ्य विभाग की सरकारी नौकरी से चिकित्सकों का मोहभंग हो रहा है। जहां चार चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया है, वहीं 11 ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे हैं। इनमें एक तो वर्ष 2010 से ड्यूटी पर नहीं आया है। डॉक्टरों के ड्यूटी पर न आने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इन दिनों डेंगू व वायरल के केसों के कारण ओपीडी ज्यादा है। चिकित्सकों की कमी से मरीजों को देरी से इलाज मिल रहा है। कई मरीज तो नंबर न आने के कारण वापस लौटने पर भी मजबूर हैं।

सुबह से लगते लाइन में, दोपहर तक आता नंबर

पहले ओपीडी में फिर जांच के लिए लैब के बाहर मरीज कतारों में खड़े नजर आते हैं। सुबह लाइन में लगने के बाद दोपहर तक मुश्किल से नंबर आता है। अगर चिकित्सक ने टेस्ट लिख दिए तो अगले दिन अस्पताल में फिर से आना पड़ता है। दो से तीन दिन में जाकर इलाज पूर हो पाता है। लोग गंभीर बीमारियों को लिए घंटों तक लाइनों में लगे रहने को मजबूर हैं। जिला नागरिक अस्पताल में इस समय स्वीकृत पद 55 हैं, लेकिन चिकित्सक मात्र 20 कार्यरत हैं। रिक्त पदों के चलते एक चिकित्सक पर ओपीडी के साथ-साथ दूसरे विभागों का भी कार्यभार है। ये चिकित्सक चल रहे गैरहाजिर

नाम अस्पताल अनुपस्थिति तिथि

डॉ. रवि गर्ग नागरिक अस्पताल एक जून 2015

डॉ. आशीष कुमार नागरिक अस्पताल छह जून 2016

डॉ. मनीष गोयल नागरिक अस्पताल 30 जनवरी 2015

डॉ. निशा जजोडिया नागरिक अस्पताल नौ अक्टूबर 2015

डॉ. मंदीप कौर नागरिक अस्पताल आठ अक्टॅबर 2015

डॉ. परणीत ¨सह सिविल अस्पताल राजौंद एक जून 2012

डॉ. अंनजीत कौर सिविल अस्पताल राजौंद सात अगस्त 2013

डॉ. र¨वद्र ¨सह सिविल अस्पताल कलायत छह अगस्त 2014

डॉ. शिवानी गुप्ता सिविल अस्पताल कलायत 22 मार्च 2014

डॉ. शिवनीत कौर सिविल अस्पताल गुहला 13 नवंबर 2015

डॉ. निधि मित्तल सिविल अस्पताल पूंडरी तीन मई 2010 इन्होंने छोड़ी नौकरी

डॉ. गुरप्रीत कौर एमओ सिविल अस्पताल, 16 अक्टूबर 2018

बाक्स-

सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैन ने कहा कि ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे चिकित्सकों को नोटिस भेजा गया है। विभाग के उच्चाधिकारियों को भी इस बारे में रिपोर्ट दी गई है, जो भी आदेश आएंगे उस अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 15, 2018
satta-ka-semifinal-jaipur_1542281556.jpeg

1min100

सत्ता का सेमीफाइनल में क्या कहती है जयपुर की जनता?
– फोटो : Amar Ujala

ख़बर सुनें

अमर उजाला आपको बता रहा है राजस्थान के जमीनी हालात और उन विषयों के बारे में जो इस बार चुनावी मुद्दे हैं। इसी के मद्देनजर अमर उजाला का चुनाव रथ पहुंचा है जयपुर। संवाददाता अभिलाषा पाठक ने आम जनता और सियासी दलों से बात करके यहां का मिजाज टटोलने की कोशिश की। 

विज्ञापन

टी वैली प्रायोजित अमर उजाला के खास लाइव कार्यक्रम सत्ता के सेमीफाइनल में जानिए कि जयपुर इस बार किन मुद्दों पर वोट करने वाला है। 

इस चर्चा में भाजपा से लक्ष्मीकांत भारद्वाज, कांग्रेस से मनोज मुद्गल, घनश्याम तिवाड़ी के नई नवेले दल भारत वाहिनी पार्टी से दयाराम महेरिया और इलेक्शन वॉच से कमल टांक ने हिस्सा लिया।

26 हजार नौकरियों का सवाल

चुनाव से ऐन पहले वसुंधरा सरकार के नौकरियों के एलान के बाद मामला आचार संहिता में फंस गया और इस पर रोक लग गई। ये मुद्दा हमारे इस कार्यक्रम मे भी खूब उछला। सरकार पर जब बेरोजगारी दूर न कर पाने के आरोप लगे तो भाजपा प्रतिनिधि ने कहा कि जिन 26 हजार नौकरियों की बात हो रही, उन शिक्षकों को सिर्फ पोस्टिंग दी जानी बाकी थी, बाकी प्रक्रिया निपट गई थी। सचिन पायलट के निर्देश पर 16 अक्तूबर को चुनाव आयोग में कांग्रेस गई और इस पर रोक लगवा दी।

एक छात्र ने कहा कि सरकार ने जो वैकेंसी निकाली हैं वो जल्द से जल्द भरनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि वसुंधरा सरकार पांच साल सोती रही, युवाओं को रोजगार नहीं दे पाई। एक और छात्र ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों से लोग परेशान हो चुके हैं और तीसरा विकल्प चाहते हैं।

अपनी-अपनी जीत के दावे

भाजपा नेता लक्ष्मीकांत ने कहा कि पार्टी अपनी 2013 की सीट संख्या को आगे बढ़ाएगी। नेता लोगों के बीच जा रहे हैं। कांग्रेस के मनोज मुद्गल ने इस पर हमला बोलते हुए कहा कि इस बार 15 मंत्रियों समेत 30 विधायकों की टिकट काट दी गई है। ये दिखाता है कि भ्रष्टाचार और कुशासन के बोलबाले की वजह से ऐसा हुआ है। कांग्रेस भले पिछली बार 21 पर सिमट गई हो, भाजपा तो मेटाडोर में आएगी। भारत वाहिनी पार्टी की नुमाइंदगी कर रहे दयाराम महेरिया ने वसुंधरा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।

भाजपा नेता ने टिकट काटे जाने वाली बात पर कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से चलती है। पहले भी ऐसा होता रहा है। किसी भी कार्यकर्ता को चुनाव लड़ाया जा सकता है। घनश्याम तिवाड़ी के बारे में भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया इसलिए वो पार्टी छोड़कर चले गए जिसे महेरिया ने गलत ठहराया।

नेताओं का विकल्प कहां हैं?

इलेक्शन वॉच के कमल टांक ने कहा कि होना तो ये चाहिए कि लोगों से जुड़े, साफ छवि वाले उम्मीदवार खड़े हों लेकिन चुनाव में आपराधिक छवि और धनबल का बोलबाला दिखाई देता है। रिपोर्ट कार्ड की बात नहीं होती बल्कि जाति और धर्म की बात होती है। नोटा के सवाल पर कहा कि सच्चे और अच्छे को चुनें। कुछ समझ न आए तो नोटा पर डालें लेकिन वोट डालना बहुत जरूरी है।

रिटायर्ड जेल अधीक्षक रमाकांत सक्सेना ने विकल्प का मुद्दा उठाया, “अच्छे और बुरे का विकल्प नहीं बचा। अब विकल्प खराब और कम खराब का है। महिला सुरक्षा को लेकर कोई काम नहीं हुआ। उनकी स्थिति और खराब हुई है।”

रिटायर्ड आईएएस ने कहा कि जनप्रतिनिधि शब्द में जन और प्रतिनिधि के बीच समय के साथ बहुत दूरी आ गई। जनप्रतिनिधि यानी नेताओं को जनता की बात सुननी-समझनी चाहिए और जनता को भी विवेक का इस्तेमाल करते हुए अपने नुमाइंदे को चुनना चाहिए।

जयपुर शहर और ग्रामीण मिलाकर 19 सीटें हैं जिनमें से 16 पर भाजपा का कब्जा है। राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होना है।

Let’s block ads! (Why?)


Source link



Sunnywebmoney.Com


CONTACT US




Newsletter


Categories