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SunnyJuly 17, 2018
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1min00

तीसरा एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच

जिम्बाब्वे

पाकिस्तान

क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब, बुलावायो

Wed, 18 Jul 2018 12:45 PM IST

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SunnyJuly 17, 2018
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What is the truth of the India jobs story? as we head into election year, a new report by one of Prime Minister Narendra Modi’s economic advisors says 13 million jobs were created last year but other experts dispute this and in fact say things are not looking so good for the next year or two. So which data should we believe? Is India really in the middle of jobless growth? Or are things better than we think?


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SunnyJuly 16, 2018
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कुछ दिनों पहले पीएम मोदी ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ईपीएफओ का हवाला देते हुए कहा था कि पिछले साल संगठित क्षेत्रों में 70 लाख नौकरियां पैदा हुई थीं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि देश में रोजगार की कोई कमी नहीं है, समस्या केवल इतनी है कि इसके सही आंकड़ें मौजूद नहीं हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- पीटीआई)

नौकरी के मुद्दे पर कांग्रेस अक्सर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को घेरती रही है। विपक्ष द्वारा नौकरी को लेकर विपक्ष के सवालों के जवाब देने के लिए बीजेपी की तरफ से भी तैयारियां की जा रही हैं। लोकसभा चुनाव से पहले के महत्वपूर्ण समय में बेरोजगार आर्थिक विकास (जॉबलेस इकॉनोमिक ग्रोथ) को लेकर विपक्ष के द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के लिए सरकार कमर कस रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों के साथ मीटिंग करने जा रहे हैं। इस मीटिंग में वर्तमान में रोजगार की स्थिति और जॉब जनरेशन के हाल के आंकड़ों पर चर्चा की जाएगी।

द प्रिंट के मुताबिक इस मीटिंग में वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक के ताजा रोजगार डाटा पर चर्चा होगी। पीएम मोदी इस मीटिंग में मौजूद रहेंगे और पूरी स्थिति की जायजा लेंगे। यह मीटिंग बीजेपी और पीएम मोदी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कुछ ही महीनों बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव और 2019 में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस बीजेपी पर हमला करने के लिए रोजगार का मुद्दा जरूर उठाएगी। नरेंद्र मोदी की सरकार ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जनता से ‘अच्छे दिन’ और रोजगार के अवसर देने का वादा किया था।

बता दें कि कुछ दिनों पहले पीएम मोदी ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ईपीएफओ का हवाला देते हुए कहा था कि पिछले साल संगठित क्षेत्रों में 70 लाख नौकरियां पैदा हुई थीं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि देश में रोजगार की कोई कमी नहीं है, समस्या केवल इतनी है कि इसके सही आंकड़ें मौजूद नहीं हैं। मोदी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांती घोष और आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर पुलक घोष की इस साल जनवरी में आई एक रिपोर्ट के आधार पर यह बात कही। हालांकि इस रिपोर्ट का कई अन्य अर्थशास्त्रियों द्वारा विरोध भी किया जा रहा है।

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SunnyJuly 16, 2018
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2min10

बगदाद, 16 जुलाई (आईएएनएस)| रोजगार और बुनियादी सेवाओं की कमी के विरोध में सैकड़ों इराकी प्रदर्शनकारियों ने रविवार को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, धी कार प्रांत में प्रांतीय परिषद की इमारत के आसपास दर्जनों प्रदर्शनकारी जुट गए और अन्य ने इराकी राजधानी बगदाद से 375 किलोमीटर दूर दक्षिण में नसीरीया शहर में अल-हिकमा, बद्र और फधिएला राजनीतिक दलों के कार्यालयों पर हमला कर दिया।

एक सूत्र ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की और इसमें कुछ लोगों के घायल होने की भी खबरें हैं।

प्रदर्शनकारियों ने व्यापक भ्रष्टाचार के पीछे प्रभावशाली दलों का हाथ होने का आरोप लगाया, जिसके चलते देश में बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सेवाओं के पुनर्वास व बेरोजगारी में वृद्धि हुई है।

मुथन्ना प्रांत में प्रदर्शन जारी रहा। दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने ने मुथन्ना की प्रांतीय परिषद की इमारत में घुसने की कोशिश की। घटनास्थल पर भारी गोलीबारी की आवाज सुनाई दी।

बाद में इराक के सरकारी चैनल ने घटना की पुष्टि की और कहा कि प्रांतीय परिषद की इमारत में प्रदर्शनकारियों को घुसने से रोकने की कोशिश के दौरान 14 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए और 27 प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाकर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया।

बगदाद से160 किलोमीटर दूर दक्षिण में बसे पवित्र शिया शहर नजफ में भी विरोध प्रदर्शन हुआ। सैकड़ों लोगों ने प्रांतीय सरकार की इमारत के पास रैली की। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया।

मयसान, वासित और बसरा प्रांतों के कई शहरों में भी प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन रोकने के लिए इराकी प्रधान मंत्री हैदर अल-अबादी द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद आठवें दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

इन कदमों में सरकारी संस्थानों में हजारों नौकरियां प्रदान करने के अलावा बिजली और जल सुविधाओं जैसे सार्वजनिक सेवाओं के लिए कई प्रमुख परियोजनाएं के संचालन के लिए तीन अरब डॉलर आवंटित करना शामिल रहा।

इस बीच इराकी बलों के कमांडर-इन-चीफ के रूप में अबादी ने विरोध प्रदर्शन के जवाब में मध्य और दक्षिणी प्रांतों में सुरक्षाबलों के लिए उच्च अलर्ट जारी करने का आदेश जारी दिया है।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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SunnyJuly 16, 2018
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1min20

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Updated Mon, 16 Jul 2018 11:11 AM IST

सैम पित्रोदा (प्रौद्योगिकीविद्)

ख़बर सुनें

अहमदाबाद के कर्णावती विश्वविद्यालय में भगवान और मंदिरों पर हो रही एक चर्चा के दौरान प्रख्यात प्रौद्योगिकीविद् सैम पित्रोदा ने कहा कि धर्म और मंदिरों से नौकरियां पैदा होने वाली नहीं हैं, केवल विज्ञान ही भविष्य का निर्माण करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब रोजगार के बारे में बात की जाती है, तो इसे एक राजनीतिक स्वरूप दे दिया जाता है और इसमें सच्चाई कम, शब्दाडंबर ज्यादा होता है।

पित्रोदा ने कहा कि जब मैं इस देश में मंदिर, धर्म, भगवान, जाति के बारे में चर्चाओं को सुनता हूं, तो मैं भारत के बारे में चिंता करता हूं। भविष्य में मंदिर रोजगार उत्पन्न नहीं करेंगे। केवल विज्ञान ही भविष्य को बना सकता है।

उन्होंने कहा 'हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र में विज्ञान पर बहुत कम ही चर्चा होती है। जब भी कोई रोजगार की बात करता है तो उसमें हमेशा एक राजनीतिक रंग होता है, जिसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं होता।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को लोगों द्वारा, मुख्य रूप से राजनेताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है। वो बेकार की बातें करते हैं जो उन्हें गलत रास्ते में ले जाता है। 'रोजगार और उद्यमिता' पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की नौकरियों को देखने के लिए भारत के पास 'सही मानसिकता' की कमी है क्योंकि नौकरियों की अवधारणा जिसे हम समझते हैं वह लंबे समय से मरा पड़ा है।

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SunnyJuly 16, 2018
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2min10

पित्रोदा ने कहा, ''तीन तरह के लोगों की बात आपको नहीं सुननी चाहिए- आपके माता-पिता, टीचर्स और तीसरे, राजनेता। ऐसा इसलिए क्‍योंकि उनके पास तकनीकी रूप से बदल रही दुनिया की सीमित जानकारी होती है।''

मशहूर टेक्‍नोक्रेट सैम पित्रोदा। (Photo: Express Archive)

सैम पित्रोदा ने कहा है कि मंदिर और धर्म पर बहस करके देश में नौकरियां नहीं पैदा होंगी। रविवार (15 जुलाई) को कर्णावती विश्‍वविद्यालय में यूथ पार्लियामेंट के आखिरी दिन, रोजगार और उद्यमशीलता पर बोलते हुए पित्रोदा ने कहा कि भविष्‍य विज्ञान और तकनीक में है। पित्रोदा ने छात्रों से कहा, ”इस देश में मंदिर, धर्म और जाति पर चल रही बहस देखकर मैं चिंतित हो जाता हूं। जब भी आप रोजगार की बात करते हैं, राजनैतिक हस्‍तक्षेप जरूर होता है।”

लोगों से नौकरियों को लेकर अपनी मानसिकता बदलने की अपील करते हुए पित्रोदा ने कहा, ”मंदिरों से युवाओं के लिए नौकरियां नहीं पैदा होने वालीं। हम आंकड़ों की बात करते हैं, हमने अपने युवाओं को गुमराह किया, हमने उन्‍हें गलत रास्‍ते पर ढकेला, हमने उनसे झूठ बोला। मैं कहता हूं कि तीन तरह के लोगों की बात आपको नहीं सुननी चाहिए- आपके माता-पिता, टीचर्स और तीसरे, राजनेता। ऐसा इसलिए क्‍योंकि उनके पास तकनीकी रूप से बदल रही दुनिया की सीमित जानकारी होती है।

पित्रोदा ने कहा कि रोबोटिक्‍स, ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन जैसी आधुनिक तकनीक हर जगह नौकरियों के लिए खतरा पैदा कर रही है। उन्‍होंने कहा, ”अगले 5 साल में, सेल्‍फ-ड्रिवेन कारों का उत्‍पादन 50 मिलियन से घटकर 5 मिलियन प्रतिवर्ष हो जाएगा। आपको कार इंश्‍योरेंस, लाइसेंस, गैराज या फिर पार्किंग लॉट की जरूरत नहीं पड़ेगी। भविष्‍य में, हमें ऑफिस या पार्किंग स्‍पेसेज की जरूरत नहीं पड़ेी क्‍योंकि हम अपने घरों से काम कर रहे होंगे।”

असमानता पर पित्रोदा ने कहा, ”समस्‍या ये है कि दुनिया के सर्वोत्‍तम मस्तिष्‍क अमीरों की समस्‍याएं सुलझाने में लगे हैं। भचिष्‍य चिंतानजक है, जहां हम बहुत अधिक खरबपति पैदा कर लेंगे, जबकि एक बड़ी आबादी गरीब रह जाएगी।”

गौरतलब है कि पूर्व उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी ने भी देश में धर्म के नाम पर हो रहीं हत्‍याओं को गलत ठहराया है। उन्‍होंने रविवार को एक इंटरव्‍यू में कहा कि देश में ‘अतिसतर्कता’ उफान पर है और यदि गौ रक्षक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात भी नहीं सुनते हैं तो यह चिंता का विषय है। अंसारी ने जोर देकर कहा कि समाज में अहिष्णुता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद ही सांप्रदायिक विभाजन उभरा, बल्कि यह काफी लंबे समय से है।

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SunnyJuly 16, 2018
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार के नियोजन विभाग और राइड-शेयरिंग कंपनी ओला के बीच रविवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ है। इस एमओयू का उद्देश्य राज्य में 35,000 उद्यमिता अवसरों का सृजन करना है। एमओयू को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की 'सक्षम हरियाणा' पहल के हिस्से, 'सक्षम सारथी' के शुभारंभ पर निष्पादित किया गया। 'सक्षम हरियाणा' को पिछले साल की शुरुआत में विभिन्न कौशल विकास पहल के द्वारा राज्य के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा आरंभ किया गया था। 

यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, उद्योग, वाणिज्य, पर्यावरण एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री विपुल गोयल की उपस्थिति में ओला के निदेशक प्रणव मेहता तथा हरियाणा सरकार के श्रम एवं नियोजन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नायब सैनी ने एमओयू को स्वीकार किए। यह एमओयू राज्य के युवाओं के लिए 2 लाख नौकरियों के सृजन के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को बल देने के प्रति ओला की वचनबद्धता का प्रमाण है। 

इस अवसर पर श्रम मंत्री नायब सैनी ने कहा, "सरकार ने सरकारी तथा निजी क्षेत्र में नौकरियों और स्वरोजगार के माध्यम से राज्य में दो लाख युवाओं को रोजगार मुहैया कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 'सक्षम सारथी' के सहारे सरकार को राज्य में युवाओं को उद्यमिता की राह पर उनकी सहायता करने में आसानी होगी।"

कौशल विकास एवं उद्योग मंत्री विपुल गोयल कहा, "हमें मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दो लाख रोजगार के अवसरों का लक्ष्य हासिल करने का पूरा विश्वास है। हम सरकार की दृष्टि और मिशन में सहयोग करने के लिए ओला के कदम की सराहना करते हैं।" ओला के निदेशक प्रणव मेहता ने कहा, "हरियाणा हमारे लिए एक प्रमुख बाजार है। हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकुला आदि जैसे शहरों का हमारे विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। 'सक्षम हरियाणा' जैसे प्रयासों का राज्य के सकल विकास में बड़ा योगदान होता है और इस प्रक्रिया में युवाओं के लिए हजारों की संख्या में उद्यमशील अवसर भी पैदा होते हैं।"

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SunnyJuly 15, 2018
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गांधीनगर: प्रौद्योगिकीविद् सैम पित्रोदा ने रविवार को यहां एक विश्वविद्यालय में छात्रों से कहा कि भविष्य में धर्म से नौकरियां उत्पन्न नहीं होंगी, केवल विज्ञान ही भविष्य का निर्माण करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि जब रोजगार के बारे में बात की जाती है तो इसे राजनीतिक रंग दे दिया जाता है और इसमें वास्तविकता कम , शब्दाडंबर ज्यादा होता है. पित्रोदा ने कहा , ‘ जब मैं इस देश में मंदिर , धर्म , ईश्वर , जाति के बारे में सभी चर्चाओं को सुनता हॅूं तो तब मैं भारत के बारे में चिंता करता हॅूं. भविष्य में मंदिरों से रोजगार उत्पन्न नहीं होगा. केवल विज्ञान ही भविष्य का निर्माण करेगा.

उन्होंने कहा कि हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र में विज्ञान पर बहुत कम चर्चा होती है. पित्रोदा ने कहा , ‘ जब भी कोई रोजगार के बारे में बात करता है तो हमेशा इसमें राजनीतिक रंग होता है. वास्तविकता बहुत कम और शब्दाडंबर ज्यादा होता है.पित्रोदा यहां कर्णावती विश्वविद्यालय में युवा संसद में बोल रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को लोगों को , खासकर राजनीतिक नेताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है , बेकार की चीजों पर बात की जा रही है जिससे वे गलत रास्ते पर जा रहे हैं.

नई तकनीक से पैदा हो रहे अवसर

दूसरी ओर केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि नई प्रौद्योगिकी से नौकरियां कम नहीं हो रही हैं , बल्कि इससे अधिक नौकरियां उत्पन्न हो रही हैं. प्रसाद ने गोवा सूचना प्रौद्योगिकी नीति 2018 का अनावरण करते हुए कहा कि मैं नौकरी कम होने के तर्क को नहीं मानता. मुझे ऐसा क्यों कहना चाहिए ? यदि नयी प्रौद्योगिकी से एक नौकरी जाती है तो इससे 20 और नौकरियां उत्पन्न होती हैं. मैं यह अपने अनुभव से कह रहा हॅूं.

केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की मौजूदगी में गोवा सूचना प्रौद्योगिकी दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा , ‘ सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में करीब 40 लाख लोग प्रत्यक्ष तौर पर काम करते हैं और यदि आप अप्रत्यक्ष रूप से देखें तो यह संख्या करीब सवा करोड़ है. उन्होंने नैसकॉम की रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि अकेले पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में ही लगभग छह लाख नौकरियां उत्पन्न हो रही हैं.

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SunnyJuly 15, 2018
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2min20

चंडीगढ़, 15 जुलाई (आईएएनएस)| हरियाणा सरकार के नियोजन विभाग और राइड-शेयरिंग कंपनी ओला के बीच रविवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ है।

इस एमओयू का उद्देश्य राज्य में 35,000 उद्यमिता अवसरों का सृजन करना है। एमओयू को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ‘सक्षम हरियाणा’ पहल के हिस्से, ‘सक्षम सारथी’ के शुभारंभ पर निष्पादित किया गया। ‘सक्षम हरियाणा’ को पिछले साल की शुरुआत में विभिन्न कौशल विकास पहल के द्वारा राज्य के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा आरंभ किया गया था।

यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, उद्योग, वाणिज्य, पर्यावरण एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री विपुल गोयल की उपस्थिति में ओला के निदेशक प्रणव मेहता तथा हरियाणा सरकार के श्रम एवं नियोजन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नायब सैनी ने एमओयू को स्वीकार किए। यह एमओयू राज्य के युवाओं के लिए 2 लाख नौकरियों के सृजन के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को बल देने के प्रति ओला की वचनबद्धता का प्रमाण है।

इस अवसर पर श्रम मंत्री नायब सैनी ने कहा, सरकार ने सरकारी तथा निजी क्षेत्र में नौकरियों और स्वरोजगार के माध्यम से राज्य में दो लाख युवाओं को रोजगार मुहैया कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ‘सक्षम सारथी’ के सहारे सरकार को राज्य में युवाओं को उद्यमिता की राह पर उनकी सहायता करने में आसानी होगी।

कौशल विकास एवं उद्योग मंत्री विपुल गोयल कहा, हमें मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दो लाख रोजगार के अवसरों का लक्ष्य हासिल करने का पूरा विश्वास है। हम सरकार की दृष्टि और मिशन में सहयोग करने के लिए ओला के कदम की सराहना करते हैं।

ओला के निदेशक प्रणव मेहता ने कहा, हरियाणा हमारे लिए एक प्रमुख बाजार है। हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकुला आदि जैसे शहरों का हमारे विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। ‘सक्षम हरियाणा’ जैसे प्रयासों का राज्य के सकल विकास में बड़ा योगदान होता है और इस प्रक्रिया में युवाओं के लिए हजारों की संख्या में उद्यमशील अवसर भी पैदा होते हैं।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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