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SunnyJanuary 16, 2019
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1min00

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि सरकारी नौकरियों में आवेदनों की भरमार को देश में रोजगार के अवसरों की कमी का पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। सरकारी नौकरी के आकर्षण का मुख्य कारण उसके सुरक्षित रहने का भाव है। भले काम कैसा भी हो।

उद्योग मंडल सीआईआई के रोजगार और आजीविका पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए रेलमंत्री ने यह बात कही। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। दोनों मंत्रियों ने कहा कि सरकार ने पिछले पांच साल में पर्याप्त रोजगार दिए हैं। जावड़ेकर ने कहा कि जो लोग अपनी रुचि के अनुसार काम नहीं कर पाते हैं, उन्हें बेरोजगार नहीं माना जा सकता।

रेलवे का उदाहरण देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि विभाग में कुछ पदों के लिए 1.5 करोड़ आवेदन मिले। इस प्रकार के आंकड़े का उपयोग प्राय: उच्च बेरोजगारी दर को रेखांकित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि परंपरागत भारतीय समाज में सरकारी नौकरियों का आकर्षण हीं ज्यादा है। लोगों को लगता है कि अगर उन्हें सरकारी नौकरी मिली, उनका जीवन पूरी तरह सुरक्षित है। वे स्थायी कर्मचारी हैं और अगर उन्होंने कोई दुराचरण भी किया और यह भी पाया गया कि वे काम में कच्चे हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यूनियन उसका ध्यान रखेगी। यह वास्तविकता है।

रेलमंत्री ने रेखांकित किया कि रोजगार के वैकल्पिक अवसर बढ़े हैं और नये क्षेत्र स्व-रोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसे रोजगार आंकड़ों में शामिल नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रणाली में बदलाव लाने और उसे उन्नत बनाने की जरूरत है।

सही आंकड़े एकत्र करने की जरूरत
जावड़ेकर ने कहा कि सही आंकड़े एकत्रित करने की जरूरत है और फिलहाल उन्हीं को शामिल किया जाता है, जो संगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। असंगठित क्षेत्र से कोई आंकड़ा नहीं लिया जाता। कई लोग अपना काम करते हैं। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं, जो अपनी रुचि के मुताबिक काम नहीं करती। क्या वे बेरोजगार हैं? इस मामले में कई पहलू हैं, जिन पर गौर किए जाने की जरूरत है। मानव संसाधन मंत्री ने भी कहा कि सरकारी नौकरी के लिए जो आकर्षण है, उसे समझने की जरूरत है। हमें यह पता लगाना है कि आखिर क्यों एमए पास सफाईकर्मियों के लिए भी आवेदन देते हैं।

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SunnyJanuary 15, 2019

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तीन साल से लगातार केंद्र सरकार और बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम हो गए हैं। ऐसे में हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गरीब आरक्षण कानून का लाभ सभी लोगों को कैसे मिलेगा यह सबसे बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधीन कार्मिक मंत्रालय के ताजा डाटा के अनुसार 2015 से 2017 के बीच नौकरियों के अवसर लगातार कम हुए हैं। यही हाल बैंकिंग क्षेत्र का भी है। 

1.13 लाख नौकरियां थीं 2015 में

डाटा के अनुसार 2015 में जहां सरकारी नौकरी का आंकड़ा 1.13 लाख थीं वहीं 2017 में यह केवल 1 लाख 900 रह गई। तीन साल का यह डाटा कार्मिक मंत्रालय ने यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी के जरिए एकत्र किया है।

इसी तरह का एक डाटा भारी उद्योग मंत्रालय की तरफ से भी जारी किया गया है, जिसके अनुसार पब्लिक सेक्टर कंपनियों में भी नौकरियों के अवसर काफी घट गए हैं। पीएसयू कंपनियों में 2014 में करीब 16.91 लाख लोगों को नौकरियां मिली थीं, वो 2017 में केवल 15.23 लाख रह गईं। 

हालांकि इस डाटा में राज्य सरकार, मंत्रालय व विभाग, वित्तीय संस्थान और केंद्र व राज्यों के आधीन विश्वविद्यालयों को शामिल नहीं किया गया है। 

बैंकों में अधिकारी पद बढ़े, क्लर्क की नौकरियां घटी

ऐसा ही कुछ हाल बैंकिंग क्षेत्र में भी देखने को मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों में भी अधिकारी के पद पर तो नौकरियों के अवसर बढ़े हैं, लेकिन क्लर्क व इससे नीचे के स्तर पर काम करने वालो की संख्या में कमी देखने को मिली है।

अधिकारी पद पर नौकरी लेने वालों की संख्या में 4.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। वहीं क्लर्क व इससे नीचे के पदों पर नौकरियों की संख्या में 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।  

ऐसे लगातार घटती गईं नौकरियां

अब हम आपको वो आंकड़ा बताने जा रहे हैं, जिसके अनुसार 2015 से 2017 के बीच कैसे सरकारी नौकरियों में कमी होती गई…

बैंक में ऐसे कम और बढ़ी नौकरियां

2014-15
अधिकारी     7,29,964
क्लर्क          3,76,608
कनिष्ठ वर्ग    1,84,970
कुल          12,91,542

2015-16
अधिकारी     7,71,064
क्लर्क          3,61,531
कनिष्ठ वर्ग    1,68,339
कुल          13,00,934

2016-17
अधिकारी     8,28,594
क्लर्क          3,60,381
कनिष्ठ वर्ग    1,60,916
कुल          13,49,916

केंद्र व रेलवे में ऐसे कम हुई नौकरियां

साल             यूपीएससी      एसएससी   आरआरबी        कुल
2016-17      5,735             68,880         26,318          1,00,933
2015-16      6,886             25,138         79,803          1,11,807
2014-15      8,272             58,066         47,186          1,13,524
 

तीन साल से लगातार केंद्र सरकार और बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम हो गए हैं। ऐसे में हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गरीब आरक्षण कानून का लाभ सभी लोगों को कैसे मिलेगा यह सबसे बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधीन कार्मिक मंत्रालय के ताजा डाटा के अनुसार 2015 से 2017 के बीच नौकरियों के अवसर लगातार कम हुए हैं। यही हाल बैंकिंग क्षेत्र का भी है। 

1.13 लाख नौकरियां थीं 2015 में

डाटा के अनुसार 2015 में जहां सरकारी नौकरी का आंकड़ा 1.13 लाख थीं वहीं 2017 में यह केवल 1 लाख 900 रह गई। तीन साल का यह डाटा कार्मिक मंत्रालय ने यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी के जरिए एकत्र किया है।

इसी तरह का एक डाटा भारी उद्योग मंत्रालय की तरफ से भी जारी किया गया है, जिसके अनुसार पब्लिक सेक्टर कंपनियों में भी नौकरियों के अवसर काफी घट गए हैं। पीएसयू कंपनियों में 2014 में करीब 16.91 लाख लोगों को नौकरियां मिली थीं, वो 2017 में केवल 15.23 लाख रह गईं। 

हालांकि इस डाटा में राज्य सरकार, मंत्रालय व विभाग, वित्तीय संस्थान और केंद्र व राज्यों के आधीन विश्वविद्यालयों को शामिल नहीं किया गया है। 

बैंकों में अधिकारी पद बढ़े, क्लर्क की नौकरियां घटी

ऐसा ही कुछ हाल बैंकिंग क्षेत्र में भी देखने को मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों में भी अधिकारी के पद पर तो नौकरियों के अवसर बढ़े हैं, लेकिन क्लर्क व इससे नीचे के स्तर पर काम करने वालो की संख्या में कमी देखने को मिली है।

अधिकारी पद पर नौकरी लेने वालों की संख्या में 4.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। वहीं क्लर्क व इससे नीचे के पदों पर नौकरियों की संख्या में 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।  

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SunnyJanuary 15, 2019
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2min50

New Delhi

oi-Hemraj

|

Published: Monday, January 14, 2019, 16:40 [IST]

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने जहां एक तरफ सवर्ण जातियों को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया है जो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रुप ले चुका है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी नौकरियों को लेकर जो आंकड़ा सामने आया है, इससे पता चलता है कि इन युवाओं को घटती नौकरियों की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार,केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई), यहां तक कि बैंक में भी लगातार नौकरियां कम हो रही हैं।

upper caste reservation: government,railway and bank jobs shrinking in upper caste reservation

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार,कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा पिछले तीन वर्षों में मुख्य एजेसियों- संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी),कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी),रेलवे भर्ती बोर्ड(आरआरबी)- द्वारा भर्ती के आंकड़े इकठ्ठा किए गए हैं। इन आंकड़ो से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2015 में 1,13,524 उम्मीदवारों का चयन और नियुक्ति हुई थी। जबकि इसकी तुलना में वित्तीय वर्ष साल 2017 में 1,00,933 उम्मीदवारों का चयन और नियुक्ति हुई।

वहीं भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय से प्राप्त अलग-अलग आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2014 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम(सीपीएसई) में कर्मचारियों की संख्या 16.91 लाख थी, जो वित्तीय वर्ष 2017 में घटकर 15.23 लाख हो गई। लेकिन 2017 में इसमें थोड़ी बढोतरी देखने को मिली, इससे पहले चार साल में लगातार गिरावट देखी जा रही थी।

हालांकि, इसमें अगर कॉन्ट्रैक्चुअल और कैज्युअल श्रमिकों की संख्या को निकाल दिया जाए तो, तो वित्तीय वर्ष 2017 में सीपीएसई द्वारा काम करने वालों की संख्या 11.31 लाख थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2016 में ये 11.85 लाख थी। इस दौरान कर्मचारियों की संख्या में 4.60 प्रतिशत की कमी आई।

वहीं बैंकों के मामले में, आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कुल रोजगार में लगभग 4.5 प्रतिशत की बढोतरी हुई लेकिन यो बढ़ोतरी अधिकारियों की नियुक्ति की वजह से हुई। वहीं बैंको की अन्य दो अन्य नौकरियों की श्रेणियों – क्लर्क और अधीनस्थ कर्मचारियों (सबऑर्डिनेट स्टाफ) में भर्ती वित्तीय वर्ष 2015 और वित्तीय वर्ष 2017 के बीच लगभग 8 प्रतिशत नीचे चली गई।

जब भारी उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी से सीपीएसई रोजगार में गिरावट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सीपीएसई में मैनपावर प्लानिंग और तैनाती उनके बिजनेस प्लास के उद्देश्यों और लक्ष्यों, मौजूदा व्यावसायिक स्थितियों एवं आवश्यकताओं और भविष्य के संचालन, विस्तार और निवेश योजना आदि जैसे अन्य कारकों से जुड़ी है। मैनपावर रोजगार में बदलाव के अन्य कारणों में सीपीएसई की रिटायरमेंट और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना शामिल हैं।

गौरतलब है यूपीएससी सिविल सर्विस और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए परीक्षा आयोजित करता है और एसएससी विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों में निचले पदों के लिए परीक्षा आयोजित करता है। जबकि आरआरबी और आरआरसी (रेलवे रिक्रूटमेंट सेल) रेलवे के लिए भर्ती करते हैं।

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SunnyJanuary 14, 2019
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1min80

नयी दिल्ली,13 जनवरी (भाषा) केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने रविवार को कहा कि मोदी सरकार ने धर्म, क्षेत्र और जाति से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘‘स्पीड ब्रेकर्स’’ हटाकर ‘‘विकास का राजमार्ग’’ बनाया है। नकवी ने कनॉट प्लेस मार्केट के निकट स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स में हुनर हॉट का उद्घाटन करने के बाद एक बयान जारी करके यह बात कहीं। इस मेले की शुरूआत शनिवार को हुई थी जिसका औपचारिक रूप से उद्घाटन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को किया। दोनों मंत्रियों ने मेले का दौरा भी किया और कुछ कलाकारों से रूबरू हुए। जेटली ने पत्रकारों से कहा,‘‘इस विरासत का बाजार में आकर्षण और ब्रांड मूल्य है और इस तरह के आयोजनों से कारीगरों और शिल्पकारों को इससे संबंधित काम करने में फायदा होगा।’’ जेटली के साथ मौजूद अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री नकवी ने कहा कि इस मेले में 22 से अधिक देशों के शिल्पकार भाग ले रहे है। इस कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद नकवी ने एक बयान में कहा कि मोदी सरकार ने धर्म, क्षेत्र और जाति से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘‘स्पीड ब्रेकर्स’’ हटाकर ‘‘विकास का राजमार्ग’’ बनाया है। मंत्री ने कहा कि हुनर हाट इस राजमार्ग पर ‘‘वाहन (शिल्पकारों के सशक्तीकरण) को सुचारू रूप से चलाया जाना’’ सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नकवी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में इस मंच के माध्यम से 1.65 लाख से अधिक शिल्पकारों को नौकरियां और रोजगार के अवसर मिले है।

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SunnyJanuary 13, 2019
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20min120

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SunnyJanuary 13, 2019
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सामान्य वर्ग (Upper Caste Reservation) के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने को संसद से मंजूरी मिलने के एक दिन बाद शिवसेना ने बृहस्पतिवार को आश्चर्य व्यक्त किया कि नौकरियां कहां से आएंगी ? पार्टी ने साथ ही चेतावनी दी कि अगर यह एक चुनावी चाल है तो यह महंगा साबित होगी।

भाषा के अनुसार, शिवसेना ने कहा कि मराठा समुदाय को भी महाराष्ट्र में आरक्षण दिया गया है लेकिन सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि नौकरियां कहां है? संसद ने बुधवार को सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी।

ये भी पढ़ें: सवर्ण आरक्षण पर संसद की मुहर, राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ बन जाएगा कानून

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में कहा है, ”जब सत्ता में बैठे लोग रोजगार और गरीबी दोनों मोर्चो पर विफल होते हैं तब वे आरक्षण का कार्ड खेलते हैं। इसमें पूछा गया है, ‘अगर यह वोट के लिए लिया गया निर्णय है तो यह महंगा साबित होगा। 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद रोजगार का क्या होगा? आपको नौकरी कहां से मिलेगी?’

शिवसेना ने कहा भारत में, 15 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी हर महीने 13 लाख बढ़ रही है। 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को नौकरी देना अपराध है लेकिन बाल श्रम लगातार जारी है। गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी केन्द्र और महाराष्ट्र दोनों जगह सत्तारूढ़ भाजपा की गठबंधन सहयोगी है। 
    
‘सामना’ में कहा गया है कि देश में रोजगार की दर को संतुलित बनाए रखने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नए रोजगारों की जरूरत है लेकिन यह गणित कुछ समय से असंतुलित है। सामना ने अपने मराठी संस्करण में कहा है, ”पिछले दो सालों में नौकरी के अवसर बढ़ने के बजाय कम हुए हैं और नोटबंदी एवं जीएसटी लागू किये जाने के कारण करीब 1.5 करोड़ से लेकर दो करोड़ नौकरियां गई हैं। युवाओं में लाचारी की भावना है।

ये भी पढ़ें: सवर्ण आरक्षण: राज्यसभा में अठावले ने कविता सुनाकर की PM मोदी की तारीफ
         
शिवसेना ने दावा किया कि 2018 में रेलवे में 90 लाख नौकरियों के लिए 2.8 करोड़ लोगों ने आवेदन किया। इसके अलावा मुंबई पुलिस में 1,137 पदों के लिए चार लाख से अधिक लोगों ने आवेदन किया और कई आवेदनकर्ता आवश्यक योग्यता से अधिक शैक्षणिक योग्यता रखते थे। इसमें चुटकी लेते हुये कहा गया है, ”सरकार के 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद क्या योग्य युवा कुछ हासिल कर पाएंगे? युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री को आखिरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना पड़ा। 

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SunnyJanuary 12, 2019
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3min110

प्रतीकात्मक फोटो

Updated: January 11, 2019, 8:26 PM IST

चुनावी साल में रोजगार के मुद्दे पर बुरी खबर है. देश में बेरोजगारी का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. लेबर ब्यूरो के ताजा सर्वे के मुताबिक बेरोजगारी ने पिछले 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

लेबर ब्यूरो के रोजगार पर ताजा सर्वे में खुलासा हुआ है कि बेरोजगारी ने पिछले 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है. नौकरियों पर नोटबंदी का बुरा असर दिखा है. ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम सेक्टर, एयरलाइंस, कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर में छंटनी हुई है. जगुआर लैंड रोवर में 4,500 लोगों के छंटनी की तैयारी चल रही है. एतिहाद एयरलाइंस में 50 पायलट की छंटनी संभव जताई जा रही है.

बता दें कि अभी लेबर ब्यूरो ने सर्वे सार्वजनिक नहीं किया है. लेबर ब्यूरो सर्वे के मुताबिक साल 2013-2014 में बेरोजगारी दर 3.4 फीसदी पर रही थी जो साल 2016-2017 में 3.9 फीसदी पर पहुंच गई है.

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Updated: January 11, 2019 11:42 AM ISTबिना ज़मीन वाले किसानों के लिए मोदी सरकार की नई स्कीम! खेती के लिए खातों में पैसा डालने की तैयारी

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SunnyJanuary 11, 2019
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1min120


नई नौकरियों का इंडेक्स।&nbsp | &nbspतस्वीर साभार:&nbspThinkstock

मुंबई: पिछले साल का अंतिम महीना नयी नौकरियों के लिहाज से बेहतर रहा। दिसंबर 2018 में सालाना आधार पर नयी नियुक्तियों में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। वाहन उद्योग और मानव संसाधन (एचआर) के क्षेत्र में सबसे अधिक संख्या में नये लोग नियुक्त किये गए। दिसंबर, 2018 के लिए नौकरी जॉबस्पीक सूचकांक के मुताबिक इस महीने एक साल पहले दिसंबर की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक लोगों की नियुक्ति हुई। 

ऑटोमोबाइल और इससे जुड़े उद्योग में सर्वाधिक 24 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी, जबकि एचआर क्षेत्र में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत पर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर, 2017 के मुकाबले इस साल के आलोच्य माह में आईटी-सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नयी नियुक्तियों में 14 फीसदी वृद्धि दर्ज की गयी।

इंफोएज इंडिया के मुख्य विपणन अधिकारी सुमित सिंह ने इस रिपोर्ट पर कहा, ‘लगभग सभी बड़े शहरों और प्रमुख उद्योगों में नियुक्ति में वृद्धि के साथ वर्ष 2018 समाप्त हुआ। पिछले कुछ महीनों से आईटी और ऑटो एवं इससे जुड़े क्षेत्र वृद्धि के वाहक बने हुए हैं। बीपीओ एवं एफएमसीजी क्षेत्र के लिए भी पिछला साल अच्छा रहा और हम इस बढ़त के जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं।’

हर महीने नौकरी डॉट कॉम पर सूचीबद्ध की जाने वाली नौकरियों के आधार पर यह सूचकांक तैयार किया जाता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक महानगरों में नियुक्ति की धारणा सकारात्मक रही और बेंगलुरु में एवं दिल्ली में इसमें क्रमश: 13 और 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी।

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SunnyJanuary 11, 2019
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1min90

देश के समसामयिक मुद्दों पर चर्चा के लिए इंडिया टुडे ग्रुप ने ओडिशा के भुवनेश्वर में ‘माइंड रॉक्स’ कार्यक्रम आयोजित किया. माइंड रॉक्स के पॉलिटिक्स ऑफ 2019-मेकिंग टफ च्वाइस सत्र में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने हर सवाल का बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि आने वाले 5 साल में देश में इतनी नौकरियां होंगी कि अमेरिका और लंदन से लोग भारत में नौकरी करने आएंगे.

माइंड रॉक्स के इस सत्र में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के साथ-साथ कांग्रेस नेता सुष्मिता देव और बीजेडी नेता कलिकेश सिंह देव शामिल हुए. यह कार्यक्रम भुवनेश्वर के केआईआईटी (KIIT) ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ.

युवाओं को नौकरी देने के सवाल पर निशिकांत दुबे ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान देश की ग्रोथ रेट 4.6 थी और आज मोदी सरकार के दौरान  7.2 फीसदी की ग्रोथ है. कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में अपने चहेते उद्योगपतियों को 15 लाख करोड़ रुपए बांट दिए, जिससे देश में NPA की दिक्कतें खड़ी हो गई. इन्होंने देश के खजाने को पूरी तरह से खाली कर दिया था.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने रोजगार के नाम पर मनरेगा शुरू किया, जिसमें 50 से 60 फीसदी भ्रष्टाचार हुआ. ये जो भूमि अधिग्रहण बिल लेकर आए, उसके तहत 3-4 साल लग जाते हैं भूमि अधिग्रहण करने में. मोदी सरकार रोड बनवा रही हैं, पोर्ट बनाए जा रहे हैं और बंद फैक्ट्रियां शुरू की जा रही हैं. ओडिशा के तलचर और यूपी के गोरखपुर में खाद कारखाना शुरू किया गया.

निशिकांत दुबे ने कहा,’देखिएगा कि आने वाले पांच सालों में देश में इतनी नौकरियां होंगी कि इन बच्चों को मिलने के साथ-साथ अमेरिका और लंदन के लोग भी भारत में रोजगार के लिए आएंगे.’

हालांकि कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने कहा कि मोदी सरकार बेरोजगारी की चुनौती से बैकफुट पर चली गई है. इसलिए वह ऐसे समय में सवर्णों के लिए आरक्षण का मुद्दा लेकर आई है. जबकि मोदी सरकार ने हर साल 2 करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था.

बीजेडी नेता कलिकेश ने कहा कि सबको उसकी मेरिट के आधार पर आंका जाना जरूरी है, हालांकि सभी को समान अवसर देने के लिए जरूरी है कि आरक्षण के जरिए संतुलन बनाया जाए. भविष्य में 100 फीसदी मेरिट आधारित व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है कि सबको एक क्वॉलिटी शिक्षा दी जाए.

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SunnyJanuary 10, 2019
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1min150

पहला एक-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच

ऑस्ट्रेलिया

भारत

सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी), सिडनी

Sat, 12 Jan 2019 07:50 AM IST

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