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SunnySeptember 21, 2018
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6min20

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आपके ल‍िए अच्‍छी खबर हैं आपको जानकर ये खुशी होंगी क‍ि नौकरी मिलने के मामले में जुलाई माह काफी अच्‍छा रहा। जी हां जुलाई में करीब 10 लाख से अधि‍क बने ईपीएफ मेंबर। देश में रोजगार और नौकरी एक बड़ा मुद्दा है। कभी इसमें सुधार तो कभी गिरावट का रुख रहता है।

लेकिन अच्छी खबर यह है जुलाई महीने में नई नौकरियां बीते 11 माह में सबसे अधिक पैदा हुईं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ईपीएफओ के पेरोल डाटा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। अभी तक जुलाई में कुल 9.51 लाख नई नौकरियां पैदा हुईं।

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जुलाई में कुल 9,51,423 नए कर्मचारी जुड़े

हांलाकि रिपोट के मुताब‍िक, जुलाई के आंकड़ों को मिलने के बाद स‍ितंबर 2017 से अबतक कुल 61.81 लाख नए लोग ईपीएफओ से जुड़ें है। नए लोग जो जुड़े हैं उनमें कई अलग-अलग क्षेत्रों के कर्मचारी हैं। इसमें पेंशन, पीएफ और इंश्योरेंस आदि शामिल हैं। ईपीएफओ के मुताबिक, जुलाई में कुल 9,51,423 नए कर्मचारी जुड़े हैं।

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61,81,943 नई नौकर‍ियां सृज‍ित

61,81,943 नई नौकर‍ियां सृज‍ित

जबकि ईपीएफओ का पेरोल डाटा के हिसाब से स‍ितंबर 2017 से जुलाई 2018 के दौरान 61,81,943 नई नौकर‍ियां सृज‍ित हुई है। इसमें जुलाई के दौरान 18 से 21 साल के युवा कर्मचार‍ियों की संख्या र‍िकॉर्ड 2,68,021 रही है। जबकि 22 से 25 साल के कर्मचारियों की संख्या 2,54,827 रही।

ईपीएफओ ने अपने बयान में कहा है कि डाटा हालांकि अस्थायी है जो लगातार अपडेट होते रहते हैं। इनमें ऐसे भी कई कर्मचारी हो सकते हैं जिनका योगदान ईपीएफओ में सालभार लगातार न रहे। जैसा कि आप जानते हैं ईपीएफओ संगठित क्षेत्र और अर्द्धसंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा कोष का प्रबंधन करता है।

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सामाज‍िक सुरक्षा योजना

सामाज‍िक सुरक्षा योजना

ईपीएफओ तीन तरह की सामाजिक सुरक्षा योजना चलाता है। प्रोविडेंट फंड स्‍कीम 1951, एम्प्लॉइज डिपोजिट लिंक्ड स्कीम 1976 और एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम 1995। इतना ही नहीं ईपीएफओ करीब 6 करोड़ से भी अधिक खातों का प्रबंधन करता है और इसके प्रबंधन के दायरे में कुल रकम 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक है।

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SunnySeptember 21, 2018
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1min30

नई दिल्ली: 

इस साल के जुलाई में 9.51 लाख नई नौकरियों का निकली हैं जो 11 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. ईपीएफओ के आकंड़े के मुताबिक इस महीने में 9.51 लाख लोग नये रोजगार से जुड़े. इसके साथ ही सितंबर, 2017 से इस साल नयी नौकरियों के सृजन का आंकड़ा 61.81 लाख के आंकड़े तक पहुंच गया है. 

ईपीएफओ ने सितंबर, 2017 में पेरोल डेटा जारी करना शुरू किया था. संगठन के मुताबिक जुलाई में ईपीएफओ के विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में 9,51,423 नये सदस्यों ने पंजीकरण कराया.  पेरोल आंकड़ों के मुताबिक सितंबर, 2017 से जुलाई, 2018 के मध्य 61,81,943 नौकरियां सृजित हुईं.

उधर, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने एक नयी योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत बीमित व्यक्तियों के बेरोजगार होने पर नकद राहत मिलेगी.    श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के तहत बीमित व्यक्ति को नौकरी जाने की स्थिति में और नये रोजगार की तलाश के दौरान सीधे बैंक खाते में राहत राशि भेजी जाएगी.     
 

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SunnySeptember 19, 2018
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3min60

पीएम मोदी और राहुल गांधी।
नई दिल्ली

नई पीढ़ी के भारतीयों का राजनेताओं को सीधा संदेश है- रोजगार, रोजगार और रोजगार। 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त 13 करोड़ मतदाता पहली बार वोट करने लायक होंगे। यह संख्या जापान की कुल आबादी से ज्यादा है। संभावना है कि हर वर्ष एक करोड़ नए रोजगार सृजन के वादे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खरा नहीं उतरना अगले आम चुनाव का एक प्रमुख मुद्दा होगा। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी ने इसी वादे से युवाओं का दिल जीत लिया था। अब जब आम चुनाव में महज आठ महीने बाकी बचे हैं, एक सर्वे रिजल्ट बताता है कि 29% लोग जॉब क्रिएशन के मोर्चे पर पीएम मोदी को असफल मानते हैं। जनवरी महीने में ऐसा मानने वाले 22% लोग ही थे।

किंग्स कॉलेज, लंदन में अंतरराष्ट्रीय संबंध के प्रफेसर हर्ष पंत ने ब्लूमबर्ग से कहा, ‘युवा आबादी वाकई प्रमुख भूमिका निभाई।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आने वाले चुनावों में नौकरियों का मुद्दा मोदी को परेशान कर सकता है, लेकिन यह भी सच है कि वह युवाओं के बीच दूसरे नेताओं के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय हैं।’

विकासशील समाजों का अध्ययन केंद्र (CSDS) और कोनार्ड अडेन्योर स्टिफटंग की ओर से वर्ष 2016 में 6,100 लोगों के बीच किए एक सर्वे के मुताबिक रोजगार युवा भारतीयों की प्रमुख चिंता है। जब उनसे भारत की सबसे बड़ी समस्या के बारे में पूछा गया तो 18% लोगों ने बेरोजगारी जबकि 12% ने आर्थिक असामनता एवं 9% लोगों ने भ्रष्टाचार का जिक्र किया।

सही आंकड़ों के अभाव में यह सुनिश्चित करना असंभव है कि मोदी के सत्ता में आने के बाद से कितनी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हुए। हालांकि, सरकार कौशल प्रशिक्षण और लोन देकर तथा स्टार्टअप्स खड़ा करने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करने में जोरशोर से जुटी है। लेकिन, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अगस्त महीने में बेरोजगारी दर पिछले एक साल के उच्चतम स्तर 6.32% पर जा पहुंची।

फिर भी सत्ताधारी दल बीजेपी को लगता है कि युवा मतदाता अपना और देश का भविष्य मोदी सरकार में ही देखते हैं। भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष हर्ष सांघवी कहते हैं, ‘वह (मोदी) युवाओं की उम्मीद हैं।’

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस बेरोजगारी से बढ़ रही निराशा और सामाजिक तनाव को भुनाने में जुट गया है। पार्टी की युवा इकाई इंडियन यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष बी वी श्रीनिवास ने कहा, ‘रोजगार के अभाव, असहिष्णुता में वृद्धि और नफरत बढ़ने से युवा आबादी सरकार से नाराज है।’ उन्होंने कहा, ‘हमलोग गांव-गांव जाकर युवाओं से मुलाकात कर रहे हैं। हमलोग अपना आधार बढ़ाने के लिए युवा नेतृत्व को मौका दे रहे हैं।’

2014 में 18 से 25 वर्ष की उम्र के 68% मतदाताओं ने वोट डाला था। नई दिल्ली स्थित सीएसडीएस के डायरेक्टर संजय कुमार के मुताबिक यह राष्ट्रीय औसत से 2 प्रतिशत ज्यादा था। इनका मानना है कि 2019 में भी यही होने जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘2014 में मोदी आकर्षण के केंद्र थे। मुझे नहीं लगता कि इस बार वह कोई नया वादा करेंगे।’

पीएम मोदी और राहुल गांधी।

बेरोजगारी बढ़ने से सामाजिक तनाव भी बढ़ता है। इससे निवेशकों के प्रिय प्रधानमंत्री मोदी की छवि को झटका लग रहा है। हाल ही में दिल्ली में कांवड़ियों के उत्पात से दुखी उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इसे भीड़ की तानाशाही बताते हुए कहा कि इससे देश की आबादी के अलगाव का विनाशकारी पक्ष उजागर हुआ है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के प्रफेसर प्रवीण कृष्ण कहते हैं, ‘बेरोजगार युवाओं की फौज वाकई चिंता के सबब होंगे।’

जॉब मार्केट की स्थिति कितनी भयावह है, इसकी एक झलक मार्च महीने में तब देखने को मिली जब सरकार ने रेलवे में 90 हजार नई भर्तियों का ऐलान किया तो 2 करोड़ 80 लाख लोगों ने आवेदन दे दिया।

(ब्लूमबर्ग में छपी रिपोर्ट पर आधारित)

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SunnySeptember 19, 2018
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1min20

  • ब्लूमबर्ग ने अलग-अलग सर्वे के आधार पर आकलन दिया
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में 13 करोड़ युवा पहली बार वोट डालेंगे
  • यह संख्या जापान की 12 करोड़ की आबादी से ज्यादा 

Danik Bhaskar | Sep 19, 2018, 08:49 PM IST

नई दिल्ली.  अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट डालने वाले देश के युवा ज्यादा से ज्यादा रोजगार के मौके चाहते हैं। इन युवाओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सीधा संदेश है कि उन्हें रोजगार मिले।

अगले लोकसभा में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बनेगा

  1. 2019 लोकसभा चुनाव में 13 करोड़ युवा पहली बार मतदान करेंगे। यह संख्या जापान की जनसंख्या से ज्यादा है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर साल एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। हालांकि, यह वादा नहीं निभाने के चलते लोकसभा चुनाव में यह मामला बड़ा मुद्दा बनेगा।

  2. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक- आम चुनाव में अभी आठ महीने बाकी हैं। सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी (सीएसडीएस) के एक सर्वे में रोजगार देने में मोदी सरकार को फेल मानने वाले लोगों की संख्या जनवरी 2018 में बढ़कर 29% हो गई। पहले यह संख्या 22% थी। 

  3. लंदन के किंग्स कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर हर्ष पंत ने कहा, ‘युवा निश्चित ही अहम होंगे। आने वाले चुनाव में रोजगार का मुद्दा मोदी को नुकसान पहुंचाएगा। हालांकि, यह भी सही है कि युवाओं के बीच वे भारत में अन्य नेताओं के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय रहेंगे।’

  4. 2016 में हुए एक सर्वे के मुताबिक, बेरोजगारी युवाओं की प्रमुख चिंता है। 18% लोग नौकरी और बेरोजगारी को 12% आर्थिक असामनता और नौ फीसदी भ्रष्टाचार को भारत में सबसे अहम समस्या मानते हैं।

  5. मोदी के कार्यकाल में कितने लोगों को नौकरियां मिलीं? डाटा न होने की वजह से ये आंकड़े बता पाना असंभव है। हालांकि, सरकार स्किल ट्रेनिंग और स्टार्टअप शुरू करने के लिए युवाओं को दिए गए ऋण को अपनी कामयाबी बताती है।

  6. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में बेरोजगारी दर 6.32% थी। पिछले एक साल में सबसे ज्यादा।

  7. मोदी युवाओं के मस्कट : भाजपा

    भाजपा के युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष हर्ष सांघवी के मुताबिक, ‘बेरोजगारी की मौजूदा स्थिति में सुधार का इंतजार कर रहा हूं। निश्चित तौर पर मेरा वोट भाजपा को ही जाएगा, क्योंकि मौजूदा सरकार ने इस स्थिति को बदलने का वादा किया है। भाजपा को भरोसा है कि युवा अब भी मोदी सरकार में अपना और देश का भविष्य देखते हैं। वे युवाओं के मस्कट हैं।’

  8. युवा बदलाव चाहते हैं : कांग्रेस

    कांग्रेस देश में बेरोजगारी और बढ़ती सामाजिक समस्याओं को अगले चुनाव में भुनाना चाहती है। यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्रीनिवास बीवी के मुताबिक, ‘बढ़ती बेरोजगारी से सरकार के खिलाफ युवाओं में गुस्सा है। देश में असहिष्णुता और घृणा फैल रही है। युवाओं ने वास्तविकता का सामना किया और वे बदलाव चाहते हैं।’
     

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SunnySeptember 19, 2018
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नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

सांकेतिक तस्वीर।

नई दिल्ली

सऊदी अरब की सरकार ने कारोबारी संस्थानों को ज्यादा-से-ज्यादा स्थानीय लोगों को रोजगार देने का फरमान जारी किया है। वहां कारोबार पहले से ही मंदा चल रहा है। अब ज्यादातर विदेशी कर्मचारियों की जगह स्थानीय लोगों को नौकरी देने के आदेश से कारोबार की लागत और बढ़ जाएगी।

अब 70% सेल्स जॉब में होंगे सऊदी!

रिटेल चेन में स्थानीय लोगों को रोजगार देने के अभियान का पहला चरण इसी महीने शुरू हुआ। इसके तहत कार डीलरशिप एवं पोशाक, फर्नीचर और घरेलू बर्तनों के विक्रेताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे 70% सेल्स जॉब्स में सऊदियों को नौकरी पर रखें। सरकारी आदेश के मुताबकि, इलेक्ट्रिक सामानों के खुदरा विक्रेताओं, घड़ी विक्रेताओं और चश्मा बेचनेवालों को नवंबर महीने तक विदेशी कर्मचारियों को स्थानीय लोगों से स्थानांतरित करना अनिवार्य है। इसी तरह, मिठाई, दरी, निर्माण की वस्तुओं, चिकिस्ता के औजार और स्पेयर कार पार्ट्स बेचनेवालों को लिए यह मियाद जनवरी तक की है।

कारोबारियों की मुश्किल

गौरतलब है कि सऊदी अरब के रिटेल चेन बिजनस में विदेशी कर्मचारियों की भरमार है क्योंकि वे सऊदियों के मुकाबले कम वेतन पर काम करते हैं। साथ ही, स्थानीय लोग शिफ्ट में काम करने के आदी नहीं हैं। एक सीरियाई बिजनसमैन मोहनद फहाम ने बताया कि उन्होंने कुछ सऊदी सेल्समेन को ट्रेनिंग दी, लेकिन उन्हें कुछ सप्ताह बाद ही नौकरी से हटाना पड़ा। दरअसल, जिन्हें ट्रेनिंग दी गई थी, उनमें सिर्फ एक अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित था जबकि बाकियों को शिफ्ट में काम करने में मुश्किल हो रही थी। फहाम कहते हैं, ‘एक साथ सारी मुसीबतें आ गईं। एक तो हमें इस इलाके में ज्यादा रेंट देना पड़ रहा है, ऊपर से बिक्री वैसी हो नहीं रही और अब लागत बढ़ गई है।’


प्राइवेट सेक्टर में काम करने की फितरत नहीं


दरअसल, सऊदी अरब में प्राइवेट सेक्टर में ज्यादातर स्टाफ विदेशी होते हैं जबकि स्थानीय लोग सरकारी नौकरियों को ज्यादा तवज्जो देते रहे हैं क्योंकि यहां उन्हें प्राइवेट सेक्टर के मुकाबले कम घंटे की ज्यादा सुरक्षित जॉब मिलती है। सऊदी अरब में अभी बेरोजगारी 12.9 प्रतिशत है। यह आंकड़ा एक दशक से ज्यादा वक्त के हाइ लेवल पर है और 2.5 लाख युवा सऊदी हर वर्ष जॉब मार्केट में एंटर कर रहे हैं। इन्हें रोजगार देने के लिहाज से सिर्फ सरकारी नौकरियां पर्याप्त नहीं हैं।

 

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(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)


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SunnySeptember 19, 2018
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डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 19 Sep 2018 08:26 PM IST

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे हैं कि इससे नौकरियों पर खतरा बढ़ेगा। नीति आयोग का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा और रोजगार के नए मौके उपलब्ध होंगे। साथ ही उनकी मदद के लिए कंप्यूटर और रोबोट भी होंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम के चलते देरी से निबटने वाले तुरंत किए जा सकेंगे। वहीं नैसकॉम भी आईटी वर्कर्स को फिर से रि-स्किल करने की बात कह रहा है।

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इतिहास से लें सबक

मंगलवार को नैसकॉम के डीप टेक्नोलॉजी पर आयोजित सेमीनार में बोलते हुए नीति आयोग में एडवाइजर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेडी (एआई) के नाम से मशहूर अन्ना रॉय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से नौकरियों के नए मौके मिलेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच भ्रम को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। अन्ना ने 30 साल पहले का इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि जब देश में कंप्यूटर का दौर शुरू होने वाला था, तब पब्लिक सेक्टर बैंकों में जॉब्स जाने को लेकर कई हड़तालें हुईं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हमें इतिहास से सबक लेने की जरूरत है। नई टेक्नोलॉजी आने से जॉब प्रोफाइल बदलेगा और नई तरह की नौकरियां पैदा होंगी। 

री-स्किल करने की जरूरत

वहीं नैसकॉम की अध्यक्ष देबजानी घोष का कहना है कि नई टेक्नोलॉजी आने से लोगों के लिए नए रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि डीप टेक्नोलॉजी से कम से कम 55 तरह की नए जॉब प्रोफाइल पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि अगले कुछ सालों में नैसकॉम की पहली प्राथमिकता होगी कि फ्यूचर टेक्नोलॉजी के लिए देश के 40 लाख आईटी वर्कर्स को फिर से रि-स्किल किया जाए। नैसकॉम के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती भी होगी कि अगले चार-पांच साल में कम से कम 20 लाख लोगों को पहले रि-स्किल किया जाना है। 

एसीलेरेट 10एक्स लॉन्च

इससे पहले नैसकॉम ने मंगलवार को देश के स्टार्ट अप्स के लिए एसीलेरेट 10एक्स के दूसरे चरण को लॉन्च करने का ऐलान किया। नैसकॉम का कहना है कि उनका लक्ष्य है कि साल 2023 तक देश में 10 हजार फंडेड स्टार्ट-अप्स हों। उनमें 20 गुना सीड फंडिंग हो। नैसकॉम के मुताबिक 2017 में टैक स्टार्ट अप्स की संख्या 25-30 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ कर 700 से ऊपर पहुंच गई है। वहीं आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस स्टार्टअप्स में फंडिंग 70 प्रतिशत बढ़ी है। तकरीबन देश की 50 फीसदी फर्म्स अपने उत्पादों में आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जोर दे रही हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स यूनिट्स (आईओटी) ने तेजी से बढ़त बनाई है और अनुमान है कि 2020 तक इन यूनिट्स की संख्या 60 मिलियन से बढ़ कर 1.9 बिलियन तक पहुंच जाएगी। 

स्टार्ट-अप्स में भारत तीसरे नंबर पर

देबजानी घोष ने बताया कि डीप टेक्नोलॉजी के तहत एसीलेरेट 10एक्स में कम से कम 3 गुना टेक स्टार्टअप्स हो, साथ ही 50 गुना डीप टेक पैटेंट्स हों, 30 गुना डीप टैक फंडिंग हो और इनोवेशन में भारत की रैंकिंग टॉप 25 में हो। देबजानी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में स्टार्ट-अप्स इकोसिस्टम में भारत की रैंकिंग तीसरे नंबर की है। उन्होंने बताया कि फेसबुक, गूगल, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज पूरे देश में डीप इंजीनियरिंग टैक लैब्स लगाने जा रही हैं। उनका कहना है डीप टैक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दोनों ही देश का आर्थिक स्वरूप बदलने वाले साबित होंगे। उन्होंने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत देश के 10 हजार स्टार्ट-अप्स को मेंटॉरशिप दी जाएगी और भावी टेक्नोलॉजी के लिए तैयार किया जाएगा।

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SunnySeptember 19, 2018
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2min00

AI से जितनी जॉब जाएंगी, उससे ज्यादा आएंगीं भी

News18Hindi

Updated: September 19, 2018, 3:30 PM IST

पिछले कुछ सालों से दुनिया भर में यह बात चर्चा में है कि AI यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जब मशीनों की कार्यक्षमता बढ़ जायेगी तो क्या लोगों को अपने रोजगार खोने पड़ेंगे? कई विशेषज्ञों का कहना है कि AI के मजबूत होते जाने के साथ ही ड्राइवर से लेकर डाटा इंट्री ऑपरेटर्स को बड़ी संख्या में अपनी नौकरियां खोनी पड़ेंगीं. खास बात यह है कि नौकरी खोने वालों में साधारण रोजगार वाले ही नहीं बल्कि अच्छी मानसिक क्षमता वाले काम जिसमें डॉक्टर, जर्नलिस्ट और वकील भी शामिल हैं, उनकी भी नौकरियों पर AI के सक्षम होने के बाद खतरा मंडराता दिख रहा था. लेकिन हालिया एक रिपोर्ट में इससे ठीक उल्टी बात भी सामने आई है. यह रिपोर्ट है वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम (WEF) की. WEF की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि AI यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगले कुछ सालों में जितने रोजगार खत्म करेगी उससे 6 करोड़ ज्यादा नए रोजगार पैदा करेगी.

जाहिर है कि जब AI का प्रयोग काम में शुरू हो जायेगा तो ये न केवल प्रोडक्टिविटी बढ़ा देगा बल्कि गलतियों की संभावना को भी कम कर देगा. ऐसे में कोई भी चाहेगा कि इंसान की बजाए कई सारे काम वो कंप्यूटर और रोबोट से करवाए क्योंकि कंप्यूटर और रोबोट गलतियां नहीं करेंगें. हालांकि हाल ही में वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम ने ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स’ (नौकरियों का भविष्य) नाम की एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट से सामने आया है कि आने वाले 7 सालों में यानि 2025 तक इंसान का आधे से ज्यादा काम (करीब 52 फीसदी) मशीनें करने लगेंगीं. अभी इंसान के टोटल काम का केवल 29 फीसदी मशीनें करती हैं. ऐसे में रिपोर्ट का मानना है कि ऐसे में पूरी दुनिया में 7.5 करोड़ लोगों को अपनी नौकरियां खोनी पड़ेंगीं. लेकिन खुशी की बात यह भी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद से 13.3 करोड़ नई नौकरियां भी आयेंगीं. ऐसे में जितनी जॉब जायेंगीं उससे 5.8 करोड़ ज्यादा नई नौकरियां भी मार्केट में आ जायेंगीं.

ऐसी हालत में तेजी से बढ़ेंगे ये रोजगार
यह रिपोर्ट 12 अलग-अलग उद्योगों के 1.5 करोड़ लोगों पर की गई स्टडी के बाद तैयार की गई है. वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम ने रिपोर्ट के बारे में यह भी कहा कि न ही बिजनेस और न ही सरकारें इस चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए तैयार हैं. सबसे तेज बढ़ने वाली नौकरियां होंगीं – डेवलपर्स की, ई-कॉमर्स की और सोशल मीडिया स्पेशलिस्ट की. ये वेब और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स होंगे, जिनकी मांग उस वक्त तक बहुत ज्यादा हो जाएगी. रोजगार के लिए बने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘लिंक्डइन’ ने भी कहा था कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और मार्केटिंग के जॉब इसके बाद तेजी से बढ़ रहे हैं और आगे भी बढ़ते रहेंगे.आज शाम 5 बजे एशिया कप 2018 में भिड़ेंगे भारत-पाकिस्तान. मैदान पर खिलाड़ी और स्टूडियो में आमने सामने होंगे भारत और पाकिस्तान के फैंस, हर बॉल की खबर और हर पहलू पर एक्पर्ट ओपिनियन, न्यूज़ 18 क्रिकेट के संग...

रोजगार के मामले में ये सेक्टर भी करेंगे तरक्की
दूसरी नौकरियां जिनमें तेज बढ़ोत्तरी हो सकती हैं उनमें मानव कौशल की जरूरत है – जैसे उन लोगों की नौकरियां बढ़ेंगी जों कस्टमर सर्विस प्रोवाइड कराते हैं. चाहे वे ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइड कराते हों या फिर फोन पर. जाहिर सी बात है कि उस वक्त लोगों के पास डिवाइस ज्यादा होंगीं ऐसे में ज्यादा डिवाइसेज बिगडेंगीं भी और लोग कस्टमर सर्विस वालों की मदद उन्हें सुधारवाने के लिए लेंगे. इसके अलावा सेल्स और मार्केटिंग की नौकरियां भी बढ़ेंगीं क्योंकि ज्यादा मशीनों को बेचने के लिए ज्यादा लोगों की जरूरत भी पड़ेगी. इसके अलावा ट्रेनिंग और डेवलपमेंट वाले लोगों के रोजगार भी सुरक्षित हैं. वे लोग जो आर्ट्स और कल्चर से जुड़े क्षेत्र में काम कर रहे हैं. जैसे सिंगिंग, डांसिंग, पेंटिंग या फिर फिल्में बनाना, उनके रोजगार भी कम नहीं होंगें बल्कि बढ़ेंगे क्योंकि लोगों के पास तब इन चीजों के लिए ज्यादा वक्त होगा. साथ ही उनके पास भी अपने हुनर को दिखाने के लिए ज्यादा प्लेटफॉर्म होंगे.

जो जॉब कर रहे हैं, अपनी जॉब बचाने के लिए क्या करें?
इसके अलावा NGO, राजनीतिक दलों और दूसरे ऑर्गनाइजेशन बेस्ड जगहों में भी बढ़ोत्तरी होगी. नए तरह के प्रयोगों के लिए जिम्मेदार लोगों के रोजगार भी बढ़ेंगे. अभी किसी रोजगार में लगे हुए लोगों को अपने आप को री-स्किल और रीट्रेन करने की बहुत जरूरत है क्योंकि अगर वे अपडेट नहीं होंगे और उन्हें नया काम नहीं आता होगा तो उन्हें अपना रोजगार खोना पड़ेगा. इसलिए उन्हें यह सलाह भी दी जाती है कि लगातार होने वाले नए प्रयोगों और खोजों पर वे अपनी नज़र बनाए रखें.

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