Investment Plan Archives - Page 2 of 7 - earn money online hindi news: Sunnywebmoney.com

SunnyNovember 14, 2018
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1min130

सोने में निवेश देता है सुरक्षा भाव
नई दिल्ली

निवेश के विभिन्न विकल्पों का जब भी नाम लिया जाता है, सोना हमेशा एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। पारंपरिक कारणों से भी सोने के लिए भारतीयों में आकर्षण रहता है। निवेश के लिए भी कुछ लोग सोना या गोल्ड बार को विकल्प मानते हैं। लंबे समय तक के निवेश के लिए गोल्ड के अपने फायदे हैं। रिटर्न की उम्मीद के साथ इस धातु में निवेश के पीछे सुरक्षा का भाव भी अहम है। जानें सोने में निवेश के क्या हैं फायदे…

सुरक्षित है सोना सबके लिए

गोल्ड एक ऐसा विकल्प है जो भौतिक और मानसिक दोनों तौर पर निवेशकों को सुरक्षा का भाव देता है। रियल एस्टेट जैसी दूसरी अचल संपत्तियों के स्थाप पर सोने को खरीदना आसान है। डिजिटल रूप से स्टोर की गर्इ संपत्तियों के साथ जहां हैकिंग और दुरुपयोग होने का खतरा रहता है, सोने के साथ यह बात लागू नहीं होती है। रियल स्टेट में चल रहे मंदी और इन दिनों हुए कई फ्रॉड के बाद एक बार फिर सोने की विश्वसनीयता पहले से बढ़ी है। हालांकि, किसी भी अन्य विकल्प के ही तरह इस पीली धातु के साथ जोखिम जुड़े रहते हैं, जिनके बारे में सावधान रहना चाहिए।

मुश्किल वक्त में मददगार साथी है सोना

परिवार हो या व्यापार मुश्किल वक्त में सोना बहुत मददगार होता है। चल संपत्तियों की बिक्री आप फटाफट नहीं कर सकते, उसके लिए सही कीमत लगने से लेकर औपचारिक प्रक्रियाएं भी निभानी होती हैं। इसके उलट जैसे सोना खरीदना आसान है वैसे ही इसे कभी भी बेचा जा सकता है। यह बात प्रॉपर्टी के मामले में लागू नहीं होती है। दूसरे कर्इ निवेश विकल्पों में लॉक-इन पीरियड होता है। सोने का दाम कितना मिलेगा, यह उसकी शुद्धता और बाजार के भाव पर निर्भर करेगा।

पोर्टफोलियो को बनाता है प्रभावशाली

अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का मानना है कि सोना आपके पोर्टफोलियो को प्रभावशाली विविधता प्रदान करता है। देखने में आया है कि जब शेयरों में गिरावट आती है तो सोने के दाम बढ़ते हैं। इससे निवेशकों का पोर्टफोलियो बाजार की अस्थिरता से बच जाता है। इसके साथ ही सिर्फ बैंक बॉन्ड, शेयर या प्रॉपर्टी में ही अपनी पूरी निवेश की रकम खपाने के स्थान पर कुछ हिस्सा गोल्ड के लिए सुरक्षित रखने का विकल्प अर्थशास्त्री देते हैं।

अंतरराष्ट्रीय तनाव के हालात में सोना आता है काम

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक संकट बढ़ने की स्थिति में सोने में निवेश बढ़ जाता है। ऐसा कर्इ बार देखने को मिला है। एंजेल ब्रोकिंग में चीफ एनालिस्ट (नॉन-एग्री कमोडिटीज एंड करेंसीज) कहते हैं कि युद्ध जैसी स्थितियां बनने पर दूसरे एसेट क्लास में गिरावट आती है। सोने पर इसका सकारात्मक असर होता है। इस दौरान सोने की निवेश मांग बढ़ जाती है।

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SunnyNovember 13, 2018
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2min120

नई दिल्ली

भारत सरकार की सबसे विश्वसनीय और लाभकारी निवेश सेवाएं पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक की मानी जाती हैं। कुल मिलाकर इंडिया पोस्ट कुल 9 तरह की निवेश स्कीम्स ऑफर करता है। ये इनवेस्टमेंट स्कीम्स कौन सी हैं और इनके क्या फायदे हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं:

1. पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट अकाउंट (टीडी)

2. पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम अकाउंट (एमआईएस)

3. सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस)

4. पब्लिक प्रोविंडेंट फंड अकाउंट (पीपीएफ)

5. नैशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी)

6.किसान विकास पत्र (केवीपी)

7.फाइव ईयर पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपोजिट अकाउंट (आरडी)

8.पोस्ट ऑफिस टाइम डिपोजिट अकाउंट (टीडी)

9.सुकन्या समृद्धि अकाउंट

पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम्स निवेश का एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं। आइए समझते हैं कि किस स्कीम में कितना इंटरेस्ट मिलता है:

नैशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी)

एनएससी का मेच्योरिटी पीरियड पांच और 10 साल का होता है। इन्हें बैंक से लोन लेने के लिए सिक्यॉरिटी के तौर पर भी दिया जा सकता है। यह सिंगल होल्डर टाइप सर्टिफिकेट होता है और इससे इनकम टैक्स में भी रिलीफ मिलता है। इसमें 7.6 प्रतिशत इंटरेस्ट वार्षिक होता है, लेकिन यह प्लान मेच्योर होने पर ही मिलता है।


पब्लिक प्रोविंडेंट फंड अकाउंट (पीपीएफ)


पीपीएफ अकाउंट को न्यूनतम 100 रुपये से ओपन किया जा सकता है। पीपीएफ सब्सक्राइबर को हर महीने इस अकाउंट में 500 रुपये जमा करने होते हैं। इसकी मैक्सिमम लिमिट 1,50,000 रुपये है। इसकी कई शर्तें हैं और यह भी इनकम टैक्स रिलीफ देता है। इसका वार्षिक ब्याज 7.6 प्रतिशत होता है।

सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस)

यह स्कीम उन लोगों के लिए है जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है। इसमें आप 1000 के मल्टिपल में ही डिपोजिट कर सकते हैं। इसमें मैक्सिमम डिपोजिट लिमिट 15 लाख है। इसका मेच्योरिटी पीरियड पांच साल का होता है। इसमें 8.3 प्रतिशत का इंटरेस्ट रेट मिलता है और इनकम टैक्स रिलीफ भी मिलता है।

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SunnyNovember 13, 2018
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नई दिल्ली

जब पर्सनल फाइनेंस की बात आती है, तो कभी-कभी ऐसा लगता है इसे जीरो से सीखने और समझने की जरूरत है। एक सामान्य सा शब्द शायद आपने भी सुना हो, वह है इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो। इसमें वे सभी निवेश शामिल होते हैं, जो आप एक सेवानिवृत्ति खाते में करते हैं, जैसे कि 401 (के), साथ ही स्टॉक मार्केट में कोई अन्य निवेश।

निवेश पोर्टफोलियो क्या है?

फाइनेंस में, एक निवेश पोर्टफोलियो आपके सभी निवेशों का संग्रह होता है। इनमें स्टॉक, बॉन्ड, नकदी, रियल एस्टेट या अन्य संपत्तियां/असेट शामिल हो सकते हैं। एक असेट ऐसी चीज होती है जिसमें आप इस उम्मीद के साथ पैसा निवेश करते हैं कि यह भविष्य की संपत्ति का निर्माण करेगा।

असेट्स व्यापक रूप से अलग-अलग हो सकते हैं। चीजों को आसान बनाने के लिए, हम उन्हें कुछ संपत्ति वर्गों में समूहित करते हैं। आम संपत्ति वर्गों में स्टॉक, बॉन्ड, रियल एस्टेट और नकद शामिल हैं। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या निवेश करते हैं, यह आपके निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा है।

पोर्टफोलियो बनाने का मकसद और जरूरत दोनों निवेश की सिक्यॉरिटी से जुड़ा होता है। जरूरी होता है कि आपको किए गए निवेशों की जानकारी हो और उनसे मिले लाभ को क्रमबद्ध कर सकें। निवेश से जुड़ा यह एक महत्वपूर्ण कदम होता है।

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SunnyNovember 12, 2018
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नयी दिल्ली, 12 नवंबर (भाषा) बाजार नियामक सेबी ‘लिक्विड’ यानी तरल म्यूचुअल फंड के लिये नियम कड़े कर सकता है और निवेश को एक न्यूनतम समय तक उसमें बनाए रखने की समय सीमा तय कर सकता है। यह बात यहां वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार कही। इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) के चूक के बाद गैर बैंकिंग बीमा कंपनियों के समक्ष नकदी की कमी के बीच यह बात सामने आयी है। अधिकारियों ने कहा कि सेबी ‘लिक्विंड फंड’ म्यूचुअल फंड योजजनाओं में निवेशक को बनाए रखने की एक एक लघु समय सीमा लागू कर सकता है। ऐसी योजनाओं में इसमें निवेशकों का पैसा सरकार के ट्रेजरी बिलों और ऐसी अन्य सरकारी प्रतिभूतियों में लगाया जाता है जहां निवेश पर जोखिम बहुत कम होता है और इन प्रतिभूतियों का एक हाजिर बाजार हर समय उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि विनियामक ‘लिक्विड फंड’ के लिये अल्पकालीन ‘लाक-इन’ (यानी निवेश को योजना में बनाए रखने की) अवधि तय करने के साथ प्रतिभूतियों को तरल(तत्काल भुनाने योग्य) प्रतिभूतियों और ‘चूक’ तथा ‘गैर-तरल श्रेणी की प्रतिभूतियों में बांट सकता है जिनकों बाजार में भुनाने में मुश्किल होती है इसके अलावा सेबी लिक्विड फंड के लिये उन सभी बांड के मामले में ‘मार्क टू मार्केट वैल्यू’ अनिवार्य करने पर गौर कर रहा है जिसकी परिपक्वता अवधि 30 दिन है। मार्क टू मार्केट वैल्यू’ के तहत संपत्ति के वर्तमान मूल्य को आधार बनाया जाता है। फिलहाल 60 दिन या उससे अधिक अवधि की प्रतिभूतियों को ‘मार्क टू मार्केट वैल्यू’ के तहत रखा जाता है। अधिकारियों के अनुसार सेबी द्वारा नियुक्त म्यूचुअल फंड (एमएफ) परामर्श समिति की सोमवार को बैठक में इन कदमों पर चर्चा की उम्मीद है। उसके बाद नियामक अंतिम नियमन लाने से पहले परामर्श पत्र जारी कर सकता है।

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SunnyNovember 12, 2018
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भुवनेश्वर, 12 नवंबर (भाषा) ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोमवार को उद्योगपतियों से राज्य में निवेश की दीर्घकालिक रणनीति बनाने और दक्षिण एशिया का विनिर्माण केंद्र बनने में मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने अपनी ओर से हर तरह के समर्थन का भी वादा किया। पटनायक ने ‘मेक इन ओडिशा कांक्लेव 2018’ के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मैं यहां उपस्थित सभी उद्योगपतियों से राज्य में अगले 10 साल तक निवेश की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने का प्रस्ताव करता हूं।’’ उन्होंने राज्य में उपलब्ध विस्तृत अवसरों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम ओडिशा को दक्षिण एशिया का विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में साथ मिलकर काम कर सकते हैं।’’ पटनायक ने कहा, ‘‘आपकी दीर्घकालिक योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद के लिये राज्य सरकार समर्पित टीम बनाएगी। मैं आपको अपनी सरकार की ओर से ऐसी मदद का आश्वासन देता हूं जो कहीं नहीं मिलेगा।’’ उन्होंने 2016 में आयोजित पहले मेक इन ओडिशा कांक्लेव की बड़ी सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि तब दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के 124 निवेश प्रस्ताव मिले जिनमें एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर की क्षमता थी। उन्होंने कहा, ‘‘आपको यह जानकर खुशी होगी कि इनमें से दो-तिहाई परियोजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।’’ पटनायक ने ओडिशा को अग्रणी अयस्क उत्पादक बताते हुए कहा कि राज्य आज के समय में दक्षिण एशिया की एल्युमिनीयम राजधानी हो चुका है। राज्य देश के एल्युमिनीयम उत्पादन में लगभग आधी तथा इस्पात उत्पादन में करीब एक तिहाई हिस्सेदारी रखता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों को समर्थन देने के मद्देनजर ओडिशा औद्योगिक विकास योजना: दृष्टिकोण 2015 तैयार किया। इसका लक्ष्य 2,50,000 करोड़ रुपये तक के निवेश आकर्षित करना और 2025 तक छह चिह्नित क्षेत्रों में रोजगार के 30 लाख अवसर सृजित करना है।’’ पटनायक ने कहा कि राज्य ने प्रगतिशील एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण नीति की भी शुरुआत की है ताकि बेहद संभावनाओं वाले इन क्षेत्रों में राज्य की मौजूदा पारिस्थितिकी का प्रतिस्पर्धी लाभ उठाया जा सके।

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SunnyNovember 12, 2018
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ऋजु मेहता, नई दिल्ली
बच्चों के भविष्य की चिंता किसे नहीं होती है? हर माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा और उनके विवाह आदि के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था को लेकर तरह-तरह की योजनाएं बनाते रहते हैं। इस दौरान कई पैरंट्स अज्ञानता एवं गलत सलाह के कारण गलत कदम उठा लेते हैं। HSBC वैल्यु ऑफ एजुकेशन सर्वे 2018 में करीब 61% पैरंट्स ने इस बात पर अफसोस जताया कि उन्होंने बच्चों के लिए और पहले से बचत शुरू नहीं की। वहीं, बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी प्रॉटेक्शन सर्वे 2017 में सामने आया कि 1,540 प्रतिभागियों में से करीब 35% की मूल चिंता बच्चों की शिक्षा का खर्च जुटाने की थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इस चिंता को दूर करने के लिए क्या करें?

पहला कदम, अपने बच्चों से संबंधित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पर्याप्त धन जुटाने की दिशा में पहला कदम लक्ष्यों का स्पष्ट रेखांकन करना है। किसी निश्चित मौके पर कितनी रकम की जरूरत होगी,यह लक्ष्य निर्धारित करते वक्त महंगाई के मुताबिक रुपये की कीमत का ध्यान जरूर रखें। उसके बाद देखें कि आपके पास बचत एवं निवेश के लिए कितना समय बचा है। अगर आपके पास लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय है तो इक्विटी में निवेश करें, लेकिन समय कम बचा हो तो डेट में निवेश करना होगा।

दूसरा कदम, अब इक्विटी, डेट, रीयल एस्टेट, गोल्ड आदि में से किस मद में, कितनी रकम निवेश करनी है, इसका सटीक पोर्टफोलियो तैयार कर लें। उसके बाद पोर्टफोलियो के मुताबिक, उचित इंस्ट्रूमेंट्स का चुनाव करें। आप चाहें तो इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स को अलग-अलग करके निवेश करें या चाहें तो म्यूचुअल फंड्स में भी निवेश कर सकते हैं जिनमें आपके रिस्क प्रोफाइल के मुताबिक इक्विटि एवं डेट का सही संयोजन होता है।

एक बार आपने मूलभूत निवेश प्रक्रिया समझ ली तो बच्चों के लिए बचत एवं निवेश के सारे उलझन सुलझने लगेंगे। इसलिए, अगर आप भी बच्चों के लिए भविष्य में होने वाले खर्चों को लेकर चिंतित हैं तो नीचे के छह सवाल और उनके जवाब पढ़िए। आपको समझ में आ जाएगा कि किसी खास इंस्ट्रूमेंट्स को क्यों चुनना चाहिए और किसी अन्य को क्यों नहीं…

प्रश्न 1: बच्चों के भविष्य के खर्चों के लिहाज से किस म्यूचुअल फंड में निवेश करें?

उत्तर: ज्यादातर लोग निवेश शुरू कर तो देते हैं, लेकिन लंबे समय तक बरकरार नहीं रख पाते। पीकअल्फा इन्वेस्मेंट सर्विसेज की डायरेक्टर प्रिया सुंदर कहती हैं, ‘निवेश को ऑटोमैटिक मोड पर डाल दें और इसके लिए म्यूचुअल फंड्स सर्वोत्तम साधन हैं।’ वहां आपको अल्पकालिक, मध्यकालिक एवं दीर्घकालिक, तीनों तरह के फंड्स मिल जाते हैं, लेकिन आपको इसकी जानकारी रखनी होगी कि किस लक्ष्य के लिए कौन से फंड्स मुफीद हैं।

अर्थयंत्र के फाउंडर और सीईओ नितिन व्याकरणम कहते हैं, ‘अवधि के लिहाज से इक्विटी एवं डेट मिश्रित पोर्टफोलियो बनाना बेहतर है। दीर्घवाधि लक्ष्यों (लॉन्ग टर्म गोल्स) के लिए इक्विटी फंड्स में पैसे डालना सही है जबकि अल्पावधि लक्ष्यों (शॉर्ट टर्म गोल्स) के लिए डेट में ज्यादा रकम डालने की जरूरत है।’

8 से 10 वर्ष के दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए इक्विटी फंड्स या डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स पर विचार किया जा सकता है। इनमें करीब 80 प्रतिशत रकम इक्विटी में डाली जाती है। ऐसा करना इसलिए समझदारी है क्योंकि ये फंड्स 12% का मोटा रिटर्न दे देंगे जिससे 10 वर्षों के बाद कुछ खास जोखिम भी नहीं रह जाता।
5nance के को-फाउंडर दिनेश रोहिरा ने कहा, ‘आप लॉर्ज और मिड-कैप फंड्स का समन्वय कर सकते हैं क्योंकि दोनों ही अच्छा रिटर्न देते हैं।’ इसमें इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का फायदा भी मिल जाता है और इसमें तीन वर्षों का लॉक-इन पीरियड होता है।

कौन से लक्ष्य के लिए कौन सा म्यूचुअल फंड?


उत्तर: कौन सा फंड सर्वोत्तम होगा, यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चे को रकम की जरूरत कब पड़ेगी। इसके हिसाब से आप फैसला कर सकते हैं…

दीर्घावधि (8 वर्ष से ज्यादा)
इक्विटी या इक्विटी ऑरियेंटेड फंड, ELSS फंड

इक्विटी- 80-85%

डेट- 15-20%

मध्यावधि (5 से 7 वर्ष)
बैलेंस्ड या हाइब्रिड फंड

इक्विटी- 60-65%

डेट- 35-40%

अल्पावधि (2 से 3 वर्ष) – डेट फंड (लिक्विड/अल्ट्रा शॉर्ट ड्युरेशन), आर्बिट्रेज

इक्विटी- 25 से 30%

डेट- 70 से 75%

मध्यावधि लक्ष्यों (मिड टर्म गोल्स) के लिए बैलेंस्ड या हाइब्रिड फंड्स का चयन करें जो इक्विटी और डेट में अक्सर 60:40 के अनुपात में निवेश करते हैं। 2 से 3 साल की कम अवधि के लिए अल्पकालिक डेट फंड्स का चयन करें क्योंकि इसमें आपके पैसे सुरक्षित रहते हैं और बैंक अकाउंट से ज्यादा ब्याज देते हैं। आप आर्बिट्रेज फंड्स का रुख भी कर सकते हैं जिनका रिस्क प्रोफाइल डेट फंड्स से मिलता-जुलता है, लेकिन इस पर टैक्स इक्विटी फंड्स की तरह लगता है।

प्रश्न 2: रिटायरमेंट का पैसा लगाएं या एजुकेशन लोन ले लें?

उत्तर: HSBC के सर्वे में पता चला कि करीब 31% पैरंट्स ने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए अल्पावधि ऋण लिया था जबकि 26% माता-पिता ने दोस्तों या परिवार से उधार लिया था। आम तौर पर माता-पिता बच्चे के जन्म के वक्त से ही निवेश करना शुरू नहीं करने की गलती करते हैं। रोहिरा कहते हैं, ‘पैरंट्स की एक और गलती होती है कि वे निवेश करते भी हैं तो बहुत कम क्योंकि उनके दिमाग में महंगाई के मद्देनजर भविष्य में पैसे की कीमत की बात नहीं रहती है।’

ऐसे में जरूरत पड़ने पर बचत की रकम कम पड़ जाती है। तब रिटायरमेंट के पैसे खर्च करना ही विकल्प बच जाता है क्योंकि रिटायरमेंट के बाद कोई बैंक लोन नहीं देना चाहता। ऐसे में अच्छा उपाय यह है कि एजुकेशन लोन लिया जाए ताकि काम भी हो जाए और रिटायरमेंट के पैसे से दुनियादारी के खर्चे भी पूरे होते रहें। साथ ही, एजुकेशन लोन लेने पर बच्चे के दिमाग यह रहता है कि कर्ज मुझे ही चुकाना है, इसलिए वह बेहद अनुशासित हो जाते हैं। एक और फायदा यह है कि एजुकेशन लोन पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स बेनिफिट पाया जा सकता है। आइए जानते हैं एजुकेशन लोन के बारे में
5 बड़ी बातें…


1. पात्रता: 16 से 35 वर्ष के भारतीय को ही एजुकेशन लोन मिल सकता है।

2. ब्याज दर: बैंक अक्सर 1 वर्ष के MCLR से 1.3-3% तक ज्यादा ब्याज लेते हैं जो 8% से 15% सालाना तक होता है।

3. लोन चुकाने का नियम: RBI के नियम के मुताबिक कोर्स पूरा होने के 1 वर्ष बाद से एजुकेशन लोन का रीपेमेंट शुरू करना होगा।

4. गारेंटर/कोलेटरल: 4 लाख रुपये तक के लोन पर किसी कोलेटरल (जमीन, मकान आदि) या थर्ड पार्टी गारंटी (आपके लिए कोई गारंटर) की जरूरत नहीं पड़ती है। 4 से 7.5 लाख रुपये के लोन के लिए थर्ड पार्टी गारंटी देनी होती है। 7.5 लाख रुपये से ज्यादा लोन के लिए कोलेटरल की आवश्यकता होती है।

5. टैक्स छूट: लोन पर चुकाए जा रहे ब्याज की रकम पर सेक्शन 80E के तहत टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। लोन रीपमेंट शुरू होने से 8 साल तक या पूरा ब्याज चुका देने तक, इनमें जो पहले हो, उसी अवधि तक टैक्स छूट का फायदा लिया जा सकता है।

3. प्रश्न: अपने बच्चों के भविष्य के खर्च पूरा करने के लिए रियल एस्टेट में निवेश करना चाहिए?

उत्तर: सुंदर कहती हैं, ‘बहुत से कराणों की वजह से रियल स्टेट में निवेश के ज्यादा फायदे नहीं हैं।’ पिछले दशक में रिटर्न रेट कम रहा और आगे इसकी वृद्धि

कैसी होगी यह आप नहीं जानते हैं। इसके अलावा कई बार इसे समय पर बेचने में भी दिक्कत होती है। इतना ही नहीं, बिक्री के दौरान प्रॉपर्टी टैक्स, रखरखाव खर्च, हाई ट्रांजैक्शन खर्च या कैपिटल गेन्स के रूप में आपको खर्च करना पड़ता है। इस तर्क से सहमत व्याकरणम कहते हैं, ‘रियल एस्टेट को जल्दी भंजाया नहीं जा सकता है। साथ ही तात्कालिक जरूरत को पूरा करने के लिए आप अपने फ्लैट या घर का एक रूम नहीं बेच सकते हैं।’

यह एक जुआ है और अनिश्चितता अधिक होती है, क्योंकि ग्रोथ डिमांड और सप्लाई पर निर्भर है। इसलिए, पैरंट्स के लिए रियल स्टेट में निवेश से बेहतर विकल्प बैलेंस्ड फंड है। किराये को जोड़ भी लें तो एक घर से अधिक वैल्यू बैलेंस्ड फंड की होगी।

4. प्रश्न: चाइल्ड यूलिप या एंडोमेंट प्लान

आदर्श रूप से ये दोनों आपके पोर्टफोलियो में ना हो, क्योंकि ये दोनों ही इंश्योरेंस प्लान्स हैं। व्याकरणम ने कहा, ‘इंश्योरेंस प्लान और निवेश प्लान को मिक्स ना करें।’ happynessfactory.in के फाउंडर अमर पंडित कहते हैं, ‘वास्तव में एंडोनमेंट और मनी बैक पॉलिसीज में रिटर्न बेद कम 4-6 फीसदी होता है। इसलिए पैरेंट्स को बच्चों के लिए विशेष इंश्योरेंस प्रॉडक्ट और चाइल्ड प्लान आकर्षित नहीं होना चाहिए। कम रिटर्न के अलावा, ये बहुत महंगे और कम इंश्योरेंस कवर वाले होते हैं।’ इसलिए इन रास्तों का परहेज करें।

म्यूचुअल फंड ना केवल अधिक रिटर्न देते हैं, बल्कि अधिक पारदर्शी होते हैं। एजुकेशन और इन्फ्लेशन की दर 10 फीसदी की रफ्तार से भी बढ़े तो इक्विटी

म्यूचुअल फंड में निवेश बेहतर है ताकि आपके बच्चे के सामने फंड की कमी ना हो।

यूलिप और एंडोमेंट प्लान

फीचर यूलिप एंडोमेंट प्लान
रिटर्न म्यूचुअल फंड की तुलना में अधिक रिटर्न 4-6 फीसदी रिटर्न
टैक्स बेनिफिट सेक्शन 80 सी के तहत 1.5 करोड़ तक छूट सेक्शन 80C बेनिफिट 1.5 लाख तक
तरलता 5 साल का लॉक इन पीरियड, 5 साल के बाद पॉलिसी के बदले 8-9% पर लोन
निकासी 5 साल के बाद 20 फीसदी तक निकासी 2 साल तक प्रीमियम के बाद ही सरेंडर वैल्यू
इन्वेस्टमेंट स्विच फंड में स्विच कर सकते हैं निवेश अनुपात बदलने का विकल्प नहीं

5. प्रश्न: सुकन्या समृद्धि योजना, पीपीपी और एफडी में निवेश करें

उत्तर: सुकन्या समृद्धि योजना, पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट डेट इंस्ट्रूमेंट हैं, जिन्हें रिस्क कम करने के लिए लेना चाहिए। ब्याज और मैच्यूरिटी आकर्षक दिखता है, लेकिन यह मुद्रास्फीति को नहीं हरा सकता है।

क्या आपको इनमें निवेश करना चाहिए?

इंस्ट्रूमेंट सुकन्या समृद्धि योजना
रिटर्न 8.5%
फायदा निवेश, ब्याज, मच्योरिटी टैक्स मुक्त, निश्चित रिटर्न, निवेश अनुशासन
खामी
  • 10 साल से छोटी अधिकतम 2 बेटी के नाम ही निवेश
  • 21 साल का लॉक इन पीरियड
  • बेटी के 18 साल होने पर कुल बचत का 50 फीसदी हिस्सा ही निकासी
  • बचत की ऊपरी सीमा 1.5 लाख रुपये

क्या निवेश करें? लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए इसे पोर्टफोलियो में डेट कंपोनेंट के रूप में रखें
इंस्ट्रूमेंट एफडी
रिटर्न 7-8.5%
खूबी पूरे टर्म के लिए फिक्स रेट, निश्चित रिटर्न
खामी
  • ब्याज पर टैक्स लगता है
  • तरलता में कमी
निवेश करें? 2-3 साल के शॉर्ट टर्म गोल्स के लिए ही करें इस्तेमाल
इंस्ट्रमेंट पीपीएफ
रिटर्न 8%
खूबी
  • निवेश, ब्याज और मच्योरिटी पर टैक्स छूट
  • निश्चित रिटर्न और पूंजी की सुरक्षा
खामी
  • 15 साल का लॉक इन पीरियड
  • ब्याज दर निश्चित नहीं
  • बीच में पैसे निकालने की दिक्कत
क्या निवेश करें? लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए अच्छा विकल्प

एक और खामी यह है कि यदि कोई बच्ची के 9 साल के होने के बाद निवेश करता है तो उसे अधिक समय नहीं मिलेगा। बच्ची के 18 साल पूरे होने पर बचत का केवल 50 फीसदी हिस्सा ही निकाल सकते हैं।

6. प्रश्न: बच्चों की शादी के लिए सोने के गहने खरीद लें?


उत्तर: बच्चों की शादी के लिए सोने में निवेश कभी जरूरी माना जाता था, लेकिन फाइनैंशल अडवाइजर अब इसकी सलाह नहीं देते हैं। फिजिकल गोल्ड में निवेश की कई खामियां हैं। व्याकरणम कहते हैं, ‘आप ना केवल मेकिंग चार्जेज में वैल्यू खोते हैं, बल्कि इसके साथ सुरक्षा का मसला भी है। बॉन्ड और ईटीएफ के मुकाबले रखरखाव खर्च भी ज्यादा है। शुद्धता सबसे बड़ी चिंता है। बेचने के दौरान यह भी हो सकता है कि आपको सही कीमत ना मिले।’

गोल्ड बॉन्ड है बेहतर

गोल्ड जूलरी

मेकिंग चार्जेज प्रति ग्राम सोने पर निश्चित दर या वजन %, + GST
टैक्स लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स तीन साल के बाद
शुद्धता शुद्धता की कोई गारंटी नहीं
स्टोरेज जगह की आवश्यकता, लॉकर चार्ज
तरलता कभी भी बेच सकते हैं

सॉवरन गोल्ड बॉन्ड

मेकिंग चार्जेज लागू नहीं
टैक्स लाभ
  • मच्योरिटी पर कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं
  • 5 साल के बाद बेचने पर LTCG और इंडेक्सेशन बेनिफिट
शुद्धता कीमत सोने पर 0.999 शुद्धता के साथ
स्टोरेज डीमैट रूप में रखा जाता है
तरलता 8 साल के लिए लॉक, 5 साल के बाद सौदा कर सकते हैं

Unovest के फाउंडर विपिन खंडेलवाल इससे सहमत हैं। वह कहते हैं, ‘यदि आप बच्चों को शादी पर गोल्ड जूलरी गिफ्ट करना चाहते हैं तो ठीक है, लेकिन निवेश के मकसद से यह सलाह नहीं दी जा सकती है। व्यावहारिक उद्देश्यों से सॉवरेन गोल्ड में निवेश अच्छा विकल्प है।’ ऐसा इसलिए क्योंकि बॉन्ड्स को बेचते समय आपको मार्केट प्राइस के अतिरिक्त 2.5 फीसदी सालाना ब्याज भी मिलता है। आपको रखरखाव पर खर्च नहीं करना होता है और कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं देना पड़ता।

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SunnyNovember 11, 2018
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कोयंबटूर, 11 नवंबर (भाषा) तमिलनाडु के उद्योग मंत्री एम. सी. संपत ने रविवार को कहा कि देश और विदेश के उद्योग तमिलनाडु में निवेश करने के इच्छुक हैं। आगामी वैश्विक निवेशक बैठक (जिम) के दूसरे संस्करण में 2015 के पहले संस्करण से ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि उनकी विदेश यात्राओं में उनके रोड शो, उद्योगों के दौरों के दौरान लोगों ने निवेश करने के प्रति प्रतिबद्धता जतायी। वह राज्य के कई क्षेत्रों में निवेश करने के इच्छुक हैं। संपत यहां एक रोडशो से इतर पत्रकारों से बात कर रहे थे। जिम का दूसरा संस्करण चेन्नई में 23 और 24 जनवरी को आयोजित होना है।

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SunnyNovember 11, 2018
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ह्यूस्टन (अमेरिका), 11 नवंबर (भाषा) ह्यूस्टन के महापौर सिलवेस्टर टर्नर 12 से 18 नवंबर के बीच एक उच्च स्तरीय व्यापार एवं निवेश प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत की यात्रा पर होंगे। टर्नर की इस यात्रा का मकसद द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने समेत ऊर्जा, शिक्षा, अंतरिक्ष और नागर विमानन इत्यादि क्षेत्रों में संयुक्त निवेश पहलों को शुरू करना है। यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा, लाइफ साइंसेस, परिवहन, नवोन्मेष और अंतरिक्ष क्षेत्र के सरकारी एवं कारोबारी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल पहले 12 से 14 नवंबर दिल्ली में होगा और उसके बाद 14 से 17 नवंबर को मुंबई में होगा। टर्नर पहली बार भारत यात्रा पर जा रहे हैं। उनके साथ इस यात्रा पर ग्रेटर ह्यूस्टन साझेदारी की मुख्य आर्थिक विकास अधिकारी सुजैन डेवेनपोर्ट, जान्सन स्पेस सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अध्यक्ष विलियम टी. हैरिस, ग्रेटर ह्यूस्टन के भारत-अमेरिका चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष स्वप्न धरियावन समेत शहर की नगर परिषद के सदस्य, आर्थिक विकास, संचार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार निदेशक शामिल हैं।

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SunnyNovember 11, 2018
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संवत 2074 यानी पिछली दिवाली से इस दिवाली तक का समय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा. पिछले संवत की शुरुआत में जहां शेयर बाजार में ‘रैली’ का मूड था, इसके खत्म होते-होते वो मूड ‘संभलकर कदम रखने’ वाला हो गया. पूरे साल की बात करें तो संवत 2074 में सेंसेक्स ने सिर्फ 6 फीसदी और निफ्टी ने करीब 3 फीसदी का रिटर्न दिया है. निफ्टी 50 इंडेक्स तो अगस्त के शिखर से 10 फीसदी से नीचे आ गया.

जाहिर है, इन सब वजहों ने शेयर बाजार के निवेशकों के मन में चिंता और डर को बढ़ावा दिया है. और अब यही सवाल है कि क्या संवत 2075 शेयर बाजार के लिए शुभ साबित होगा?

वैसे तो दिवाली के दिन हुई मुहूर्त ट्रेडिंग में संवत 2075 की शुरुआत काफी अच्छी रही. सेंसेक्स ने जहां 246 प्वॉइंट की बढ़त दिखाई, वहीं निफ्टी भी 68 प्वॉइंट ऊपर बंद हुआ. 2008 के बाद से मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में ये सबसे बड़ी बढ़त थी. लेकिन दिवाली की छुट्टी के बाद अगले दिन खुले शेयर बाजार में हल्की कमजोरी दर्ज की गई. साफ है कि सिर्फ नया संवत शुरू होने से बाजार में निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौटा नहीं है. क्योंकि महंगा कच्चा तेल, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और कमजोर रुपये जैसी चिंताएं पहले की तरह कायम हैं. जिस एक चीज ने निवेशकों के मन में सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए हैं, वो है चुनावी साल.

अभी देश में पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं और फिर अगले साल अप्रैल-मई में होंगे आम चुनाव. चुनावी साल होने की वजह से सरकार की तरफ से सुधारवादी कदमों पर ब्रेक लगने की आशंका है, साथ ही इस बात पर भी संदेह है कि 2019 के आम चुनावों के बाद क्या केंद्र में एनडीए सरकार पूरे बहुमत के साथ दोबारा आ पाएगी.

शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस कारोबारी साल की तीसरी तिमाही में कंपनियों के नतीजे भी कमजोर आ सकते हैं. इसलिए कम से कम अगली दो से तीन तिमाहियों तक शेयर बाजार में संभलकर पैसे लगाना ही बेहतर है. जब तक आम चुनाव 2019 के नतीजे नहीं आ जाते, बाजार में स्थिरता की उम्मीद नहीं की जा सकती.

हालांकि जानकारों के बीच इस बात पर सहमति है कि पिछले दिनों के करेक्शन के बाद अच्छी कंपनियों के शेयर भी साल की शुरुआत के मुकाबले सस्ते हो चुके हैं. इसलिए उन चुनिंदा शेयरों में पैसे लगाने का ये अच्छा मौका है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो कम से कम अगले 3-4 साल तक अपना निवेश बनाए रख सकते हैं. जानकार इस बात पर खासकर जोर दे रहे हैं कि शेयर बाजार में 3-6 महीनों की गिरावट देखकर इससे दूर रहने या अपने पैसे इक्विटी से बाहर निकालना समझदारी नहीं है. लंबी अवधि के निवेशकों को तो अपने निवेश सलाहकार की मदद से इस वक्त अच्छी कंपनियों के शेयरों में निवेश और बढ़ा देना चाहिए.

SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले क्या करें

जो निवेशक शेयर बाजार में सीधा निवेश नहीं करते बल्कि इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसे लगाते हैं, उनके मन में ये सवाल बार-बार आ रहा है कि रिटर्न निगेटिव हो गए हैं तो क्या SIP रोक देनी चाहिए? इस सवाल का जवाब ब्लूमबर्ग क्विंट से बातचीत में कोटक म्यूचुअल फंड के एमडी नीलेश शाह ने इस तरह दिया, “ जब विराट कोहली बैटिंग करने जाते हैं तो हर गेंद पर चौके या छक्के नहीं लगाते. इसी तरह आप अपने फंड मैनेजर से हर महीने एसआईपी में पॉजिटिव रिटर्न दिलाने की उम्मीद ना करें. ऐसे महीने भी होंगे जब रिटर्न निगेटिव होंगे. लेकिन अगर आप लंबी अवधि (कई दिवाली) तक निवेशित रहेंगे तो आपको एक अच्छी इनिंग देखने को मिलेगी. हो सकता है कि उस इनिंग में हाफ सेंचुरी लगे, सेंचुरी या फिर डबल सेंचुरी भी. इसलिए ये समय एसआईपी रोकने का नहीं, बल्कि उसे दोगुना करने का है.”

इस बात को समझने में आपको नीचे दिए गए आंकड़े मदद कर सकते हैं. ये बात हम बार-बार कहते रहे हैं कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन आपका अनुशासन के साथ किया गया निवेश आपके लिए समृद्धि लेकर आता है. ये उतार-चढ़ाव कई बार पिछले 10 सालों में भी शेयर बाजार में आए हैं. और इस दौरान सेंसेक्स 253 फीसदी और निफ्टी 256 फीसदी बढ़ चुके हैं, यानी ढाई-ढाई सौ परसेंट से ज्यादा. ऐसे कई म्यूचुअल फंड स्कीमें हैं, जिन्होंने 10 साल के दौरान बेहतरीन रिटर्न दिए हैं. (देखें ग्राफिक्स)

साफ है कि अगर अच्छी स्कीमों में आपने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है तो फिर आपको बाजार के उतार-चढ़ाव या किसी चुनावी साल की अस्थिरता से चिंतित होने की जरूरत नहीं है. हां, इस वक्त अगर आप अपना निवेश बढ़ाना चाहते हैं या फिर आप नए निवेशक हैं तो अपनी कुल रकम का 40-50% ही शेयर बाजार या इक्विटी फंड में लगाएं, बाकी रकम आप डेट फंड, बॉन्ड या फिर बैंक एफडी में रखने को प्राथमिकता दें.

(धीरज कुमार जाने-माने जर्नलिस्‍ट हैं. इस आर्टिकल में छपे विचार उनके अपने हैं. इसमें क्‍व‍िंट की सहमति होना जरूरी नहीं है)

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