Investment Plan Archives - earn money online hindi news: Sunnywebmoney.com

SunnySeptember 21, 2018
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1min00

केंद्र सरकार डेढ़ लाख करोड़ की लागत से पूर्वोत्तर राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल बिछा रही है। सरकार का ध्यान सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण व संवेदनशील चीन और बांग्लादेश सीमा पर मजबूत रोड नेटवर्क खड़ा करने पर है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आगामी 24-25 सितंबर को शिलांग में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। इस मौके पर सभी आठ राज्यों के मुख्यमंत्री व संबंधित विभाग के अधिकारी मौजूद रहे हैं।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों व उनकी सीमाओं पर डेढ़ लाख करोड़ की लागत से रोड नेटवर्क का जाल फैलाने का कार्य प्रगित पर है। इसके तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक लंबे दो लेन व चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जा रहे हैं। सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग व ढांचागत विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) नामक नए सरकारी उपक्रम का गठन पहले ही कर चुकी है। 

इन राज्यों में निवेश 

अधिकारी ने बताया कि डेढ़ लाख करोड़ में चीन सीमा और बांग्लादेश सीमा से सटे असम में 48,221 करोड़,  सिक्कम में 17,000 करोड़ और अरुणाचल प्रदेश में 10,000 करोड़ रुपये निवेश किए जा रहे हैं। मिजोरम में 12,000 करोड़, मणिपुर में 22,000 करोड़, त्रिपुरा में 8,000 करोड़, नागालैंड में 20,000 करोड़ और मेघायल में 8,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

अड़चनें दूर करने जाएंगे गडकरी

सूत्रों ने बताया कि नितिन गडकरी चालू परियोजनाओं को गति देने के लिए दो दिन शिलांग में समीक्षा बैठक करेंगे। इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, पीडब्ल्यूडी मंत्री, एनएचआईडीसीएल, एनएचएआई, मंत्रालय के अधिकारी शिरकत करेंगे। बैठक में प्रमुख रूप से राजमार्ग निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण मंजूरी, जनसुविधाएं स्थानांतरण जैसी अड़चनों को दूर करना है। विदित हो कि गडकरी आगामी आम चुनाव के मुद्देनजर मार्च, 2019 तक अधिक से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को पूरा करना चाहते हैं, जिससे इसका फायदा चुनाव में उठाया जा सके।

समय बचेगा 

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अपने दो दिवसीय दौरे में मेघायल में 102 किलोमीटर लंबे जोवाय-रतचेरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच संख्या-6) को राष्ट्र को समपर्ति करेंगे। राजमार्ग के निर्माण पर 683 करोड़ रुपये लागत आई है। इसके बनने से जोवाय से रतचेरा की दूरी चार घंट से घटकर दो घंटे 50 मिनट रह जाएगी।

अंडमान में निर्माण 

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय अंडमान निकोबार में 10,000 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय राजमार्गों को विकसित कर रहा है। देशभर में 61,164 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जा रहा है। 1837 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मंत्रालय 6,45,199 लाख करोड़ का निवेश कर रहा है।

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SunnySeptember 21, 2018
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4min20

NCD, FD या स्माल सेविंग्स स्कीम, जानिए कहां निवेश में कितना फायदा

Web Title: small saving schemes or fd or ncd know where should you invest

(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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केंद्र सरकार ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं में ब्याज दर बढ़ा दिया है। इससे फिक्स्ड इनकम के लिए निवेश करने वाले काफी खुश हैं। आइए देखते हैं कि किस स्कीम में निवेश होगा ज्यादा फायदेमंद और किस स्कीम में कितना है ब्याज। (ब्याज दर 1 अक्टूबर 2018 से लागू)

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सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम

सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम

सीनियर सिटिजंस के लिए इस स्कीम में निवेश काफी सुरक्षित और फायदेमंद है। 5 साल के निवेश पर 8.7 प्रतिशत का शानदार ब्याज मिल रहा है। पहले ब्याज दर 8.3 प्रतिशत थी। इसमें भी ब्याज की रकम टैक्स के दायरे में है।

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पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट्स

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट्स

फिक्स्ड इनकम की चाह वालों के लिए यह आकर्षक विकल्प रहा है। इसमें आप 1 से 5 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं, जिस पर 6.9 से 7.8 प्रतिशत ब्याज मिलता है। पहले इसमें अधिकतम ब्याज दर 7.4 प्रतिशत थी। इस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं।

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सुकन्या समृद्धि योजना

सुकन्या समृद्धि योजना

इस स्कीम के तहत 1 अक्टूबर 2018 से 8.5 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। पहले ब्याज दर 8.1 प्रतिशत थी। इसके तहत 10 वर्ष तक की आयु की बेटी (अधिकतम 2) के नाम से खाता खोला जा सकता है।

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पीपीएफ

पीपीएफ

पब्लिक पॉविडेंट फंड (PPF) में अब 8 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा। पहले इस पर ब्याज दर 7.6 प्रतिशत थी।

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SunnySeptember 18, 2018
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1min50

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कृषि क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने तथा इसे टिकाऊ एवं स्वावलंबी बनाने के लिए क्षेत्र में निवेश में सब्सिडी की जरूरत पर मंगलवार को बल दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक अधिक संसाधन जुटाने की बात है, अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने के इस संदर्भ में स्पष्ट परिणाम दिखाई देने लगे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी सृजन के लिए सरकार के पास पहले से अधिक संसाधन हाथ में रहने लगे हैं। जेटली ने कहा, ‘‘कई अन्य क्षेत्रों में भी अर्थव्यवस्था औपचारिक हो रही है। हम स्पष्ट परिणाम देख सकते हैं और इसके कारण अब सरकार के पास अतिरिक्त संसाधन बचने लगे हैं। मुझे नहीं लगता कि यह प्रक्रिया अब वापस होगी।’’ उन्होंने ‘सपोर्टिंग इंडियन फार्म्स दी स्मार्ट वे’ नामक किताब का विमोचन करने के बाद कहा कि भारत अब ऐसी स्थिति में जा रहा है जब सरकार के पास अधिक संसाधन हैं। इससे जरूरी क्षेत्रों पर खर्च करने की क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भौतिक संरचना, सामाजिक क्षेत्र और कृषि क्षेत्र ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं जिनमें निवेश की जरूरत है। जेटली ने कहा, ‘‘जब संसाधन बढ़ेगा, पूंजीगत व विकास खर्च भी बढ़ेगा। उम्मीद है कि इन क्षेत्रों में संसाधन की कमी की दिक्कत नहीं होगी। इसने हमें प्रोत्साहित किया है…सरकार ने साल दर साल सब्सिडी, कीमत, फसल बीमा और ब्याज में छूट आदि के संदर्भ में कृषि क्षेत्र में निवेश करने का अनुकूलित कदम उठाया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं निवेश के साथ सब्सिडी का मिश्रण करने में उम्मीद देखता हूं। महज सब्सिडी पर अनिश्चित समय तक निर्भरता का तरीका टिकाऊ नहीं है। निवेश से कृषि क्षेत्र स्वावलंबी बनेगा। अपेक्षाकृत कम सब्सिडी के साथ स्वावलंबी किसान भारतीय कृषि में बेहतर योगदान दे सकता है।’’ जेटली ने आर्थिक वृद्धि के बारे में कहा कि भारत ने पिछले 25 साल में तार्किक दर से वृद्धि की है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने अब ऐसी स्थिति हासिल कर ली है कि हम बाकियों की तुलना में बेहतर गति से बढ़ रहे हैं। उम्मीद है कि इस वृद्धि को और तेज करने के विभिन्न कारक हैं। देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं जो पहले अच्छे से नहीं बढ़ सके हैं अत: अभी वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं।’’ जेटली ने कहा कि सार्वजनिक विमर्श अक्सर लोकलुभावन चीजों से प्रभावित हो जाता है। उन्होंने कहा कि अच्छी राजनीति के साथ स्वस्थ एवं तार्किक नीति भी होनी चाहिए।

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SunnySeptember 18, 2018
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नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कृषि क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने तथा इसे टिकाऊ एवं स्वावलंबी बनाने के लिए क्षेत्र में निवेश में सब्सिडी की जरूरत पर मंगलवार को बल दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक अधिक संसाधन जुटाने की बात है, अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने के इस संदर्भ में स्पष्ट परिणाम दिखाई देने लगे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी सृजन के लिए सरकार के पास पहले से अधिक संसाधन हाथ में रहने लगे हैं। जेटली ने कहा, ‘‘कई अन्य क्षेत्रों में भी अर्थव्यवस्था औपचारिक हो रही है। हम स्पष्ट परिणाम देख सकते हैं और इसके कारण अब सरकार के पास अतिरिक्त संसाधन बचने लगे हैं। मुझे नहीं लगता कि यह प्रक्रिया अब वापस होगी।’’ उन्होंने ‘सपोर्टिंग इंडियन फार्म्स दी स्मार्ट वे’ नामक किताब का विमोचन करने के बाद कहा कि भारत अब ऐसी स्थिति में जा रहा है जब सरकार के पास अधिक संसाधन हैं। इससे जरूरी क्षेत्रों पर खर्च करने की क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भौतिक संरचना, सामाजिक क्षेत्र और कृषि क्षेत्र ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं जिनमें निवेश की जरूरत है। जेटली ने कहा, ‘‘जब संसाधन बढ़ेगा, पूंजीगत व विकास खर्च भी बढ़ेगा। उम्मीद है कि इन क्षेत्रों में संसाधन की कमी की दिक्कत नहीं होगी। इसने हमें प्रोत्साहित किया है…सरकार ने साल दर साल सब्सिडी, कीमत, फसल बीमा और ब्याज में छूट आदि के संदर्भ में कृषि क्षेत्र में निवेश करने का अनुकूलित कदम उठाया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं निवेश के साथ सब्सिडी का मिश्रण करने में उम्मीद देखता हूं। महज सब्सिडी पर अनिश्चित समय तक निर्भरता का तरीका टिकाऊ नहीं है। निवेश से कृषि क्षेत्र स्वावलंबी बनेगा। अपेक्षाकृत कम सब्सिडी के साथ स्वावलंबी किसान भारतीय कृषि में बेहतर योगदान दे सकता है।’’ जेटली ने आर्थिक वृद्धि के बारे में कहा कि भारत ने पिछले 25 साल में तार्किक दर से वृद्धि की है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने अब ऐसी स्थिति हासिल कर ली है कि हम बाकियों की तुलना में बेहतर गति से बढ़ रहे हैं। उम्मीद है कि इस वृद्धि को और तेज करने के विभिन्न कारक हैं। देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं जो पहले अच्छे से नहीं बढ़ सके हैं अत: अभी वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं।’’ जेटली ने कहा कि सार्वजनिक विमर्श अक्सर लोकलुभावन चीजों से प्रभावित हो जाता है। उन्होंने कहा कि अच्छी राजनीति के साथ स्वस्थ एवं तार्किक नीति भी होनी चाहिए।

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SunnySeptember 17, 2018
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1min40

लखनऊ. सोमवार को लखनऊ में कोरियन कारवां कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में साउथ कोरिया के रिपब्लिक अम्बैसेडर शिन बोंगकिल ने भारत में टूरिज्म और इंवेस्टमेंटस पर बात की। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में यूपी में अब इन्वेस्टमेंट की काफी ग्रोथ हुई है। इसके साथ ही अयोध्या में पार्क इन्वेस्टमेंट पर भी बात की। कोरिया की राजकुमारी क्वीन हेओ-ह्वांग-ओके का अयोध्या से कनेक्शन है। इनका जन्म तो अयोध्या में हुआ था लेकिन इनकी मृत्यु कोरिया में हुई थी। इस हिस्टॉरिक कनेक्शन के चलते अयोध्या में इन्वेस्टमेंट करने का निर्णय लिया गया है।

शिन बोंगकिल ने बताया कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरिया आए थे। तब ग्रैंड लेवल पर किन सेक्टर्स और किन एरियाज में इन्वेस्ट करना चाहिए, इस पर बात की गयी थी। पहले इन्वेस्टर्स इंडिया में इन्वेस्ट करने को तैयार नहीं थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इंडिया में इन्वेस्टमेंट की अपार सीमाएं झलकी हैं। उन्होंने मोदी के मेक इन इंडिया कैंपेन की तारीफ कर कहा कि मेक इन इंडिया और जीएसटी एक अच्छा कदम है। इससे कई मायनों में इकोनॉमी को फायदा होगा। भारत के मेक इन इंडिया, क्लीन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे प्रोग्राम में कोरिया साथ देना चाहता है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में कोरियाई कंपनी सैमसंग ने यूपी में अपने सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कोरियाई राष्ट्राध्यक्ष भी मौजूद थे। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक सिटी में भी कई कोरियाई कंपनियां निवेश करने की इच्छुक हैं। मौजूदा समय में कोरियाई कंपनियां यूपी में निवेश के मामले में सबसे आगे हैं।

भारत एक प्रगतिशील देश

भारत एक प्रगतिशील देश है और यह उत्पादों के लिए विश्व का बहुत बड़ा मार्केट है। कोरिया की कंपनी सैमसंग, एल जी भारतीयों के हर घर में मौजूद है। उन्होंने कहा की उत्तर प्रदेश से अयोध्या की राजकुमारी सूरी रतना समुंद्र के रास्ते कोरिया गई और वहा के राजा से शादी की। उससे किम डायनेस्टी की शुरुआत हुई। आज कोरिया में लगभग 10 % लोग इस डायनेस्टीके है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राजकुमारी सूरी रतना जिन्हे कोरिया में प्रिंसेस कहा जाता है , उनके नाम से एक पार्क का निर्माण भी हुआ है।

अयोध्या में होगा इन्वेस्टमेंट

शिन बोंगकिल ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक खूबसूरत सिटी है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में इन्वेस्टमेंट किया जा सकता है। अयोध्या हाई क्वालिटी जगह नहीं है। ऐसे में वहां पर इकोनॉमिक कॉपरेशन के तहत मेमोरियल पार्क बनाए जाने की योजना है। यह मेमोरियल पार्क ग्रैंड लेवल पर बनेगा। हालांकि, इस बारे में ज्यादा बात नहीं की गयी।

इसलिए चुना अयोध्या को

अयोध्या और कोरिया का हिस्टोरिक कनेक्शन है। प्राचीन काल में, बौद्ध धर्म कोरिया और भारत के बीच संबंधों का आधार था। चौथी शताब्दी के उत्तरार्ध में कोरिया को बौद्ध धर्म पेश किया गया था और कोरिया के तीन साम्राज्यों में से पहला कुग्यूरो बौद्ध धर्म प्राप्त हुआ था। किम सोसुरीम (371-384) के शासनकाल के दौरान, बौद्ध धर्म आधिकारिक तौर पर कोरिया में मान्यता प्राप्त था।

कोरिया की राजकुमारी क्वीन हेओ-ह्वांग-ओके का भगवान राम की नगरी अयोध्या से कनेक्शन है। अयोध्या से दक्षिण कोरिया के ग्योंगसांग प्रांत में बने किमहये शहर आ गयी थी। उन दिनों कोरिया में ‘काया’ राजवंश का शासन था और किम सुरो वहां के राजा थे, जिससे राजकुमारी को प्रेम हो गया और दोनों वैवाहिक बंधन में बंध गए थे।

दक्षिण कोरियन साहित्य में अयोध्या को ‘अयुता’ के नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं दक्षिण कोरियन सरकार ने अपनी पूर्व रानी की स्मृति में एक स्मारक भी बनवा रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन भारत आए थे। इस दैरान उन्होंने पाया कि भारत और कोरिया कई मामलों में कॉमन वैल्यू शेयर करते हैं।

जंप फेस्टिवल शो

कार्यक्रम के बाद ‘जंप फेस्टिवल’ कार्यक्रम का आयोजन संगीत नाटक अकादमी में किया गया। यह कोरिया में चर्चित शो है, जिसमें मार्शल आर्टस, एक्रोबेटिक्स और कॉमेडी होती है। यह भारत के 2015 कोरिया फेस्टिवल में हिट था।

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SunnySeptember 17, 2018
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– कोरियाई राजदूत की अगुआई में दो दिवसीय दौरे पर कोरियाई डेलिगेशन

– भारत के किसी राज्य में पहली बार परफॉर्मेंस देगा कोरियाई डेलिगेशन

एनबीटी ब्यूरो, लखनऊ : दक्षिण कोरिया निवेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से सांस्कृतिक रिश्ता भी जोड़गा। इसी रिश्ते को मजबूत करने के लिए कोरियाई राजदूत सोमवार को राजधानी लखनऊ में होंगे। सोमवार को कोरियाई राजदूत की अगुआई में कोरियन कारवां नाम का डेलिगेशन 17 और 18 सितंबर को सांस्कृतिक प्रस्तुति भी देगा। यह पहला मौका है जब कोरियाई डेलिगेशन देश के किसी राज्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करेगा। अभी तक इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन दिल्ली में ही होता था। इस कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया की कई कंपनियों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। कोरियाई डेलिगेशन के साथ इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के अधिकारी भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश पर चर्चा भी की जाएगी।

निवेश पर भी होगी चर्चा

इस सांस्कृतिक आयोजन के दौरान कोरिया और यूपी के बीच निवेश को लेकर भी चर्चा होगी। कोरियाई प्रतिनिधिमंडल में सैमसंग, एलजी, हुंडई जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। हाल ही में कोरियाई कंपनी सैमसंग ने यूपी में अपने सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कोरियाई राष्ट्राध्यक्ष भी मौजूद थे। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक सिटी में भी कई कोरियाई कंपनियां निवेश करने की इच्छुक हैं। मौजूदा समय में कोरियाई कंपनियां यूपी में निवेश के मामले में सबसे आगे हैं।

एसएनए में परफॉर्म करेंगे कलाकार

सोमवार और मंगलवार को कोरियाई दल संगीत नाटक अकादमी (एसएनए) में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगा। इसमें मार्शल आर्ट और एरोबैटिक्स की परफॉर्मेंस दी जाएगी। इसका नाम होगा ‘जंप’। इससे पहले कोरियाई डेलिगेशन ‘जंप’ की परफॉर्मेस लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में भी दे चुका है।

कनाडा का डेलिगेशन आज लेगा हिस्सा

सोमवार को कोरियाई डेलिगेशन के साथ कनाडा की कंपनियों का डेलिगेशन भी लखनऊ में होगा। यूपी में निवेश की संभावनाओं को लेकर कैनेडियन डेलिगेशन औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना और मुख्य सचिव डॉ. अनूप चन्द्र पांडेय के साथ चर्चा करेगा। इस दौरान डेलिगेशन के सदस्य राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों के साथ स्मार्ट सिटी और दूसरे विषयों पर भी चर्चा करेंगे।

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SunnySeptember 16, 2018
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2min30

आदिल शेट्टी
अनुशासित तरीके से इन्वेस्टमेंट करके ही आप अपने सभी फाइनैंशल लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं जिसमें रिटायरमेंट भी शामिल है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि कई लोगों को रिटायरमेंट प्लानिंग का महत्व तब समझ में आता है जब उनकी कामकाजी जिंदगी आधी से ज्यादा बीत चुकी होती है। रिटायरमेंट की प्लानिंग तभी शुरू कर देनी चाहिए जब आप काम करना या कमाना शुरू करते हैं। क्योंकि शुरुआती स्टेज में आपकी रिस्क लेने की क्षमता अधिक होती है और एक बड़ी रकम तैयार करने के लिए उस समय आपके पास काफी समय भी होता है।

एक नौजवान होने के नाते, आप पूछ सकते हैं कि रिटायरमेंट की प्लानिंग जरूरी क्यों है। अपने सुनहरे सालों में अपने मौजूदा लाइफ स्टाइल का खर्च उठाने लायक बने रहने के लिए एक बड़ी रकम तैयार करना जरूरी है क्योंकि उस समय आप काम नहीं कर पाएंगे या कमा नहीं पाएंगे जिससे आपको आज की तरह एक फिक्स्ड मंथली इनकम नहीं मिल पाएगी। अपने खर्चों को पूरा करने के लिए आपको अपने वर्किंग लाइफ के दौरान इन्वेस्ट की गई रकम पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। इसके अलावा, बेहतर मेडिकल फैसिलिटी के कारण ज्यादा दिनों तक जिंदा रहने की संभावना में वृद्धि होने के कारण और बढ़ती महंगाई के कारण रिटायरमेंट के लिए काफी पैसा बचाकर रखने के लिए जल्द से जल्द सेविंग और इन्वेस्टमेंट करना बेहद जरूरी है।

यहां एक सिंपल गाइड दिया गया है, जिसकी मदद से आप यह जान सकते हैं कि आपको अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी का अच्छी तरह ख्याल रखने के लिए क्या करना चाहिए।


जल्दी शुरुआत करें


जल्द से जल्द इन्वेस्टमेंट की शुरुआत करके और चक्रवृद्धि की ताकत का लाभ उठाकर आप एक बड़ी रकम तैयार कर सकते हैं। लम्बे समय तक इन्वेस्टमेंट करते रहने पर, चक्रवृद्धि आपके छोटे से इन्वेस्टमेंट को भी एक बड़ी रकम में बदल सकता है। जल्दी प्लानिंग न करके, नौजवान प्रफेशनल अक्सर अपने वर्किंग लाइफ के शुरुआती 10 से 15 साल बर्बाद कर देते हैं जो एक बड़ी रकम तैयार करने की शुरुआत करने के लिए बहुत सही समय होता है।

इस तरह, वे सिर्फ रिटायरमेंट के लिए बचे हुए सालों से ही नहीं बल्कि उन सालों में चक्रवृद्धि से होने वाले लाभ से भी हाथ धो बैठते हैं। उदाहरण के लिए, सिर्फ 1500 रुपये का एक मंथली एसआईपी आपको 15 प्रतिशत के एक्सपेक्टेड एनुअल रिटर्न रेट के हिसाब से 30 साल बाद 1.1 करोड़ रुपये की एक बड़ी रकम तैयार करने में आपकी मदद कर सकता है। लेकिन, यदि आप सिर्फ 10 साल देर से वही इन्वेस्टमेंट प्लान शुरू करते हैं तो आपके पास सिर्फ 22.7 लाख रुपये ही जमा हो पाएंगे। एक बड़ी रकम तैयार करने के लिए समय भी उतना ही मायने रखता है जितना कि रिटर्न रेट। जल्दी शुरुआत करते समय छोटी सी रकम से शुरुआत करें और इनकम बढ़ने पर अपने इन्वेस्टमेंट को बढ़ाते चले जाएं। आप कम से कम 500 रुपये से एक एसआईपी शुरू कर सकते हैं।


सूटेबल फाइनैंशल प्रॉडक्ट चुनें


मार्केट में कई पेंशन प्लान मौजूद हैं जो रिटायरमेंट के लिए वेल्थ क्रिएट करने में आपकी मदद कर सकते हैं। उनमें नियमित रूप से हर महीने इन्वेस्ट करके आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपको आपके रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी में नियमित रूप से एक इनकम मिलती रहेगी। लेकिन इसके लिए पूरे करियर के दौरान नियमित रूप से और अनुशासित तरीके से इन्वेस्टमेंट करना जरूरी है।

नौजवान प्रफेशनल्स को इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करना चाहिए क्योंकि उनका इन्वेस्टमेंट होराइजन अधिकांश मामलों में 25 साल से ज्यादा होता है। इतना लम्बा इन्वेस्टमेंट टेन्योर होने से उन्हें काफी अच्छा रिटर्न मिल सकता है जो महंगाई और बढ़ते लाइफ स्टाइल कॉस्ट इत्यादि का दूसरों की तुलना में अच्छी तरह ख्याल रख सकता है। लेकिन इसके लिए उन्हें अपने रिटायरमेंट प्लान पर फोकस करना चाहिए और नियमित रूप से जरूरी रकम इन्वेस्ट करते रहना चाहिए और अन्य इन्वेस्टमेंट लक्ष्यों के साथ इसे मिक्स नहीं करना चाहिए। चूंकि यह एक लक्ष्य आधारित प्लान है इसलिए आपको इन्वेस्टमेंट टेन्योर के बीच में अपना इन्वेस्टमेंट बंद नहीं करना चाहिए और अनुशासित तरीके से नियमित रूप से इन्वेस्टमेंट करते रहना चाहिए।

सैलरी बढ़ने पर इन्वेस्टमेंट बढ़ाएं

हमेशा यह कहावत याद रखें ‘बूंद-बूंद करके ही घड़ा भरता है’। जब आप नौजवान हों तब छोटे से इन्वेस्टमेंट के साथ शुरुआत करने और बाद में इनकम बढ़ने पर अपना इन्वेस्टमेंट बढ़ाते रहने में कोई नुकसान नहीं है। आप अपनी बढ़ोत्तरी के आधार पर अपना एसआईपी बढ़ा सकते हैं और रिटायरमेंट से पहले अपना कर्ज चुकाने के बारे में भी सोच सकते हैं।

हर महीने किया जाने वाला छोटा सा इन्वेस्टमेंट भी वर्षों बाद एक बड़ी रकम बन जाएगा, जो आपके रिटायरमेंट के बाद के खर्चों का आराम से ख्याल रख सकेगा। इसलिए जल्द से जल्द इन्वेस्ट करना शुरू करें, नियमित रूप से इन्वेस्ट करें, और अनुशासित तरीके से इन्वेस्ट करें।


(लेखक, बैंक बाज़ार के सीईओ हैं।)

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