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SunnyAugust 18, 2018
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1min10

जॉब डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:44 AM IST

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मध्यप्रदेश ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन कॉर्पोरेशन लिमिटिड (MPTRIFAC) में असिस्टेंट ग्रेड -I, II में भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। 32 पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता अलग – अलग निर्धारित की गई हैं। आपको बता दें कि परीक्षा के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष रखी गई है।

परीक्षा के लिए 600 रूपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसे आप मध्यप्रदेश ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन कॉर्पोरेशन लिमिटिड (MPTRIFAC) की ऑफिशियल वेबसाइट www.mponline.gov.in पर जाकर जमा कर सकते हैं। उम्मीदवार आवेदन प्रक्रिया को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही अप्लाई करें।


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मुख्य जानकारी

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SunnyAugust 17, 2018
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सांकेतिक तस्वीर
उमा शशिकांत, नई दिल्ली

हम सभी कभी न कभी ऐसे निर्णय कर ही बैठते हैं, जो बाद में गलत साबित होते हैं, लेकिन अतीत की गलतियों पर पछताने भर से क्या होगा? ऐसे अहसास में डूबे रहना अच्छा नहीं होता, लेकिन किया क्या जाए? पहला काम तो यही करें कि अपने प्रति कुछ नरमी बरतें। निर्णय पहले किया गया था और अब जाकर आपको नई जानकारी हासिल होने पर पता चला कि वह निर्णय ठीक नहीं था। अगर आपको पहले पता होता तो आप वह फैसला करते ही क्यों?

फिर यह देखें कि उस निर्णय से क्या सबक लिया जा सकता है। हो सकता है कि आपने किसी आईपीओ में निवेश किया हो और अब वह शेयर ऑफर प्राइस से 95 पर्सेंट नीचे चल रहा हो। हो सकता है कि आपने अपनी छोटी गाड़ी बेचकर बड़ी कार खरीदी हो और अब ईएमआई का बोझ चुभ रहा हो। ऐसे हर निर्णय का सबक यह होता है कि ऐसा कदम को दोहराया न जाए।

तीसरा काम जिम्मेदारी लेने का है। आपके दोस्त ने हो सकता है कि बताया हो कि आईपीओ आपको मालामाल कर देगा, हो सकता है कि कार आपने जीवनसाथी के कहने पर खरीदी हो या हो सकता है कि बीमा एजेंट ने गोलमोल बातें कर आपको फंसाया हो। आप इसका दोष उन पर डाल सकते हैं, लेकिन हर मामले में चेक पर दस्तखत तो आपने ही किए तो फैसले की जिम्मेदारी लें। यह अफसोस से उबरने की राह पर पहला कदम है।

चौथा काम अपनी कमजोरियां पहचानने का है। देखें कि क्या उस कमजोरी को दूर किया जा सकता है। हो सकता है कि आपको सही शेयर चुनने का सलीका न आता रहा हो, आप अब यह सीख सकते हैं। हो सकता है कि कार के बारे में आपने खुलकर चर्चा न की हो। आप अब हर फैसले पर अपने जीवनसाथी से विस्तार से चर्चा करने का सबक ले सकते हैं।

पांचवां काम यह पक्का करने का है कि आप गलतियां न दोहराएं। आईपीओ में खराब अनुभव के बाद शेयर खरीदारी के टिप्स लेने के लिए टीवी या किसी ऑनलाइन फोरम की ओर न मुड़ें। बड़ा एसेट खरीदने की निर्णय प्रक्रिया बदलें ताकि आप अपने जीवनसाथी के साथ चर्चा कर सकें कि उस निर्णय से आपका जीवन किस तरह बदलेगा। टैक्स बचाने के हर विकल्प को समझ लें और निवेश की शुरुआत साल शुरू होने के साथ करे, न कि आखिर में, जब गलतियां होने का डर ज्यादा होता है।

छठा काम समस्या की जड़ तक पहुंचने का है। क्या आप फटाफट पैसा बनाने को लालायित रहते हैं? क्या पर्याप्त कमाई नहीं हो रही? क्या आप खर्च ज्यादा कर रहे हैं और टैक्स बचाने के उपाय साल के आखिरी समय के लिए टाल रहे हैं? देखें कि आपने जो निर्णय किया था, उसकी बुनियादी वजह क्या थी।

सातवां काम अपने निर्णय पर चर्चा करने और आगे के कदम के लिए सलाह लेने का है। हो सकता है कि आप ऐसा शेयर होल्ड कर रहे हों, जिसकी अधिकांश वैल्यू खत्म हो चुकी हो और अफसोस के चलते आप उसे बेच भी नहीं पा रहे हों। शेयरों की जानकारी रखने वाले किसी सहयोगी या सलाहकार से चर्चा करें। आप सोच रहे होंगे कि ईएमआई कम रहता तो ठीक होता। इस बारे में अपने बैंकर से बात करें। समस्या को बढ़ते देने के बजाय उससे निपटने की तैयारी करें।

आठवां काम यह देखने का है कि किसे आप कंट्रोल कर सकते हैं और किसे नहीं। आपको पता नहीं रहा होगा कि आगे चलकर शेयर का प्रदर्शन कैस रहेगा। पूरी अनैलेसिस के बाद भी आईपीओ ऐसी वजहों से झटका दे गया, जो आपके कंट्रोल में नहीं थीं। आप बड़े नुकसान के चलते भविष्य में इक्विटी इनवेस्टमेंट नहीं करने की कसम खा सकते हैं या यह पता कर सकते हैं कि गिरावट का जोखिम कम रखते हुए शेयरों में निवेश कैसे जारी रखा जा सकता है।

नौवां कदम बदलावों के साथ तालमेल बैठाने की क्षमता देखने का है। हममें से कई लोगों के पास इतनी दौलत नहीं है कि बड़ा नुकसान बर्दाश्त कर जाएं, हममें से कुछ लोग अनिश्चितता के साथ असहज रहते हैं, तो कुछ में लंबी अवधि के निवेश का धीरज नहीं होता। फ़ाइनैंशल मार्केट्स का हाल लगातार बदलता रहता है। ऐसे में अपनी सीमाएं पहचानें।

दसवां कदम है काम को बेहतर ढंग से करने का तरीका तलाशने का। अगर आज वही निर्णय आपको करना हो तो कैसे करेंगे? कौन सा कदम अलग ढंग से उठाएंगे? कौन से सवाल पूछेंगे? कौन सी जानकारी जुटाना चाहेंगे? एक कागज पर सारी बातें लिखें, सबक नोट करें। किसी गलत फैसले को यूं ही जाया न होने दें।

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SunnyAugust 17, 2018
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सांकेतिक तस्वीर
नई दिल्ली

भारत की मैक्रो सिचुएशन पिछले कुछ हफ्तों में खराब हुई है। अभी क्वॉलिटी स्टॉक्स और आईटी कंपनियों के साथ बने रहने में समझदारी है। कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के सीनियर एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर संजीव प्रसाद ने ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में यह बात कही। पेश हैं इंटरव्यू के खास अंश:

6 महीने पहले के लेवल से बाजार में अच्छी रिकवरी हुई है। इस पर आपको क्या कहना है?


देश अभी भी मैक्रो लेवल पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन मार्केट उनमें से कुछ की अनदेखी कर रहा है। हमें देखना होगा कि यहां से बाजार किस तरफ जाता है।

क्या आपका इशारा तुर्की की तरफ है?

कई कारण हैं। ग्लोबल माइक्रो-इकनॉमिक सिचुएशन अच्छी नहीं है। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर तेज हो रही है। अगर अमेरिका वाकई में चीन के 200 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर टैरिफ लगाता है तो इससे चीन की इकनॉमी कुछ हद तक अस्थिर हो सकती है। कुछ मैक्रो चुनौतियां भारत में हम पहले से ही देख रहे हैं। दूसरा मसला, कच्चे तेल और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का है। ईरान दुनिया को काफी तेल की सप्लाई करता है। अगर इसमें से आधी सप्लाई भी रुकती है तो इससे बड़ी समस्या पैदा होगी। दूसरे देश इतनी जल्दी तेल की सप्लाई नहीं बढ़ा पाएंगे। इसलिए तेल के दाम में तेजी की काफी संभावना है।


क्या आप आईटी और फार्मा स्टॉक्स खरीद रहे हैं क्योंकि इन्हें रुपये में गिरावट से फायदा होगा?

आपको हर स्टॉक को अलग-अलग देखना होगा। यह कोई प्रोग्राम ट्रेड नहीं है। आप आईटी और फार्मा स्टॉक्स में कुछ निवेश कर सकते हैं। कॉर्पोरेट बैंकों या मेटल और माइनिंग स्टॉक्स में भी निवेश किया जा सकता है।


क्या आप एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे क्वॉलिटी स्टॉक्स के साथ बने रहेंगे या कॉन्ट्रेरियन स्टॉक्स पर दांव लगाएंगे?

अभी सिर्फ क्वॉलिटी स्टॉक्स अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। अगर आप इस साल अभी तक के निफ्टी के परफॉर्मेंस को देखेंगे तो उसका पूरा परफॉर्मेंस सिर्फ 10 स्टॉक्स की वजह से है। अगर मैक्रो इश्यूज सामने आते हैं तो लोगों को हाई क्वॉलिटी ग्रोथ स्टॉक्स या आईटी कंपनियों में पनाह लेनी पड़ेगी। निफ्टी इस साल रुपये में 8 पर्सेंट चढ़ा है, जबकि डॉलर में यह करीब फ्लैट रहा है। वहीं, बीएसई मिडकैप इंडेक्स रुपये में 9 पर्सेंट गिरा और डॉलर टर्म में उसमें 15-16 पर्सेंट का करेक्शन हुआ है। उधर, स्मॉल कैप इंडेक्स रुपये में 12-13 पर्सेंट और डॉलर में 20 पर्सेंट फिसला है। कहने का मतलब यह है कि इस साल निवेशकों ने बहुत पैसा नहीं बनाया है।


क्या बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई या आईसीआईसीआई बैंक जैसे अंडरपरफॉर्मर्स पर यह दांव लगाने का सही समय है?

हमें लगता है कि बैड लोन साइकल खत्म होने को है। कम से कम कॉर्पोरेट लोन बुक के बारे में यह बात सही है। पिछले एक महीने में कुछ कॉर्पोरेट बैंकों ने अच्छा रिटर्न दिया है। इसलिए इनमें पैसा लगाने के बारे में सोचा जा सकता है।


आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस में कौन बेहतर है?

3-5 साल तक निवेश करने पर आप दोनों से पैसा बना सकते हैं। हालांकि, अगले एक साल में आईसीआईसीआई बैंक से पैसा बनाने की संभावना अधिक है क्योंकि बैड लोन पीक पर पहुंच चुका है।

ऑइल मार्केटिंग कंपनियों पर आपकी क्या राय है, खासतौर पर कच्चे तेल के दाम को देखते हुए?

ये कंपनियां सस्ती हैं, लेकिन तेल की चाल के बारे में कुछ भी कहना आसान नहीं है। ईरान पर अमेरिका ने नवंबर से प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस तरह के प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

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SunnyAugust 17, 2018
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जेफ बेजॉस (फाइल फोटो)
न्यू यॉर्क

दुनिया की टॉप ई-कॉमर्स कंपनियों में शामिल ऐमजॉन के संस्थापक जेफ बेजॉस के माता-पिता ने 1990 के दशक में उनके बिजनस के शुरुआती दौर में निवेश करने का फैसला किया था। उनके इस निवेश का मूल्य अब बढ़कर अरबों डॉलर की हो सकती है। बेजॉस दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति हैं। यह अभी तक का सबसे सफल वेंचर इन्वेस्टमेंट हो सकता है। 1995 में जैकी और माइक बेजॉस ने अपने बेटे की ई-कॉमर्स वेबसाइट में 2,45,573 डॉलर लगाए थे। जेफ बेजॉस के सौतेले पिता माइक बेजॉस ने 2015 में एक कार्यक्रम के दौरान स्टेज पर कहा था कि उस समय यह एक बड़ा जुआ था।

निवेश करने से पहले बेजॉस ने अपने पैरंट्स से कहा था, ‘मैं चाहता हूं कि आपको यह पता हो कि इसमें कितना जोखिम है। मैं बाद में डिनर के लिए घर आने पर आपकी नाराजगी नहीं झेलना चाहता।’

कंपनी के आईपीओ और तीन स्टॉक स्प्लिट के बाद उनके पैरंट्स की कंपनी में हिस्सेदारी की कीमत अब लगभग 30 अरब डॉलर की हो सकती है। इससे वे माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक पॉल एलेन से भी अमीर बन जाएंगे। एलेन अभी दुनिया के 44वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। बेजॉस के माता-पिता की कंपनी में होल्डिंग का डिस्क्लोजर 1999 के अंत से नहीं दिया गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि उनके पास अभी कितनी हिस्सेदारी है, लेकिन अपने चैरिटेबल फाउंडेशन को ऐमजॉन के शेयर्स लगातार दान करते रहने से यह संकेत मिलता है कि उनके पास अभी भी कंपनी में अच्छी हिस्सेदारी मौजूद है।

उन्होंने 2001 से 2016 के बीच बेजॉस फैमिली फाउंडेशन को 5,95,027 शेयर दान किए हैं। 2016 में उन्होंने 25,000 शेयर्स दान किए थे और तब उन शेयरों की वैल्यू लगभग 2 करोड़ डॉलर की थी। फाउंडेशन युवाओं की शिक्षा पर फोकस करती है। अगर बेजॉस के पैरंट्स ने अपने शेयर बेचे या दान नहीं किए होते तो उनके पास अभी 1.66 करोड़ शेयर या कंपनी में 3.4 प्रतिशत हिस्सेदारी होती और वे अपने बेटे के बाद कंपनी के दूसरे सबसे बड़े व्यक्तिगत मालिक होते।

पैरंट्स का प्रॉफिट

जैकी और माइक बेजॉस ऐमजॉन में अपने इन्वेस्टमेंट से अरबों डॉलर हासिल कर सकते थे। उनका रिटर्न लगभग 12,000,000% होता। इतने रिटर्न से दुनिया के बड़े वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर्स को ईर्ष्या हो सकती है। सॉफ्टबैंक के अलीबाबा में 2 करोड़ डॉलर के इन्वेस्टमेंट पर वर्ष 2000 से लगभग 7,20,000 पर्सेंट रिटर्न मिला है। सिकोइया कैपिटल के वॉट्सऐप में इन्वेस्टमेंट पर फेसबुक के 2014 में वॉट्सऐप को 22 अरब डॉलर में खरीदने पर लगभग 35,000 पर्सेंट का मुनाफा हुआ था।

माइक बेजॉस ने फरवरी 1995 में 5,82,528 शेयर्स खरीदे थे। इसके पांच महीने बाद जैकी ने 8,47,716 शेयर्स खरीदे। बेजॉस परिवार के पास 1999 के अंत में ये शेयर चार ट्रस्ट्स के जरिए थे।

जेफ बेजॉस के भाई-बहन मार्क और क्रिस्टीना को भी ऐमजॉन में इन्वेस्टमेंट से बड़ा मुनाफा मिला है। इन दोनों में से प्रत्येक ने 1996 में ऐमजॉन के 30,000 शेयर 10,000 डॉलर में खरीदे थे। अगर उन्होंने इन शेयरों में से कोई बिकवाली नहीं की होती तो उनमें से प्रत्येक की हिस्सेदारी की कीमत अब लगभग 64 करोड़ डॉलर की होती।

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SunnyAugust 17, 2018
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भारत की मैक्रो सिचुएशन पिछले कुछ हफ्तों में खराब हुई है। अभी क्वॉलिटी स्टॉक्स और आईटी कंपनियों के साथ बने रहने में समझदारी है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के सीनियर एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर संजीव प्रसाद ने ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में यह बात कही। पेश हैं इंटरव्यू के खास अंश:

6 महीने पहले के लेवल से बाजार में अच्छी रिकवरी हुई है। इस पर आपको क्या कहना है?

देश अभी भी मैक्रो लेवल पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन मार्केट उनमें से कुछ की अनदेखी कर रहा है। हमें देखना होगा कि यहां से बाजार किस तरफ जाता है।

क्या आपका इशारा तुर्की की तरफ है?

कई कारण हैं। ग्लोबल माइक्रो-इकनॉमिक सिचुएशन अच्छी नहीं है। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर तेज हो रही है। अगर अमेरिका वाकई में चीन के 200 अरब डॉलर के इंपोर्ट पर टैरिफ लगाता है तो इससे चीन की इकनॉमी कुछ हद तक अस्थिर हो सकती है। कुछ मैक्रो चुनौतियां भारत में हम पहले से ही देख रहे हैं। दूसरा मसला, कच्चे तेल और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का है। ईरान दुनिया को काफी तेल की सप्लाई करता है। अगर इसमें से आधी सप्लाई भी रुकती है तो इससे बड़ी समस्या पैदा होगी। दूसरे देश इतनी जल्दी तेल की सप्लाई नहीं बढ़ा पाएंगे। इसलिए तेल के दाम में तेजी की काफी संभावना है।

क्या आप आईटी और फार्मा स्टॉक्स खरीद रहे हैं क्योंकि इन्हें रुपये में गिरावट से फायदा होगा?

आपको हर स्टॉक को अलग-अलग देखना होगा। यह कोई प्रोग्राम ट्रेड नहीं है। आप आईटी और फार्मा स्टॉक्स में कुछ निवेश कर सकते हैं। कॉरपोरेट बैंकों या मेटल और माइनिंग स्टॉक्स में भी निवेश किया जा सकता है।

क्या आप एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे क्वॉलिटी स्टॉक्स के साथ बने रहेंगे या कॉन्ट्रेरियन स्टॉक्स पर दांव लगाएंगे?

अभी सिर्फ क्वॉलिटी स्टॉक्स अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। अगर आप इस साल अभी तक के निफ्टी के परफॉर्मेंस को देखेंगे तो उसका पूरा परफॉर्मेंस सिर्फ 10 स्टॉक्स की वजह से है। अगर मैक्रो इश्यूज सामने आते हैं तो लोगों को हाई क्वॉलिटी ग्रोथ स्टॉक्स या आईटी कंपनियों में पनाह लेनी पड़ेगी। निफ्टी इस साल रुपये में 8 पर्सेंट चढ़ा है, जबकि डॉलर में यह करीब फ्लैट रहा है। वहीं, बीएसई मिडकैप इंडेक्स रुपये में 9 पर्सेंट गिरा और डॉलर टर्म में उसमें 15-16 पर्सेंट का करेक्शन हुआ है। उधर, स्मॉल कैप इंडेक्स रुपये में 12-13 पर्सेंट और डॉलर में 20 पर्सेंट फिसला है। कहने का मतलब यह है कि इस साल निवेशकों ने बहुत पैसा नहीं बनाया है।

क्या बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई या आईसीआईसीआई बैंक जैसे अंडरपरफॉर्मर्स पर यह दांव लगाने का सही समय है?

हमें लगता है कि बैड लोन साइकल खत्म होने को है। कम से कम कॉरपोरेट लोन बुक के बारे में यह बात सही है। पिछले एक महीने में कुछ कॉरपोरेट बैंकों ने अच्छा रिटर्न दिया है। इसलिए इनमें पैसा लगाने के बारे में सोचा जा सकता है।

आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस में कौन बेहतर है?

3-5 साल तक निवेश करने पर आप दोनों से पैसा बना सकते हैं। हालांकि, अगले एक साल में आईसीआईसीआई बैंक से पैसा बनाने की संभावना अधिक है क्योंकि बैड लोन पीक पर पहुंच चुका है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर आपकी क्या राय है, खासतौर पर कच्चे तेल के दाम को देखते हुए?

ये कंपनियां सस्ती हैं, लेकिन तेल की चाल के बारे में कुछ भी कहना आसान नहीं है। ईरान पर अमेरिका ने नवंबर से प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस तरह के प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

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SunnyAugust 16, 2018
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1min20

Publish Date:Thu, 16 Aug 2018 03:02 PM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारत के पूंजी बाजार (कैपिटल मार्केट) में पार्टिसिपेटरी नोट्स के माध्यम से किया जाने वाला निवेश नौ साल के निचले स्तर के साथ 80,341 करोड़ रुपये पर आ गया है। यह आंकड़ा जुलाई अंत तक का है। यह ऐसे समय में हुआ है जब इन उपकरणों के दुरुपयोग की जांच के लिए वॉचडॉग सेबी ने कड़े मानदंडों को अपनाया है।

सेबी के डेटा के मुताबिक भारत के पूंजी बाजार में कुल पी-नोट्स निवेश की कुल वैल्यू- इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव्स में जुलाई अंत तक सिकुड़कर 80,341 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया जो कि जून अंत तक 83,688 करोड़ रुपये रहा था। यह अप्रैल 2009 से अब तक का निचला स्तर है, जब इस तरह के समेकित निवेश की कुल वैल्यू 72,314 करोड़ रुपये थी।

क्या होते हैं पी नोट्स: पी-नोट्स को पार्टिसिपेट्री नोट्स भी कहा जाता है। विदेशी निवेशक सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने में सक्षम नहीं होते हैं इसलिए वह रजिस्टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस का सहारा लेता है। निवेशकों को पी-नोट्स सेबी के पास रजिस्टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस ही जारी करता है। पी-नोट्स को विदेशी निवेशकों के लिए शेयर बाजार में निवेश करने का दस्तावेज भी कहा जाता है।

क्या है पी नोट्स का फायदा: पी-नोट्स का इस्तेमाल हाई नेटवर्क इंडीविजुअल्स (एचएनआई), हेज फंडों और अन्य विदेशी संस्थानों के जरिए होता है। जो भी निवेशक सेबी के पास बिना रजिस्ट्रेशन करवाए शेयर बाजार में पैसा लगाना चाहता हैं वो पी-नोट्स का इस्तेमाल करता है। निवेशकों को भारतीय शेयर बाजार में पी-नोट्स के जरिए निवेश करने में ज्यादा सुविधा और फायदा जान पड़ता है। गौरतलब है कि सेबी ने साल 1992 में पी-नोट्स जारी करने की इजाजत दी थी।

By Praveen Dwivedi

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SunnyAugust 16, 2018
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5min10

निवेश और बीमा को अलग रखना क्यों है सबसे अच्छा, जानें

अगर आप बहुत ज्यादा रिस्क नहीं उठाना चाहते हैं तो यह इंवेस्टमेंट आपके लिए ही है। पीपीएफ में आपके इंवेस्टमेंट पर प्रति वर्ष 7.6% का ब्याज मिलता है।

यह एक निश्चित आय वाली इंवेस्टमेंट स्कीम है और इसमें किया जाने वाला कोई भी इंवेस्टमेंट टैक्स-फ्री होता है।

आदिल शेट्टी
वास्तव में लाइफ इंश्योरेंस का उद्देश्य आपकी गैर-मौजूदगी में आपके आश्रितों की वित्तीय रूप से मदद करना है। हालांकि, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां अपने एंडाउमेंट प्लान और यूलिप जैसे प्रोडक्ट के माध्यम से इंवेस्टमेंट और टैक्स सेविंग भी प्रदान करती हैं। वास्तव में, आज के दौर में (25 से 35 साल की उम्र के) अधिकतर युवा कामकाजी अपना पैसा इंश्योरेंस प्रोडक्ट में लगाते हैं क्योंकि वे अपने पैसे से इंवेस्टमेंट, इंश्योरेंस और टैक्स कटौती का तिहरा लाभ पाना चाहते हैं। लाइफ इंश्योरेंस एक पारंपरिक प्रोडक्ट तो है ही, साथ ही यह किसी भी कामकाजी व्यक्ति द्वारा खरीदा जाने वाला प्रायः पहला फाइनेंशियल प्रोडक्ट भी है। बैंकबाजार द्वारा 12 मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों में किए गए एस्पिरेशन इंडेक्स सर्वे से पता चला है कि आज के दौर में 72% मिलेनियल्स लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट खरीदते हैं।

इंवेस्टमेंट और इंश्योरेंस को अलग अलग रखने पर विचार करें
खुद को इंश्योर करने और इंवेस्ट करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि दोनों में अलग अलग पैसा लगाया जाए। आप अपने जीवन को एक टर्म प्लान के माध्यम से इंश्योर कर सकते हैं जिसकी लागत बहुत कम आती है, और अपने इंवेस्टमेंट को म्यूचुअल फंड, पीपीएफ, ईपीएफ, बॉन्ड, डिपॉजिट, गोल्ड, आदि में बांट सकते हैं, जहां इंवेस्टर के लिए आम तौर पर ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) होती है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र 30 साल है, धूम्रपान नहीं करते हैं, साल में 5 लाख रुपए वेतन कमा रहे हैं, और अगले 30 सालों के लिए 50 लाख रुपए का लाइफ कवर चाहते हैं, तो आपके लिए एक टर्म इंश्योरेंस का सालाना प्रीमियम 4,222 रुपए से शुरू होगा।

अगर आप लाइफ इंश्योरेंस के अन्य मोड से इसी तरह का कवर लेते हैं तो उसके लिए आपको अधिक प्रीमियम देना पड़ेगा क्योंकि उन मोड में आपको इंवेस्टमेंट लाभ भी मिलता है जो कि एक टर्म प्लान में नहीं मिलता। इसलिए, इंवेस्टमेंट और इंश्योरेंस को अलग अलग लेना ही फायदे का सौदा है। आप छोटी राशि से अपने जीवन को सुरक्षित कर सकते हैं, और बाकी पैसे को अधिक आकर्षक एसेट में इंवेस्ट कर सकते हैं। आइए, कुछ और विकल्पों पर नजर डालते हैं जिनमें आप सेक्शन 80 (सी) के तहत टैक्स बचाने के साथ ही वेल्थ क्रिएट (धन सृजन) कर सकते हैं।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस): ईएलएसएस म्यूचुअल फंड में आकर्षक रिटर्न देने की ज्यादा संभावना होती है, क्योंकि इन फंड्स को मार्केट-लिंक्ड एसेट में इंवेस्ट किया जाता है। इस तरह के इंवेस्टमेंट में कुछ हद तक रिस्क भी शामिल होता है लेकिन पोर्टफोलियो को लंबे समय के लिए डायवर्सिफाई करके रिस्क को कम किया जा सकता है। आप ईएलएसएस में इंवेस्ट कर एक वित्तीय वर्ष में सेक्शन 80 (सी) के तहत 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स कटौती का लाभ उठा सकते हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ): अगर आप बहुत ज्यादा रिस्क नहीं उठाना चाहते हैं तो यह इंवेस्टमेंट आपके लिए ही है। पीपीएफ में आपके इंवेस्टमेंट पर प्रति वर्ष 7.6% का ब्याज मिलता है। आप सेक्शन 80 (सी) के तहत टैक्स कटौती का लाभ भी हासिल कर सकते हैं। इसमें आप एक साल में 500 रुपए की छोटी राशि भी इंवेस्ट कर सकते हैं। हालांकि, इस स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है, लेकिन आप सातवें साल के बाद से इसमें से कभी भी पैसा निकाल सकते हैं।

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी): यह एक निश्चित आय वाली इंवेस्टमेंट स्कीम है और इसमें किया जाने वाला कोई भी इंवेस्टमेंट टैक्स-फ्री होता है। एनएससी में प्रति वर्ष 7.6% की ब्याज दर मिलती है। अंतिम वर्ष को छोड़कर इसमें रिटर्न टैक्स से मुक्त है। एनएससी में आप 100 रुपए की छोटी राशि भी इंवेस्ट कर सकते हैं, हालांकि इसमें अधिकतम इंवेस्टमेंट की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

पांच साल के लिए एफडी: ‘पांच साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट’ वाली कई स्कीम उपलब्ध हैं। ‘पांच साल के लिए डिपॉजिट’ वाली स्कीम में आपको 6.5% से 8.50% के बीच ब्याज दर मिलता है। आप इस स्कीम में अपनी मनचाही राशि इंवेस्ट कर सकते हैं। हालांकि फिक्स्ड डिपॉजिट में अर्जित ब्याज टैक्सेबल (कर-योग्य) होती है, लेकिन इंवेस्टमेंट राशि सेक्शन 80 (सी) के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स से मुक्त है।
लेखक बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ हैं।

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