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SunnyDecember 7, 2018
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Publish Date:Fri, 07 Dec 2018 08:14 PM (IST)

फोटो:

-जिले में नौ साल से चल रही है योजना,

-577.91 करोड़ अब तक हो चुके हैं खर्च, 2,35,53,514 मेनडेज का हुआ सृजन

कोट के लिए-

मनरेगा के तहत जिले में सड़क, बाध आदि बनवाये गये हैं। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पेड़ लगाये गये हैं। नौ सालों में मनरेगा के तहत जिले में 30 हजार से अधिक योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है। 32 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया है। मनरेगा और कारगर बनाने के उपाय किए जा रहे हैं कि ताकि शत-प्रतिशत मजदूरों को काम उपलब्ध कराकर उन्हें पलायन से रोका जा सके।

राम शंकर, उपविकास आयुक्त, पूर्णिया

—-

मनोज कुमार,जासं,

पूर्णिया: जिले में मनरेगा का सफर अभी नौ वषरें का है। इस दौरान मनरेगा विकास और अनियमितता का एकसाथ प्रतिमान बना। नौ सालों में जिले में मनरेगा के तहत 577.91 करोड़ से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है जिससे करीब 32,64,281 मजदूरों को काम मुहैया कराया गया। लेकिन मजदूरों को घर में ही काम उपलब्ध कराने की जिस मंशा से इस योजना की शुरूआत की गई, वह अभी भी अधूरी है। विशेषकर सीमाचल क्षेत्र से आज भी बड़ी संख्या में रोजगार के लिए मजदूरों का पलायन जारी है। पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार आदि जिलों से दिल्ली व अन्य प्रदेशों को जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों पर लदे-ठूंसे मजदूरों की संख्या इस बात की तसदीक करता है।

बताते चलें कि गाव के हालात बदलने और लोगों के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने फरवरी 2006 को इस महत्वाकाक्षी योजना की शुरूआत की थी। जिले में वित्तीय वर्ष 2009-10 से इस योजना की शुरूआत की गई। सरकार इस योजना को दुनिया का सबसे बेहतरीन महात्वाकाक्षी सामाजिक सुरक्षा और जनरोजगार कार्यक्रम बताती है। विश्व बैंक ने भी वर्ष 14 के व‌र्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट में मनरेगा को ग्रामीण विकास का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण बताया था। लेकिन आगे चलकर यह योजना भ्रष्टाचार और विवादों में घिरती गई। इस वजह से केंद्र की इस योजना में प्रदेश का बजट लगातार घटता गया। जिले की बात करें तो इसके तहत अब तक नौ वषरें में 32,64,281 मजदूरों को 2,35,33,514 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसमें 100 दिनों तक रोजगार पाने वालों की संख्या 24,074 है।

मनरेगा के तहत जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के कई काम हुए हैं। दुरूह ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें बनीं हैं तो पर्यावरण के लिए पौधरोपण भी हुआ है। करीब 30 हजार योजनाएं मनरेगा के तहत अब तक जिले में कार्यान्वित हुई हैं। बावजूद इस योजना का असली उद्देश्य आज भी पूरा नहीं हो पाया है। मजदूरों में शिक्षा और जागरूकता के अभाव के कारण आज भी इस योजना का पूर्ण लाभ असली हकदारों तक नहीं पहुंच पाता है। योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितता के कारण इस योजना से सभी बेरोजगार नहीं जुड़ पाये हैं जिस कारण रोजगार के लिए बड़ी संख्या में लोग दूसरे प्रदेशों में आज भी पलायन कर रहे हैं। सीमांचल के जिलों से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेन सीमांचल एक्सप्रेस, आम्रपाली एक्सप्रेस, गरीब रथ आदि पर मजदूरों की बड़ी खेप जाते हुए देखा जा सकता है। पूर्णिया जंक्शन पर सीमांचल एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ने आए बायसी के मो. जुबेर, मो इकबाल, शमसेर आलम आदि ने बताया कि महानंदा में उनकी जमीन कट गई जिस कारण अब उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं है, इसलिए काम की तलाश में दिल्ली जा रहे हैं। वहीं कोलकाता के लिए ट्रेन पकड़ने आए बनमनखी के रूपेश ऋषि, दिनेश महलदार आदि ने बताया कि मनरेगा में इतनी कम मजदूरी दी जाती है कि उससे परिवार का गुजारा नहीं होता है। साथ ही सभी दिन काम भी नहीं मिलता है। इसलिए लेदर फैक्ट्री में काम करने जा रहे हैं। जो भी हो मनरेगा कोशी के स्टेशनों से अभी बंद नहीं हो रही पलायन एक्सप्रेस।

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SunnyDecember 7, 2018
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डेस्क।​जिले में अनुसूचित जाति और जनजाति (थारू, बोक्सा) रोजगार योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 के तहत लोन के इच्छुक अभ्यर्थियों से 31 दिसम्बर तक आवेदन पत्र मांगे गये है। जिला समाज कल्याण अधिकारी नवीन भारतीय ने बताया जनपद में इस योजना के तहत 150 भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिले में निवासरत अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को जो अपना स्वयं का रोजगार चलाने हेतु ऋण लेने के इच्छुक है, उन्हें विभाग के माध्यम से बैंकेबुल योजना के अन्तर्गत 20,000 हजार रुपये से सात लाख का ऋण उपलब्ध कराये जाने का प्राविधान है। जिसमे विभाग द्वारा दस हजार रुपये का अनुदान एवं पच्चीस हजार रुपये से अधिक की परियोजना लागत के लिए 25 प्रतिशत मार्जिन मनी ऋण 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जायेगा। 

बताया जनजाति (थारू, बोक्सा) स्वतः रोजगार योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए जनपद का 42 भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होने बताया विकास खण्ड बाजपुर, गदरपुर, सितारगंज व खटीमा में निवासरत जनजाति के व्यक्तियो को जो अपना स्वयं का रोजगार चलाने हेतु ऋण लेने के इच्छुक है, उन्हे विभाग के माध्यम से बैंकेबुल योजना के अन्तर्गत ऋण उपलब्ध कराये जाने का प्राविधान है। जिसमे विभाग द्वारा दस हजार रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा तथा शेष धनराशि बैंक ऋण के रूप मे उपलब्ध कराई जाएगी। 

उन्होंने बताया कि पात्रता अभ्यर्थी जनपद का स्थायी निवासी हो, अभ्यर्थी अनुसूचित जाति के अन्तर्गत आता हो जिस हेतु सक्षम अधिकारी द्वारा जाति प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है, आवेदक बीपीएल हो अथवा आवेदक की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 52,800 हजार रुपये एवं शहरी क्षेत्र में 64,920 हजार रुपये से अधिक न हो आय प्रमाण पत्र की अवधि छः माह से अधिक नही होनी चाहिए। आवेदन पत्र के साथ 02 पासपोर्ट साईज फोटो एवं आधार कार्ड, राशन कार्ड की प्रति संलग्न करना अनिवार्य है, वाहन हेतु 01 वर्ष पुराना कामर्शियल ड्राईविंग लाईसेंस होना अनिवार्य है। 

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[embedded content]उन्होंने बताया कि पात्र व्यक्ति समस्त प्रमाण पत्रों की प्रमाणित प्रति के साथ अपने विकास खण्ड अथवा कार्यालय जिला प्रबन्धक उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम, विकास भवन, रूद्रपुर मे कक्ष संख्या 215 में किसी भी कार्य दिवस में उपस्थित होकर अपना आवेदन पत्र 31 दिसम्बर, 2018 तक जमा कर सकते है।

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SunnyDecember 7, 2018
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ब्यूरो/अमर उजाला/ देहरादून।

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पहाड़ों की रानी मसूरी में पेयजल संकट से निपटने के लिए पेयजल निगम की ओर से 187 करोड़ रुपये की डीपीआर (विस्तृत वित्तीय बजट) तैयार कर शासन को भेजा गया है। योजना के संबंध में निगम की ओर से साल 2019-20 के बजट सत्र में सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस योजना को हरी झंडी मिलने पर मसूरी की 75 हजार जनता लाभान्वित होगी।
गर्मियों के दिनों में अक्सर मसूरी में पेयजल का संकट गहरा जाता है। इसके लिए पेयजल निगम की ओर से 187 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजी गई है। इसके तहत यमुना नदी और खीरा गाड़ गदेरे पर दो पंपिंग योजना लगाई जानी है। इससे नदियों के पानी को पाइल लाइन के जरिए टेकों तक पहुंचाया जाएगा। पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने बताया कि योजना के तहत यमुना नदी और खीरा गाड़ गदेरे में दो पंपिंग योजना लगाई जाएंगी। इसके जरिए पाइप लाइन के जरिए नदी के पानी को शहर तक पहुंचाया जाएगा। यदि सरकार की ओर से योजना को हरी झंडी दे दी जाती है तो शहर की 75 हजार जनता लाभान्वित होगी।
वर्तमान में यह है स्थिति
मसूरी में सबसे पहले 1908 में लगभग 20 स्रोतों को लेकर पाइप पेयजल योजना का निर्माण हुआ था। वर्तमान में 12 गदेरों और स्प्रिंग से लगभग 7.69 एमएलडी पेयजल उपलब्ध हो रहा है। कुल 28 छोटे बड़े जलाशय हैं, जिनकी कुल क्षमता 29 हजार किलोलीटर है, लेकिन शहर और पर्यटकों की संख्या में दिनों दिन बढ़ने से पेयजल संकट अक्सर बना रहता है।

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SunnyDecember 6, 2018
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आज के इस वर्तमान युग में वित्तीय जागरूकता का सही अर्थ महिलाओं को जागरूक करना ही है। महिलाओं में वित्तीय जागरूकता होने से पूरे समाज और गांव को जागरूक किया जा सकता है।

यह बात गांव खरकड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की ढिगावा शाखा द्वारा आयोजित वित्तीय साक्षरता अभियान के दौरान वरिष्ठ प्रबंधक सूबेसिंह ने कही। उन्होंने बताया कि वित्तीय साक्षरता के लिए महिलाओं को बैंक से लेनदेन करना चाहिए। उन्होंंने कहा कि सभी योजनाओं को स्वयं लाभ लेते हुए अन्य लाभपात्रों को लाभ दिलाना चाहिए। इसके अलावा सभी ग्रामीणों को फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना सहित अनेक योजनाओं के बारे में जानकारी दी। आजीविका मिशन के खंड प्रबंधक सोमबीर शर्मा ने बताया कि महिलाओं को समूह में रहकर स्वावलंबी बनाना चाहिए। इसके साथ उन्हें सीआरपी टीम का हिस्सा बन कर बेहतर काम करना चाहिए।

इसका उदाहरण पिछले दिनों खरकड़ी में आने वाली सीआरपी टीम ने सभी ग्रामीणों से रूबरू किया। जिससे गांव में 65 महिलाओं ने छह स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आजीविका मिशन में अपनी भागीदारी दी।

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SunnyDecember 6, 2018
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Publish Date:Thu, 06 Dec 2018 11:35 PM (IST)

महराजगंज : कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित बैठक जिले की सभी ग्राम सभाओं का समग्र विकास कराने व आठ योजनाओं को लागू कराने का निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले की सभी ग्राम सभाओं में प्रशासन टीम जाए और विकास कार्यों का खाका तैयार कर ग्रामीणों के समक्ष प्रस्तुत करे। ग्रामीणों की सहमति प्राप्त कर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में रिपोर्ट भेजें, जिससे आगामी एक अप्रैल से आत्म गौरव के बोध से समग्र विकास की ओर के उद्देश्य को अमली जामा पहनाया जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि 10 से 18 दिसंबर के बीच जिले की 923 ग्राम सभाओं में प्रशासनिक टीम पहुंचेगी और स्व विवेक के आधार पर ग्राम सभा के विकास का खाका तैयार करेगी। प्रशासनिक टीम घर-घर जाकर मिशन अंत्योदय, स्वत: रोजगार, जीपीडीपी, मनरेगा योजना, दिव्यांग योजना, स्वच्छ पेयजल, पीएफएमएस प्लान्र, जीपीडीपी के बारे में भी जानकारी हासिल करेगी। प्रशासन जनता के द्वार जाकर न केवल समग्र विकास की रिपोर्ट तैयार करेगा वरन इन योजनाओं को खुद की देखरेख में पूरा भी कराएगा। समग्र विकास की यह योजना वित्तीय वर्ष 2019-20 में लागू होगी।

जिला स्वच्छता प्रभारी मनोज कुमार त्यागी ने बताया कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त एनआरएलएम, जिला दिव्यांगजन अधिकारी, उपायुक्त मनरेगा, अधिशासी अभियंता जल निगम, जिला परियोजना प्रबंधक को सौंपी गई है। इस अवसर पर सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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SunnyDecember 6, 2018
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Publish Date:Thu, 06 Dec 2018 10:06 PM (IST)

हरदोई : शिक्षिकाएं अब टीम बनाकर गांव-गांव महिला लाभार्थियों को केंद्र और प्रदेश सरकार के महिला सशक्तीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देंगी।

नारी सशक्तीकरण संकल्प अभियान में स्वास्थ्य और बाल विकास पुष्टाहार विभाग के साथ बेसिक शिक्षा विभाग को भी लगाया गया है। 9 से 19 दिसंबर तक विशेष अभियान चलेगा और 20 दिसंबर को नारी स्वावलंबन सम्मेलन के साथ समापन होगा।

बेसिक शिक्षा निदेशक ने महिला अधिकारियों के साथ शिक्षिकाओं और महिला कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। निदेशक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जारी पत्र में कहा कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में शिक्षा और स्वरोजगार, स्वास्थ्य एवं पोषण, स्वच्छता तथा सुरक्षा आदि महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी महिलाओं तक पहुंचाना आवश्यक है। इसके लिए महिला अधिकारी एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की टीम गांव-गांव एवं ब्लाक स्तर पर जाकर लाभार्थियों को न केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी देंगी, बल्कि महिलाओं को व्यवहारिक वित्तीय सलाह, विभिन्न सरकारी उद्यमी योजनाएं जैसे मुद्रा योजना, स्टैंडअप इंडिया, जनधन योजना आदि के विषय में जागरूकता प्रदान करेंगी। मीना सम्मेलन में दी जाएगी जानकारी

नारी सशक्तीकरण के अभियान में तीन दिवसीय मीना सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें दो हजार से अधिक बालिकाएं प्रतिभाग करेंगी। इन बालिकाओं के माध्यम से न केवल सशक्तीकरण बल्कि सुरक्षा संबंधी जानकारी देकर उनके अंदर आत्म विश्वास भी जगाया जाएगा।

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SunnyDecember 6, 2018
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मनोज लाल

रांची : झारखंड में चालू महत्वपूर्ण योजनाअों का पैसा रिलीज नहीं हो पा रहा है. काम कराने या भुगतान के लिए पैसे की निकासी नहीं हो रही है. यह स्थिति राज्य व केंद्र दोनों योजनाअों की है. कई विभागों के पास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पैसे ही नहीं हैं. विभागों की अोर से लगातार राज्य सरकार से पैसा रिलीज कराने का आग्रह किया जा रहा है. 

यहां तक कि केंद्र से प्राप्त  राशि भी फंसी हुई है.  केंद्र की विमुक्त राशि के विरुद्ध राज्यांश भी नहीं दिया गया है. अफसरों का कहना है कि अगर शर्त के मुताबिक राज्य सरकार राशि नहीं देती है, तो केंद्र सरकार अपनी दूसरी किस्त की राशि आवंटन पर रोक लगा देगी.  

पीएम आवास योजना : राज्यांश (40 %) के 340 करोड़ रुपये नहीं मिले

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में केंद्र सरकार की ओर से करीब 700 करोड़ रुपये मिल चुके हैं, वहीं  राज्य सरकार की ओर से राज्यांश (40%)  के 340 करोड़ अब तक नहीं दिये गये. इस कारण केंद्र सरकार अगली किस्त की राशि रोक सकती है, क्योंकि इस योजना में केंद्र सरकार व राज्य सरकार को अपना-अपना हिस्सा क्रमश: 60 व 40% देना है. पहली किस्त की राशि अगर केंद्र सरकार दे देती है, तो राज्य सरकार को भी अपना शेयर देना आवश्यक होता है. इसके बाद ही केंद्र सरकार दूसरी किस्त की राशि रिलीज करती है, लेकिन अब यहां दूसरी किस्त की राशि प्राप्त करने में परेशानी हो रही है.

पीएमजीएसवाइ : 200 करोड़ रुपये अब तक नहीं हुए रिलीज

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का करीब 200 करोड़ रुपये अब तक रिलीज नहीं हुए हैं. यह राशि एलडब्ल्यूइ  योजना के लिए है. वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए केंद्र से राज्य सरकार को 1200 करोड़ रुपये मिले थे, पर 200 करोड़ अब तक पड़े हुए हैं. इस राशि की तुलना में राज्य सरकार को अपना शेयर भी 40% देना था, लेकिन राज्य ने पैसे दिये ही नहीं हैं. राज्य व केंद्र सरकार दोनों के शेयर का पैसा खर्च होने के बाद ही आगे की राशि केंद्र सरकार रिलीज करेगी.

ग्रामीण कार्य िवभाग : 400 करोड़ से अधिक का करना है भुगतान

ग्रामीण कार्य विभाग के तहत क्रियान्वित होनेवाली राज्य संपोषित योजना की सड़कों का काम धीमा होने लगा है, क्योंकि ठेकेदारों ने काम तो कर लिया है, लेकिन उसका भुगतान नहीं हो रहा है. 400 करोड़ से अधिक की राशि फंसी हुई है. इस राशि का विपत्र तैयार है. ठेकेदार भी भुगतान होने का इंतजार कर रहे हैं. यह स्थिति एक माह से भी ज्यादा समय से है. इंजीनियरों का कहना है कि  लंबे समय तक यह स्थिति रही, तो सड़क का काम ठप हो जायेगा. 

पथ निर्माण विभाग : 1500 करोड़ पहुंच गयी है बकाया राशि

राज्य के पथ निर्माण विभाग के पास भी पैसा नहीं है. ठेकेदारों की बकाया राशि बढ़ कर करीब 1500 करोड़ पहुंच गयी है, लेकिन राशि के अभाव में उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है. अब तो योजनाअों की गति भी धीमी होने लगी है. ठेकेदारों का कहना है कि अगर जल्द राशि का भुगतान नहीं हुआ, तो काम बंद करना होगा.  हालांकि विभाग के बजट का पैसा बचा हुआ है. इस वित्तीय वर्ष विभाग का  बजट 4000 करोड़ रुपये का है. 

इसमें से करीब 2300 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. अभी भी विभाग का 1700 करोड़ रुपये बचा हुआ है, लेकिन कोष में राशि की कमी की वजह से पैसा फंसा हुआ है. भुगतान नहीं हो पा रहा है.

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SunnyDecember 6, 2018
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नें 13 जनवरी 2016 को एक योजना लागू की. नाम है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY). इस योजना को लागू करने का मकसद किसानों को खराब मौसम के चलते फसल नुकसान से सुरक्षा कवच प्रदान करना था.  यह कहा गया था कि बीमा दावे के निपटान की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने का निर्णय लिया गया है ताकि किसान फसल बीमा योजना के संबंध में किसी परेशानी का सामना न करें. यह योजना भारत के हर राज्य में संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागू की  गयी है.इस बीमा में यह बात कही गई है कि किसानों द्वारा सभी खरीफ फ़सलों के लिए केवल दो प्रतिशत एवं सभी रबी फसलों के लिए डेढ़ प्रतिशत का एक समान प्रीमियम का भुगतान किया जायेगा. वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के मामले में प्रीमियम केवल पांच प्रतिशत होगा. सरकार यह मानती है की किसानों के द्वारा भुगदान किया प्रीमियम बहुत कम है और केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बाकी प्रीमियम बीमा कंपनियों को देंगे. सरकारी सब्सिडी पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है. भले ही शेष प्रीमियम 90% हो, यह सरकार द्वारा वहन किया जाएगा.इससे पहले, प्रीमियम दर पर कैपिंग का प्रावधान था जिससे किसानों को कम कम दावे का भुगतान होता था. अब इसे हटा दिया गया है और किसानों को बिना किसी कटौती के पूरी बीमित राशि का दावा मिलेगा.

योजना के उद्देश्य
प्राकृतिक आपदाओं,कीट और रोगों के चलते फसल में किसी भी तरह के नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता प्रदान करना इस योजना का मकसद है. कृषि में किसानों की तरक्की सुनिश्चित करने के लिए उनकी आय को स्थायित्व देने की भी इस योजना के तहत मंशा है..किसानों को कृषि में नए-नए आइडिया और आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ कृषि क्षेत्र में ऋण के प्रवाह को भी सुनिश्चित कराने की बात है.

बीमा (Pradhanmantri fasal bima yojana पर उठ रहे सवाल
 प्रधानमंत्री फसल बीमा को लेकर कई सवाल  उठ रहे हैं. किसानों का कहना है फसल बीमा के प्रीमियम तो काटे जाते हैं लेकिन समय पर पैसा नहीं मिलता है. 29-30 नवंबर को दिल्ली में हुई किसान रैली में ज्यादा से ज्यादातर किसान  फसल बीमा को लेकर सवाल उठा रहे थे. किसी को फसल नष्ट होने के बाद बीमा का मुआवजा नहीं मिला था तो किसी को बहुत कम पैसा मिला था और किसी को पैसे मिलने के लिए कई महीने लग गए थे. कृषि मंत्रालय की तरफ से फसल बीमा को लेकर पूरा डाटा तैयार किया गया है. इस डाटा को जब आप गौर से देखेंगे तो आप को फसल बीमा की असलियत का पता चलेगा. इस डाटा से पता जाता है फसल बीमा से किसानों को नहीं बीमा कंपनियों को ज्यादा फ़ायदा हुआ है.  

बीमा कम्पनियों को प्रीमियम का कितना पैसा मिला
कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2016 खरीफ फसल के लिए कुल-मिलाकर 4 करोड़ दो लाख 36 हज़ार 472 किसानों ने किसानों ने फसल बीमा करवाया और प्रीमियम के रूप में करीब 2919 करोड़ दिए. यह रुपये किसानों ने दिया क्यों कि फसल बीमा के नियम के तहत कुछ पैसा किसान अपने पॉकेट से देते हैं कुछ केंद्र सरकार देती है और कुछ  राज्य सरकार. किसानों के पैसे का औसत निकाला जाए तो एक किसान प्रीमियम के रूप में अपने पॉकेट से 725 रूपया दिया है. केंद्र सरकार और राज्य सरकार कुल-मिलाकर 13357 करोड़ के करीब प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिए हैं. किसानों की प्रीमियम, केंद्र और राज्य सरकार की प्रीमियम मिला दिया जाए तो कुल-मिलाकर 16276 करोड़ के करीब प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिया गया यानी अगर औसत निकाला जाए तो एक किसान के लिए कुल-मिलाकर 4045  के करीब प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिया गया है. 

किसानों का क्या फ़ायदा हुआ ?  
कृषि मंत्रालय के आंकड़े हिसाब से कुल-मिलाकर 4 करोड़ 23 लाख 6472 किसानों का बीमा हुआ था.  जिसमें से सिर्फ दो करोड़ 59 लाख 85453 किसानों को फसल नष्ट हो जाने के बाद बीमा का पैसा मिला है यानी  एक करोड़ 42 लाख 51019 किसानों को फ़ायदा नहीं हुआ. इसमें वो किसान होंगे जो बीमा करवाए थे लेकिन फसल नष्ट नहीं हुआ तो स्वभाविक बात है बीमा का फ़ायदा उन्हें नहीं हुआ और वो किसान भी है जिनके फसल नष्ट होने के बावजूद भी बीमा की राशि नहीं मिली है जो सवाल किसान उठा रहे हैं. अब पैसे पर आते हैं ,कृषि मंत्रालय के डाटा के हिसाब से 2 करोड़ 59 लाख 85453 किसानों को कुल-मिलाकर 10425 करोड़ के करीब बीमा की धनराशि मिली.  तो उसी के हिसाब से देखा जाए जो बीमा कंपनियों को बीमा के रूप में कुल मिलाकर 16276 करोड़ दिए गए और किसानों को 10425 करोड़ मिले यानी 5851 करोड़ बीमा कंपनियों को फ़ायदा हुआ. सबसे चौकाना वाला आंकड़ा यह है कि बीमा कंपनियों को प्रीमियम के रूप में एक किसान के लिए करीब 4045 रुपये दिया गया जबकि फसल नष्ट हो जाने के बाद एक किसान को बीमा के रूप में औसतन 4011 के करीब मिला. यानी एक किसान के लिए जीतना बीमा पैसा भरा गया,फसल नष्ट हो जाने के बाद बीमा के रूप में उसे कम पैसा मिला. 

2017 में किसानों का प्रीमियम बढ़ गया
2017 खरीफ फसल के लिए कुल-मिलाकर तीन करोड़ 46 लाख 52622  किसानों का बीमा हुआ. जबकि 2016 में 40236472 किसानों ने बीमा करवाया था यानि 5583850 कम हो गया. इसे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि फसल बीमा से किसान क्यों भाग रहा है. किसान अपने पॉकेट से 3055 करोड़ के करीब प्रीमियम भरा यानी एक किसान का औसत प्रीमियम 881 रूपया रहा. 2016 में  एक किसान प्रीमियम के रूप में अपने पॉकेट से 725 रुपये के करीब दिया था तो 2017 में 156 रूपया ज्यादा , किसानों ने अपने पॉकेट से दिया. 2017 में केंद्र सरकार और राज्य सरकार कुल-मिलाकर 16204 करोड़ के करीब प्रीमियम बिमा कंपनियों दिए , यानी किसान और सरकार कुल-मिलाकर  19259 करोड़ प्रीमियम कंपनियों को दिया गया. अगर औसत निकाला जाए तो एक किसान के लिए प्रीमियम के रूप में 4786 रुपये बीमा कंपनियों को दिए गए. 2016 में एक किसान के लिए 4045 के करीब प्रीमियम भरे गए थे यानी 2017 में एक किसान के लिए 700 रूपया प्रीमियम ज्यादा दिया गया. 

टिप्पणियां

क्या फ़ायदा हुआ ?
अब फायदे पर आते हैं.  2017 में तीन करोड़ 46 लाख 52622 किसानों ने बीमा करवाये थे. उसमें से 1 करोड़ 21 लाख 46456 किसानों को फसल नष्ट हो जाने के बाद बीमा का पैसा मिला.  यानी 22506166 किसानों को बीमा से कोई पैसा नहीं मिला. जैसा मैंने पहले भी बोला था इसमें वो किसान होंगे जो बीमा करवाए थे लेकिन उनकी फसल नष्ट नहीं हुई और वो किसान भी है जो बीमा करवाए थे फसल नष्ट हुए लेकिन फिर भी बीमा के पैसे नहीं मिले.  अब रुपये पर आते हैं। एक करोड़ 21 लाख 46456 किसानों को बीमा कंपनियों की तरफ से फसल नष्ट हो जाने के बाद कुल-मिलाकर 15181 करोड़ के करीब मुआवजा दिया गया. बीमा कंपनी को 19259 करोड़ के रूप में प्रीमियम मिले और 15181 करोड़ बीमा के रूप में किसानों को मिले तो इस लिहाज़ से बिमा कंपनियों  को 4070 करोड़ के करीब को फ़ायदा हुआ. 2016 और 2017 को मिला दिया जाए जो खरीफ फसल के लिए हुए बीमा से बीमा कंपनियों को 9921 करोड़ फ़ायदा हुआ. 

रबी फसलों के लिए बीमा से कितना फ़ायदा हुआ
अब 2016-17 रबी फसल की बात करते हैं. 2016-17 में 16980719 किसानों का फसल बीमा हुआ और किसानों ने 1291 करोड़ के करीब प्रीमियम के रूप में दिए. यानी एक किसान ने अपने पॉकेट से 760 रूपया प्रीमियम के रूप में दिया. केंद्र और राज्य सरकार ने अपने पॉकेट से कुल-मिलाकर 4625  करोड़ दिए. यानी कुल मिलाकर 5916 करोड़ के करीब प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिया गया. अगर किसानों को पेमेंट की बात की जाए तो 16980719 में से सिर्फ 3378301 किसानों को बीमा पैसे के रूप में कुल मिलाकर 5464 करोड़ मिले. यानी 452 करोड़ बीमा कंपनियों को फ़ायदा हुआ.  ये सब आंकड़े बताते हैं कि फसल बीमा से किसानों को नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा बीमा कंपनियों को फ़ायदा हुआ है. कई किसान यह भी आरोप लगाते हैं कि बीमा के रूप में किसी को दस रुपये मिले हैं तो किसी को सौ रुपये.  राज्य पर एक बार नज़र डाला जाये तो कई राज्य ऐसे भी हैं जहां पर एक किसान को भी बीमा का फ़ायदा नहीं हुआ है. 2017 में खरीफ फसल के लिए मेघालय से 2945 किसानों ने बीमा करवाया था. लेकिन एक भी किसानों को फ़ायदा नहीं हुआ है. अगर सिक्किम की बात की जाए तो 2017 खरीफ फसल के लिए सिक्किम से 793 किसानों ने बीमा करवाया था. लेकिन एक भी किसान को बीमा का मुवावजा नहीं मिला है. हम यह पता नहीं लगा पाए हैं कि मेघालय और सिक्किम से जीतने किसान बीमा किये थे क्या उनमें से किसी का फसल नष्ट नहीं हुआ है या फिर कुछ और मामला है.
 

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SunnyDecember 5, 2018
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हमीरपुर। गिरते भूगर्भ जलस्तर को देखते खेत तालाब योजना किसानों को काफी रास आने लगी है। जिले में खुद चुके 500 खेत तालाब वाले किसानों के लिए आई नई स्कीम के तहत 90 फीसदी अनुदान पर बौछारी सिंचाई के लिए एक पंपसेट के साथ स्प्रिंकलर पाइप भूमि संरक्षण विभाग देगा।

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जिले में करीब 27 हजार किसानों ने खेत तालाब योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया हैं। शासन ने योजना के तहत वित्तीय वर्ष में सिर्फ 500 तालाबों का लक्ष्य दिया है। लगातार कई वर्षों से सूखे के चलते जिले में किसान अब खेतीबाड़ी करने से पीछे हट रहे हैं।

वहीं भूगर्भ जलस्तर गिरने से निजी व सरकारी नलकूप भी जवाब दे रहे हैं। इसी को देखते हुए शासन स्तर से खेत तालाब योजना की शुरुआत हुई है। योजना की सफलता को देखते हुए एक हजार खेत तालाब और खोदे जाने का लक्ष्य शासन को भेजा गया है।

एक बीघे में तालाब खुदवाने वाला किसान ढाई हेक्टेयर खेत की एक बार सिंचाई कर सकेगा। साथ ही भूगर्भ जलस्तर भी ऊपर लाने में सहायक होंगे। इससे किसान सिंघाड़ा व मत्स्य पालन कर अतिरिक्त आमदनी का लाभ ले सकेंगे। वहीं 1.72 लाख फलदार पौधे लगाकर बागवानी का कार्य भी किया जा रहा है।

अनुदान पर मिलेंगे स्प्रिंकलर पंपसेट
तालाबों की खुदाई कराने वाले किसानों को सिंचाई के लिए 90 फीसदी अनुदान पर पंपसेट के साथ स्प्रिंकलर सेट के 16 पाइप उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना से जुड़े सभी लाभार्थियों को स्प्रिंकलर पंपसेट दिए जाने की तैयारी भूमि संरक्षण विभाग कर रहा है। लघु सीमांत कृषक को 90 फीसदी व वृहद कृषक को 80 फीसदी अनुदान पर यह यंत्र दिए जाएंगे। जिससे किसान 96 मीटर क्षेत्रफल में बौछारी सिंचाई कर सकेंगे।

25 तालाबों में हुआ मछली पालन
योजना में मछली पालन के लिए 25 किसानों को प्रोत्साहित किया गया है। नदेहरा, सिसोलर, सिमनौड़ी व बेरी सहित अन्य गांवों के किसानों को मुफ्त में मत्स्य बीज दिलाकर तालाबों में डलवाया गया है। मछली पालन से किसानों को प्रतिवर्ष 75 से एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी हो सकेगी।

एक हजार हेक्टेयर में होगी अतिरिक्त सिंचाई
जिले में खोदे गए 500 तालाबों से करीब एक हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई का लाभ किसानों को इस योजना से मिलेगा। छोटे तालाब में एक हजार घन मीटर पानी की क्षमता होती है, जिससे एक हेक्टेयर खेत की एक बार सिंचाई की जा सकती है। वहीं बड़े तालाब में 3100 घन मीटर पानी क्षमता से ढाई हेक्टेयर खेत की एक बार सिंचाई की जा सकेगी।

योजना में अभी तक 27 हजार किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। जिले को मिला 500 तालाबों का लक्ष्य विभाग की तीनों इकाइयों ने पूरा कर लिया है। सभी लाभार्थियों को स्प्रिंकलर व पंपसेट अनुदान पर दिए जाने की तैयारी हो रही है। इस वित्तीय वर्ष जनपद को एक हजार तालाबों का लक्ष्य मिलने की उम्मीद है। – भीमसेन, भूमि संरक्षण अधिकारी

विभाग किसानों को 90 फीसदी अनुदान पर देगा पंपसेट व स्प्रिंकलर पाइप
अमर उजाला ब्यूरो

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SunnyDecember 5, 2018
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Publish Date:Wed, 05 Dec 2018 06:22 PM (IST)

संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग : सर्व शिक्षा, मध्याह्न भोजन योजना एवं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की अनुश्रवण समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने परियोजनाओं की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति का जायजा लिया। साथ ही उन्होंने स्कूली छात्रों के समग्र विकास के लिए निष्ठा से कार्य करने के निर्देश दिए। वहीं सर्वशिक्षा अभियान में 22 करोड़ 44 लाख एवं रमसा में छह करोड़ एक लाख 31 हजार का बजट विभिन्न कार्यक्रमों के लिए स्वीकृत हुआ है।

जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि सरकारी योजनाओं का स्कूली छात्र-छात्राओं को अनिवार्य रूप से लाभ मिलना चाहिए। गुणवत्ता शिक्षा डायट रतूडा को न्यून शैक्षिक स्तर वाले विद्यालयों को चिह्नित कर उनके लिए पृथक से प्रशिक्षण योजना तैयार करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे विद्यालयों को चिह्नित किया जाए जो दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर रहे। सर्वशिक्षा अभियान की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति की समीक्षा में योजना के तहत वित्तीय वर्ष के लिए 22 करोड़ 44 लाख की स्वीकृति मिली है। जिसके सापेक्ष साढ़े तीन करोड़ प्राप्त हुए है। जिसमें निश्शुल्क पाठय पुस्तक, गणवेश, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यालय अनुदान निर्माण कार्य, नवाचारी कार्यक्रम, अधिगम सवंर्धन कार्यक्रम, आत्म सुरक्षा, कौशल, पुस्तकालय स्थापना आदि कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसी प्रकार राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा योजना के तहत वित्तीय वर्ष के लिए छह करोड एक लाख 31 हजार का बजट स्वीकृत किया गया है। माध्यमिक शिक्षा में विद्यालय सुदृढ़ीकरण, सोलर पेनल, डिजिटल इनिशिएटिव, एसएमडीसी प्रशिक्षण, सर्वोत्तम प्रयोगशाला, डिजिटल बोर्ड, सुपर 100, कला उत्सव, विद्यालय विकास अनुदान, विद्यालय विकास अनुदान, पुस्तकालय, विज्ञान महोत्सव, बालिका अभिप्रेरण, आत्म सुरक्षा आदि कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इस अवसर पर जिपंस गोपाल पंवार, श्रीमती अंजू जगवान, सभासद लक्ष्मण ¨सह, सीडीओ एनएस रावत, एसडीएम सदर देवानंद शर्मा, सीईओ चित्रानंद काला, कोषाधिकारी गिरीश चंद, डीईओ माध्यमिक एलएस दानू, डीईओ बेसिक विद्याशंकर चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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