Financial Plan Archives - earn money online hindi news: Sunnywebmoney.com

SunnyJuly 17, 2018
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज लोक भवन में कैबिनेट की बैठक में 15 लाख राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों का एचआरए दोगुना करने के फैसले पर मुहर लग गई। आवास भत्ता दोगुना करने के बाद सरकार पर वित्तीय भार भी बढ़ेगा। इसके साथ ही नौ फैसलों पर मुहर लगी है। 
 ये हुए फैसले

1 – एच आर ए दोगुना करने का फैसला सरकार ने लिया है। कैबिनेट बैठक में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी राज्य कर्मचारियों काएचआरए बढ़ाकर दोगुना किया गया। 15 लाख कर्मचारियों और शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा और राज्य सरकार पर 2023 करोड़ का वित्तीय भार आएगा, 1 जुलाई 2018 से बढ़ोतरी लागू होगी, अगस्त के वेतन सभी को बढ़े हुए भत्तों के साथ मिलेगा ।

2 –  हमारे 2008 में नगर एलाउंस भत्ता सुनिश्चित किया गया था, अब नगर प्रतिकर भत्ता दोगुना किया गया है न्यूनतम 340 और अधिकतम 900 रुपये दिया जाएगा। 175 करोड़ का वित्तीय भर प्रदेश सरकार पर आएगा जुलाई 2018 से यह दिया जाएगा ।

3 – पर्यटन विभाग ने अपनी 2017 – 18 की वित्तीय स्वीकृतियां ली ।

4 – बार्डर एरिया डेवलमेंट में नेपाल की सीमा से लगे सात जनपदों के 21 विकास खंड से जुड़े सड़क 20 किलो मीटर से लेकर सभी सुविधाये देने 7752.20 का पैकेज इसमें जारी किया गया है , बुंदेलखंड पैकेज में सात जनपदों तीन वर्षों के लिए सूखा राहत पैकेज दिया गया था। 2021- 22 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। बांदा कृषि विद्यालय के लिए सिंचाई के लिए केन नदी 75 करोड़ की धनराशि दी गई है।

5 – त्वरित विकास गति योजना इसके अन्तर्गत त्वरित विकास के लिए यह योजना है इसके अन्तर्गत 2017 – 18 में 100 हैंड पम्प के लिए धनराशि स्वीकृत कर ली गई है , 14 पाइप पेय जल के लिये और बेहतर विधुत आपूर्ति के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है।

6 -लोक सेवा आयोग में संशोधन अध्यादेश प्रतिस्थापित किया गया है  इसमें निशक्त जन , भूतपूर्व सैनिक , स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को इसमें 4 प्रतिशत का आरक्षण का प्रस्ताव पास हुआ है।

7 – अनपरा डी तापीय परियोजना पर रुपये 640 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना में सल्फर डाई आक्साइड की सीमा को भी नियंत्रित किया जाएगा, यूपी में यह पहली बार किया गया है। 1000 मेगा वाट में 640 करोड़ का खर्च आएगा डेढ़ वर्ष का समय इसे लगाने में लगेगा ।

8 – यूपी पॉवर कारपोरेशन में घोषित उदय योजना के तहत 4722 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है , इससे प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने में काफी सहायता मिलेगी। 

9 -अग्निशमन सेवा नियमावली 2016 पर विचार किया गया था जिसमे नियम 8 के तहत 10 वी और 12 वी की शैक्षिक अहर्ता जरूरी थी , अब सीधी भर्ती के लिए यूपी पुलिस आरक्षी और मुख्य आरक्षी के लिए 12th पास होना जरूरी है। अब 12th पास होना जरूरी है।

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SunnyJuly 17, 2018
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1min00

कमलेश मीना
कुचामनसिटी. सुकन्या समृद्धि योजना की कुचामन डाकघर क्षेत्र में कुछ रफ्तार मंद पड़ी हुई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में वर्ष 2016-17 से कम खाते खुले हैं। हालांकि वर्तमान वित्तीय वर्ष में अभी तक अच्छी तादाद में खाते खुलने से पिछले वर्ष का घाटा इस वर्ष पूरा होने उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक कुचामन डाकघर क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2016-17 में सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 950 खाते खोले गए थे, जो वित्तीय वर्ष 2017-18 में घटकर 825 रह गए। हालांकि यह अंतर ज्यादा नहीं है। फिर भी क्षेत्र में योजना का प्रचार-प्रसार कम होना प्रतीत होता है। साथ ही लोगों में भी जागरूकता की कमी हो सकती है। हालांकि वर्तमान में वित्तीय वर्ष 2018-19 में शुरुआत में ही योजना के तहत अच्छी तादाद में खाते खुलने से विभाग के लिए राहत की खबर है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अभी तक 150 खाते खोले जा चुके हैं। इसके अलावा प्रतिदिन आवेदन आने का सिलसिला जारी है। डाक विभाग के अनुसार इस साल अच्छी तादाद में खाते खुल सकते हैं। गौरतलब है कि योजना की शुरुआत दिसम्बर 2014 में हुई थी। नागौर जिले में कुचामन डाकघर क्षेत्र के अंतर्गत बड़ी संख्या में गांव व शहर आते हैं। ऐसे में योजना को क्षेत्र से काफी उम्मीद है। जानकारों के अनुसार यह योजना केवल बेटियों के लिए हैं। ऐसे में बेटियों का ही योजना के तहत खाता खुलवाया जा सकता है। माता-पिता या संरक्षक बेटी के नाम से खाता खुलवा सकते हैं और योजना से लाभान्वित हो सकते हैं।

यह मिलते हैं लाभ
योजना के तहत जन्म से लेकर 10 वर्ष तक की बेटी का खाता खुलवाया जा सकता है। हालांकि जमाकर्ता व्यक्ति बेटी के नाम से सिर्फ एक ही खाता खोल सकता है। इसके अलावा माता-पिता व संरक्षक बेटियों का अलग-अलग एक खाता खुलवा सकते हैं। खाता एक हजार रुपए की जमा राशि से खुलवाया जा सकता है। साथ ही एक वर्ष में अधिकतम एक लाख 50 हजार रुपए जमा किए जा सकते हैं। योजना के तहत आयकर में छूट भी मिलती है।

21 वर्ष की आयु में निकाल सकते हैं पूरी राशि
विभाग के अनुसार सुकन्या समृद्धि योजना में बेटी की 14 साल की आयु तक राशि जमा करवाई जा सकती है। इसके बाद राशि जमा नहीं करवाई जा सकती। इसके अलावा बालिका के 18 वर्ष पूरे करने पर आधी राशि तथा 21 वर्ष पूरे होने पर पूरी राशि निकाली जा सकती है।

इनका कहना है
सुकन्या समृद्धि योजना के तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में अभी तक 150 खाते खोले जा चुके हैं। क्षेत्र में योजना को अच्छा रेस्पोंस मिल रहा है। इस बार भी अच्छी तादाद में योजना के तहत खाते खुलने की उम्मीद है।
– कमलेश खींची, डाकघर (योजना प्रभारी), कुचामनसिटी

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SunnyJuly 17, 2018
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जिले का सबसे बड़ा बांध सोमकमला आंबा से पेयजल पहुंचाने के लिए मौजूदा सरकार ने 369 करोड़ स्वीकृत किए है। इस वित्तीय मंजूरी से आसपुर, दोवड़ा और डूंगरपुर पंचायत समिति के 400 से अधिक गांवों में पेयजल मुहैया होगा लेकिन बिछीवाड़ा पंचायत समिति के किसी भी गांव को लाभ नहीं मिलेगा। जिससे इन गांवों को पेयजल के लिए हैंडपंप और भूमिगत जल स्त्रोत पर निर्भर रहना होगा। बांध से पानी लाने के लिए वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। जिसमे सबसे पहले सर्वे शुरू हुआ था। जिसमे बांध से आसपुर, डूंगरपुर, शहर से होते हुए पानी बिछीवाड़ा पंचायत समिति तक पहुंचाना तय हुआ था। इसके बाद इसी आधार पर सर्वे कर डीपीआर बनाई गई थी। योजना में करीब 515 करोड़ स्कीम तैयार हुई थी। बाद में कांग्रेस की सरकार आने के बाद पूरी योजना खटाई में पड़ गई। इसके बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई। इसके बाद वर्ष 2014 में मौजूदा राज्य सरकार की ओर से पुन: सर्वे की डीपीआर बनाने के लिए पीडीकोर संस्थान को कार्य दिया। जिसके लिए 80 लाख बजट दिया। इस योजना में प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसमे करीब 515 गांवों में पेयजल पहुंचाना तय किया। योजना की वित्तीय स्वीकृति के लिए फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची। जहां से योजना के लिए पहले 459 करोड़ स्वीकृत हुए। जिसमे पानी सिर्फ डूंगरपुर शहर तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। जिसमे बिछीवाड़ा पंचायत समिति तक पानी पहुंचाने की योजना को हटा दिया। जिससे इस क्षेत्र के लोगो को पेयजल की भविष्य में किल्लत हो सकती है।

सोमकमला बांध से आसपुर, दोवड़ा और डूंगरपुर पंचायत समिति के अलावा बिछीवाड़ा तक पहुंचाना था पानी

बिछीवाड़ा की 37 में से 7 ग्राम पंचायतों में ही पीएचईडी की स्कीम

ये समस्या: वित्तीय स्वीकृति में भी घटता जा रहा है आकार

पूर्व में सरकार की ओर से योजना में करीब 459 स्वीकृत हुए थे। जिसमे योजना में पुन: समीक्षा करते हुए शहरी क्षेत्र में पाइपलाइन बदलने में कटौती करते हुए योजना को करीब 370 करोड़ में समिति कर दिया। ऐसे में योजना में शेष राशि का उपयोग बिछीवाड़ा पंचायत समिति के गांवों तक पानी पहुंचाने में किया जा सकता है।

इसलिए जरूरी: रीको औद्योगिक क्षेत्र भी हो रहा है विकसित

बिछीवाड़ा में नेशनल हाईवे आठ गुजर रहा है। हाईवे के दोनों ओर होटल और ढाबों के कारण आर्थिक रुप से विकसित क्षेत्र है। इसके साथ ही रीको औद्योगिक क्षेत्र के जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। जिसमे बड़े उद्योग आने की संभावना है। ऐसे में इस क्षेत्र के लिए पानी की सख्त आवश्यकता है।

बिछीवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में हैंडपंप, तालाब और भूमिगत कुओं से पानी पहुंचाने की व्यवस्था है। यहां पर कुल 37 ग्राम पंचायत है। जिसमे से सिर्फ 7 ग्राम पंचायत में ही पीएचईडी की स्कीम संचालित हो रहा है। बिछीवाड़ा पंचायत समिति में 106 राजस्व गांव है। जिसमे 90 प्रतिशत गांवों में हैंडपंप पर ही पेयजल की निर्भरता है।

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SunnyJuly 15, 2018
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-48 हजार आवास बनवाने का एलडीए को मिला है लक्ष्य

-800 करोड़ रुपये होंगे निर्माण पर खर्च, रकम जुटाने के प्रयास तेज

एनबीटी संवाददाता, लखनऊ : प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर में गरीबों के लिए आवास बनाना एलडीए के लिए चुनौती बन गया है। 48 हजार ईडब्ल्यूएस के मकान बनाने के लिए एलडीए को करीब 800 करोड़ रुपये की जरूरत है, इसीलिए एलडीए के अफसरों ने सभी योजनाओं में जमीनों की तलाश शुरू कर दी है। इसके अलावा निर्मित फ्लैट्स बेचकर रकम जुटाने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एलडीए को नए वित्तीय वर्ष में 48 हजार ईडब्ल्यूएस के मकान बनाने हैं। मकानों को बनाने के लिए एलडीए के सामने दो चुनौतियां हैं। पहली जमीन तलाशना और दूसरी आवास बनाने के लिए मद की व्यवस्था करना। दोनों ही परिस्थितियां एलडीए के मौजूदा हालात के अनुकूल नहीं हैं, इसीलिए एलडीए के अफसर परेशान हैं।

वीसी पीएन सिंह के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने का टारगेट हर हाल में पूरा किया जाएगा। इसके के लिए संबंधित अधिकारियों को जमीनों की तलाश तेज करने के निर्देश दे दिए गए। विभिन्न योजनाओं में खाली भूखंडों पर योजना के तहत मकान बनवाए जाएंगे। वीसी का कहना है कि आवासों व दुकानों की नीलामी और फ्लैट्स का पंजीकरण खोलकर आवासों को बनाने के लिए मद की व्यवस्था की जा रही है।

पिछला टारगेट ही नहीं हो सका है पूरा

एलडीए के अलावा आवास विकास परिषद को भी प्रदेश के आठ जोन में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनवाने हैं। नए वित्तीय वर्ष में पूरे प्रदेश में एक लाख से अधिक आवास बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन जमीन व मद के चक्कर में आवास विकास अब तक पिछला लक्ष्य ही पूरा नहीं कर पाया है। पिछले वित्तीय वर्ष में आवास विकास परिषद को 12 हजार ईडब्ल्यूएस के आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया था। इस बार यह संख्या एक लाख से ऊपर पहुंच गई है। इसको लेकर शुक्रवार को आवास विकास परिषद के अफसरों ने बैठक कर जमीन चिह्नित करने की रणनीति तैयार की है। जल्द ही दुकानों व मकानों की नीलामी भी करवाई जाएगी।

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SunnyJuly 14, 2018
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भिलाई . स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) पेंशन योजना का भविष्य वार्षिक लाभ और वित्तीय हालात के भरोसे है। कंपनी भविष्य में घाटे में जाती है, तो पेंशन के अंशदान में कटौती की जा सकती है या उसे बंद किया जा सकता है। प्रबंधन ने बैठक में यह बात साफ कर दी है।
सेल को पिछले वित्त वर्ष में नुकसान हुआ, तब प्रबंधन ने अधिकारियों को कंपनी की ओर से दिया जाने वाले अंशदान 9 से घटाकर 3 फीसदी कर दिया। कर्मियों की पेंशन में कंपनी का अंशदान ६ से २ फीसदी कर दिया गया। इस मामले में यूनियन का तर्क है कि एक बार पेंशन योजना शुरू हो जाए, वरना लगतार सेवानिवृत्त होते कर्मचारी इसके लाभ से वंचित रह जाएंगे।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति व त्यागपत्र देेने पर नहीं मिलेगा पेंशन लाभ

नई पेंशन योजना के प्रारूप में बीएसपी कर्मचारी त्यागपत्र देता है या उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाती है तब उसे कंपनी अंशदान का लाभ नहीं मिलेगा। मौजूदा हालात में कर्मियों को त्यागपत्र देने या सेवानिवृत्त किए जाने की आशंका बनी है। इससे वर्षों की नौकरी के बाद भी कर्मी को कंपनी के अंशदान के रूप में एक पाई भी नहीं मिल पाएगी।

कंपनी और हितग्राही का अंशदान

1 जनवरी 2012 से डीए और बेसिक का 6 प्रतिशत योगदान प्रबंधन की ओर से पेंश फंड में दिया जाएगा। कर्मी न्यूनतम २ प्रतिशत अंशदान करेंगे, जिसकी अधिकतम सीमा ४ प्रतिशत होगी। अंशदान बेसिक और डीए के शेष प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा। 1 जनवरी 2012 को सेवा में सेल कर्मचारी दायरे में आएंगे, जिनमें अधिकारी, प्रशिक्षु ट्रेनी हैं।
बैंक वरिष्ठ नागरिक को 9.5 से 9.25 प्रति लाख त्रैमासिक कम्पाउंड इंट्रेस्ट पर सावधि जमा (एफडी) योजना उपलब्ध करा रही है। कर्मी को सेवा के बाद राशि पर पेंशन से ज्यादा रिटर्न मिलेगा और मूलधन भी उसका होगा लेकिन वर्तमान प्रारूप में पेंशन और मूलधन वापसी के विकल्प में संभावित आय सिर्फ 7.58 फीसदी है। एक तरफ बीमा कंपनी को 1800 करोड़ का भारी भरकम फण्ड मिलेगा और दूसरी तरफ वह बाजारू दर से कम रिटर्न देगी।

यह हैं प्रभावित

पेंशन स्कीम का लाभ नहीं मिलने से सेल के 17 हजार अधिकारी प्रभावित हैं। इनमें २००७ से अब तक सेवानिवृत हो चुके करीब २ हजार अधिकारी हैं। इन अधिकारियों में ४ हजार भिलाई इस्पात संयंत्र में हैं। इनको पेंशन का लाभ मिलना है। जिस अधिकारी का बेसिक एक लाख रुपए है, उसके लिए प्रबंधन ९ हजार रुपए संबंधित कंपनी में जमा करेगी।

आप भी समझिए यह गणित – कर्मियों को नुकसान क्यों

पेंशन योजना अधिकारियों के लिए वर्ष 2007 से लागू है जबकि कर्मचारियों के लिए इसे 2012 से लागू किया जा रहा है। इस तरह एक कंपनी में दो वर्गों के लिए एक योजना अलग-अलग तरह से लागू करने का समझौता किया गया है। यह योजना 2012 से लागू होती तो कर्मियों को न्यूनतम 50 हजार से पौने २ लाख रुपए तक का फायदा होता। वो भी तब जब 2007 से 2012 के मध्य पुराने बेसिक और डीए का ही 6 फीसदी अंशदान कंपनी देती और 2012 से नए वेतनमान की कटौती होती। इसी तरह अधिकतम लाभ करीब 830 रुपए प्रति लाख मिल पाएंगे। वहीं सबसे सुरक्षित विकल्प में यह राशि 600 रुपए प्रति लाख प्रतिमाह से भी कम हो जाएगी।

एटक महासचिव विनोद सोनी ने कहा कि लंबे समय तक प्रयास के बाद आखिर कर्मियों को पेंशन दिलाने में एटक यूनियन की कोशिश रंग ला रही है। १९८६ से ८९ तक इस पेंशन के लिए संघर्ष किया गया था।

छत्तीसगढ़ मजदूर संघ के महासचिव अखिल मिश्र ने बताया कि पेंशन को लेकर समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। भविष्य में भी कंपनी के कंट्रिब्यूशन को लेकर समस्या आएंगी। इसका मुख्य कारण पेंशन के ड्रॉप में कर्मियों की मांग के मुताबिक बदलाव नहीं करना है।

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SunnyJuly 13, 2018
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मिर्जापुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास का धन लेकर 59 लाभार्थी गायब हो गए हैं। साथ ही 740 लाभार्थियों ने अभी तक आवास पूरा नहीं कराया है। ऐसे लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्य विकास अधिकारी प्रियंका निरंजन ने गायब 59 लाभार्थियों से धन वसूली का निर्देश संबंधित सेक्रेट्री को दिया है। लाभार्थी से आवास का धन नहीं मिलने पर सेक्रेट्री से वसूली करने की चेतावनी दिया।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार द्वारा गरीबों को आवास उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है। बावजूद इसके अभी भी जिले में 740 आवास अधूरे पड़े हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में 23 हजार 300 लाभार्थियों का चयन किया गया था, जिसके सापेक्ष 22 हजार 560 लाभार्थियों को आवास बनवाया गया है, बावजूद इसके अभी भी 740 आवास अधूरे पड़े है। जिसके कारण गरीब और निराश्रितों को अपना आवास नही मिल पा रहा है। वहीं 59 लाभार्थियों द्वारा धन निकालने के बाद भी आवास नहीं बनवाया जा रहा है, जिनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश खंड विकास अधिकारियों को दिया है। इसी प्रकार 10 वाद सिविल कोर्ट और 94 वाद एसडीएम कोर्ट में लंबित होने के कारण निर्माण कार्य शुरु नही हो पा रहा है। वहीं 45 आवास वन भूमि की जमीन पर होने के कारण नही बन पा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी ने दूसरी जगह चयन करने अथवा आवास की धनराशि शासन को वापस करने का निर्देश दिया है। परियोजना निदेशक ऋषिमुनि उपाध्याय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में 59 लाभार्थियों द्वारा धन निकालने के बाद आवास नहीं बनवाया गया है, जिनसे धन वसूली के लिए नोटिस भेजा गया है।

जनपद में लगभग 740 आवास विभिन्न कारणों से अधूरे पड़े हैं। इन आवासों को पूर्ण कराने का निर्देश सभी खंड विकास अधिकारियों को दिया गया है। साथ ही बजट जारी करने के बाद भी आवास नहीं बनवाने वाले लाभार्थियों पर कार्रवाई शुरु कर दी गई है। – प्रियंका निरंजन, मुख्य विकास अधिकारी।

कुल आवास – 23300
पूर्ण आवास – 22560
अपूर्ण आवास – 740

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SunnyJuly 13, 2018
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आर्थिक मोर्चे पर मोदी को मिली थी बहुत ही खस्ताहाल विरासत
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार ने 26 मई 2018 को अपने कार्यकाल के चार साल पूरे किए हैं। जब मोदी सत्ता संभाले थे उनको एक ऐसी खराब अर्थव्यवस्था मिली थी, जिसको वैश्विक और घरेलू दोनों निवेशकों ने मुंह मोड़ लिया था। यूं कहें तो निवेशकों का भरोसा डगमगाया था। निवेशक ही नहीं क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भी रेटिंग को गिरा दिया था। अर्थव्‍यवस्‍था की स्थिति खराब होने की संभावना और बड़ी हो रही थी। केंद्र में पिछले सरकार के आखिरी कुछ वर्षों में वित्तीय और चालू खाता घाटे की बढ़ोतरी, मुद्रास्फीति बढ़ने का दबाव, रुपये के गिरने से अर्थव्‍यवस्‍था में एक अभूतपूर्व उथल-पुथल देखा गया था। इसके साथ ही घोर पूंजीवादी व्यवस्था का बोलबाला था। कुछ खास लोगों के लिए देश के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन की छूट दी गई थी। ऐसे में मोदी के लिए एक खस्ताहाल अर्थव्‍यवस्‍था जहरीले प्याला के समान था। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में पिछले चार में सरचनात्‍मक सुधार के कई कदम उठाए गए हैं। इसके चलते भारत जो दुनिया के पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था (जीडीपी के लिहाज से) है ने सबसे तेजी से विकास करना शुरू कर दिया है।

जीएसटी ने कारोबारियों एवं व्यापारियों के लिये काम करना सुगम बनाया और कर संग्रह बढ़ाया
स्वतंत्रता के बाद से सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार माल और सेवा कर (जीएसटी) की शुरूआत के माध्यम से लॉजिस्टिक, वितरण और निर्माण वास्तुकला में जहां क्रांतिकारी बदलाव आया। इसका फायादा कारोबारी से लेकर उपभोक्ताओं को मिला। कारोबारी लागत कम होने से कुशल, स्केलेबल और उपभोक्ताओं तक आसान पहुंच कारोबारियों की हुई। जीएसटी लागू होने से कर चोरी पर शिकंजा कसा है। संगठित के साथ असंगठित क्षेत्र भी कर देने लगे। इससे सरकार के कर संग्रह में वृद्धि हुई है। जीएसटी का सबसे बड़ा फायदा मिला कि राज्‍यों के सीमा पर कारोबार बाधा को खत्‍म हो गया। साथ ही सभी राज्‍यों में वस्तुओं की समान कीमत करना संभव हो पाया।

IBC

आईबीसी: भारत की वित्तीय रूप से कमजोर कॉर्पोरेट संस्थाओं को पुनर्जीवित करने का टिकाऊ रास्ता
बैंकों के लाखों करोड़ रुपये ऐसी परियोजनाओं में फंसे थे जो घाटा का सौदा था। इसके चलते फंसे हुए कर्ज (एनपीए) बढ़ने से बैंकों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो गई। बैंकों की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए मोदी सरकार ने दिवालियापन और दिवालियापन (आईबीसी) कानून में संशोधन किया। विश्व बैंक के एक अध्ययन से पता चलता है कि आईबीसी कानून में संशोधन से पहले किसी एक मामले के समाधान के लिए औसतन 4.3 साल लगते थे जो अब 270 दिनों के भीतर पूरा होना है। अब तक कर्ज देने वाले बैंक को प्री-आईबीसी रिजॉल्यूशन के तहत एक रुपये के बकाया रकम का केवल केवल 26.4 मिलता था। नए आईबीसी कानून के तहत अब इसमें सुधार हो कर ज्‍यादा और आसानी से मिलने की उम्‍मीद है।

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नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत करने के साथ कर चोरी करने वाले, आतंकवादी को धन मुहैया कराने वाले और अवैध तरीके से धन जमा करने वाले पर बड़ा हमला किया
नोटबंदी से पहले भारतीय जीवन शैली की एक दुखद विशेषता थी कि वह नकद पर अत्यधिक निर्भर थी। इसने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को एक समांतर अर्थव्यवस्था बना दिया जो पारदर्शिता की कमी के चलते कर चोरी को बढ़ावा दिया। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों के लिए कर चोरी पकड़ना भी बड़ी चुनौती थी। नोटबंदी ने म्यूचुअल फंड और बीमा उद्योगों के विकास के लिए सहायता के रूप में कार्य किया क्योंकि बैंक में रखे किए गए धन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इन मध्यस्थों (एमएफ और बीमाकर्ताओं) के माध्यम से इक्विटी बाजारों में स्थानांतरित हो जाता है। इस अच्‍छे कदम से घरेलू संस्थागत निवेशकों के मुकाबले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की संख्‍या में और विस्तार हुआ है। घरेलू खुदरा निवेशकों के एक व्यापक वर्ग के बीच टिकाऊ इक्विटी संस्कृति बनाई गई है।

प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने से सरकारी खजाना भरा
देश के प्राकृतिक संसाधनों के लूट-खसोट रोकने के लिए मोदी सरकार ने पहला काम नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। संसाधनों को सही कीमत मिले इसके लिए प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। कोयले, अन्य खनिज, स्पेक्ट्रम, भूमि इत्यादि जैसे प्राकृतिक संसाधनों की अब नीलामी विवेकाधिकार की इच्छाओं पर आवंटित नहीं किए जाते हैं। इसका फायदा सरकारी खजाने को मिला। प्रतिस्पर्धी माहौल को प्रोत्साहित करने और पारदर्शिता को बढ़ाने का फायदा अंतत: सरकारी खजाना और इसका भारतीय नागरिकों को मिल रहा है। सरकार कल्याणकारी योजना पर अब ज्‍यादा खर्च कर पा रही हैं।

Infrastructure

भारी पूंजीगत निवेश के माध्यम से सड़कों, रेलवे और बिजली संचरण में इन्फ्रा बाधाओं को दूर किया गया
पूंजी की कमी के कारण देश की बड़ी इन्‍फ्रा परियोजनाएं की चाल सुस्त हो गई थी। सड़क, रेलवे, बिजली संचरण इत्यादि जैसे भारत के बुनियादी ढांचे क्षेत्र को कमजोर रही थीं। मोदी सरकार ने इन क्षेत्रों में भारी निवेश किया। परिवहन क्षेत्रों में निवेश ने मध्यम और लंबी अवधि तक आर्थिक गतिविधि पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। यह तेजी से बदलाव के समय, बेहतर कनेक्टिविटी और और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने के माध्यम से नौकरी निर्माण और विकास के लिए आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करता है। सरकार ने पिछले 4 वर्षों में सरकार और रेलवे में एक-एक लाख करोड़ रुपये का निवेश निर्धारित किया है।

MOnetary Policy

मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क समझौते के माध्यम से संबोधित उच्च मुद्रास्फीति को कम किया
मोदी सरकार के आने से पहले ऊंची मुद्रास्फीति दर एक बड़ी चुनौती थी। वर्तमान सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत आरबीआई अधिकतम सहनशील उपभोक्ता मुद्रास्फीति दर पर मूल्य स्थिरता प्राप्त करने के लिए लक्षित करता है। इस प्रकार सरकार ने मध्यम अवधि में उपभोक्ता मुद्रास्फीति को 4% (2% के मानक विचलन के साथ) के लिए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के लिए आरबीआई को जिम्मेदार बनाया है। इससे महंगाई को कम करने में मदद मिली।

वित्तीय समावेशन के लिए डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना, जाम से पारदर्शिता बढ़ना और गड़बड़ी रोकना
मोदी ने वित्तीय समावेश को बढ़ाने के लिए जाम (जन धन योजना, आधार और मोबाइल) की त्रिमूर्ति पर भारी जोर दिया है। लाभार्थियों के पूर्ण प्रमाण प्रमाणीकरण सुनिश्चित करना और गलत लाभार्थियों पर रोक लगाना शामिल हैं। जन धन योजना के माध्यम से 310 मिलियन से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं, ग्रामीण इलाकों में उनमें से तीन में से पांचवें हिस्से के साथ 73,690 करोड़ रुपये की कुल राशि जमा है। इन खाता धारकों को डेबिट कार्ड और बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच प्राप्त होती है।

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SunnyJuly 12, 2018
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श्रीनगर। विकास खंड देवप्रयाग के हिंडोलाखाल क्षेत्र में कई गांवों को पेयजल समस्या से निजात मिलने वाली है। हिंडोलाखाल पुनर्गठन ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना फेज-प्रथम का कार्य जल्द शुरू होगा। शासन ने इसके लिए 588.43 लाख की पहली किस्त जारी कर दी है।

क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी ने बताया कि क्षेत्रीय जनता वर्षों से पेयजल योजना के पुनर्गठन की मांग कर रही थी, जिसके बाद शासन की ओर से योजना को स्वीकृत कर निर्माण की पहली किस्त जारी कर दी गई है। कंडारी ने बताया कि क्षेत्र के 84 तोकों की पेयजल योजना के पुनर्गठन के लिए शासन की ओर से करीब 2096.87 लाख की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसका निर्माण एनआरडीडब्ल्यूपी योजना के तहत किया जाएगा।

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