Financial Plan Archives - earn money online hindi news: Sunnywebmoney.com

SunnyNovember 17, 2018
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1min70

प्रतीकात्मक तस्वीर
मुंबई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जून 2015 को प्रधानमंत्री आवास योजना की घोषणा की थी। इस योजना का उद्देश्य 2022 तक देश के प्रत्येक नागरिक को अपना घर उपलब्ध कराना है। आज हम आपको बता रहे हैं प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी खास बातें।


यहां से मिलेगा लोन


आप कमर्शल बैंकों, हाउजिंग फाइनैंस कंपनियों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों, शहरी सहकारी बैंकों, छोटे वित्तीय बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों आदि से लोन लेकर ब्याज पर उचित सब्सिडी पा सकते हैं। आपको किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस भी नहीं देना होगी। हां, आप योजना के तहत जितना लोन लेने के योग्य हैं, उससे ज्यादा लोन ले रहे हैं तो अतिरिक्त रकम पर आपको नॉर्मल प्रोसेसिंग फीस देनी पड़ सकती है।


कितनी मिलेगी सब्सिडी?


इस योजना के तहत 6 लाख सालाना आय वर्ग के लोगों को 6 लाख रुपये तक का होम लोन मिल सकता है। सरकार इस लोन की ब्याज दर पर 6.5 फीसदी की सब्सिडी देगी। 12 लाख सालाना आय वाले लोगों को 9 लाख रुपये तक का लोन मिलेगा। सरकार इस लोन पर 4 फीसदी की सब्सिडी देगी। 12 से 18 लाख सालाना आय वर्ग के लिए 12 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। सरकार इस लोन पर 3 फीसदी की छूट देगी।


किसको मिलेगा लाभ?


प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक की उम्र 21 से 55 साल के बीच होनी चाहिए। हालांकि, अगर परिवार के मुखिया या आवेदक की उम्र 50 साल से अधिक है तो उसके कानूनी वारिस को होम लोन में शामिल किया जाएगा।

कितनी होनी चाहिए आमदनी?

EWS (निम्न आय वर्ग) के लिए सालाना आमदनी 3 लाख रुपये और LIG (कम आय वर्ग) के लिए सालाना आमदनी 3 लाख से 6 लाख रुपये के बीच होनी चाहिए। साल में 12 और 18 लाख रुपये तक की आमदनी वाले लोग भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

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SunnyNovember 16, 2018
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1min100

Publish Date:Sat, 17 Nov 2018 02:03 AM (IST)

मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के अंतर्गत आने वाले कार्यों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट की मांग

जिला पंचायती राज पदाधिकारी सुधीर कुमार ने बीडीओ से की है। इसके आलोक में बीडीओ ने शुक्रवार को अपने कार्यालक्ष कक्ष में बैठक कर प्रखंड के सभी पंचायत सचिवों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान बीडीओ मुकेश कुमार ने कहा की मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के तहत योजना का नाम, वित्तीय वर्ष, योजना की भौतिक स्थिति, बो¨रग की गहराई, मोटर का किस कंपनी का है, किस प्रकार का पाइप है, पाइप पर आईएसआई का मार्क है की नहीं, बिजली का कनेक्शन है की नहीं, कितने घरों तक पानी पहुंच रहा है, कितने घर अभी योजना के लाभ से वंचित है, आदि की सूची बनाकर सौंपनी है। इसे अलावा मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना के अंतर्गत योजना में वित्तीय वर्ष, योजना का नाम, योजना की संख्या, योजना की वर्तमान में भौतिक स्थिति, कार्य पूर्ण हो तो उसकी तिथि, पथ का प्रकार, पथ की कुल लंबाई, पथ की मोटाई, नाली का प्रकार, सोखता की संख्या, आदि की रिपोर्ट तैयार करने के लिए सभी पंचायत सचिवों को प्रपत्र उपलब्ध कराया गया है। रिपोर्ट अगले दो दिनों के अंदर जमा करना है। रिपोर्ट बीडीओ द्वारा पंचायती राज पदाधिकारी को सौंपी जाएगी। बैठक में बीडीओ मुकेश कुमार, बीपीआरओ बजरंग प्रताप ¨सह, सुरेंद्र ¨सह, आदि सहित कई पंचायत सचिव उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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SunnyNovember 16, 2018
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पटना : कृषि योजनाओं को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने 239.81 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है. इससे कृषि यांत्रिकरण योजना के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान और केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ अन्नदाताओं को मिलेगा. कृषि विभाग के प्रस्ताव पर शुक्रवार को कैबिनेट ने मुहर लगायी है. इसके अलावा, बेगूसराय और मधुबनी में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के लिए जमीन मिल गयी है. इसके हस्तांतरण की अनुमति मिली है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है.

शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिपरिषद विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि कृषि से संबंधित कार्यों को गति देने के लिए कैबिनेट ने कृषि विभाग के दो प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है. उन्होंने बताया कि उद्यान निदेशालय के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रस्तावित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (सूक्ष्म सिंचाई) में पिछले वर्ष की शेष केंद्रांश राशि के उपयोग का प्रस्ताव था. इसमें कुल 7981.00 लाख रुपये की योजना व्यय के लिए स्वीकृति प्रदान की गयी है. इसके तहत पिछले वर्ष के अवशेष राशि 5493.852 लाख रुपये तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष के तहत 2487.468 लाख रुपये व्यय की स्वीकृति दी गयी है. इससे सभी श्रेणी के किसानों को ड्रिप सिंचाई अधिष्ठापन के लिए 90 फीसदी तथा स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए 75 प्रतिशत अनुदान मिलेगा. इस तकनीक के उपयोग से 60 प्रतिशत सिंचाई जल की बचत होगी.

इतना ही नहीं, 25-35 प्रतिशत पैदावार में वृद्धि की भी उम्मीद रहती है. नयी तकनीक होने के कारण इसके प्रति किसानों को जागरूक किया जायेगा. इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जायेगा, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके. दूसरी ओर, राज्य स्कीम के अधीन कृषि यांत्रिकरण कार्यक्रम के वित्तीय वर्ष 2018-19 में 16000 लाख की लागत से योजना क्रियान्वयन की स्वीकृति कैबिनेट ने प्रदान की है. जिलों में मेला अथवा मेला के बाहर कृषि यंत्र खरीदने पर अनुदान दिया जायेगा. यह अनुदान कृषि यांत्रिकरण साॅफ्टवेयर के माध्यम से मिलेगा. आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के फलस्वरूप किसान उचित समय पर खेती की तैयारी कर पायेंगे. इससे फसलों के उत्पादन में वृद्धि होगी.

उधर, कैबिनेट ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के दो प्रस्तावों को मंजूरी दी है. बेगूसराय जिला में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए अंचल बरौनी, मौजा असुरारी में बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) की 20 एकड़ भूमि है. तय शुल्क पर यह भूमि स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित होगी. इसके अलावा, मधुबनी जिला के झंझारपुर में अनुमंडल कार्यालय झंझारपुर के लिए ली गयी जमीन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना के लिए स्वास्थ्य विभाग को नि:शुल्क दी जायेगी.

वहीं, पटना जिला के पालीगंज अनुमंडल में जेल बनेगी. यहां उपकारा का निर्माण होगा. इसके लिए भवन निर्माण विभाग ने 34 करोड़ 66 लाख रुपये की स्टीमेट बनायी है. गृह विभाग के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दी है. दूसरी ओर, मंत्रिमंडल सचिवालय के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने स्वीकृति दी है. विभाग के अधीन बिहार विकास मिशन को राज्य स्कीम के तहत 2018-19 में सहायक अनुदान मद में 85 करोड़ रुपये के निकासी एवं व्यय की स्वीकृति दी गयी है.

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SunnyNovember 16, 2018
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1min90

आप भी जन निवेश से जुड़ सकते हैं।&nbsp

ऐसा एक साथी ढूंढ लेना जिसके साथ आप जीवन भर रहेंगे बहुत ही आनंद भरा अवसर होता है। शादी से पहले युवा जोड़े कई तरह की बातें करते हैं पर भारत में वित्तीय लक्ष्यों और आकांक्षाओं की चर्चा करने को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है।

आज के समय में दम्पति (पति-पत्नी) को ये समझना होगा कि सुख-दुख के समय में एक बेहतरीन वित्तीय नियोजन के जरिए वो एक दूसरे का साथ ज्यादा अच्छे से दे सकते हैं। ये न सिर्फ उनको वित्तीय चुनौतियों से बचाएगा बल्कि उनकी दौलत के साथ समृद्धि भी बढ़ा सकता है। 

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) और टाइम्स नेटवर्क मिलकर पूरे भारत में निवेशकों की जागरूकता का कार्यक्रम ‘जन निवेश’ चला रहे हैं। इस कार्यक्रम के जरिए अलग-अलग क्षेत्र से संबंध रखने वाले लोगों को वित्तीय तौर पर सशक्त होने के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस बार जन निवेश ने नए नवेले शादीशुदा जोड़ों से बातचीत कर उनकी वित्तीय आकांक्षाएं समझी और और उनको इन्हें साकार करने का मार्गदर्शन दिया।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट जैसे कि अर्थयंत्र के फाउंडर और सीईओ नितिन व्याकरणम और नायक वेल्थ प्लानर्स के चीफ ग्रोथ प्लानर निखिल नायक ने नई-नई शादी के बंधन में बंधे जोड़ों को सुना और उनको अपने वित्तीय लक्ष्य पूरे करने की सलाह दी। नए जोड़े लियोन और भाविका के सामने अपने करियर बनाने का छोटी अवधि का लक्ष्य है। दूसरी तरफ मिहिर और स्टेसी जल्दी रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं। धीरेन और मेघा भी वित्तीय तौर पर स्वतंत्र बनाना चाहते हैं।

नितिन व्याकरणम के मुताबिक निवेश शुरू करने से पहले लक्ष्य बनाना और उसको कितने समय में पाना है इस पर विचार करना बहुत जरूरी है। ये दो कदम किसी भी निवेश से जुड़े पोर्टफोलियो को पूरा करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मिहिर और स्टेसी को सलाह दी कि अगर वो जल्दी रिटायरमेंट चाहते हैं उन्हें इस बात का लक्ष्य बनाना होगा कि उन्हें अपना जीवन-यापन करने के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी। एक बार लक्ष्य बन जाने के बाद वो इसके हिसाब से म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू कर सकते हैं।

निखिल नायक ने नए शादीशुदा जोड़ों को सलाह दी कि उनको एक हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान में निवेश करना चाहिए ताकि किसी अनहोनी के कारण उनकी वित्तीय योजना धरी की धरी न रह जाए। दूसरा है नई दम्पति को बचत से निवेश की तरफ बढ़ना चाहिए ताकि उनका पैसा उनके काम आ सके। नायक ने भाविका और लियोन को सलाह दी कि छोटी अवधि के लक्ष्यों के लिए उनको लिक्विड फंड में निवेश करना चाहिए। वहीं धीरेन और मेघा को अपना पोर्टफोलियो इस तरह से बनाना चाहिए कि उनका वार्षिक छुट्टी मनाने का छोटी अवधि का लक्ष्य और भविष्य के लिए बचत का लंबे समय का लक्ष्य भी पूरा हो जाए।

इन नए जोड़ों को जानकारों ने इनकी वित्तीय आकांक्षाओं को पूरा करने और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का रास्ता बताया। जन निवेश जैसे अभियान के कारण म्यूचुअल फंड को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। इस संदेश के साथ कि ‘आज की कमाई भविष्य के काम आई’ जन निवेश सभी उम्र के लोगों से हर महीने अपनी एक दिन की कमाई को म्यूचुअल फंड में निवेश करने की शपथ लेने का निवेदन कर रहा है।

आप भी 1800 8333 666 पर मिस्ड कॉल देकर इस राष्ट्रव्यापी अभियान में जुड़ सकते हैं।

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SunnyNovember 16, 2018
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2min90

योगिमा शर्मा, नई दिल्ली

सरकार महिला कर्मचारियों की हायरिंग और मैटरनिटी पीरियड के दौरान उनके रोजगार को बनाए रखने के लिए इंसेंटिव देने की सोच रही है। सरकार यह कदम ऐसे समय में उठाने जा रही है, जब मैटरनिटी बेनिफिट ऐक्ट में संशोधन के बाद कंपनियों के महिला कर्मचारियों के छंटनी करने की खबरें आई हैं। इस संशोधन के जरिए मैटरनिटी पीरियड को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते किया गया था।

एक बड़े सरकारी अधिकारी ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि श्रम मंत्रालय ने संशोधन के बाद मैटरनिटी लीव में बढ़ाए गए 14 हफ्तों में से 7 हफ्ते की सैलरी कंपनियों को देने का प्रस्ताव दिया है। यह रिइंबर्समेंट उन महिला कर्मचारियों के लिए होगा, जिनकी सैलरी 15,000 रुपये तक होगी और वे कम से कम 12 महीनों से ईपीएफओ की सदस्य हों। इस पॉलिसी को सबसे पहले दिल्ली और महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा।

अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना की तरह श्रम मंत्रालय अब मैटरनिटी लीव के 26 हफ्तों तक महिला कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है।’ इसके तहत संशोधन के बाद मैटरनिटी लीव में बढ़े हुए 14 हफ्तों में से 7 हफ्ते की महिला कर्मचारी की सैलरी सरकार कंपनी को देगी, जबकि बाकी के 7 हफ्ते का खर्च कंपनी को उठाना पड़ेगा।

अधिकारी के मुताबिक, श्रम मंत्रालय के सामने ऐसे कई मामले आए थे, जिनसे पता चला कि कैसे मैटरनिटी लीव महिला कर्मचारियों की हायरिंग में रोड़ा बन रही है। इन शिकायतों में बताया गया था कि मैटरनिटी लीव से ठीक पहले कंपनियां छोटे-मोटे कारणों से महिला कर्मचारियों की छंटनी कर रही थीं।

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बुधवार को इस मामले पर एक त्रिपक्षीय चर्चा की अध्यक्षता की। इसमें बात हुई कि कैसे मैटरनिटी लीव में बढ़ोतरी के बाद कंपनियों पर आए अतिरिक्त वित्तीय बोझ को वित्तीय प्रोत्साहन के जरिए कम किया जाए। इस मामले पर एक पॉलिसी को जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।

मैटरनिटी बेनेफिट एक्ट 1961, मैटरनिटी के समय महिला कर्मचारियों के रोजगार की गारंटी देता है। उन्हें ‘मैटरनिटी बेनिफिट’ का अधिकारी भी बनाता है। मैटरनिटी बेनेफिट के तहत महिला कर्मचारी को मैटरनिटी लीव के दौरान भी पूरी सैलरी दी जाती है, जिससे वह बच्चे की देखभाल कर सके। यह कानून 10 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों पर लागू होता है। स्टाफिंग कंपनी टीमलीज की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मैटरनिटी लीव के चलते इस वित्त वर्ष में 11 लाख से 18 लाख महिला कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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SunnyNovember 16, 2018
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सार्वजन‍िक क्षेत्र के प्रमुख बैंक भारतीय स्‍टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत एसबीआई में 260 अरब रुपए जमा हुए। इस योजना के तहत खोले गए खातों में औसतन 1800 रुपए जमा किए गए।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत एक साल में निम्न आय वर्ग के 30 करोड़ लोगों के खाते खोले गए। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए 32 फीसदी बैंक खाते एसबीआई में है।

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क्या है प्रधानमंत्री जनधन योजना

प्रधानमंत्री जनधन योजना सरकार का ऐसा वित्तीय समावेशन मिशन है जिसके तहत सरकार देशभर में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधा मुहैया कराना चाहती है। इसके पहले कदम के तहत देशभर में लोगों का बैंक खाता खोला गया।

इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2014 को की गई थी और 28 अगस्त को इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। पहले ही दिन 1.5 करोड़ लोगों के खाते खोले गए। प्रधानमंत्री ने इस दिन को “वित्तीय स्वतंत्रता दिवस” बताया था।

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कुल 84 हजार करोड़ रुपए हुए जमा

कुल 84 हजार करोड़ रुपए हुए जमा

इस योजना के तहत खोले गए बैंक खातों में अब तक 33.19 करोड़ लाभार्थियों ने कुल 84,689 करोड़ रुपए बैंकों में जमा कराए हैं। योजना का पहला चरण 15 अगस्त 2014 से 14 अगस्त 2015 तक चला। दूसरा चरण के तहत 15 अगस्त 2015 से 15 अगस्त 2018 तक खाते खोले गए और ड्राफ्ट खातों में चूक कवर करने के लिए क्रेडिट गारंटी फंड बनाया गया।

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पीएमजेडीवाई स‍ितंबर महीने में अनिश्चित काल तक के लिए जारी

पीएमजेडीवाई स‍ितंबर महीने में अनिश्चित काल तक के लिए जारी

आपको बता दें कि बीते स‍ितंबर महीने में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) को अनिश्चित काल तक के लिए जारी रखने को मंजूरी प्रदान की है। साथ ही, इसके दायरे में विस्तार करते हुए दुर्घटना बीमा को दोगुना और उम्र की सीमा में पांच साल की छूट दी गई है।
जनधन योजना के नए अवतार में अब ओवरड्राफ्ट की सुव‍िधा के ल‍िए खाताधारक की उम्रसीमा 18- 65 साल की है। पूर्व में अधिकतम उम्र सीमा 60 साल थी। पहले ओवरड्राफ्ट की सीमा 5,000 रुपये थी जिसे बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। साथ ही, 2,000 रुपये के ओवरड्राफ्ट के लिए कोई शर्त नहीं है।

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SunnyNovember 16, 2018
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[ योगिमा शर्मा | नई दिल्ली ]

सरकार महिला कर्मचारियों की हायरिंग और मैटरनिटी पीरियड के दौरान उनके रोजगार को बनाए रखने के लिए इंसेंटिव देने की सोच रही है। सरकार यह कदम ऐसे समय में उठाने जा रही है, जब मैटरनिटी बेनेफिट एक्ट में संशोधन के बाद कंपनियों के महिला कर्मचारियों के छंटनी करने की खबरें आई हैं। इस संशोधन के जरिये मैटरनिटी पीरियड को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते किया गया था।

एक बड़े सरकारी अधिकारी ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि श्रम मंत्रालय ने संशोधन के बाद मैटरनिटी लीव में बढ़ाए गए 14 हफ्तों में से 7 हफ्ते की सैलरी कंपनियों को देने का प्रस्ताव दिया है। यह रिइंबर्समेंट उन महिला कर्मचारियों के लिए होगा, जिनकी सैलरी 15,000 रुपये तक होगी और वे कम से कम 12 महीनों से ईपीएफओ की सदस्य हों। इस पॉलिसी को सबसे पहले दिल्ली और महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा।

अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना की तरह श्रम मंत्रालय अब मैटरनिटी लीव के 26 हफ्तों तक महिला कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है।’ इसके तहत संशोधन के बाद मैटरनिटी लीव में बढ़े हुए 14 हफ्तों में से 7 हफ्ते की महिला कर्मचारी की सैलरी सरकार कंपनी को देगी, जबकि बाकी के 7 हफ्ते का खर्च कंपनी को उठाना पड़ेगा।

अधिकारी के मुताबिक, श्रम मंत्रालय के सामने ऐसे कई मामले आए थे, जिनसे पता चला कि कैसे मैटरनिटी लीव महिला कर्मचारियों की हायरिंग में रोड़ा बन रही है। इन शिकायतों में बताया गया था कि मैटरनिटी लीव से ठीक पहले कंपनियां छोटे-मोटे कारणों से महिला कर्मचारियों की छंटनी कर रही थीं।

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बुधवार को इस मामले पर एक त्रिपक्षीय चर्चा की अध्यक्षता की। इसमें बात हुई कि कैसे मैटरनिटी लीव में बढ़ोतरी के बाद कंपनियों पर आए अतिरिक्त वित्तीय बोझ को वित्तीय प्रोत्साहन के जरिए कम किया जाए। इस मामले पर एक पॉलिसी को जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।

मैटरनिटी बेनेफिट एक्ट 1961, मैटरनिटी के समय महिला कर्मचारियों के रोजगार की गारंटी देता है। उन्हें ‘मैटरनिटी बेनेफिट’ का अधिकारी भी बनाता है। मैटरनिटी बेनेफिट के तहत महिला कर्मचारी को मैटरनिटी लीव के दौरान भी पूरी सैलरी दी जाती है, जिससे वह बच्चे की देखभाल कर सके। यह कानून 10 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों पर लागू होता है। स्टाफिंग कंपनी टीमलीज की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मैटरनिटी लीव के चलते इस वित्त वर्ष में 11 लाख से 18 लाख महिला कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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SunnyNovember 15, 2018
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किसानों को 22 अरब के ऋण का होगा वितरण

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बलरामपुर। जिले के किसानों को 21.94 अरब रुपये का ऋण वितरित करने का प्रस्ताव रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में किसानों का जीवन स्तर सुधारने की कवायद शुरू की गई है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के महत्व को ध्यान में रखते हुए फसली व अन्य ऋण देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है।

कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में गुरुवार को किसानों के उत्थान संबंधी बैंकिंग सुविधाओं के प्रस्ताव पारित किए गए। कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को बैठक का संचालन करते हुए जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड अरुण कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की तरफ से वित्तीय वर्ष 2019-20 में किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए है।

जिले के किसानों को अगले वित्तीय वर्ष में ऋण देने के लिए 21 अरब 94 करोड़ 36 लाख 12 हजार रुपये का प्रस्ताव रखा गया है जो चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के सापेक्ष 12.89 प्रतिशत अधिक है। अगले वित्तीय वर्ष की जिला ऋण योजना इसी पीएलपी अर्थात संभाव्यतायुक्त ऋण योजना के आधार पर तैयार की जाएगी।

संभावित ऋण योजना तैयार करते समय रिजर्व बैंक व नाबार्ड की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के साथ-साथ राज्य व केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं तथा स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकताओं का विशेष ध्यान रखा गया है। 2022 तक किसानों की आय दोगनी करने के महत्व को समझते हुए फसली ऋण पर 13.72 अरब रुपये, कृषि और संबंधित गतिविधियों के लिए 40 अरब, आठ करोड़ 85 लाख चार हजार के सावधि ऋण का आकलन किया गया है।

कृषि आधारभूत संरचना के लिए 32.93 करोड़, कृषि सहायक गतिविधियों के लिए 40.87 करोड़, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए 1.63 अरब 20 लाख रुपये, निर्यात शिक्षा आवास के लिए 93.40 करोड़, नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 3.86 करोड़ रुपये, अनौपचारिक ऋण वितरण प्रणाली के लिए 75.25 करोड़ तथा सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 3.66 करोड़ रुपये बैंक ऋण की संभावना का आकलन किया गया है। बैठक की अध्यक्षता डीडीओ गिरिश कुमार पाठक ने की।

बैठक को आरबीआई के अग्रणी जिला अधिकारी प्रहलाद सिंह, एलडीएम डॉ. आरएम विशनोई तथा सर्व यूपी ग्रामीण बैंक आरएम शील चंद्र सिंह ने भी किसानों के ऋण योजना के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर अन्य कई लोग मौजूद रहे।

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SunnyNovember 15, 2018
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वित्त मंत्री ने कहा, ‘भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए उच्च आर्थिक वृद्धि दर आवश्यक है, हम उच्च आर्थिक वृद्धि के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को गरीबी के गर्त से उबारना और उनका जीवन सुधारना चाहते हैं. लेकिन हम विकास और प्रगति का फायदा कुछ लोगों तक सीमित रह जाने और बाकी के उससे वंचित होने के जोखिम को लेकर भी सजग है.’

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SunnyNovember 15, 2018
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नयी दिल्ली, 15 नवंबर (भाषा) देश में गरीबी को कम करने और विकास का फायदा गरीबों तक पहुंचाने के लिये उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करना जरूरी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को यह बात कही। जेटली ने बचत एवं खुदरा बैंकों के 25वें विश्व सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि विकास की बाट जोह रहा कोई समाज जीवन की गुणवत्ता में सुधार और विकास का फल गरीबों तक पहुंचाने के लिए अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा, ” भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए उच्च आर्थिक वृद्धि दर आवश्यक है। हम उच्च आर्थिक वृद्धि के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को गरीबी के गर्त से उबारना और उनका जीवन सुधारना चाहते हैं। लेकिन हम विकास और प्रगति का फायदा कुछ लोगों तक सीमित रह जाने और बाकी के उससे वंचित होने के जोखिम को लेकर भी सजग है।” जेटली का कहा कि आर्थिक वृद्धि का प्रभाव निश्चित रूप से दिखेगा लेकिन यह एक धीमी प्रक्रिया है और विकास की बाट जोह रहा समाज अनिश्चितकाल तक इसका इंतजार नहीं कर सकता है। नरेंद्र मोदी सरकार में चलाये गये वित्तीय समावेश अभियान पर बोलते हुये जेटली ने कहा कि हमारा उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से नहीं जुड़े लोगों को बैंक से जोड़ना, असुरक्षित लोगों को सुरक्षित करना और पूंजीहीन लोगों को वित्त पोषित करना और जिन क्षेत्रों में सेवाएं नहीं थी, वहां सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि बैंकों खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत कुछ महीनों में 33 करोड़ बैंक खाते खोले। प्रारंभ में यह शून्य रकम खाते खोले गये और धीरे-धीरे लोगों ने इनमें पैसे जमा कराने शुरू कर दिए। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में अब भी अधिकांश लोगों के पास बीमा और पेंशन की सुरक्षा नहीं है। उन्होंने जनता को बीमा सुरक्षा देने के सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि जन धन योजना खातों के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के तहत सस्ती प्रीमियम पर लोगों के लिये बीमा की पेशकश की गयी है। कुल 14.1 करोड़ लोगों का दुर्घटना बीमा किया गया है जबकि 5.5 करोड़ लोगों को जीवन बीमा दिया गया है। इसके अलावा, अटल पेंशन योजना के नाम से कम प्रीमियम पर पेंशन योजना शुरू की गयी है। पूंजीहीन लोगों को वित्त पोषित करने के लिये सरकार ने मुद्रा योजना पेश की। जेटली ने कहा कि अर्थव्यस्था को औपचारिक रूप देने के लिये सरकार ने बड़े मूल्य वाले नोट (500 और 1,000 रुपये) को बंद किया था। जिससे बड़ी मात्रा में बैंकिंग प्रणाली में नकदी आ गयी थी। सरकार ने नयी कर व्यवस्था माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली पेश की। इससे विभिन्न कर एक कर में समाहित हो गये हैं। उन्होंने कहा कि नयी कर प्रणाली पूरी तरह से ऑनलाइन है और बहुत सी गतिविधियों को औपचारिक प्रणाली में लेकर आई है। इस पर अभी भी काम जारी है। इस अवसर पर वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता में उत्साहित सरकार ने हाल में इसके दूसरी चरण की शुरुआत की है। इसके तहत सभी लोगों के बैंक खाते खोलने का लक्ष्य रखा गया है और ओवरड्राफ्ट सुविधा को दोगुना करके 10,000 रुपये किया गया है।

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