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SunnySeptember 21, 2018
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1min10

वाशिंगटन : विश्वबैंक ने शुक्रवार को भारत के लिए एक महत्वाकांक्षी पांच वर्षीय ‘स्थानीय भागीदारी व्यवस्था ‘ (सीपीएफ) को मंजूरी दी. इसके तहत भारत को 25 से 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है, ताकि देश को निम्न मध्य-आय वाले देशों की श्रेणी से उच्च-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंचने में मदद मिल सके. विश्वबैंक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस घोषणा के एक दिन बाद इस भागीदारी व्यवस्था को मंजूरी दी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पांच-सात साल में 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था हो जायेगी.

इसे भी पढ़ें : विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन के संकेत, 7.3 प्रतिशत रहेगी विकास दर

उसका मानना है कि सीपीएफ योजना से भारत को अपने समावेशी और स्वस्थ आर्थिक वृद्धि के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी. विश्वबैंक के निदेशक मंडल ने भारत के एक उच्च मध्य आय देश बनने के लक्ष्यों का समर्थन किया है. इस सहायता से देश की बुनियादी विकास की प्राथमिकताओं की कुछ समस्याओं का निवारण करने में आसानी होगी. इसमें संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और समावेशी विकास, रोजगार सृजन और मानव पूंजी का निर्माण जैसी प्राथमिकताएं शामिल हैं.

इस भागीदारी व्यवस्था के तहत भारत को अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी), अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) और बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) से पांच साल में 25 से 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता आने की उम्मीद जतायी गयी है.

विश्वबैंक के उपाध्यक्ष एवं दक्षिण एशिया मामलों के प्रभारी हार्टविंग श्काफर ने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, वैश्विक कद और पिछले दशकों में सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने के अपने विशेष अनुभव के चलते भारत 2030 तक एक उच्च मध्य आय वाला देश बनने की अच्छी स्थिति में है.

विश्वबैंक के भारत के निदेशक जुनैद अहमद ने कहा कि यह एक पांच वर्षीय योजना है जो भारत के बारे में बैंक की प्रतिबद्धता का सबूत है. यह व्यवस्था इस बात से जुड़ी है कि हम क्या करेंगे, कैसे करेंगे और इसका वित्तीय स्तर क्या होगा. यह इस तरह पहली साझेदारी व्यवस्था है, जो भारत के साथ बनायी गयी है.

अहमद ने कहा कि सीपीएफ में प्रक्रियाबद्ध तरीके से देश की समस्याओं की पहचान की जायेगी, जो देश के बारे में एक प्रस्तावना पेश करेगा. विश्वबैंक के भारत के लिए सीपीएफ पेश करने के तुरंत बाद अहमद ने कहा कि बैंक पिछले कई दशकों में भारत द्वारा की गयी आर्थिक प्रगति और विकास को मान्यता देता है.

उन्होंने कहा कि बैंक जानता है कि भारत ने एक कम आय वाले देश से कम-मध्य आय वाले देश के रूप में पहुंचा है और देश अब कम-मध्य आय वाले देश से उच्च-मध्य आय वाले आर्थिक बदलाव में प्रवेश कर रहा है. यह सीपीएफ इस लक्ष्य में बैंक की सहायता के बारे में बताता है.

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SunnySeptember 21, 2018
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1min10

भारत को IBRD, IFC और MIGA से पांच साल में 25 से 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता आने की उम्मीद जतायी गई है. (Reuters)

World Bank ने शुक्रवार को भारत के लिए एक महत्वाकांक्षी पांच वर्षीय ‘स्थानीय भागीदारी व्यवस्था’ (CPF) को मंजूरी दी. इसके तहत भारत को 25 से 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है ताकि देश को लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कटेगरी से हाई मीडियम कटेगरी वाले देशों की लिस्ट में पहुंचने में मदद मिल सके.

World Bank ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस घोषणा के एक दिन बाद इस भागीदारी व्यवस्था को मंजूरी दी है कि भारतीय इकॉनमी 5-7 साल में 5,000 अरब डॉलर की इकोनॉमी हो जाएगी. बैंक का मानना है कि सीपीएफ योजना से भारत को अपने इंक्लूसिव और हेल्थी आर्थिक बढ़ोतरी के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी.

World Bank के निदेशक मंडल ने भारत के एक अपर मिडिल इनकम वाला देश बनने के लक्ष्यों का समर्थन किया है. इस सहायता से देश की बुनियादी विकास की प्राथमिकताओं की कुछ समस्याओं का निवारण करने में आसानी होगी. इसमें संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और ओवरऑल डेवलपमेंट, रोजगार सृजन और मानव पूंजी का निर्माण जैसी प्राथमिकताएं शामिल हैं.

इस भागीदारी व्यवस्था के तहत भारत को अंतरराष्ट्रीय पुर्निनर्माण और विकास बैंक (IBRD), अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) और बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (MIGA) से पांच साल में 25 से 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता आने की उम्मीद जतायी गई है.

भारत की स्थिति बेहतर

World Bank के उपाध्यक्ष और दक्षिण एशिया मामलों के प्रभारी हार्टंविग श्काफर ने कहा, ‘‘तेजी से बढ़ती इकोनॉमी, वैश्विक कद और पिछले दशकों में सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने के अपने विशेष अनुभव के चलते भारत 2030 तक एक उच्च मध्य आय वाला देश बनने की अच्छी स्थिति में है.’’

पांच वर्षीय योजना

World Bank के भारत के निदेशक जुनैद अहमद ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह एक पांच वर्षीय योजना है जो भारत के बारे में बैंक की प्रतिबद्धता का सबूत है. यह व्यवस्था इस बात से जुड़ी है कि हम क्या करेंगे, कैसे करेंगे और इसका वित्तीय स्तर क्या होगा. यह इस तरह पहली साझेदारी व्यवस्था है जो भारत के साथ बनायी गई है.’’ अहमद ने कहा कि सीपीएफ में प्रक्रियाबद्ध तरीके से देश की समस्याओं की पहचान की जाएगी जो देश के बारे में एक प्रस्तावना पेश करेगा.

भारत तेजी से ग्रोथ ​करने वाला देश

World Bank के भारत के लिए सीपीएफ पेश करने के तुरंत बाद अहमद ने कहा कि बैंक पिछले कई दशकों में भारत द्वारा की गई आर्थिक प्रगति और विकास को मान्यता देता है. उन्होंने कहा कि बैंक जानता है कि भारत ने एक कम आय वाले देश से कम-मध्य आय वाले देश के रूप में पहुंचा है और देश अब कम-मध्य आय वाले देश से उच्च-मध्य आय वाले आर्थिक बदलाव में प्रवेश कर रहा है. यह सीपीएफ इस लक्ष्य में बैंक की सहायता के बारे में बताता है.

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SunnySeptember 21, 2018
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2min20

गुप्त या संवेदनशील मामलों पर बातचीत के लिए इन लाइनों का इस्तेमाल किया जाता है। यह इसलिए भी सुरक्षित मानी जाती हैं, क्योंकि इन पर फोन टैप नहीं किया जा सकता।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः टि्वटर)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सभी कबीना मंत्री जिन खुफिया फोन लाइन्स से बातचीत करते हैं, उनमें धड़ल्ले से सेंध लगाई जा रही है। हाल ही में 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह के आवास पर बिछाई गई इस स्पेशल रैक्स फोन लाइन को पांचवीं बार नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को इस बाबत भारत भूषण ने ई-मेल पर शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसडीओ को भी इसकी खबर की गई, जबकि स्थानीय थाने में मामला दर्ज कराया गया। फिलहाल पुलिस इस मामले में जांच-पड़ताल कर रही है।

आपको बता दें कि पीएम और कबीना मंत्रियों के अलावा इस लाइन की सेवा चंद खास नौकरशाहों को दी जाती है, लिहाजा सिंह के आवास पर भी इस खुफिया फोन लाइन का सेट-अप किया गया था।

पुलिस के हवाले से ‘टीओआई’ की रिपोर्ट में बताया गया कि सिंह का आवास वसंत कुंज (दक्षिण) के ग्रीन एवेन्यू लेन में है। वह बीते साल अध्यक्ष चुने गए थे। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और बाकी वित्तीय योजना के लिए उन्हें इस टेलीफोन लाइन की सेवा मुहैया कराई गई थी।

HOT DEALS

शुरुआत में भी इस लाइन को नुकसान पहुंचाया गया, पर उस दौरान इसे छोटी-मोटी घटना मानकर नजरअंदाज कर दिया गया था। हालांकि, बाद में उसे दुरुस्त भी किया गया। लेकिन फिर वैसा ही मामला सामने आया। और अब पांचवीं बार इस लाइन को ब्रेक करने की कोशिश की गई।

क्या होती है स्पेशल रैक्स फोनलाइन?: गुप्त या संवेदनशील मामलों पर बातचीत के लिए इन लाइनों का इस्तेमाल किया जाता है। यह इसलिए भी सुरक्षित मानी जाती हैं, क्योंकि इन पर फोन टैप नहीं किया जा सकता। न ही किसी अन्य तरीके से जासूसी हो सकती है। भारत सरकार के पास ही सिर्फ इन फोन लाइन्स को इस्तेमाल करने का अधिकार होता है।

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SunnySeptember 20, 2018
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1min40

सारठ : प्रधानमंत्री आवास योजना में अभिलेख पर बिना बीडीओ के हस्ताक्षर के ही सारठ प्रखंड में दो वित्तीय वर्ष में लाभुकों के खाते में करोड़ों का भुगतान हो गया.  2017-18 के लिए 778 यूनिट व वित्तीय वर्ष 2018-19 में 1129 यूनिट पीएम आवास की स्वीकृति सारठ प्रखंड के लिए हुई थी. जिसमें लाभुकों को करोड़ों रुपये का भुगतान तो कर दिया गया, किंतु उस पर बीडीओ के हस्ताक्षर नहीं किये गये थे. हालांकि, 2017-18 के कुछ ही लाभुकों के अभिलेख में हस्ताक्षर छुटे हुए हैं, जबकि सबसे अधिक 2018-19 के अभिलेख में तत्कालीन बीडीओ का हस्ताक्षर नहीं हैं. 

नव पदस्थापित बीडीओ ने किया मामले को उजागर :  मामला तब उजागर हुआ जब नव पदस्थापित बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने याेगदान दिया. दरअसल विभाग के निर्देश पर 15 सितंबर तक वित्तीय वर्ष 2018-19 के 724 प्रधानमंत्री आवास के लाभुकों को दूसरी किस्त का भुगतान करना था. इसी दौरान जब बीडीओ ने अभिलेख मंगाया तो कुछ एक अभिलेख छोड़कर अधिकांश में पुराने भुगतान का हस्ताक्षर नहीं देख उन्होंने सवाल उठाये. बीडीओ ने जब सहायक दयानंद वर्मा से इस बारे में पूछताछ की तो बताया गया कि अभिलेख में हस्ताक्षर के बाबत तत्कालीन बीडीओ निशा कुमारी सिंह बाद में हस्ताक्षर करने की बात कहती थी.

इस पर बीडीओ साकेत कुमार  सिन्हा ने सहायक को दो दिन के अंदर तत्कालीन बीडीओ से हस्ताक्षर करा लेने का समय दिया है, इसके बाद ही भुगतान करने की बात कही. हालांकि, 31 अगस्त 2018 को ही तत्कालीन बीडीओ निशा कुमारी सिंह का स्थानांतरण हो चुका है. अब मामला सामने आने के बाद नव पदस्थापित बीडीओ ने पुराने अभिलेखों में हस्ताक्षर के बाद ही नये अभिलेख में हस्ताक्षर करने की बात कही है.

इधर, डीडीसी ने मामला संज्ञान में लिया है. उन्होंने इसके सत्यापन के बाद जांच कर कार्रवाई की बात कही है.  प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुकों को भुगतान के बाद भी अभिलेख पर हस्ताक्षर नहीं होने से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रखंड में योजनाओं के भुगतान से लेकर अभिलेखों को दुरुस्त करने के मामले में पदाधिकारी कितने गंभीर हैं. 

किस्तों में ऐसे हुआ भुगतान

 वित्तीय वर्ष 2016-17 में स्वीकृत 778 आवास में से  तीन किस्त का प्रति आवास क्रमश: 24 हजार, 30 हजार व 48 हजार यानी 1.02 लाख करके कुल 7,93,5600 का भुगतान हो चुका है. वहीं वित्तीय वर्ष 2018-19 में स्वीकृत 1129 आवास में से  405 आवास के लाभुकों को द्वितीय किस्त यानी प्रथम किस्त 48 हजार व दूसरी किस्त 75 हजार तथा 724 आवास के लाभुकों को प्रथम किस्त के रूप में 48 हजार यानी लगभग 8, 44,44,000 रुपये का भुगतान हो गया है.

कहते हैं डीडीसी 

इस बारे में जानकारी नहीं मिली है. फिर भी पूरे मामले की सत्यता क्या है, इसका पता करायेंगे. आवश्यकता पड़ी तो जांच कर कार्रवाई की जायेगी.

सुशांत गौरव, डीडीसी, देवघर

15 सितंबर तक 724 आवास के दूसरी किस्त का होना था भुगतान

बीडीओ निशा कुमारी सिंह का आमड़ापाड़ा हुआ है स्थानांतरण

कुछ-एक अभिलेखों में ही तत्कालीन बीडीआे का है हस्ताक्षर

क्या है नियम 

नियमानुसार, हर योजना के अभिलेख में भुगतान से पहले बीडीओ का हस्ताक्षर अनिवार्य है. लेकिन, सारठ प्रखंड में तो नियमों के विपरीत कुछ एक अभिलेख को छाेड़कर भुगतान से संबंधित अधिकतर अभिलेख में तत्कालीन बीडीओ के हस्ताक्षर ही नहीं हैं.  

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SunnySeptember 20, 2018
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1min20

बोकारो : मात्र 12 रुपया के सालाना प्रीमियम व 330 रुपया के सालाना प्रीमियम पर दुर्घटना बीमा यानी प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाइ) व प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना (पीएमजेजेवाइ). 2015 में शुरू हुई योजना को प्रधानमंत्री के सामाजिक व आर्थिक नजरिये से देखा गया. जनधन खाता के जरिये लोगों को बैंकिंग से जोड़ने के बाद दोनों योजना को बीमा के लिहाज से खास माना गया. प्रचार-प्रसार भी किया गया, लेकिन बोकारो में इन दोनों योजनाओं का तिलिस्म टूट रहा है.

मतलब, लोग अब इस योजना के प्रति कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं. कम से कम आंकड़ा तो इसी ओर इशारा करता है. वित्तीय वर्ष 2017-18 की तुलना में 2018-19 में प्रीमियम जमा करने वालों की संख्या में कमी आयी है. वित्तीय वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में 171127 लोग प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में सालाना प्रीमियम जमा कर रहे थे. लेकिन 2018-19 वित्तीय वर्ष के पहली तिमाही में 160824 लोग ने योजना में प्रीमियम जमा किया.

यानी एक साल में 10303 लोगों ने योजना से दूरी बना ली. वहीं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना वित्तीय वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में 70160 लोगों ने प्रीमियम राशि जमा की थी. लेकिन, 2018-19 के पहले तिमाही में 60143 लोगों ने प्रीमियम जमा किया. इस योजना से 9747 लोगों ने दूरी बनायी. 

क्या लोगों के खाता में नहीं है पैसे : पीएमएसबीवाइ व पीएमजेजेवाइ का प्रीमियम ऑटो डेबिट होता है. मतलब तय तिथि पर लाभुक के खाता से प्रीमियम स्वत: जमा होता है. बोकारो में दोनों योजना में प्रीमियम जमा होने का दर कम हुआ है. इससे सवाल उठ रहा है कि क्या लोगों के खाता में पैसा नहीं है. या फिर लोगों ने योजना से दूरी बना ली. बताते चले कि लोगों को बैंकिंग से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की ओर से जनधन योजना लायी गयी.

चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही तक जिला में 685827 लोगों का खाता योजना के तहत खोला गया है. आज नहीं कल की चिंता : एक ओर जहां बोकारो जिला में बीमा योजना के प्रति लोगों का रूझान कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर पेंशन योजना के प्रति लोग आगे आये हैं. वित्तीय वर्ष 2017-18 के पहले तिमाही में 8154 लोग योजना के तहत प्रीमियम जमा कर रहे थे. वहीं चालू वित्तीय वर्ष में 18066 लोग प्रीमियम जमा कर रहे हैं. 

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SunnySeptember 19, 2018
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1min30

केंद्र सरकार ने जमीनी स्तर पर महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रही आंगनबाड़ी कर्मियों एवं आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी कर दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस बढ़ोतरी से करीब 17 लाख आंगनबाड़ी और करीब 10.22 लाख आशा कार्यकताओं को सीधे लाभ पहुंचेगा।

फैसले के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का मौजूदा मानदेय तीन हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 4500 रुपये प्रतिमाह किया गया है जबकि दूसरी श्रेणी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (मिनी एडब्ल्यूसी) को 2250 की बजाय 3500 और आंगनबाड़ी सहायिका को 1500 की बजाय अब 2250 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। 
इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों के बेहतर संचालन में कार्यप्रदर्शन के आधार 250 रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। यह बढ़ोतरी अक्तूबर से लागू होगी। अक्तूबर से लेकर मार्च 2020 तक इस बढ़ोत्तरी से सरकारी खजाने पर 10649 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। सरकार ने कहा है कि पैकेज की लाभार्थी के रूप में उन आशा कर्मियों और आशा सहायिकाओं को नामित किया जाएगा जो प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के नाम से भारत सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए सभी पात्रताएं पूरी करती हैं। 

आशा कार्यकर्ताओं को एक की जगह दो हजार रुपये मिलेंगे   

इसी प्रकार स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैनात आशा कार्यकर्ताओं के पैकेज में भी बढ़ोतरी की गई है। आंगनबाड़ी की तरह आशा कार्यकर्ता भी महिलाओं एवं बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल में जुटी हैं। कैबिनेट ने करीब 10.22 लाख आशा कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। उन्हें प्रतिमाह मिलने वाली राशि एक हजार से बढ़ाकर अब दो हजार रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। यह बढ़ोतरी भी एक अक्तूबर से लागू होगी। 2020 मार्च तक सरकार को कुल 1224 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।  

ये भी पढ़ें: गाय के नाम पर न हो लिंचिंग, कानून हाथ में लेने पर हो कार्रवाई- भागवत

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SunnySeptember 19, 2018
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गिरिडीह : जिले के नक्सल प्रभावित इलाके में रहने वाले लोगों के दिन बहुत जल्द बदलने वाले हैं. केंद्र सरकार की मदद से झारखण्ड सरकार ने सुदूरवर्ती इलाके में रहने वाले ग्रामीणों को स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जोहार प्रोजेक्ट के नाम से एक महत्वकांक्षी योजना की शुरुआत की है.

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पहले चरण में योजना की शुरुआत गांडेय, पीरटांड़, देवरी और तिसरी प्रखंड से की गई

बुधवार को समाहरणालय के सभाकक्ष में गिरिडीह उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा की अध्यक्षता में जोहार प्रोजेक्ट की शुरुआत की गयी. प्रोजेक्ट के पहले चरण की शुरुआत गांडेय, पीरटांड़, देवरी और तिसरी प्रखंड से की गयी है. जोहर प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीण विकास की योजनाएं क्रियान्वित की जाएंगी. इनमें चेकडैम, पौधरोपण, बकरी व मुर्गी शेड, सिंचाई नाला आदि का निर्माण किया जाएगा. निर्मित शेड में पशुपालन में भी विभाग मदद करेगा.



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ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाना योजना का उद्देश्‍य

जेएसपीएल के डीपीएम संजय गुप्ता ने बताया कि छोटे स्तर पर गांवों में ठोस कचरा निस्तारण की भी योजना है. इससे कंपोस्ट खाद बनाकर ग्रामीण अपनी आय बढ़ा सकेंगे. इस योजना को वित्तीय मदद के लिए भारत सरकार तैयार है. इसका मूल उद्देश्य ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाना है. इसमें स्थानीय लोगों को ही लगाया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी.

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SunnySeptember 19, 2018
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वित्त मंत्री अरुण जेटली अगले सप्ताह सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे. इसमें जनधन और अटल पेंशन योजना जैसी योजनाओं की भी समीक्षा हो सकती है. (PTI)

सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों, बैंक आॅफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय से बनाने वाला नया बैंक अगले वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2019 में काम करने लगेगा. सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है. इस विलय के बाद बनने वाला बैंक देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. उधर, वित्त मंत्री अरुण जेटली अगले सप्ताह सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे. इसमें बैंकों की वित्तीय हालात की समीक्षा के अलावा जनधन और अटल पेंशन योजना जैसी योजनाओं की भी समीक्षा हो सकती है.

तीनों बैंकों के बोर्ड की इसी माह बैठक

उन्होंने कहा कि तीनों बैंक विलय प्रक्रिया तय सीमा में निपटाएंगे और वित्त वर्ष 2018-19 के अंत तक सभी जरूरी नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है. 1 अप्रैल 2019 से नया बैंक चालू हो जाना चाहिए. उनके अनुसार तीनों बैंकों के बोर्ड की इसी माह बैठक होंगी जिसमें विलय की योजना बनाई जाएगी और शेयर अदला-बदली अनुपात और प्रमोटर्स की तरफ से कैपिटल की आवश्यकता समेत विभिन्न ब्योरे तय किए जाएंगे.

ये भी पढ़ें… मोदी सरकार की मर्जर स्ट्रैटजी से क्या सुधरेगी बैंकों की सेहत? 3 प्वाइंट में जानिए एक्सपर्ट की राय

SBI के सहयोगी बैंकों का हुआ था विलय

पिछले साल सरकार ने देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय किया था. इसके बाद स्टेट बैंक दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल हो गया. वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली ‘‘वैकल्पिक व्यवस्था’’ ने सोमवार को तीन बैंकों का विलय करने निर्णय लिया. इस फैसले से एक बड़ा बैंक अस्तित्व में आएगा जो कि मजबूत होगा और मजबूत होगा.

Govt Bank merger, Bank merger, BoB, Vijay and Dena bank merger, New Bank after merger, Finance Ministry, Arun Jaitley, Bank merger Updates पिछले साल मोदी सरकार ने देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय किया था. (Reuters)

सरकारी बैंकों के प्रमुखों से मिलेंगे जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली अगले सप्ताह सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे. यह बैठक सालाना वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा का हिस्सा है. सूत्रों ने कहा कि बैठक 25 सितंबर को होगी और इसमें एनपीए में कमी समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी.

यह बैठक ऐसे समय होगी जब सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों बैंक आफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय का निर्णय किया है. इसका मकसद वैश्विक आकार के बैंक बनाना है जो मजबूत और टिकाऊ हो.

अटल पेंशन, जनधन योजना की भी होगी समीक्षा

सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकारी बैंकों के सालाना प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी. इसके अलावा अटल पेंशन योजना, जनधन योजना समेत सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के साथ कर्ज में वृद्धि भी चर्चा होगी.

ये भी पढ़ें… देना बैंक, विजया बैंक और BOB का होगा विलय, बनेगा देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक

सरकारी बैंकों को हुआ 87357 करोड़ रुपये का घाटा

सरकारी बैंकों को 2017-18 में 87,357 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों में इंडियन बैंक और विजया बैंकों को छोड़कर सभी बैंकों को घाटा हुआ. इंडियन बैंक को 2017-18 में 1,258.99 करोड़ रुपये का लाभ हुआ. वहीं विजया बैंक को 727.02 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ.

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