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Financial Plan Archives - Sunnywebmoney.com

SunnyMay 24, 2018
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झरिया : गैस सिलेंडर मिलने से महिलाओं के खिले चेहरे, उज्ज्वला योजना से दिया गया लाभ

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24 May, 2018 5:44 PM

झरिया (धनबाद)। प्रधानमंत्री के धनबाद आगमन से पहले एजेंसियां लगातार उज्‍ज्‍वला योजना के तहत गैस वितरण करने में लगी है। आज झरिया के भागा स्थित विनोद गैस एजेंसी ने उज्‍ज्‍वला योजना के अंतर्गत 200 गरीब महिलाओं को गैस वितरण किया गया।

पार्षद सुजीत कुमार सिंह ने महिलाओं को अपने हांथों से सि‍लेंडर और चूल्हा दिया। महिलाएं मुफ्त में गैस मिलने से काफी खुश थीं।

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इस दौरान पार्षद ने कहा कि‍ अब महिलाओं को चूल्हा के धुआं, कोयला और गोयठा से निजात मिलेगा। जो स्वास्‍थ्‍य के लिए भी अच्छा होगा।

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सिमडेगा : थाना प्रभारी ने सीमा को  पढाई के लिए दी आर्थिक मदद

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24 May, 2018 10:03 PM

सिमडेगा : थाना प्रभारी ने सीमा को  पढाई के लिए दी आर्थिक मदद

सिमडेगा। प्रखंड के कोनसोदे निवासी स्व मंगरा महतो की बेटी सीमा महतो को आगे की पढ़ाई के लिए थाना प्रभारी महेंद्र दास ने पांच हजार रूपए की आर्थिक मदद की है। मालुम हो कि सीमा महतो अनाथ है। उसके माता-पिता का निधन कुछ वर्ष पूर्व हो गया।

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उसने बांकी में मौसी के यहां रह कर मैट्रीक की पढ़ाई की। लेकिन आगे की पढ़ाई में गरीबी बाधक बन रहा है। सीमा ने आगे पढ़ाई के लिये थाना प्रभारी से मदद की गुहार लगायी। इसके बाद थाना प्रभारी महेंद्र दास ने बच्ची को पढ़ाई के लिये पांच हजार आर्थिक सहयोग किया।

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सरायकेला : छोटे-छोटे समूहों के माध्यम से महिलाएं हो रही स्वावलम्बी- महाली

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24 May, 2018 8:14 PM

सरायकेला : छोटे-छोटे समूहों के माध्यम से महिलाएं हो रही स्वावलम्बी- महाली

सरायकेला। प्रखंड के भंडारी साईं गांव में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आजीविका महिला ग्राम संगठन समूह के कार्यालय उद्घाटन भाजपा नेता गणेश महाली ने किया। इससे पहले संगठन की महिलाओं ने पारंपरि‍क रीति-रिवाज के साथ भाजपा नेता का स्वागत किया।

अपने संबोधन में गणेश महाली ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें व्यापार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए उद्यमी सखी मंडल योजना की शुरू की है। इस योजना में महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की गई है जो राज्य में अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने में रुचि रखती हैं।

झारखंड राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को इस योजना के तहत लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा सरकार का उद्देश्य महिलाओं की वित्तीय स्थिति उनके व्यापार को स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके मजबूत करना है। असल में इस योजना में 15 महिलाओं का एक समूह अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकता है।

महिलाएं देश की आधी आबादी का हिस्सा है, जो देश भर में बड़ी संख्या में महिलाएं बेरोजगार हैं। कार्यस्थलों में महिलाओं के लिए असमान अवसरों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था का बहुत नुकसान हुआ है। महिला सशक्तिकरण का मुख्य लाभ यह है कि समाज का एक समग्र विकास होगा। महिलाओं द्वारा कमाया गया धन ही न केवल उनकी जिंदगी आसान या उनके परिवार के विकास में मदद करता है, बल्कि यह समाज को विकसित करने में भी मदद करता है।

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इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्व-मूल्य, सम्मान और गरिमा की भावना के साथ स्वतंत्र रूप से अपने जीवन जीने के लिए और सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के लिए समान अधिकार प्रदान करना है।

उद्घाटन कार्यकम में समिति अध्यक्ष जिगी कुई, सचिव सुनिता महतो, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी महतो, कलस्टर जीत मनी टूडू, भाजपा प्रखंड उपाध्यक्ष मनोज महतो, OBC मोर्चा के प्रखंड अध्यक्ष राजा राम महतो, उप मुखिया मंगल नायक, ग्राम प्रधान दिलीप महतो, अभिषेक आचार्य, कृति भूषण प्रमाणिक, प्रकाश महतो, वकील वारीक, विकास स्वाई सहित काफी संख्या में महिला समूह के सदस्य उपस्थित थे।

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टुंडी : तालाब का होगा जीर्णोद्धार, किसानों को मिलेगा लाभ

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24 May, 2018 7:31 PM

टुंडी : तालाब का होगा जीर्णोद्धार, किसानों को मिलेगा लाभ

सांसद प्रतिनिधि रामप्रसाद महतो ने किया शिलान्यास

टुंडी (धनबाद)। पूर्वी टुंडी प्रखंड रघुनाथपुर पंचायत अन्तर्गत बलारडीह सैर तालाब एवं दलुडीह पंचायत अंतर्गत चुंगी गांव में तालाब का जीर्णोद्धार होगा। सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय की अनुशंसा पर भूमि संरक्षण विभाग की ओर से किया गया है। तालाब जीर्णोद्धार का शिलान्यास जिला सांसद प्रतिनिधि रामप्रसाद महतो ने नारियल फोड़ कर किया।

महतो ने बताया कि दो वर्ष पूर्व क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने तालाब जीर्णोद्धार की बात कही थी। जिसपर मैंने तालाब का भी मुआयना किया था और पाया की तालाब के जीर्णोद्धार होने से इसके आसपास के खेत सिंचाई से खेती बढ़ेगी। ग्रामीणों की मांग को पूरा करते हुए जीर्णोद्धार का शुरू किया जा रहा है।

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इन्होंने ग्रामीणों को हर समय मदद करने का आश्वासन दिया। साथ ही 25 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया।

मौके पर सांसद प्रतिनिधि नीलकंठ रवानी बाबुलाल महतो, आजसू जिला संगठन सचिव विशेष कुमार गुप्ता, जितेन्द्र चौधरी, गणेश कुमार रवानी, संजय चौधरी, शुकदेव राय, नरेश पंडित, विनोद मंडल, दुर्गा मुंडा, किशोर कुम्हार, पिन्टु पंडित सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

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    SunnyMay 23, 2018
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    SunnyMay 23, 2018
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    Publish Date:Wed, 23 May 2018 05:58 PM (IST)

    मेदिनीनगर : जिले में 24 मई से सात जून तक आयोजित किए जाने वाले जल संचयन पखवारा का आरंभ नक्सल प्रभावित हुसैनाबाद के महुदंड से शुरू किया जाएगा। इस जिला स्तरीय जल संचयन दिवस कार्यक्रम में स्थानीय सांसद, क्षेत्रीय विधायक, जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, स्थानीय प्रमुख व मुखिया की उपस्थिति में चार तालाब खुदाई का काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही पखवारे के पहले दिन ही पाटन, लेस्लीगंज, पीपरा व हरिहरगंज में जल संचयन दिवस के अवसर पर स्थानीय जन प्रतिनिधियों के नेतृत्व में तालाब खुदाई का कार्य आरंभ किया जाएगा।

    यह जानकारी डीपीआरओ डीएन भादुड़ी ने बुधवार को दी है। बताया कि जिला कृषि व ¨सचाई योजना के तहत गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में के सिद्धांत पर आगामी पांच वर्षों के लिए कार्य योजना तैयार कर ली गई है।

    इस पर करीब 691.09 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस पंच वर्षीय कार्य योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में 11320 लाख, वित्तीय वर्ष 2019-20 में 12452 लाख, वित्तीय वर्ष 2020-21 में 13657.20 लाख, वित्तीय वर्ष 2021-22 में 15066.90 लाख तथा वर्ष 2022-23 में 16573.612 लाख रुपये खर्च कर सिंचाई, संसाधनों को विकसित किया जाएगा। इसी तरह जल संचयन पखवारा में मनरेगा से करीब चार हजार डोभा व मध्यम तालाब के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, भूमि संरक्षण विभाग 165 सरकारी व निजी तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य करेगी। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जल छाजन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 222225.3 हेक्टेयर क्षेत्र में 270 नए तालाब के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित है।

    जिले के उपायुक्त अमीत कुमार ने इस कार्य में जिलेवासियों से सहयोग की अपील की है। इसमें बूंद-बूंद अनमोल, जल बचाओ व जीवन बचाओ के संदेश के साथ पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बताया गया कि प्रत्येक प्रखंड में हैंडपंप की मरम्मत हेतु मरम्मत दल का गठन किया गया हैं।

    आम जनता पेय जल से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए टाल फ्री नंबर 18003456506 पर शिकायत व सुझाव दर्ज कर सकते हैं।

    By Jagran

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    SunnyMay 23, 2018
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    3min00


    प्रधानमंत्री के पद पर नरेन्द्र मोदी 24 मई 2018 को अपने चार साल पूरे कर लेंगे. इस दरम्यान मोदी सरकार ने आर्थिक नीतियों के मोर्चे पर कई फैसले लिए हैं जिनमें 9 बहुत अहम हैं.

    इन फैसलों का रिश्ता वित्त-व्यवस्था को समावेशी बनाते हुए उसमें अधिक से अधिक लोगों को शामिल करने से है तो कालेधन की पहचान और उस पर चोट करने से लेकर कारपोरेट में दिवालियापन जैसे हालात से निपटने से भी. बीते 48 महीनों में मोदी सरकार के ये फैसले लगातार सार्वजनिक बहस-मुबाहिसों में छाये रहे हैं. इनमें से कुछ नीतियां पुराने विचारों का ही विस्तार हैं यानि पहले से जारी काम को आगे और गति दी गई है.

    यहां मिसाल के तौर पर आधार और जीएसटी(सेवा एवं वस्तु कर) का नाम लिया जा सकता है जबकि नोटबंदी(डिमोनेटाइजेशन) तथा इन्‍सॉलवेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड(दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता) जैसे फैसले नये विचारों का नीतिगत रूप हैं.

    जीएसटी सरीखे कुछ मामलों में सरकार को संसद, राज्यों तथा मीडिया का सहयोग मिला जबकि कुछ अन्य फैसलों जैसे कि नोटबंदी में ऐसी मदद ना मिली. अच्छी हो या बुरी लेकिन ये नीतियां (2014, 2015 और 2017 में एक-एक तथा 2016 में छह) मोदी सरकार की आर्थिक सोच को परिभाषित करती हैं. इन नीतियों की बिनाह पर हम जानते हैं कि मोदी अगर 2019 में सत्ता में लौटे तो उनकी सरकार में नई नीतियां किस बुनियाद पर बनेंगी. अगर वे सत्ता में नहीं लौटते तब भी जो सरकार बनेगी उसे ये नीतियां जारी रखनी होंगी जैसे कि मोदी सरकार ने आधार और मनरेगा को जारी रखा और मजबूत बनाया. इस लेख में आगे मोदी सरकार की इन नौ नीतियों का मूल्यांकन किया गया है.

    प्रधानमंत्री जन-धन योजना

    प्रधानमंत्री पद पर बैठने के तीन माह के अंदर नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत की. यह शुरुआत चमकदार वित्तीय ब्यौरों और राजनीतिक नारों के बीच हुई थी. योजना लोगों को देश के शीर्ष स्तर से वित्तीय-धारा में शामिल करने की थी. जो देशवासी बैंक में खाता नहीं खोल सके हैं, उन्हें जनधन योजना ने बैंक अकाउंट खोलने का मौका दिया. ऐसे लोगों को डेबिट कार्ड मिला तथा बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का मौका भी.

    JAN DHAN YOJNA

    जहां तक संख्या का सवाल है, इस योजना के जरिए जिस तादाद में भारतीयों का वित्तीय-धारा में प्रवेश हुआ उतना इससे पहले कभी नहीं हुआ था. साल 2018 की 17 जनवरी तक जनधन योजना के लाभार्थियों की संख्या तकरीबन 31 करोड़ हो चुकी थी. इसमें 60 फीसद लाभार्थी ग्रामीण इलाकों के हैं और योजना के तहत कुल जमाराशि है 73,690 करोड़ रुपये. हिसाब लगायें तो जनधन योजना के तहत खुले हर खाते पर औसतन 2377 रुपये की जमा राशि आती है, हालांकि न्यूनतम जमाराशि की कोई शर्त नहीं रखी गई है.

    इससे संकेत मिलता है कि बिना बैंक खाते वाले भारतीयों को वित्तीय-तंत्र में औपचारिक रूप से शामिल करने की दिशा में कदम उठाया जा चुका है. आलोचकों ने सुरक्षा और निजता के सवाल उठाये हैं और योजना के आगे बढ़ने के साथ ये समस्याएं खुद ही खत्म हो जायेंगी. बहरहाल, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जनधन योजना से जुड़ने के कारण गरीबों को वित्तीय-तंत्र का फायदा हुआ है.

    मध्यस्थता एवं सुलह(संशोधन) विधेयक (आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन एमेंडमेंट एक्ट)

    मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले नौ महीने की अवधि में संसद में आर्बिटरेशन एंड कंसिलिएशन(एमेंटमेंट) एक्ट(एसीएए) पारित करवाया. इस कानून का मकसद व्यावसायिक विवाद के मसलों को तेजी से सुलझाने की व्यवस्था कायम करना था.

    यों इस कानून का बुनियादी ढांचा तो 1899 से ही चला आ रहा है. उस वक्त इसे इंडियन आर्बिट्रेशन एक्ट के नाम से जाना जाता था. देश की आजादी के बाद इस कानून पर अमल और इसे देश की स्थितियों के अनुकूल ढालने की कोशिशों का इतिहास भी बहुत लंबा है. एसीएए के जरिए विधायी और कानूनी बाधाओं को दूर करने की कोशिश की गई है. मिसाल के लिए आर्बिट्रेशन के मसले पर कायम जस्टिस सर्राफ समिति ने लिखा है कि व्यावसायिक विवाद से संबंधित मसलों में मध्यस्थता के दौरान, उससे पहले और उसके बाद की स्थितियों में भी अदालतें फैसले को लंबी देरी तक टाले रहती हैं.

    नये कानून ने हितों की टकराव की स्थिति को ज्यादा सहज बनाया है और मध्यस्थ के जरिए खुलासे की व्यवस्था दी गई है.

    कानून का सबसे अहम पहलू है कि अब व्यावसायिक विवाद में मध्यस्थता और सुलह के जरिए समाधान 12 महीनों के भीतर कर लेना अनिवार्य है. कानून का मूल मकसद भी यही है कि व्यावसायिक विवादों में समाधान की राह तेजी से अपनायी जाय.

    हाइड्रोकॉर्बन के अन्वेषण और लाइसेंसिंग की नीति

    मोदी सरकार ने अपने शासन के 23वें महीने में ऊर्जा क्षेत्र की निजी कंपनियों और सरकार के बीच चली आ रही बाधाओं को दूर करने के प्रयास किए. इसके लिए हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग(हेल्प) नीति लायी गई और 19 साल पुराने नेल्प(न्यू एक्सप्लोरेशन लाइसेंसिंग पॉलिसी) को खत्म किया गया.
    जहां तक ‘हेल्प’ के क्रियान्वयन का सवाल है, इसमें प्रस्तावित वित्तीय मॉडल में लाभ में हिस्सेदारी की उस व्यवस्था को बदला गया है जो नेल्प के लागू रहते अमल में थी. निजी कंपनियों को तेल और गैस के फील्ड नीलामी पर देने के नियमों में सुधार किया गया है. पुराने नियमों के कारण सरकार और निजी कंपनियों के बीच कारोबारी बाधाएं आ रही थीं.

    नियम में सुधार से कंपनियों को छोटे-मोटे खर्चों में छूट हासिल होगी और उन्हें प्रशासनिक मामलों में भी एक हद तक फैसले लेने में सहूलियत होगी. नई नीति में तेल और गैस के खोज और उत्पादन के सिलसिले में हर तरह के हाइड्रोकार्बन जैसे कोल बेड मीथेन, शेल गैस तथा तेल, टाइट गैस तथा गैस हाइड्रेट आदि में एक समान लाइसेंसिंग की व्यवस्था है. नेल्प के लागू रहते हाइड्रोकार्बन की अलग-अलग किस्मों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की व्यवस्था थी. अक्सर होता ये था कि कंपनी खोजने किसी और हाइड्रोकॉर्बन को चली है लेकिन अपनी खोज में हासिल हुआ कोई और हाइड्रोकॉर्बन.

    ऐसे में कंपनी को नये सिरे से लाइसेंस लेना होता था. नये नियम में प्राकृतिक गैस के सिलसिले में कंपनियों को मार्केटिंग और मूल्य-निर्धारण के मामले में पहले की तुलना में ज्यादा सहूलियत दी गई है. बहरहाल, अभी यह साबित होना शेष है कि नेल्प की तुलना मे हेल्प कारगर हो पाता है या नहीं.

    आधार

    यूपीए सरकार ने साल 2009 की जनवरी में लोगों के पहचान के सत्यापन की एक युक्ति के रूप में ‘आधार’ की शुरुआत की थी. मोदी सरकार ने अपने शासन के 23 वें महीने में 26 मार्च 2016 को आधार को मजबूत बनाने के प्रयास किए और उसे संस्थागत रूप दिया. लोगों के सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए बात उनके बीच पेंशन बांटने की हो या फिर मजदूरी का भुगतान करने की, बहुत जरूरी है कि जो राशि जिसके हिस्से और अधिकार की है वह उसी को मिले. लोगों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं फराहम करने के वादे से भी चुनाव जीते जाते हैं.

    Aadhaar-CARD

    ‘आधार’ योजना यों तो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण( यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया- यूआईडीएआई) के तहत चल रही थी लेकिन यूआईडीएआई को कोई संवैधानिक सहारा हासिल नहीं था. नतीजतन मोदी सरकार ने ऐसा प्रस्ताव पेश किया और संसद ने वित्तीय अनुदान तथा अन्य लाभ और सेवाओं को मुहैया कराने के सिलसिले में आधार (टारगेटेड डिलवरी ऑफ फायनेन्शियल एंड अदर सब्सिडिज, बेनिफिटस् एंड सर्विसेज) एक्ट पारित किया. आज आधार देश में सबसे विश्सनीय पहचान-संख्या का पर्याय बन चुका है. इसका इस्तेमाल टैक्स भरने से लेकर म्यूचुअल फंड जैसे फायनेंशियल प्रॉडक्ट खरीदने तक में हो रहा है.

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली(पीडीएस), रोजगार गारंटी योजना, गरीबों को नकदी फराहम करने जैसे सामाजिक कल्याण की योजनाओं तथा बैंक खाते खोलने में इसका इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि आधार के ऐसे उपयोग को कई अदालत में चुनौती दी गई है और यह कहते हुए आपत्ति उठायी गई है कि राज्यसत्ता नागरिकों के अंगुलियों की छाप तथा आंख की पुतलियों के निशान जैसी अत्यंत निजी निशानियां एकत्र कर रही है.

    एक ना एक रास्ते ऐसी आपत्तियों का समाधान निकल ही जायेगा लेकिन ध्यान रखने की बात ये है सॉफ्ट पावर एक्सपोर्ट के लिहाज से आधार में बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं.

    इन्‍सॉलवेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड

    बीते 18 मई 2018 को टाटा स्टील की साथी इकाई बमनीपाल स्टील ने 35200 करोड़ रुपये में भूषण स्टील का 72.65 फीसद मालिकाना खरीद लिया. भूषण स्टील बंद होने के कगार पर था. इस समाचार की अहमियत कर्नाटक चुनाव के हल्ले में दबकर रह गई लेकिन इन्‍सॉलवेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड के तहत यह दिवालियेपन की कगार पर पहुंची एक कंपनी को उबारने का पहला प्रयास है. यह एक नया कानून है जिसे मोदी सरकार अपने शासन के 24वें महीने में लेकर आयी, संसद ने इस कानून को मंजूरी दी.

    कॉरपोरेट में जगत में अगर इन्सॉल्वेंसी (ऋण शोधन की अक्षमता) की समस्या पैदा होती है तो उसका समाधान जल्दी से हो सके- नये कानून का यही प्राथमिक लक्ष्य है. भूषण स्टील के अधिग्रहण के मामला संकेत करता है कि नया कानून क्रोनी कैपिटलिज्म को खत्म करने की दिशा मे बड़ा कदम साबित होगा.

    विश्वबैंक के मुताबिक साल 2016 में ऋण शोधन की अक्षमता के मामले को निपटारे का वैश्विक औसत 2.5 साल था. इसके बरक्स जापान के लिए यह आंकड़ा 0.6 साल, सिंगापुर और कनाडा के लिए 0.8 साल, अमेरिका के लिए 1.5 साल और चीन के लिए 1.7 वर्ष है. भारत के लिए यह आंकड़ा 4.3 साल का है. नये कानून में कारोबारी जगत की इकाइयों, व्यक्तियों और साझेदारी की फर्मों के ऋण अशोधन तथा पुनर्योजन के नियमों को संशोधित किया गया है और उन्हें साफ-सुथरा बनाते हुए ज्यादा एकीकृत रूप दिया गया है.

    मकसद ऋण अशोधन की समस्या का निश्चित समय सीमा के भीतर क्रमवार समाधान करना है ताकि ऐसे व्यक्तियों, फर्मों तथा इकाइयों की संपदा का मोल यथासंभव अधिकतम रहे, उद्यमशीलता (आंत्रेप्रेन्योरशिप) को बढ़ावा मिले, ऋण मुहैया कराया जा सके तथा मामले से जुड़े तमाम पक्षों के हितों में संतुलन में कायम हो. नया कानून संसद के 10 अधिनियमों के संशोधन के बाद बना है. इसके तहत इन्‍सॉलवेंसी एंड बैंकरप्‍सी बोर्ड का गठन किया गया है. बोर्ड को ऋण अशोधन की समस्या से संबंधित एजेंसियों, पेशेवर व्यक्तियों तथा सूचना फराहम करने वाले सहायता-केंद्रों की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है. बोर्ड को ही इस नये कानून को अमल में लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

    एक पंक्ति में कहें तो अब इस नये कानून के सहारे व्यवसाय के नाकाम होने की सूरत में उससे निकलना आसान हो गया है.

    बेनामी लेन-देन (निषेध) संशोधन अधिनियम

    मोदी सरकार ने अपने शासन के 31 वें महीने में जमीन-जायदाद से जुड़े कालेधन की समस्या के समाधान के लिए कदम उठाते हुए एक कानून को सख्त बनाया. यह कानून बेनामी संपत्ति के लेन-देन को रोकने से जुड़ा है. भारत में बेनामी संपत्ति की समस्या लंबे समय से चली आ रही है. इसमें कोई व्यक्ति अपने कालेधन(वह रकम जिसपर टैक्स अदा नहीं किया गया) से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर संपदा खरीद लेता है और खुद ही उस संपदा पर नियंत्रण रखता है.

    साल 1988 का बेनामी प्रापर्टी ट्रांजैक्शन एक्ट कमजोर था. इसमें अदालतों को कोई विशेष शक्ति नहीं दी गई थी. जब्त संपदा की सुपुर्दगी से संबंधित कोई विशेष प्रावधान नहीं थे. वाद से संबंधित अपील का कोई ढांचा भी नहीं बताया गया था. नया कानून यानि बेनामी लेन-देन (निषेध) संशोधन अधिनियम 1 नवंबर 2016 से लागू है. इसमें अधिकारियों को बेनामी संपदा के जब्ती के अधिकार दिए गए हैं. दोषी पाये जाने पर 1 साल से लेकर 7 साल तक की जेल का प्रावधान है. साथ ही जुर्माने की व्यवस्था दी गई है. जुर्माना संपदा के बाजार-मूल्य के 25 फीसद तक हो सकता है.

    कानून के अमल में आने के छह माह के भीतर अधिकारियों ने बेनामी संपदा के लेन-देन के 400 मामले पकड़े. इसमें बैंकों में जमाराशि, जमीन का प्लॉट, फ्लैट तथा आभूषण आदि के मामले शामिल हैं.

    नोटबंदी

    demonetisation

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    मोदी सरकार ने अपने शासन के 31वें महीने में एक फैसला लिया जो बहुत विवादास्पद साबित हुआ. इसका बहुत आलोचना हुई और फैसले को बाधक करार दिया गया. यह नोटबंदी(विमुद्रीकरण) का फैसला था. साल 2016 के 8 नवबंर को मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि आधी रात के बाद से 500 तथा 1000 रुपये के नोट वैधानिक रुप से चलन में नहीं रहेंगे.

    सत्ता के शीर्ष पर होने वाले भ्रष्टाचार तथा देश में व्याप्त कालेधन की समस्या से नोटबंदी की फैसले को जोड़ते हुए मोदी ने इसे राष्ट्रविरोधी तथा समाज-विरोधी तत्वों के खिलाफ सियासी लड़ाई का अभियान बताया.

    नोटबंदी का एक मकसद जाली नोटों तथा सीमा पार से आतंकवादियों को होने वाली फंडिंग पर अंकुश लगाना भी था. नोटबंदी के फैसले के बाद ऐसी बहुत सी खबरें आयीं जिनमें कहा गया कि लोगों और छोटे व्यापारियों को परेशानी हो रही है. यह भी कहा गया कि 98.96 फीसद नोट फिर से बैकिंग-व्यवस्था में लौट आये हैं. नोटबंदी के कारण लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी लेकिन वित्तमंत्री ने ऐसी खबरों को ‘किस्सागोई’ करार दिया.

    नोटबंदी के कारण रियल इस्टेट के कारोबार को चोट पहुंची क्योंकि मांग घट गई थी, आपूर्ति का पूरा तंत्र प्रभावित हुआ और लोगों के मन में बाजार को लेकर अनिश्चितता बढ़ी. स्टॉक मार्केट के क्षेत्रवार संकेतक जैसे रियलटी, फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स तथा ऑटोमोबाइल में गिरावट के संकेत थे क्योंकि स्टॉक मार्केट नकदी की उपलब्धता को लेकर बहुत संवेदनशील होता है. अर्थजगत का अनौपचारिक क्षेत्र नकदी के दम पर चलता है और इसे भी चोट पहुंची. लोगों को बेशक परेशानियां हुईं लेकिन कालाधन आखिरकार बैंकिंग प्रणाली में लौटा और उसकी पहचान की जा सकी. कालेधन की पहचान की यह प्रक्रिया अब भी जारी है.

    रियल इस्टेट के नियमन और विकास का अधिनियम (रेरा)

    मोदी सरकार ने 31 वें महीने में एक और अहम फैसला लिया. रियल इस्टेट के नियमन और विकास से संबंधित अधिनियम लागू हुआ. रियल इस्टेट के क्षेत्र के लिहाज से भारत में नीति-निर्माण की हालत बड़ी विरोधाभासी और विडंबना भरी रही है.

    एक तरफ यह दिखता है लोगों को आवास जैसी बुनियादी जरूरत की किल्लत झेलनी पड़ रही है और ऐसे विकसित इलाकों की कमी है जहां आवासीय परियोजनाएं खड़ी की जा सकें तो दूसरी तरफ यह भी नजर आता है कि बनावटी तरीके से जमीन और आवास की कीमतें बढ़ायी जा रही हैं. इस क्षेत्र में कालेधन से होने वाले लेन-देन का बोलबाला है और रियल इस्टेट का पूरा कारोबारी माहौल कारपोरेट, सरकारी अधिकारी तथा निजी व्यक्तियों के सांठगांठ से होने वाले भ्रष्टाचार से भरा पड़ा है. ऐसे में आम नागरिक उन्हीं ताकतों की दया पर निर्भर रह जाता है जो बाजार का मनमाने तरीके से दोहन करते हैं. दशकों से यह जरुरत महसूस की जा रही थी कि रियल इस्टेट जैसे जटिल कारोबारी क्षेत्र पर नजर रखने के लिए कोई ना कोई नियामक संस्था होनी चाहिए.

    मसले से जुड़ा एक पेंच यह भी है कि जमीन और उससे जुड़ा विकास राज्यों के अधीन आता है जबकि उपभोक्ता किसी एक राज्य से बंधा हुआ नहीं है, वह प्रवास पर होता है और उसका एक जगह से दूसरी जगह आना-जाना तथा रहना-बसना लगा रहता है. नये कानून में इसी समस्या के समाधान को ध्यान में रखते हुए एक रेग्युलेटर(विनियामक) की व्यवस्था की गई है ताकि इस संस्था के जरिए रियल इस्टेट के कारोबारी जगत पर निगरानी रखी जा सके और उपभोक्ता के हितों की रक्षा की जा सके.

    इसके लिए विवादों के समाधान के तंत्र तथा अपीलीय ट्राइब्यूनल का भी इंतजाम किया गया है. दुर्भाग्य कहिए कि इस कानून को अमल में लाने का जिम्मा राज्यों सरकारों का है और हालांकि ज्यादातर राज्यों ने कानून पर अमल की अधिसूचना जारी कर दी है लेकिन उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को लेकर कदम बढ़ाने में उनकी हिचक कायम है. अगर इस कानून के अमल के बारे में ठीक से नहीं सोचा जाता तो फिर रियल इस्टेट के नियमन और विकास का अधिनियम(रेरा) मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामयाबी साबित हो सकता है.

    वस्तु एवं सेवाकर(जीएसटी)

    सार्वजनिक वित्त-व्यवस्था पर असर तथा कर-चोरी को रोकने के लिहाज से मोदी सरकार का सबसे बड़ा फैसला जीएसटी लागू करने का रहा है. यह आजाद भारत के इतिहास में अबतक का सबसे ज्यादा जटिल कानून भी है. मोदी सरकार ने अपने शासन के 39वें महीने में जीएसटी लागू करने का फैसला किया.
    इसके लिए सहायक तैयारी संविधान के 101 वें संशोधन को लागू करके की जा चुकी थी. इसके बाद संसद ने चार केंद्रीय कानूनों की कारअमली को मंजूरी दी. इसके अतिरिक्त सभी 29 राज्यों ने अपने विधानसभा में इस सिलसिले में सहायक साबित होने वाले कानूनों को मंजूरी दी. देश के सात संघशासित प्रदेशों के लिए अधिसूचना केंद्र सरकार की तरफ से जारी हुई.

    Launch of GST

    जीएसटी के जरिए केंद्र स्तर के आठ टैक्स तथा राज्य स्तर पर लागू होने वाले 9 तरह के टैक्स को समाप्त किया गया. बहरहाल, ऐसी व्यवस्था के दायरे से पेट्रोलियम उत्पाद तथा शराब को बाहर रखा गया है. दुनिया के 140 देशों में प्रचलित अप्रत्यक्ष करों की तर्ज पर मोदी सरकार ने भारत में सबसे बड़े नीतिगत सुधार का काम पूरा कर दिखाया है. जीएसटी की कहानी तकरीबन तीन दशक पहले 1985 में शुरु हुई थी. ढांचागत सुधार का काम पूरा कर लिया गया है. बाकी छिटपुट संशोधन और सुधार चलते रहेंगे.

    जीएसटी के क्रियान्वयन को लेकर आलोचना भी हुई. तर्क दिया गया कि छोटे उद्यमियों को टैक्स विवरण भरने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन यह शुरुआत दौर की बात थी. इस परेशानी से बचा जा सकता था. नौकरशाही के कारण यह परेशानी पेश आयी और ऐसे नुक्तों पर समय रहते सोचा जाना चाहिए था.

    (यह आलेख मूल रूप से ओआरएफ में प्रकाशित हुआ. फर्स्टपोस्ट हिन्दी ने यहां ओआरएफ की अनुमति से लेख को छापा है.)

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    SunnyMay 23, 2018
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    2min00


    नर्इ दिल्ली। इस माह के अंत में यानी 30 आैर 31 तारीख को देश के कर्इ बड़े बैंकों में हड़ताल रहेगा। एेसे में आपके लिए जरूरी है कि इससे पहले अाप बैंक से जुड़े सभी काम निपटा लें। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआर्इ के अनुसार, 30-31 मर्इ को बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर होंगे आैर इससे बैंकों का कामकजा प्रभावित होगा। दरअसल बैंक यूनियन कर्इ मांगों को लेकर अपने प्रबंधन पर दबाव बना रहे हैं। इस बार बैंक कर्मचारियों के वेतन में केवल 2 फीसदी का ही इजाफा किया गया है, जिसके बाद बैंक कर्मचारी नाखुश हैं। इंडियन बैंक एसोसिएशन(आर्इबीए) ने बैंकों काे सूचित किया है कि यूनाइटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) ने 30-31 मर्इ को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने के लिए नोटिस दिया है। यूबीएफयू बैंक कर्मचारियों के यूनियन की समग्र बाॅडी है। इसमें बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कर्इ संगठन शामिल हैं।

    बैंक के कामकाज पर पड़ सकताहै असर

    बैंक आॅफ बड़ौदा, केनरा बैंक आैर पंजाब सिंध बैंक जैसे कर्इ बड़ें बैंकों का कहना है कि हड़ताल से बैंकों की सेवा आैर कामकाज पर भी असर पड़ेगा। पंजाब एंड सिंध बैंक ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि तय तारीख को यदि हड़ताल होता है तो बैंक के कर्इ कर्मचारी इसमें शामिल होंगे। एेसे में बैंक का सामान्य कामकाज भी प्रभावित होगा। इसके पहले भी यूबीएफयू ने 16 मर्इ को ही बैंक हड़ताल को लेकर आर्इबीए को चेतावनी दी था। अब संगठन वित्तीय योजना विभाग को भी एक ज्ञापन देने की योजना बना रहा है।

    हड़ताल को टालने की कोशिश में लगे बैंक

    बैंक कर्मचारी आैर आधिकारियों के हड़ताल को टालने के लिए बैंक प्रबंधन अब सक्रिय होते हुए दिखार्इ दे रहे हैं। यूनियन बैंक आॅफ इंडिया ने तो अपने कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि हड़ताल में शामिल होने पर उनकी नौकरी तक जा सकती है। हालांकि नेशनल आॅर्गेनाइजेशन आॅफ बैंक यूनियन (NOBW) ने बैंक प्रबंधन की इस चेतावनी की कड़ी निंदा की है।

    धमकी के बाद नए कर्मचारी कर सकते हैं हड़ताल से किनारा

    NOBW का कहना है कि बैंक हड़ताल पहले भी होते रहे हैं लेकिन एेसा पहली बार हो रहा कि केन्द्रीय कार्यालय से सर्कुलर जारी कर कर्मचारियों काे चेतावनी दी जा रही है। बैंक के इस चेतावनी के बाद पुराने कर्मचारियों को तो कोर्इ डर नहीं लेकिन नए कर्मचारी खुद को हड़ताल से अलग रख सकते हैं। एेसे में बैंक प्रबंधन को कर्मचारियों में डर पैदा करने के बजाय उन्हें सम्मानजनक वेतन बढ़ोतरी करना चाहिए।

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    SunnyMay 22, 2018
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    1min00


    Publish Date:Tue, 22 May 2018 07:18 PM (IST)

    कोडरमा: जिला स्तर पर 916 करोड़ की बैं¨कग योजनाएं तैयार कर ली गई है। योजनाओं का लाभ आम आवाम को मिल सके, इसके लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष विभिन्न योजनाओं में बैंकों की भूमिका असंतोषजनक रही है। लिहाजा इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के अनुसार कार्य हो सके इसके लिए मंगलवार को जिला स्तरीय बैंकर्स समिति की विशेष बैठक की गई।

    बैठक में डीसी भुवनेश प्रताप ¨सह ने योजनाओं की समीक्षा कर चालू वित्तीय वर्ष के तिमाही से लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कार्य करने को कहा गया। पिछले अंतिम तिमाही में जिले में ऋण-जमा अनुपात मात्र 34.66 फीसदी ही रहा था। इसे 40 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया। एलडीएम ने बताया कि जिले में सेवा क्षेत्र में बड़ी इंडस्ट्री नहीं होने के कारण ऋण प्रवाह में वृद्धि संतोषप्रद नहीं है। कृषि क्षेत्र में भी पिछले वित्तीय वर्ष लक्ष्य के विरूद्ध मात्र 40 फीसद ही उपलब्धि रही थी। इसे असंतोषजनक मानते हुए सुधार के दिशा में कई कदम उठाने का निर्देश बैंकों को दिया गया।

    वहीं कहा गया कि जिले में केसीसी का लक्ष्य 15000 किसानों को लाभान्वित करने का है। इसके लिए सभी गांवों में कृषक क्लब बनाए जा रहे हैं। कृषक क्लब से आने वाले आवेदनों को स्वीकृत कर किसानों को लाभ देने को कहा गया। वहीं महिला समूहों को अधिक से अधिक लाभ देने को कहा गया।

    लापरवाही पर जेएसएलपीएस के डीपीएम से स्पष्टीकरण मांगा

    एलडीएम ने बताया कि फिलहाल जिले में 438 स्वंय सहायता समूहों को 4.38 करोड़ रुपये दी गई है। वहीं इस वर्ष 900 महिला समूहों को बैंक से ¨लकेज का लक्ष्य रखा गया है। वहीं कार्य में लापरवाही पर जेएसएलपीएस के डीपीएम से स्पष्टीकरण मांगा गया।

    बैठक में डीडीसी आलोक त्रिवेदी, एलडीएम सुधीर शर्मा, नावार्ड के डीडीएम हरिदत्त पोद्दार, बीओआई के एरिया मैनेजर संतोष कुमार, एसबीआई के जिला समन्वयक रमेश प्रसाद ¨सह, अमित बर्मा, बाजार समिति के सचिव अभिषेक आनंद आदि मौजूद थे। :::::::::::: कैशलेस के लिए गांवों में होगा कैंप :::::::::::::

    कोडरमा: बैठक में समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बैंक शाखा अपने क्षेत्रों में गांवों को डिजिटल बनाने में सक्रियता नहीं दिखा रही हैं। यहां तक की पूर्व में दिए गए निर्देशों के बाद भी कहीं कैंप का आयोजन नहीं किया जा रहा है। लिहाजा डीसी ने सभी बैंकों को बीडीओ से समन्वय बनाकर कैंप का आयोजन करने व कैशलेस बनाने के दिशा में कार्य करने का निर्देश दिया। अगली बैठक के पूर्व इस टास्क को पूरा करने को कहा गया। साथ ही हर गांव में बैं¨कग चौपाल लगाने को कहा गया।

    इसके साथ ही मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के लिए सभी शाखाओं को प्रति माह दो-दो आवेदन स्वीकृत करने का लक्ष्य दिया गया।

    By Jagran

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    SunnyMay 22, 2018
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    1min00


    चालू वित्तीय वर्ष की 479 करोड़ की जिला योजना पर 23 मई को मुहर लगेगी। प्रभारी मंत्री ब्रजेश पाठक की अध्यक्षता में बुधवार को विकास भवन सभागार में जिला योजना की मीटिंग होगी। सांसद-विधायक और दूसरे जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सरकारी विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी कार्ययोजना पेश करेंगे। प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद जिला योजना की रकम विभागवार जारी होना शुरू हो जाएगा। सीडीओ ने जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर जिला योजना की मीटिंग में हिस्सा लेने को कहा है।

         एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष लागू हो चुका है। शासन ने 28 फरवरी तक जिला योजना को मंजूरी के साथ भेजने को कहा था। मगर ऐसा नहीं हो सका। जिला पंचायत की मीटिंग की वजह से कार्ययोजना तैयार नहीं हो सकी। पिछले महीने जिला योजना की मीटिंग के बाद कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। इसी बीच प्रभारी मंत्री ब्रजेश पाठक कर्नाटक चुनाव में प्रचार करने के लिए रवाना हो गए। जिसकी वजह से जिला योजना की मीटिंग टलती रही। कर्नाटक का रिजल्ट आने के बाद प्रभारी मंत्री ने तुरंत जिला योजना की मीटिंग का कार्यक्रम तय कर दिया। बुधवार को प्रभारी मंत्री जिला योजना को मंजूरी देंगे। प्रशासन ने जिला योजना की मीटिंग को लेकर तैयारी शुरू कर दी हैं। मीटिंग पुरानी जिला योजना के खर्च का हिसाब भी होगा।

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    SunnyMay 22, 2018
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    2min00


    ईशान बख्शी /  05 22, 2018

    बेहतर नतीजे

    इस साल 2 मई तक 31.5 करोड़ खाते खोले गए, जिनमें 59 फीसदी ग्रामीण इलाकों में खुले
    बैंक खातों को मोबाइल और आधार के साथ जोड़े जाने से सरकारी योजनाओं में चोरी हुई कम
    सबसे गरीब 40 फीसदी परिवारों की महिलाओं और वयस्कों के बैंक खातों में 30 फीसदी बढ़ोतरी
    विश्व बैंक के मुताबिक 2014 में महिलाओं की तुलना में पुरुषों के पास 20 फीसदी अधिक बैंक खाते थे
    लेकिन 2017 में यह अंतर घटकर महज 6 फीसदी पर सिमट गया

    ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की महत्त्वाकांक्षी जन धन योजना को भारी सफलता मिली है, जिसका मकसद समाज के वंचित तबकों को संगठित वित्तीय व्यवस्था के दायरे में लाना है। दो मई, 2018 तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस योजना के तहत 31.5 करोड़ खाते खोले गए हैं। इनमें करीब 59 फीसदी यानी 18.58 करोड़ खाते ग्रामीण और कस्बाई इलाकों की बैंक शाखाओं में खुले हैं। इन खातों में कुल जमाएं 813 अरब रुपये पर पहुंच गई हैं।  

    शुरुआत में इस बात पर संशय था कि कितने गरीब परिवार योजना से जुड़ेंगे। लेकिन विश्व बैंक की हाल की ग्लोबल फिनडेक्स रिपोर्ट, 2017 दर्शाती है कि सबसे गरीब 40 फीसदी परिवारों की महिलाओं और वयस्कों के बैंक खातों में 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि अमीरों और गरीबों के बीच खातों के स्वामित्व के लिहाज से खाई कम हो रही है। 

    इन खातों में से आधे से कुछ अधिक महिलाओं ने खुलाए हैं। इसका मतलब है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान बैंक खाते के मालिकाना हक में पुरुष और महिला का अंतर बहुत कम हो गया है।  विश्व बैंक के आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 2014 में पुरुषों के पास महिलाओं की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा खाते थे, लेकिन वर्ष 2017 तक यह अंतर घटकर महज 6 फीसदी हो गया है।

    बैंक खातों में बढ़ोतरी और इन्हें आधार एवं मोबाइल से जोड़े जाने, जिसे मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने ‘जैम तिकड़ी’ कहा है, से सरकारी व्यवस्था में लीकेज कम हुआ है। इन पहलों से असल बचत कितनी हुई है, इसे लेकर बहस जारी है। लेकिन विश्व बैंक की रिपोर्ट मे कहा गया है कि नकद के बजाय बायोमेट्रिक स्मार्ट कार्ड के जरिये पेंशन भुगतान शुरू होने के बाद धन की चोरी 47 फीसदी कम हुई है। 

    हालांकि अब भी कई चुनौतियां बरकरार हैं। पहली, करीब 19 करोड़ भारतीयों के पास अभी कोई बैंक खाता नहीं है। दूसरी, इन खातों को इस्तेमाल करने का स्तर लगातार कम बना हुआ है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खातों में से 48 फीसदी निष्क्रिय हैं, जो वैश्विक औसत 25 फीसदी का दोगुना है। तीसरा, अध्ययन में पाया गया है कि भारत में केवल 7 फीसदी वयस्क लोग अपने खाते का इस्तेमाल बचत के लिए कर रहे हैं।

     भारतीय प्रबंध संस्थान, बेंगलूरु के प्रोफेसर एम एस श्रीराम ने कहा, ‘ये खाते प्रेषण का जरिया हैं। सरकार इन खातों में सब्सिडी हस्तांतरित करती है, जिसके बाद उसे प्राप्तकर्ता निकाल लेता है। इसका सिस्टम से कोई जुड़ाव नहीं है।’ इसमें लोगों से संपर्क करना भी एक चुनौती है। माइक्रोसेव के एक अध्ययन में पाया गया कि जन-धन योजना से वित्तीय समावेशन में सुधार हुआ है, लेकिन बैंकिंग करेस्पोंडेंट के लिए अपर्याप्त आय और अंतिम छोर पर सेवाएं देने वाले इन एजेंटों के लिए प्रशिक्षण, निगरानी और बुनियादी ढांचे के अभाव से सरकार की अहम योजना के दायरे पर असर पड़ा है।

    प्रोफेसर श्रीराम ने कहा, ‘लोगों से संपर्क साधना एक बड़ी समस्या है।’ उन्होंने कहा, ‘बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट को पर्याप्त मेहनताना मिले, इसके लिए बड़ी तादाद में लेनदेन होने जरूरी हैं।’ गरीबों के बैंक खाते खोलना सरकार की वित्तीय समावेशन की नीति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा था। सरकारी व्यवस्था के साथ बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई वित्तीय योजनाएं मुहैया कराई हैं, जिनका मकसद सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना है।

    आंकड़े दर्शाते हैं कि इन पहलों को अहम सफलता मिली है।  उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) प्रत्येक ग्राहक को महज 12 रुपये के सालाना प्रीमियम पर एक साल का दुर्घटना मृत्यु एवं अपगंता बीमा कवर मुहैया कराती है। इसका हर साल नवीनीकरण कराया जा सकता है। आंकड़े दर्शाते हैं कि अब तक इस योजना के तहत 13.5 करोड़ लोग नामांकन करा चुके हैं। अब तक योजना के तहत 22,294 दावे किए गए हैं, जिनमें से 16,644 (75 फीसदी) को राशि मुहैया करा दी गई है।

     इसी तरह प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत प्रत्येक ग्राहक को 330 रुपये के सालाना प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का एक साल का टर्म लाइफ कवर मुहैया कराया गया है, जिसका हर साल नवीनीकरण कराया जा सकता है। इस योजना के तहत अब तक 5.3 करोड़ लोगों ने नामांकन कराया है। अब तक इस योजना के तहत 5.3 करोड़ लोग नामांकन करा चुके हैं।

    अब तक योजना के तहत 1,00,881 दावे किए गए हैं, जिनमें से 92,089 दावों (91 फीसदी) का निपटान किया जा चुका है। इसी तरह प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 2017-18 में कुल 2.46 लाख करोड़ रुपये वितरित किए गए, जो 2016-17 में 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक हैं। इस योजना के तहत लघु एवं मझोले उद्योगों को 10 लाख रुपये तक का ऋण मुहैया कराया जाता है।  

    हाल में सरकार ने एक अन्य महत्त्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है, जिसका मकसद 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। हालांकि इस योजना की रूपरेखा पर काम किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ ऐसी योजना के लिए जरूरी भौतिक बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर चिंतित हैं। प्रोफेसर श्रीराम ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि ऐसी नीतियों को लागू करने के लिए भौतिक बुनियादी ढांचा मौजूद है। सबसे पहले अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं खड़ी करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’

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    SunnyMay 21, 2018
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    2min20


    नई दिल्ली

    वित्त मंत्रालय ने मुद्रा योजना के तहत छोटे उद्यमियों को ऋण आवंटन बढ़ाने के लिए फ्लिपकार्ट , स्विगी , पतंजलि और अमूल समेत 40 इकाइयों के साथ साझेदारी की है। यह सभी इकाइयों बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत किन ऋण दिए जा सकने लायक लोगों की पहचान करने के लिए मंत्रालय 23 जून को मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन करेगी , ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके तहत ऋण आवंटित किया जा सके।

    वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने कहा कि बड़े पैमाने पर नौकरी देने वाली 40 कंपनियों की पहचान की गई है। यह कंपनियां उन लोगों की पहचान करेंगी जिन्हें मुद्रा योजना के तहत ऋण की जरूरत है। उनके लिए ऋण देने की हामी भरेंगी और उन्हें इस योजना के तहत ऋण दे दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मुद्रा योजना के तहत ऋण की जरुरत है वह बैंक से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन इस कदम से वित्तीय सेवा विभाग की कोशिश उन लोगों तक पहुंचना है जिन्हें अपने कारोबार के लिए ऋण की जरूरत है। इसके तहत मेक माइ ट्रिप, जोमेटो, मेरू कैब, मुथूट, एडेलवाइस, ऐमजॉन, ओला , बिग बास्केट, कार्ज ऑन रेंट और हबीब सैलून भी शामिल हैं।

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