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SunnyNovember 14, 2018
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1min120

Publish Date:Wed, 14 Nov 2018 01:35 PM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अगर आप सही समय पर अपने बच्चे के स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के खर्चों के लिए योजनागत तरीके से निवेश करना शुरू कर देंगे तो सही वक्त आने पर आपको महंगाई के दौर में भी पढ़ाई के खर्चों की चिंता नहीं सताएगी। अगर आप अपने बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चाहते हैं तो स्कूल स्तर की शिक्षा भी आजकल काफी महंगी है, लिहाजा इस खर्चे को उठाने के लिए आपको योजनागत तरीके से निवेश करना ही होगा। गौरतलब है कि आज पूरा देश बाल दिवस मना रहा है। 

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान कर सकता है आपकी मदद: अगर आपका बच्चा 1 साल का है या फिर 1 साल का होने वाला है तो महंगाई के इस दौर में उसकी पढ़ाई के लिए अभी से फिक्रमंद हो जाइए। अगर आप और आपकी पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं तो अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए हर महीने 3000-3000 रुपये बचा सकते हैं। इस हिसाब से आप इस राशि को सिप में निवेश करें। 6 हजार रुपये महीने का सिप 3 साल में 15 फीसद के अनुमानित रिटर्न के लिहाज से 2.5 लाख रुपये में बदल जाएगा। अमूमन बच्चे 3 से 4 साल की उम्र में ही पढ़ाई शुरू करते हैं और बच्चे की शुरुआती शिक्षा के लिए यह राशि पर्याप्त होगी।

वहीं अगर आप अपने बच्चे की उच्च शिक्षा यानी पोस्ट ग्रेजुएशन और प्रोफेशनल पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ना चाहते हैं तो आपको इस निवेश को कुछ और सालों के लिए बढ़ाना होगा। साथ ही अगर आप अपने सिप की राशि को थोड़ा और बढ़ा लेते हैं तो ये काफी बेहतर होगा। पोस्ट ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल पढ़ाई तक पहुंचते-पहुंचते बच्चे की उम्र 22-23 वर्ष हो ही जाती है। इस हिसाब से अगर आप दोनों पति-पत्नी 4000-4000 रुपये की बचत कर उसे सिप में निवेश करना शुरू कर दें तो इस उम्र तक आप अच्छा खासा पैसा जोड़ सकते हैं। मान लीजिए आपका बच्चा अभी 1 साल का है तो उसे 23 का होने में अभी 22 वर्ष बाकी हैं। आप इतने वर्षों तक सिप को जारी रखें। 8000 रुपये के मासिक निवेश पर 22 साल बाद 15 फीसद के अनुमानित रिटर्न के लिहाज से आपके पास 66.5 लाख रुपये की राशि होगी जो कि बच्चे की बेहतर उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त होगी।

बच्चे का नाम करा दें फिक्स्ड डिपॉजिट: अगर जोखिम रहित निवेश विकल्पों की बात की जाए तो उसमें सबसे पहला नाम फिक्स्ड डिपॉजिट का ही आएगा। छोटी अवधि के लक्ष्यों के लिए पैसा जोड़ने के लिहाज से यह सबसे उम्दा निवेश विकल्प है। अमूमन 1 से 5 वर्ष की एफडी बैंकों और पोस्ट ऑफिस में चलती है। इसकी अवधि को बढ़वाकर आप 10 वर्ष के लिए भी करवा सकते हैं। 5 वर्ष बाद आप बच्चे की प्री-स्कूलिंग के लिए अच्छा खासा पैसा जोड़ चुके होंगे। पोस्ट ऑफिस में चलने वाले फिक्स्ड डिपॉजिट पर 7.3 फीसद की दर से ब्याज मिलता है। वहीं बैंक, स्मॉल फाइनेंशियल बैंक और NBFC में चलने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर 7 से 9 फीसद तक जाती है। इस हिसाब से इसमें अपना पैसा निवेश कर बच्चे की पढ़ाई की उम्र आते-आते अच्छा खासा पैसा जोड़ लेंगे।

बच्चे के नाम से खुलवाएं पीपीएफ खाता: आप अपने बच्चे के नाम से पीपीएफ खाता भी खुलवा सकते हैं। ये भी जोखिम रहित निवेश विकल्प माने जाते हैं। इसमें निवेश कर आप अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई के लिए मोटी राशि जोड़ सकते हैं। भारतीय डाकघर यानी इंडिया पोस्ट में चलने वाले 15 वर्षीय पीपीएफ खाते में आप अपने बच्चे के नाम से अकाउंट खुलवाकर उसमें निवेश करना शुरू कर सकते हैं। इस खाते पर मिलने वाली ब्याज दर 8 फीसद होती है। जो कि आज के महंगाई के दौर में काफी ज्यादा है। 

Posted By: Praveen Dwivedi


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SunnyNovember 13, 2018
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1min60

डाॅ. मौलाना अबुल कलाम आजाद की जन्मशताब्दी पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पाई के डा. महावीर सिंह एसएस मास्टर को एंटी करप्शन फाउंडेशन आफ इंडिया द्वारा शिक्षा, पर्यावरण में उल्लेखनीय कार्य हेतु ग्लोबल एजुकेशन टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया। विद्यालय में पहुुंचने पर प्रधानाचार्य सतीश भारद्वाज ने डा. सिंह के कर्मठ, कर्तव्यनिष्ठ के कारण मिले अवार्ड पर बधाई दी। मौके पर सभी स्टाफ सदस्यों व बच्चों ने सम्मानित अध्यापक को बधाई दी। इस मौके पर मौलिक शिक्षा मुख्याध्यापक कदम सिंह राठी, एनएसएस अधिकारी विरेंद्र दीक्षित, दीपक कौशिक, रमेश कैंदल, रोहताश, हसकंवर, सुनिता, राजेंद्र शर्मा, सहित पूरा स्टाफ मौजूद रहा।

विद्यालय में पहुंचने पर टीचर को सम्मानित करते हुए स्टाफ सदस्य।

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SunnyNovember 13, 2018
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1min90

Publish Date:Tue, 13 Nov 2018 11:12 PM (IST)

जेएनएन, फिरोजपुर : विवेकानंद व‌र्ल्ड स्कूल को अगले सप्ताह इंडियन एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने वाला उत्तम स्कूल के साथ सम्मानित किया जाएगा। स्कूल के डायरेक्टर डॉ. एनएस रुद्रा ने बताया कि फिरोजपुर जैसे पिछड़े और सरहदी इलाके में विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय, गुणात्मक और आधुनिक खेल सुविधाओं के साथ विवेकानन्द व‌र्ल्ड स्कूल की स्थापना करने का यही उद्देश्य था कि स्थानीय विद्यार्थी विश्वभर में किसी भी क्षेत्र में प्रतिभा करने में निपुण होने चाहिएं। उन्होंने बताया कि यह बहुत ही सम्मान और हर्ष का विषय है कि अपनी स्थापना के केवल 6 माह में ही विवेकानन्द व‌र्ल्ड स्कूल की चयन इंडियन एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड 2018 को दिल्ली में आयोजित पुरुस्कार समारोह में प्रदान किया जायेगा। स्कूल की इस उपलब्धि का श्रेय डा.रुद्रा ने समूह स्कूल स्टाफ, अभिभावकों और विद्यार्थियों को देते हुए कहा कि विवेकानन्द व‌र्ल्ड स्कूल का इस सरहदी इलाके में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने का प्रयत्न भविष्य में भी इसी तरह रहेगा।

Posted By: Jagran

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SunnyNovember 13, 2018
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भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी

तुलसी काॅलेज आॅफ एजुकेशन फार वूमन में मंगलवार को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया गया। इस दौरान शिक्षा का अर्थ, महत्व, शिक्षक भूमिका, शिक्षित व अशिक्षित में भेद आदि विषयों पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें छात्राओं ने उत्सुकतापूर्वक भाग लिया।

छात्राओं ने अपने वक्तव्य प्रभावशाली ढंग से पेश किए। निर्णायक मंडल में डॉ. कर्मजीत कौर, रजनी शर्मा ने प्रत्येक प्रतिभागी की सराहना की। विजेता छात्राओं के नाम घोषित किए गए जिसमें प्रथम कनिका, प्रियंका, द्वितीय नितिका, प्रीति तथा तीसरा स्थान रेखा ने प्राप्त किया। अंत में प्रिंसिपल डॉ. कीर्ति मुंजाल ने विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के लिए अति अनिवार्य है। शिक्षा समाज के विकास के लिए अति अनिवार्य है। शिक्षा वह माध्यम है, जिससे हम अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं। शिक्षा से ही सभ्य समाज की स्थापना की जा सकती है ताकि देश का चहुंमुखी विकास हो सके। मौलाना अब्दुल कलाम आजाद के जीवन पर प्रकाश डाला, क्योंकि यह दिवस उनके उपलक्ष्य में ही मनाया जाता है।

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SunnyNovember 13, 2018
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4min80

इंडिया टुडे की ओर से 2003 में शुरू किए गए राज्यों की दशा और दिशा (एओटीएस) सर्वेक्षण में समय-समय पर हर राज्य में जिलों के कामकाज का आकलन किया जाता है जिसमें दस मापदंडों को शामिल किया जाता है. ये मापदंड हैं—शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, जल एवं स्वच्छता, कृषि, सेवा, उद्योग, कानून-व्यवस्था, संपन्नता और समग्र विकास. हर मापदंड प्रमुख कारकों का एक मिश्रित सूचकांक होता है. ये कारक उपलब्ध तुलनीय आंकड़ों के आधार पर मापनीय होते हैं.

शिक्षा

सर्वश्रेष्ठ जिलाः किशनगंज

राज्य के एकमात्र मुस्लिम बहुल—68 प्रतिशतकृजिले किशनगंज में 2001 में सबसे कम 31.1 प्रतिशत साक्षरता दर थी जो 2011 में बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गई. इस जिले में कुल 1,814 स्कूल हैं, जिनमें 4,16,744 छात्र पढ़ाई करते हैं. यहां 2009-10 में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 80.4 प्राइमरी स्कूल थे जिनकी संख्या 2016-17 में बढ़कर 89 हो गई. स्कूलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों का अनुपात 2009-10 में 97.3 प्रतिशत से बढ़कर 2016-17 में 101.9 प्रतिशत पहुंच गया.

सर्वाधिक सुधराः लखीसराय

मध्य बिहार के इस जिले में साक्षरता दर 2001 में 48 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 62.4 प्रतिशत हो गई. इस जिले के सभी 340 गांवों में प्राथमिक शिक्षा की कुछ न कुछ सुविधाएं हैं. इस जिले में 486 प्राइमरी स्कूल हैं. 2009-10 में हर 1,00,000 की आबादी पर प्राइमरी स्कूलों की संख्या 67.3 से बढ़कर 2016-17 में 75.9 हो गई.

स्वास्थ्य

सर्वश्रेष्ठ जिलाः रोहतास

बिहार में चावल का कटोरा कहे जाने वाले इस जिले में राज्य भर में साक्षरता दर सबसे अधिक 75.6 प्रतिशत है. शायद यह स्वास्थ्य के मामले में भी उसके बेहतरीन रिकॉर्ड को दर्शाता है. अस्पतालों में प्रसव 2007-08 में 48.5 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 80.7 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में 12 से 23 महीने के बच्चों का टीकाकरण 41.5 प्रतिशत से बढ़कर 70.5 प्रतिशत हो गया. यहां 9,641 व्यक्तियों पर औसतन एक स्वास्थ्य संस्था है.

सर्वाधिक सुधराः कैमूर

जिला मजिस्ट्रेट के रूप में एक योग्य सर्जन के होने से ही कैमूर जिले ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. डॉ. नवल किशोर चौधरी को पता था कि डिलीवरी की व्यवस्था को सुधारना होगा. वे कहते हैं, “मई 2018 में जब मैं यहां का डीएम बना तो मैंने ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करनी शुरू की. मैंने खुद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जांच की और सुनिश्चित किया कि डॉक्टर और अन्य कर्मचारी इन केंद्रों में उपस्थित रहें.” कैमूर में 7,819 लोगों की आबादी पर एक स्वास्थ्य संस्था है. यहां प्रति 1,00,000 व्यक्तियों पर 4 डॉक्टर हैं, जो राज्य में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 3 डॉक्टर के औसत से कहीं ऊपर है.

बुनियादी ढांचा

सर्वश्रेष्ठ जिलाः शेखपुरा

शेखपुरा के जिला मजिस्ट्रेट योगेंद्र सिंह के मुताबिक, बुनियादी ढांचे के निर्माण में इस सकारात्मक अंतर की मुख्य वजह विकास परियोजनाओं, जिनमें सड़कों का निर्माण भी शामिल है, की बहु-आयामी निगरानी है. वे कहते हैं, “उदाहरण के लिए हम हर हफ्ते न केवल सड़कों की लंबाई के बारे में जानकारी लेने पर जोर देते हैं, बल्कि यह भी पता लगाते हैं कि कितनी बस्तियों को इससे जोड़ा गया है.” शेखपुरा में सड़कों का घनत्व 2010 में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 93.6 किमी से बढ़कर 2017 में 183.11 किमी हो गया.

सर्वाधिक सुधराः मधेपुरा

कोसी नदी की बाढ़ से बार-बार तबाह होने के कारण बिहार की पीड़ा कहे जाने वाले मधेपुरा ने जबरदस्त वापसी की है. इस जिले में 2010 में प्रति 1,00,000 की आबादी पर सड़कों का घनत्व 41.8 किमी था जो 2017 में बढ़कर 149.4 किमी हो गया. बिजली के मामले में भी मधेपुरा ने उल्लेखनीय तरक्की हासिल की है. 2007-08 में यह मात्र 9 प्रतिशत थी जो 2015-16 में बढ़कर 53.3 प्रतिशत हो गई.

जल एवं स्वच्छता

सर्वश्रेष्ठ जिलाः बेगूसराय

अगस्त 2018 में करीब 3,00,000 स्कूली बच्चों ने अपने माता-पिता को एक पत्र लिखा कि वे अपने बच्चों के जीवन में कितनी स्वच्छता चाहते हैं. इस पर माता-पिता ने उत्साहपूर्वक जवाब दिया कि वे वह सब करेंगे जो उनके बच्चे करना चाहते हैं. हालांकि अभी तक इसे खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित नहीं किया गया है लेकिन यह उस दिशा की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है. सभी को पीने का स्वच्छ जल उपलब्ध कराना एक अन्य उल्लेखनीय क्षेत्र है. 2007-08 में केवल 25.2 प्रतिशत घरों में शौचालय थे जो 2015-16 में बढ़कर 34.2 प्रतिशत हो गया और स्वच्छ पेयजल की सुविधा वाले घरों की संख्या 96.1 प्रतिशत से बढ़कर 99.1 प्रतिशत हो गई.

सर्वाधिक सुधराः नवादा

यह उन 10 जिलों में से एक है जिन्हें बिहार ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता परियोजना की ओर से पाइपयुक्त जल योजना के लिए चुना गया है. नवादा में 2007-08 में केवल 16.4 प्रतिशत घरों में शौचालय थे लेकिन 2015-16 में 28.8 प्रतिशत घरों में शौचालय हो चुके थे. इसी अवधि में इस जिले में स्वच्छ पेयजल वाले घरों की संख्या 86.8 प्रतिशत से बढ़कर 98.8 प्रतिशत हो गई.

कृषि

सर्वश्रेष्ठ जिलाः बक्सर

इस जिले में 2004-05 में प्रति व्यक्ति कृषि जीडीडीपी (ग्रामीण जनसंख्या) 2,924 रु. थी जो 2011-12 में 4,506 रु. हो गई. 2006-07 में बक्सर में चावल की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 2,559 किग्रा थी जो 2016-17 में बढ़कर 3,239 किग्रा हो गई. इसी तरह गेहूं की उत्पादकता 2,029 किग्रा से बढ़कर 3,371 किग्रा हो गई. 2009-10 में कुल बुआई वाले क्षेत्र के मुकाबले कुल सिंचित क्षेत्र का अनुपात 58.9 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 67.3 प्रतिशत हो गया.

सर्वाधिक सुधराः जमई

जमई की प्रति व्यक्ति कृषि जीडीडीपी (ग्रामीण जनसंख्या) 2004-05 में 1,995 रु. थी जो 2011-12 में 2,432 रु. हो गई. कुल बुआई क्षेत्र के मुकाबले कुल सिंचित क्षेत्र का अनुपात 2009-10 में 30.7 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 97.9 प्रतिशत हो गया.

उद्योग

सर्वश्रेष्ठ जिलाः मुंगेर

मुंगेर के जिला मजिस्ट्रेट आनंद शर्मा कहते हैं, “हर जगह की अपनी विशेषता होती है. अपने जिले में वे दो मुख्य विशेषता देखते हैः पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण. साल के अंत में यहां जंगल सफारी के साथ पर्यटन का एक नया सर्किट बनकर तैयार हो जाएगा.” वे शहद की एक ऑर्गेनिक परियोजना में किसानों को शामिल करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं जिसे मुंगेर शहद का नाम दिया जाएगा. इसके अलावा इसके जुड़वां शहर जमालपुर में भारतीय रेलवे का एशिया में सबसे बड़ा और सबसे पुराना वर्कशॉप है. 2004-05 में मुंगेर में उद्योग और जीडीडीपी का अनुपात 24.1 प्रतिशत था जो 2011-12 में 38.8 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में जिले में प्रति व्यक्ति उद्योग जीडीपी 2,773 रु. से बढ़कर 7,087 रु. हो गई.

सर्वाधिक सुधराः अरवल

यहां 32 लघु और मझोली औद्योगिक इकाइयों में से अधिकांश इकाइयां कृषि-आधारित हैं. बिहार निवेश प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत पंचायत स्तर पर एक उद्यमिता कार्यक्रम शुरू किया गया है. 2004-05 में अरवल में उद्योग और जीडीडीपी का अनुपात 12.3 प्रतिशत था जो 2011-12 में बढ़कर 21.6 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति उद्योग जीडीपी 653 रु. से बढ़कर 1,768 रु. हो गया.

सेवा

सर्वश्रेष्ठ जिलाः मुजफ्फरपुर

राज्य में भारत सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी मिशन के लिए चुने गए तीन शहरों में से एक मुजफ्फरपुर आम और लीची के लिए मशहूर है जो सेवा क्षेत्र के विकास के लिए एक आदर्श जगह हो सकता है. 2004-05 में यहां सेवा क्षेत्र और जीडीडीपी का अनुपात 53.6 प्रतिशत था जो 2011-12 में बढ़कर 56.4 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति सेवा जीडीपी 5,570 रु. से बढ़कर 8,289 रु. हो गई.

सर्वाधिक सुधराः मधुबनी

परंपरागत रूप से राज्य के सबसे सुस्त जिलों में से एक मधुबनी अब प्रदेश के 38 जिलों में 20 श्रेष्ठ जिलों में शामिल है. दूसरे क्षेत्रों में आई संपन्नता का असर सेवा क्षेत्र में भी पहुंच गया है. उदाहरण के लिए प्रति व्यक्ति बिजली के उपभोग में इसने जबरदस्त तरक्की हासिल की है. कोऑपरेटिव क्रेडिट सप्लाई का स्तर भी मधुबनी में अपेक्षाकृत ऊपर है. 2004-05 में मधुबनी में सेवा और जीडीपी का अनुपात 35.5 प्रतिशत था जो 2011-12 में बढ़कर 46.2 प्रतिशत हो गया और प्रति व्यक्ति सेवा जीडीपी 2,414 रु. से बढ़कर 3,453 रु. हो गई.

संपन्नता

सर्वश्रेष्ठ जिलाः पटना

43.1 प्रतिशत नगरीकरण, राज्य के कुल सड़क नेटवर्क के 6 प्रतिशत और बिहार के कुल वाहनों के 16 प्रतिशत वाहनों के साथ पटना राज्य के 38 जिलों में सबसे संपन्न जिला है. 2004-05 में यहां की प्रति व्यक्ति जीडीपी 36,373 रु. थी जो 2011-12 में 55,270 रु. हो गई जो राज्य की औसत प्रति व्यक्ति (12,093 रु.) जीडीपी का चार गुना है. पटना में 2007-08 में बैंकों में प्रति व्यक्ति जमा राशि 10,197 रु. थी जो 2016-17 में चार गुना से भी ज्यादा बढ़कर 46,520 रु. हो गई.

सर्वाधिक सुधराः शिवहर

आबादी और क्षेत्र के हिसाब से बिहार का सबसे छोटा जिला शिवहर मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. यही वजह है कि यहां का उद्योग भी कृषि आधारित है. व्यापार और वाणिज्य का केंद्र यह जिला बीजों, गुण, चमड़ा और सब्जियों का निर्यात करता है. इस जिले में 400 से ज्यादा पंजीकृत सूक्ष्म उद्यम, खाद्य उत्पादों के उत्पादन की 40 इकाइयां और 23 छोटे टेक्सटाइल हैं. 2004-05 में जिले की प्रति व्यक्ति जीडीपी 4,391 रु. थी जो 2011-12 में 6,055 रु. हो गई. शिवहर में 2007-08 में प्रति व्यक्ति बैंक जमा राशि 1,002 रु. थी जो 2016-17 में चार गुना से भी ज्यादा बढ़कर 4,290 रु. हो गई.

कानून और व्यवस्था

सर्वश्रेष्ठ जिलाः दरभंगा

हमेशा से सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने सुनिश्चित कर दिया है कि यहां प्रशासन पूरी तरह से निष्पक्ष प्रतीत हो.  2007 में 1,00,000 की आबादी पर हत्या के मामले 2.08 से घटकर 2017 में 0.98 रह गए.

सर्वाधिक सुधराः औरंगाबाद

हिंसक अपराध के नियंत्रण के मामले में औरंगाबाद सबसे ऊपर है. यहां 2007 में 1,00,000 की आबादी पर हत्या के मामले 2.87 से घटकर 2017 में 1.74 रह गए. इसी तरह 1,00,000 की आबादी पर बलात्कार की घटनाएं भी 0.91 से घटकर 0.83 रह गईं.

समग्र विकास

सर्वश्रेष्ठ जिलाः पटना

न केवल राजधानी, बल्कि इस जिले के सभी 12 कस्बों में भी बेहतरीन सड़कें और बिजली की कनेक्शन है. यहां देश का सबसे आधुनिक संग्रहालय भी है जिसने अक्तूबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बहुत प्रभावित किया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की योजना पर बने इस संग्रहालय में जापानी शैली नजर आती है जिसमें पर्यावरण के नजरिए से 21वीं सदी का स्टैंडर्ड अपनाया गया है. पटना बिहार के सभी 38 जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जल एवं स्वच्छता, बुनियादी ढांचा, उद्योग, सेवा और कानून-व्यवस्था के मामले में सबसे ऊपर है.

सर्वाधिक सुधराः किशनगंज

पिछले दो दशकों में अगर बिहार एक महत्वपूर्ण चाय उत्पादन करने वाले राज्य के रूप में उभरा है तो इसका श्रेय किशनगंज के एक बड़े हिस्से को जाता है जहां करीब 50,000 एकड़ में चाय की खेती की जा रही है. शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने के अलावा इसने सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय तरक्की हासिल की है. यह जिला विकास मार्ग पर आ गया है. जिले के सभी सात ब्लॉक मुख्यालय पक्की सड़क से जुड़े हैं. कॉमर्शियल बैंक में डिपॉजिट के मुकाबले क्रेडिट अनुपात 2015-16 में 69.5 प्रतिशत था जो पूरे बिहार में सबसे ज्यादा था. इसके सभी 732 गांवों में बिजली पहुंच गई है.


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SunnyNovember 13, 2018
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RRB ने Alp/Technician के सेकंड स्टेज के कंप्यूटर आधारित टेस्ट की तारीख को आगे खिसका दिया है। इसके अलावा पहले स्टेज सीबीटी में शॉर्टलिस्ट हुए आवेदकों की फिर से सूची जारी की जाएगी। जिससे कई नए आवेदक शामिल हो सकते हैं और कई आवेदक बाहर हो सकते हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

Railway Recruitment Board ने Alp/Technician के सेकंड स्टेज Computer Based Test (CBT) को टाल दिया है। पहले यह एग्जाम 12 दिसंबर से 14 दिसंबर तक आयोजित किए जाने थे लेकिन अब एग्जाम की डेट को आगे खिसका कर 24 दिसंबर कर दिया गया है। आपको बता दें कि रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड ने 2 नवंबर को पहले स्टेज सीबीटी के नतीजे घोषित किए थे और पहले स्टेज सीबीटी में सफल हुए उम्मीदवारों को सेकंड स्टेज सीबीटी में बैठने का मौका मिलेगा।

क्यों टली एग्जाम की तारीख

रेलवे ने ऑफिशल नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि पहले स्टेज सीबीटी के नतीजों में कई अनियमित्ताएं पाई गई हैं जिसके कारण रिजल्ट सही तरीके से घोषित नहीं हुए हैं। रेलवे के मुताबिक कुछ आंसर की सही नहीं है जिसके कारण रेलवे को सभी सवालों के फिर से जवाब जांचने होंगे और पहले स्टेज का एग्जाम देने वाले कैंडिटेट्स के लॉगिन पर फिर से स्कोर वर्कशीट डाली जाएगी। आंसर की में गड़बड़ होने के कारण आवेदकों के नंबर्स में भी बदलाव हो सकता है। इसी के साथ शॉर्टलिस्ट हुए आवेदकों की रिवाइस्ड सूची एक बार फिर वेबसाइट पर डाली जाएगी।

ऑफिशल नोटिफिकेशन देखने के लिए यहां क्लिक करें

सेकंड राउंड सीबीटी के लिए 6 लाख कैंडिटेड

इस साल सेकंड राउंड सीबीटी (Computer Based Test) के लिए करीब 6 लाख आवेदकों ने क्वालिफाई किया था। 2 नवंबर को रेलवे ने फर्स्ट स्टेज सीबीटी के नतीजे जारी किए थे। आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक 5.88 लाख आवेदक सेकंड राउड एग्जामिनेशन के लिए क्वालिफाई हुए थे।

कुल 64,371 वेकन्सी

Assistant Loco Pilot और Technicians के कुल 64371 पदों पर वेकन्सी निकाली गई है जिसमें 27,795 पद असिस्टेंट लोको पायलट और 36,576 टेक्निशियन के पद हैं।

 

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(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)


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SunnyNovember 13, 2018
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3min100

छात्राएं छेड़छाड़ की घटनाओं से आत्मविश्वास से निपट सकें इसलिए उन्हें किस्से-कहानियां भी सुनाई जाएंगी। अब तक उन्हें सिर्फ ट्रेनिंग दी जाती है, मगर उनमें जोश भरने के लिए हरियाणा शिक्षा विभाग ने कवच माड्यूल तैयार किया है, जिसे अगले सप्ताह तक प्रदेश के सभी स्कूलों में भेजा जाएगा।

नवभारत टाइम्स | Updated:

गुड़गांव

छात्राएं छेड़छाड़ की घटनाओं से आत्मविश्वास से निपट सकें इसलिए उन्हें किस्से-कहानियां भी सुनाई जाएंगी। अब तक उन्हें सिर्फ ट्रेनिंग दी जाती है, मगर उनमें जोश भरने के लिए हरियाणा शिक्षा विभाग ने कवच माड्यूल तैयार किया है, जिसे अगले सप्ताह तक प्रदेश के सभी स्कूलों में भेजा जाएगा। नवंबर अंत तक इसके लागू होने की उम्मीद है। इसके तहत शिक्षक प्रत्येक शनिवार को विशेष कक्षा में छात्राओं को किस्सों से रूबरू कराएंगे।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रेमलता ने बताया, ‘छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आत्मरक्षा का ज्ञान होना जरूरी है। माड्यूल के माध्यम से छात्राओं को बताया जाएगा कि यदि उनके साथ कोई घटना होती है तो वो उससे कैसे निपट सकती हैं।’

अलग-अलग तरीके भी सिखाए जाएंगे

कवच मॉड्यूल के नाम से पुस्तक प्रकाशित की गई है। इसमें 7 से 12 वर्ष व 13 से 18 वर्ष की छात्राओं के लिए अलग-अलग गतिविधियां तय की गई हैं। विशेष कक्षा में शिक्षक छात्राओं को कहानी सुनाएंगे। इसके साथ ही उनसे पूछा जाएगा कि वो उस जगह होतीं तो क्या करतीं? इसके बाद उन्हें उस परिस्थिति से निपटने के कुछ अन्य तरीके बताए जाएंगे। शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेज योजना की जानकारी दे दी है।


निजी स्कूलों को भी दिया जाएगा माड्यूल


गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूलों, हाई स्कूलों, मिडिल स्कूलों और प्राइमरी स्कूल को 5-5, जबकि निजी स्कूलों को 1-1 मॉड्यूल दिया जाएगा। गुड़गांव के स्कूलों के लिए 3442, फरीदाबाद के लिए 2963 और मेवात के लिए 4378 मॉड्यूल भेजे जाएंगे।

 

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Web Title education departments step kavach stories will save girls

(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)


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SunnyNovember 13, 2018
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  • छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य जो समृद्ध तो है, पर संसाधनों के बलबूते, शिक्षा के नहीं
  • छत्तीसगढ़ को क्या चाहिए : प्रदेश में शिक्षा 23वें स्थान पर, जीईआर में अौसत से नीचे

Dainik Bhaskar

Nov 13, 2018, 09:37 AM IST

डॉ. जवाहर सूरी शेट्ठी, प्रख्यात शिक्षा शास्त्री। रायपुर. कोई भी राज्य या देश शिक्षा के बलबूते समृद्ध होता है। छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जो समृद्ध तो है, लेकिन शिक्षा के बलबूते नहीं बल्कि संसाधनों के बलबूते। विभाजन के बाद राज्य ने बहुत तरक्की की, मगर उस तरक्की और समृद्धि का श्रेय यहां के संसाधनों की अमीरी को जाता है, न कि शैक्षणिक गुणवत्ता को। अगर हमने बीते 18 साल में शिक्षा और रोजगार पर काम किया होता तो ये देश का अग्रणी राज्य होता। 

ताज तो हमारे सिर पर है कि हम देश के समृद्ध राज्यों में टॉप फाइव में होंगे, लेकिन अगर राजनीति में संसाधनों के दोहन और वित्तीय प्रबंधन के अलावा शिक्षा पर काम करते तो हम शीर्ष पर होते। और चाहे तेलंगाना हो या हरियाणा कोई भी राज्य हमको छू नहीं सकता। कुछ तथ्य देना चाहता हूं जो इस बात को साबित करते हैं।

आज प्रदेश शिक्षा में 23वें नंबर पर है। यह आंकड़ा हमारी समृद्धि से मेल नहीं खाता। दूसरा आंकड़ा है जीईआर यानी सकल नामांकन अनुपात का और इसमें भी छत्तीसगढ़ का आंकड़ा देश के औसत से नीचे है। 

ये सच है कि हमारे राज्य में देश की सभी शीर्ष संस्थाएं मौजूद हैं। जैसे आईआईटी, एम्स, ट्रिपलआईटी, आईआईएम वगैरह। इनका होना हमारे राज्य के लिए अच्छा तो है, लेकिन ये हमारे बढ़ते शैक्षिक गुणवत्ता के सूचक नहीं हो सकते।

इसकी वजह है इन सभी संस्थाओं को मिलाकर हमारे राज्य के एक प्रतिशत से ज्यादा स्टूडेंट इनमें नहीं पढ़ते हैं। तो ये कहना सही होगा कि प्रदेश की समृद्धि के लिए बाकी 99 प्रतिशत बच्चों की शिक्षा का भी ध्यान देना होगा। अगर इस पर ध्यान दिया गया तो बहुत फायदे होंगे। 

पहला ये कि आज समृद्धि का फायदा हमारे बच्चों को नहीं मिलता क्योंकि उद्योग का कहना है कि हमारे कॉलेज जो स्नातक के छात्र परोस रहे हैं, वे गुणवत्ता में कम हैं। इसलिए वे रोजगार के लायक नहीं है। अगर गुणवत्ता बढ़ी और उच्च शिक्षा में कौशल विकास का समावेश किया गया तो समृद्धि के घोड़े पर सवार होकर हम रोजगार में भी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

दूसरा फायदा ये है कि सब्सिडी से वोटर मिल सकते हैं मगर अगर अच्छी शिक्षा और रोजगार दें सकें तो इसका निरंतर फायदा राज्य की समृद्धि और राजनीति को भी मिलेगा। अगर चावल, मोबाइल, लैपटॉप बांटने के क्षणिक राजनीतिक फायदे हैं तो शिक्षा और रोजगार के दूरगामी राजनीतिक भी फायदे हैं। 

अगर हर काम वोट के नजरिए से किया जाता है तो इस दृष्टिकोण से ही सही तो देश का उद्धार हो जाएगा। ये हमेशा उद्योग के लिए फायदेमंद होता है और किफायती भी कि उद्योग के नजदीक ही अगर आपको रोजगार लायक और कुशल कामगार मिल जाएं तो जो भी सरकार आए वो अगर सिर्फ शिक्षा और रोजगार पर काम करें तो राज्य का भविष्य बेहतर होगा। और उसके अच्छे राजनीतिक परिणाम भी देखने को मिलेंगे।

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SunnyNovember 13, 2018
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देश के प्रथम शिक्षा मंत्री व भारत र| से सम्मानित मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्मदिन 11 नवंबर को था। इस दिन को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर बार शिक्षा दिवस 11 नवंबर को मनाते हैं। इस बार रविवार पड़ने से केंद्र सरकार ने 12 नवंबर को इसे मनाने का आदेश दिया था। लेकिन स्कूल को सर्कुलर जारी नहीं हुआ, न ही कोई कार्यक्रम हुए।

1616 सरकारी प्राइमरी, मिडिल, हाई व हायर सेकंडरी स्कूल हैं। हैरानी की बात तो ये है कि चारों विकासखंड शिक्षा अधिकारी को इतना तक पता नहीं, कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस क्यों मनाया जाता है। भास्कर ने चारों बीईओ से प्रश्न पूछा, तो सोच में पड़ गए। दूसरे ने किसी से थोड़ी देर में पूछकर बताने की बात कही। तीसरा जवाब नहीं दे पाया और चौथे ने तो देर तक कॉल होल्ड में रखने के बाद किसी से पूछा भी, तो ठीक- ठीक जवाब नहीं दिया। ऐसे में बच्चों से उम्मीद नहीं की जा सकती।

कवर्धा. शिक्षकों की चुनाव में ड्यूटी लगने से कक्षाएं जा रही खाली।

भास्कर के प्रश्न पर जवाब देने से बचते रहे अफसर

– लोहारा बीईओ रोहित पात्रे: कुछ सोचने के बाद, क्यों मनाते हैं.. अभी याद नहीं आ रहा सर।

– कवर्धा बीईओ एमएस पटेला: अभी तो सब चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं सर। मैं थोड़ी देर में पूछकर बताता हूं।

– बोड़ला बीईओ एके सहारे: अब वो मनाया तो जाता है, जिस उद्देश्य से। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस शिक्षक सम्मान समारोह के रूप में बनाया जाता है। शिक्षकों को सम्मान दिया जाए। उन्हें अच्छे कार्य के लिए प्रेरित किया जाए।

पंडरिया बीईओ डीएस राजपूत- अभी कहां कुछ।

एसएसए की रिपोर्ट : 2100 बच्चों ने बीच में छोड़ दी पढ़ाई

जिले में शिक्षा का स्तर जानने 2017-18 में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) ने सर्वे किया था। इसके मुताबिक 2103 बच्चों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है। क्योंकि ज्यादातर बच्चों के मासूम कंधों पर घर की जिम्मेदारी थी। रिपोर्ट में पढ़ाई छोड़ने का कारण भी स्पष्ट था। इसके मुताबिक स्कूल ड्रॉप 21 सौ में से 1283 बालक और 820 बालिकाएं शामिल है। इनमें 918 बच्चों ने महज इसलिए पढ़ाई छोड़ी दी, क्योंकि वे घर की देखरेख और घरेलू काम संभाल रहे थे। वहीं माता-पिता के साथ पलायन करने के कारण 276 बच्चों की पढ़ाई छूट गई। 34 बच्चों ने गरीबी के कारण और 46 बच्चों ने आजीविका के लिए स्कूल जाना बंद कर दिया। वहीं 117 बच्चाें ने पढ़ाई के डर और सुविधा न होने से स्कूल जाना छोड़ दिया।

शासन से कोई आदेश नहीं मिला

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