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SunnyAugust 18, 2018
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रायपुर. दसवीं-बारहवीं बोर्ड परीक्षा में कमजोर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की निगरानी शुरू हो गई है। इसमें उन स्कूलों को रखा गया है, जिनका रिजल्ट पिछले सत्र में 40 फीसदी से कम रहा है। ऐसे कुछ स्कूलों में शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही टीचरों की पोस्टिंग कर खाली पद भरे गए हैं। अब उन स्कूलों को परफार्मेंस सुधारने का टॉस्क दिया गया है। वे अपने टॉस्क को किस तरह पूरा कर रहे हैं, इसकी समीक्षा तिमाही परीक्षा के नतीजों के आधार पर की जाएगी। नतीजों की समीक्षा के आधार पर पता लगाया जाएगा कि वहां क्यों और किस कारण से बच्चे पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं। उस कमी को दूर किया जाएगा।

इन स्कूलों को फिर छमाही परीक्षा तक का टॉस्क दिया जाएगा। उसके नतीजे से पता चल जाएगा कि स्कूल प्रबंधन टॉस्क पूरा करने में कितना सफल रहा है। शिक्षा विभाग के अफसरों ने बताया कि इस तरह से हर परीक्षा के बाद स्कूलों की समीक्षा होगी। रिजल्ट पहले की तुलना में बेहतर हुआ या कमजोर इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी। उसके बाद वार्षिक परीक्षा के नतीजे सुधारने के लिए स्कूल प्रबंधन के सामने लक्ष्य रखा जाएगा। स्कूल के शिक्षकों को हर हाल में उस टॉस्क को पूरा करना होगा।

एक-एक बच्चे के परफार्मेंस की समीक्षा:कमजोर स्कूलों के एक-एक बच्चे के परफार्मेंस की समीक्षा भी इसी दौरान की जाएगी। तिमाही और छमाही के नतीजों से पढ़ाई में पिछड़े बच्चों की पहचान की जाएगी। इन्हीं नतीजों के आधार ये पता लगाया जाएगा कि किन बच्चों को कम से कम पास होने की श्रेणी में लाया जा सकता है और ऐसे कितने बच्चे हैं, जिनके नतीजों को अच्छे से बहुत बेहतर किया जा सकता है। उसके बाद ही योजनाबद्ध तरीके से उन बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि इस साल दसवीं-बारहवीं बोर्ड का रिजल्ट पिछले साल की तुलना में थोड़ा बेहतर रहा है। रायपुर के सरकारी स्कूलों में दसवीं के रिजल्ट में पांच फीसदी और बारहवीं में दो फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है।

मोबाइल टीचिंग फिर सितंबर से:दसवीं-बारहवीं के बच्चों के लिए एक बार फिर मोबाइल टीचिंग का फार्मूला शुरू किया जाएगा। शिक्षा विभाग इसके लिए अलग-अलग टीम बनाकर उसका टाइम टेबल तैयार कर रहा है। अफसरों के अनुसार इस सत्र में सितंबर से ही मोबाइल टीचिंग शुरू की जा रही है। इसके लिए जल्द ही स्कूल व टीचरों की सूची तैयार की जाएगी। मोबाइल टीचिंग के माध्यम विभिन्न स्कूलों में एक्सपर्ट की क्लास करीब तीन-चार महीने तक लगेगी। इसका फायदा बच्चों को मिलेगा। उनकी कई दिक्कतें दूर हो जाएंगी। गौरतलब है कि करीब दो साल पहले यहां मोबाइल टीचिंग शुरू की गई थी।

कोर्स से पूछेंगे 40 फीसदी सवाल, टाइम-टेबल जल्द:सरकारी स्कूलों में तिमाही परीक्षा छह सितंबर से शुरू की जा रही है। इस परीक्षा में बच्चों से करीब 40 फीसदी कोर्स से सवाल पूछे जाएंगे। दसवीं-बारहवीं की समय-सारणी एक-दो दिन में जारी होने की संभावना है। ये परीक्षा सितंबर के दूसरे सप्ताह में आयोजित की जा सकती है। कुछ दिन पहले जिला शिक्षा विभाग ने प्राइमरी व मिडिल स्कूल की समय-सारणी जारी की है। इसके तहत पहली से पांचवीं की परीक्षा 6 से 10 सितंबर तक होगी। जबकि छठवीं से आठवीं 6 से 14 सितंबर तक होगी।

21 को प्राचार्यों की बैठक : पिछले कुछ बरसों से रायपुर के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट बढ़ रहा है। फिर भी यह अन्य जिलों से पीछे हैं। जशपुर, सरगुजा, राजनांदगांव समेत अन्य जिलों का रिजल्ट इससे बेहतर आ रहा है। इसमें और सुधार को लेकर शिक्षा विभाग से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें बैठक पर चर्चा होगी।

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SunnyAugust 17, 2018
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पटना.राज्य के दो विश्वविद्यालयों को नए सत्र के लिए दूर शिक्षा के माध्यम से पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति मिल गई है। डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो ने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को दूर शिक्षा के लिए अनुमति दी है। इससे पहले पिछले साल तक इन दोनों के साथ मगध विवि के दूरस्थ शिक्षा परिषद को भी अनुमति प्राप्त थी।

एलएनएमयू को सात पाठ्यक्रमों के लिए अनुमति :ललित नारायण मिथिला विवि के सात कोर्स को डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो ने अगले दो सत्रों के लिए अनुमति दी है। विवि को बैचलर ऑफ एजुकेशन, बैचलर ऑफ आर्ट्स (इंग्लिश), बैचलर ऑफ कॉमर्स, बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस, मास्टर ऑफ आर्ट्स (इंग्लिश), मास्टर ऑफ कॉमर्स, मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस के लिए मान्यता मिली है। एलएनएमयू को अभी नैक से बी ग्रेड है और डिस्टेंस एजुकेशन के नए नियमों में सिर्फ ए ग्रेड वाले विवि को ही दूरस्थ शिक्षा की अनुमति दी जा सकती है। नए नियमों में यह भी प्रावधान है कि पहले से दूर शिक्षा कोर्स चला रहे विवि को एक साल का वक्त दिया जाएगा, जिससे वे नैक से ए ग्रेड प्राप्त कर सकें।

एनओयू के सभी कोर्स को मिली अनुमति
डीईबी ने एनओयू को सत्र 2022-23 तक के लिए सिर्फ पांच कोर्स की अनुमति दी थी। इसमें बैचलर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन, बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस, मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस, बैचलर ऑफ आर्ट्स ऑनर्स (हिस्ट्री) और मास्टर ऑफ आर्ट्स (हिस्ट्री) शामिल हैं। विवि के कुलसचिव डॉ. एसपी सिन्हा ने बताया कि ब्यूरो के साथ गुरुवार को बैठक में सभी कोर्स की अनुमति मिल गई है। अब मौजूदा कोर्सेज के लिए 2022-23 सत्र तक के लिए मान्यता मिल गई है।

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SunnyAugust 16, 2018
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Atal Bihari Vajpayee Death : पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में  हुआ था। उनकी मां का नाम कृष्णा देवी और पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। उनकी मां  का नाम कृष्णा देवी और पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी था। उनका पैत्रिक घर उत्तर प्रदेश का बटेश्वर गांव था। उनके दादा पंडित श्याम लाल वाजपेयी यूपी के बटेश्वर से मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मोरैना आकर बस गए थे। उनके पिता कृष्ण वाजपेयी एक स्कूल में शिक्षक थे। वे कवि भी थे। 

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर में ही हुई थी। उनकी स्कूली शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वे ग्वालियर में ही विक्टोरिया कॉलेज में आगे की पढ़ाई पूरी करने चले गए। इस कॉलेज को अब लक्ष्मी बाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है। यहां से वे हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में स्नातक की शिक्षा पूरी की। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे मास्टर की डिग्री के लिए कानपुर चले गए। उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में प्रथम श्रेणी से एमए पास किया। 

उन्होंने पढ़ाई के बाद समाज सेवा में कदम रखा। ग्वालियर में आर्य समाज के यूथ विंग आर्य कुमार सभा से जुड़े। वे वर्ष 1944 में आर्य समाज के यूथ विंग के महासचिव भी बने। वे वर्ष 1939 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े। वे बाबा साहेब से प्रभावित होकर 1940–44 के दौरान आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिए और 1947 में फूल टाइम वर्कर बने। यानी प्रचारक का काम संभाला।

उन्होंने देश के विभाजन के बाद हुए दंगे के चलते लॉ की पढ़ाई छोड़ दी। वे विस्तारक (प्रचारक) के तौर पर उत्तर प्रदेश भेजे गए। वहां वे दीन दयाल उपाध्याय के न्यूज पेपर के लिए काम करना शुरू कर दिया। वे राष्ट्रधर्म (हिंदी मासिक), पांचजन्य (हिंदी मासिक), स्वदेश तथा वीर अर्जुन के लिए पत्रकार के तौर पर काम किए। देश सेवा में समर्पित वाजपेयी जीवन भर कुंवारा रहे।