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SunnyJuly 17, 2018
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उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर भर्ती के लिए चार वर्षीय बीएलएड (बैचलर इन एलीमेंटरी एजुकेशन) और भारतीय पुनर्वास परिषद से अनुमोदित दो वर्षीय डीएड (विशेष शिक्षा) को मान्य कर लिया है। इसके लिए बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में 22वां संशोधन किया गया है।

संशोधन तो 15 मार्च को ही कर दिया गया था, लेकिन 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा के कारण अब तक इसे जारी नहीं किया गया था। दो दिन पहले संशोधन संबंधी शासनादेश जारी हुआ। सरकार ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्य सभी शैक्षिक अर्हताओं को शिक्षक भर्ती के लिए मान्य कर लिया है।
ये संशोधन 4 अगस्त 2014 को शैक्षिक अर्हता के संबंध में हाईपावर कमेटी की अनुशंसा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया गया है। इसके अलावा उर्दू भाषा के अध्यापकों के लिए दो वर्षीय उर्दू बीटीसी, बीटीसी या समकक्ष योग्यता को मान्य किया है। जबकि उर्दू माध्यम से पढ़ाने की योग्यता में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

बेरोजगारों को भुगतना पड़ा गड़बड़ी का खामियाजा
इलाहाबाद। बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली में गड़बड़ी का खामियाजा बेरोजगारों को भुगतना पड़ा। यूपी में शिक्षक भर्ती की नियमावली एनसीटीई की गाइडलाइन के अनुसार नहीं होने के कारण विभिन्न शिक्षक भर्ती के आवेदकों को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। हालांकि एनसीटीई के अनुसार 22वां संशोधन होने से भविष्य की शिक्षक भर्ती में अर्हता को लेकर विवाद की स्थिति पैदा नहीं होगी। 
 

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SunnyJuly 17, 2018
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SunnyJuly 15, 2018
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3min30

भाषा | Updated:

सत्यपाल मलिक

पटना

बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने प्रदेश में बीएड शिक्षा क्षेत्र में जारी अनियमितताओं का एक बार फिर जिक्र करते हुए आज कहा कि इस क्षेत्र में सुधार के लिए कोशिश की गई है और उसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं।

पटना स्थित ज्ञान भवन में श्रम संसाधन विभाग के बिहार कौशल विकास मिशन द्वारा आयोजित ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ का उद्घाटन करते हुए राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति मलिक ने कहा,‘यहां उच्चतर शिक्षा की बहुत खराब हालत है। हमने कोशिश की है। बहुत सख्त फैसले लिए जिसके नतीजे भी अब सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि एक जो सबसे सख्त फैसला था वह बीएड के ‘कारोबार’ के खिलाफ था। अब इसे केन्द्रीकृत कर दिया गया है और आज बीएड की परीक्षा बिना नकल और पर्चा आउट हुए कामयाबी के साथ संपन्न हो गयी है।’

राज्यपाल ने श्रम मंत्री विजय कुमार सिन्हा से रविवार को कहा कि उनके महकमे में भी बहुत जालसाजी है। इसमें भी बहुत लोग आईआईटी संस्था खोल देते हैं।आप भी थोड़ी सख्ती करें। कार्यक्रम के बाद जब श्रम मंत्री से राज्यपाल के उनके विभाग को लेकर कही गई बातों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जो कमी है उसे दूर किया जा रहा है और सख्ती बरती जा रही है। हमने सुधार के लिए कई तरह के कदम उठाए हैं और उसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि गरीबी दूर करने के लिए रोजगार जरूरी है और रोजगार के लिए हुनरमंदी आवश्यक है। उन्होंने श्रमिकों को सम्मान देने की वकालत करते हुए राष्ट्रपिता गांधी का भी स्मरण किया और कहा कि गांधी जी कामगारों और कारीगरों के बल पर ही ‘स्वदेशी’ का प्रचार-प्रसार चाहते थे। सुशील ने पाश्चात्य देशों का नजीर देते हुए कहा कि वहां कौशल-विकास को पूरा महत्त्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार में कौशल-विकास की योजनाओं का सफल कार्यान्वयन हो रहा है। सुशील ने कौशल-विकास के साथ-साथ अंग्रेजी और कम्प्यूटर ज्ञान को भी जरूरी बताया तथा कहा कि युवाओं को रोजगार-याचक नहीं रोजगार प्रदाता बनना चाहिए।

 

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Web Title bihar governor discuees irregularities in bed education feild

(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)


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SunnyJuly 15, 2018
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1min20

पूरक परीक्षाएं देते हुए स्टूडेंट्स।



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SunnyJuly 13, 2018
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1min20

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने शुक्रवार को दो विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया। प्रदेश के सहायता प्राप्त स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री कॉलेजों के यह पद विज्ञापन संख्या 46 के तहत मई 2014 में विज्ञापित किए गए थे।

इस विज्ञापन में 45 विषयों के कुल 1652 पद थे। इसके लिए लिखित परीक्षा दिसंबर 2014 से मार्च 2015 के बीच चार चरणों में कराई गई थी। इन 45 में शामिल दो विषयों हिन्दी और अर्थशास्त्र की लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू 12 जून से 12 जुलाई के बीच उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में संपन्न हुए। आयोग की सचिव वंदना त्रिपाठी ने बताया कि हिन्दी के असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 130 अभ्यर्थियों को अंतिम तौर पर चयनित किया गया जबकि 32 अभ्यर्थियों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है।

हिन्दी के लिए चयनित इन 130 अभ्यर्थियों में से 87 सामान्य, 26 ओबीसी, 17 एससी एवं एसटी के हैं। अर्थशास्त्र के लिए 79 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया है। बीस को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। चयनित 79 अभ्यर्थियों में 67 सामान्य श्रेणी के हैं जबकि 11 ओबीसी और एक एससी श्रेणी का है। सचिव ने बताया कि अभ्यर्थियों को मिले अंक एक सप्ताह बाद आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे। आयोग के स्तर से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए संस्तुति उच्च शिक्षा निदेशक को जल्द भेज दी जाएगी। अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र निदेशक के स्तर से ही जारी किया जाएगा।

पवन और लाल साहब ने किया टॉप
असिस्टेंट प्रोफेसर हिन्दी में पवन कुमार सिंह को पहला स्थान मिला है जबकि विजय लक्ष्मी गौर दूसरे और खुशबू सिंह तीसरे स्थान पर हैं। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर अर्थशास्त्र में लाल साहब यादव को पहला स्थान मिला है। दूसरे स्थान पर राजीव कुमार सिंह हैं जबकि दिव्या पाल को तीसरा स्थान मिला है।

तीन विषयों का 18 से होना है इंटरव्यू
विज्ञापन संख्या 46 में शामिल तीन विषयों जुलोजी, फिजिक्स और केमेस्ट्री की लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का इंटरव्यू 18 जुलाई से शुरू होना है। इंटरव्यू दस अगस्त तक चलेगा। इंटरव्यू का कार्यक्रम आयोग की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है।

इविवि के 27 रिसर्च स्कॉलर हुए चयनित
हिन्दी के असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चयनित 130 अभ्यर्थियों में से 27 इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर हैं। हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. केएस पांडेय ने इसे विभाग की बड़ी उपलब्धि बताया है। प्रो. पांडेय ने इन चयनित रिसर्च स्कॉलरों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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SunnyJuly 13, 2018

2min60

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 13 Jul 2018 12:03 PM IST

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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिक्षा सचिव के शपथपत्र को लेकर नाखुशी जताते हुए दोबारा से स्पष्ट रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए हैं। अब एक अगस्त को दोबारा से मामले की सुनवाई होगी।

प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष कोर्ट मित्र ने न्यायालय को बताया कि शिक्षा सचिव द्वारा दायर किया गया शपथपत्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मुताबिक नहीं है। विशेषता जब शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों की तैनाती विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से होगी। राज्य सरकार ने हालांकि 9 जुलाई को 1331 व 1036 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कदम उठाए हैं।

कोर्ट मित्र के मुताबिक 14354 पद अभी तक सरकारी स्कूलों में रिक्त पड़े हैं। कोर्ट मित्र ने न्यायालय को यह भी बताया कि शिखा सचिव न्यायालय को रिक्त पदों के बारे में स्पष्ट ब्यौरा देने में नाकाम रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से जो कदम उठाए गए हैं वह पर्याप्त नहीं है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उठाए गए कदम नाकाफी हैं। प्रदेश उच्च न्यायालय ने कोर्ट मित्र द्वारा न्यायालय के समक्ष रखी दलीलों व कोर्ट में दायर नोट के दृष्टिगत शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए 1 अगस्त तक का समय दिया है।

हिमाचल सरकार ने कम शिक्षकों वाले सरकारी स्कूलों से तबादलों पर पूर्ण रोक लगा दी है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन करते हुए जयराम सरकार ने हाईकोर्ट में तबादलों पर रोक लगाने का शपथपत्र दिया है। अप्रैल महीने में भी शिक्षा सचिव ने इस संदर्भ में आदेश जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद शिक्षकों के धड़ाधड़ तबादले होेते रहे।

अब हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद शिक्षा सचिव ने शपथपत्र के माध्यम से नियमों के तहत ही तबादले करने की बात कही है। नियमों की अनदेखी करने वाले अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज करने की बात भी कही है। वीरवार को शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों सहित जिला उपनिदेशकों को आरटीई के नियम पूरे करने वाले शिक्षकों के ही तबादले करने के आदेश दिए हैं।

आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि आरटीई की अनदेखी करते हुए तबादले करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सहित जिला उपनिदेशकों को अब तबादला आदेश जारी करने के लिए प्रमाणपत्र देना होगा कि संबंधित शिक्षक का तबादला होने से आरटीई के नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है।

आरटीई नियमों की धारा 19(2) में स्पष्ट किया गया है कि प्रारंभिक स्कूलों में 60 बच्चों तक दो शिक्षक होना अनिवार्य हैं जबकि 90 बच्चों के लिए तीन शिक्षक होने चाहिए। 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना भी जरूरी है। दस फीसदी से ज्यादा रिक्त पद भी स्कूल में नहीं होने चाहिए।

1421 प्राइमरी स्कूलों में नहीं हो रहा आरटीई एक्ट का पालन- हिमाचल प्रदेश में 10,734 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें से 1421 स्कूल शिक्षा के अधिकार कानून के नियमों को पूरा ही नहीं कर रहे हैं। 47 स्कूल तो पूर्व कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम छह माह के दौरान खोले और अपग्रेड किए। इन 1421 स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है।

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिक्षा सचिव के शपथपत्र को लेकर नाखुशी जताते हुए दोबारा से स्पष्ट रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए हैं। अब एक अगस्त को दोबारा से मामले की सुनवाई होगी।

प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष कोर्ट मित्र ने न्यायालय को बताया कि शिक्षा सचिव द्वारा दायर किया गया शपथपत्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मुताबिक नहीं है। विशेषता जब शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों की तैनाती विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से होगी। राज्य सरकार ने हालांकि 9 जुलाई को 1331 व 1036 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कदम उठाए हैं।

कोर्ट मित्र के मुताबिक 14354 पद अभी तक सरकारी स्कूलों में रिक्त पड़े हैं। कोर्ट मित्र ने न्यायालय को यह भी बताया कि शिखा सचिव न्यायालय को रिक्त पदों के बारे में स्पष्ट ब्यौरा देने में नाकाम रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से जो कदम उठाए गए हैं वह पर्याप्त नहीं है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उठाए गए कदम नाकाफी हैं। प्रदेश उच्च न्यायालय ने कोर्ट मित्र द्वारा न्यायालय के समक्ष रखी दलीलों व कोर्ट में दायर नोट के दृष्टिगत शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए 1 अगस्त तक का समय दिया है।


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इन स्कूलों से तबादलों पर रोक


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SunnyJuly 12, 2018
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1min50

आज लखनऊ से इलाहाबाद जा रहीं बेसिक शिक्षामंत्री राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने हाईवे के किनारे के दो परिषदीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। विद्यालय बहुत बदहाल मिले। शिक्षा की खराब गुणवत्ता और विद्यालय में घास-फूस व गंदगी देख वे बहुत नाराज हुईं और प्रधानाध्यापिका तथा शिक्षकों को कड़ी फटकार लगाई। बीएसए पीएन सिंह ने यह कहकर अपना बचाव किया कि मैडम, मैं तो अभी जल्द ही जिले में आया हूं। जल्द ही निरीक्षण करके सब दुरुस्त करूंगा।
बेसिक शिक्षा मंत्री सबसे पहले प्राथमिक विद्यालय सरौरा बछरावां पहुंची, जहां अभी तक बच्चों को नई यूनिफार्म नहीं मिली है। बच्चे गंदे और फटी पुरानी यूनिफार्म में थे। विद्यालय परिसर में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई थी और मध्याह्न भोजन वहां तीन दिन से नहीं बना था। बेसिक शिक्षा मंत्री ने प्रधानाध्यापिक अलका ओझा से पूछा कि बच्चों का भोजन क्यों नहीं बना तो, उनका जवाब था कि कनवर्जन कास्ट नहीं है। इस पर मंत्री ने कहा कि भोजन बनना चाहिए कनर्वजन कास्ट का भुगतान तो हो ही जाता है। यह सरासर आपकी लापरवाही और बदइंतजामी है। मंत्री ने कहा कि जब मिशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की स्थिति सुधारने का अधिकार दिया गया है तो यह स्कूल बदहाल क्यों है। कुछ देर के लिए वे उसी से सटे पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरौरा गईं तो वहां बच्चों को यूनिफार्म मिल चुकी है। करीब सवा घंटे के मंत्री के निरीक्षण में पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई।

शुद्ध हिन्दी तक नहीं लिखे थे कक्षा 5 के बच्चे
 कक्षा 5 में पहुंची बेसिक शिक्षा मंत्री शिक्षक की कुर्सी पर स्वयं बैठीं और बच्चों की सुलेख की कापियां चेक करने लगीं। एक बच्चे ने दिनांक को दीनांक लिखा हुआ था। कुछ और कापियों में भी भाषाई अशुद्धियां मिलीं। इस पर उन्होंने संबंधित शिक्षक को बुलाया और डाटा कि क्या पढ़ाते हो। मुझे गलत दिख रहा है और तुम इसी क्लास में पढ़ाते हो तुम्हें क्यों नहीं दिखा। यह सब नहीं चलेगा। ऐसे ही पढ़ाते हो। खामी से शर्मिंदा शिक्षक कोई जवाब नहीं दे पाया।  
शिक्षामित्र की गैरहाजिरी पर मंत्री को मिला गोलमोल जवाब
शिक्षामंत्री ने उपस्थिति रजिस्टर देखा तो शिक्षामित्र गायत्री देवी की हाजिरी लगी थी, लेकिन वे मौजूद नहीं थीं। इस पर उन्होंने प्रधानाचार्य से पूछा तो उनका जवाब गोल मोल था। कुछ देर के बाद आवागमन रजिस्टर पर लिखा मिला कि वह दवा लेने गई हैं। इस प्रकरण को संदिग्ध और पेशबंदी मानते हुए मंत्री ने इसे अपने निजी सचिव को नोट कराया। 
दौड़ते हांफते पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी
मंत्री के आगमन की भनक तो प्राथमिक शिक्षा विभाग में पहले से थी और सभी अधिकारी अपने अपने प्वाइंट पर बुके और माला फूल लिए मुस्तैद थे। परंतु उन्हें इस बात की जानकारी बाद में मिली कि वे प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल सरौरा में रुक गई हैं। नतीजतन बछरावां के खंड शिक्षा अधिकारी पद्मशेखर मौर्य दौड़ते हांफते तब पहुंचे जब वे स्कूल का निरीक्षण कर रही थीं। बुके तो उन्होंने भेंट की, लेकिन मंत्री ने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी। उनके काम से मंत्री खुश नहीं थीं। घटिया और बदहाल व्यवस्था के साथ उनकी बुके मंत्री को प्रभावित नहीं कर पाई।

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SunnyJuly 12, 2018

1min50

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 12 Jul 2018 11:52 AM IST

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प्रदेश में ऐसा कोई भी सरकारी स्कूल नहीं है, जहां कम से कम एक शिक्षक तैनात न हो। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर बुधवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने शपथपत्र के माध्यम से यह जानकारी दी। मामले पर वीरवार को दोबारा से सुनवाई होगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। शिक्षा सचिव ने बताया कि शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चंबा के बघेईगढ़ और मंडी के वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दोगरी में शिक्षकों के पद भर दिए गए हैं।

उधर, वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दोगरी के बच्चों ने हाईकोर्ट के नाम पत्र लिखकर शिक्षकों को तैनात करने की गुहार लगाई थी। इस स्कूल में टीजीटी नॉन मेडिकल गणित का एक पद वर्ष 2006 से, टीजीटी विज्ञान का पद मई 2014 से, टीजीटी आर्ट्स के 2 पद 14 जुलाई 2016 से  और भाषा अध्यापक का एक पद वर्ष 1998 से रिक्त चल रहा था।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बघेईगढ़ में 5 शिक्षकों के ज्वाइन न करने पर स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी भूख हड़ताल पर चले गए थे। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में रिक्त पदों को भरा।

प्रदेश उच्च न्यायालय ने विभिन्न स्कूलों में खाली पड़े हजारों शिक्षकों के पदों को तुरंत भरने के लिए राज्य सरकार को आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग की ओर से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को तुरंत भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

शिक्षा विभाग टीजीटी और जेबीटी के करीब 2500 नए पद बैचवाइज और आयोग के माध्यम से भर रहा है।

प्रदेश में ऐसा कोई भी सरकारी स्कूल नहीं है, जहां कम से कम एक शिक्षक तैनात न हो। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर बुधवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने शपथपत्र के माध्यम से यह जानकारी दी। मामले पर वीरवार को दोबारा से सुनवाई होगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। शिक्षा सचिव ने बताया कि शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चंबा के बघेईगढ़ और मंडी के वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दोगरी में शिक्षकों के पद भर दिए गए हैं।

उधर, वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दोगरी के बच्चों ने हाईकोर्ट के नाम पत्र लिखकर शिक्षकों को तैनात करने की गुहार लगाई थी। इस स्कूल में टीजीटी नॉन मेडिकल गणित का एक पद वर्ष 2006 से, टीजीटी विज्ञान का पद मई 2014 से, टीजीटी आर्ट्स के 2 पद 14 जुलाई 2016 से  और भाषा अध्यापक का एक पद वर्ष 1998 से रिक्त चल रहा था।


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2500 नए पदों पर भर्ती


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