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SunnySeptember 21, 2018
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नई दिल्ली

देश को नई शिक्षा नीति अगले महीने मिलने की उम्मीद है। एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने नवभारत टाइम्स से बात करते हुए कहा कि 21 अक्टूबर तक नई शिक्षा नीति आ जाएगी, जो देश की शिक्षा व्यवस्था को 2020 से 2040 तक का ध्यान रखते हुए गाइड करेगी। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी अपने तीन दिन की लेक्चर सीरीज में उम्मीद जताई कि नई शिक्षा नीति जल्द आएगी। साथ ही कहा कि वेद, पुराण, रामायण सहित मूल्यबोध पढ़ाए जाने चाहिए और यह शिक्षा नीति का हिस्सा होना चाहिए।

नई शिक्षा नीति तैयार होने को लेकर एचआरडी मिनिस्ट्री कई बार डेडलाइन दे चुकी है। इसे वैसे तो पिछले साल ही आना था, लेकिन फिर इस साल 31 मार्च तक की तारीख दी गई। लेकिऩ इसके बाद फिर से पॉलिसी ड्राफ्ट बना रही कमिटी को और तीन महीने का वक्त दिया गया लेकिन जून तक भी पॉलिसी नहीं आ पाई। इसके बाद फिर वक्त और बढ़ाया गया। पॉलिसी में हो रही देरी को लेकर संघ के पदाधिकारी भी बीजेपी के साथ समन्वय मीटिंग में सवाल उठाते रहे हैं। अब पॉलिसी के अगले महीने आने की उम्मीद है।

एनबीटी से बात करते हुए एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पहली बार भारत में शिक्षा नीति बनाने को लेकर इतनी बड़ी एक्सरसाइज हुई है। हमने पंचायत स्तर से लेकर संसद तक हर स्तर पर शिक्षा नीति के लिए सुझाव लिए हैं। उन्होंने कहा कि इसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है और 21 अक्टूबर तक यह सामने आ जाएगा।


‘शिक्षा नीति में शामिल होने चाहिए अपने देश के विचार’

संघ की तरफ से भी शिक्षा नीति को लेकर सुझाव दिए गए थे। संघ को उम्मीद है कि उन सुझावों को शिक्षा नीति में जगह मिलेगी। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि ‘आधुनिक शिक्षा प्रणाली में जो लेने लायक है वह लेते हुए अपनी परंपरा से जो लेना है वह लेकर एक नई शिक्षा नीति बनानी चाहिए, नई शिक्षा नीति आने वाली है आशा करता हूं कि उसमें यह सब बातें होंगी।’ भागवत ने इस पर जोर दिया कि शिक्षा नीति ऐसी हो, जिससे शिक्षा में अपने देश का विचार धन मिले।


भागवत बोले, वेद, पुराण, त्रिपिटक समेत अन्य धर्मों के मूल्य बोध भी हों शामिल


उन्होंने कहा कि ‘चारों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, गीता, दर्शन, जैन धर्म की शिक्षा, त्रिपिटक (बौद्ध धर्म ग्रंथ), गुरुग्रंथ (सिखों का धार्मिक ग्रंथ) संत वाणी, ये शिक्षा में भारत के लोगों को मिलना ही चाहिए।’ संघ प्रमुख ने कहा कि और भी संप्रदाय हैं, जो बाहर से आएं हैं उनकी अच्छी खासी संख्या है, उसमें भी जो मूल्यबोध है, वह सिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिलीजन की शिक्षा भले ही हम न दें लेकिन दृष्टि, मूल्यबोध इस दृष्टि से और उससे निकलने वाले संस्कारों की दृष्टि से इन सबको पढ़ाना चाहिए।

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SunnySeptember 20, 2018
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इंडियन बैंकिंग एंड पर्सनेल सेलेक्शन (IBPS) ने  7275 क्लर्क के पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. IBPS क्लर्क के लिए आवेदन प्रक्रिया 18 सितंबर, 2018 से शुरू हो गई है. उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.ibps.in पर 10 अक्टूबर, 2018 तक आवेदन कर सकेंगे.

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SunnySeptember 19, 2018
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टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली

दिल्ली कैबिनेट ने सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एसएमसी को विद्यालय कल्याण समिति का नाम दिया गया है और गेस्ट टीचर के मेहनताने को रिवाइज किया गया है।

इन कैमरों को स्कूल के सभी कोनों, वॉशरूम के बाहर, खाली कमरों और वैसे जगहों में लगाया जाएगा जहां लोग नहीं जाते। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दिल्ली-एनसीआर में बच्चों के यौन शोषण के मामले को देखते हुए डायरेक्टोरेट ऑफ एजुकेशन ने यह प्रस्ताव रखा था। बयान के मुताबिक, ‘कैबिनेट ने प्रशासनिक मंजूरी दे दी है और डायरेक्टरोरेट ऑफ एजुकेशन के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए धन आवंटित किए गए हैं। विभाग के प्रस्ताव को प्रशासनिक मंजूरी की जरूरत थी और आपूर्ति, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग, कमिशनिंग तथा समग्र वार्षिक रख-रखाव के लिए धन की आवश्यकता थी।’

सीएम अरविंद केजरीवाल ने पिछले साल इस प्रस्ताव की घोषणा की थी, जिसके तहत पैरंट्स ऐप के जरिए बच्चों को स्कूल में पढ़ते लाइव देख पाएंगे। हालांकि, इस पहल की शिक्षाविदों ने निंदा की है वहीं कुछ शिक्षकों और यहां तक की प्रधानाध्यापकों ने इस कदम का स्वागत किया है और उनका मानना है कि यह स्कूल के सर्वे में सहयोग करेगा।

 

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Web Title cameras in delhi government schools boost for guest faculty

(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)


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SunnySeptember 19, 2018
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  • एमएमयू की फीस बढ़ाने की खुलेंगी परतें

Danik Bhaskar | Sep 19, 2018, 06:42 AM IST

शिमला. 2017 में एमएमयू के मेडिकल काॅलेज की फीस तत्कालीन अधिकारियों ने क्यों बढ़ाई थी और बिना बैठक के ही प्रोसिडिंग क्यों जारी की, इस मामले के पूरे रिकाॅर्ड खंगालने की जयराम सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग के माध्यम से इस पूरे मामले की परतें खोली जानी हैं।

सूत्र बताते हैं कि 2017 में पूर्व सरकार के समय में जब निजी मेडिकल काॅलेज की फीस तय की गई तो बताया कि इसके लिए कमेटी की बैठक हो चुकी है, लेकिन रिकाॅर्ड खंगालने पर सामने आया कि पहले इसमें बैठक न होने की बात कही गई। इसके बाद पूरे मामले की प्रोसिडिंग तैयार कर दी। 

सूत्रों की मानें तो इस कमेटी की बैठक में ही फीस को हर साल दस फीसदी तक बढ़ाने की सिफारिश की गई। फीस बढ़ने का अभिभावक भी विरोध कर रहे थे। फीस बढ़ाने के इस फैसले का तत्कालीन कुछ अधिकारियों ने भी विरोध किया था, लेकिन आला अधिकारियों की हरी झंडी के बाद फीस को बढ़ा दिया गया। वहीं, मेडिकल काॅलेज की फीस का नया ढांचा शिक्षा विभाग की आेर से भी तय कर दिया। 

सितंबर 2017 में बढ़ाई गई थी फीस : एमएमयू की फीस स्ट्रक्चर को लेकर 2017 में फिर से विवाद खड़ा हुआ था। सितंबर 2017 में तत्कालीन सरकार ने न केवल एमबीबीएस के स्टेट कोटे की फीस को 5.25 लाख से बढ़ाकर 7 लाख किया था, बल्कि एक साथ 5 सालों की फीस भी तय कर दी है।

हर साल फीस में 10 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था। पहले राज्य सरकार ने 28 अगस्त, 2017 को एमएमयू फीस रिवाइज्ड कर दस फीसदी बढ़ोतरी का निर्णय लिया था। 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाकर इसे 33 फीसदी तक बढ़ा दिया था। इस पर विवाद हो गया तो क्लेरिकल मिस्टेक बता कर पल्ला झाड़ा। इसके बाद फिर से फीस स्ट्रक्चर जारी किया आैर इसमें कोई ज्यादा बदलाव नहीं किया। 

हर बार एडमिशन के पहले फीस पर होता रहा विवाद : राज्य में एमएमयू के निजी मेडिकल कॉलेज के फीस ढांचे को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। राज्य सरकार या फिर न्यायालय के आदेशों के बाद ही काॅलेज में प्रवेश मिल पाता है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद ही एक बार को कॅालेज की फीस तय की गई थी।

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SunnySeptember 18, 2018

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ख़बर सुनें

बोर्डिंग स्कूल में छात्रा से गैंगरेप की घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल की एनओसी निरस्त करने की सिफारिश की है। विभागीय अधिकारियों की टीम ने मंगलवार को स्कूल का निरीक्षण किया, जिसमें कई तरह की खामियां मिली। वहीं, सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय ने भी केंद्रीय कार्यालय को पत्र भेजकर कार्रवाई की सिफारिश की है। 

मंगलवार को मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी के निर्देश पर विभागीय अधिकारियों की एक टीम स्कूल पहुंची। जांच के दौरान स्कूल में कई तरह की खामियां मिली। स्कूल का पंजीकरण डे-बोर्डिंग के रूप में है, जबकि वहां हॉस्टल में छात्र-छात्राएं भी रहती हैं।
 

स्कूल के एक कमरे में फर्श और दीवारें टूटी मिली। वहीं, जिस छात्रावास में छात्रों को ठहराया गया है, उसके ऊपर दो मंजिलों का निर्माण किया जा रहा है। मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी ने बताया कि निदेशक आरके कुंवर को पत्र भेजकर एनओसी निरस्त करने की सिफारिश की गई है। 

 

दूसरी ओर स्कूल का जवाब मिलने के बाद सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक रणबीर सिंह ने केंद्रीय कार्यालय को पत्र लिखकर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। ऐसे मामलों में सीबीएसई स्कूल की मान्यता भी निरस्त कर सकता है।

बोर्डिंग स्कूलों की नीति नहीं
एजुकेशन हब के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड में बोर्डिंग स्कूलों की कोई नीति नहीं है। प्रदेश के कई बोर्डिंग स्कूल दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यहां कई बड़े घरों के बच्चे पढ़ाई करते हैं। इन विद्यालयों में हर बच्चे से सालाना लाखों रुपये फीस वसूली जाती है।

 

शिक्षा ही नहीं प्रदेश के पर्यटन व अन्य उद्योगों को भी इसका फायदा मिलता है। इसके बावजूद राज्य सरकार आज तक इनकी कोई नीति तैयार नहीं कर पाई है। विद्यालयों में भोजन, सुरक्षा, वार्डन, कमरों की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।

बोर्डिंग स्कूल में छात्रा से गैंगरेप की घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल की एनओसी निरस्त करने की सिफारिश की है। विभागीय अधिकारियों की टीम ने मंगलवार को स्कूल का निरीक्षण किया, जिसमें कई तरह की खामियां मिली। वहीं, सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय ने भी केंद्रीय कार्यालय को पत्र भेजकर कार्रवाई की सिफारिश की है। 

मंगलवार को मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी के निर्देश पर विभागीय अधिकारियों की एक टीम स्कूल पहुंची। जांच के दौरान स्कूल में कई तरह की खामियां मिली। स्कूल का पंजीकरण डे-बोर्डिंग के रूप में है, जबकि वहां हॉस्टल में छात्र-छात्राएं भी रहती हैं।
 

स्कूल के एक कमरे में फर्श और दीवारें टूटी मिली। वहीं, जिस छात्रावास में छात्रों को ठहराया गया है, उसके ऊपर दो मंजिलों का निर्माण किया जा रहा है। मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी ने बताया कि निदेशक आरके कुंवर को पत्र भेजकर एनओसी निरस्त करने की सिफारिश की गई है। 

 

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बोर्डिंग स्कूलों की नीति नहीं


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SunnySeptember 18, 2018
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नंद किशोर श्रीमाली

प्राचीन काल से भारत में शिक्षा और दीक्षा पर समान बल दिया गया है। शिक्षा का अर्थ सीखना होता है। ज्ञान जब विनीत भाव से गुरु चरणों में बैठकर ग्रहण किया जाता था और उस ज्ञान को जीवन में उतार लिया जाता है, तब उसे दीक्षा कहा जाता था। रामचरितमानस में श्रीराम की शिक्षा-दीक्षा के संबंध में गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं- गुरु गृह गए पढ़न रघुराई, अल्प काल विद्या सब आई। समय के साथ शिक्षा प्रणाली में बदलाव होते गए। लेकिन आज जब विद्या अध्ययन समाप्त होता है, उस समय दीक्षांत कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें डिग्री प्रदान की जाती है।

जीवन में शिक्षा और दीक्षा का समन्वय अनिवार्य है। उच्च शिक्षा उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है पर दीक्षा आपको जीवन मूल्यों का आधार प्रदान करती है। रावण प्रकांड पंडित था पर उसमें दीक्षा का अभाव था, जिस कारण उसका अंत हो गया। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मनुष्य के भीतर संवेदना, प्रेम, भाईचारे की कमी लुप्तप्राय दीक्षा का परिणाम है। लेकिन पहले यह समझिए कि दीक्षा क्या है?

‘द’ का अर्थ दमन अर्थात इन्द्रिय निग्रह, ‘ई’ का अर्थ ईश्वर की उपासना, ‘क्ष’ का अर्थ वासनाओं का क्षय और ‘आ’ का अर्थ आनंद है। स्पष्ट रूप से शिक्षा बाह्य ज्ञान है। इसे अर्जित किया जाता है पर दीक्षा अपने अंदर स्थित परमात्मा के दर्शन कर लेना है। अन्तःकरण में जैसे-जैसे दिव्य चेतना का प्रकाश उभरता है, आप ब्रह्म के साथ तारतम्य स्थापित करना शुरू करते है। मूलतः हम सबमें परमात्मा की छवि है, क्योंकि हम सब में ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का नाद गुंजित है। अध्यात्म के मार्ग में उन्नति, बिना दीक्षा संस्कार के संभव नहीं है। अध्यात्म हमें अंतर्मन की यात्रा पर ले जाता है पर हमारी दृष्टि बहिर्मुखी है। उसे अंतर की ओर मोड़ने के लिए एक खास किस्म की प्रेरणा, एक विशेष प्रकार की ऊर्जा की आवश्यकता होती है और यह ऊर्जा दीक्षा संस्कार गुरु स्पर्श अथवा नेत्रों के माध्यम से शिष्य में प्रवाहित करते हैं।

दीक्षा संस्कार विनय भाव जाग्रत करती है और इस विनय भाव के जाग्रत होने के बाद आपमें सद्विचार और सद्गुण स्वतः प्रस्फुटित हो जाते हैं। अगर आज आप समाज में अवसाद (डिप्रेशन) पर मंथन करें तो पाएंगे कि सफलता की अट्टालिका जोड़ने में जीवन मूल्य कहीं पिछड़ से गए हैं। इसी कारणवश जब मन अनुसार सोचा नहीं होता है, तब मन अत्यधिक उदास हो जाता है। दीक्षा की शुरुआत ही इन्द्रिय-निग्रह से है। मन को मारना नहीं है, पर मन पर लगाम कसना अनिवार्य है, नहीं तो मन व्यर्थ भटकता रहता है।

समझने की बात है कि शिष्य जब गुरु के साथ मन के तार जोड़कर विद्या ग्रहण करता है, तब उसमें संस्कार, आस्था जैसे भावों का उदय होता है। विद्या प्राप्ति का प्रारम्भ शिक्षा के साथ होता है और विनय और पात्रता का मार्ग दीक्षा आपके लिए उपलब्ध कराती है।

प्रस्तुति: अर्चना झा


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SunnySeptember 17, 2018
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नवभारत टाइम्स | Updated:

मुरादनगर

यदि मन में कुछ करने की इच्छा और दृढ संकल्प हो तो बड़ी से बड़ी बाधा आसानी से पार की जा सकती है। बसंतपुर सैतली गांव की रहने वाली पांच महिलाओं ने इसे सच साबित कर दिया है। दरअसल इन महिलाओं ने पारिवारिक कारणों के चलते शादी से पहले ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी, पर अब इनके कदम स्कूल की ओर दोबारा चल पड़े हैं, जो शायद कभी नहीं रुकने वाले हैं। इन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने की ठान ली है।

अपने प्रधान के सहयोग से गांव की चार महिलाओं और एक युवती ने अलग-अलग स्कूलों में दाखिला लिया। दो तो अपने बच्चों की क्लास में पढ़ती हैं।

शिक्षित बनो आगे बढ़ो कार्यक्रम चलाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित ग्राम प्रधान ने शिक्षित बनो, आगे बढ़ो कार्यक्रम शुरू किया था। इससे प्रभावित होकर चार शादीशुदा महिलाओं और एक युवती ने अपनी पढ़ाी पूरी करने का विचार बनाया। इनमें शालिनी (41), फरजाना (38), रुबिना (36), यास्मी(34 ) व रोशनी (16) शामिल हैं। फरजाना कक्षा 11, शालिनी, रुबिना और यास्मीन कक्षा आठ व रोशनी कक्षा 11 में पढ़ती हैं। शालिनी और रुबिना ने गांव के स्कूल में दाखिला लिया है।


बेटी होने के कारण नहीं कराई आगे की पढाई


शालिनी बताती हैं, ‘कक्षा सात की पढ़ाई करने के बाद परिवारवालों ने घर बैठा दिया। दो साल बाद शादी कर दी। चार बच्चे हैं। सात साल पहले पति से विवाद हो गया जिसके बाद मैं बच्चों के साथ अपने मायके चली आई। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद पढ़ाई पूरी करने की इच्छा जागी। ग्राम प्रधान ने आठवीं में मेरा दाखिला करा दिया।’ फरजाना, रुबिना, यास्मीन ने भी बताया कि लड़की होने के की वजह से उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

 

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(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)


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