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SunnyJanuary 3, 2019
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Publish Date:Wed, 02 Jan 2019 09:56 PM (IST)

नई दिल्ली, एएनआइ। बैंकिंग क्षेत्र में कंसोलीडेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के विजया बैंक और देना बैंक के बैंक आफ बड़ौदा में विलय को मंजूरी दे दी है। एक अप्रैल 2019 से ये तीनों बैंक मिलकर एक हो जाएंगे। विलय के बाद यह बैंक एसबीआइ व आइसीआइसीआई के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक हो जाएगा।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने दी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक के विलय को मंजूरी दी। यह पहली बार है जब सरकार ने तीन बैंकों के एक साथ विलय को मंजूरी दी है। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह विलय एक मजबूत तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंक बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विलय के बाद देना बैंक और विजया बैंक के सभी कर्मचारी बैंक ऑफ बड़ौदा में आ जाएंगे और किसी भी कर्मचारी को निकाला नहीं जाएगा।

बैंक ऑफ बड़ोदा का होगा सबसे बड़ा शेयर
इस बीच बैंक ऑफ बड़ौदा ने शेयर बाजारों को विलय के तहत शेयरों के आदान प्रदान संबंधी फैसले से अवगत करा दिया है। इसके तहत देना बैंक के एक हजार शेयरों के बदले बैंक ऑफ बड़ौदा के 110 शेयर मिलेंगे जबकि विजया बैंक के 1000 शेयरों के बदले 402 शेयर दिये जाएंगे। बुधवार को बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों के भाव 3.3 प्रतिशत गिरकर 119.40 पर रहा जबकि विजया बैंक का शेयर बिना किसी बदलाव के 51.05 रुपये रहा। बाजार बंद होने के समय देना बैंक के एक शेयर की कीमत 17.95 रुपये थी।

1 अप्रैल 2019 से लागू होगी योजना
सरकारी वक्तव्य में कहा गया है कि विलय की योजना एक अप्रैल 2019 से प्रभावी होगी। विजया बैंक और देना बैंक के सभी स्थायी और नियमित कर्मचारियों को विलय के बाद भी उसी पद, वेतन और भत्ते पर रखा जाएगा जिस पर वे अपने बैंक में कार्यरत थे। विलय के बाद बैंक का बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि सभी कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए।

विलय के बाद अर्थव्यवस्था की जरूरतें होंगी आसानी से पूरी
सरकार का कहना है कि विलय के बाद यह बैंक बदलते माहौल में अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने, संसाधन जुटाने और आघात सहने में सक्षम होगा। इससे वैश्विक स्तर का बैंक बनेगा। विजया बैंक और देना बैंक का आकार छोटा होने से उनकी भी कुछ खासियतें हैं, इसलिए इसका लाभ भी विलय के बाद बने बैंक को होगा। इससे ग्राहकों को भी बेहतर बैंकिंग सुविधा, उत्पाद और सेवाओं की व्यापक पेशकश और आसान ऋण उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

बैंको के कर्मचारी इस विलय के खिलाफ
हालांकि, इस विलय के खिलाफ बैंक कर्मचारी लगातार अपना विरोध जता रहे हैं। पिछले साल 21 और 26 दिसंबर को लगभग 10 लाख बैंक कर्मचारियों ने इस विलय के खिलाफ हड़ताल की थी। इसके पहले पिछले साल भारत सरकार ने देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय कर दिया था।  इसके बाद स्टेट बैंक दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल हो गया। उसी समय केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली ‘वैकल्पिक व्यवस्था’ ने तीन बैंकों के विलय का निर्णय ले लिया था।

कैबिनट ने नेशनल हेल्थ एजेंसी के रिस्ट्रकचरिंग को भी मंजूरी प्रदान की है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का बेहतर तरीके से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। अब इसे नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश के अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन के लिए संविधान (अनुसूचित जनजाति) संशोधन विधेयक 2018 को भी मंजूरी दी है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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SunnyJanuary 2, 2019
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जयपुर। आर्थिक और वित्त जगत में नए साल की दस्तक कई नई व्यवस्थाएं लेकर आई है। 1 जनवरी से कई नए नियम लागू हो रहे हैं, जिनके चलते व्यवस्थाओं में बदलाव नजर आएंगे। कई पुरानी चीजें साल के पहले दिन से बंद हो रही हैं या एक नए स्वरूप में सामने आ रही हैं।

ऐक्सिडेंटल कवर होगा 15 लाख का:

1 जनवरी से वाहनों के बीमे के तहत दुर्घटना बीमे (ऐक्सिडेंटल कवर) की न्यूनतम राशि 1 लाख से बढ़कर 15 लाख रुपए हो जाएगी। इंश्योरेंस रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) आदेश जारी कर इसके लिए 750 रुपए का प्रीमियम तय कर चुका है। 31 दिसंबर 2018 तक यह रकम दोपहिया वाहनों के लिए 1 लाख रुपए और प्राइवेट अथवा कमर्शल कारों के लिए 2 लाख रुपए थी।

नहीं चलेंगे मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले कार्ड :

रिजर्व बैंक के निर्देशों के मुताबिक सभी बैंकों के पुराने मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले क्रडिट व डेबिट कार्ड 1 जनवरी से बंद हो जाएंगे। अब केवल चिप वाले कार्ड ही चलेंगे। कार्डों की क्लोनिंग के जरिए बढ़ते फर्जीवाडों पर लगाम कसने के लिए यह कदम उठाया गया है।

जीएसटी घटने से 23 चीजें हो जाएंगी सस्ती:
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरें घटने से 23 चीजें सस्ती होंगी। इनमें टीवी, मॉनीटर, पावर बैंक, फ्रोजेन सब्जियों जैसी आम उपयोग की चीजें शामिल हैं। इसके अलावा सौ रुपए तक के सिनेमा टिकट भी सस्ते होंगे।

आयकर रिटर्न: अब देनी पड़ेगी पेनाल्टी:
वित्त वर्ष 2017-18 का रिटर्न के लिए 31 दिसंबर तक 5 लाख से अधिक सालाना आय वालों को 5 हजार रुपए की पेनाल्टी देने के बाद ही रिटर्न भरने की पात्रता थी। अबतक रिटर्न न भरने वालों पर एक जनवरी से यह पेनाल्टी बढ़कर 10 हजार रुपए हो जाएगी। हालांकि 5 लाख से कम आय वालों के लिए पेनाल्टी 1 हजार रुपए ही रहेगी।

नंबर रजिस्टर नहीं तो बंद होगी नेट बैंकिंग:
भारतीय स्टेट बैंक के उन ग्राहकों की नेट बैंकिंग 1 जनवरी से बंद हो जाएगी जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर नहीं कराया है। इसलिए खाताधारक अपने मोबाइल नंबर को अपने शाखा में रजिस्टर्ड करा लें।

नॉन-सीटीएस चेक अब नहीं चलेंगे:
अगर आपके पास सीटीएस वाली चेकबुक नहीं है, तो नए साल में चेक काटना महंगा पड़ सकता है, क्योंकि 1 जनवरी से ऐसे चेक बाउंस हो जाएंगे। रिजर्व बैंक तीन महीने पहले ही इसके निर्देश जारी कर चुका है।

नए साल से उम्मीद प्रदूषण की समस्या से मिलेगी बड़ी राहत:
नए साल में प्रदूषण पर नकेल कसने की उम्मीद है। एक अप्रैल 2019 से देश के 13 बड़े शहरों में बीएस-6 मानकों वाले पेट्रोल व डीजल की बिक्री शुरू होगी, जबकि 2020 से इसे पूरे पूरे देश में लागू किया जाएगा। इसी साल बीएस-6 वाहनों की बिक्री शुरू होगी। इसके अलावा नए साल में कई नई इ-कारें बाजार में आने से भी प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है। हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा और टोयोटा जैसी कई कंपनियां अपनी नई इ-कारें और हाइब्रिड कारें लाने की तैयारी में हैं।

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SunnyJanuary 1, 2019
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Publish Date:Fri, 28 Dec 2018 03:30 PM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। सरकारी बैंकों को इस महीने के अंत तक करीब 28,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी दिए जाने की घोषणा के बाद चुनिंदा पीएसयू बैंकों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है। शुक्रवार की ट्रेडिंग के दौरान केनरा बैंक, पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी), विजया बैंक और सिंडीकेट बैंक के शेयर तीन महीने के उच्चतम स्तर को छूने में सफल रहे।

इन चारों बैंकों के अलावा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, इंडियन बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में 1-8 फीसद तक का उछाल आया।

पिछले दो महीनों के दौरान पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 20 फीसद तक की मजबूती आई है, जबकि इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स में करीब 9 फीसद का उछाल देखने को मिला है।दिसंबर अंत तक सबसे ज्यादा 10,086 करोड़ रुपये की राशि बैंक ऑफ इंडिया को जारी होगी। दूसरे स्थान पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) है, जिसे 5,500 करोड़ रुपये मिलेंगे। वहीं यूनाइटेड बैंक को 2159 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 1678 करोड़ रुपये, यूको बैंक को 3056 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 4498 करोड़ रुपये और सिंडीकेट बैंक को 1638 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।

सरकार की आर्थिक मदद मिलने के बाद इनमें से कई बैंक आरबीआइ के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) नियम के दायरे से निकल जाएंगे। इससे आम जनता समेत छोटे व मझोले उद्योगों को ज्यादा कर्ज मिलने का रास्ता भी साफ होगा क्योंकि पीसीए की वजह से अभी 11 बैंकों की कई गतिविधियों पर पाबंदी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही में कहा था कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों को 41 हजार करोड़ की अतिरिक्त मदद दी जाएगी। इस मदद के लिए राशि जुटाने को सरकार ने सदन से मंजूरी भी हासिल कर ली है। इस वर्ष सरकार की तरफ से बैंकों को 65 हजार करोड़ के बांड्स जारी होने थे। 23 हजार करोड़ के बांड्स पहले जारी हो चुके हैं जबकि शेष 41 हजार करोड़ के बांड्स अब जारी करने की तैयारी है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान एनपीए में कमी आई है। इस वर्ष मार्च के आखिर में सरकारी बैंकों का कुल फंसा कर्ज (एनपीए) 9.60 लाख करोड़ का था जो सितंबर में घट कर 9.46 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

यह भी पढ़ें: नियमों में बदलाव के बाद ई-कॉमर्स इंडस्ट्री के नियामक बना सकती सरकार!

Posted By: Abhishek Parashar

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SunnyDecember 31, 2018
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1min160

Publish Date:Mon, 31 Dec 2018 12:10 AM (IST)

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। ऐसे समय जब देश में कृषि कर्ज माफी एक बड़ा मुद्दा बन चला है तब आरबीआइ ने एक बार फिर इसके प्रति परोक्ष चेतावनी दी है। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए राज्य सरकारों की तरफ से पिछले दो वर्षो में लागू की गई इस तरह की योजनाओं के असर को आधार बनाया है। इन योजनाओं का असर देश के बैंकिंग सेक्टर पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। मोटे तौर पर आरबीआइ ने राज्यों की कृषि कर्ज माफी योजना के चार बड़े विपरीत असर का जिक्र किया है। इसका सबसे विपरीत असर तो यही होता है कि फंसे कर्जे बढ़ने के खतरे को देख बैंक किसानों को कर्ज देने में ही कंजूसी बरतने लगते हैं।

कृषि क्षेत्र में एनपीए का अनुपात 8.5 फीसद से बढ़कर 8.9 फीसद हुआ

आरबीआइ के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2016-17 में कृषि कार्य के लिए आवंटित कर्ज की वृद्धि दर 12.4 फीसद थी जो वर्ष 2017-18 में घट कर 3.8 फीसद रह गई थी। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीने में यह 5.8 फीसद है। आरबीआइ ने इसके लिए कृषि कर्ज माफी को जिम्मेदार तो ठहराया है, लेकिन इसके पीछे की वजह पर साफ तौर पर प्रकाश नहीं डाला है। इसकी वजह यह बताया जा रहा है कि राज्यों में जब भी चुनावों से पहले कृषि कर्ज माफी पर जब राजनीतिक बहस शुरु होती है तो किसान कर्जे को चुकाना कम कर देते हैं। ऐसा माहौल हाल में संपन्न मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ चुनाव से पहले इन राज्यो में देखा गया था और बैंकों ने इसकी शिकायत वित्त मंत्रालय से भी की थी। किसानों की तरफ से कर्ज नहीं मिलने की आशंका से बैंक भी उन्हें कर्ज देने से हाथ खींचने लगते हैं।

कृषि क्षेत्र को आवंटित कर्ज की वृद्धि दर 12.4 फीसद से घट कर 3.8 फीसद हुई

आरबीआइ की तरफ से पेश एक दूसरा डाटा देखेंगे तो यह बात और स्पष्ट होती है। कृषि क्षेत्र में बैंकों के फंसे कर्ज यानी एनपीए (नॉन परफॉरमिंग एसेट्स- नहीं चुकाई गई कर्ज की राशि) की राशि वर्ष 2016-17 में 1,30,500 करोड़ रुपये की थी जो वर्ष 2017-18 में बढ़ कर 1,57,400 करोड़ रुपये हो गई। इसमें छोटे व सीमांत किसानों की तरफ से नही लौटाये गये कर्जे की राशि (जो एनपीए में तब्दील हो गये) को देखे तो यह 75,700 करोड़ रुपये से बढ़ कर 82,100 करोड़ रुपये हो गई है।

सनद रहे कि कृषि कर्ज माफी के दायरे में छोटे व सीमांत किसान ही ज्यादा आते हैं। आरबीआइ ने कहा है कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान कृषि कर्ज की रफ्तार इसलिए कमजोर पड़ी है कि बैंकों को वहां ज्यादा जोखिम दिखा और कई राज्यों ने कृषि कर्ज को माफ करने का ऐलान किया।

वर्ष 2016-17 और वर्ष 2017-18 के दौरान महाराष्ट्र ने 34 हजार करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश मे 36 हजार करोड़ रुपये, पंजाब में 10 हजार करोड़ रुपये, कर्नाटक में 8 हजार करोड़ रुपये के कृषि कर्ज माफ किये गये हैं। इसके अलावा इस महीने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी किसानों के कर्ज माफ करने की प्रक्रिया शुरु की गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आगामी आम चुनाव में कृषि कर्ज माफी को एक बड़ा मुद्दा बनाने का ऐलान कर दिया है। सरकार के भीतर भी किसानों को कर्ज माफ करने को लेकर विमर्श चल रहा है।

Posted By: Bhupendra Singh

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