Banking & Finance Archives - earn money online hindi news: Sunnywebmoney.com

SunnyNovember 16, 2018
DB-Logo.jpg

1min110

नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने तो योजना आर्थिक वृद्धि दर को 2000 मध्य की तरह दो अंकों में ले जाने की थी। तब थोड़े ही लोगों को अंदाजा होगा कि इसमें फाइनेंशियल इंडस्ट्री सबसे बड़ी बाधा होगी। सरकारी बैंक 100 अरब डॉलर के डूबते कर्ज से निपटने में 7 साल तक नाकाम रहे। अब निजी सिस्टम के कुछ हिस्सों में घबराहट है। एक बैंक प्रमुख का कहना है कि हालात 1998 के एशियाई संकट या 2008 की वैश्विक गिरावट जैसे हैं।

सितंबर में सड़कों व बिजलीघरों को फाइनेंस करने वाली फर्म आईएल एंड एफएस 13 अरब डॉलर के कर्ज का भुगतान नहीं कर पाई। अब यह संक्रमण शेडो बैंक कहलाने वाली भारत की गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं में फैल गया है, जो अपनी फंडिंग के लिए 250 से 300 अरब डॉलर की उधारी पर निर्भर है। इस साल उनकी मार्केट वैल्यू औसतन 40% गिरी है। इस संकट से कैसे निपटा जाए इस पर सरकार व आरबीआई में कटु विवाद पैदा हो गया है।

भारत की वित्त प्रणाली में चीन और अमेरिका की विशेषताएं हैं, जिसके सामने धीमी गति का बैंकिंग संकट है, साथ ही तीव्र गति से तरलता घटने का वैसा संकट है जिसने वॉल स्ट्रीट को 2008 में घेर लिया था। इतने वर्षों में फाइनेंस इंडस्ट्री हाइब्रिड किस्म की हो गई है, उससे उन ताकतों के विरोधाभासी उद्‌देश्यों का पता चलता है, जिन्होंने इसे आकार दिया है।

सरकार ऐसे लचीले बैंक चाहती है, जो गरीबों और बुनियादी ढांचे के लिए ऋण देने को राजी हो और सरकारी बॉन्ड भी खरीद लें। आरबीआई का जोर स्थिरता पर रहता है इसलिए वह इस तरह के जोखिम लेने के खिलाफ है। लोन के हिसाब से आधा सिस्टम सरकारी बैंकों का है। ये सूचीबद्ध होते हैं पर शीर्ष पदों पर नियुक्तियां सरकार करती हैं और प्राय: विनाशकारी दखल देती है। 25 निजी बैंक भी हैं, जिनमें से कुछ तो एशिया के श्रेष्ठतम में शुमार है जैसे एचडीएफसी बैंक और कोटक ट्रेड, जो उनकी बुक वैल्यू से चार गुना हैं। 50 से ज्यादा शेडो बैंक हैं, जो तेजी से बढ़े हैं। उन पर नियामक शिकंजा उतना नहीं कसा है। वे हाउसिंग जैसे क्षेत्र में पैसा देते हैं। उन्हें आमतौर पर डिपॉजिट लेने से रोका जाता है, इसलिए वे फंड के लिए कर्ज लेते हैं। आखिर में पेटीएम जैसे इनोवेटिव डिजिटल फर्म हैं। कुल-मिलाकर सिस्टम 19वीं और 21वीं सदी, दोनों पर सवार है। दुर्घटनाएं होती रहती हैं। फरवरी में पीएनबी ने हीरा व्यापारी से जुड़ी 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी का खुलासा किया।

मौजूदा संकट की जड़ें 2005-12 से है, जब सरकारी बैंकों ने संदिग्ध औद्योगिक हस्तियों और बुनियादी ढांचे संबंधी परियोजनाओं को ऋण दे दिया था। बट्‌टे खाते का कुल कर्ज सरकारी बैंकों के लोन बुक का 9 फीसदी है। सरकार ने उचित ढंग से इनका पुनर्पूंजीकरण नहीं किया और उनसे आने वाला कर्ज का प्रवाह धीमा पड़ गया। दुर्घटनाएं होती रहती हैं। फरवरी में दूसरी सबसे बड़ी सरकारी बैंक पीएनबी ने एक हीरा व्यापारी से जुड़ी 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी का खुलासा किया। अल्पावधि में उधार लेकर दीर्घावधि कर्ज देना जोखिम का दांव है। आईएल एंड एफएस के ध्वस्त होने के बाद आत्म-विश्वास गायब हो गया। सरकार के पास अप्रत्यक्ष रूप से 40% हिस्सा है। परम्परागत बैंकों ने शेडो बैंक को 70 अरब डॉलर का लोन दे रखा है, जो उनकी मूल पूंजी का 40% है। निजी बैंकों में खलबली है। हितों के टकराव (जिससे वे इनकार करती हैं) के दावों के बाद आईसीआईसीआई की बॉस को विदा होना पड़ा है। पूरा संकट न भी उभरे तो भी शेडो बैंक सिकुड़ने पर मजबूर होंगे। इसमें सरकारी बैंकों की सड़न मिला दें तो इसका अर्थ होगा भारतीय वित्त प्रणाली का 75% बैसाखी पर है।

वैश्विक बाजार में बिकवाली से घबराहट का नया दौर शुरू हो सकता है। अगले साल आम चुनाव का सामना कर रही केंद्र सरकार चाहती है कि केंद्रीय बैंक शेडो बैंकों को अधिक मुक्तता से ऋण दे। लेकिन, आरबीआई नाकामियों को पुरस्कृत नहीं करना चाहती। वह सरकारी बैंकों में सरकार के अंतहीन दखल और उनके पुनर्पुंजीकरण में नाकाम रहने की तोहमत लगाता है, जबकि बरसों से खतरे के संकेत मिलते रहे हैं। अल्पावधि में सरकार का कहना सही है, दीर्घावधि में आरबीआई सही है। यदि भारत वित्तीय प्रणाली को अपने पैरों पर खड़ा नहीं कर पाता तो अर्थव्यवस्था तेजी से नहीं बढ़ सकेगी।

© 2018 The Economist Newspaper Limited. All rights reserved.

बैंकिंग… इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विस ध्वस्त होने से पूरी वित्त व्यवस्था में घबराहट है। केंद्र सरकार चाहती है कि केंद्रीय बैंक शेडो बैंकों को अधिक आजादी से ऋण दे। लेकिन, आरबीआई नाकामियों को पुरस्कृत नहीं करना चाहती।

मौजूदा संकट की जड़ें 2005-12 से हैं, जब सरकारी बैंकों ने संदिग्ध औद्योगिक हस्तियों और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट को ऋण दिया था। बट्‌टे खाते का कुल कर्ज इनके लोन बुक का 9% है। सरकार ने उचित ढंग से पुनर्पूंजीकरण नहीं किया और आने वाले कर्ज का प्रवाह धीमा पड़ गया।

2012-17 के बीच बाहर जाने की बजाय अधिक पूंजी भारत में आई

2012 और 2017 के बीच भारत में बाहर जाने की बजाय अधिक पूंजी आई। 2015 में ब्याज दरें गिरने लगीं और नवंबर 2016 में सरकार ने नोटबंदी लागू की। इससे बचत करने वाले बैंकों में डिपॉजिट और डेट म्युचुअल फंड की ओर गए। कैश से भरी और ब्याज दरें कम होने से वे ऋण देने के तरीके खोजने लगे। इसका आंशिक उत्तर था शेडो बैंकों को फंड देना, जो अतिसक्रिय हो गए। शीर्ष 50 गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं ने पिछले पांच वर्षों में कर्ज और असेट दोगुना कर लिए। शायद 50 से 100 अरब डॉलर के उनके कर्ज 12 माह के भीतर ही बकाया हो गए।

परम्परागत बैंकों ने शेडो बैंक को दे रखा है मूल पूंजी का 40% लोन

म्युचुअल फंड में 55 अरब डॉलर लगे हैं यानी पूरी असेट का 11%। परंपरागत बैंकों ने शेडो बैंक को 70 अरब डॉलर कर्ज दिया है, जो मूल पूंजी का 40% है। निजी बैंकों में खलबली है। हितों के टकराव के बाद आईसीआईसीआई की बॉस को विदा होना पड़ा। आरबीआई ने यस बैंक के बॉस का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया है। पूरा संकट न भी उभरा तो भी शेडो बैंक सिकुड़ने पर मजबूर होंगे। इसमें सरकारी बैंकों की सड़न मिला दें तो इसका अर्थ होगा भारतीय वित्त प्रणाली का 75% बैसाखी पर है।

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 16, 2018
DB-Logo.jpg

1min70

नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने तो योजना आर्थिक वृद्धि दर को 2000 मध्य की तरह दो अंकों में ले जाने की थी। तब थोड़े ही लोगों को अंदाजा होगा कि इसमें फाइनेंशियल इंडस्ट्री सबसे बड़ी बाधा होगी। सरकारी बैंक 100 अरब डॉलर के डूबते कर्ज से निपटने में 7 साल तक नाकाम रहे। अब निजी सिस्टम के कुछ हिस्सों में घबराहट है। एक बैंक प्रमुख का कहना है कि हालात 1998 के एशियाई संकट या 2008 की वैश्विक गिरावट जैसे हैं।

सितंबर में सड़कों व बिजलीघरों को फाइनेंस करने वाली फर्म आईएल एंड एफएस 13 अरब डॉलर के कर्ज का भुगतान नहीं कर पाई। अब यह संक्रमण शेडो बैंक कहलाने वाली भारत की गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं में फैल गया है, जो अपनी फंडिंग के लिए 250 से 300 अरब डॉलर की उधारी पर निर्भर है। इस साल उनकी मार्केट वैल्यू औसतन 40% गिरी है। इस संकट से कैसे निपटा जाए इस पर सरकार व आरबीआई में कटु विवाद पैदा हो गया है।

भारत की वित्त प्रणाली में चीन और अमेरिका की विशेषताएं हैं, जिसके सामने धीमी गति का बैंकिंग संकट है, साथ ही तीव्र गति से तरलता घटने का वैसा संकट है जिसने वॉल स्ट्रीट को 2008 में घेर लिया था। इतने वर्षों में फाइनेंस इंडस्ट्री हाइब्रिड किस्म की हो गई है, उससे उन ताकतों के विरोधाभासी उद्‌देश्यों का पता चलता है, जिन्होंने इसे आकार दिया है। सरकार ऐसे लचीले बैंक चाहती है, जो गरीबों और बुनियादी ढांचे के लिए ऋण देने को राजी हो और सरकारी बॉन्ड भी खरीद लें। आरबीआई का जोर स्थिरता पर रहता है इसलिए वह इस तरह के जोखिम लेने के खिलाफ है।

लोन के हिसाब से आधा सिस्टम सरकारी बैंकों का है। ये सूचीबद्ध होते हैं पर शीर्ष पदों पर नियुक्तियां सरकार करती हैं और प्राय: विनाशकारी दखल देती है। 25 निजी बैंक भी हैं, जिनमें से कुछ तो एशिया के श्रेष्ठतम में शुमार है जैसे एचडीएफसी बैंक और कोटक ट्रेड, जो उनकी बुक वैल्यू से चार गुना हैं। 50 से ज्यादा शेडो बैंक हैं, जो तेजी से बढ़े हैं। उन पर नियामक शिकंजा उतना नहीं कसा है। वे हाउसिंग जैसे क्षेत्र में पैसा देते हैं। उन्हें आमतौर पर डिपॉजिट लेने से रोका जाता है, इसलिए वे फंड के लिए कर्ज लेते हैं। आखिर में पेटीएम जैसे इनोवेटिव डिजिटल फर्म हैं। कुल-मिलाकर सिस्टम 19वीं और 21वीं सदी, दोनों पर सवार है। दुर्घटनाएं होती रहती हैं। फरवरी में पीएनबी ने हीरा व्यापारी से जुड़ी 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी का खुलासा किया। 2012 और 2017 के बीच भारत में अधिक पूंजी आई। 2015 में ब्याज दरें गिरने लगीं और नवंबर 2016 में सरकार ने नोटबंदी लागू की। इससे बचत करने वाले बैंकों में डिपॉजिट और डेट म्युचुअल फंड की ओर गए। कैश से भरी और ब्याज दरें कम होने से वे ऋण देने के तरीके खोजने लगे। इसका आंशिक उत्तर था शेडो बैंकों को फंड देना, जो अतिसक्रिय हो गए- शीर्ष 50 गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं ने पिछले पांच वर्षों में अपने कर्ज और असेट दोगुना कर लिए।

अल्पावधि में उधार लेकर दीर्घावधि कर्ज देना जोखिम का दांव है। आईएल एंड एफएस के ध्वस्त होने के बाद आत्म-विश्वास गायब हो गया। सरकार के पास अप्रत्यक्ष रूप से 40% हिस्सा है। परम्परागत बैंकों ने शेडो बैंक को 70 अरब डॉलर का लोन दे रखा है, जो उनकी मूल पूंजी का 40% है। निजी बैंकों में खलबली है। हितों के टकराव (जिससे वे इनकार करती हैं) के दावों के बाद आईसीआईसीआई की बॉस को विदा होना पड़ा है। पूरा संकट न भी उभरे तो भी शेडो बैंक सिकुड़ने पर मजबूर होंगे। इसमें सरकारी बैंकों की सड़न मिला दें तो इसका अर्थ होगा भारतीय वित्त प्रणाली का 75% बैसाखी पर है। वैश्विक बाजार में बिकवाली से घबराहट का नया दौर शुरू हो सकता है। अगले साल आम चुनाव का सामना कर रही केंद्र सरकार चाहती है कि केंद्रीय बैंक शेडो बैंकों को अधिक मुक्तता से ऋण दे। लेकिन, आरबीआई नाकामियों को पुरस्कृत नहीं करना चाहती। वह सरकारी बैंकों में सरकार के अंतहीन दखल और उनके पुनर्पुंजीकरण में नाकाम रहने की तोहमत लगाता है, जबकि बरसों से खतरे के संकेत मिलते रहे हैं। अल्पावधि में सरकार का कहना सही है, दीर्घावधि में आरबीआई सही है। यदि भारत वित्तीय प्रणाली को अपने पैरों पर खड़ा नहीं कर पाता तो अर्थव्यवस्था तेजी से नहीं बढ़ सकेगी।

© 2018 The Economist Newspaper Limited. All rights reserved.

विशेष अनुबंध के तहत सिर्फ दैनिक भास्कर में

बैंकिंग… इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विस के ध्वस्त होने से पूरी वित्त व्यवस्था में घबराहट, निजी बैंकों में सबसे ज्यादा खलबली

मौजूदा संकट की जड़ें 2005-12 से हैं, जब सरकारी बैंकों ने संदिग्ध औद्योगिक हस्तियों और बुनियादी ढांचे वाले प्रोजेक्ट को ऋण दे दिया था। बट्‌टे खाते का कुल कर्ज सरकारी बैंकों के लोन बुक का 9% है। सरकार ने उचित ढंग से पुनर्पूंजीकरण नहीं किया और आने वाले कर्ज का प्रवाह धीमा पड़ गया।

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 16, 2018
1542388040_hindi.business-standard.com

1min80

शंकर आचार्य /  November 16, 2018

देश में उत्पादन, आय और रोजगार के क्षेत्र में भविष्य में होने वाली कोई भी वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि हम वृहद आर्थिक, वित्तीय और नियामकीय मुद्दों से किस प्रकार निपटते हैं। बता रहे हैं शंकर आचार्य 

चार महीने पहले मैंने एक आलेख में वृहद आर्थिक घटनाओं और उससे संबंधित दबावों को लेकर कुछ चेतावनी दी थीं। इनमें बढ़ती तेल कीमतों तथा अंतरराष्टï्रीय कारोबारी जंग के नकारात्मक प्रभाव और भारत समेत कुछ उभरते देशों में पूंजी की आवक बंद होने के साथ-साथ देश की वृहद आर्थिक स्थिति में मध्यम अवधि में आने वाली कुछ बड़ी कमजोरियों की बात शामिल थीं।  इस आलेख में मैंने खासतौर पर देश के सरकारी बैंकों में लंबे समय से चले आ रहे संकट और विदेश व्यापार में भारी गिरावट की बात भी कही थी जो काफी हद तक देश के वस्तु निर्यात में आए ठहराव की वजह से था। ये दोनों कारक आज भी देश की वृहद आर्थिक स्थिरता पर दबाव बनाए हुए हैं। केंद्र और राज्य का सम्मिलित राजस्व घाटा अब जीडीपी के 7 फीसदी के स्तर पर है। छोटे उपक्रमों और असंगठित क्षेत्र के उत्पादन, रोजगार और निर्यात पर नोटबंदी ने बुरा असर डाला है। बीते कुछ महीनों में दो नए विपरीत हालात पैदा हुए हैं जिन्होंने देश के आर्थिक प्रबंधकों की चिंता बढ़ा दी है। 

इनमें पहली घटना है इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) समूह द्वारा ऋण अदायगी के कई मामलों में चूक कर जाना। इस महत्त्वपूर्ण समूह में कुल मिलाकर 350 कंपनियां हैं। इन चूकों की वजह से समूह की एएए श्रेणी की रेटिंग कुछ ही सप्ताह में गिरकर जंक श्रेणी में आ गई। समूह पर करीब 90,000 करोड़ रुपये से ऊपर का कर्ज है ऐसे में वित्तीय क्षेत्र को इसने बड़ा झटका दिया है। अन्य गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर इसका असर दिखने भी लगा है। उनमें से कई को अब अपना काम चलाने के लिए धन जुटाना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि आवास वित्त कंपनियों समेत एनबीएफसी का ऋण जो हाल के वर्षों में 25 प्रतिशत सालाना तक की दर से बढ़ रहा था और बैंकिंग ऋण के एक चौथाई के बराबर हो गया था, उसमें दोबारा गिरावट आने लगी है। इसका असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। इनमें से कई अब मध्यम और लंबी अवधि के ऋण की जरूरतों को पूरा करने के लिए अल्पावधि के ऋण ले रही हैं। एनबीएफसी क्षेत्र में काफी दबाव है।

आईएलऐंडएफएस से मची उथलपुथल ने जीवन बीमा निगम और भारतीय स्टेट बैंक जैसे इसमें स्वामित्व रखने वाले संस्थानों की प्रतिष्ठा और क्षमता पर भी कीचड़ उछालने का काम किया है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी, सांविधिक अंकेक्षक और नियामक, रिजर्व बैंक आदि सभी इस दायरे में हैं। आरबीआई ने आईएलऐंडएफएस फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड नामक एक प्रमुख अनुषंगी एनबीएफसी को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया ऋण और निवेश के साथ लगातार तीन वित्त वर्ष तक काम करने दिया। यह स्वयं आरबीआई के दिशानिर्देश के मुताबिक तय सीमा से 20 गुना अधिक है।

नुकसान को कम करने और कामकाज जारी रखने के लिए 1 अक्टूबर को सरकार ने दखल दिया और आईएलऐंडएफएस के पुराने बोर्ड को भंग करके वरिष्ठ बैंक उदय कोटक की अध्यक्षता में एक नया बोर्ड गठित किया। बहरहाल, यह समूह जितने बड़े पैमाने पर काम करता है, जितना जटिल इसका ढांचा है और यह अतीत में जिस अस्पष्टता से काम करता आया है उसे देखते हुए यह सवाल बरकरार है कि नुकसान पर कब और कितना नियंत्रण किया जा सकेगा? दूसरी नकारात्मक घटना है सरकार और आरबीआई के बीच का सार्वजनिक विवाद। यह अत्यंत खतरनाक बात है। भारत समेत कई देशों में सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच एक हद तक टकराव देखने को मिलता है। यह भी मानना होगा कि सरकार और आरबीआई के बीच सहयोग के लंबे दौर भी हमने देखे हैं। इस दौरान तमाम आर्थिक, बैंकिंग और वित्तीय सुधार सामने आए और देश संकट से उबरने में कामयाब रहा। उदाहरण के लिए मैं सन 1991 से 2008 के बीच के वर्षों की याद दिलाना चाहूंगा। दोनों के बीच लाभदायक सहयोग के चार तत्त्व हैं:  वित्त मंत्रालय की शीर्ष टीम और आरबीआई के बीच निरंतर और करीबी संवाद, प्रधानमंत्री कार्यालय का सहयोग और उसकी सक्रिय भूमिका, यदाकदा असहमति के बावजूद प्रमुख लोगों के बीच साझा मान की भावना और आरबीआई की स्वायत्तता कायम रखने को लेकर सरकार की पूर्ण प्रतिबद्धता।

फिलहाल दोनों के बीच जो दूरी नजर आ रही है और जो मीडिया तथा अन्य माध्यमों से सार्वजनिक हुई है, वह कतई उचित नहीं है। ऐसे हालात रातोरात नहीं बने हैं। इसकी पृष्ठभूमि दो वर्ष से तैयार हो रही थी। इस दौरान ऊपर वर्णित सकारात्मक चीजें कम होती गईं जबकि कुछ अन्य जटिल चीजें जुड़ती चली गईं। इनमें सरकारी बैंकों की खस्ता हालत, एनबीएफसी के ऋण को लेकर उपजी नई चुनौतियां, आरबीआई के शीर्ष नेतृत्व की संचार की कमी, सरकार के राजकोष पर बढ़ता दबाव, रोजगार वृद्धि में धीमेपन के स्पष्ट संकेत, कमजोर बाहरी क्षेत्र और आसन्न चुनाव आदि शामिल रहे। इस लिहाज से देखें तो सरकार आरबीआई के मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करना चाहती है। आरबीआई इसके खिलाफ है और वित्तीय स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देखते हुए इसे समझा जा सकता है।

अगर वित्त मंत्रालय और आरबीआई के बीच निरंतर संवाद कायम रहता तो अब तक किसी न किसी प्रकार का समझौता हो जाता। अभी भी ऐसा हो जाए तो यह अर्थव्यवस्था और देश के लिए बेहतर होगा। बहरहाल, कई प्रमुख मुद्दों पर औपचारिक पत्रों के आदान-प्रदान के बाद आरबीआई अधिनियम की धारा 7 का उल्लेख हुआ, 23 अक्टूबर को आरबीआई की बैठक बेनतीजा रही और 26 अक्टूबर को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने एक अत्यंत मुखर भाषण देते हुए आरबीआई की स्वायत्तता में सरकार के हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी। इससे किसी भी समुचित नतीजे पर पहुंचना मुश्किल हो गया। 19 नवंबर को आरबीआई की अगली बैठक में और भी काफी कुछ हो सकता है। अंदाजा लगाएं तो आरबीआई गवर्नर के इस्तीफे, आरबीआई बोर्ड का सरकार की मांग को मान लेना या सरकार द्वारा औपचारिक रूप से धारा 7 का प्रयोग करना तथा अनिच्छुक होने पर भी आरबीआई का उसे मानने पर बाध्य होना आदि कई नतीजे देखने को मिल सकते हैं। वैश्विक अस्थिरता और वृहद आर्थिकी पर पड़ रहे दबाव के बीच यह कोई बहुत सकारात्मक स्थिति नहीं है।

वृहद आर्थिकी, वित्तीय और नियामकीय मुद्दों का यह मिश्रण काफी घातक है। इससे अहम चुनावों के पहले देश के आर्थिक और राजनीतिक प्रबंधकों के समक्ष कड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई है। वे इन चीजों से कैसे निपटते हैं इस पर ही देश में उत्पादन, आय और रोजगार वृद्धि का भविष्य निर्भर करता है।

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 14, 2018
_1542202772.jpg

1min140

भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल की 19 नवंबर की बैठक प्रस्तावित है। लेकिन इससे पहले ही सरकार और केंद्रीय बैंक कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक यह प्रयास दोनों ओर से हो रहे हैं। 

सूत्रों ने बताया कि कमजोर बैंकों पर लागू त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के अंकुशों में ढील देने और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए कर्ज के नियमों को सरल बनाने के बारे में सहमति से कोई रास्ता खोजने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा, बोर्ड की इस बैठक में न सही पीसीए रूपरेखा पर कोई सहमति अगले कुछ सप्ताह में जरूर बन जाएगी। वित्त मंत्रालय लगातार इसके लिए दबाव बना रहा है। यदि पीसीए नियमों को उदार कर दिया जाता है, तो कई बैंक इस वित्त वर्ष के अंत तक पीसीए के अंकुश से बाहर आ जाएंगे। 

 सूत्रों ने कहा कि रिजर्व बैंक एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण के नियमों को उदार करने पर सहमत हो सकता है। इसमें सख्त रेटिंग मानदंड भी शामिल है, जिससे इस क्षेत्र को ऋण का प्रवाह बढ़ सके। उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक एमएसएमई तथा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए विशेष व्यवस्था पर भी विचार कर सकता है। ये क्षेत्र नकदी संकट से जूझ रहे हैं। 

सरकार का मानना है कि 12 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाला एमएसएमई क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र नोटबंदी तथा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद काफी प्रभावित हुआ है और इसे समर्थन की जरूरत है। हालांकि, केंद्रीय बैंक एमएसएमई तथा एनबीएफसी क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वह इन्हें संवेदनशील क्षेत्र मानता है। 

 वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले सप्ताह कहा था कि एनपीए को कम से कम करने की जरूरत है। ताकि बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को कायम रखा जा सके जिससे यह अर्थव्यवस्था की वृद्धि में मदद दे सके। 

पीसीए के शिकंजे में 11 बैंक 

सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों में से 11 पर आरबीआई ने पीसीए का शिकंजा कस रखा है। इसके तहत उन्हें कर्ज स्वीकृत करने पर कई तरह की रोक लगी हुई है। ये बैंक हैं इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक आफ इंडिया, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कॉमर्स, देना बैंक और बैंक आफ महाराष्ट्र। 

पीसीए की जरूरत क्यों पड़ी 

पीसीए व्यवस्था तब लागू होती है, जब वाणिज्य बैंक आरबीआई द्वारा सुरक्षित बैंकिंग कारोबार के बारे में तय तीन प्रमुख कसौटियों में से किसी एक भर भी विफल हो जाते हैं। ये तीन नियामकीय व्यवस्थाएं हैं, पूंजी से जोखिम भारांश संपत्ति अनुपात, शुद्ध गैर निष्पादित आस्तियां, संपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए)। 

11 दिसंबर से 8 जनवरी तक हो सकता है संसद का शीतकालीन सत्र, CCPA ने की सिफारिश

इसरो ने संचार उपग्रह GSAT-29 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 14, 2018
SBI1-4.jpg

1min170

लंबे समय से एसेट क्वालिटी और कैपिटल की समस्या झेल रहे बैंकिंग सेक्टर की सेहत में सुधार के संकेत मिल रहे हैं. (PTI)

लंबे समय से एसेट क्वालिटी और कैपिटल की समस्या झेल रहे बैंकिंग सेक्टर की सेहत में सुधार के संकेत मिल रहे हैं. वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में लॉर्जकैप और मिडकैप सेग्मेंट से कुछ बैंकों ने न सिर्फ मुनाफा कमाया है, बल्कि एनपीए भी कम करने में सफल रहे हैं. हालांकि प्रोविजनिंग ज्यादा रहने से सेक्टर को लेकर अट्रैक्शन ज्यादा नहीं बढ़ा है. एक्सपर्ट का मानना है कि बैंकों ने अपनी स्ट्रैटेजी बदली है, वहीं सेक्टर को लेकर सरकार भी सतर्क है. तिमाही नतीजों से रिकवरी के संकेत दे रहे हैं. फिलहाल अभी कुछ महीने बैंकिंग सेक्टर से ज्यादा उम्मीद नहीं है, लेकिन लंबी अवधि के लिहाज से सरकारी और निजी क्षेत्र के सेलेक्टेड बैंकों में बेहतर रिटर्न मिल सकता है.

एसेट क्वालिटी में सुधार

फॉर्च्यून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि बैंकों के लिहाज से तिमाही नतीजे उम्मीद के हिसाब से रहे हैं. बैंकों की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है. तिमाही आधार पर मुनाफा भी बेहतर रहा है. प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PAC) को लेकर सरकार और आरबीआई के बीच विवाद कम होता दिख रहा है. इससे PAC के तहत गए बैंकों को नए लोन देने की छूट मिलेगी. सरकार समय समय पर बैंकों में पैसा डालने की योजना पर काम कर रही है. बैंकों ने भी अपना फोकस बदला है. लोन रिकवरी पर लगातार काम हो रहा है. फिलहाल अभी कुछ महीने की बात करें तो सेक्टर से ज्यादा उम्मीद नहीं है. लेकिन लंबी अवधि में बैंकों का भविष्य बेहतर है. उन्होंने एसबीआई, कोटक महिंद्रा बैंक में 20 से 25 फीसदी ग्रोथ के टारगेट के साथ निवेश्श की सलाह दी है.

लोन रिकवरी पर फोकस

ट्रेड स्विफ्ट के रिसर्च हेड संदीप जैन का कहना है कि तिमाही नतीजों पर गौर करें तो एसबीआई तिमाही आधार पर घाटे से मुनाफे में आ गई है. एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और बैंक आॅफ बड़ौदा समेत कई बैंकों का फंसा हुआ कर्ज कम हुआ है. बैंक कॉरपोरेट की जगह रिटेल लोन पर फोकस कर रहे हैं. लोन रिकवरी के लिए लगातार मैनजमेंट काम कर रहा है. जो कंपनियां बैंकों का पेमेंट नहीं कर पा रही हैं, उनका मामला एनसीएलटी भेजा जा रहा है, जहां से कर्ज के रिकवरी की उम्मीद बनी है. हालांकि प्रोविजनिंग एक समस्या है. उन्होंने लंबी अवधि के लिए बैंक आॅफ बड़ौदा में 150 रुपये और आईसीआईसीआई बैंक में 390 रुपये के लक्ष्य के साथ निवेश की सलाह दी है.

किन बातों का रखें ध्यान

एक्सपर्ट का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर को लेकर सेंटीमेंट अभी कमजोर हैं. इस वजह से नए निवेयाक लंबी अवधि के लिए निवेश करें, वहीं जिनका निवेश पहले से है, उन्हें होल्ड करना चाहिए. एक्सपर्ट का मानना है कि बैंकों से जुड़ें कई निगेटिव फैक्टर अब डिस्काउंट हो रहे हें, ऐसे में गिरावट पर सस्ते हो चुके अच्छे शेयरों में निवेश करना चाहिए. उन बैंकों से दूर रहना चाहिए जो PCA के दायरे में हैं. निवेश के पहले बैलेंसशीट जरूर देखनी चाहिए. देखें की बैंक को मुनाफा आ रहा है या नहीं.

किन शेयरों में मिलेगा रिटर्न

SBI

SBI तिमाही आधार पर घाटे से मुनाफे में आ गया है. वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में बैंक को 944.9 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है, जबकि जून तिमाही में बैंक को 4875.85 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. सालाना आधार पर बैंक का मुनाफा करीब 40 फीसदी घटा है. Q2 में SBI का नेट NPA 5.29 फीसदी से घटकर 4.84 फीसदी रह गया है. ग्रॉस NPA भी 10.69 फीसदी से घटकर 9.95% रह गया है. जगदीश ठक्कर और संदीप जैन ने बैंक में निवेश की सलाह दी है. ब्रोकरेज हाउस दोलत कैपिटल ने शेयर के लिए 330 रुपये का लक्ष्य रखा है. करंट प्राइस 276 रुपये के लिहाज से 20 फीसदी रिटर्न मिल सकता है.

ICICI बैंक

ICICI बैंक भी तिमाही आधार पर मुनाफे में आ गया है. वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में बैंक को 909 करोड़ का मुनाफा हुआ है, जबकि जून तिमाही में बैंक को 120 करोड़ का नुकसान हुआ था. हालांकि सालाना आधार पर बैंक का मुनाफा करीब 56 फीसदी घट गया है. दूसरी तिमाही में बैंक की प्रोविजनिंग 34 फीसदी घटी है. ग्रॉस एनपीए 8.81 फीसदी से घटकर 8.54 फीसदी रह गया है. नेट एनपीए 4.19 फीसदी से घटकर 3.65 फीसदी रह गया है. संदीप जैन ने शेयर के लिए 390 रुपये का लक्ष्य दिया है. नालंदा सिक्युरिटीज ने शेयर के लिए 387 रुपये का लक्ष्य दिया है. शेयर का करंट प्राइस 360 रुपये है.

कोटक महिंद्रा बैंक

कोटक महिंद्रा बैंक का मुनाफा दूसरी तिमाही में 21 फीसदी बढ़कर 1747 करोड़ रुपये हो गया है. बैंक की लोनबुक बढ़कर 184940 करोड़ रुपये हो गई है. इसमें रिटले लोन का हिस्सा 50 फीसदी है. बैंक का बिजनेस मजबूत है, कस्टमर बेस लगातार बढ़ रहा है. ग्रॉस एनपीए 2.17 फीसदी से घटकर 2.15 फीसदी रह गया है. बैंक के नेटवर्क में 1425 ब्रांच और 2236 ATMs हैं. जगदीश ठक्कर ने शेयर में 25 फीस दी ग्रोथ के टारगेट के साथ निवेश्श की सलाह दी है. ब्रोकरेज हाउस के आर चोकसे ने शेयर के लिए 1461 रुपये और ICICI डायरेक्ट ने 1400 रुपये का लक्ष्य रखा है. करंट प्राइस 1163 रुपये के लिहाज से शेयर में 26 फीसदी रिटर्न मिल सकता है.

बैंक आॅफ बड़ौदा

बैंक आॅफ बड़ौदा का मुनाफा दूसरी तिमाही में करीब 20 फीसदी बढ़कर 425 करोड़ रुपये हो गया है. रिटेल बैंकिंग में अच्छी ग्रोथ है. प्रोविजनिंग घटी है. ग्रॉस एनपीए 12.46 फीसदी से घटकर 11.78 फीसदी रह गया है. संदीप जैन ने शेयर में 150 रुपये का लक्ष्य दिया है. करंट प्राइस 108 रुपये के लिहाज से शेयर में करीब 40 फीसदी रिटर्न मिल सकता है.

(नोट-निवेश की सलाह एक्सपर्ट्स व ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई हैं. कृपया अपने स्तर पर या अपने एक्सपर्ट्स के जरिए किसी भी तरह की सलाह की जांच कर लें. मार्केट में निवेश के अपने जोखिम हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है.)

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 13, 2018
1542105155_TN_placeholder.png

2min100

Rashifal : 13th November&nbsp | &nbspतस्वीर साभार:&nbspThinkstock

Horoscope Today 13 November : ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार मेष राशि के जातक जो व्यवसाय करते हैं आज के दिन लाभ में रहेंगे। इस राशि के बैंकिंग और आईटी फील्ड में काम करने वाले जातक भी सफलता की प्राप्ति करेंगे। वृष और कर्क राशि के लोग नवीन कार्यों के प्रारम्भ होने से प्रसन्न रहेंगे तो वहीं मकर के जातक स्वास्थ्य में होने वाले व्यय से परेशान रहेंगे।

मिथुन और कन्या राशि भी आज अपने कार्यों को करते हुए आनंदित रहेगी। तुला के युवा लव लाइफ से खुश रहेंगे। कुम्भ के लोग कुछ नवीन योजनाओं का निर्माण करेंगे वहीं मीन राशि के जातक धन की प्राप्ति से प्रसन्न रहेंगे। साथ ही मीन राश‍ि के आईटी और मीडिया में जॉब के लोगों के लिए आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा। 

राशिफल दिनांक 13 नवंबर : यहां पढ़ें व‍िस्‍तार से

1. मेष राश‍िफल / Aries Horoscope Today : आज का दिन जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बहुत शुभ फल प्रदान करने वाला है। आय प्राप्ति के नए स्रोत बन सकते हैं। किसी रुके कार्य के पूर्ण होने से खुश रहेंगे। धन का व्यय कुछ ज्यादा ही हो सकता है। सुदूर धार्मिक यात्रा की योजना बनेगी। विवादों से बचने का प्रयास करें। व्यापार में उन्नति की संभावना रहेगी। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। आईटी और बैंकिंग फील्ड के लोग सफल रहेंगे। आज आपकी लव लाइफ बहुत अच्छी रहेगी। मधुमेह से परेशानी हो सकती है। लाल रंग शुभ है।

2. वृष राश‍िफल / Tauras Horoscope Today : आईटी और मार्केटिंग फील्ड के जातक प्रोन्नति की दिशा में बढ़ेंगे। छात्र अपनी सफलता से प्रसन्न रहेंगे। व्यवसाय में लाभ से मन हर्षित रहेगा। छोटी छोटी बातों पर बहस नहीं करते। आज धन का व्यय हो सकता है। जीवन साथी का आपके कार्य में सहयोग आपको एक नई ऊर्जा देगा। लव लाइफ में तनाव हो सकता है। हरा रंग शुभ है। उदर विकार से कष्ट मिल सकता है। बहते जल में नारियल प्रवाहित करें।

3. मिथुन राश‍िफल / Gemini Horoscope Today : मित्रों के सहयोग से कोई बड़ा कार्य सिद्ध कर लेंगे। आज का दिन खुशियों भरा है। व्यवसाय में किसी को धन देने के प्रति सचेत रहें। विवाद टालने का प्रयत्न करें। धन आगमन की संभावना रहेगी। कोई रुका कार्य पूर्ण होगा। मन हर्षित रहेगा। प्यार भरा वैवाहिक जीवन आपको  प्रसन्न रखेगा। हेल्थ अच्छी नहीं रहेगी। एलर्जी के रोग की संभावना रहेगी। हरा रंग शुभ है। गाय को केला खिलाएं।

4. कर्क राश‍िफल /  Cancer Horoscope Today : निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करेंगे। मन की एकाग्रता को बनाये रखें। आज आप धार्मिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे। आईटी और बैंकिंग के लोगों का आज का दिन संघर्षों भरा रहेगा। एमबीए और बीटेक के छात्रों को सफलता की प्राप्ति होगी। पत्रकारिता और फ‍िल्म फील्ड के जातकों के लिए आज का दिन भाग्यवृद्धि कारक है। धन के आगमन की संभावना रहेगी। छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकते हैं। लव लाइफ में मन की बात जुबां पर लाने का वक्त है। दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा। स्वास्थ्य सुख बेहतर रहेगा। पीला रंग शुभ है। गरीबों में सफेद वस्त्र का दान करें।

5. सिंह राश‍िफल / Leo Horoscope Today : एमबीए और बीटेक के स्टूडेंट्स अपने परफॉर्मेंस से प्रसन्न रहेंगे। शिक्षा और प्रतियोगिता में सफलता की प्राप्ति होगी। लॉ, मीडिया और आईटी फील्ड के जातक सफलता की प्राप्ति करेंगे। धन की प्राप्ति हो सकती है। प्रेम में लव पार्टनर के साथ कहीं सुंदर प्राकृतिक सौंदर्य का आनन्द उठाएंगे। आपका प्यार भरा रोमांटिक अंदाज दाम्पत्य जीवन को नव तरंग से भर देगा। नारंगी रंग शुभ है। बीपी के रोगी सावधानी बरतें। गायत्री मंत्र का जप करें।

6. कन्या राश‍िफल / Virgo Horoscope Today : आज किसी रिश्ते के विवाद के हल के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभानी होगी। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति से मन हर्षित रहेगा। किसी पुराने मित्र का आगमन हो सकता है। अपने घर के कार्यों में व्यस्त रहेंगे। व्यवसाय में नए अवसरों की प्राप्ति हो सकती है। सरकारी सेवा में उच्चाधिकारी से प्राप्त सहयोग आपको प्रोत्साहित करेगा। छात्र शिक्षा में उन्नति करेंगे। आईटी, बैंकिंग और मीडिया फील्ड के लोग आज संघर्ष के बाद ही कार्य पूर्ण कर पाएंगे। दाम्पत्य जीवन में उपहार आपको प्यार से भर देगा। लव लाइफ में तनाव आ सकता है। हरा रंग शुभ है। स्वास्थ्य सुख में बाधाएं आती रहेंगी। उदर के रोग से कष्ट हो सकता है। श्री विष्णु जी का ध्यान करते रहें।

7. तुला राश‍िफल /  Libra Horoscope Today : वित्त और वस्त्र व्यवसाय में सफलता की प्राप्ति होगी। आज का दिन बहुत व्यस्तता का है। ऑफिस संबंधी कोई रुका कार्य पूर्ण होगा। आईटी, मीडिया और बैंकिंग फील्ड में कार्य करने वाले युवा आज अपने मेहनत पूर्ण कार्य से अपने बॉस का मन मोह लेंगे। लव लाइफ में समय की कमी आज आपको परेशान कर सकती है। दाम्पत्य जीवन में खुशहाली रहेगी। यूरीन विकार से कष्ट संभव है। नीला रंग समृद्धि कारक है। किसी गरीब व्यक्ति को अन्न का दान करें।

8. वृश्चिक राश‍िफल / Scorpio Horoscope Today : जमीन या मकान खरीदने की योजना बनाएंगे। आपका आत्मबल आपकी बहुत सहायता करेगा। छात्र  शिक्षा तथा प्रतियोगिता में  सफलता की प्राप्ति से खुश रहेंगे। प्रशासनिक सेवा से सम्बद्ध जातक लाभान्वित होंगे। परिवार संग घूमने और बाहर स्वादिष्ट भोजन का आनन्द उठाएंगे। प्रेम भरा दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। लव लाइफ में सुहाने सफर का एक अलग आनन्द है। आज कार्यों की अधिकता से परेशान रहेंगे। दाम्पत्य जीवन सुखी रहेगा। हृदय के रोगी सावधानी बरतें। लाल रंग प्रगतिकारक है। श्री हनुमान जी का ध्यान करते रहें।

9. धनु राश‍िफल / Sagittarius Horoscope Today : धन का आगमन हो सकता है। छात्रों को शिक्षा तथा प्रतियोगिता में सफलता की प्राप्ति होगी। अत्यंन्त व्यस्तता के बावजूद पारिवारिक जिम्मेदारी के लिए समय निकाल लेंगे। बहुत दिनों से रुके कार्य के पूर्ण होने से मन हर्षित रहेगा। आईटी और एमबीए फील्ड के छात्रों के लिए नए जॉब के अवसर उपलब्ध रहेंगे। आईटी, मीडिया तथा बैंकिंग के जातक आज अपने कार्यों में संघर्ष के बाद ही सफल रहेंगे। लव लाइफ में समय निकालना आज थोड़ा मुश्किल है। वैवाहिक जीवन थोड़ा तनाव पूर्ण रहेगा। सफेद रंग शुभ है। उदर विकार से परेशानी रहेगी। चने की दाल का दान करें।

10. मकर राश‍िफल / Capricorn Horoscope Today : आज का दिन थोड़ा संघर्ष का है। निर्णय लेने में दिक्कत होगी। वाहन का प्रयोग सावधानी पूर्वक करें। आईटी और बैंकिंग के जॉब में संघर्ष है। आज घर सम्बन्धी कार्य बड़ी मेहनत के बाद पूर्ण होंगे। वाणी में संयम रखें। किसी विवाद से दूर रहने का समय है। मार्केटिंग और मीडिया के लोगों को आज ऑफिस वर्क में सफलता मिलेगी। लव लाइफ बेहतर रहेगी। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। हरा रंग शुभ है। स्वास्थ्य बेहतर नहीं रहेगा। गरीबों में काले वस्त्र का दान करें। 

11. कुंभ राश‍िफल / Aquarius Horoscope Today : राजनीतिज्ञों के लिए आज का दिन बहुत शुभ रहेगा। आय प्राप्ति के नए स्रोत बन सकते हैं। धन की प्राप्ति की संभावना रहेगी। आईटी, मार्केटिंग प्रबंधन और पत्रकारिता से जुड़े जातक अपनी मेहनत से अपने उच्चाधिकारी को प्रसन्न करेंगे तकनीकी और प्रबंधन के छात्र मेहनत करेंगे और सफलता की प्राप्ति करेंगे। प्रतियोगिता में सफलता की प्राप्ति होगी। लव लाइफ शानदार होगी। डिनर बाहर होगा। जीवन साथी द्वारा बनाया गया स्वादिष्ट भोजन आपके दाम्पत्य जीवन को आनंद देगा। आसमानी और सफेद आज का आपका शुभ रंग है।

12. मीन राश‍िफल / Pisces Horoscope Today : यश तथा प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। आईटी और मीडिया में जॉब के लोगों के लिए आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा। एमबीए और इंजीनियरिंग के छात्र नवीन अवसरों की प्राप्ति करेंगे। मार्केटिंग के जातक अपने टारगेट को पूरा करेंगे। बीपी से प्रभावित लोग सावधानी बरतें। आज धन का आगमन होगा। लव में सफलता मिलेगी। अपने लव पार्टनर को आज पर्याप्त समय देंगे। खराब स्वास्थ्य से चिंतित रहेंगे। पीला रंग शुभ है। धार्मिक पुस्तक का दान करें। श्री विष्णु जी का ध्यान करते रहें।

धर्म व अन्‍य विषयों की Hindi News के लिए आएं Times Now Hindi पर। हर अपडेट के लिए जुड़ें हमारे FACEBOOK पेज के साथ।

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 13, 2018

1min70

Publish Date:Tue, 13 Nov 2018 09:30 AM (IST)

नई दिल्ली। केंद्र सरकार पहले ही सार्वजनिक कर चुकी है कि रिजर्व बैंक के पूर्ण निदेशक बोर्ड की आगामी बैठक में उसके प्रतिनिधि किन मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की कोशिश करेंगे। अब आरबीआई की तरफ से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि सरकार की तरफ से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, उन पर वह थोड़ा नरम पड़ सकता है। ऐसे में इस बात की संभावना है कि तनाव की वजह बने प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए), फंसे कर्ज (एनपीए) और बासेल-तीन जैसे मुद्दों पर बीच का रास्ता निकाला जाए।

रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि विभिन्न उद्योगों को इस वक्त नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है। तरलता (बैंकों की तरफ से फंड उपलब्ध कराने की व्यवस्था) की तरफ अभी ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरी अर्थव्यवस्था को धक्का पहुंच सकता है। नकदी संकट खत्म करने के लिए आरबीआई को उन तीनों नियमों में थोड़ा बदलाव करना होगा।

आरबीआई की तरफ से इस बात के संकेत दिए गए हैं कि वह कुछ मुद्दों पर नरम रुख अपनाने को तैयार है। खासतौर पर छोटे व मझोले उद्योगों (एसएमई) को ज्यादा से ज्यादा कर्ज उपलब्ध कराने के मामले पर समुचित कदम उठाने की जरूरत आरबीआई भी महसूस कर रहा है।

एसएमई समेत समूचे उद्योग क्षेत्र को ज्यादा फंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय यह भी चाहता है कि फरवरी, 2018 से लागू एनपीए नियमों में कुछ रियायत दी जाए। इस नियम के तहत बैंकिंग कर्ज को 180 दिनों तक नहीं चुकाने वाले सभी ग्र्राहकों के खिलाफ दिवालिया कानून के तहत प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का प्रावधान है। इस नियम के लागू होने से हजारों छोटे व मझोले उद्योगों को कर्ज नहीं मिल पा रहा है। वित्त मंत्रालय की मंशा है कि एसएमई को कुछ दिनों के लिए इस नियम से अलग रखा जाए। माना जा रहा है कि आरबीआई इस पर कुछ नरमी दिखा सकता है।

इसके अलावा ज्यादा फंड उपलब्ध कराने के लिए वित्त मंत्रालय की तरफ से बासेल-तीन नियमों में कुछ बदलाव का प्रस्ताव किया जाएगा। बासेल-तीन नियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय बैंकिंग नियम है जिसे दुनिया के हर केंद्रीय बैंक अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले वाणिज्यिक बैंकों के लिए लागू कर रहे हैं। यह बैंकों को जोखिम की स्थिति में ज्यादा सुरक्षित रखने के लिए तैयार किए गए नियम हैं, जिसके तहत बैंकों को ज्यादा राशि सुरक्षित रखनी होगी।

इसके तहत पूंजी पर्याप्तता अनुपात को नौ फीसद रखने के अलावा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए अलग से 2.5 फीसद की राशि रखनी है। यह नियम अगले वर्ष मार्च से लागू करने की घोषणा की गई है। वित्त मंत्रालय चाहता है कि यह नियम फिलहाल उन्हीं बैंकों के लिए लागू किया जाए, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालन कर रहे हैं। इससे छोटे स्तर के अन्य सरकारी बैंक ज्यादा कर्ज वितरित कर सकेंगे।

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 13, 2018
13_11_2018-patel-and-modi_18632175.jpg

1min80

Publish Date:Tue, 13 Nov 2018 09:43 AM (IST)

नई दिल्ली [प्रेट्र]। सरकार और आरबीआइ के बीच पिछले कुछ हफ्तों से चल रही तनातनी के बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि नौ नवंबर को बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

सूत्रों का कहना है कि पटेल पिछले सप्ताह शुक्रवार को नई दिल्ली में थे और उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों से मुलाकात की थी। कुछ सूत्रों ने कहा कि आखिर में पटेल ने प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की। इसका मकसद विवाद को विराम देना था। 

सूत्र बताते हैं कि छोटे व मझोले उपक्रमों (एसएमई) के नकदी संकट को दूर करने के लिए आरबीआइ द्वारा कुछ नियमों में ढील दिए जाने के संकेत हैं। लेकिन अभी इसका पता नहीं चल पाया है कि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की माली हालत दुरुस्त करने के लिए दोनों में क्या बात हुई।

विवाद सुलझाने पर होगा फोकस

उधर, केंद्र सरकार पहले ही सार्वजनिक कर चुकी है कि रिजर्व बैंक के पूर्ण निदेशक बोर्ड की आगामी बैठक में उसके प्रतिनिधि किन मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की कोशिश करेंगे। अब आरबीआइ की तरफ से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि सरकार की तरफ से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, उन पर वह थोड़ा नरम पड़ सकता है। ऐसे में इस बात की संभावना है कि तनाव की वजह बने प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए), फंसे कर्ज (एनपीए) और बासेल-तीन जैसे मुद्दों पर बीच का रास्ता निकाला जाए।

रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि विभिन्न उद्योगों को इस वक्त नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है। तरलता (बैंकों की तरफ से फंड उपलब्ध कराने की व्यवस्था) की तरफ अभी ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरी अर्थव्यवस्था को धक्का पहुंच सकता है। नकदी संकट खत्म करने के लिए आरबीआइ को उन तीनों नियमों में थोड़ा बदलाव करना होगा। आरबीआइ की तरफ से इस बात के संकेत दिए गए हैं कि वह कुछ मुद्दों पर नरम रुख अपनाने को तैयार है। खासतौर पर छोटे व मझोले उद्योगों (एसएमई) को ज्यादा से ज्यादा कर्ज उपलब्ध कराने के मामले पर समुचित कदम उठाने की जरूरत आरबीआइ भी महसूस कर रहा है।

एसएमई समेत समूचे उद्योग क्षेत्र को ज्यादा फंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्त मंत्रलय यह भी चाहता है कि फरवरी, 2018 से लागू एनपीए नियमों में कुछ रियायत दी जाए। इस नियम के तहत बैंकिंग कर्ज को 180 दिनों तक नहीं चुकाने वाले सभी ग्राहकों के खिलाफ दिवालिया कानून के तहत प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का प्रावधान है। इस नियम के लागू होने से हजारों छोटे व मझोले उद्योगों को कर्ज नहीं मिल पा रहा है। वित्त मंत्रलय की मंशा है कि एसएमई को कुछ दिनों के लिए इस नियम से अलग रखा जाए। माना जा रहा है कि आरबीआइ इस पर कुछ नरमी दिखा सकता है।

इसके अलावा ज्यादा फंड उपलब्ध कराने के लिए वित्त मंत्रलय की तरफ से बासेल-तीन नियमों में कुछ बदलाव का प्रस्ताव किया जाएगा। बासेल-तीन नियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय बैंकिंग नियम है जिसे दुनिया के हर केंद्रीय बैंक अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले वाणिज्यिक बैंकों के लिए लागू कर रहे हैं। यह बैंकों को जोखिम की स्थिति में ज्यादा सुरक्षित रखने के लिए तैयार किए गए नियम हैं, जिसके तहत बैंकों को ज्यादा राशि सुरक्षित रखनी होगी।

इसके तहत पूंजी पर्याप्तता अनुपात को नौ फीसद रखने के अलावा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए अलग से 2.5 फीसद की राशि रखनी है। यह नियम अगले वर्ष मार्च से लागू करने की घोषणा की गई है। वित्त मंत्रलय चाहता है कि यह नियम फिलहाल उन्हीं बैंकों के लिए लागू किया जाए, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालन कर रहे हैं। इससे छोटे स्तर के अन्य सरकारी बैंक ज्यादा कर्ज वितरित कर सकेंगे।

Posted By: Vikas Jangra

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 13, 2018
RBI-vs-PM-Modi-80_5.jpg

1min90

नई दिल्ली:  

केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक के बीच पैदा हुए मतभदों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी और RBI गवर्नर उर्जित पटेल के बीच मुलाकात की खबर आई है. सूत्रों के अनुसार उर्जित पटेल बीते शुक्रवार को दिल्ली में थे और पीएमओ के सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की थी. रिपोर्ट के अनुसार इस मुलाकात का मकसद सरकार और आरबीआई के बीच मतभेदों को सुलझाना था.

सूत्रों के अनुसार यह भी माना जा रहा है कि इन मुलाकातों में पीएम मोदी के साथ मीटिंग भी शामिल थी.

आरबीआई की ओर से रखे जाने वाले कैश रिजर्व को लेकर वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक के बीच पैदा हुए मतभेदों को सुलझाने के मकसद से यह मीटिंग की थी. खबरों के अनुसार वित्त मंत्रालय अगले साल चुनाव की वजह से केंद्रीय बैंक से अधिक कैश मार्केट में फ्लो करने की मांग कर रहा था, जिस पर गवर्नर ने असहमति जताई थी.

और पढ़ें: CBI Vs CBI के बाद अब RBI VS Govt, ये हो क्‍या रहा है? 

हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से 3.6 लाख करोड़ रुपये की मांग करने से जुड़ी खबर को खारिज करते हुए इसे गलत सूचनाओं पर आधारित कयासबाजी करार दिया.

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और देश का राजकोषीय घाटा लक्ष्य के अनुरूप है. सुभाष चंद्र गर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद का 3.3 फीसदी बजटीय अंतर का लक्ष्य हासिल करेगी. 

सूत्रों के मुताबिक आरबीआई ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह लघु और मध्यम उद्योगों को सपॉर्ट करने के लिए अधिक कैश जारी कर सकता है. लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नॉन बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों की मदद के लिए कोई करार हुआ है या नहीं.

और पढ़ें: RBI गवर्नर उर्जित पटेल दे सकते हैं इस्‍तीफा, सरकार ने भी जारी किया बयान

आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच तनाव इस वजह से भी बढ़ा था क्योंकि वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय बैंक के खिलाफ सेक्शन 7 के इस्तेमाल की बात कही थी. जो रिजर्व बैंक के इतिहास में पहली बार इस्तेमाल किया गया.

गौरतलब है कि पिछले दिनों रिजर्व बैंक के डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि केंद्रीय बैंक को अधिक स्वायत्ता दिए जाने की जरूरत है. ऐसा न किया जाना अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक साबित होगा.

Let’s block ads! (Why?)


Source link


SunnyNovember 12, 2018
12_11_2018-reserve-bank_18630217_20206822.jpg

1min110

Publish Date:Mon, 12 Nov 2018 08:26 PM (IST)

 नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। केंद्र सरकार पहले ही यह सार्वजनिक कर चुकी है कि रिजर्व बैंक के पूर्ण निदेशक बोर्ड की आगामी बैठक में उसके प्रतिनिधि किन मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की कोशिश करेंगे। अब आरबीआइ की तरफ से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि सरकार की तरफ से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं उन पर वह थोड़ा नरम पड़ सकता है।

ऐसे में इस बात की संभावना है कि प्रोम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीएसी), एनपीए और बासेल-तीन जैसे मुद्दे जो तनाव की वजह बने हैं उस पर थोड़े बहुत बदलाव के साथ सहमति बन जाए।

 वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि तमाम उद्योग जगत से जुड़े लोग सरकार से तरलता संकट के बारे में शिकायत कर रहे हैं। तरलता (लिक्विडिटी यानी बैंकों की तरफ से फंड उपलब्ध कराने की व्यवस्था) के तरफ अभी ध्यान नहीं दिया गया तो यह पूरी अर्थव्यवस्था को धक्का पहुंचा सकता है। तरलता को दूर करने के लिए आरबीआइ को उक्त तीनों नियमों में थोड़ा बहुत बदलाव करना होगा।

आरबीआइ की तरफ से सरकार को इस बात के संकेत दिए गए हैं कि वह कुछ मुद्दों पर नरम रुख अपनाने को तैयार है। खास तौर पर छोटे व मझोले उद्योगों (एसएमई) को ज्यादा से ज्यादा कर्ज उपलब्ध कराने के मामले पर आरबीआइ समुचित कदम उठाने की जरुरत आरबीआइ भी महसूस कर रहा है।

एसएमई समेत समूचे उद्योग क्षेत्र को ज्यादा फंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय यह भी चाहता है कि फरवरी, 2018 से लागू एनपीए नियम में कुछ रियायत दी जाए। इस नियम के तहत बैंकिंग कर्ज को 180 दिनों तक नहीं चुकाने वाले सभी ग्राहकों के खिलाफ दिवालिया कानून के तहत प्रक्रिया शुरु करने का प्रावधान है।

इस नियम के लागू होने से हजारों छोटे व मझोले उद्योगों को कर्ज नहीं मिल पा रहा है। वित्त मंत्रालय की मंशा है कि एसएमई को कुछ दिनों के लिए इस नियम से अलग रखा जाए। माना जा रहा है कि आरबीआइ यहां भी कुछ नरमी दिखा सकता है।

इसके अलावा ज्यादा फंड उपलब्ध कराने के लिए वित्त मंत्रालय की तरफ से बासेल-तीन नियमों में कुछ बदलाव का प्रस्ताव किया जाएगा। बासेल-तीन नियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय बैंकिंग नियम है जिसे दुनिया के हर केंद्रीय बैंक अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले वाणिज्यिक बैंकों के लिए लागू कर रहे हैं। यह बैंकों को जोखिम की स्थिति में ज्यादा सुरक्षित रखने के लिए तैयार किये गये नियम है जिसके तहत बैंकों को ज्यादा राशि सुरक्षित रखनी होगी।

इसके तहत पूंजी पर्याप्तता अनुपात को 9 फीसद रखने के अलावा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए अलग से 2.5 फीसद की राशि रखनी है। ये नियम मार्च, 2019 से लागू करने की घोषणा की गई है। वित्त मंत्रालय चाहता है कि इस नियम में बदलाव करते फिलहाल उन्ही बैंकों के लिए इसे लागू किया जाए जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालन कर रहे हैं। इससे देश के छोटे स्तर के सरकारी बैंक ज्यादा कर्ज वितरित कर सकेंगे।

Posted By: Arun Kumar Singh

Let’s block ads! (Why?)


Source link



Sunnywebmoney.Com


CONTACT US




Newsletter


Categories