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SunnyJuly 17, 2018
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संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. राणा सिंह को बिहार गौरव सम्मान से नवाजा गया है। नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में वॉयस ऑफ बिहार और बिहार दस्तक के बैनर तले आयोजित बिहार प्रतिभा सम्मान समारोह में केंद्रीय मंत्री एस.एस. अहलूवालिया और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल वाल्मीकि सिंह ने संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राणा सिंह को बिहार गौरव सम्मान से विभूषित किया। कार्यक्रम में डॉ. राणा सिंह के साथ उन प्रतिभाशाली युवाओं को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने इस साल भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफलता हासिल कर बिहार को गौरवान्वित किया है।

वॉयस ऑफ बिहार और बिहार दस्तक द्वारा विगत कई वर्षों से विविध क्षेत्रों में बिहार का नाम रोशन करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान किया जाता रहा है। इसी कड़ी में इस वर्ष भारतीय प्रशासनिक सेवा सहित अन्य क्षेत्रों में बिहार का नाम रोशन करने वाली लगभग 40 शख्सियतों को एक समारोह में बिहार गौरव सम्मान से नवाजा गया। इन शख्सियतों में संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राणा सिंह भी शामिल हैं।

वॉयस ऑफ बिहार और बिहार दस्तक के वार्षिक सम्मान समारोह में केन्द्रीय मंत्री एस.एस. अहलूवालिया और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल वाल्मीकि सिंह ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए सम्मानित हुए प्रतिभागियों से कहा कि सम्मानस के बाद जवाबदेही और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है, ऐसे में हर कामयाब शख्सियत को भावी पीढ़ी को सही दिशा दिखानी चाहिए।

सम्मान प्राप्त करने के उपलक्ष्य पर कुलपति डॉ. राणा सिंह ने कहा कि यह ऐतिहासिक पल है। देश के दिल दिल्ली में यह सम्मान मिलना उनके लिए सुखद अनुभव है। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने कुलपति डा. राणा सिंह को बिहार गौरव सम्मान से विभूषित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनमें ऐसे सम्मान हासिल करने की काबिलियत है। उनके इस सम्मान से संस्कृति यूनिवर्सिटी भी गौरवान्वित है। कुलाधिपति ने डॉ. राणा सिंह सहित सम्मानित सभी शख्सियतों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. राणा सिंह को बिहार गौरव सम्मान मिलने पर उप कुलाधिपति राजेश गुप्ता, कार्यकारी निदेशक पी.सी. छाबड़ा, प्रति-कुलपति डॉ. अभय कुमार आदि ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी है।

डॉ. राणा सिंह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि संयुक्त अरब अमीरात में भी शिक्षा का अलख जगा चुके हैं। वह अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं पर पकड़ रखते हैं। इन्होंने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लेने के साथ ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी काफी योगदान दिया है। डॉ. राणा सिंह एमबीए (फाइनेंस) में गोल्ड मेडलिस्ट होने के साथ ही पीएचडी उपाधि धारक हैं। डॉ. सिंह शैक्षणिक ही नहीं प्रशासनिक अनुभव में भी बेजोड़ हैं।

डॉ. राणा सिंह संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलपति का दायित्व संभालने से पहले आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (ग्रेटर नोएडा) में डायरेक्टर रह चुके हैं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात विश्वविद्यालय में भी निदेशक पद संभाल चुके हैं। डॉ. राणा सिंह को वित्तीय लेखांकन, अंतर्राष्ट्रीय वित्त, वित्तीय प्रबंधन, व्यापार में डेटा विश्लेषण, प्रबंधन में मात्रात्मक तकनीक, कम्प्यूटर और सूचना प्रणाली, परियोजना योजना और नियंत्रण, अंतर्राष्ट्रीय परियोजना वित्त तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में महारत हासिल है। डॉ. राणा सिंह की वित्त और लेखा, बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स, इंटरनेट मार्केटिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, हेल्थकेयर मैनेजमेंट, इंटरनेट पेमेंट गेट-वे इंटीग्रेशन, ई-कैश, बैंकिंग, इंश्योरेंस, स्कूल स्थापना आदि में भी खासी दिलचस्पी है।

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SunnyJuly 16, 2018
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नई दिल्ली, 16 जुलाई (आईएएनएस)| चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में डीसीबी बैंक के मुनाफे में 6.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जोकि 69.50 करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 65.22 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

डीसीबी बैंक ने एक बयान में कहा कि समीक्षाधीन अवधि में उसकी ब्याज आमदनी 17 फीसदी बढ़कर 272.97 करोड़ रुपये रही, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में यह 233.16 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा बैंक की एनपीए 20 आधार अंक घट कर 0.92 फीसदी और प्रोविजन 6.4 फीसदी घट कर 33.23 करोड़ रुपये के रह गए।

बैंक ने बताया कि 30 जून 2018 को बैंक में कुल जमाएं 31 फीसदी बढ़कर 25,032 करोड़ रुपये रही, जिसमें से रिटेल डिपोजिट (कृषि व समावेशी बैंकिंग मिलाकर) कुल डिपोजिट का 75 फीसदी रही।

बयान में कहा गया कि बैंक का सीएएसए अनुपात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 25.67 फीसदी था, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में यह 26.85 फीसदी था। बैंक के बचत खातों में प्रतिवर्ष 32 फीसदी की वृद्धि हो रही है।

डीसबी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरली एम. नटराजन ने कहा, हम शाखाओं के विस्तार का काम पूरा करते हुए अनुमानित विकास को हासिल करने में सक्षम रहे हैं। मार्जिन हालांकि दबाव में हैं, खास तौर पर मार्गेज और कॉपोर्रेट लोन बुक के मामले में। हम एनपीए पर सतर्कता से नजर रख रहे हैं।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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SunnyJuly 14, 2018
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ बढ़ रही है। 12 जुलाई को शेयर बाजार ने इतिहास रच दिया। 30 शेयरों का बीएसई सूचकांक सेंसेक्स 250 अंक से अधिक की बढ़त के साथ 36,525.66 अंक के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। रोज रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि पीएम मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है, और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। जाहिर है यह भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में सेंसेक्स करीब 22 हजार के आस-पास रहता था।

एक दिन पहले ही विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।

आइए इस बहाने एक दृष्टि डालते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था की प्रमुख उपलब्धियों पर।

विनिवेश से जुटाई रिकॉर्ड रकम
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के कारण सरकार ने पहली बार विनिवेश के जरिये एक बड़ी रकम जुटाई है। वित्त वर्ष 2017-18 में अभी तक विनिवेश से 54,337 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। यह एक रिकॉर्ड है। इससे उत्साहित वित्त मंत्री आम बजट 2018-19 में विनिवेश के जरिये लगभग एक लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रख सकते हैं। सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों में रणनीतिक हिस्सेदारी बेचकर भी अच्छी खासी रकम जुटाई है। साथ बीमा कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराकर भी धनराशि प्राप्त की गयी है।

मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 5 साल में सबसे ज्यादा
देश में दिसंबर, 2017 में भी मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटीज में तेजी का रुख रहा। नये ऑर्डरों और उत्पादन में तेज बढ़ोतरी के दम पर देश के विनिर्माण क्षेत्र ने दिसंबर में तेज उड़ान भरी और इसका निक्कई पीएमआई सूचकांक नवंबर के 52.6 से बढ़कर 54.7 पर पहुँच गया। दिसंबर में उत्पादन वृद्धि की रफ्तार पांच साल में सबसे तेज रही जबकि नये ऑर्डरों में अक्टूबर 2016 के बाद की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गयी। कंपनियों ने नये रोजगार भी दिये और रोजगार वृद्धि दर अगस्त 2012 के बाद के उच्चतम स्तर पर रही।

कोर सेक्टर में दर्ज की गई 6.8 प्रतिशत की रफ्तार
आठ कोर सेक्टरों में नवंबर 2017 के महीने में वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह एक साल में सबसे ऊपरी स्तर पर है। रिफाइनरी, इस्पात और सीमेंट जैसे क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर बढ़ी है। एक साल पहले इसी माह में इन उद्योगों की उत्पादन वृद्धि 3.2 प्रतिशत थी। कोर सेक्टरों की वृद्धि दर अक्तूबर, 2016 के बाद सबसे अधिक है। रिफाइनरी, इस्पात तथा सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर अच्छी रही। इस बार नवंबर में रिफाइनरी उत्पाद की 8.2 प्रतिशत, इस्पात की 16.6 प्रतिशत और सीमेंट क्षेत्र की वृद्धि दर सालाना आधार पर 17.3 प्रतिशत रही। कोर सेक्टरों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट तथा बिजली उत्पादन को रखा गया है।

यूपीए सरकार से काफी ज्यादा है ग्रोथ रेट
यूपीए सरकार के अंतिम तीन सालों की अर्थव्यवस्था की गति पर गौर करें तो ये 2011-12 में 6.7, 2012-13 में 4.5 और 2013-14 में 4.7 प्रतिशत थी। वहीं बीते तीन साल के मोदी सरकार के कार्यकाल पर गौर करें तो 2014-15 में 7.2, 2015-16 में 7.6 थी, वहीं 2016-17 में 7.1 है। जाहिर है बीते तीन सालों में जीडीपी ग्रोथ रेट 7 से ज्यादा रही है। जबकि यूपीए के अंतिम तीन सालों के औसत जीडीपी ग्रोथ रेट 5.3 ही रही है।

विदेशी ऋण में 2.7 प्रतिशत की कमी
केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का विदेशी ऋण 13.1 अरब डॉलर यानि 2.7% घटकर 471.9 अरब डॉलर रह गया है। यह आंकड़ा मार्च, 2017 तक का है। इसके पीछे प्रमुख वजह प्रवासी भारतीय जमा और वाणिज्यिक कर्ज उठाव में गिरावट आना है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च, 2017 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और विदेशी ऋण का अनुपात घटकर 20.2% रह गय, जो मार्च 2016 की समाप्ति पर 23.5% था। इसके साथ ही लॉन्ग टर्म विदेशी कर्ज 383.9 अरब डॉलर रहा है जो पिछले साल के मुकाबले 4.4% कम है।

बेहतर हुआ व्यापार संतुलन
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2013-14 में अनुमानित व्‍यापार घाटा 62448.16 मिलियन अमरीकी डॉलर का था, वहीं अप्रैल-जनवरी, 2016-17 के दौरान 38073.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। जबकि अप्रैल-जनवरी 2015-16 में यह 54187.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से भी 29.7 प्रतिशत कम है। यानी व्यापार संतुलन की दृष्टि से भी मोदी सरकार में स्थिति उतरोत्तर बेहतर होती जा रही है और 2013-14 की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत तक सुधार आया है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

कैशलेस अभियान से आई पारदर्शिता
रिजर्व बैंक के अनुसार 4 अगस्त तक लोगों के पास 14,75,400 करोड़ रुपये की करेंसी सर्कुलेशन में थे। जो वार्षिक आधार पर 1,89,200 करोड़ रुपये की कमी दिखाती है। जबकि वार्षिक आधार पर पिछले साल 2,37,850 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई थी।

एक नजर डालते हैं देश की अर्थव्यवस्था पर और इकोनॉमी को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों व रेटिंग एजेंसियों की टिप्पणियों पर-

उम्मीद से अधिक 7.5 प्रतिशत से ऊपर रहेगी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट: नीति आयोग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती की तरफ बढ़ रही है। मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश की इकोनॉमी वृद्धि कर रही है। नीति आयोग का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 7.5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में कम से कम 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और यह 7.8 प्रतिशत के स्तर को छू सकती है। उन्होंने कहा कि यह आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की ओर से लगाए गये अनुमान से ज्यादा रहने वाली है। उन्होंने यह भी कहा कि क्योंकि वित्त 2018 की आखिरी तिमाही ग्रोथ रेट 7.7 प्रतिशत के स्तर पर रहा है इसलिए उन्हें लगता है कि आने वाली तिमाहीयों में ये इससे नीचे नहीं जा सकता।

दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है भारत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि कर रही है। दुनियाभर की रेटिंग एजेंसियां और संस्थाएं भारत की इकोनॉमी को लेकर सकारात्मक टिप्पणी कर रही हैं। हालांकि भारत में विपक्षी दलों के नेता पेट्रोल-डीजल के दाम, जीएसटी आदि को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इन्हीं विपक्षी नेताओं को जवाब देते हुए हाल ही में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में हासिल हुई 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर से एक बार फिर से यह स्थापित हो गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा है कि अभी यह रुख कई और साल तक बना रहेगा।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे केंद्रीय मंत्री श्री जेटली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा कि नोटबंदी जैसे संरचनात्मक सुधारों और जीएसटी के क्रियान्वयन और इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड को लागू करने की वजह से हमें दो तिमाही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। जिन लोगों ने यह अनुमान लगाया था कि जीडीपी में 2 प्रतिशत की गिरावट आएगी वे गलत साबित हुए। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘हमने प्रत्येक भारतीय को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया है। अब अतीत की तुलना में भविष्य अधिक उज्ज्वल दिख रहा है। यह रुख अगले कुछ साल तक जारी रहेगा। 

विदेशी मुद्रा भंडार 88 करोड़ डॉलर बढ़कर हुआ 413 अरब डॉलर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार आठ जून को समाप्त सप्ताह में 87.95 करोड़ डॉलर बढ़कर 413 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, 08 जून को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 87.54 करोड़ डॉलर बढ़कर 388.39 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार 21.19 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब के करीब था।

फिच ने आर्थिक ग्रोथ का अनुमान 7.4 प्रतिशत तक बढ़ाया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार सुधर रही है और मजबूत हो रही है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही फिच ने 2019-20 के लिए वृद्धि दर का पूर्वानुमान 7.5 प्रतिशत तय किया है। फिच ने अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा, ‘हमने 2018-19 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर मार्च के 7.3 प्रतिशत के पूर्वानुमान से संशोधित कर 7.4 प्रतिशत कर दी है।’ भारतीय अर्थव्यवस्था 2017-18 में 6.7 प्रतिशत और जनवरी-मार्च तिमाही में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा भारतः फिच
फिच ने इसके पहले कहा था कि भारत विकास के मामले में अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। फिच के अनुसार भारत अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। इसके साथ ही भारत सबसे तेजी से विकास करने वाला देश भी बन जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत फिच रेटिंग ग्लोबल इकॉनोमिक आउटलुक में शामिल 10 सबसे बड़े उभरते बाजारों की सूची में शीर्ष पर है। फिच ने बताया कि अगले 5 सालों में चीन की जीडीपी जहां 5.5 प्रतिशत रहेगी वहीं भारत की जीडीपी विकास दर 6.7 रहेगी। फिच ने बताया कि पूरी दुनिया में इस समय सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या भारत में है। युवा आबादी के ही चलते भारत अगले 5 सालों में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

7 प्रतिशत से ज्यादा रहेगी ग्रोथ: सीआईआई
भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज सीईओ को लेकर किए गए सीआईआई के सर्वे के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में इकनॉमिक ग्रोथ 7 प्रतिशत से ज्यादा रह सकती है। सर्वेक्षण में शामिल इन सीईओ का कहना है कि इससे घरेलू बाजार में निवेश को खासा बढ़ावा मिल सकता है। सीआईआई के अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने कहा कि उद्योग जगत को अगले दो साल जीडीपी ग्रोथ 8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उनका कहना है कि सरकारी खजाने से होनेवाले खर्च के मोर्चे पर समझदारी दिखाने, मैक्रो इकनॉमिक मैनेजमेंट और स्ट्रॉन्ग रिफॉर्म्स प्रोसेस से ग्रोथ की ठोस बुनियाद बनी है। पुणे में सीआईआई की हालिया बैठक में 80 से ज्यादा सीनियर कॉरपोरेट लीडर्स की मौजूदगी में यह सर्वे हुआ। सर्वे में शामिल 82% कॉरपारेट दिग्गजों का मानना है कि 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 7% से ज्यादा रह सकती है। लगभग 10% कॉरपोरेट लीडर्स ने इकनॉमिक ग्रोथ 7.5% से ज्यादा रहने का अनुमान जताया है।

सुधार सही दिशा में- सीआईआई
इसके पहले हाल ही में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल पूरा होने पर सीआईआई ने कहा कि पिछले चार साल में सरकार ने चरणबद्ध तरीके से कारोबार सुगमता, बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए), प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियम, ढांचागत निर्माण और असफल उद्यमों का निस्तारण जैसी अर्थव्यवस्था की मुख्य दिक्कतों को दूर किया है। जीएसटी के सुचारू होने और सुधारों के मजबूती से सही दिशा में रहने से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

7.5 प्रतिशत की दर के बढ़ेगी जीडीपी- क्रिसिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। जीएसटी प्रणाली के सुचारू हो जाने तथा सुधारों के सही दिशा में होने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है और चालू वित्त वर्ष में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.5 प्रतिशत तक रह सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार विकास की गति जारी रहेगी और वित्त वर्ष 2019 में ग्रोथ को 7.5 प्रतिशत तक ले जाएगी। इसमें कहा गया कि ग्रोथ को निवेश के सहारे के साथ खपत में बढ़ोतरी का साथ मिलेगा। वित्त वर्ष 2017-18 की अंतिम तिमाही यानी जनवरी-मार्च में कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन की बदौलत देश की विकास दर बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले सात तिमाही यानी करीब पौने दो साल में सबसे तेज है।

आर्थिक वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान- केयर रेटिंग्स
उद्योग एवं कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 7.5 प्रतिशत रह सकती है। रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘हम 2018-19 में जीडीपी में 7.5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।’ जीडीपी वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में 6.6 प्रतिशत थी।

चौथी तिमाही में 7.4% हो सकती है जीडीपी- इक्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA)ने कहा है कि 2017-18 की जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो तीसरी तिमाही के 7.2 प्रतिशत से अधिक है। इक्रा ने कहा है कि, ‘2017-18 की चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर तीसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत से बढ़कर 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इक्रा के अनुसार उद्योग और कृषि , वानिकी, मत्स्य और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी के चलते पिछली तिमाही के मुकाबले चौथी तिमाही में सुधार होगा।

7.6 प्रतिशत रहेगी ग्रोथ रेट: संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट चीन से ज्यादा मजबूत रहेगी और मौजूदा वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहेगी। यूएन वर्ल्ड इकनॉमिक सिचुएशन एंड प्रॉसपेक्ट्स (डब्ल्यूईएसपी) की रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.5 प्रतिशत और 2018-19 में 7.6 प्रतिशत रहने की संभावना है।

अगले साल 7.8 प्रतिशत विकास दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था- आईएमएफ
अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था की तारीफ करते हुए कहा है एशिया आने वाले वर्षों में वैश्‍विक अर्थव्‍यवस्‍था के विकास का मुख्‍य इंजन होगा। आईएमएफ ने कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था साल 2018 में 7.4 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ेगी और नोटबंदी और जीएसटी के असर से उबर चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था अगले साल 7.8 फीसदी की विकास दर से आगे बढ़ेगी। आइएमएफ ने हाल ही में कहा था कि भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इस मामले में भारत ने फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है। आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2.6 ट्रिलियन डॉलर (करीब 170 लाख करोड़ रुपये) की हो गई है, जो फ्रांस की इकोनॉमी से अधिक है।

2018 में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा भारत- आईएमएफ
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इसके पहले भी कहा है कि इस वर्ष भारत की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना है। आईएमएफ ने यह भी कहा है कि 2019 में वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इस अवधि में भारत एक बार फिर विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में उभरेगा। आईएमएफ का कहना है कि मजबूत रफ्तार, अनुकूल बाजार धारणा के साथ अन्य कारणों से वैश्विक वृद्धि दर बेहतर रहेगी। आईएमएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में निवेश में सुधार, उभरते एशिया में मजबूत वृद्धि, उभरते यूरोप में उल्लेखनीय सुधार और कई जिंस निर्यातकों की स्थिति सुधरने से वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर बढ़ेगी।

भारत अगले दशक की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था- हार्वर्ड
हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने कहा है कि भारत अगले 10 साल दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना रहेगा। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय विकास केंद्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर सालाना 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस लिहाज से भारत की वृद्धि दर चीन और अमेरिका से अधिक रहेगी। हार्वर्ड की रिपोर्ट ने 2026 में चीन की वृद्धि दर 4.9 प्रतिशत और अमेरिका की वृद्धि दर तीन प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पिछले कुछ सालों में जो सुधार हुए उससे अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ने की संभावना पैदा हो रही है।

दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा- हार्वर्ड
इसके पहले की भारत की अर्थव्यवस्था की गति और इसकी मजबूती पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में माना गया है कि भारत चीन से आगे बढ़कर वैश्विक विकास के आर्थिक स्तंभ के रूप में उभरा है और आने वाले दशक में वो नेतृत्व जारी रखेगा। सेंटर फॉर इंटरनेशल डेवलपमेंट (CID) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है। CID के अनुमान के अनुसार भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर है। CID के रिसर्च से ये निकलकर आया है कि वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी अब भारत है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है।

7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी जीडीपी
देश की अर्थव्यवस्था के लिए हर तरफ से अच्छी खबर आ रही है। मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी डॉयचे बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि, ‘वित्त वर्ष 2018-19 के लिए हमारा आर्थिक वृद्धि दर अनुमान 7.5 प्रतिशत का है, जो कि बीते वित्त वर्ष 2017-18 के 6.6 प्रतिशत की ग्रोथ के मुकाबले जीडीपी की संभावनाओं में और सुधार करेगा।’

पहली छमाही में भारत की औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहेगी- नोमूरा
जापान की वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनी नोमूरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश और उपभोग में सुधार से इस साल की पहली छमाही में जीडीपी की औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहेगी। नोमूरा के अनुसार निवेश और उपभोग मांग में बढ़ोतरी से मुख्य रूप से वृद्धि दर को रफ्तार मिलेगी। नोमूरा का कहना है कि 2018 की पहली छमाही में जीडीपी की औसत वृद्धि सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी, जो अक्तूबर-दिसंबर, 2017 में 7.2 प्रतिशत रही है। नोमुरा ने इसके पहले भी भारत की ग्रोथ के बारे में पॉजिटिव रिपोर्ट दी थी।

BRICS देशों में भारत की आर्थिक विकास दर सर्वाधिक: केपीएमजी
पेशेवर सेवा प्रदाता कंपनी केपीएमजी ने कहा है कि ब्रिक्स देशों में भारत सर्वाधिक आर्थिक विकास दर वाला देश है। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। केपीएमजी की रिपोर्ट ‘इंडिया सोर्स हायर’ के अनुसार, सुधार के कुछ कदमों के कारण वित्त वर्ष-2018 की पहली तिमाही में विकास की रफ्तार धीमी रहने के बावजूद भारत की विकास दर 2018 में 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर और वैश्विक आर्थिक विकास क्रमश: दो और तीन प्रतिशत है। केपीएमजी इंडिया के चेयरमैन व सीईओ अरुण एम. कुमार ने कहा कि भारत आज टिकाऊ विकास की ओर अग्रसर है।

इस साल 7.3 प्रतिशत की रफ्तार से दौड़ेगी अर्थव्यवस्था: एडीबी
एशियाई विकास बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 में 7.3 प्रतिशत जबकि अगले वित्त वर्ष 2019-20 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। बैंक का अनुमान है कि जीएसटी के कारण उत्पादन में वृद्धि और बैंकिंग के क्षेत्र में सुधार के कारण निवेश से आर्थिक विकास दर को गति मिलेगी। रेटिंग एजेंसी फिच का भी यही अनुमान है। वैसे भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार माजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक विकास की दर 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना है।

मजबूत है विदेशी मुद्रा भंडार- एडीबी
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने हाल ही में यह भी कहा है कि भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार का अच्छा संग्रह है। एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवादा ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होने के कारण भारत को रुपये में उतार-चढ़ाव से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। सवादा ने कहा कि, ‘विदेशी मुद्रा भंडार समय के साथ बढ़ ही रहा है इसमें गिरावट के कोई संकेत नहीं हैं इसीलिए मुझे लगता है कि विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से हमें खास परेशान नहीं होना चाहिए।’ प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद विदेशी मुद्रा भंडार 13 अप्रैल, 2018 को समाप्त सप्ताह में अबतक के सर्वकालिक उच्च स्तर 426.082 अरब डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब के करीब था।

2018 में चीन को पछाड़ भारत बनेगा सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था
इसके पहले सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मामले में भारत 2018 में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2018 में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और वह चीन के मुकाबले आगे निकल जाएगा। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2018 में ही इक्विटी मार्केट के मामले में भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समय जब विकसित देशों की जीडीपी 2 से 3 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहे हों, भारत की अर्थव्यवस्था 7.5 की दर से विकास करेगी, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट का दौर जारी रहेगा

ब्रिटेन-फ्रांस को पछाड़ दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्था में होगा भारत
सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (सीईबीआर) की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2018 में ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी कर रहा है। सीईबीआर के डिप्टी चेयरमैन डोगलस मैकविलियम ने कहा कि वर्तमान में अस्थायी असफलताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के बराबर टक्कर दे रही है। अगर भारत की अर्थव्यवस्था इसी क्रम में बढ़ती रही तो भारत अगले साल 2018 में फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ देगा। इतना हीं नहीं अगले साल भारत दोनों देशों को पछाड़कर दुनिया की शीर्ष पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

एसोचैम का अनुमान
वहीं एसोचैम ने कहा है कि 7% विकास दर का उसका अनुमान प्रधानमंत्री मोदी सरकार की नीतियों में स्थिरता, अच्छे मॉनसून, औद्योगिक गतिविधियों एवं ऋण वृद्धि में तेजी और स्थिर विदेशी मुद्रा दर के अनुमानों पर आधारित है। 2018 के लिए जारी एसोचैम के आउटलुक में कहा गया है कि, ‘2017-18 की दूसरी तिमाही में 6.3 फीसद पर पहुंची भारत की जीडीपी विकास दर की तुलना में सितंबर 2018 की तिमाही तक आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।’

भारत 8 फीसदी दर से करेगा विकास : गोल्डमैन सैक्स
प्रसिद्ध निवेश संस्था गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत 8 फीसदी की दर से विकास करेगा। इसके पीछे का मुख्य कारण होगा, बैंकों का पुनर्पूंजीकरण। गोल्डमैन का मानना है कि बैंकों के पूंजीकरण से देश के क्रेडिट डिमांड और निजी निवेश को मजबूती मिलेगी। गोल्डमैन के मुताबिक, ‘हम भारत की जीडीपी विकास को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 8 फीसदी पर निर्धारित कर रहे हैं। 2017-18 में हालांकि जीडीपी विकास 6.4 फीसदी पर रहा, जिसका मुख्य कारण नोटबंदी और जीएसटी का शुरुआती प्रभाव रहा, लेकिन बैंकों का पुनर्पूंजीकरण जीडीपी के विकास में मददगार साबित होगा।’

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली
भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी। मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि डिजिटलीकरण से जीडीपी वृद्धि को 0.5 से 0.75 प्रतिशत की बढ़त मिलेगी और अनुमान है कि 2026-27 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार आने वाले दशक में भारत की सालाना जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 11.2 के बीच रहेगी।

7.5 की विकास दर हासिल करेगा भारत: मूडीज
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्था मूडीज के इंवेस्टर सर्विस सर्वे में पता चला है कि भारत की विकास दर अगले 12 से 18 महीने के दौरान 6.5 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहेगी। सर्वेक्षण में 200 से ज्यादा मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि संभावना को लेकर विश्वास व्यक्त किया। सर्वे में शामिल सभी लोगों का मानना था कि जीएसटी के लागू होने से 12 से 18 माह में आर्थिक वृद्धि बढ़ेगी। मूडीज को विश्वास है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार अगले 3-4 साल में बढ़कर 8 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगी। मूडीज के सहायक प्रबंध निदेशक मैरी डिरोन का कहना है कि भारत में चल रहे आर्थिक और संस्थागत सुधारों और आने वाले समय में होने वाले बदलावों को देखते हुए नोटबंदी से पैदा हुई अल्पकालिक अड़चन के बावजूद अगले कुछ महीनों के दौरान भारत उसके जैसे दूसरे देशों के मुकाबले अधिक तेजी से वृद्धि करेगा।

आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत हो जाएगी: स्टैंडर्ड चार्टर्ड
स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने आर्थिक परिदृश्य-2018 के बारे में एक शोध पत्र में कहा है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का बुरा समय बीत चुका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत का पूर्वानुमान भी व्यक्त किया है। उसने कहा, ‘प्रमुख नीतिगत बदलावों का असर समाप्त हो जाने के बाद हमें अगली चार से छह तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि में क्रमिक सुधार की उम्मीद है।’ अगली कुछ तिमाहियों में वृद्धि दर सात प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र ने बताया अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक बताया है। यूएन ने साल 2018 में भारत की विकास दर 7.2 और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट में यूएन ने कहा गया है कि भारी निजी उपभोग, सार्वजनिक निवेश और संरचनात्मक सुधारों के कारण साल 2018 में भारत की विकास दर वर्तमान के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो जाएगी और ये विकास दर साल 2019 में 7.4 प्रतिशत तक पहुंचेगी।‘वर्ल्ड इकोनोमिक सिचुएशन एंड प्रोस्पेक्ट 2018’ रिपोर्ट में यूएन ने कहा है कि कुल मिला कर दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल नजर आ रहा है।

अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ रहा भारत- अलीसा एयर्स
एक अमेरिकी टॉप थिंक-टैंक काउंसिल में भारत, पाकिस्तान और साउथ एशिया मामलों की वरिष्ठ सदस्य अलीसा एयर्स ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था उसे व्यापक वैश्विक महत्व और देश की सैन्य क्षमताओं के विस्तार तथा आधुनिकीकरण के लिये ऊर्जा दे रही है। अलीसा के अनुसार, ‘भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर वैश्विक उछाल दिया है। इसकी मदद से भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है।’ फोर्ब्स में छपे आर्टिकल में अलीसा कहती हैं, ‘पिछले वर्षों में भारत दुनिया भर में विदेशी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों के संदर्भ में एक बड़ा कारक बनकर उभरा है और अब वैश्विक मंच पर अब भारत ज्यादा मुखर दिखाई दे रहा है। दरअसल भारत खुद को एक ‘प्रमुख शक्ति’ के रूप में देख रहा है।’

‘सपनों’ के साथ आगे बढ़ रहा भारत
मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विश्लेषक फ्रिट्ज लॉज ने ‘द सिफर ब्रीफ’ में एक लेख में भी भारत की प्रशंसा की है और पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। फ्रिट्ज लॉज ने लिखा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी भारत को आर्थिक, सैन्य, भू-राजनीतिक शक्ति से योग्य बनाने के अपने सपने के साथ आगे बढ़ रहे हैं।’

भारत बना विदेशी कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह- चीन
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए खूब आकर्षण बन रहा है। अखबार ने एक लेख में कहा है कि कम लागत में उत्पादन धीरे-धीरे चीन से हट रहा है। अखबार ने लिखा है कि भारत सरकार ने देश के बाजार के एकीकरण के लिए जीएसटी लागू किया है। यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने वाला है। इस नई टैक्स व्यवस्था से मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है क्योंकि इसमें राज्य और केंद्र के विभिन्न करों को मिला दिया गया है। लेख में कहा गया है कि आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार जीएसटी से फॉक्सकॉन जैसी बड़ी कंपनी भारत में निवेश करने के अपने वादे के साथ आगे बढ़ेंगी।

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SunnyJuly 12, 2018
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अर्थव्यवस्था की वृद्धि में क्षेत्रवार योगदान के आंकड़े सामने आ चुके हैं। लोक प्रशासन, जिसे जाने किन वजहों से सेवाओं की श्रेणी में रखा जाता है, पिछली तिमाही के मुकाबले इस बार सात फीसदी बढ़ा है और देश में वृद्धि का सबसे बड़ा चालक बन कर उभरा है। इसका सामान्य मतलब यह हुआ कि आप जब तक सरकारी कर्मचारियों को ज्यादा भुगतान करते रहेंगे, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगातार बढ़ता रहेगा। फिर एक दिन ऐसा आएगा जब आपका दम फूल जाएगा और नकद नदारद हो जाएगा। वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में लोक प्रशासन ने जीडीपी में कुल 17.3 फीसदी का योगदान दिया था। यह चौथी तिमाही में बढ़कर 22.4 फीसदी हो गया, जो कि 22.7 फीसदी का योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र से मामूली अंतर पर नीचे था।

बात यहीं नहीं रुकती। यदि आप सातवें वेतन आयोग में 23 फीसदी की वृद्धि से संतुष्ट नहीं हैं तो आगामी 15 अगस्त का इंतजार करिए। सरकारी कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस बार केंद्रीय कर्मचारियों से वित्त मंत्री के किए वादे को पूरा करते हुए वेतन आयोग की सिफारिशों के पार जाकर वेतन वृद्धि की घोषणा करेंगे। उम्मीद यह भी की जा रही है कि अवकाश प्राप्ति की आयुसीमा बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी जाएगी।

इस विषय पर काफी बहस है कि सातवें वेतन आयोग में की गई वेतन वृद्धि की सिफारिशों का अर्थव्यवस्था को कैसा लाभ पहुंचेगा, जिसे सरकार ने पिछली तारीख से लागू करने को मंजूरी दी है। इस दरियादिली के बावजूद कुछ सरकारी कर्मचारी इस इजाफे को ऊंट के मुंह में जीरा बता रहे हैं तो कुछ की प्रतिक्रिया यह कि जैसा पैसा देंगे वैसे ही कर्मचारी मिलेंगे – गोया उन्हीं कर्मचारियों को ज्यादा वेतन देने पर वे ईमानदार लोकसेवक बन जाएंगे।

वेतन वृद्धि से सरकार की जो लागत बढ़ी है, उससे नई सरकारी भर्ती में सुस्ती आई है और अधिकतर महकमे जरूरत से कम कार्मिकों पर चल रहे हैं। मसलन, राजस्व संग्रहण महकमे में 45.45, स्वास्थ्य विभाग में 27.59, रेलवे में 15.15 और गृह मंत्रालय में 7.2 फीसदी कर्मचारी कम हैं। ये आंकड़े इस तंत्र की खामियों को आईना दिखाते हैं। ज्यादा वेतन अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है, यह दलील भी भ्रष्ट सोच को दर्शाती है। इस तरह तो और ज्यादा वेतन वृद्धि से जीडीपी में भी और ज्यादा वृद्धि देखने को मिलती। एक बार सड़क, ऊर्जा संयंत्रों, स्कूलों-अस्पतालों के रूप में उन अवसंरचना के बारे में सोचें जिन्हें पैसे की जरूरत है। क्या ये क्षेत्र जीडीपी नहीं बढ़ाते हैं?

पिछली वेतन वृद्धि से केंद्र, राज्यों और उनके सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने वाले कुल दो करोड़ 30 लाख सरकारी कर्मचारियों को लाभ मिला था। उद्योग व बैंकिंग के जानकारों को उम्मीद थी कि वेतन वृद्धि और पूंजीगत व्यय को सरकारी प्रोत्साहन, अर्थव्यवस्था को आठ फीसदी या इससे अधिक के स्तर पर ले जाने में सक्षम होंगे। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में औसतन 23.5 फीसदी के इजाफे ने वेतन पर सरकारी खर्च 1.14 लाख करोड़ रुपए बढ़ा दिया। यह तब है जबकि 64.08 करोड़ भारतीय यूएनडीपी द्वारा तय की गई गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। हम सभी को ऐसे में एक सवाल पूछना चाहिए कि यह वृद्धि किसकी कीमत पर है? अरुण जेटली का बार-बार इसे बतौर उपलब्धि गिनवाना वैसे ही है जैसे परिवार का मुखिया घर के बढ़ते हुए बच्चों के दूध में कटौती कर अपने शराब-धूम्रपान का खर्च बढ़ा ले।

देश में प्रशासन के तीनों स्तरों को मिलाकर देखें तो कुल 1.85 करोड़ लोग सरकारी नौकरी करते हैं। केंद्र में 34 लाख और सभी राज्य सरकारों को मिलाकर 72.18 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। अर्धसरकारी एजेंसियों में 58.14 लाख लोग रोजगाररत हैं। स्थानीय स्तर पर केवल 20.53 लाख सरकारी कर्मचारी हैं जबकि आम नागरिकों से सर्वाधिक संवाद इसी स्तर पर होता है।

सवाल उठता है कि क्या हमें सरकार का बोझ झेलना पड़ रहा है। वास्तव में ऐसा नहीं है। ध्यान से देखें तो भारत में हर एक लाख नागरिकों पर 1622.8 सरकारी कर्मचारी हैं। इसके उलट अमेरिका में यह आंकड़ा 7681 है। केंद्र सरकार के लिए यह आंकड़ा 257 तो संयुक्त राज्य की फेडरल सरकार के लिए 840 है। अब राज्यों पर आएं। हर एक लाख नागरिकों पर बिहार में 457.60, मध्यप्रदेश में 826.47, उत्तर प्रदेश में 801.67, ओडिशा में 1191.97, छत्तीसगढ़ में 1174.62, गुजरात में 826.47 और पंजाब में 1263.34 सरकारी कर्मचारी हैं। इस लिहाज से संकटग्रस्त राज्यों की स्थिति अच्छी है। मिजोरम, नगालैंड, जम्मू-कश्मीर और सिक्किम में यह संख्या ज्यादा है। सिक्किम को छोड़ दें तो अन्य कोई भी राज्य अंतरराष्ट्रीय स्तरों के करीब भी नहीं ठहरता।

साफ है कि अपेक्षाकृत पिछड़े राज्यों में सरकारी कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। मतलब यह कि गरीबी दूर करने के लिए जरूरी शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवाओं आदि प्रावधानों के लिए कर्मचारियों का टोटा है। ऐसे में हम सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि कर उपभोग बढऩे की उम्मीद पाले हुए हैं, ताकि जीडीपी में भी इजाफा हो। यह शेर की सवारी करने जैसा है। हालांकि इससे उतरना अब मुश्किल नजर आता है।

मोहन गुरुस्वामी
नीति विश्लेषक

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SunnyJuly 12, 2018
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नई दिल्ली

इन दिनों बैंक ऑफ चाइना के भारत में आने की खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों को हैरानी इसलिए भी है क्योंकि चीन के साथ भारत के राजनीतिक रिश्तों में तनाव किसी से छिपा नहीं है। इसके अलावा चीन के साथ भारतीय व्यापार में असंतुलन की जो स्थिति है, उसको लेकर भी कई भारतीय अर्थशास्त्री और कॉरपोरेट लीडर नाराजगी जता चुके हैं। चीन के साथ भारत का एक्सपोर्ट कम है और इंपोर्ट ज्यादा है। इससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ रहा है। ऐसे में चीन के सबसे बड़े बैंकों में से एक बैंक ऑफ चाइना भारत के लिए किस तरह का खतरा पैदा कर सकता है, अब इस पर बहस हो रही है।

भारतीय बैंकिंग सेक्टर को खतरा

आरबीआई के पूर्व डेप्युटी गवर्नर पी. के. चक्रवर्ती के अनुसार बैंक ऑफ चाइना के भारत में दस्तक देने की खबर इसलिए अहम बनी है कि चीन के साथ भारत के राजनीतिक रिश्तों में अस्थिरता है। यह विश्व का चौथा बड़ा बैंक है। कहने को तो चीन के बैंक को भारत में बैंकिंग सेक्टर के लिए तय नियमों के अनुसार काम करना होगा लेकिन चीन अपनी आक्रामक कारोबारी नीति के लिए जाना जाता है। चीन के पास जो भी रिसोर्स हैं, उसको वह बड़े अग्रेसिव तरीके से इस्तेमाल करता है। वह मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ऐसी रणनीति बनाने में माहिर है, जो दूसरों को चौंका सकता है। हमें यह देखना होगा कि चीन की रणनीति भारतीय बैंकिंग सेक्टर में कैसी रहती है और सरकारी बैंकों के लिए यह कैसी साबित होती है। रिसोर्स, टेक्नॉलजी और अग्रेसिव रणनीति के मामले में हमारे सरकारी बैंक अभी पीछे हैं। अगर उनका मार्केट शेयर गिरा तो यह देश की इकॉनमी के लिए ठीक नहीं होगा।

अमेरिका खतरा देख चुका है

मार्केट एक्सपर्ट और पूर्व बैंकर एस. के. लोढ़ा के अनुसार अमेरिका ने पहले चीनी कंपनियों और बैंकों को अमेरिका में खुलकर काम करने दिया। इसका परिणाम यह रहा कि अमेरिका में चीन के कारोबारी और प्रॉडक्ट छा गए। इससे अमेरिका की इकॉनमी गड़बड़ा गई। चीन के कारोबारियों के साथ एक खास बात यह है कि वे विदेश में कारोबार करते हैं, पैसा कमाते हैं और इनवेस्टमेंट अपने देश में ज्यादा करते हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार अनिवासी द्वारा अपने देश को पैसा भेजने में और विदेशी मुद्रा भंडार में अनिवासियों के योगदान के मामले में चीनी कारोबारी सबसे अव्वल हैं। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर में चीन का आना कई ऐसे सवाल खड़े कर रहा है, जिनका जवाब आने वाला समय ही देगा।

सरकारी नियंत्रण वाला चीन का चौथा सबसे बड़ा बैंक

बैंक ऑफ चाइना का शेयर मार्केट कैप 158.6 बिलियन डॉलर (10.87 लाख करोड़ रुपये) के करीब है और यह हॉन्ग कॉन्ग व शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है। यह चीन का भी चौथा सबसे बड़ा बैंक है और सरकार के नियंत्रण में है। वहीं संपत्तियों के मामले में यह चीन का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। बैंक के कई बड़े कॉरपोरेट ग्राहकों का भारत में बड़ा बिजनेस है। बैंक की चीन के अलावा विश्व के 27 देशों में शाखाएं हैं। 31 मार्च 2016 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में बैंक का टोटल असेट वैल्यू 2639.77 बिलियन यूएस डॉलर (176.8 लाख करोड़ रुपये) था।

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SunnyJuly 11, 2018
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में गत वर्ष से की गई ऑनलाइन फीस के बाद अब विश्वविद्यालय के सभी कैश काउंटरों पर ईडीसी मशीनों से ही फीस का भुगतान होगा। विद्यार्थी अपने एटीएम कार्ड से सीधे विश्वविद्यालय को पैमेंट कर सकेंगे। बुधवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने विश्वविद्यालय के वित्त विभाग के कर्मचारियों को ईडीसी मशीनें वितरित की। इन मशीनों के माध्यम से छात्र अब एटीएम कार्ड से फीस का भुगतान कर सकेंगे।

ईडीसी मशीनें आईसीआईसीआई बैंक द्वारा उपलब्ध करवाई गई है। यह मशीनें विश्वविद्यालय के हर कैश काउंटर पर उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि छात्र नकद भुगतान की बजाए एटीएम कार्ड से भुगतान कर सकें। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है, इसलिए इन मशीनों का उपलब्ध करवाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कुलपति ने बताया कि इस वर्ष अधिकतर छात्रगण ई-ट्रांजेक्शन द्वारा अपनी फीस जमा करवा रहे हैं तथा कैश काउंटर पर नकद भुगतान कम जमा करवाया जा रहा है। वित्त विभाग में ईडीसी मशीनों का उपलब्ध होना इस दिशा में एक और सराहनीय कदम है। कुलपति ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा प्रदेश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। इसका सबसे बड़ा कारण इस विश्वविद्यालय में होने वाली प्रयोगधर्मिता है। प्रगतिशील सोच व निरंतर नए-नए प्रयोग करने के कारण ही आज यह विश्वविद्यालय इस मुकाम पर है। फीस ऑनलाईन होने से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सीधे फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि डिजिटलाईजेशन समय की जरूरत है। डिजिटल व पेपरलेस कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन की महत्वाकांक्षी योजना है। कुलपति ने कहा कि एक विश्वविद्यालय में प्रवेश, वित्तीय लेनदेन, परीक्षा व प्रशासनिक कार्य ये चार ऐसे कारक हैं जिनका ऑटोमेशन करने से विश्वविद्यालय में पारदर्शिता के साथ-साथ कामकाज की गति तेज हो रही है। इससे विद्यार्थियों का समय व उर्जा बचेगी। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. प्रवीण कुमार सैनी, जनसंपर्क विभाग के निदेशक प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, जनसम्पर्क विभाग के उप-निदेशक डॉ. अशोक कुमार, वित्त अधिकारी डॉ. हरजीत सिंह, रवि थापा सहित वित्त विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे।

ऑनलाइन फीस का दाखिला प्रक्रिया में विद्यार्थियों को हो रहा है फायदा
विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में चल रही काउंसिलिंग में अधिकतर विद्यार्थी विश्वविद्यालय के ऑनलाइन फीस आप्शन का लाभ उठा रहे हैं। विद्यार्थी लंबी लाइनों में फंसने की बजाए सीधे अपने एटीएम कार्ड से इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पेमेंट कर रहे हैं। इसका फायदा विश्वविद्यालय व विद्यार्थी दोनों को हो रहा है।

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SunnyJuly 11, 2018
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फैजाबाद : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के डिजिटल इण्डिया अभियान से अब डाकघर भी जुड़ेंगे, डाकघरों में कोर बैंकिंग, कोर इंश्योरेंस और दर्पण प्रोजेक्ट के बाद आईटी आधुनिकीकरण परियोजना के भाग के रूप में कोर सिस्टम इंटीग्रेटर (सीएसआई) आरम्भ किया है. सीएसआई प्रोजेक्ट लागू होने से सभी सेवाओं के लिए एक कॉमन प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा जिसके द्वारा ग्राहकों को अच्छी और त्वरित सेवाएं मिलेंगी. उद्घाटन समारोह में मौजूद मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएं, लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र ने फैजाबाद प्रधान डाकघर में “कोर सिस्टम इंटीग्रेटर” का शुभारम्भ किया . डाक निदेशक श्री यादव ने ग्राहकों को स्पीड पोस्ट बुकिंग की सीएसआई जनरेटेड रसीद भी दिया . इस मौके पर सीनियर पोस्टमास्टर सुरेंद्र, सहायक डाक अधीक्षक एके सिंह, आर. के यादव, मनोज कुमार, सिंकू रावत, सोने लाल, रोहित कुमार, शोभनाथ यादव, राजेश कुमार, मुख्य विपणन अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह, सुरेंद्र सिंह, गौरी शंकर सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे.

फैजाबाद के प्रधान डाकघर में कोर सिस्टम इंटीग्रेटर (सीएसआई) का समारोह के दौरान हुआ शुभारम्भ

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाकघरों में बुकिंग, वितरण, बचत व बीमा सम्बन्धी विभिन्न कार्यों के लिए अभी भिन्न-भिन्न सॉफ्टवेयरों का इस्तेमाल किया जाता है. इन सभी को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने से त्वरित और सुव्यवस्थित कार्य होगा तथा हम ग्राहकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होंगे.डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हर स्तर पर कोर सिस्टम इंटीग्रेटर लागू हो जाने के बाद डाक विभाग पूरी तरह से पेपरलेस (कागज रहित) कार्य करने वाला सरकारी विभाग बन जाएगा. मेल ऑपरेशन, वित्त व् लेखा, इन्वेंटरी प्रक्योरमेंट, एच.आर. और पे-रोल जैसे तमाम कार्य कोर सिस्टम इंटीग्रेशन के माध्यम से संपन्न होंगे. विभाग के सभी कागजात, कर्मचारियों की उपस्थिति, पर्सनल डाटा, सर्विस बुक, कर्मचारियों की छुट्टी आदि कार्य आनलाइन हो जाएगा. कर्मचारियों के सभी कार्यों की प्रगति विभाग के शीर्ष अफसर भी आनलाइन देख सकते हैं. कर्मचारियों को अपनी समस्याओं के निदान के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी शिकायत/निवेदन करना होगा साथ ही ग्राहक भी अपने घर बैठे अपनी सभी समस्याओं का निदान डाकघर की वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे. श्री यादव ने कहा कि इससे भविष्य में प्रशासन की गतिविधियों जैसे भर्ती, प्रशिक्षण, पदोन्नति, वेतन और प्रदर्शन प्रबंधन में सुधार होगा. कॉल सेंटर, वेब पोर्टल और मोबाइल डिवाइसेज के माध्यम से ग्राहक सेवा प्रदान करने के साथ यह डाकघर काउंटरों की कार्यात्मकताओं को भी बढ़ाएगा और डाकघरों को पेपरलेस बनाएगा. फैजाबाद मंडल के प्रवर अधीक्षक डाकघर जे.बी. दुर्गापाल ने कहा कि कोर सिस्टम इंटीग्रेटर के लिए टी. सी. एस. द्वारा सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है और इसके लिए स्टाफ को भलीभाँति ट्रेनिंग भी दी गई है, ताकि वे इसे सुचारु रूप से क्रियान्वित कर सकें .

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SunnyJuly 11, 2018
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SunnyJuly 10, 2018
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Aaj ka Rashifal Vrishchik, Today Rashifal, Horoscope in Hindi 2018 (आज का राशिफल): टैरो राशिफल: आज आपके फैसले सही साबित होंगे। सोचे हुए काम पूरे होंगे। आज भाग्य आपका साथ देगा। कारोबार में निवेश कर सकते हैं। तनाव से बचें।

शुभ रंग: आज के दिन आपके लिए शुभ रंग है नीला और आपका भाग्य 74 % होगा।

दैनिक राशिफल: मित्रों व स्वजनों से भेंट हो सकती है। किसी भी काम में आज आपको सफलता मिलेगी। आज पूरे दिन आप प्रसन्न रहेंगे। स्नेह संबंध बनेंगे। यात्रा के योग हैं। प्रतिस्पर्धियों के समक्ष विजय मिलेगी। आर्थिक लाभ एवं भाग्यवृद्धि के योग हैं। भाई-बहनों से लाभ होगा। साथियों से सुख और आनंद की प्राप्ति होगी। किसी नए कार्य का प्रारंभ कर पाएंगे। शुभ रंग: आज के दिन आपके लिए शुभ रंग है नीला और आपका भाग्य 74 % होगा। टैरो राशिफल: आज आपके फैसले सही साबित होंगे। सोचे हुए काम पूरे होंगे। आज भाग्य आपका साथ देगा। कारोबार में निवेश कर सकते हैं। तनाव से बचें। ‘ऊं विकटाय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए गणपति जी को रक्त चंदन चढ़ाएं। लव राशिफल: पति-पत्नी के बीच प्यार बना रहेगा। आज के दिन पार्टनर की कमी महसूस करेंगे। आज के दिन आपकी लव लाइफ में मुश्किलें आ सकती है। इससे मानसिक तनाव हो सकता है। आज आपका प्रेमी कुछ दिनों के लिए आपसे दूर चला जाएगा।

वित्त राशिफल: आज बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। अपने प्रोफेशनल लक्ष्य की जीत के कारण उन्हें काफी फायदा हो सकता है, और यही नहीं ये आपके बैंक बैलेंस के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। आप ध्यान रखें कि आप अपनी योजनाओं को आधे-अधूरे नहीं छोड़ रहे। सरकारी नौकरी वालों को भी लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य राशिफल: काम को बोझ अधिक होने से आज आपको मानसिक तनाव हो सकता है। इसलिए काम के बीच में आप थोड़ा आराम करें। अगर आप ज्यादा वजन से परेशान हैं तो उसे अभी कम करें, क्योंकि यही आपके लिये लाभदायी है। साथ ही आपको मांसहारी खाना छोड़ देना चाहिए। साथ ही करसत नियमित करें।

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First Published on July 10, 2018 4:36 am

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