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Banking & Finance Archives - Sunnywebmoney.com

SunnyMay 24, 2018
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मेरी इंडिया में आने की तमन्ना वर्षों से थी. शुरू से ही मेरी तमन्ना इस देश की संस्कृति के बारे में जानने की थी. यहां की संस्कृति ही ऐसी है जो इस देश को महान बनाती है. मैं यहां आकर खुश हूं. इस देश का जो महान कल्चर है. वह तकनीक के साथ जुड़कर संसार को बदलने में मदद करेगा.

यह बात माल्टा के पूर्व वित्त मंत्री जॉन डाली ने पिछले दिनों नयी दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कही. इस मौके पर क्विकेक्स प्रोटोकॉल के फाउंडर व सीओओ क्षितिज अधाल्का व अन्य लोग उपस्थित थे |

डाली ने कहा कि ब्लॉकचेन बड़े-बड़े बिजनेसमैन या सरकारी स्तर पर नियंत्रित रहता है. नयी तकनीक के आने से बदलाव आयेगा और यह बैंकिंग सिस्टम व अन्य कमियों को दूर करने में सक्षम होगा. अगर भविष्य में इस तरह की तकनीक को लेकर आते हैं तो यह तकनीक की दुनिया में एक बड़ा और बेहतर कदम होगा. एडवाईजरी बोर्ड में जुड़ने के बाद अपने विचारों को जताते हुए उन्होंने कहा कि बोर्ड में जुड़ने से मुझे खुशी हो रही है.

इस मौके का लाभ उठाते हुए इस तकनीक को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया जायेगा. यह तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति होगी |

कांफ्रेंस में अपनी विचार रखते हुए क्विकेक्स प्रोटोकॉल के फाउंडर व सीओओ क्षितिज अधाल्का ने कहा कि साल 2016 में हमने काम करना शुरू किया था. तब हमने यह पाया कि इसमें कुछ कमियां हैं. हमने उसे खोजा. इसमें ट्रांजेक्शन स्पीड कॉस्ट, स्कालाबिलिटी व क्रॉस ब्लॉकचेन देखने को मिला.

हमें लगा कि इन कमियां को दूर करके ही इसे और बेहतर किया जा सकता है. इसलिए हमने क्विकेक्स के बारे में सोचा. माल्टा के पूर्व वित्त मंत्री को देश की तकनीक को प्रमोट करने के लिए ही क्विकेक्स में लाया गया है.

उन्होंने आगे कहा कि यह ऐसा डिजाइन है, जिसकी मदद से ब्लॉकचेन में जो कमियां थी, वह दूर हो सकती हैं. क्विकेक्स की मदद से ट्रांजेक्शन स्पीड तेज हो जायेगा और जीरो फीस में प्राप्त हाे जायेगा. इसकी मदद से डिजिटल टोकन को कभी भी, कहीं भी प्रयोग किया जा सकता है.

इस ब्लॉकचेन में जॉन डाली के जुड़ने से बहुत खुशी है. ज्ञात हो कि दुबई ब्लॉकचेन सम्मिट 2018 में बेहतर प्रदर्शन के बाद भारत के ब्लॉकचेन स्टार्टअप क्विकेक्स से माल्टा के पूर्व वित्त मंत्री को जोड़ा गया है | ज्ञात हो कि क्विकेक्स की मदद से सभी ब्लॉकचेन संपत्तियों के लिए तत्काल लेनदेन संभव है |

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SunnyMay 24, 2018
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज संकल्प जताया कि डूबे कर्ज और घोटालों की मार झेल रहे घरेलू बैंकिंग क्षेत्र को जल्द ही पटरी पर ला दिया जाएगा क्यों कि इन गड़बड़ियों का असर वास्तविक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। गोयल ने सार्वजनिक बैंक के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के कारण गोयल को कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गयी है। जेटली गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद अभी स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। गोयल ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बैंकिग उद्योग सुव्यवस्थित तरीके से वृद्धि करे। " उन्होंने कहा कि " सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से उच्चतम स्तर की सुचिता एवं जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।" गोयल को जेटली का करीबी माना जाता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जेटली की सेहत में अच्छी तरह सुधार हो रहा है। कल मुझे उनसे बात करने और उनसे मार्गदर्शन लेने का अवसर मिला। उन्होंने कुछ मुद्दों के बारे में बताया और मैं उन्हीं को लेकर आगे बढ़ रहा हूं।

वित्त मंत्री ने कहा , " हमारा पहला काम बैंकिंग प्रणाली को जल्दी से जल्दी अपने पैरों पर खड़ा करना है और उस विरासत से पीछा छुड़ाना है जो हमारी सरकार को 2014 में मिली थी। " विरासत से उनका मतलब सप्रंग सरकार के दौरान अजीबोगीब तरीके से बांटे गए कर्जों से था। कई कंपनियों विशेषकर बिजली , इस्पात और दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियां ने बैंकों से कर्ज लिया और क्षेत्र से जुड़ी दिक्कतों एवं आर्थिक सुस्ती के कारण कर्ज चुकाने में नाकाम रहीं।

गोयल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कुछ घोटाले सामने आए हैं , जिसने बैंकों की छवि धूमिल हुई तथा फंसे कर्ज की समस्या और बढ़ गयी। गोयल ने कहा कि मैं अपने सभी सहयोगी बैंक अधिकारयों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लाखों कर्मचारियों और बैंकिंग क्षेत्र के सभी हितधारकों तथा आरबीआई के मार्गदर्शन में , यह सुनिश्चित करेंगे की बैंकिंग क्षेत्र सुव्यवस्थित तरीके से वृद्धि करे और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सर्वोच्च स्तर की सुचिता एवं जवाबदेही कायम हो जो उनसे अपेक्षा की जाती है। " उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठक में किन किन बिंदुओं पर चर्चा हुई।

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SunnyMay 22, 2018
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Publish Date:Tue, 22 May 2018 11:04 AM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विसेज ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की रेटिंग घटा दी है। बैंक में सामने आए 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले की वजह से पूंजी पर पड़े नकारात्मक प्रभाव का हवाला देते हुए एजेंसी ने यह कदम उठाया है। मूडीज ने बैंक की आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था को भी कमजोर बताया है। हालांकि, एजेंसी ने बैंक के रेटिंग परिदृश्य को स्थिर रखा है।

मूडीज ने पीएनबी की रेटिंग को बीएए3/पी-3 से घटाकर बीए1/एनपी कर दिया है। इसके साथ ही बैंक के बेस क्रेडिट एसेसमेंट (बीसीए) को भी बीए3 से घटाकर बी1 किया गया है। इस साल फरवरी में पीएनबी ने 11,390 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी वाले एवं अनधिकृत लेनदेन पकड़ने की बात कही थी। बाद में घोटाले की राशि बढ़कर 14,400 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने इस घोटाले को अंजाम दिया था। एजेंसी ने कहा, ‘यह रेटिंग बैंक में सामने आई धोखाधड़ी के नकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।

विशेषरूप से बैंक की पूंजीगत स्थिति पर इसका असर पड़ा है। यह रेटिंग बैंक की कमजोर आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था और प्रक्रियाओं को भी दर्शाती है।

PNB को बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घाटा

देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में फरवरी 2018 में भारतीय बैंकिंग के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया था। जब पीएनबी ने पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2018) और पिछले वित्त वर्ष के वित्तीय परिणाम जारी किए तो इसने बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घाटा होने की सूचना दी। बैंक को इस तिमाही में 13,417.91 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। रत्न व आभूषण के उद्यमी नीरव मोदी व उसके सहयोगियों ने पीएनबी को कुल 14,356 करोड़ रुपये का चूना लगाया था। कहने की जरूरत नहीं कि इस घोटाले की वजह से बैंक को इतनी बड़ा घाटा हुआ है। घोटाले की राशि का 50 फीसद यानी 7,178 करोड़ रुपये की राशि का समायोजन बैंक को अपने खाते से करना पड़ा है। रही-सही कसर बढ़ते फंसे कर्ज (एनपीए) ने पूरी कर दी है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 260 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

By Surbhi Jain

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SunnyMay 21, 2018
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Publish Date:Mon, 21 May 2018 11:29 AM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। 13 हजार करोड़ के घोटाले में सरकारी बैंक पीएनबी ने जांच की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है। एक आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में पीएनबी ने यह बात कही है। पीएनबी ने कहा है कि घोटाले की जांच कई केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं, इसीलिए इस तरह की सूचना देने से जांच प्रभावित हो सकती है। गौरतलब हो कि बैंकिंग सेक्टर के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है, जो देश के दूसरे सबसे अग्रणी बैंक के जरिए हुआ है। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने इस घोटाले को अंजाम दिया है। पढ़िए इस तरह की अन्य कोॉरपोरेट जगत से जुड़ी खबरें-

वोडाफोन की चुनौती पर अगले वर्ष फरवरी में होगी सुनवाई

वोडाफोन से 22,100 करोड़ रुपये टैक्स की सरकार की मांग के खिलाफ कंपनी की चुनौतियों पर एक अंतरराष्ट्रीय आर्बिटरेशन टिब्यूनल अगले वर्ष फरवरी में सुनवाई करेगा। घटनाक्रम से सीधे जुड़े एक सूत्र ने बताया कि वोडाफोन द्वारा इस मामले पर इस वर्ष जुलाई तक आपत्तियां दाखिल करने की उम्मीद है। उसके बार भारत द्वारा उन आपत्तियों पर इस वर्ष दिसंबर तक जवाब दाखिल किया जाएगा। हालांकि भारत ने ऐसे मामलों की सुनवाई के टिब्यूनल के कानूनी अधिकारों को भी चुनौती दी है।

बलरामपुर चीनी को 42 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा

अग्रणी चीनी कंपनी बलरामपुर चीनी मिल्स को पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-दिसंबर, 2018) में 42.69 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। उससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी को 200.39 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। चौथी तिमाही में उसका राजस्व बढ़कर 1,037.01 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 893.50 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष के लिए कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ घटकर 231.67 करोड़ रुपये रह गया।

सरकारी खर्चे पर विदेश में प्रमोशन करेंगी लैदर कंपनियां

घरेलू लैदर व फुटवियर कंपनियों को यूरोप व अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में अपने ब्रांड्स के प्रमोशन के लिए सरकार बड़ी मदद देने को तैयार है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रलय ने मदद हासिल करने को इच्छुक कंपनियों से आवेदन मंगाए हैं। अधिकारी ने कहा कि लैदर व फुटवियर सेक्टर को मदद की जरूरत है, क्योंकि इस सेक्टर में बड़ी संभावनाएं हैं। देश में फुटवियर के कई बड़े ब्रांड्स हैं। इन ब्रांड्स को विदेश में प्रमोशन संबंधी गतिविधियां चलाने के लिए सरकार वित्तीय मदद देने को तैयार है। यह मदद सरकार की एक सब-स्कीम के तहत दी जाएगी।

अधिकारी ने कहा कि योजना के मुताबिक हर ब्रांड लोगो के विदेश में पंजीकरण, अंतरराष्ट्रीय डिपार्टमेंट स्टोर्स में डिसप्ले, विश्वस्तरीय कैटलॉग छपाई और प्रचार अभियानों पर होने वाले कुल खर्च का 50 फीसद तक खर्च सरकार वहन करेगी। सरकारी मदद की अधिकतम सीमा सालाना तीन करोड़ रुपये होगी और यह मदद तीन वर्षो तक दी जाएगी। सब-स्कीम का मकसद देश की अग्रणी लैदर, फुटवियर और एसेसरीज कंपनियों व ब्रांड्स को विदेशी बाजारों में महत्वपूर्ण स्थान और पहचान दिलाने में मदद करना है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कंपनियों को कम से कम तीन वर्ष तक लाभ में होना चाहिए। ऐसी कंपनियों का निर्यात या घरेलू बिक्री कम से कम 75 करोड़ रुपये सालाना होनी चाहिए, और इन्होंने ब्रांड प्रमोशन के मोर्चे पर भी बेहतर प्रदर्शन किया हो।

अधिकारी ने कहा, ‘वर्तमान में घरेलू कंपनियों द्वारा विदेशी बाजारों में प्रमोशन के लिए उठाए जाने वाले कदम उम्मीद के अनुरूप नहीं हैं। कंपनियों के राजस्व में ब्रांड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, और वे मांग बढ़ाने में भी मददगार होते हैं।’ वहीं, इस सब-स्कीम के बारे में फरीदा ग्रुप के चेयरमैन एम. रफीक अहमद ने कहा कि सरकार को इस योजना में कुछ बदलाव कर इसे कंपनियों के लिए और ज्यादा व्यवहार्य बनाना चाहिए।

By Surbhi Jain

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SunnyMay 18, 2018
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रायपुर . प्रधानमंत्री आवास योजना में सब्सिडी का लालच दिखाकर ना सिर्फ सरकारी विभाग बल्कि निजी बिल्डरों ने एक के बाद एक लोगों से बुकिंग कराई, लेकिन जब सब्सिडी देने की बारी आई तो निजी के साथ-साथ सरकारी विभागों ने हाथ पीछे खींच लिए। रायपुर विकास प्राधिकरण, छग हाउसिंग बोर्ड और नया रायपुर विकास प्राधिकरण में सब्सिडी के सैंकड़ों मामले लंबित हैं।

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लोन की प्रक्रिया तो पूरी, लेकिन सब्सिडी के लिए पड़ रहा भटकना
कई प्रकरणों में बैंक द्वारा फायनेंस की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन सब्सिडी के लिए लोग दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। पीएम आवास योजना में सब्सिडी देने को लेकर कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है, जिसकी वजह से भी लेटलतीफी हो रही है। सरकारी विभागों ने प्रोजेक्ट में जमीन-मकान बेचने के लिए लोन की प्रक्रिया तो पूरी कर दी, लेकिन अब सब्सिडी के लिए ग्राहकों को बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

इस मामले में विभागों से सहयोग नहीं मिल रहा है। इस मामले में आरडीए, हाउसिंग बोर्ड और एनआरडीए के आला अधिकारियों का कहना है कि सब्सिडी का मामला बैंकों से जुड़ा है, वहीं यह राशि केंद्र से स्वीकृत होती है। फाइलों में दस्तावेजों की कमी की वजह भी राशि अटक सकती है।

पीएम आवास योजना के लिए यह है नियम
इडब्ल्यूएस योजना में 3 लाख तक वार्षिक आय होनी चाहिए। वहीं ६ लाख रुपए ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र होंगे। परिवार में पति-पत्नी व अविवाहित बच्चे शामिल हो। परिवार के मुखिया व उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम से भारत में पक्का मकान नहीं होना चाहिए।

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1 ब्याज, सब्सिडी प्राथमिक ऋणदाता संस्थाओं के माध्यम से लाभार्थियों के ऋणखाते में सीधे जमा कर दी जाएगी। इससे प्रभावी आवास ऋण व इएमआइ कम हो जाएगी।
2 प्राथमिक ऋण दाता संस्थाओं का चयन अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, आवास वित्त कंपनियां, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारिता बैंक, शहरी सहकारिता बैंक, लघु वित्त बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी, लघु वित्त संस्था एवं आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा चयन किए गए अन्य संस्था।

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SunnyMay 18, 2018
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नर्इ दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हरसंभव सहायता करेगी और उन्हें जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी पटरी पर लाएगी। गोयल ने बैंकिंग क्षेत्र के मौजूदा संकट के लिए पूर्व की यूपीए की सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र का वर्तमान संकट अतीत में अंधाधुंध बांटे गए कर्ज के कारण पैदा हुआ है। पीयूष गोयल को अस्थाई तौर पर वित्त व कारपोरेट मामलों के मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। अरुण जेटली के गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद स्वस्थ हो जाने तक के लिए उन्हें दोनों मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। गोयल ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुख के साथ एक समीक्षा बैठक की।

विरासत में मिला बैंकिंग सेक्टर का संकट

गोयल ने बताया कि जेटली के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के कामकाज के सिलसिले में सलाह लेने के लिए वह बुधवार को जेटली से मिले थे। गोयल ने संवाददाताओं को बताया, “उन्होंने मुझे कुछ मसलों पर सलाह दी। मैं उनके निर्देशों का अनुपालन कर रहा हूं ताकि जब तक वह अस्वस्थ हैं, उनकी अनुपस्थिति में सबकुछ सुचारु ढंग चल सके। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पूरा बैंकिंग क्षेत्र अपने बलबूते चल सके और 2014 में इस सराकर को विरासत में मिले संकट का अंत हो सके।” उन्होंने कहा, “मुझे पक्का विश्वास है कि भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग व निर्देशन में कार्यरत मेरे सभी बैंकर सहयोगी, सार्वजनिक क्षेत्र के लाखों कर्मचारी और बैंकिंग प्रणाली के हितधारकों के प्रयासों से हम क्षेत्र का सम्यक विकास सुनिश्चित कर पाएंगे और निष्ठा व उत्तरदायित्व के उच्च मानदंड कायम करेंगे जिसकी इन बैंकों से अपेक्षा है।”

आरबीआर्इ का काम सराहनीय

गोयल ने कहा, “हम इस बात की सराहना करते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग प्रणाली का उचित ढंग से निरीक्षण सुनिश्चित कर रहा है और चूककर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जिसपर मुझे लगता है कि पूर्व की सरकार के दौरान गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।” गोयल के साथ इस बैठक में 11 बैंकों के प्रमुख मौजूद थे, जिनमें से कुछ ने संकट से बैंकों को निकालने के सुझाव भी दिए।

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SunnyMay 17, 2018
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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हरसंभव सहायता करेगी और उन्हें जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी पटरी पर लाएगी। गोयल ने बैंकिंग क्षेत्र के मौजूदा संकट के लिए पूर्व की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार को दोषी ठहराया।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र का वर्तमान संकट अतीत में अंधाधुंध बांटे गए ऋण के कारण पैदा हुआ है

पीयूष गोयल को अस्थाई तौर पर वित्त व कारपोरेट मामलों के मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। अरुण जेटली के गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद स्वस्थ हो जाने तक के लिए उन्हें दोनों मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है।Piyush Goyal Finance minister

गोयल ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुख के साथ एक समीक्षा बैठक की।

गोयल ने बताया कि जेटली के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के कामकाज के सिलसिले में सलाह लेने के लिए वह बुधवार को जेटली से मिले थे।Piyush Goyal Finance minister

गोयल ने संवाददाताओं को बताया, “उन्होंने मुझे कुछ मसलों पर सलाह दी। मैं उनके निर्देशों का अनुपालन कर रहा हूं ताकि जब तक वह अस्वस्थ हैं, उनकी उपस्थिति में सबकुछ सुचारु ढंग चल सके। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पूरा बैंकिंग क्षेत्र अपने बलबूते चल सके और 2014 में इस सराकर को विरासत में मिले संकट का अंत हो सके।”

उन्होंने कहा, “मुझे पक्का विश्वास है कि भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग व निर्देशन में कार्यरत मेरे सभी बैंकर सहयोगी, सार्वजनिक क्षेत्र के लाखों कर्मचारी और बैंकिंग प्रणाली के हितधारकों के प्रयासों से हम क्षेत्र का सम्यक विकास सुनिश्चित कर पाएंगे और निष्ठा व उत्तरदायित्व के उच्च मानदंड कायम करेंगे जिसकी इन बैंकों से अपेक्षा है।”

piyush goyal, Railway Minister

गोयल ने कहा, “हम इस बात की सराहना करते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग प्रणाली का उचित ढंग से निरीक्षण सुनिश्चित कर रहा है और चूककर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जिसपर मुझे लगता है कि पूर्व की सरकार के दौरान गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।”

गोयल के साथ इस बैठक में 11 बैंकों के प्रमुख मौजूद थे, जिनमें से कुछ ने संकट से बैंकों को निकालने के सुझाव भी दिए।

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SunnyMay 17, 2018
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नई दिल्ली
वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक की तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई व्यवस्था (पीसीए) के अंतर्गत रखे गए 11 सार्वजनिक बैंकों की मजबूती के लिए सभी संभव सहायता देने का भरोसा दिया है। केंद्रीय बैंक ने बिगड़ती वित्तीय सेहत की जांच के लिए इन्हें निगरानी सूची में रखा है। पीसीए व्यवस्था के अंतर्गत, बैंकों को लाभांश के वितरण और लाभ को बैंक से बाहर भेजने पर रोक का सामना करना पड़ता है।

इसके अतिरिक्त ऋणदाताओं को शाखाओं का विस्तार करने से रोक दिया जाता है और डूबे कर्ज व खर्च के लिए उच्च प्रावधानों को बनाए रखने की आवश्यकता होती। गोयल ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद यह बात कही। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के कारण गोयल को कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गई है। जेटली गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद अभी स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: बैंकों ने सरकार से मिली आधी पूंजी डुबा दी


गोयल ने संवाददाताओं से कहा, ‘आने वाले कुछ दिनों में हम यह सुनिश्चित करेंगे कि केंद्र सरकार बैंकों को मजबूत बनाने के लिए हरसंभव सहयोग दे ताकि बैंकों को जल्दी से जल्दी पीसीए व्यवस्था से बाहर लाया जा सके।’ उन्होंने कहा कि बैठक यह समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि पिछले 12-13 वर्षों में बैंकिंग प्रणाली में क्या हुआ है। जिन 11 बैंकों को पीसीए व्यवस्था के अंतर्गत रखा गया है, उनमें देना बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।

इससे पहले गोयल ने कहा, ‘हमारी पहली प्राथमिकता डूबे कर्ज और घोटालों की मार झेल रहे घरेलू बैंकिंग क्षेत्र को जल्द ही पटरी पर लाने की होगी क्योंकि इन गड़बड़ियों का असर वास्तविक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बैंकिग उद्योग सुव्यवस्थित तरीके से वृद्धि करे।’ उन्होंने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से उच्चतम स्तर की सुचिता और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।’

यह भी पढ़ें: राहत: बैंक में आधार से सरकार ने इन्हें दी छूट


गोयल को जेटली का करीबी माना जाता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘जेटली की सेहत में अच्छी तरह सुधार हो रहा है। कल उनसे बात करने और उनसे मार्गदर्शन लेने का अवसर मिला। उन्होंने कुछ मुद्दों के बारे में बताया और मैं उन्हीं को लेकर आगे बढ़ रहा हूं।’ वित्त मंत्री ने कहा, ‘हमारा पहला काम बैंकिंग प्रणाली को जल्दी से जल्दी अपने पैरों पर खड़ा करना है और उस विरासत से पीछा छुड़ाना है जो हमारी सरकार को 2014 में मिली थी।’

विरासत से उनका मतलब यूपीए सरकार के दौरान अजीबोगीब तरीके से बांटे गए कर्जों से था। कई कंपनियों विशेषकर बिजली, इस्पात और दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियां ने बैंकों से कर्ज लिया और क्षेत्र से जुड़ी दिक्कतों और आर्थिक सुस्ती के कारण कर्ज चुकाने में नाकाम रहीं। गोयल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कुछ घोटाले सामने आए हैं , जिसने बैंकों की छवि धूमिल हुई और फंसे कर्ज की समस्या और बढ़ गई।

PIYUSH-GOYAL

दूसरे बैंक का ATM इस्तेमाल करने पर लग सकता है ज्यादा चार्ज
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SunnyMay 17, 2018
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Publish Date:Wed, 16 May 2018 11:51 AM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। उम्मीद के मुताबिक इलाहाबाद बैंक के निदेशक बोर्ड ने मंगलवार को अपनी मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ उषा अनंत सुब्रमणियन से उनके सारे प्रशासनिक अधिकार छीन लिये हैं। पीएनबी घोटाले में सीबीआइ की तरफ से चार्जशीट दायर किए जाने के बाद सरकार ने इलाहाबाद बैंक को बोर्ड की आपातकालीन बैठक बुलाने का आदेश दिया था। चार्जशीट में अनंत सुब्रमणियन पर आरोप हैं कि जब वह पीएनबी की एमडी थीं, तब वह इस घोटाले को पकड़ने और रोकने में असफल रही थीं।

इलाहाबाद बैंक के बोर्ड ने सरकार से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द नए एमडी व सीईओ की नियुक्ति करे। वित्त मंत्रलय के सूत्रों का कहना है कि इलाहाबाद बैंक समेत कुछ अन्य बैंकों के शीर्ष पदों पर नई नियुक्तियों के बारे में सुझाव बैंकिंग बोर्ड ब्यूरो को भेज दिए गए हैं। यह भी आग्रह किया गया है कि फैसला किया जाए।

उषा अनंत सुब्रमणियन के खिलाफ इस तरह का सख्त कदम उनके शानदार कैरियर का बेहद निराशाजनक अंत है। वर्ष 2013 में जब यूपीए सरकार ने देश में महिलाओं के लिए विशेष भारतीय महिला बैंक बनाने का फैसला किया था, तब उन्हें उस बैंक का शीर्ष पद दिया गया था। बाद में वर्ष 2015 में उन्हें पीएनबी के शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया। अब यह सच्चाई सामने आ रही है कि उन्होंने वर्ष 2015 से मई, 2017 के बीच पीएनबी के शीर्ष पद पर रहते हुए नीरव मोदी और उसके साथियों के घोटाले को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

आइडीबीआइ बैंक के दो स्वतंत्र निदेशकों की इस्तीफा

सरकारी क्षेत्र के आइडीबीआइ बैंक के दो स्वतंत्र निदेशकों निनाद करपे और एस. रवि ने इसके बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। सीबीआइ द्वारा 600 करोड़ रुपये कर्ज के मामले में एफआइआर दर्ज किए जाने के कुछ दिनों बाद निदेशकों ने यह कदम उठाया है। बैंक द्वारा यह कर्ज एयरसेल के पूर्व प्रमोटर सी. शिवशंकरन, उनके पुत्र और उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों को दिए गए थे। करपे 11 मई और रवि 12 मई से बैंक के स्वतंत्र निदेशक नहीं रहे। सीबीआइ ने एफआइआर में स्वतंत्र निदेशकों समेत कुछ अधिकारियों को भी नामजद किया है।

By Surbhi Jain

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SunnyMay 16, 2018
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Publish Date:Wed, 16 May 2018 08:13 AM (IST)

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में फरवरी 2018 में भारतीय बैंकिंग के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया था। मंगलवार को जब पीएनबी ने पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2018) और पिछले वित्त वर्ष के वित्तीय परिणाम जारी किए तो इसने बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घाटा होने की सूचना दी। बैंक को इस तिमाही में 13,417.91 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। रत्न व आभूषण के उद्यमी नीरव मोदी व उसके सहयोगियों ने पीएनबी को कुल 14,356 करोड़ रुपये का चूना लगाया था। कहने की जरूरत नहीं कि इस घोटाले की वजह से बैंक को इतनी बड़ा घाटा हुआ है। घोटाले की राशि का 50 फीसद यानी 7,178 करोड़ रुपये की राशि का समायोजन बैंक को अपने खाते से करना पड़ा है। रही-सही कसर बढ़ते फंसे कर्ज (एनपीए) ने पूरी कर दी है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 260 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

पूरे वित्त वर्ष के परिणाम पर नजर डालें तो बैंक को 12,283 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। बैंक के पूरे वित्तीय परिणाम पर नजर डालें तो शायद ही कोई सकारात्मक संकेत मिले। एक तरफ से फंसे कर्जो की स्थिति और बिगड़ी है। सकल एनपीए का अनुपात बढ़कर 18.38 फीसद तो शुद्ध एनपीए 11.24 फीसद हो गया। सिर्फ एक तिमाही में शुद्ध एनपीए 7.55 फीसद से बढ़कर 11.24 फीसद हो गया है। बैंक ने उस तिमाही में एनपीए के लिए 2,996 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था जबकि जनवरी-मार्च, 2018 की तिमाही में 16,203 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा है। संकेत इस बात के हैं कि चालू तिमाही भी कोई अच्छी नहीं रहेगी और बैंक को इसी तरह का भारी घाटा होगा।

बैंक का शेयर लुढ़का

मंगलवार को बैंक के शेयरों की कीमत में 5.8 फीसद तक की गिरावट हुई। सनद रहे कि पीएनबी के दिन पिछले काफी दिनों से खराब चल रहे हैं। नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की जोड़ी ने बैंक के नाम पर काफी बट्टा लगाया। सीबीआइ की जांच में बैंक के आला अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ चुकी है।

ग्राहकों को सस्ता कर्ज देना कठिन होगा

इस घाटे के बाद बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (जोखिम से बचने के लिए रखी गई राशि का अनुपात) 9.2 फीसद रह गया है, जबकि नियमों के मुताबिक 11.5 फीसद रहना चाहिए। सीधा सा मतलब यह है कि सरकार को अपनी तरफ से पीएनबी को ज्यादा मदद देनी पड़ सकती है। घाटा होने की वजह से बैंक के लिए परिचालन की लागत बढ़ जाएगी, जिससे ग्राहकों को सस्ती दर पर कर्ज देना आसान नहीं रहेगा। 

By Shubham Shankdhar

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