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Bring to the table win-win survival strategies to ensure proactive domination. At the end of the day, going forward, a new normal that has evolved from generation.
SunnyJuly 16, 2018
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बगदाद, 16 जुलाई (आईएएनएस)| रोजगार और बुनियादी सेवाओं की कमी के विरोध में सैकड़ों इराकी प्रदर्शनकारियों ने रविवार को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, धी कार प्रांत में प्रांतीय परिषद की इमारत के आसपास दर्जनों प्रदर्शनकारी जुट गए और अन्य ने इराकी राजधानी बगदाद से 375 किलोमीटर दूर दक्षिण में नसीरीया शहर में अल-हिकमा, बद्र और फधिएला राजनीतिक दलों के कार्यालयों पर हमला कर दिया।

एक सूत्र ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की और इसमें कुछ लोगों के घायल होने की भी खबरें हैं।

प्रदर्शनकारियों ने व्यापक भ्रष्टाचार के पीछे प्रभावशाली दलों का हाथ होने का आरोप लगाया, जिसके चलते देश में बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सेवाओं के पुनर्वास व बेरोजगारी में वृद्धि हुई है।

मुथन्ना प्रांत में प्रदर्शन जारी रहा। दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने ने मुथन्ना की प्रांतीय परिषद की इमारत में घुसने की कोशिश की। घटनास्थल पर भारी गोलीबारी की आवाज सुनाई दी।

बाद में इराक के सरकारी चैनल ने घटना की पुष्टि की और कहा कि प्रांतीय परिषद की इमारत में प्रदर्शनकारियों को घुसने से रोकने की कोशिश के दौरान 14 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए और 27 प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाकर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया।

बगदाद से160 किलोमीटर दूर दक्षिण में बसे पवित्र शिया शहर नजफ में भी विरोध प्रदर्शन हुआ। सैकड़ों लोगों ने प्रांतीय सरकार की इमारत के पास रैली की। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया।

मयसान, वासित और बसरा प्रांतों के कई शहरों में भी प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन रोकने के लिए इराकी प्रधान मंत्री हैदर अल-अबादी द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद आठवें दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

इन कदमों में सरकारी संस्थानों में हजारों नौकरियां प्रदान करने के अलावा बिजली और जल सुविधाओं जैसे सार्वजनिक सेवाओं के लिए कई प्रमुख परियोजनाएं के संचालन के लिए तीन अरब डॉलर आवंटित करना शामिल रहा।

इस बीच इराकी बलों के कमांडर-इन-चीफ के रूप में अबादी ने विरोध प्रदर्शन के जवाब में मध्य और दक्षिणी प्रांतों में सुरक्षाबलों के लिए उच्च अलर्ट जारी करने का आदेश जारी दिया है।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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SunnyJuly 16, 2018
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मुंबई: 

देश के शेयर बाजार सप्ताह के पहले कारोबारी दिन पिछले सप्ताह की तेजी बरकरार नहीं रख पाए. सुबह बाजार लाल निशान के साथ खुले थे और शाम को गिरावट के साथ बंद हुए. सेंसेक्स 217 अंक नीचे 36323 पर और निफ्टी 82 अंक नीचे 10936 पर बंद हुआ. 

बता दें कि विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से शुरुआती कारोबार में शेयर बाजारों का रुख धीमा रहा था. बंबई शेयर बाजार का 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 76.69 अंक यानी 0.20% गिरकर 36,466.94 अंक पर रहा. जबकि एकदम शुरुआत में यह 36,558.71 अंक तक पहुंच गया था.

इसी प्रकार 50 कंपनियों के शेयरों पर आधारित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 38.95 अंक यानी 0.35% घटकर 10,978.40 अंक पर रहा था. जबकि एकदम शुरुआत में यह भी 11,019.50 अंक तक पहुंच गया था. 

ब्रोकरों के अनुसार एशियाई बाजारों के रुख से घरेलू बाजार की धारणा कमजोर हुई. वहीं देश का व्यापार घाटा तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच जाने के चलते भी निवेशकों का रुझान कम रहा था. इसके अलावा शुक्रवार को विदेशी निवेशकों के 1,104.65 करोड़ रुपये की निकासी से भी शेयर बाजार पर असर पड़ा. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 872 करोड़ रुपये शेयर बाजार में निवेश किए थे. 

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SunnyJuly 16, 2018
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[ शिल्पी सिन्हा | मुंबई ]

IDBI बैंक में 12000 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम निवेश करने की समय सीमा को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) के बोर्ड की मीटिंग होगी। LIC का बोर्ड इंश्योरेंस रेगुलेटर के निर्देश के मुताबिक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 15% पर कैसे लाएगा, इसका भी रोडमैप तैयार करेगा। LIC के बोर्ड ने बैंक में निवेश करने का प्रस्ताव दिया था जिसे IRDAI ने कुछ नियमों और शर्तों के साथ मंजूरी दी है। मामले के जानकार सूत्रों ने बताया कि बोर्ड अब उन नियमों पर गौर करेगा।

सूत्र ने बताया, ‘IDBI बैंक के मैटर पर चर्चा करने के लिए बोर्ड की मीटिंग बुलाई गई है। LIC के बोर्ड ने बैंक में निवेश का प्रस्ताव दिया था जिसे IRDAI ने मंजूरी दे दी है और अब उन्हें टाइमलाइन और एग्जिट जैसे निवेश से मसलों पर डिस्कशन करना होगा।’ LIC को अब सेबी, RBI और IRDAI के कंप्लायंस रोडमैप से जुड़े मसलों को देखना होगा। IRDAI ने इनवेस्टमेंट से पहले ड्यू डिलिजेंट करने और ड्यू डिलिजेंस प्वाइंट्स को कवर करने के लिए LIC से 10-15 प्वाइंट्स देने के लिए कहे हैं।

IDBI में 51% स्टेक एलआईसी के पॉलिसीहोल्डर एकाउंट्स से खरीदे जा सकते हैं। पॉलिसीहोल्डर्स एकाउंट से इनवेस्टमेंट करने पर एलआईसी को देखना होगा कि उसे संबंधित नियमों के पालन में कितना समय लगेगा, वह रिटर्न जेनरेशन के जरिए कैसे पॉलिसीहोल्डर्स को बचाए रख सकेगा और वे फ्यूचर में बैंक को कैसे बेच सकेंगे। बोर्ड की मंजूरी के बाद मामला कैबिनेट और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के पास जाएगा। इसके बाद शेयर खरीद प्रस्ताव को बैंकिंग रेगुलेटर और कैपिटल मार्केट रेगुलेटर की मंजूरी लेनी होगी।

29 जून 2018 को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट ऑफ इंडिया ने IDBI बैंक में 51% से ज्यादा निवेश करने के एलआईसी के प्रपोजल को मंजूरी दी थी। प्रपोजल को अप्रूवल इस शर्त पर दिया गया है कि LIC आनेवाले समय में अपना स्टेक घटाएगा और उसे रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट के हिसाब से 15% पर लाएगा। नए इक्विटी शेयरों की खरीदारी सेबी के रूल्स के मुताबिक प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए किस्तों में की जाएगी।

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SunnyJuly 16, 2018
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13min10

When starting a company, every entrepreneur should develop at least a simple version of a business plan. It often makes sense to start rather basic and then elaborate as you prepare to approach bankers or investors.

Remember that business idea you had that ended up in oblivion? Or that other idea that after a few months or years you found out someone else had the organization, resources and commitment to make it through to the market? Well, both those ideas might have had a chance with a proper business plan.

A business plan does not have to be over-detailed, or fairly simplistic. Advisers, venture capitalists, entrepreneurs and private investors alike agree that it must be a reasonable roadmap to achieve product or service launch and to keep the company going in the first stages of its development. You don’t have to add a lot of numbers or cashflows statements to that paper, but rather you would need to have a simple orientation plan to where you want to go and how it is going to be achieved, considering the potential market and the competition.

It is not rare that the exercise of putting some milestones and points organized in a piece of paper will give entrepreneurs a clearer idea and new insights into their own roadmap to market.

There are nine basic questions that one has to answer and should include in the most basic to the most sophisticated business plans. They are:

1. Mission: 

What makes your company and product or service different from all the rest of the market? Who will benefit from your offer? What are the problem you are solving for your clients? What are the leveraging and tradeoffs you want to give your clients, under which circumstances and implications? What are you set to change with your invention and work?

2. Capital Needs: 

How much capital you need to start your company? Remember, the first months are the most difficult for a newborn company. Always include more in your forecast of needed capital than your real number. That may create a hedge for your cashflow issues in the first months if the company takes more time than expected to reach break-even.

It is not a common practice, but business owners and entrepreneurs should have a reserve of the first 6 to 12 months in their account, so they can cope with adversity. Cashflow problems are what most kill businesses, especially in the B2B segment, where most of the time you get to sell with credit to clients that represent a good percentage of your revenue. If any of those clients will delay payment or default, it is better to be prepared.

The Return On Investment is the indicator pointing out the amount of time needed to cover the initially invested funds. After the break-even point happens, the company will begin to create value every month.

3. Products and Services Portfolio: 

This is an interesting exercise. In order to define your products and services portfolio, you need to understand the needs and wants of your potential clients. Once you have identified them, think about the motivation your client would have to buy and use your offered product.

A company’s value proposition is what distinguishes it from its competitors. The value proposition provides value through various elements such as performance, customization, design, status, cost reduction, risk reduction, convenience, usability and so on.

The basic question here is: what is the problem my company solves and what is the opportunity it opens to my client / user?

Once you answer that question, you are ready to outline your list of products and services. Focus on a small list of offers where your team, know how and timing will make the difference rather than an extensive list of options.

4. Target Market: 

Who are the people or businesses that will buy your product or service? Where do they live? How many companies and people with the profile you need are there in the market to buy your offer? Are you limiting your reach geographically, demographically or in any way?

The deeper you know about the market you want to disrupt, the better. Spend as much time as needed doing your research, ask experts, read financial and industry papers and news, so you can have the best possible base to decide.

5. Revenues, expenses, losses, profits: 

A basic forecast of your cashflow can be a powerful tool. Not only to be adjusted should your performance not be so good as projected, but also for providing a roadmap to your shareholders, co-founders and employees. It must show your business will be economically viable.

All expenses out (rent, electricity, payroll, taxes, supplies, etc.) how much will remain in the end of the month? What is your net profit margin?

This is probably the most important item, as you should always strive to be in control of those numbers and increase your profit margin without compromising the quality of your offer, the harmony of your founding team and the motivational aspects of your product development and employees’ work.

6. Your Team: 

Not only the profile, function and key positions of your employees should appear here, but also the activities, functions and attributions of each co-founder and director. This is so simple but the more detail you have in those descriptions, the clearer it is for everybody where one should jump in a situation and where another one should step back and focus in their own activity or sector. It avoids misunderstandings and needless discussions.

Other two important questions are:

  1. Do I need someone with experience in this market to lead my company – and can I afford this person’s compensation or is it better to hire a few industrious and committed people instead of a rising market star?
  2. How many employees does my company need to carry its mission, achieve its numbers and deliver its promises?

7. Competitors: 

Where are your main competitors? Who are they? How much they charge for a similar product or service? What is their differentiation strategy?

Here a valuable lesson is: when in a commoditized market, exceed in customer service; when in a niche market, exceed in product development to keep ahead in that niche. This way, in most cases, you can avoid degrading price wars and preserve your company from dumping tactics from the competitors.

8. Pricing: 

One of the most important items. If you fail to price correctly your product, you are almost killing all your efforts. Have your operational costs, profit margin and needed ROI in consideration when pricing your offers, but also include a factor directly proportional to the benefit that your product brings to the client. If your product helps people save electricity for example, it is easier to charge on the savings produced, then invoicing your clients with a fix number.

9. Marketing and Sales Channels: 

One or two sheets of your Business Plan should encompass your marketing plan in your sales channels strategy. How are you going to spread your message and make your company known? Are you going to bet on online publicity, printed advertisement or word-of-mouth?

The sales channels strategy is somehow neglected in 90% of the Business Plans that I have come across. Most of business owners do not realize the importance of choosing the right sales channels for their offers. The difference of choosing among distributors, representatives and resellers can affect your numbers and operation to an extent that you might only find out when the business is already in trouble. Usually a mix of sales channels is the best solution and dependent on the nature of your projections and specific market.

Conclusion: 

Being able to enumerate, describe and answer those main points can serve your company as a compass for the days ahead, bringing your team together in moments of crisis and giving opportunity for items review every now and then.

If you are thinking about presenting your business idea to investors or going to venture capitalists and obtain funds for your operation in an investment round, you need to have some track record and show them very precisely your market data, growth over the last months or years and what is your competitive advantage as a company.

A very good help and basis for any business plan is to use the Business Model Canvas methodology, where you can derive some of those items from, and it is a visual method for brainstorming with your fellow co-founders and team.

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SunnyJuly 16, 2018
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3min10

This story is associated with Parshuram who belongs to the Treta Yug. This story reveals how King Kartavirya Sahasrarjuna and his army forcibly tried to take away Parshuram’s father’s cow named Kamdhenu.

Parshuram’s father Jamadagni was a Rishi who needed a cow to run his family. So the king gave him a cow, which became the main source of livelihood for the family. The cow gave milk, which was a source of food as well as dung which was necessary for fuel.

But then one day the king comes and says I want the cow back because the cow seems to be giving a lot of milk and has a lot of powers. And the Rishi says, if you take the cow back you are effectively taking away my patronage and my source of income. How will I survive? How will my family survive? How will I do my job as a Rishi?

But the king does not care; he drags the cow away and that is when Parshuram gets angry and he stops the king which results in war. Rishis are supposed to be non-violent. But at this time Parshuram gets very angry. He picks up an axe and attacks the king, hacks off the king’s hand. It is a very violent battle. It leads to a great confrontation between Kshatriyas and the Rishis.

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And that’s the story of Parshuram. The great conflict between the scholars of the period, saying a king’s job is to distribute wealth and not to snatch wealth from other people. And that is the story that you see, the cow being taken away from Jamadagni is essentially a king snatching wealth back. Wealth which is supposed to be distributed. So it’s a violent story but it makes you realise that wealth is closely associated with violence.

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SunnyJuly 16, 2018
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1min10

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Updated Mon, 16 Jul 2018 11:11 AM IST

सैम पित्रोदा (प्रौद्योगिकीविद्)

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अहमदाबाद के कर्णावती विश्वविद्यालय में भगवान और मंदिरों पर हो रही एक चर्चा के दौरान प्रख्यात प्रौद्योगिकीविद् सैम पित्रोदा ने कहा कि धर्म और मंदिरों से नौकरियां पैदा होने वाली नहीं हैं, केवल विज्ञान ही भविष्य का निर्माण करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब रोजगार के बारे में बात की जाती है, तो इसे एक राजनीतिक स्वरूप दे दिया जाता है और इसमें सच्चाई कम, शब्दाडंबर ज्यादा होता है।

पित्रोदा ने कहा कि जब मैं इस देश में मंदिर, धर्म, भगवान, जाति के बारे में चर्चाओं को सुनता हूं, तो मैं भारत के बारे में चिंता करता हूं। भविष्य में मंदिर रोजगार उत्पन्न नहीं करेंगे। केवल विज्ञान ही भविष्य को बना सकता है।

उन्होंने कहा 'हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र में विज्ञान पर बहुत कम ही चर्चा होती है। जब भी कोई रोजगार की बात करता है तो उसमें हमेशा एक राजनीतिक रंग होता है, जिसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं होता।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को लोगों द्वारा, मुख्य रूप से राजनेताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है। वो बेकार की बातें करते हैं जो उन्हें गलत रास्ते में ले जाता है। 'रोजगार और उद्यमिता' पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की नौकरियों को देखने के लिए भारत के पास 'सही मानसिकता' की कमी है क्योंकि नौकरियों की अवधारणा जिसे हम समझते हैं वह लंबे समय से मरा पड़ा है।

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SunnyJuly 16, 2018
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If you’re thinking cryptocurrencies have been an embarrassing speculative fad full of shady offshore players you’d be largely right – but we are also now arguably at the end of the beginning and moving into a far more interesting era. If you’re also old enough to remember the early stages of the dot com frenzy in the mid 90’s you’ll remember a similar scenario: Outrageously ambitious business plans based on unproven new technology and markets, endless hand waving self promoters and scammers confusing perceptions of reality, cliques of technology experts, VC’s and suits pumping up their market segment positions.

The naked greed and quick buck speculative atmosphere around cryptocurrencies resembles the rapid rise of the web 1.0 dot com era – from ugly, confused and often corrupt beginnings rose the industry that today dominates the world and the financial markets. Just look at mid 1990’s print magazine articles and TV shows – before everyone was on the internet – for evidence.

I recently met with the organizers of next week’s Distributed2018 conference in San Francisco to get their perceptions of where we are after the recent speculative bubble deflations around bitcoin and other cryptocurrencies. In my opinion speculative frenzy has overshadowed far more fundamental shifts in the maturation of a space which in certain important areas is rapidly gaining sophistication, scale and security. The irony of our meeting up to discuss this in downtown San Francisco’s post Amazon retail apocalypse of empty store fronts, victims of the crushing success of the dominant online sales platforms, wasn’t lost on any of us.

Distributed2018 is an interesting event, and a laudable effort to help east to collaborate and share thoughts with west in San Francisco CA, with significant participation from Chinese, South Korean and Japanese conference organizers and attendees. The organizers are striving to create a credible discussion forum nucleus for the serious side of cryptocurrencies, blockchain and smart contract business logic in a world awash with hype, hustle and zero calorie content events.

The organizers feel we have definitely been through a reality check phase around cryptocurrencies, with a lot more hard questions being asked around investment in previous generation of Initial Coin Offerings (ICO’s) and more importantly upcoming launches. Just like in the early dot com days the rear view mirror makes for some pretty bizarre viewing of the routes taken to get to where we are today (misinformation, speculation, hyperbole and mis-steps) but the route forward looks very interesting indeed as the space matures and regulation around the world begins to start to catch up. More importantly, serious financial market interest is building around ‘old money’ onshore regulated investment in credible ventures.

Crowdsourcing – Kickstarter projects etc – were originally a Web 2.0 phenomenon to help quickly fund ventures via lots of small contributions from interested parties worldwide, instead of the slower route of pitching angel investors and venture capitalists. ICO’s crowdsourcing origins subsequently grew to be a mutant monster of this approach, and just like the dot com boom has been driven more by greed than logic with a few exceptions. In my opinion reframing ICO thinking as early stage investment in promising ventures is a healthier way of looking at this going forward, and given the way venture capitalists have been buying the ICO coins of credible start ups to hold stakes in them, this appears to be the way of the future. Many venture capitalists are also now writing restrictions on ICO’s into their terms and agreements in order to protect their early stage investments from dilution.

The hard facts are that despite all the endless hype about innovation and start up culture, venture capital, angel investment and corporate budgeting is inadequate in a world that is moving ever more quickly. Investing in ICO coins or tokens as ownership of ‘early stage shares’ in a business entity you believe in is a healthy VC like approach – and just like VC’s If you don’t understand the business model, stay away. The Distributed2018 organizers agree – the pace of innovation and change worldwide needs a new, more agile digital framework to support the speed at which business opportunities evolve and mutate, and the pace is only likely to get faster.

Taking a long view on the maturity of crypto currencies, the world wide web from its infancy is barely 25 years old, the iPhone ignited and quickly matured the smartphone and apps revolution eleven years ago and Facebook – who this summer are rumored to be contemplating a cryptocurrency payments system for use on their platform via a company wide blockchain platform – only reached meaningful scale (launching ‘like’ buttons etc) around ten years ago.

Bitcoin is nine years old, Ethereum launched via crowd sale in 2014, barely four years ago. The short video above amply illustrates the febrile atmosphere around the hundreds of ICO’s that launched in 2017 – the cause now of this years’ dot com like reality check.

We’ve just come through an initial period of ICO pyramid and pump and dump schemes that have been all to similar to early stage dot com scams. Decentralized applications (‘Dapps’) have had high market caps but low user numbers, with indexes generating significant revenue from speculators. The big shift has to come though, not least to break the current business monopoly of centralized platforms – Facebook, Google, Amazon – with many anticipating tokenized mobile device Dapps will soon be the next big business wave that disrupts the current platforms deadlock.

Now things start to get interesting – remember the old dot com joke about crazy, loss making startup business plans to sell dog food online? Last year – an age ago in the digital economy – Petsmart bought online dog food vendor Chewy for 3.35bn USD. Similarly, ignore the business maturation and evolution of cryptocurrencies at your peril.

Close to seventy percent of the world’s population own smart phones, but currently only one percent of these smart device owners use cryptocurrencies. Facebook and others are sure to legitimize transactional use of their own currencies to defend their moats, but in my opinion the huge opportunity to decentralize business transactions and incentivize consumers to lock into preferential cryptocurrencies is now looming large on the horizon, and a great commercial engine for the ‘splinter net‘ (both positive opportunities for small players and another platform threat from the giant global corporations). Add in the global implications of the parallel digital explosion in Asia to be explored at Distributed2018 this week, and we have a very interesting new wave of change and innovation looming…

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SunnyJuly 16, 2018
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प्रशांत महेश, मुंबई
सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए म्यूचुअल फंड्स में आने वाली रकम जून 2018 में मई के मुकाबले 250 करोड़ रुपये बढ़कर 7553 करोड़ रुपये के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई। पिछले दो वर्षों से एसआईपी के जरिए कलेक्शंस में लगातार इजाफा हो रहा है। इस दौरान एक बार व्यवधान आया था, जब आंकड़ा मार्च 2018 के 7119 करोड़ रुपये से घटकर अप्रैल 2018 में 6690 करोड़ रुपये पर आ गया था।

रियल एस्टेट से अच्छा रिटर्न मिलने की गुंजाइश कम रहने, गोल्ड के पिछले पांच वर्षों में सालाना एक पर्सेंट की दर से रिटर्न देने और बैंकों के डिपॉजिट रेट्स में कुछ खास इजाफा नहीं करने की वजह से रिटेल इनवेस्टर्स के पास अपने पैसे के निवेश के विकल्प सीमित हो गए हैं।

यह भी पढ़ें: SIP से घर बैठे ऐसे कर सकते हैं निवेश


फंड्स इंडिया डॉट कॉम की रिसर्च हेड विद्या बाला ने कहा, ‘इंटरेस्ट रेट चढ़ने के बावजूद बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट रेट्स में ज्यादा इजाफा नहीं किया है। ऐसे में निवेशकों ने एसआईपी के जरिए इक्विटीज में निवेश जारी रखा है।’

कई निवेशक मार्केट की वोलैटिलिटी के बीच एसआईपी के जरिए इक्विटीज में अलोकेशन बढ़ा भी रहे हैं। ये एसआईपी आमतौर पर इक्विटी ओरिएंटेड स्कीमों और हाइब्रिड फंड्स के जरिए किए जाते हैं। मंथली एसआईपी कलेक्शन का लेवल मार्च 2014 के 1206 करोड़ रुपये से मार्च 2016 तक 2719 करोड़ रुपये हो गया था। जून 2018 में यह 7553 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। फाइनैंशल इयर 2017-18 में ओवरऑल एसआईपी कलेक्शन 67190 करोड़ रुपये का रहा, जो उससे पिछले साल में 43921 करोड़ रुपये पर था। इस तरह इसमें 53 पर्सेंट की बढ़ोतरी देखी गई।

यह भी पढ़ें: म्यूचुअल फंड यूनिट्स पर आसानी से ले सकते हैं कर्ज


कोटक म्यूचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने कहा, ‘मार्केट की चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बावजूद एसआईपी के जरिए आने वाली रकम की रफ्तार बनी हुई है। इसका श्रेय डिस्ट्रीब्यूटर्स को जाता है, जिन्होंने निवेशकों को शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी को नजरंदाज कर लॉन्ग टर्म के लिए अपना निवेश बनाए रखने की बात समझाई है।’ कई फाइनैंशल प्लानर निवेशकों से कह रहे हैं कि वे अपने एसआईपी लॉन्ग टर्म गोल से जोड़ लें, जिससे उन्हें लंबे समय तक निवेश बनाए रखने में मदद मिलेगी। ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियां और डिस्ट्रीब्यूटर पिछले तीन वर्षों से म्यूचुअल फंड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने में जुटे हुए हैं।

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