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Bring to the table win-win survival strategies to ensure proactive domination. At the end of the day, going forward, a new normal that has evolved from generation.
SunnyJanuary 16, 2019
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Dainik Bhaskar

Jan 15, 2019, 02:36 PM IST

बॉलीवुड डेस्क (आकाश खरे). आमतौर पर सेलेब्रिटीज की लैविश लाइफ स्टाइल देखकर हम यही सोचते हैं कि, वाह क्या लाइफ है। पर क्या हम कभी यह गौर करते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया होगा। दैनिक भास्कर मोबाइल ऐप एक ऐसी युवा एक्ट्रेस के संघर्ष के दिनों से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिसने आम मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर सिनेमा की चमकीली दुनिया में अपने लिए जगह बनाई। पढ़िए ‘दंगल’ में गीता फोगाट का किरदार निभा चुकीं एक्ट्रेस फातिमा सना शेख के संघर्ष के दिनों की तीन कहानियां।

हर शो मिलते थे 80 से 100 रुपए

  1. कदमों से ही नाप लिया शहर

    “जब मेरे पास काम नहीं था, तब पैसे बचाने के लिए मैंने एक तरीका अपनाया। घर से कहीं भी जाना होता तो हमेशा पैदल ही जाती थी। उस समय मैं थिएटर करती थी। मुझे हर शो के 80 से 100 रुपए तक मिल जाते थे। यह रकम मेरे लिए बहुत कीमती होती थी। मुझे मॉर्निंग का शो करना होता था। समय पर थिएटर पहुंचने के लिए मैं अलसुबह ही घर से निकल जाती। घर से थिएटर के बीच की 10 किमी की दूरी में रोज पैदल ही नापती। एक घंटे चलकर मैं थिएटर पहुंचती और अपना शो निपटाती। उसके बाद मुझे जो 80 रुपए मिलते, वे मेरे लिए लाखों से बढ़कर होते थे।”

  2. कतारों में घंटों धक्के खाए

    “शुरू में मेरी ख्वाहिश इतनी बड़ी नहीं थी। एक अदद रोल पाकर पहली सीढ़ी चढ़ना ही मेरा लक्ष्य था। जगह-जगह होने वाले एक्टिंग ऑडिशंस के लिए मैं दौड़ती-भागती थी। जगह-जगह से आए लोगों के साथ लंबी-लंबी लाइनों में खड़े रहकर धक्के खाती। अपनी बारी आने का घंटों इंतजार करती थी। इन लाइनों में खड़ी पसीने से लथपथ हूं या फिर सर्द हवाएं झेल रही हूं, आंखों में बस एक ही सपना था कि एक दिन रुपहले परदे पर दिखना है। ऐसे मैंने कई ऑडिशंस की खाक छानी है। बहुत दौड़ाया है सक्सेस ने, यह ऐसे ही नहीं मिली है पर अभी तो बहुत आगे जाना है।”

  3. दिल में एक्टिंग, हाथ में कैमरा

    “एक्टिंग तो मेरा पैशन था, पर पैशन फॉलो करने के लिए जेब में पैसे भी तो चाहिए होते हैं। अर्निंग के लिए मैंने फोटोग्राफी शुरू की। जब मेरे पास थिएटर या एक्टिंग का काम नहीं होता था तो लोगों की शादियों में जाकर उनके फोटो खींचती थी। थोड़ी बहुत कमाई इसी से हो जाती। बाकी के समय मैं अपने पहले प्यार एक्टिंग पर ही पूरा फोकस करती थी। वह वक्त मुझे आज भी याद है। दिल में अभिनय की लौ जली होती थी और काम क्या… हाथ में कैमरा थामकर लोगों की शादियों में फोटोग्राफी करना। सच है जिंदगी भी आपको क्या-क्या रंग दिखाती है।”

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SunnyJanuary 16, 2019
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 09 Jan 2019 04:57 AM IST

ख़बर सुनें

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने वर्चुअल क्रिप्टो करेंसी के नाम पर सैकड़ों लोगों से 80 करोड़ की ठगी के आरोप में एक शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान आजमगढ़ (यूपी) निवासी रोहित कुमार के रूप में हुई है। रोहित ने अपने साथियों के साथ मिलकर जुलाई 2017 में वर्चुअल क्रिप्टो करेंसी के नाम पर मनी ट्रेड कॉइन लांच किया था। मनी ट्रेड कॉइन में निवेश करने पर मोटे मुनाफे का झांसा दिया गया। आरोपियों ने तीन यूएस डॉलर के निवेश पर कुछ दिन में उनकी कीमत 2500 यूएस डॉलर होने का झांसा दिया। तीन आरोपियों को महाराष्ट्र पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी डॉ. अमित लखन पाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

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अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अजीत कुमार सिंगला ने बताया कि 31 दिसंबर, 2018 को दिल्ली निवासी संतोष कुमार ने 21 लाख से अधिक की ठगी का आरोप लगाया था। धीरे-धीरे कर कई शिकायतकर्ता सामने आ गए। पीड़ितों ने बताया कि रोहित कुमार, डॉ. अमित लखन पाल, राजेंद्र कुमार शाह व अन्य ने सोशल मीडिया व निजी बुलावा देकर उन्हें कार्यक्रम में बुलाया। दिल्ली, मुंबई और देश के कई शहरों के अलावा दुबई में इन लोगों ने पांच सितारा होटलों में कार्यक्रम आयोजित किए।

इन लोगों ने अपनी निवेश योजना के बारे में बताया। इनके प्लान के मुताबिक वर्चुअल क्रिप्टो करेंसी लांच की गई, जिसका नाम मनी ट्रेड कॉइन रखा। कंपनी का नाम फिलिंसटोन टेक्नोलॉजिज रखा गया। कार्यक्रम में लोगों का विश्वास जीतने के लिए इन लोगों ने एक शख्स से वित्त मंत्रालय के एक सदस्य के फर्जी विजिटिंग कार्ड भी बंटवाए। कंपनी का दफ्तर जीवनदीप बिल्डिंग, संसद मार्ग और इंग्लैंड के नॉथिंगम शहर में बताया गया। निवेशकों से मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) करने पर दो फीसदी मुनाफा कमाने के लिए कहा गया। 

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SunnyJanuary 16, 2019
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निवेश को सुरक्षित भविष्य की नींव माना जाता है, लेकिन इसमें तेजी से बदलाव आ रहा है। आज की युवा पीढ़ी अपने माता-पिता की तरह निवेश को बचत का साधन नहीं मानती। बल्कि निवेश को भविष्य में और ज्यादा कमाई का जरिया मानकर बाजार में पैसा लगा रही है। 

उसकी आकर्षण एफडी, एनएससी जैसे सुरक्षित और सुनिश्चित साधनों में निवेश पर नहीं है। इसकी बजाय वह जोखिम लेकर म्यूचुअल फंड और बाजार से जुड़ी अन्य योजनाओं में पैसा लगा रही है, ताकि बेहतर रिटर्न मिल सके।लैडर फाइनेंसियल एडवाइजरीज के संस्थापक सुरेश सदागोपन का कहना है कि पहले ज्यादातर लोग टैक्स *बचाने के लिए बीमा पॉलिसी खरीद लेते थे या डाकघर से जुड़ी जमा योजनाओं में पैसा लगाते थे। लेकिन नई पीढ़ी रकम ऐसी जगह निवेशित करना चाहती है, जिससे पांच, दस साल में बेहतर रिटर्न मिले।.

– 10 लाख रुपये का न्यूनतम हेल्थ इंश्योरेंस भी ले रहे हैं युवा।
– 5 से 10 साल की बाजार से जुड़ी योजनाओं में दिलचस्पी ज्यादा।

1. जीवनशैली के जोखिम पर ध्यान.
नई पीढ़ी को लगता है कि कम सोने, बाहर ज्यादा खानपान, शारीरिक सक्रियता में कमी से जीवनशैली की बीमारियों का खतरा ज्यादा.

2. एक ही जगह पैसा नहीं झोंकना चाहते.
युवा पीढ़ी एक ही योजना में पूंजी झोंकने में भी यकीन नहीं रखती। ऐसे में लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) और एनपीएस में उनकी दिलचस्पी है। पीपीएफ फिलहाल आठ फीसदी का रिटर्न दे रहा है। इसमें धारा80सी के तहत छूट है, साथ ही रिटर्न व परिपक्वता की रकम भी करमुक्त है। इसमें कम से कम 15 साल का निवेश होता है। वहीं एनपीएस भी बढि़या पेंशन विकल्प है।.

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3. परिवार पर बोझ नहीं डालते
वित्तीय विश्लेषक गौरव मशरूवाला का कहना है कि युवाओं की हेल्थ पॉलिसी में दिलचस्पी है, ताकि अकस्मात बीमारी से परिवार पर कोई बोझ नहीं पड़े। वे टर्म इंश्योरेंस में निवेश करते हैं, ताकि किसी अनहोनी के बाद भी परिवार की आय बनी रहे। ऑफिस से बीमा के बाद भी वे अलगसे पॉलिसी लेते हैं।

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4. कार या घर की जरूरतों का ध्यान.
युवा छोटी अवधि के निवेश सेकार, घर या अन्य बड़ी जरूरतों के लिए मोटी रकम जुटाई जा सके। दिल्ली, मुंबई से लेकर बड़े शहरों में यही रुख देखा जा रहा है।

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SunnyJanuary 16, 2019
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how to double your money in less time in post office schemeNSC यानी नेशनल सेविंग ​सर्टिफिकेट के तहत खाता को देश की किसी भी पोस्ट ऑफिस ब्रांच से लिया जा सकता है. (PTI)

हर कोई चाहता है कि उसके पास एक अच्छा-खासा फंड हो. ऐसे में कई लोग कम वक्त में पैसा जल्दी डबल करने वाले इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट खोजते हैं. साथ ही यह भी चाहते हैं कि जोखिम कम रहे. लिहाजा ज्यादातर लोग इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बैंक FD को चुनते हैं. लेकिन एक स्कीम बैंक FD से भी ज्यादा जल्दी आपका पैसा डबल करती है. यह स्कीम है पोस्ट ऑफिस की NSC.

NSC यानी नेशनल सेविंग ​सर्टिफिकेट के तहत खाता को देश की किसी भी पोस्ट ऑफिस ब्रांच से लिया जा सकता है. NSC का मैच्योरिटी पीरियड 5 साल होता है. इस पर इस वक्त 8 फीसदी सालाना का ब्याज मिल रहा है. NSC स्मॉल सेविंग्स में आती है और सरकार हर 3 महीने पर स्मॉल सेविंग्स के लिए ब्याज दर रिवाइज करती है.

8 फीसदी की ब्याज दर के हिसाब से अगर आप 1 लाख रुपये की NSC खरीदते हैं तो आपका पैसा 9 सालों में डबल होगा. वहीं अगर आप SBI, ICICI बैंक, HDFC बैंक, PNB जैसे बैंकों में FD कराते हैं तो यहां आपका पैसा डबल होने में 10.5 साल तक का वक्त लगेगा.

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प्रमुख बैंकों की FD में कितने वक्त में पैसा होगा डबल

वह ऐसे कि SBI और PNB में इस वक्त 1 साल रुपये अमाउंट वाली FD पर सबसे ज्यादा ब्याज दर 6.85 फीसदी है. ऐसे में इस दर से 1 लाख रुपये का अमाउंट डबल होने में 10.5 साल का वक्त लगेगा.

ICICI बैंक में FD पर 1 लाख रुपये से कम के अमाउंट की FD के लिए हाईएस्ट ब्याज दर 7.50 फीसदी और HDFC बैंक में 7.40 फीसदी सालाना है. इस लिहाज से आपका पैसा डबल होने में 9.6 साल और 9.7 साल का वक्त लगेगा.

कैसे ले सकते हैं NSC

​एक सिंगल होल्डर टाइप सर्टिफिकेट कोई भी एडल्ट अपने नाम से या अपने बच्चे के नाम से खरीद सकता है. NSC में 100, 500, 1000, 5000, 10,000 या इससे ज्यादा के सर्टिफिकेट मिलते हैं. इसमें नि‍वेश करने की कोई सीमा नहीं है. आप अपनी क्षमता के मुताबिक कि‍तनी भी धनराशि का NSC खरीद सकते हैं.

फायदे

  • NSC में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्‍स छूट मिलती है. हालांकि यह छूट 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही मिलती है.
  • NSC के VIII इश्यू को किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर किया जा सकता है. हालांकि ऐसा इसके मैच्योर होने से पहले केवल एक ही बार किया जा सकता है.
  • सर्टिफिकेट ट्रांसफर करने पर पुराने सर्टिफिकेट्स और इसकी परचेज एप्लीकेशन पर पर ही पुराने होल्डर का नाम काटकर नए होल्डर का नाम लिख दिया जाता है. इस दौरान ऑथराइज्ड पोस्टमास्टर के सिग्नेचर, उसकी डेजिग्नेशन यानी पोस्ट की स्टांप और पोस्ट ऑफिस की डेट स्टांप लगाई जाती है.

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कैसे है पूरे पैसे की सेफ्टी की गारंटी

अगर कोई बैंक डिफॉल्‍ट कर जाता है या दिवालिया हो जाता है तो ऐसे में DICGC यानी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन बैंक में कस्टमर्स के सिर्फ 1 लाख रुपये की सुरक्षा की गारंटी देता है. यह नियम बैंक की सभी ब्रांच पर लागू होता है. इसमें मूलधन और ब्‍याज दोनों को शामिल किया जाता है. यानी अगर किसी बैंक में आपका कुल जमा 4 लाख है तो बैंक के डिफॉल्ट करने पर आपके सिर्फ 1 लाख रुपये ही सुरक्षित माने जाएंगे. बाकी के पैसे मिलने की गारंटी नहीं होगी. अगर एक से ज्यादा अकाउंट हैं तो सभी अकाउंट का बैलेंस जोड़कर केवल 1 लाख तक जमा को ही सुरक्षित माना जाएगा.

पोस्ट ऑफिस कैसे 100% सुरक्षित

अगर पोस्टल डिपार्टमेंट रकम लौटाने में फेल हो तो पोस्ट ऑफिस के जमा पैसों पर सॉवरेन गारंटी होती है. यानी किसी परिस्थिति में अगर पोस्टल डिपार्टमेंट निवेशकों की रकम लौटाने में फेल हो जाए तो यहां सरकार आगे बढ़कर निवेशकों के पैसों की गारंटी लेती है. किसी स्थिति में आपका पैसा फंसने नहीं पाता है. पोस्ट ऑफिस स्कीम में जमा पैसों का इस्तेमाल सरकार अपने कामों के लिए करती है. इसी वजह से इन पैसों पर सरकार गारंटी भी देती है.

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SunnyJanuary 16, 2019
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US President Donald Trump &nbsp | &nbspPhoto Credit:&nbspAP, File Image

Washington DC: US President Donald Trump on Tuesday praised German automaker Volkswagen for a planned $800 million investment in a US plant to build electric vehicles.

“Congratulations to Chattanooga and Tennessee on a job well done. A big win!” the president tweeted on the second day of the Detroit auto show. VW announced at the auto show Monday that it would expand its plant in the southern US city and create 1,000 jobs.

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SunnyJanuary 16, 2019
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इसी 11 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर एच-1बी वीजा धारकों को आश्वासन दिया कि उनका प्रशासन जल्द ही ऐसे बदलाव करेगा, जिससे उन्हें अमेरिका में रुकने का भरोसा मिले और नागरिकता लेने का संभावित रास्ता आसान हो जाए। वस्तुत: ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा पर अमेरिकी नीतियों में बदलाव की तैयारी में है, जिससे प्रतिभाशाली और उच्च कौशल वाले लोगों को अमेरिका में करियर बनाने के लिए नए सिरे से बढ़ावा मिले। ट्रंप का ट्वीट भारतीय पेशेवरों, और खासकर आईटी क्षेत्र के पेशेवरों के लिए अच्छी खबर के रूप में सामने आया है। 
अमेरिकी रुख में अचानक आया यह बदलाव चौंकाने वाला है। इसके दो बड़े कारण हैं। एक, अमेरिकी उद्योग-कारोबार प्रतिभाओं की कमी से आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और दो, अमेरिका पहली बार स्वयं प्रतिभा पलायन की चिंता से जूझा है। ट्रंप के शासनकाल के प्रथम दो वषार्ें में ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा धारकों के लिए अमेरिका में अधिक समय तक ठहरने, विस्तार और नया वीजा हासिल करना जिस तरह कठिन बना दिया, उसमें यही होना था। 
निश्चित रूप से अब तक जहां एक ओर अमेरिका में भारत के कुशल पेशेवरों (प्रोफेशनल्स) की वीजा संबंधी कठोरता के कारण मुश्किलें और चिंताएं लगातार बढ़ती गई हैं और अमेरिकी सरकार की ‘बाई अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ नीति के तहत नई-नई वीजा संबंधी कठोरता भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाती दिखी है, वहीं अमेरिका के उद्योग-कारोबार को भी कुशल पेशेवरों की कमी के कारण दिक्कतें आई हैं। खासतौर से भारतीय मूल के अमेरिकियों के स्वामित्व वाली छोटी तथा मध्यम आकार की कंपनियां इससे प्रभावित हुईं। 
सर्वविदित है कि पूरी दुनिया में प्रवासी भारतीयों और विदेशों में काम कर रही भारतीय नई पीढ़ी की श्रेष्ठता को स्वीकार्यता मिली है। उन्हेंईमानदार, परिश्रमी और समर्पित माना जाता है। आईटी, कंप्यूटर, मैनेजमेंट, बैंकिंग, वित्त आदि के क्षेत्र में भारतीय प्रवासी सबसे आगे हैं। अधिकांश विकसित और विकासशील देशों में भारतीय प्रतिभाओं का स्वागत हो रहा है। पिछले दिनों जापान के उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने वाली सरकारी एजेंसी जापान विदेश व्यापार संगठन (जेईटीआरओ) ने भी माना कि जापान की औद्योगिक और कारोबारी आवश्यकताओं में तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल तेज होने से वहां सूचना प्रौद्योगिकी के साथ ही हेल्थकेयर, कृषि, अनुसंधान व विकास, सेवा व वित्त आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षित कार्यबल की भारी कमी महसूस हो रही है। जेईटीआरओ का मानना है कि जापान की बुजुर्ग होती जनसंख्या और जन्म-दर की गिरावट के इस दौर में आईटी पेशेवरों की सबसे अधिक जरूरत है, जिसे भारतीय प्रतिभावान आईटी प्रोफेशनल्स ही दूर कर सकते हैं। यही कारण है कि जापान ने पिछले साल भारतीय लोगों के लिए वीजा नियम आसान किए और अब वह उच्च कुशल पेशेवरों के लिए खास तरह का ग्रीन कार्ड भी जारी कर रहा है। 
अगर हमें अमेरिका जैसे कुछ विकसित देशों द्वारा भारतीय पेशेवर प्रतिभाओं के कदम थामने से रोकना है, तो सबसे पहले अपनी प्रतिभाओं को ऐसे उच्च कौशल से युक्त करना होगा कि वे सबसे अलग दिखें। उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स और क्लाउड प्लेटफार्म जैसी तकनीकों के ज्ञान से लैस करना होगा। रोबोट से बढ़ती रोजगार चिंताओं पर भी ध्यान देने की जरूरत होगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसे ही शुभ संकेत अब ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों से भी आएंगे, जहां भारतीय पेशेवरों की राह में लगातार रोड़े अटकाए जा रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि सरकार और उद्योग-कारोबार एवं तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े संगठन आने वाले वषार्ें में देश और दुनिया की जरूरतों के मुताबिक देश की युवा आबादी को कौशल प्रशिक्षण से कार्यसक्षम बनाने की नई रणनीति के साथ आगे बढ़ें। यह भी जरूरी होगा कि नैस्कॉम के स्थापित कुशल प्रशिक्षकों और ऐसी ही वैश्विक स्तर की विभिन्न संस्थाओं से सहयोग लिया जाए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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SunnyJanuary 16, 2019
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रेलमंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि सरकारी नौकरियों में आवेदनों की भरमार को देश में रोजगार के अवसरों की कमी का पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। सरकारी नौकरी के आकर्षण का मुख्य कारण उसके सुरक्षित रहने का भाव है। भले काम कैसा भी हो।

उद्योग मंडल सीआईआई के रोजगार और आजीविका पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए रेलमंत्री ने यह बात कही। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। दोनों मंत्रियों ने कहा कि सरकार ने पिछले पांच साल में पर्याप्त रोजगार दिए हैं। जावड़ेकर ने कहा कि जो लोग अपनी रुचि के अनुसार काम नहीं कर पाते हैं, उन्हें बेरोजगार नहीं माना जा सकता।

रेलवे का उदाहरण देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि विभाग में कुछ पदों के लिए 1.5 करोड़ आवेदन मिले। इस प्रकार के आंकड़े का उपयोग प्राय: उच्च बेरोजगारी दर को रेखांकित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि परंपरागत भारतीय समाज में सरकारी नौकरियों का आकर्षण हीं ज्यादा है। लोगों को लगता है कि अगर उन्हें सरकारी नौकरी मिली, उनका जीवन पूरी तरह सुरक्षित है। वे स्थायी कर्मचारी हैं और अगर उन्होंने कोई दुराचरण भी किया और यह भी पाया गया कि वे काम में कच्चे हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यूनियन उसका ध्यान रखेगी। यह वास्तविकता है।

रेलमंत्री ने रेखांकित किया कि रोजगार के वैकल्पिक अवसर बढ़े हैं और नये क्षेत्र स्व-रोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसे रोजगार आंकड़ों में शामिल नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रणाली में बदलाव लाने और उसे उन्नत बनाने की जरूरत है।

सही आंकड़े एकत्र करने की जरूरत
जावड़ेकर ने कहा कि सही आंकड़े एकत्रित करने की जरूरत है और फिलहाल उन्हीं को शामिल किया जाता है, जो संगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। असंगठित क्षेत्र से कोई आंकड़ा नहीं लिया जाता। कई लोग अपना काम करते हैं। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं, जो अपनी रुचि के मुताबिक काम नहीं करती। क्या वे बेरोजगार हैं? इस मामले में कई पहलू हैं, जिन पर गौर किए जाने की जरूरत है। मानव संसाधन मंत्री ने भी कहा कि सरकारी नौकरी के लिए जो आकर्षण है, उसे समझने की जरूरत है। हमें यह पता लगाना है कि आखिर क्यों एमए पास सफाईकर्मियों के लिए भी आवेदन देते हैं।

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SunnyJanuary 16, 2019
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SunnyJanuary 16, 2019
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2min00

Business

oi-Vinay Kumar Mishra

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Updated: Tuesday, January 15, 2019, 17:21 [IST]

Stock Market : सोमवार की गिरावट से उबर कर शेयर बाजार ने मंगलवार को शानदार तेजी दिखाई। आज सुबह सेंसेक्स (Sensex) तेजी के साथ खुला और दिन भर तेजी ही बनी रही। अंत में शेयर बाजार बंद होते वक्त सेंसेक्स 464.77 अंक यानि 1.30 फीसदी की बढ़त के साथ 36318.33 के स्तर पर बंद हुआ है। वहीं एनएसई (NSE) का निफ्टी 149.20 अंक यानि 1.39 फीसदी की मजबूती के साथ 10886.80 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का रुख रहा और यह शाम को 11 पैसे की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था।

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कई शेयरों में रही अच्छी तेजी
मंगलवार की ट्रेडिंग में विप्रो, टेक महिंद्रा, यश बैंक और एचपीसीएल में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली है। वहीं, मारुति, आईसीआईसीआई बैंक और गेल में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। ऑयल एंड गैस शेयरों में भी आज अच्छी बढ़त हुई है। बीएसई का ऑयल एंड गैल इंडेक्स आज 1.7 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ है। आईटी, मेटल, रियल्टी और फार्मा शेयरों में आज सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली है।

ज्यादातर इंडेक्स में रही तेजी
निफ्टी का आईटी इंडेक्स 3 फीसदी, मेटल इंडेक्स 1.6 फीसदी, फार्मा इंडेक्स 0.9 फीसदी और रियल्टी इंडेक्स 1.79 फीसदी बढ़त के साथ बंद हुआ है।

रुपये में रही गिरावट
मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का रुख रहा। शाम को एक डॉलर के 7104 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। रुपये में कल भी गिरावट रही थी। 

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SunnyJanuary 15, 2019

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तीन साल से लगातार केंद्र सरकार और बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम हो गए हैं। ऐसे में हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गरीब आरक्षण कानून का लाभ सभी लोगों को कैसे मिलेगा यह सबसे बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधीन कार्मिक मंत्रालय के ताजा डाटा के अनुसार 2015 से 2017 के बीच नौकरियों के अवसर लगातार कम हुए हैं। यही हाल बैंकिंग क्षेत्र का भी है। 

1.13 लाख नौकरियां थीं 2015 में

डाटा के अनुसार 2015 में जहां सरकारी नौकरी का आंकड़ा 1.13 लाख थीं वहीं 2017 में यह केवल 1 लाख 900 रह गई। तीन साल का यह डाटा कार्मिक मंत्रालय ने यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी के जरिए एकत्र किया है।

इसी तरह का एक डाटा भारी उद्योग मंत्रालय की तरफ से भी जारी किया गया है, जिसके अनुसार पब्लिक सेक्टर कंपनियों में भी नौकरियों के अवसर काफी घट गए हैं। पीएसयू कंपनियों में 2014 में करीब 16.91 लाख लोगों को नौकरियां मिली थीं, वो 2017 में केवल 15.23 लाख रह गईं। 

हालांकि इस डाटा में राज्य सरकार, मंत्रालय व विभाग, वित्तीय संस्थान और केंद्र व राज्यों के आधीन विश्वविद्यालयों को शामिल नहीं किया गया है। 

बैंकों में अधिकारी पद बढ़े, क्लर्क की नौकरियां घटी

ऐसा ही कुछ हाल बैंकिंग क्षेत्र में भी देखने को मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों में भी अधिकारी के पद पर तो नौकरियों के अवसर बढ़े हैं, लेकिन क्लर्क व इससे नीचे के स्तर पर काम करने वालो की संख्या में कमी देखने को मिली है।

अधिकारी पद पर नौकरी लेने वालों की संख्या में 4.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। वहीं क्लर्क व इससे नीचे के पदों पर नौकरियों की संख्या में 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।  

ऐसे लगातार घटती गईं नौकरियां

अब हम आपको वो आंकड़ा बताने जा रहे हैं, जिसके अनुसार 2015 से 2017 के बीच कैसे सरकारी नौकरियों में कमी होती गई…

बैंक में ऐसे कम और बढ़ी नौकरियां

2014-15
अधिकारी     7,29,964
क्लर्क          3,76,608
कनिष्ठ वर्ग    1,84,970
कुल          12,91,542

2015-16
अधिकारी     7,71,064
क्लर्क          3,61,531
कनिष्ठ वर्ग    1,68,339
कुल          13,00,934

2016-17
अधिकारी     8,28,594
क्लर्क          3,60,381
कनिष्ठ वर्ग    1,60,916
कुल          13,49,916

केंद्र व रेलवे में ऐसे कम हुई नौकरियां

साल             यूपीएससी      एसएससी   आरआरबी        कुल
2016-17      5,735             68,880         26,318          1,00,933
2015-16      6,886             25,138         79,803          1,11,807
2014-15      8,272             58,066         47,186          1,13,524
 

तीन साल से लगातार केंद्र सरकार और बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियों के अवसर कम हो गए हैं। ऐसे में हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गरीब आरक्षण कानून का लाभ सभी लोगों को कैसे मिलेगा यह सबसे बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधीन कार्मिक मंत्रालय के ताजा डाटा के अनुसार 2015 से 2017 के बीच नौकरियों के अवसर लगातार कम हुए हैं। यही हाल बैंकिंग क्षेत्र का भी है। 

1.13 लाख नौकरियां थीं 2015 में

डाटा के अनुसार 2015 में जहां सरकारी नौकरी का आंकड़ा 1.13 लाख थीं वहीं 2017 में यह केवल 1 लाख 900 रह गई। तीन साल का यह डाटा कार्मिक मंत्रालय ने यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी के जरिए एकत्र किया है।

इसी तरह का एक डाटा भारी उद्योग मंत्रालय की तरफ से भी जारी किया गया है, जिसके अनुसार पब्लिक सेक्टर कंपनियों में भी नौकरियों के अवसर काफी घट गए हैं। पीएसयू कंपनियों में 2014 में करीब 16.91 लाख लोगों को नौकरियां मिली थीं, वो 2017 में केवल 15.23 लाख रह गईं। 

हालांकि इस डाटा में राज्य सरकार, मंत्रालय व विभाग, वित्तीय संस्थान और केंद्र व राज्यों के आधीन विश्वविद्यालयों को शामिल नहीं किया गया है। 

बैंकों में अधिकारी पद बढ़े, क्लर्क की नौकरियां घटी

ऐसा ही कुछ हाल बैंकिंग क्षेत्र में भी देखने को मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों में भी अधिकारी के पद पर तो नौकरियों के अवसर बढ़े हैं, लेकिन क्लर्क व इससे नीचे के स्तर पर काम करने वालो की संख्या में कमी देखने को मिली है।

अधिकारी पद पर नौकरी लेने वालों की संख्या में 4.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। वहीं क्लर्क व इससे नीचे के पदों पर नौकरियों की संख्या में 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।  

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