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SunnyJanuary 15, 2019
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Publish Date:Tue, 15 Jan 2019 02:22 AM (IST)

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय (डीडीई) सूबे में टीचर एजुकेशन के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित होगा। इस दिशा में संस्थान के कदम काफी आगे बढ़ चुके हैं। यह सब संभव हो रहा है अंतर्राष्ट्रीय संगठन यूनिसेफ के साथ हुए करार की वजह से। इसके तहत निदेशालय में प्रोग्राम मॉनीट¨रग यूनिट की स्थापना हो चुकी है। यूनिसेफ के साथ निदेशालय का तीन सालों तक क्वालिटी टीचर एजुकेशन के क्षेत्र में साथ काम करने का करार है। इस क्रम में कई कार्यशालाओं का आयोजन भी हो चुका है जिसमें टीचर एडुकेटरों के लिए अंडरस्टैं¨डग सेल्फ की पाठ्य सामग्री तैयार की जा चुकी है। इस करार का मूल यह है कि जब तक प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा को दुरूस्त नहीं किया जाएगा, तब तक उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संभव नहीं। प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर शिक्षा में गुणवत्ता के लिए जरूरी है कि इस स्तर के शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाई जाए। इन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को बीएड कोर्स के तहत प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि बीएड के फैकल्टी की क्वालिटी इंप्रूव की जाए। इसी उद्देश्य के साथ यह करार किया गया है। निदेशालय के तहत बीएड कोर्स का संचालन भी होता है और आधारभूत संरचना का भी विवि के पास अभाव नहीं है। इसी आधार पर यूनिसेफ ने करार के लिए लनामिविवि के डीडीई का चयन भी किया। अब इसका फायदा डीडीई को मिलने लगा है। अब डीडीई का करार यूनिसेफ की सहयोगी संस्था लैंग्वेज लर्निंग फाउंडेशन के साथ होने जा रहा है जिसके माध्यम से यहां भाषा शिक्षण का कोर्स शुरू किया जाएगा। इस कोर्स के माध्यम से टीचर एडुकेटरों व स्कूली शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि स्कूल के स्तर पर छात्रों में भाषा के प्रति जागरूकता उत्पन्न की जा सके। बच्चों के लर्निग आउटकम को 10 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य :

यूनिसेफ का उद्देश्य 2022 तक बच्चों के लर्निग आउटकम को 10 प्रतिशत बढ़ाने का है। इसके लिए सूबे में लनामिविवि के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय का चयन प्रोग्राम मॉनीट¨रग यूनिट स्थापित करने के लिए किया गया। इसके लिए तकनीकी व वित्तीय सहायता यूनिसेफ उपलब्ध करा रहा है। दूरस्थ निदेशालय में विकसित होने वाली इस इकाई को मुख्य रूप से तीन ¨बदुओं पर केंद्रित किया जाएगा। पहला विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय सदस्य व एसआरजी की कैपेसिटी बि¨ल्डग का सशक्तीकरण विशेषज्ञों की मदद से करना, दूसरा राज्य व जिला स्तर के वरीय शिक्षा पदाधिकारियों का लीडरशिप ट्रे¨नग प्रोग्राम और तीसरा शिक्षण संस्थानों व शिक्षक सहायता तंत्र को मजबूत करना होगा। यूनिसेफ के साथ डीडीई का यह करार 14 अगस्त 2018 को हो चुका है और इसके तहत काफी काम किए जा चुके हैं।

Posted By: Jagran

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SunnyJanuary 15, 2019
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नई दिल्ली। साल 2018 के खत्म होने और नए साल के आने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। अगर साल 2018 आपके लिए वित्तीय परेशानियों भरा रहा है तो आज हम आपको ऐसे तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके जरिए आप अपने आने वाले भविष्य में तंगी से बच सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपको 2019 में और बाकी आने वाले सालों में पैसे की तंगी ना हो तो आपको नए साल की शुरूआत में निवेश के ये दो तरीके अपनाने हैं। जिनके जरिए आप कुछ सालों में ही करोड़पति बन सकते हैं।

ऐसे बने करोड़पति

आप नए साल में sip यानि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान या फिर इक्विटी म्युचुअल फंड को चुन कर आप आपने आने वाले सालों को बेहतर बना सकते है। अगर आप करोड़पति बनना चाहते हैं तो आपको हर महीने एसआईपी में
20,000 रुपए के निवेश से शुरूआत करनी होगी। इसी के साथ आपको हर साल अपने निवेश को 15 फीसदी बढ़ाना होगा। अगर आप इसी तरीके से दस साल तक एसआईपी में निवेश करते रहे और अगर आपको कम से कम 15 फीसदी तक का रिटर्न मिलता है, तो 10 साल बाद आपके SIP अकाउंट में तकरीबन 1 करोड़ रुपए तक का फंड जमा हो जाएगा।

निवेश के तरीके आपको बना देगें करोड़पति

अगर आप छोटे-छोटे निवेश ना करके बड़ा निवेश करना चाहते हैं तो आप इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए आपको इक्विटी म्युचुअल फंड में एक साथ 27 लाख रुपए का निवेश करना होगा। अगर इसमें आपको हर साल 14 से 16 फीसदी तक का रिटर्न मिलता है तो, 10 साल बाद आपके आपके पास 1 करोड़ रुपए तक का फंड बड़ी ही आसानी से जमा हो जाएगा। निवेशों के इन जरियों से आप आपने आने वाले कल को बेहतर बना सकते हैं। साथ ही सारी वित्तय परेशानियों से बच सकते हैं।

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SunnyJanuary 15, 2019
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नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) केंद्र ने जम्मू-कश्मरी को कुछ अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए हैं जिससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिल सके। औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (डीआईपीपी) ने सोमवार को यह बात कही। डीआईपीपी ने कई ट्वीट कर कहा कि जम्मू-कश्मीर को संशोधित औद्योगिक विकास योजना के तहत चार प्रोत्साहन दिए गए है जिनमें….रोजगार प्रोत्साहन, परिवहन प्रोत्साहन, सीजीएसटी और आईजीएसटी कें केंद्रीय हिस्सा की वापसी और आयकर में केंद्र के हिस्से की वापसी का प्रोत्साहन शामिल है। डीआईपीपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए संशोधित औद्योगिक विकास योजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी देते हुए इसे एक जनवरी, 2019 को अधिसूचित किया है। इसमें चार और प्रोत्साहन दिए गए हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर में स्थित औद्योगिक इकाइयों को पहले से तीन प्रोत्साहन दिए जा रहे थे। परिवहन प्रोत्साहन के तहत औद्योगिक इकाई के नजदीकी रेलवे स्टेशन से खरीदार के नजदीकी गंतव्य के रेलवे स्टेशन तक तैयार माल के परिवहन खर्च की वापसी की जाएगी।

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SunnyJanuary 15, 2019
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New Delhi

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Published: Monday, January 14, 2019, 16:40 [IST]

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने जहां एक तरफ सवर्ण जातियों को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया है जो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रुप ले चुका है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी नौकरियों को लेकर जो आंकड़ा सामने आया है, इससे पता चलता है कि इन युवाओं को घटती नौकरियों की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार,केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई), यहां तक कि बैंक में भी लगातार नौकरियां कम हो रही हैं।

upper caste reservation: government,railway and bank jobs shrinking in upper caste reservation

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार,कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा पिछले तीन वर्षों में मुख्य एजेसियों- संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी),कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी),रेलवे भर्ती बोर्ड(आरआरबी)- द्वारा भर्ती के आंकड़े इकठ्ठा किए गए हैं। इन आंकड़ो से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2015 में 1,13,524 उम्मीदवारों का चयन और नियुक्ति हुई थी। जबकि इसकी तुलना में वित्तीय वर्ष साल 2017 में 1,00,933 उम्मीदवारों का चयन और नियुक्ति हुई।

वहीं भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय से प्राप्त अलग-अलग आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2014 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम(सीपीएसई) में कर्मचारियों की संख्या 16.91 लाख थी, जो वित्तीय वर्ष 2017 में घटकर 15.23 लाख हो गई। लेकिन 2017 में इसमें थोड़ी बढोतरी देखने को मिली, इससे पहले चार साल में लगातार गिरावट देखी जा रही थी।

हालांकि, इसमें अगर कॉन्ट्रैक्चुअल और कैज्युअल श्रमिकों की संख्या को निकाल दिया जाए तो, तो वित्तीय वर्ष 2017 में सीपीएसई द्वारा काम करने वालों की संख्या 11.31 लाख थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2016 में ये 11.85 लाख थी। इस दौरान कर्मचारियों की संख्या में 4.60 प्रतिशत की कमी आई।

वहीं बैंकों के मामले में, आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कुल रोजगार में लगभग 4.5 प्रतिशत की बढोतरी हुई लेकिन यो बढ़ोतरी अधिकारियों की नियुक्ति की वजह से हुई। वहीं बैंको की अन्य दो अन्य नौकरियों की श्रेणियों – क्लर्क और अधीनस्थ कर्मचारियों (सबऑर्डिनेट स्टाफ) में भर्ती वित्तीय वर्ष 2015 और वित्तीय वर्ष 2017 के बीच लगभग 8 प्रतिशत नीचे चली गई।

जब भारी उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी से सीपीएसई रोजगार में गिरावट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सीपीएसई में मैनपावर प्लानिंग और तैनाती उनके बिजनेस प्लास के उद्देश्यों और लक्ष्यों, मौजूदा व्यावसायिक स्थितियों एवं आवश्यकताओं और भविष्य के संचालन, विस्तार और निवेश योजना आदि जैसे अन्य कारकों से जुड़ी है। मैनपावर रोजगार में बदलाव के अन्य कारणों में सीपीएसई की रिटायरमेंट और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना शामिल हैं।

गौरतलब है यूपीएससी सिविल सर्विस और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए परीक्षा आयोजित करता है और एसएससी विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों में निचले पदों के लिए परीक्षा आयोजित करता है। जबकि आरआरबी और आरआरसी (रेलवे रिक्रूटमेंट सेल) रेलवे के लिए भर्ती करते हैं।

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SunnyJanuary 15, 2019
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<!–योजना सह वित्त विभाग का निर्देशः बोर्ड और निगम बिना अनुमति के पीएल खाते में नहीं जमा करें रुपए – NEWSWING

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SunnyJanuary 14, 2019
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राजस्थान में चुनाव जीतने के बाद सत्ता में आई मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार एक्शन में दिखाई दे रही है और एक के बाद एक बड़े फैसले कर रही है. किसानों का कर्जा माफ, पेंशन राशि में बढ़ोतरी के साथ ही शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं. अब राज्य के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भंवर सिंह भाटी ने बताया है कि राज्य सरकार अगले एजुकेशन सेशन से निःशुल्क बालिका शिक्षा को सभी स्तरों पर लागू कर देगी.

मंत्री भाटी का कहना है, ‘राज्य सरकार राजकीय महाविद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा प्रदान करेगी. अगले शिक्षा सत्र से निःशुल्क बालिका शिक्षा को सभी स्तरों पर लागू कर दिया जाएगा. साथ ही भाटी का यह भी कहना है कि बालिकाओं की शिक्षा के साथ ही कॉलेजों में उनको भयमुक्त वातावरण मिले यह भी सुनिश्चित किया जाएगा.

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उन्होंने बताया कि राजकीय उच्च शिक्षण संस्थाओं के साथ ही निजी क्षेत्र को भी इस संबंध में भागीदारी दी जाएगी. गौरतलब है कि कांग्रेस ने अपने चुनावी जन घोषणा पत्र में स्टेट स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बालिका महिला शिक्षा को पूरी तरह नि:शुल्क करने की घोषणा की थी.

समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, साथ ही सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में भयमुक्त वातावरण के लिए कॉलेजों में ‘आंतरिक शिकायत’ समितियों का गठन किया जाएगा. भाटी का यह भी कहना है कि सभी सरकारी कॉलेजों में ‘विद्यार्थी परामर्श केन्द्र’ स्थापित होंगे, जिससे विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य के लिए रोजगार मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकें.

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भाटी ने कहा कि कांग्रेस के जन घोषणा पत्र में महाविद्यालयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग की बात थी. इसकी शुरुआत आज 40 कॉलेजों से की गई है. उन्होंने कहा कि प्रयास रहेगा कि आगामी एक माह में राज्य के सभी 252 कॉलेज में ‘प्रतियोगिता दक्षता’ परियोजना को चरणबद्ध लागू कर दिया जाएगा.

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SunnyJanuary 14, 2019
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बेमेतरा. जिले में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ की गई शिकायतों के आधार पर तीन साल में 91 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। अब तक इनमें से 48 प्रकरण में 111 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिले में रकम दोगुना करने एवं अधिक लाभ देने के नाम पर तरह-तरह की स्कीम का झांसा देकर हजारों लोगों से कई चिटफंड कंपनियों ने करोड़ों रुपए का निवेश करवाया है। कंपनी के एजेंटों एवं डायरेक्टरों ने निवेश करने वालों को रकम वापसी के लिए मियाद निर्धारित की थी। इसके बाद रकम नहीं मिलने पर थानों में शिकायत के आधार पर तीन साल में धारा 420, 409 एवं 456 इनामी चिटफंड एवं धन परिचालन स्कील पाबंदी अधिनियम 1978 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

2016 से अब तक दर्ज मामले
2016 के दौरान जिले के थानों में 19 प्रकरण दर्ज किए गए थे। जिसमें सभी प्रकरणों में विवेचना की गई है, जिसके बाद 13 प्रकरणो मे 43 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी प्रकरण न्यायालय में लंबित है। वहीं 3 प्रकरण लंबित हैं। दो प्रकरणों का खात्मा किया गया है। वहीं एक प्रकरण को धारा 299 की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें तीन आरोपी हैं। जिले में वर्ष 2017 के दौरान सर्वाधिक 50 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिसमें 3 प्रकरण का खात्मा किया गया है। बाकी 47 प्रकरण में सें 29 प्रकरणों में 60 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। बाकी 20 प्रकरणों में से 4 आरोपियों की तलाश जारी है। 2018 में जिले के विभिन्न थानों में 22 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जिसमें अब तक 6 मामलों में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 16 प्रकरण मेें आरोपियों की तलाश की जा रही है। 6 प्रकरणों के सभी 9 आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा चुका है। न्यायालय के निर्देश के बाद दीगर जिलों के अलावा जिले के निवेशकों को भी रकम वापसी की उम्मीद होने पर 20 जुलाई से 9 अगस्त तक हजारों लोगों ने 226 आवेदन पेश किया है, जहां से प्रदेश के दीगर थानों से संबंधित मामलों को थाने में पेश किया गया है।

नांदघाट थाने में भी दर्ज है तीन मामले
जिले के नांदघाट थाने में तीन चिटफंड कंपनी से जुड़े तीन प्रकरण दर्ज हैं। जिसमें गरिमा रिवर स्टेट, बीन एन गोल्ड व जीन एन डेयरीज में तीनों में पांच आरोपी पकड़े गए हैं। चिटफंड से जुड़े सबसे ज्यादा मामले बेमेतरा थाने में दर्ज हैं। इनके अलावा एमआई स्टाइल के प्रकरण में चार लोगों की गिरफ्तारी की गई है। एचबीएन कंपनी के प्रकरण में एजेंट पर कार्रवाई की गई है। डायरेक्टर फरार है। ड्रीम पावर कंपनी व बीएन गोल्ड के मामलों में संचालकों की तलाश जारी है। साई प्रकाश प्रॉपर्टी रीवां के मामले में संचालक पुष्पेंद्र की तलाश जारी है। एचआईसीएल कंपनी के खिलाफ दर्ज मामले में डायरेक्टर फरार है। जांच दुर्ग अपराध शाखा कर रही है। बेरला थाने में प्रिम रोज मार्केटिंग के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया है।

खम्हरिया में दर्ज मामले में पांच की गिरफ्तारी
खम्हरिया थाने में रिच लाइफ कंपनी के खिलाफ की गई शिकायत में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। साजा में जीएन गोल्ड कंपनी के खिलाफ की गई शिकायत में डायरेक्टर सतनाम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। सतनाम सिंह ने 4 करोड़ का निवेश कराने की बात पुलिस को दिए गए बयान में कही है। दो प्रकरणों में न्यायालय के निर्देश के बाद मामला दर्ज किया गया है।

पीएससीएल में निवेश की रकम वापसी की उम्मीद
आल इंवेस्टर्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन के जिला अध्यक्ष बुधराम साहू, कामता सिन्हा, मोहन साहू व अन्य के अनुसार जिले में उसके संगठन से जुड़े निवेशकों ने पीएससीएल में करोड़ों की रकम निवेश किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार निवेशकों को राहत देने के लिए पीएससीएल कंपनी की संपत्ति नीलाम कर निवेशकों को भुगतान करने के निर्देश दिए थे। जिसका आज तक पालन नहीं किया गया है। जिले में भी कंपनी में लोगों का करोड़ों रुपए है, जिसकी वापसी की प्रक्रिया प्रांरभ की जानी चाहिए। संगठन इस बारे में लगातार मांग कर रहा है। बहरहाल किसानों को राहत के बाद नए सत्ताधारी दल से भी लोगों को निवेश की गई रकम वापस मिलने की उम्मीद है।

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SunnyJanuary 14, 2019
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नयी दिल्ली,13 जनवरी (भाषा) केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने रविवार को कहा कि मोदी सरकार ने धर्म, क्षेत्र और जाति से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘‘स्पीड ब्रेकर्स’’ हटाकर ‘‘विकास का राजमार्ग’’ बनाया है। नकवी ने कनॉट प्लेस मार्केट के निकट स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स में हुनर हॉट का उद्घाटन करने के बाद एक बयान जारी करके यह बात कहीं। इस मेले की शुरूआत शनिवार को हुई थी जिसका औपचारिक रूप से उद्घाटन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को किया। दोनों मंत्रियों ने मेले का दौरा भी किया और कुछ कलाकारों से रूबरू हुए। जेटली ने पत्रकारों से कहा,‘‘इस विरासत का बाजार में आकर्षण और ब्रांड मूल्य है और इस तरह के आयोजनों से कारीगरों और शिल्पकारों को इससे संबंधित काम करने में फायदा होगा।’’ जेटली के साथ मौजूद अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री नकवी ने कहा कि इस मेले में 22 से अधिक देशों के शिल्पकार भाग ले रहे है। इस कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद नकवी ने एक बयान में कहा कि मोदी सरकार ने धर्म, क्षेत्र और जाति से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘‘स्पीड ब्रेकर्स’’ हटाकर ‘‘विकास का राजमार्ग’’ बनाया है। मंत्री ने कहा कि हुनर हाट इस राजमार्ग पर ‘‘वाहन (शिल्पकारों के सशक्तीकरण) को सुचारू रूप से चलाया जाना’’ सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नकवी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में इस मंच के माध्यम से 1.65 लाख से अधिक शिल्पकारों को नौकरियां और रोजगार के अवसर मिले है।

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SunnyJanuary 14, 2019
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संजय कुमार सिंह /  January 13, 2019

वित्त वर्ष खत्म होने में बमुश्किल ढाई महीने बचे हैं। अगर अभी तक आपने कर बचाने के लिए निवेश नहीं किया है तो फटाफट इस मोर्चे पर जुट जाइए और कर की मार से बचने के लिए निवेश कर डालिए। लेकिन जब आप कर बचाने वाली योजनाओं में निवेश करें तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आपका निवेश आपकी वित्तीय योजना के मुताबिक ही हो और वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में आपकी मदद करने वाला हो। बिना सोचे-समझे और सतर्कता बरते बगैर किसी भी योजना में निवेश कर देने से आपकी माली सेहत को बड़ा नुकसान हो सकता है।

सबसे पहले बीमा देखें

कर बचाने के लिए निवेश करने जा रहे हैं तो सबसे पहले जांचिए कि आपकी वित्तीय योजना में कमी कहां है। देखिए कि आपके पास पर्याप्त बीमा है या नहीं। आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत जीवन बीमा पर और धारा 80 डी के तहत स्वास्थ्य बीमा पर कर बचत का फायदा मिलता है। आपके पास पर्याप्त बीमा है या नहीं, यह जानने का तरीका बिल्कुल सरल और सीधा है। आपके पास इतनी संपत्तियां और जीवन बीमा कवर होना चाहिए कि आपकी सभी जिम्मेदारियां पूरी हो सकें, बड़े वित्तीय लक्ष्यों के लिए इंतजाम हो सके और आपके परिवार की नियमित जरूरतें भी पूरी हो सकें। अगर आपको यह झंझट भरी कवायद लगती है तो और भी आसान रास्ता है। अपनी क्षमता के मुताबिक अपनी सालाना आय की 10 से 15 गुना रकम का टर्म बीमा खरीद लीजिए। क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी अर्चित गुप्ता की सलाह है, ‘ऐसी योजनाओं को दूर से ही नमस्ते कर लीजिए, जिनमें निवेश और बीमा साथ-साथ हों। टर्म बीमा लेने पर आपको कम प्रीमियम में अधिक एश्योर्ड राशि हासिल हो जाएगी।’ इसके बाद देखिए कि आपने कितना स्वास्थ्य बीमा लिया है। आपके नियोक्ता ने आपको समूह स्वास्थ्य बीमा योजना का फायदा दिया हो या न दिया हो, अपने परिवार के लिए आपको व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा कवर जरूर लेना चाहिए।

जोखिम उठा सकें तो निवेश करें

निवेश करने से पहले आपको देखना चाहिए कि आपके पुराने निवेश और खर्चों से धारा 80 सी के तहत आपको कितनी कर छूट मिल पा रही है। मिसाल के तौर पर हो सकता है कि आप कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में योगदान कर रहे हों या जीवन बीमा प्रीमियम चुका रहे हों। अगर आपने आवास ऋण लिया है तो उसका मूल राशि वाले हिस्से का भुगतान भी 80 सी के तहत ही आता है। यदि आप तीनों में योगदान कर रहे हैं तो धारा 80 सी के तहत आपको मामूली निवेश की ही जरूरत पड़ेगी। धारा 80 सी के तहत आपको कर छूट दिलाने वाली ज्यादातर निवेश योजनाएं डेट योजनाएं होती हैं। केवल यूनिट लिंक्ड बीमा योजनाएं (यूलिप) और इक्विटी लिंक्ड बचत योजनाएं (ईएलएसएस) इक्विटी योजनाएं हैं।  डेट लेना है या इक्विटी, इसका फैसला अपने मौजूदा संपत्ति निवेश पोर्टफोलियो के संपत्ति आवंटन को देखकर करें। इक्विटी में निवेश करना हो तो ईएलएसएस को तरजीह दीजिए। गुप्ता कहते हैं, ‘ईएलएसएस में निवेश करने से पहले देख लीजिए कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। ऊंचा प्रतिफल चाहिए तो आपको ईएलएसएस में पांच साल से भी ज्यादा अरसे तक निवेश रखना होगा।’ डेट में निवेश करना है तो सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) का रास्ता पकडि़ए क्योंकि इसमें निवेश करते समय आपको कर छूट का फायदा मिलता है और अवधि पूरी होने पर निकासी भी कर मुक्त होती है।

युवा हैं तो यूलिप पकड़ें

भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के नियमों के मुताबिक अगर आपकी उम्र 45 साल से कम है तो आपके यूलिप में एश्योर्ड राशि प्रीमियम की कम से कम 10 गुना होनी चाहिए। लेकिन अगर आपकी उम्र 45 साल से अधिक है तो न्यूनतम एश्योर्ड राशि प्रीमियम की सात गुना ही होगी। उधर आयकर नियमों के मुताबिक परिपक्वता पर मिलने वाली राशि पर कर से छूट तभी मिलेगी, जब एश्योर्ड राशि सालाना प्रीमियम की 10 गुना हो। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार पसर्नलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, ‘जिनकी उम्र ज्यादा है, उन्हें निवेश करते समय यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि वही यूलिप खरीदें, जो इस शर्त को पूरी करता हो।’ युवा निवेशक तो यूलिप खरीद सकते हैं, लेकिन अधिक उम्र के निवेशकों को उनसे दूर ही रहना चाहिए। 

राघव कहते हैं, ‘यूलिप निवेश और बीमा की मिली-जुली योजना है। आपके प्रीमियम का एक हिस्सा बीमा वाली लागत पूरी करने में जाता है। युवाओं के लिए यह लागत कम होती है, इसलिए यूलिप उनके लिए खराब नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे बीमा वाला हिस्सा बढ़ता जाता है और निवेशकों को मिलने वाले प्रतिफल पर असर पड़ता है।’

मिससेलिंग से बचें

जब कर बचाने की गहमागहमी चलती है, उस समय पारंपरिक निवेश योजनाओं में गलत सूचना देकर फंसाने के वाकये सबसे ज्यादा होते हैं। ये योजनाएं सरकारी और दूसरे बॉन्डों में भारी निवेश करते हैं। शुरुआती सालों में एजेंटों का कमीशन भी बहुत अधिक होता है। इसलिए इन योजनाओं में प्रतिफल की आंतरिक दर कभी 3 से 6 फीसदी अधिक नहीं होती। इतना ही नहीं, उन्हें बंद करना भी मुश्किल होता है। यदि निवेशक कम से कम तीन साल तक प्रीमियम अदा नहीं करता है तो बीमा बंद करने पर उसकी पूरी रकम डूब जाती है। इतना ही नहीं, मरणशीलता शुल्क अधिक होने के कारण बुजुर्गों के लिए प्रतिफल की दर भी कम होती है।

बचें इन गलतियों से

कर बचाने के लिए क्या करना है, इसकी फिक्र अक्सर लोग वित्त वर्ष के अंत में ही करते हैं। निवेश के सबूत दिखाने की अंतिम समयसीमा (आम तौर पर फरवरी का पहला पखवाड़ा) जैसे ही नजदीक आती है, वे ऐसी किसी भी योजना में बिना समझे निवेश कर देते हैं, जो उस साल कर बचाने में उनकी मदद करती है। बाद में उन्हें महसूस होता है कि वह योजना उनके माफिक नहीं है और वे उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। कई निवेशक तो कई बार ऐसा करते हैं। कम से कम नौकरियां शुरू करने के बाद शुरुआती कुछ सालों तक तो ऐसा होता ही है। कर बचाने की योजना अलग-थलग या केवल एक बार की गतिविधि नहीं होनी चाहिए। इसे आपकी कुल वित्तीय योजना के मुताबिक ही होना चाहिए।

गुप्ता का कहना है, ‘कर संबंधी योजना के सभी फैसले तीन बड़े पहलुओं को ध्यान में रखकर लेने चाहिए – आपके निजी वित्तीय लक्ष्य, जोखिम सहने की क्षमता और निवेश की मियाद।’ कई निवेशक कर बचाने वाली योजनाओं में जरूरत से ज्यादा निवेश कर जाते हैं। पॉजिटिव वाइब्स कंसल्टिंग एंड एडवाइजरी के संस्थापक मल्हार मजूमदार का कहना है, ‘कर बचाने की गहमागहमी के बीच एजेंट बीमा पॉलिसी बेचने में जुटे रहते हैं, इसलिए कई लोग ढेर सारी बीमा पॉलिसियां खरीद डालते हैं, जबकि धारा 80 सी के तहत कर बचाने के लिए निवेश की उनकी सीमा पहले ही पूरी हो चुकी होती है।’

कई निवेशक यह समझने में नाकाम रहते हैं कि कुछ योजनाएं निवेश के समय भी कर बचाने में मदद करती हैं और परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद भी उन पर कर नहीं वसूला जाता। पीपीएफ इसी श्रेणी में आता है। दूसरी ओर पांच साल की सावधि जमा जैसी निवेश योजनाओं पर निवेश के समय तो कर छूट का फायदा मिल जाता है, लेकिन उन पर मिलने वाला ब्याज कर के दायरे में आता है। जाहिर है कि पीपीएफ बेहतर योजना है। कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि राष्टï्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) पर भी कर वसूला जाता है। कई लोग यह नहीं जानते कि राष्टï्रीय पेंशन योजना पर (धारा 80 सी के तहत तय छूट सीमा के ऊपर) 50,000 रुपये की अतिरिक्त कर छूट मिल जाती है या कर का वह फायदा तभी मिलेगा, जब आप टियर 1 योजना में निवेश करते हैं।

कुछ निवेशक अपनी कर बचत को इधर से उधर करते रहते हैं। वे उन निवेश योजनाओं से रकम निकाल लेते हैं, जिनकी लॉक-इन अवधि पूरी हो गई है और कर बचाने के लिए उस रकम का निवेश दोबारा कर देते हैं। मजूमदार का मशविरा है, ‘अगर वे रकम निवेश योजना में लगी रहने दें और हर साल अलग से निवेश करें तो आगे चलकर उनके पास अच्छी खासी रकम जमा हो जाएगी।’ अगर आप 80 सी के तहत कर बचाने की जुगत भिड़ा रहे हैं तो टर्म योजना, ईपीएफ, पीपीएफ और ईएलएसएस आपके लिए बेहतर चुनाव होंगे। जो निवेश जोखिम से दूर रहते हैं और बेहतर प्रतिफल चाहते हैं, उन्हें म्युचुअल फंड में रिटायरमेंट योजनाओं पर नजर डालनी चाहिए। ये हाइब्रिड फंड होते हैं, जिनकी लॉक-इन अवधि पांच साल होती है।

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SunnyJanuary 13, 2019
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खैरथल| कस्बे में स्थित इंजीनियर्स पाेइंट स्कूल में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपनी पाॅकेट मनी बचाकर 250 निर्धन विद्यार्थियाें काे जर्सियां बांटी। विद्यालय के निदेशक अाजाद चाैधरी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विद्यार्थियों ने अपने पाॅकेट मनी से बचाए गए रुपयों से जर्सियां खरीदकर भंडवाडा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 8वीं तक के 250 छात्र-छात्राअाें काे जर्सियां बांटी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी उमरैण जगदीश प्रसाद जाटव तथा अध्यक्षता प्रधानाचार्य मेहताब सिंह चाैधरी ने की। इस दौरान गिरीश त्यागी, भामाशाह जगदीश प्रसाद, एसएमसी अध्यक्ष रोहिताश कुमार, संजय कुमार सहित विद्यालय स्टाफ व अनेक ग्रामीण मौजूद रहे। व्यवस्था प्रधानाचार्य मेहताब सिंह चाैधरी एवं समस्त अध्यापकों ने संभाली।

रैणी: गांव भजेड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल मे अध्ययनरत सभी 341 बच्चों को पोषाक वितरण कार्यक्रम मुख्य अतिथि राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ विधायक जौहरी लाल मीणा के आतिथ्य मे हुआ कार्यक्रम की अध्यक्षता भजेड़ा सरपंच दीपा अग्रवाल ने की कार्यक्रम के स्कूल के बालक बालिकाओं को गर्म वस्त्र वितरण किये गये। कक्षा 1 से 12 के सभी 341 बालक बालिकाओं के लिए गांव भजेड़ा के भामाशाह शिवराम मीणा एईएन पीडब्लूडी की ओर से गर्म वस्त्र, मंगलराम मीणा मास्टर की ओर से जूते मोजे, सियाशरण जांगिड़ की ओर से टाई, बेल्ट व आई कार्ड दिये। ं कार्यक्रम मे खेल प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधायक जौहरी लाल मीणा, रैणी प्रधान अनिता ओमप्रकाश सैनी, एसीबीईओ अशोक शर्मा, प्रधानाचार्य फूलचंद यादव, दिलीप मीणा, रैणी ब्लाक अध्यक्ष विजय हलवाई, लखनलाल मीणा, शिवचरण शर्मा, पूरणसिंह मीणा आदि मौजूद रहे।

किशनगढ़बास: गांव मनोठडी के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में 136 बालिकाओं को स्कूल की शिक्षिका ने ही स्वेटर वितरित किए। प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने बताया कि विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका प्रियंका यादव ने 136 बालक-बालिकाओं को गर्म स्वेटर वितरित किए। इस अवसर पर गांव के गणमान्य लोग, विद्यालय स्टॉफ, देवीदत्त अटल सहित स्कूल स्टॉफ व बालिकाएं मौजूद थी।

रैणी. स्कूल में बच्चों को गर्म वस्त्र वितरित करते विधायक व अन्य।

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