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SunnyDecember 10, 2018
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नौकरियों और किसानों के बकाये के मुद्दे पर आज फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार किसानों को ‘बोझ’ समझती है. राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार में देश की हर संस्था पर हमला किया जा रहा है. इसके अलावा राहुल गांधी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा हिंदी अखबार ‘नवजीवन’ को फिर से शुरू करने की भी घोषणा की.

पीटीआई के मुताबिक इस मौके राहुल गांधी ने कहा, ‘मुख्य मुद्दे नौकरियां और किसानों का बकाया है. देश में रोष बढ़ता जा रहा है. चाहे 21वीं सदी हो या 22वीं सदी, यह देश किसानों के बगैर आगे नहीं बढ़ सकता. खाद्य सुरक्षा और किसानों के भविष्य की सुरक्षा किए बगैर देश आगे नहीं बढ़ सकता, यह शत प्रतिशत स्पष्ट है.’ कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, ‘नौकरियों और किसानों के लिए कांग्रेस की राज्य सरकारों को काम करने होगा, और जब राष्ट्रीय स्तर पर हमारी सरकार बनेगी तब 21वीं सदी की रणनीति के अनुसार नए तरीके से काम करना होगा. हम यह आसानी से कर सकते हैं, क्योंकि हम भारत की जनता की आवाज सुनते हैं.’

राहुल ने कहा, ‘कांग्रेस संस्थाओं की रक्षा करने के लिए लड़ रही है और हम जीतेंगे. हम चुनावों में भाजपा को हराएंगे और उसे उसकी जगह दिखा देंगे. लेकिन हमें आगे बढ़ना होगा. इन दोनों मुद्दों (रोजगार और किसान) को हल करना होगा.’

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SunnyDecember 10, 2018
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NCR is hiring 204 Apprentice Posts &nbsp | &nbspPhoto Credit:&nbspTimes Now

Railway Jobs Update 2018: North Central Railway (NCR) has invited applications to fill up 204 Apprentice posts. Candidates can apply for the position through the Apprentice site at apprenticeship.gov.in. The last date to apply for the position is till December 31, 2018. The position was advertised in employment news of this week.

North Central Railway Apprentice Jobs Vacancy Details

  • Fitter: 94 Posts
  • Welder (Gas& Electric): 52 Posts
  • Mechanic Machine & Tool Maintenance: 14 Posts
  • Machinist: 12 Posts
  • Painter: 17 Posts
  • Electrician: 12 Posts
  • Programming and System Administration Assistant (COPA): 03 Posts

North Central Railway Apprentice Jobs Eligibility Criteria

Educational Qualification

The candidate must have passed 10th class examination or its equivalent (under 10+2 system) with 50% marks with ITI pass certificate in relevant trade from a recognized Industrial Training Institute affiliated to NCVT.

Age Limit

Candidate should be between 15 to 24 years of age.

Other Details

Candidates will have to pay Rs 100/- as application fee. Candidates after filling up the application form can send the application fee to Recruitment Section, Personnel Branch, Office of the Chief Workshop Manager, Wagon Repair Workshop, North Central Railway, Jhansi (Uttar Pradesh), Pin- 284003. More information can be collected from official notification available here.

 


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SunnyDecember 10, 2018
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  • 30 नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 393.72 अरब डॉलर रहा
  • देश में स्वर्ण भंडार 15.18 करोड़ डॉलर बढ़कर 21.15 अरब डॉलर हो गया

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 12:04 PM IST

मुंबई. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 30 नवंबर को समाप्त सप्ताह में 93.28 करोड़ डॉलर बढ़कर सात सप्ताह के उच्चतम स्तर 393.72 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इससे पहले 23 नवंबर को समाप्त सप्ताह में यह 79.50 करोड़ डॉलर घटकर 392.79 अरब डॉलर रहा था।

रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 78.79 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 368.49 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार भी 15.18 करोड़ डॉलर बढ़कर 21.15 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास आरक्षित निधि 44 लाख डॉलर घटकर 2.63 अरब डॉलर और विशेष आहरण अधिकार 25 लाख डॉलर घटकर 1.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

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SunnyDecember 10, 2018
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हाइलाइट्स

  • निवेशक व्यवस्था में बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते, इसलिए एग्जिट पोल के नतीजों से उनमें घबराहट है
  • हुवावे की सीएफओ की गिरफ्तारी पर चीन-अमेरिका के बीच बढ़ते टेंशन का असर भी निवेशकों पर देखा जा रहा है
  • अमेरिका में अनुमान से कमजोर जॉब डेटा आने के कारण वहां के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई
नवीन कुमार पाण्डेय, नई दिल्ली

सोमवार को शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। सेंसेक्स 468.59 अंक यानी 1.31% और निफ्टी 185 अंक यानी 1.73% कमजोर होकर खुला और देखते-ही-देखते गिरावट का दायरा बढ़ता चला गया। 9:48 बजे तक सेंसेक्स के सभी 31 और निफ्टी के सभी 50 शेयर लाल निशान में चले गए। हालत ऐसी रही कि 10:38 बजे तक शेयर बाजार में बिकवाली का ऐसा जोर पकड़ा कि सेंसेक्स 609.58 अंक (1.71%) टूटकर 35,063.67 और निफ्टी 187.50 अंक (1.75%) की कमजोरी के साथ 10,506.20 पर आ गया। आखिर, शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट के क्या कारण हैं? आइए जानते हैं बाजार में मचे हाहाकार के पांच प्रमुख कारण…


एग्जिट पोल में बीजेपी को झटका


शुक्रवार को आए एग्जिट पोल में कहा गया है कि राजस्थान में बीजेपी के हाथ से सत्ता छिन सकती है और मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में उसका कांग्रेस के साथ करीबी मुकाबला है। इन तीनों के साथ तेलंगाना और मिजोरम में हुए चुनाव के वोटों की गिनती मंगलवार को होगी। पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे शुक्रवार को आएंगे। इन्हें 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है।

तेल उत्पादन में कटौती का ऐलान

कच्चा तेल निर्यात करने वाले 14 बड़े देशों के समूह ओपेक और 10 अन्य तेल उत्पादक देशों ने कच्चे तेल की गिरती कीमतों को थामने के मकसद से तेल उत्पादन में 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कटौती का फैसला लिया है। 6 दिसंबर की महाबैठक में आए इस फैसले को मोदी सरकार को 2019 के लोकसभा चुनाव में झटके के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार के सामने इस संकट से उबरने की चुनौती होगी। दरअसल, भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल आयातक देश है, जो कि अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है।

हुवावे सीएफओ की गिरफ्तारी

चीनी स्मार्ट फोन कंपनी हुवावे के संस्थापक की बेटी और कंपीन की सीएफओ मेन वांगझू की कनाडा में गिरफ्तारी और अमेरिका के उसके प्रत्यर्पण के प्रयासों से चीन के साथ उसका जारी ट्रेड वॉर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। चीन लगातार वांगझू को निर्दोष बताकर उसकी रिहाई की मांग कर रहा है। उसने रविवार को अमेरिका के राजदूत को तलब किया और मांग की कि अमेरिका अपने प्रत्यर्पण अनुरोध को वापस ले। गौरतलब है कि अमेरिका अपने निर्यात नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उसके प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुटा है।

अमेरिका का कमजोर जॉब डेटा

चीन के साथ ट्रेड टेंशन बढ़ने और शुक्रवार को कमजोर जॉब रिपोर्ट के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई थी। शुक्रवार को अमेरिका में नवंबर महीने का जॉब डेटा जारी हुआ जो अनुमानों से कमजोर रहा है। वहां पिछले महीने में खेती से इतर पेरोल पर 1 लाख 55 हजार नई नौकरियां पैदा हुईं जो 2 लाख के अनुमानित आंकड़े से कम है। इसके अलावा, इस दौरान मजदूरी की वृद्धि भी अुनमान से कम रही। हालांकि, सालाना आधार पर मजदूरी में वृद्धि करीब एक दशक के सर्वोच्च स्तर पर रहा है। बहरहाल, कमजोर जॉब डेटा के कारण अमेरिकी शेयर मार्केट में गिरावट देखी गई जिसका असर अन्य बाजारों पर भी पड़ा। सोमवार को यूरो और येन के मुकाबले डॉलर आधा प्रतिशत टूट गया।

कृषि क्षेत्र का संकट

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी नोमुरा का कहना है कि अगर मंगलवार को आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के परिणामों में बीजेपी का प्रदर्शन खराब रहता है तो इसका मतलब यह होगा कि कृषि क्षेत्र गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। उसने कहा कि इन तीन राज्यों में ज्यादातर आबादी कृषि क्षेत्र पर ही आश्रित है। नोमुरा ने यह भी कहा कि बीजेपी की हार से विपक्षी दलों के बीच लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की कोशिशें तेज हो सकती हैं। वहीं, फॉरन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने दिसंबर महीने के पांच सेशन में अब तक 1,000 करोड़ रुपये बाजार से निकाले हैं।

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SunnyDecember 10, 2018
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Publish Date:Mon, 10 Dec 2018 08:24 AM (IST)

संवाद सहयोगी, चंबा : सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवता में सुधार लाने के लिए अब शिक्षा विभाग ब्लॉक स्तर पर केंद्रीय मुख्य अध्यापक (सीएचटी) के साथ बैठक करेगा। ताकि ब्लॉक स्तर पर स्कूलों में कमियों को पूरा किया जाए। अब जिला स्तर की बजाय चंबा में ब्लॉक स्तर पर सीएचटी की बैठक का आयोजन किया जाएगा। इन सभी बैठकों की अध्यक्षता प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक व जिला शिक्षा उप अधिकारी करेंगे, ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारा जा सके।

हाल ही में चंबा के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामलों के बाद शिक्षा विभाग ने ब्लॉक स्तर पर बैठक करवाने का निर्णय लिया है। इस दौरान स्कूल में पढ़ाई से लेकर अन्य गतिविधि के लिए सिर्फ सीएचटी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। स्कूल में अगर कोई शिक्षक छुट्टी या शिक्षा विभाग के किसी कार्य के लिए बाहर जाता है तो उसका सारा रिकॉर्ड स्कूल में मौजद होना अनिवार्य है।

शिक्षा विभाग को कुछ दिन से स्कूलों में शिक्षकों के गायब होने की सूचना मिल रही है। इस पर कुछ स्कूलों में तो शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने कार्रवाई की है, लेकिन जिला के सभी स्कूलों में न पहुंच पाने के कारण सीएचटी को जिम्मेदारी दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने जिला के सभी ब्लॉकों की सूची को तैयार किया है जहां उच्च अधिकारियों की अध्यक्षता में बैठक की जाएगी। बैठक के दौरान नदारद रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। स्कूल में अगर कोई शिक्षक नदारद पाया जाता है तो उक्त शिक्षक के अलावा सीएचटी पर गाज गिरना तय है। जिला के कुछ स्कूलों में कई बार शिक्षक सीएचटी की अनुमति के बिना गायब रहते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं, अन्य कई प्रकार की जिम्मेदारी सीएचटी को दी जाती है, लेकिन सीएचटी उसमें कोताही बरतते हैं। इसके कारण अब जिलास्तरीय बैठक को ब्लॉक स्तर पर करवाने का निर्णय लिया गया है।

फौजा ¨सह, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक चंबा।

Posted By: Jagran

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SunnyDecember 10, 2018
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नई दिल्ली

कई बड़े और हाई क्वॉलिटी इनवेस्टर्स भारत में निवेश करने को लेकर गंभीर हैं। वे निवेश के लिए आकर्षक वैल्यूएशन की तलाश में हैं।आईआईएफएल ग्रुप के चेयरमैन निर्मल जैन ने ईटी नाउ के अजय शर्मा को दिए इंटरव्यू में यह जानकारी दी। पेश हैं इसके खास अंश:


क्या बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रहेगा या मार्केट में करेक्शन का दौर खत्म हो गया है?

भारतीय शेयर बाजार 10 महीने से मंदी के दौर में है और इस बीच काफी उतार-चढ़ाव हुआ है। 2014 में नई सरकार के आने, इकनॉमिक रिफॉर्म्स और इकनॉमिक आउटलुक बेहतर होने से इस दौरान बाजार से काफी अच्छा रिटर्न मिला। मुझे लगता है कि अगले एक या दो क्वॉर्टर्स में मार्केट में गिरावट रुक जाएगी। हमें इसकी बहुत परवाह नहीं करनी चाहिए। अगर आप लॉन्ग टर्म इनवेस्टर हैं तो अगले तीन से पांच साल के बारे में सोचिए। मैं निजी तौर पर भारतीय शेयर बाजार और इकनॉमी पर बहुत बुलिश हूं।

हालिया करेक्शन से शेयरों की कीमत आकर्षक हो गई है। इसलिए अगर पहले महंगे वैल्यूएशन की वजह से कोई लॉन्ग टर्म इनवेस्टर इक्विटी में वेटेज नहीं बढ़ा पा रहा था तो आज उसके पास इसका मौका है। ग्लोबल एनवायरमेंट और लोकल पॉलिटिक्स जैसे फैक्टर्स का असर हद से हद कुछ तिमाही तक बाजार पर रहता है। अगर आप लॉन्ग टर्म इनवेस्टर हैं और तीन से पांच साल या इससे अधिक समय के लिए पैसा लगाना चाहते हैं तो आपके लिए यह ग्रेट मार्केट है।

आप पूरे फाइनेंशियल सेगमेंट को किस तरह देख रहे हैं? क्या सरकारी बैंकों में निवेश किया जा सकता है?

हम अभी एक दिलचस्प दौर से गुजर रहे हैं। फाइनेंशियल सेक्टर का परफॉर्मेंस तभी अच्छा होगा, जब लोन और इंश्योरेंस सेक्टर की ग्रोथ तेज होगी। सरकारी बैंकों को अभी फंडिंग का इंतजार है। उन्हें बैड लोन के दुष्चक्र से भी निकलना है। सरकार ने उनकी कुछ मदद करने की कोशिश की है, लेकिन कुछ बुरे डिवेलपमेंट्स हो गए। यहां तक कि 2 लाख करोड़ की भारी-भरकम रकम लगाने का भी शॉर्ट टर्म में असर नहीं दिखा। अगर मोदी सरकार फिर से केंद्र की सत्ता में आती है तो हम उम्मीद करते हैं कि सरकारी बैंकों को सिलसिलेवार ढंग से रिवाइव किया जाएगा।

अभी लोन में जो बढ़ोतरी हो रही है, उसमें एनबीएफसी की एक तिहाई हिस्सेदारी है। यह छोटा सेक्टर नहीं है और इकनॉमिक ग्रोथ में इसकी भूमिका बढ़ी है। एनबीएफसी सेक्टर का वजूद बना रहेगा। हालांकि, हालिया रेगुलेटरी क्राइसिस का इस्तेमाल इसे बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए। कुछ एनबीएफसी फंडिंग कॉस्ट मैनेज करने या लिक्विडिटी (कैश) को लेकर बहुत ऐहतियात नहीं बरत रही थीं। उनकी नींद अब खुल गई है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में संतुलन बनेगा। एनबीएफसी सेक्टर से जब इस संकट की धुंध हटेगी तो यह भी साफ हो जाएगा कि इनमें से कौन मजबूत और कौन कमजोर है। प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का प्रदर्शन कमोबेश अच्छा बना हुआ है।


कैपिटल गुड्स सेक्टर के बारे में आपकी क्या राय है?

इसमें एमएनसी, लोकल कंपनियां और कई सब-सेगमेंट और इंडस्ट्री हैं। इनमें से हरेक पर अलग फैक्टर्स का असर पड़ा है। कुछ को इंपोर्ट बढ़ने से चुनौती मिल रही है तो कुछ को लोकल डिमांड और सप्लाई को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस सेक्टर के बारे में कोई जेनेरिक स्टेटमेंट देना मुश्किल है। कैपिटल गुड्स सेक्टर में अच्छी कंपनियां और बढ़िया स्टॉक्स हैं।


ग्लोबल निवेशकों की भारत के बारे में अभी क्या राय है?

ग्लोबल फंड्स सावधानी बरत रहे हैं। जब भी अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, विदेशी फंड्स इमर्जिंग मार्केट्स से पैसे निकालकर सुरक्षित अमेरिकी एसेट्स में उसे लगाते हैं। ग्लोबल इनवेस्टर्स को यह देखना है कि चीन, अमेरिका में क्या हो रहा है। इसके साथ निवेश करते वक्त उन्हें भारतीय शेयर बाजार को भी देखना होगा। ज्यादातर ग्लोबल इनवेस्टर्स भारत में डिवेलपमेंट पर करीबी नजर रखे हुए हैं, लेकिन क्वॉलिटी इनवेस्टर्स भारत को लेकर बहुत गंभीर हैं।

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SunnyDecember 10, 2018
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Publish Date:Mon, 10 Dec 2018 05:00 AM (IST)

[ गिरीश्वर मिश्र ]: शिक्षा की संस्था सभ्य समाज की एक जरूरी संस्था का स्थान ले चुकी है। अत: शिक्षा किसलिए हो या उसका क्या उद्देश्य हो, यह प्रश्न समाज और व्यक्ति के जीवन के संदर्भ में उठना स्वाभाविक है। देश में आजकल यह बात आम होने लगी है कि हमारी शिक्षा अपने परिवेश-संस्कृति से कटती जा रही है। जिस समाज या संस्कृति से शिक्षा का पोषण होता है और जिसके लिए वह प्रासंगिक होनी चाहिए वह एक दु:स्वप्न सरीखी होती जा रही है। इन सबके बीच जो पढ़-लिख जाता है वह मानो एक बड़ी यांत्रिक व्यवस्था के उपकरण के रूप में ढल जाता है। प्रतिस्पर्धा की दुनिया में उसका उद्देश्य सफलता, उपलब्धि और भौतिक प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ने तक सीमित हो रहा है। इस तरह यह शिक्षार्थी के मानस को संकुचित बनाने का काम कर रही है। एक ओर तो विश्वस्तरीय शिक्षा देने का संकल्प लिया जाता है तो दूसरी ओर सर्वत्र एक ही ढर्रे पर पढ़ाई करने की कवायद भी जारी है।

आज प्रचलित शिक्षा मनुष्य को स्वचालित रोबोट बनाने पर जोर देती है। इस शिक्षा से निकलने वाले होनहार युवाओं की स्थिति विचित्र हो रही है। जिस सीढ़ी के सहारे चढ़कर वे ऊपर पहुंचते हैं उस सीढ़ी से बेझिझक अलग हो जाते हैं। वे उस भूमि से अलग हो जाते हैं जिसने जीवन दिया। यह शिक्षा सांस्कृतिक विचार, विश्वास, सहयोग, सहनशीलता आदि की कीमत पर दी जा रही है। लिहाजा उनमें सामाजिक सृजनात्मकता और निजी लाभ के आगे किसी तरह की सामाजिक सकारात्मकता विरल होती जा रही है।

यदि हम स्कूली शिक्षा को लें जो शिक्षा का प्रवेश द्वार है तो पाते हैं कि भारत में पहले कई तरह के विद्यालय चलते रहे हैं। यहां प्राचीन काल में गुरुकुल, पाठशाला और मदरसा मौजूद थे। यहां आने के बाद अंग्रेज अधिकारियों ने प्रारंभिक शिक्षा के संबंध में जो रपटें लिखीं वे आश्चर्यजनक रूप से इसकी अच्छी स्थिति प्रदर्शित करती हैं। उनकी नजरों में तब यहां की शिक्षा संस्कृति से जुड़ी थी। बाद के दिनों में कोठारी शिक्षा आयोग द्वारा संस्कृति पर ध्यान देने की बात की गई थी। उसने इस बात पर जोर दिया था कि कार्यक्षेत्र, शिक्षा, घर, परिवार, व्यक्ति और समाज के बीच कोई द्वंद्व नहीं होना चाहिए।

महात्मा गांधी ने भी ‘नई तालीम’ का विचार दिया था जिसमें शरीर, हाथ, बुद्धि सबका संतुलन होता है और इसके लिए उन्होंने स्थानीय संसाधन के उपयोग का सुझाव दिया था। इसमें निरी बौद्धिकता पर अतिरिक्त बल न देकर शरीर, मन, आत्मा सब पर ध्यान देने की बात कही गई। इसके अंतर्गत स्वावलंबन, देशभक्ति, आत्म-संपन्नता और संयम जैसे जीवन मूल्यों पर बल देना प्रस्तावित है। प्राथमिक शिक्षा से मोहभंग के साथ कई विकल्पों पर काम शुरू हुआ। गुरुदेव रवींद्रनाथ ने शांतिनिकेतन के पास श्रीनिकेतन बनाया था। रुक्मिणी देवी अरुंडेल, एनी बेसेंट और जे कृष्णमूर्ति ने भी अलग-अलग प्रयास किए। इन सब प्रयासों में जीवन कौशल और कला पर बल दिया गया ताकि छात्रों को आस-पास की दुनिया से जुड़ने का भी अवसर मिले। उनका मानना था कि समग्र व्यक्तित्व के विकास के लिए प्राचीन और नए हुनर भी आने चाहिए जो संस्कृति विशिष्ट होते हैं।

शिक्षा के मूल्य की अभिव्यक्ति मूर्त और अमूर्त, दोनों माध्यमों से होती है। समाज और समुदाय व्यक्ति से ऊपर होते हैं। भारत की समृद्ध वाचिक परंपरा बड़ी प्राचीन है। आज जो शिक्षा (मस्तिष्क!) विदेश से लाकर देश में प्रत्यारोपित की जा रही है वह एक हद तक भारतीय मूल्यों को जड़ से विस्थापित कर रही है। आर्थिक संपन्नता से सांस्कृतिक विपन्नता की भरपाई नहीं हो सकती। नैतिक मूल्यों का अभाव, तनाव, द्वंद्व, हिंसा और असहनशीलता तो किसी भी तरह ग्राह्य नहीं हैैं। मनुष्यता के विकास के लिए संस्कृति आधारित शिक्षा के अतिरिक्त और कोई साधन उपलब्ध नहीं है।

भारतीय संस्कृति की दृष्टि में अच्छी दुनिया वह है जिसमें बहुलता, पारस्परिकता और सह अस्तित्व हों, पर हम इसे छोड़कर अंग्रेजी पर अधिकार करने चले और उसी ने हम पर अधिकार जमा लिया। सांस्कृतिक क्षति के चलते हम बोलने और सोचने को लेकर विभाजित व्यक्तित्व वाले होते जा रहे हैं। अर्थात बाहर से ग्रहण किया या लिया, पर अंदर जो मौजूद है वह गया भी नहीं। अब द्वंद्व और दुविधा के साथ किंकर्तव्यविमूढ़ हो रहे हैं। औपनिवेशिक शक्तियों की भाषा हमारा माध्यम हो गई है। धर्म, भाषा, पशु, पक्षी, प्रतिमा, पुरातत्व, कला, राजनीति और अर्थशास्त्र आदि के क्षेत्रों में भारतीय अपनी शिक्षा से अपरिचित होते जा रहे हैं।

हमें अपनी संस्कृति की भी चिंता नहीं है। विद्यालयों में प्रक्रिया के स्तर पर अध्यापक और सहपाठी के साथ सहयोग कैसे स्थापित किया जाए यह आज की कठिन चुनौती बन गई है। आज शिक्षा एक खास तरह का व्यापार बनती जा रही है। विद्यालयों के साथ समाज का रिश्ता नहीं बन रहा है और जन भागीदारी बहुत सीमित हो गई है। आधुनिकता और यहां की प्राचीन ज्ञान परंपरा के बीच आज तक सामंजस्य नहीं बन पाया है। सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति तो हो रही है, पर इन सबके बीच इंसान खो गया है।

आज बुद्ध, महावीर, ईसा, महात्मा गांधी के विचार कहां हैं? हम किधर जा रहे हैं? आज यह विचारणीय सवाल है। हमें भौतिकता के मिथक तोड़ने होंगे। मशीनीकरण की होड़ से बचना होगा। प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली में स्थित सामाजिक चेतना, ब्रह्मांडीय चेतना ही आधुनिक आत्मकेंद्रित उपभोक्तावाद की समस्या का समाधान कर सकती है। अहं का प्रकृति पर विजय की जगह प्रकृति और समाज के बीच संबंध स्थापित करने से ही स्वराज, स्वदेशी और सर्वोदय के विचार जीवित होंगे। शांति की संस्कृति का विकास नैतिक अनुशासन से ही आ सकेगा। और तभी बच्चे में श्रेष्ठ का आविष्कार करने की ललक और स्वावलंबी जीवन व्यतीत करने की इच्छा पनप सकेगी। तभी पूर्ण सामाजिक विकास और धार्मिक समानता भी आ पाएगी।

दरअसल विचारों का विकास और उनकी समाज में उपस्थिति के कई आधार होते हैं। प्राय: माना जाता है कि आधुनिकता का विचार पश्चिम से भारत की ओर आगे बढ़ा। यहां की अपनी आधुनिकता को औपनिवेशिक आधुनिकता ने नकारात्मक ढंग से प्रभावित किया। यहां एक तरह की संकर या मिश्रित आधुनिकता का आरंभ हुआ। यहां की आधुनिकता पश्चिमी आधुनिकता से जटिल रूप में जुड़ी और फिर शिक्षा का सांस्कृतिक विमर्श भी बाधित हुआ। जाहिर है शिक्षा का प्रयोजन भविष्य के लिए तैयारी और नियोजन से जुड़ा है। इसलिए इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। ऐसे में जरूरी है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में समय के साथ आ गई इन खामियों को दूर किया जाए।

[ लेखक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति हैैं ]

Posted By: Bhupendra Singh

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SunnyDecember 10, 2018
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Publish Date:Mon, 10 Dec 2018 09:00 AM (IST)

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : बागबेड़ा वृहत जलापूर्ति योजना पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इसके वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए गिदीझोपड़ी में ली गई जमीन विवाद के घेरे में है। नाइजीरिया से आ रही विश्व बैंक की टीम इस बात की पड़ताल करेगी कि योजना के क्रियांवयन से स्थानीय ग्रामीणों को क्या नुकसान हुआ है। अगर टीम ने विश्व बैंक के निदेशक मंडल को मामले की ऋणात्मक रिपोर्ट पेश की तो व‌र्ल्ड बैंक बागबेड़ा जलापूर्ति योजना की वित्तीय सहायता वापस ले सकता है। ऐसा हुआ तो बागबेड़ा जलापूर्ति योजना संकट में आ जाएगी।

व‌र्ल्ड बैंक की अधिकारी इमराना जलाल के नेतृत्व में टीम के आने की जानकारी मिलने के बाद सरकार की नींद उड़ी हुई है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी पंचायत के मुखिया व पंचायत समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर जांच का सामना करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। योजना के तहत गिदी झोपड़ी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का मामला तूल पकड़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये जिला संविधान की पांचवीं अनुसूची में है। इसलिए बिना ग्राम प्रधान की अनुमति के किसी भी योजना के लिए जमीन नहीं ली जा सकती। टीम इसकी जांच करेगी। टीम में जान माटसन, आपरेशंस आफिसर तमारा मिल्सटजैन और रिसर्च असिस्टेंट रुपेस दलाई भी हैं। टीम के अधिकारी 13 दिसंबर से 18 दिसंबर तक प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। 15 दिसंबर को दोपहर बाद विश्व बैंक के अधिकारी रांची से आकर जमशेदपुर में गिदी झोपड़ी के ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी शिकायत समझेंगे। 16 दिसंबर को पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक है। 17 दिसंबर को सुबह नौ बजे से साढ़े 10 बजे तक उपायुक्त, अंचल अधिकारी, एडीसी और जिला कल्याण अधिकारी के साथ बैठक होगी। इसमें गिदीझोपड़ी में भूअर्जन की प्रक्रिया का मामला उठेगा। इसी दिन 11 बजे से एक बजे तक जिला योजना शाखा के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। 18 दिसंबर को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक रांची में झारखंड स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के साथ विश्व बैंक की बैठक होगी। इसके बाद साढ़े 12 बजे से दो बजे तक पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव और प्रोजेक्ट डायरेक्टर के साथ विश्व बैंक के अधिकारी बैठक करेंगे। ढाई बजे से साढ़े तीन बजे तक समाज कल्याण विभाग के सचिव के साथ बैठक होगी।

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कैसे बना 135 एलपीसीडी का प्लांट

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडब्ल्यूएस) ने बागबेड़ा जलापूर्ति योजना में विश्व बैंक के नियम का उल्लंघन किया है। विश्व बैंक का नियम है कि 135 लीटर पर कैपिटा पर डे (एलपीसीडी) क्षमता की जलापूर्ति योजना सीवरेज सिस्टम वाले शहर में ही स्थापित होगी। जिस कस्बे में सीवरेज सिस्टम नहीं है, वहां 70 लीटर पर कैपिटा पर डे क्षमता से अधिक की जलापूर्ति योजना स्थापित नहीं की जा सकती। बागबेड़ा में सीवरेज सिस्टम नहीं है। फिर भी विश्व बैंक को अंधेरे में रखते हुए 135 एलपीसीडी क्षमता की जलापूर्ति योजना स्थापित की जा रही है।

नाइजीरिया से विश्व बैंक की टीम आ रही है। इसे लेकर हमारी तैयारी चल रही है। जांच टीम के सामने जमीन अर्जन के दस्तावेज रखे जाएंगे।

सदानंद मंडल, अधीक्षण अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता विभाग

Posted By: Jagran

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SunnyDecember 10, 2018
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Publish Date:Mon, 10 Dec 2018 08:00 AM (IST)

पटना सिटी। बिहार की प्रारंभिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार करने तथा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। सभी 38 जिलों के लगभग 72000 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों को मोबाइल से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए एसएससीए यानी स्कूल स्कोर कार्ड मोबाइल एप्लीकेशन डेवलप किया गया है। इस मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से विद्यालयों की स्कूल मैनेजमेंट काम्युनिटी को जोड़ा जाएगा। हैदराबाद की सीएफबीटी द्वारा तैयार यह ऐप पटना सिटी अनुमंडल क्षेत्र के महेन्द्रू स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद को सुपुर्द हो चुका है। इसी वित्तीय वर्ष में इस ऐप का इस्तेमाल सिखाने के लिए मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू होगा। अगले शैक्षणिक सत्र से यह योजना स्कूलों में काम करने लगेगी।

एससीइआरटी की संयुक्त निदेशक मंजु लाल ने बताया कि इस ऐप से जुड़ने वाले सदस्यों को पहले प्रशिक्षित किया जाएगा। यह संबंधित स्कूल की शिक्षा एवं व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्ट ऐप में दर्ज करेंगे। राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक स्कूलों एवं विद्यालयों के लिए चलाई जाने वाली सभी तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन की जुड़ी रिपोर्ट भी दे सकेंगे। ऑन लाइन प्राप्त होने वाली इस रिपोर्ट की मॉनीट¨रग शिक्षा विभाग में पदाधिकारियों द्वारा की जाएगी। मंजू लाल ने बताया कि स्कूल मैनेजमेंट काम्युनिटी द्वारा प्राप्त स्कूल से संबंधित फीडबैक की समीक्षा उपरांत सरकारी स्तर पर इसमें बदलाव व सुधार की दिशा में निर्णय लिये जाने की प्रक्रिया होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रारंभिक शिक्षा को आदर्श स्थिति में लाने के लिए लगातार प्रयत्नशील है।

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– इन 17 सदस्यों को जोड़ा जाएगा मोबाइल ऐप से

एसएससीए को अंतिम रूप देने वाली टीम की अगुवाई कर रहे एससीइआरटी के आइसीपी एण्ड ऑडिया विजुअल विभाग में रीडर गोपीकांत चौधरी ने बताया कि विद्यालय शिक्षा समिति यानी स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष ग्राम पंचायत एवं नगर निकाय के संबंधित वार्ड के वार्ड सदस्य, विद्यालय के प्रधानाध्यापक, छात्र-छात्राओं की नौ चयनित माता सदस्य, जीविका के ग्राम संगठन एवंमहिला समाख्या के महिला समूह की दो अध्यक्ष सदस्य, दो चयनित छात्र प्रतिनिधि, विद्यालय के एक वरीय सदस्य, स्कूल के लिए भूदान करने वाले या विद्यालय निधि में दस लाख रुपये से अधिक रुपये दान करने वाले या उनके द्वारा नामित उनके परिवार के एक व्यक्ति यानी कुल 17 व्यक्ति इससे जुड़ेंगे।

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– निदेशक बोले- प्रत्येक जिले में तैयार होंगे 40 मास्टर ट्रेनर

एससीइआरटी के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ¨सह ने बताया कि एसएससीए के क्रियान्वयन के लिए प्रथम चरण में दस जिलों का चयन किया गया है। यहां के 7200 प्रारंभिक स्कूलों के लिए स्कूल मैनेजमेंट काम्युनिटी के सदस्यों का समूह तैयार कर प्रत्येक जिले से चालीस सदस्यों का नाम प्रेषित करने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखा गया है। चालू वित्तीय वर्ष में ही चयनित चालीस-चालीस सदस्यों को महेन्द्रू स्थित एससीइआरटी में मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। यह अपने जिले में जाकर अन्य स्कूल मैनेजमेंट काम्युनिटी के सदस्यों को ऐप का इस्तेमाल करने तथा इसे शिक्षा में सुधार के लिए उपयोगी बनाने का तरीका बताएंगे। निदेशक ने बताया कि प्रशिक्षण का क्रम अनवरत जारी रहेगा। सभी 38 जिलों के 72 हजार स्कूलों को इससे जोड़ा जाएगा। एसएससीए ऐप को प्ले स्टोर से डाउन लोड किया जा सकता है। इस योजना का उद्देश्य है जन भागीदारी से प्रारंभिक शिक्षा का गुणात्मक विकास करना है।

Posted By: Jagran

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SunnyDecember 9, 2018
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नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लागू नोटबंदी के दो साल हो चुके हैं. लेकिन मोदी सरकार को उस फैसले की आंच आज झेलनी पड़ रही है. अब नोटबंदी के फैसले पर करीब दो साल बाद प्रमुख बैंकर उदय कोटक ने अपनी राय रखी है. कोटक ने कहा है कि ‘कुछ सीधी सी बातों’ पर ध्यान दे दिया गया होता तो बड़े मूल्य के नोटों पर पाबंदी के निर्णय का परिणाम ‘काफी अच्छा होता.’ इसी संबंध में उन्होंने 2000 का नया नोट चलन में लाने के पर सवाल उठाया लेकिन कहा कि वित्तीय क्षेत्र के लिए यह एक ‘बड़ा वरदान’ रही.

देश के निजी क्षेत्र के चौथे सबसे बड़े बैंक कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कोटक ने कहा कि छोटी फर्में इस समय मुश्किलों का सामना कर रही हैं. हालांकि, उन्होंने सरकार द्वारा इस क्षेत्र पर ध्यान देने का स्वागत किया.

बेहतर तरीके से योजना बनाई जानी चाहिए थी:

नोटबंदी पर उन्होंने कहा कि यदि इसकी बेहतर तरीके से योजना बनाई जाती तो इसका नतीजा कुछ और होता. कोटक ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सु्ब्रमण्यम की पुस्तक के विमोचन के मौके पर सप्ताहांत कहा, ‘मुझे लगता है कि यदि हम कुछ चीजों पर सोचा होता, तो इसका नतीजा उल्लेखनीय रूप से बेहतर होता. यदि आप 500 और 1,000 का नोट बंद कर रहे हैं, तो 2,000 का नोट शुरू करने की क्या जरूरत थी?’

कोटक ने कहा कि क्रियान्वयन रणनीति के तहत यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि सही मूल्य के नोट बड़ी संख्या में उपलब्ध कराए जाते. उन्होंने कहा कि यदि ये सब चीजें की गई होतीं तो आज हम कुछ अलग तरीके से बात कर रहे होते. हालांकि, कोटक ने दावा किया कि नोटबंदी वित्तीय क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई.

उन्होंने कहा कि वित्तीय बचत में वृद्धि अविश्वसनीय है. इससे जोखिम प्रबंधन की चुनौती भी खड़ी हुई है.

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