गोलमाल वाले ट्रेड पर स्टॉक एक्सचेंजों ने चलाया चाबुक – नवभारत टाइम्स

NSE और BSE ने ब्रोकरों को भेजे नोटिस में कहा, ‘असामान्य’ ट्रेड पर उसकी वैल्यू के बराबर जुर्माना देना होगा

– नोटिस से नाराज ब्रोकरों ने स्टॉक एक्सचेंजों से कहा है कि या तो सर्कुलर वापस लिया जाए या असामान्य ट्रेड की परिभाषा साफ की जाए

– वित्त वर्ष का अंत करीब आने पर कई निवेशक, खासतौर से HNI टैक्स देने से बचने के लिए स्टॉक एक्सचेंज रूट का सहारा लेते हैं

[ राजेश मैस्करेनस | मुंबई ]

स्टॉक एक्सचेंजों ने संदेहास्पद ट्रेड को लेकर चाबुक चलाना शुरू किया है। शक है कि ये ट्रेड टैक्स बचाने के इरादे से उनके प्लेटफॉर्म पर किए गए। कई ब्रोकरों को एक्सचेंजों का नोटिस मिला है जिसमें कहा गया है कि उनके क्लाइंट्स की ओर से किए गए ‘असामान्य ट्रेड’ के लिए वे ट्रेडेड वैल्यू के बराबर जुर्माना दें। ब्रोकरों के संगठनों ने इसका विरोध किया है और वे जुर्माने का निर्देश वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं।

वित्त वर्ष का अंत करीब आने पर कई निवेशक, खासतौर से हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स टैक्स देने से बचने के लिए स्टॉक एक्सचेंज रूट का सहारा लेते हैं। सेबी ने ऐसे ट्रांजैक्शंस पर पहले कार्रवाई की थी, लेकिन पहली बार स्टॉक एक्सचेंजों ने भी ‘असामान्य ट्रेडिंग’ के लिए ब्रोकरों पर जुर्माना लगाना शुरू किया है। ब्रोकर ‘असामान्य ट्रेडिंग’ की परिभाषा साफ न किए जाने से भन्नाए हुए हैं।

13 दिसंबर 2018 को दोनों एक्सचेंजों ने असामान्य या अनुचित ट्रांजैक्शंस पर एक सर्कुलर जारी किया था। उसमें उसने ट्रेडिंग मेंबर्स से कहा था कि वे आर्टिफिशियल वॉल्यूम क्रिएट कर संबंधित इकाइयों के बीच प्रॉफिट या लॉस ट्रांसफर करने के मकसद से क्लाइंट्स की ओर से किए जाने वाले असामान्य ट्रांजैक्शंस से दूर रहें। सर्कुलर में कहा गया कि यह बात एक्सचेंज तय करेगा कि कौन सा ट्रेड असामान्य या अनुचित है। उसमें कहा गया कि असामान्य ट्रेड पर उसकी वैल्यू के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा।

पिछले दो वर्षों में सेबी ने ऐसे कई ब्रोकर्स पर बाजार में उतरने से प्रतिबंध लगाया है, जिन पर यह शक था कि वे स्टॉक ट्रेडिंग से होने वाले कैपिटल गेंस से बचने में क्लाइंट्स की मदद कर रहे थे। ये इकाइयां पेनी स्टॉक्स में ट्रेड करती थीं, जिससे क्लाइंट्स को गैरकानूनी रकम को वैध आमदनी में बदलने में मदद मिलती थी। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स पिछले साल लगाया गया था। उससे पहले ये इकाइयां बिना टैक्स दिए निकल जाती थीं। इसी तरह वे स्टॉक ट्रेड में लॉस दर्ज करती थीं, जिससे उन्हें इन्हें कैपिटल गेंस से ऑफसेट करने में मदद मिलती थी।

सेबी ने एक जांच में पाया था कि बिना किसी ऑपरेशन वाले पेनी स्टॉक्स वाली कंपनियों ने विभिन्न इकाइयों को प्रेफरेंशियल शेयर जारी कर बड़ी मात्रा में पैसा जुटाया। प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट होने के बाद उनके शेयर प्राइस में उछाल आया। इस तरह चढ़ाए गए शेयरों को फिर उन लोगों की फंडिंग वाली कंपनियां बेच देती थीं, जो गैरकानूनी पैसे को वैध बनाना चाहते थे।

बहरहाल ताजा नोटिस से नाराज ब्रोकरों ने स्टॉक एक्सचेंजों से कहा है कि या तो सर्कुलर वापस लिया जाए या असामान्य ट्रेड की परिभाषा साफ की जाए। बीएसई और एनएसई को भेजे गए लेटर में एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया ने कहा है कि असामान्य ट्रेड की परिभाषा साफ किए जाने तक सर्कुलर पर रोक लगाई जाए।

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