भारत में हर साल 81 लाख नौकरियों की दरकार, बढ़ रही बेरोजगारी, सरकारी नौकरियों में करीब 17 लाख पद खाली – Hindustan

देश में नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा गरमा रहा है। केंद्र सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को भी आरक्षण देने का रास्ता साफ करने की तैयारी कर ली है। ऐसे में देश में रोजगार की स्थिति पर नजर डालना लाजमी बनता है। आजादी के बाद से ही बेरोजगारी से निपटना एक मुश्किल चुनौती साबित हो रही है। हाल ही में ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ (सीएमआईई) की रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश में बेरोजगारी की दर 27 महीनों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। विश्व बैंक ने भी कहा है कि बेरोजगारी पर काबू पाने के लिए भारत को हर साल 81 लाख नौकरियां सृजित करने की जरूरत है। 

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कितना रोजगार भारत में 
-39.70 करोड़ दिसंबर, 2018 में भारत में निजी व सरकारी क्षेत्र में नौकरी कर रहे 
-34.6 लाख नई नौकरियां सृजित करने का दावा किया सरकार ने सितंबर, 2017 से फरवरी 2018 के बीच 
-14.30 लाख नौकरियां 2017 में सृजित होने की बात कही सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने 
-70 लाख नई नौकरियां होने की बात कही नीति आयोग ने 2017 में  

हर साल बढ़ रही बेरोजगारी 
-1.86 करोड़ अनुमानित बेरोजगार भारत में 2018 में 
-30,000 बेरोजगारों की संख्या और बढ़ने का अनुमान 2019 में 
-3.5 प्रतिशत रही बेरोजगारी दर पिछले तीन साल से 

तैयार हो रही नौकरी लायक आबादी 
-13.19 लाख नौकरी लायक लोग (15 साल से ज्यादा) हर साल बढ़ रहे देश में 

शिक्षित होने के बावजूद बेरोजगार 
देश में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की बढ़ती संख्या भी चिंता का विषय बनती जा रही है। अजीज प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध के मुताबिक 2011 से 2016 के बीच देश में स्नातक की डिग्रीधारक बेरोजगारी की दर 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 8.4 फीसदी तक पहुंच गई है। 

 संगठित क्षेत्र में रोजगार बहुत ही कम 
-81 फीसदी भारतीय गैर संगठित क्षेत्र में कार्यरत 
-6.5 प्रतिशत कर्मी ही संगठित क्षेत्र के रोजगार से जुड़े 
-0.8 फीसदी घरेलू सेक्टर में काम कर रहे 

सरकारी नौकरी में लाखों पद खाली 
-4,12,752 पद खाली थे केंद्र सरकार में एक मार्च, 2016 तक 
-15,284 पद ग्रुप ए की नौकरियों के लिए खाली 
-26,310 पद ग्रुप बी (राजपत्रित) अधिकारियों के रिक्त 
-49,740 पद ग्रुप बी (गैर राजपत्रित) में खाली पड़े 
-3,21,418 पद ग्रुप सी की भर्तियों के लिए खाली पड़े थे 
-36,33,935 स्वीकृत पदों में से 32,21,183 पदों पर भर्तियां हुईं 

 देशभर में कई विभागों में जरूरत 
शिक्षा 
-10 लाख शिक्षकों (प्राथमिक व माध्यमिक) के पद खाली 

पुलिस
-4.4 लाख सशस्त्र पुलिस की जरूरत पुलिस अनुसंधान व विकास ब्यूरो में 
-90,000 के करीब पुलिसकर्मियों की जरूरत राज्य पुलिस को 

न्यायपालिका
-5,800 पद खाली पड़े हैं विभिन्न अदालतों में 

डाक विभाग 
-54,000 पद खाली थे डाक विभाग में 

स्वास्थ्य सेवा 
-1,50,000 पद खाली देशभर में 
 -( साल 2018 में लोकसभा व राज्यसभा में दिए गए सवालों के आधार पर)

 (अन्य स्रोत : विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, सीएमआईई, वित्त मंत्रालय)

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