नक्सल मोर्चे पर सफलता की इबारत लिख रही फोर्स, इस साल और उम्मीदें – Nai Dunia

Publish Date:Tue, 01 Jan 2019 12:04 PM (IST)

रायपुर। बीता साल नक्सल मोर्चे पर फोर्स के लिए सफलता की बड़ी इबारत लिख गया। अब नए साल में उम्मीद की जा रही है कि माओवाद खत्म होगा और बस्तर समेत समूचे दंडकारण्य में शांति और विकास की ताजा बयार बहने लगेगी। 2018 में फोर्स नक्सलियों की मांद तक जाकर हमले करने में सफल रही। नक्सल नेटवर्क के तीन अहम सदस्यों को पकड़ा गया।

सैकड़ों इनकाउंटर, गिरफ्तारी, सरेंडर हुए। खुद माओवादियों ने माना कि सालभर में उनके 230 साथी मारे गए हैं। जुलाई में बस्तर पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा-खत्म हो रहा माओवाद। हालांकि फोर्स के तमाम प्रयासों के बावजूद नक्सली बीच-बीच में सिर उठाते रहे पर अब नए साल में नई सरकार पहले से ही इस समस्या का स्थायी समाधान करने का फार्मूला तलाश रही है। उम्मीद की जा रही है कि अब माओवाद के अंतिम दिन चल रहे हैं।

2018 में नक्सलियों ने सबसे बड़ी वारदात किस्टारम इलाके में की। 13 मार्च को उन्होंने पालोड़ी कैंप जा रहे सीआरपीएफ की माइन प्रोटेक्टेड गाड़ी भारी विस्फोटक से उड़ा दी। इन घटना में 9 जवान शहीद हो गए थे।

इसी साल 20 मई को उन्होंने दंतेवाड़ा जिले के चोलनार में जवानों की कार उड़ाई थी जिसमें जिला बल के सात जवान शहीद हो गए थे। यह घटना तब हुई जबकि देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह सीआरपीएफ की नई बस्तरिया बटालियन की पासिंग आउट परेड के लिए अंबिकापुर पहुंचे हुए थे।

इस घटना के बाद राजनाथ ने बयान दिया कि नक्सली नेताओं की संपत्ति जब्त की जाएगी। छिटपुट घटनाएं तो रोज ही दर्ज की गईं पर बीते साल राहत की बात यह रही कि फोर्स ने बड़ी संख्या में नक्सलियों को मार गिराने में भी सफलता हासिल की। 24 अप्रैल को बीजापुर से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के जंगलों में फोर्स ने नक्सलियों की मांद में घुसकर हमला किया। इस घटना में 39 नक्सली मारे गए।

इससे पहले चार मार्च को तेलंगाना के ग्रेहाउंड्स ने बीजापुर जिले के पुजारी कांकेर में नक्सलियों को घेरकर हमला किया और 10 को मार गिराया। 6 अगस्त को सुकमा जिले के नुलकातोंग में नक्सली कैंप पर पुलिस ने रेड की और 15 नक्सलियों को मार गिराया। 27 अप्रैल को बीजापुर से सटे तेलंगाना में आठ नक्सली मारे गए। इन सफलताओं से नक्सली लगातार बैकफुट में रहे।

चुनाव में गड़बड़ी की कोशिशों में सफल न हो सके-

नक्सलियों ने चुनाव के दौरान दहशत मचाने की बहुत कोशिश की लेकिन सफल न हो सके। 30 अक्टूबर को उन्होंने दंतेवाड़ा के नीलावाया में डीडी न्यूज के कैमरामैन और दो जवानों को मार दिया। 27 अक्टूबर को बीजापुर के मुरदंडा कैंप पर हमला किया जिसमें सीआरपीएफ के चार जवान शहीद हो गए।

12 नवंबर को चुनाव के दिन सुकमा में दो मुठभेड़ में सात नक्सलियों को मार गिराया गया। दो शव भी बरामद किए गए। चुनाव से लौट रहे मतदान दलों पर हमले की कोशिशें की गईं। मोदकपाल में बीएसएफ की ट्रक ब्लास्ट में टुकड़ों में बंट गई लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। मतदान खत्म होने के बाद फोर्स ने पलटवार किया। 26 नवंबर को सुकमा जिले में तीन मुठभेड़ में 11 नक्सलियों को मार गिराया।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पहुंचे बस्तर-

बीते साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय आयुष्मान योजना का शुभारंभ बीजापुर के नक्सल प्रभावित जांगला गांव से किया। मोदी के आने से पहले नक्सलियों ने कुटरू में जवानों की एक बस उड़ाई जिसमें दो शहीद हुए। हालांकि माओवादी मंसूबे पूरे न हो सके और मोदी वहां पहुंचे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी जुलाई में बस्तर पहुंचे। मुख्यमंत्री और राज्यपाल का प्रवास भी होता रहा। नेताओं ने संदेश दिया कि माओवाद अब समाप्ति की ओर है।

नक्सल नेटवर्क भी ध्वस्त हुआ-

बीते साल फोर्स ने नक्सलियों के तीन बड़े नेटवर्क को तोड़ने में सफलता हासिल की। 7 फरवरी को नक्सली टेक्निकल विंग का बड़ा नेता टेक रमन्ना और 12 जून को नक्सल प्रवक्ता विकल्प उर्फ अभय को पकड़ा गया। साल के आखिर में 23 दिसंबर को फोर्स ने महाराष्ट्र से नक्सली नेटवर्क चलाने वाले केंद्रीय सेवा के एक अधिकारी एन वेंकट राव को धर दबोचा। शहरी नक्सल नेटवर्क चलाने वाले अन्य कई भी शिकंजे में फंसे।

इन वारदातों की भी रही चर्चा-

23 मई को कांकेर सांसद विक्रम उसेंडी का फार्म हाउस उड़ाया। 20 मई को गृहमंत्री राजनाथ ने पहली बस्तरिया बटालियन की सलामी परेड ली। 28 नवंबर को नक्सल कमांडर बासव राजू ने चार्ज लिया और अगले दिन सुकमा में पुतलों से फोर्स को फांसने की कोशिश की गई। जवान सतर्क रहे। 24 मार्च को दंतेवाड़ा जेल ब्रेक की कोशिश प्रहरियों ने विफल की। 23 सितंबर को बस्तर से लगे आंध्र के अरकू में नक्सलियों ने तेदेपा के एक विधायक और एक पूर्व विधायक की हत्या कर दी। 20 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी डीएम अवस्थी ने चार्ज लिया।

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