विदेश में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर देगा जेब का बुरा हाल – Business Standard Hindi

बिंदिशा सारंग /  December 30, 2018

इस बार सर्दी में अगर आप छुट्टियां मनाने विदेश जा रहे हैं और वहां खर्च करने के लिए अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने का आपका इरादा है तो थोड़ा ठहर जाइए क्योंकि बिना समझे ऐसा करना महंगा भी पड़ सकता है। असल में क्रेडिट कार्ड के जो नियम और शर्तें होती हैं, उनमें कई बार कुछ शुल्क भी छिपे होते हैं, जो विदेश में कार्ड का इस्तेमाल करने पर लग सकते हैं। यहां हम विदेशी मुद्रा परिवर्तन शुल्क यानी विदेशी मुद्रा में की गई खरीद को भारतीय मुद्रा रुपये में बदलने के लिए वसूले जाने वाले शुल्क की ही बात नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं फॉरेन ट्रांजैक्शन फी (एफटीएफ) की, जिसका आपको खयाल भी नहीं आता, लेकिन विदेश यात्रा के दौरान जरा सी लापरवाही करने पर यह आपके बटुए पर तगड़ी चोट कर सकती है।

बैंकबाजार में मुख्य कारोबार विकास अधिकारी नवीन चंदानी समझाते हैं, ‘एफटीएफ वह शुल्क है जो आपको कई बार देना पड़ता है। विदेश में आप जितनी बार अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं उतनी बार क्रेडिट कार्ड कंपनी आपसे यह शुल्क वसूल लेती है। आप कार्ड के जरिये जितनी भी राशि का भुगतान आदि करते हैं, उसके 1.5 फीसदी से 3.5 फीसदी के बीच एफटीएफ आपसे वसूल लिया जाता है। आप चाहे जिस मुद्रा में भुगतान कर रहे हों या कितनी भी कम अथवा अधिक राशि का भुगतान कर रहे हों, यह शुल्क तो आपसे लिया ही जाता है। इतना ही नहीं, यह शुल्क हर तरह के लेनदेन पर लगता है चाहे वह नकद लेनदेन ही क्यों न हो।’ इसका सीधा सा मतलब है कि अगर आप विदेश में छुट्टियों के दौरान खरीदारी करते हैं और कुल 1 लाख रुपये की खरीदारी कर डालते हैं तो हो सकता है कि बतौर एफटीएफ आपको 3,500 रुपये चुकाने पड़ें। 

यह पढऩे के बाद अगर आप समझदार बनते हुए क्रेडिट के बजाय डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं तो भी कोई फायदा नहीं होगा। पैसाबाजार डॉट कॉम में उपाध्यक्ष और भुगतान उत्पाद प्रमुख साहिल अरोड़ा कहते हैं, ‘विदेश में लेनदेन पर 3.5 फीसदी तक का शुल्क डेबिट कार्ड पर भी लिया जाता है। ऐसे कुछ ही बैंक हैं, जो कुछ खास श्रेणियों के डेबिट कार्ड से विदेश में किए गए लेनदेन पर यह शुल्क नहीं लेते। उदाहरण के लिए इंडसइंड बैंक के वल्र्ड एक्सक्लूसिव डेबिट कार्ड और सिग्नेचर एक्सक्लूसिव डेबिट कार्ड में किसी भी तरह का विदेशी मुद्रा शुल्क नहीं लगता। लेकिन ये कार्ड खास ग्राहकों को ही दिए जाते हैं।’

देश में भी एफटीएफ!

अगर आपको लग रहा है कि एफटीएफ केवल विदेश में किए भुगतान पर ही वसूला जाएगा तो एक बार फिर आप गलत हैं। भारत में भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर आपको एफटीएफ देना पड़ सकता है बशर्ते आप विदेशी मुद्रा में भुगतान कर रहे हैं। येस बैंक के समूह अध्यक्ष एवं क्रेडिट कार्ड के कारोबार प्रमुख रजनीश प्रभु का कहना है, ‘जब भी आप किसी विदेशी वेबसाइट (जो वेबसाइट कार्ड जारी करने वाले बैंक की स्थानीय मुद्रा के बजाय किसी अन्य मुद्रा का इस्तेमाल करती हो) पर विदेशी मुद्रा में लेनदेन करते हैं तो हर बार आपसे विदेशी मुद्रा मार्कअप शुल्क वसूला ही जाता है।’

इंडसइंड बैंक में मार्केटिंग तथा खुदरा असुरक्षित संपत्तियों के कार्यकारी उपाध्यक्ष तथा प्रमुख अनिल रामचंद्रन कहते हैं, ‘सौदे या लेनदेन के दिन बैंकों के बीच मुद्रा के परिवर्तन की जो भी दर होती है, उसके मुताबिक मुद्रा परिवर्तन आदि में जो भी खर्च लगता है, वही एफटीएफ के रूप में वसूला जाता है। यह मानक शुल्क है, जो सभी बाजारों में लिया जाता है। विदेशी मुद्रा में जितना भी लेनदेन हुआ, वह रुपये में कितना बैठा यह देखा जाता है और उसी के अनुरूप शुल्क तय किया जाता है। मार्कअप दर यानी यह शुल्क क्रेडिट और डेबिट दोनों तरह के कार्डों पर वसूला जाता है।’ तो बचने का रास्ता क्या है? एफटीएफ से बचने के कुछ रास्ते तो मौजूद हैं। पहला रास्ता ऐसा क्रेडिट कार्ड चुनना है, जो बहुत कम ट्रांजैक्शन शुल्क लेता हो। दूसरे विकल्प के तहत आप ऐसा बैंक खाता खुलवा सकते हैं, जिसमें एफटीएफ शुल्क ही नहीं लगता हो। उसके अलावा यात्रा पर जाने से पहले आप मुद्रा बदल सकते हैं। निवेश के लिए डू इट योरसेल्फ (खुद करके देखिए) डिजिटल प्लेटफॉर्म स्क्विरल के संस्थापक सामंत सिक्का एफटीएफ से बचने के तरीके सुझाते हैं। वह कहते हैं, ‘आप यात्रा पर जाने से पहले ही मुद्रा खरीद सकते हैं। एक तरीका यह भी है कि विदेश में केवल आपात स्थिति आने पर ही क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया जाए। अगर आप इस बारे में पहले से ही समुचित योजना बना लेंगे, तय कर लेंगे कि रोजाना कितनी रकम खर्च करनी है तो आप भारत में ही मुद्रा खरीद सकते हैं और अपने साथ विदेश लेकर जा सकते हैं। एक और तरीका यह है कि हर साल कौन सी दो जगहों पर छुट्टी मनानी है यह तय कर लीजिए और उसी के हिसाब से पहले ही धन बचा लीजिए।’

अगर विदेश में एफटीएफ से बचना है तो भूलकर भी वहां एटीएम से रकम नहीं निकालें। अरोड़ा बताते हैं, ‘विदेश में जब भी आप क्रेडिट कार्ड की मदद से नकदी निकालते हैं तो जितनी रकम निकाली है, उसके 3 फीसदी के बराबर अग्रिम नकद शुल्क लग जाता है। इसके अलावा एफटीएफ तो लगता ही है, उस समय की दरों के हिसाब से फाइनैंस शुल्क भी वसूला जाता है।’ एक और अच्छा तरीका ट्रैवल क्रेडिट कार्ड लेने का है। अगर आप सही ट्रैवल क्रेडिट कार्ड चुन लेते हैं तो आपको रिवार्ड और लाभ की शक्ल में काफी कुछ हासिल हो सकता है। ऐसे में कार्ड पर एफटीएफ लगने के बाद भी आपको अच्छा सौदा करने का या बचत करने का मौका मिल सकता है।

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