बढ़ती ब्याज दरों के साथ-साथ रियल रेट ऑफ रिटर्न पर फोकस करें – Navbharat Times

आदिल शेट्टी
फिक्स्ड डिपॉजिट और स्मॉल सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स के इंट्रेस्ट रेट्स बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। जब स्टॉक्स और इक्विटी म्यूच्यूअल फंड स्कीम्स जैसे इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में उथल-पुथल मच जाती है, तब फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स, कम जोखिम और निश्चित रिटर्न के कारण आकर्षक बन जाते हैं। कड़ी मेहनत से कमाए गए पैसे को निवेश करते समय एक आम आदमी आम तौर पर रिस्क, रिटर्न और लिक्विडिटी फैक्टर पर ध्यान देता है। हालांकि, महंगाई भी इसका पता लगाने में उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि निवेश की गई रकम उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए काफी होगी या नहीं, जिसके लिए आप निवेश कर रहे हैं।

इक्विटी ऑरिएंटेड स्कीम्स, गोल्ड और रीयल्टी इन्वेस्टमेंट्स पर मिलने वाले रिटर्न में हर दिन उतार-चढ़ाव होते रहेंगे और इस तरह आपको महंगाई को मात देने का मौका मिल जाता है। लेकिन, एक फिक्स्ड रिटर्न इन्वेस्टमेंट आपको फिक्स्ड रिटर्न देता है जो महंगाई को मात देने की आपकी क्षमता को कम कर देता है, खास तौर पर वॉलिटेलिटी के समय। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि महंगाई आपके इन्वेस्टमेंट को कैसे प्रभावित करती है।

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इन्वेस्टमेंट पर महंगाई का प्रभाव

महंगाई पैसे से खरीदने की ताकत को कम कर देती है। इसलिए ज्यादा महंगाई का मतलब है कि आपके पैसे का वैल्यू और कम हो जाएगा। उदाहरण के लिए, आज आप एक प्रॉडक्ट को 100 रु. में खरीद सकते हैं। लेकिन महंगाई के कारण 15-20 साल बाद उसी प्रॉडक्ट को खरीदने के लिए आपको 300 रु. या 500 रु. (मान लीजिए) की जरूरत पड़ सकती है। यदि आप इन्वेस्टिंग करते समय महंगाई पर विचार नहीं करते हैं, तो आगे चलकर आपको अपने महत्वपूर्ण फाइनैंशल लक्ष्यों को पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।

उदाहरण के लिए, रिटायरमेंट के लिए इन्वेस्टमेंट करते समय यह पता लगाना जरूरी है कि महंगाई को अजस्ट करने के बाद आपको कितने पैसे की जरूरत पड़ेगी। इससे आपको भविष्य के खर्चों को पूरा करने के लिए एक बड़ी रकम तैयार करने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए, हो सकता है आज आपको अपने खर्च को पूरा करने के लिए साल में 5 लाख रु. की जरूरत पड़ती है, लेकिन 20 साल के बाद इसी हिसाब से महंगाई बढ़ने पर आपको उसी खर्च के लिए साल में 20 लाख रु. की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए, लम्बे समय के लिए इन्वेस्ट करते समय आपको नॉमिनल रिटर्न के बजाय रियल रेट ऑफ रिटर्न पर विचार करना चाहिए।

नॉमिनल रिटर्न बनाम रियल रिटर्न

नॉमिनल रिटर्न वह रिटर्न है जो एक इन्वेस्टमेंट पर महंगाई को अजस्ट किए बिना मिलता है। दूसरी तरफ, रियल रेट ऑफ रिटर्न, महंगाई को अजस्ट करने के बाद मिलने वाला रिटर्न है। आइए इसे एक उदाहरण की मदद से समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए, महंगाई की दर 4% प्रति वर्ष है और एक साल वाले FD की दर 7% प्रति वर्ष है। आपने एक साल के लिए एक FD में इन्वेस्ट किया। इस मामले में, आपका नॉमिनल रिटर्न 7% होगा, लेकिन रियल रेट ऑफ रिटर्न सिर्फ 3% प्रति वर्ष (7% घटाव 4%) होगा। ऐसा भी हो सकता है कि इंट्रेस्ट रेट बढ़ जाय, लेकिन महंगाई को अजस्ट करने के बाद आपका रियल रिटर्न बढ़ या घट सकता है। मान लीजिए महंगाई 6% प्रति वर्ष के हिसाब से बढ़ती है जबकि FD का इंट्रेस्ट रेट बढ़कर 8% हो जाता है, तो आपका रियल रिटर्न सिर्फ 2% प्रति वर्ष ही होगा।

ज्यादा रियल रिटर्न पाने का तरीका

महंगाई इक्विटी या रियल एस्टेट की तुलना में फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स को ज्यादा प्रभावित करती है। इसलिए एक एफडी या एक स्मॉल सेविंग्स स्कीम में इन्वेस्ट करते समय बीच-बीच में अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू करते रहें। कभी-कभी आप एक खास रेट पर एक FD में निवेश कर सकते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि बैंक बाद में ब्याज दर बढ़ा दे। ऐसे मामले में आपको अपने मौजूदा फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने और ज्यादा ब्याज दर के लिए उसे स्विच करने के विकल्प पर गौर करना चाहिए।

महंगाई के असर को कम करने के लिए आप FD लैडरिंग स्ट्रैटिजी का इस्तेमाल करके भी इन्वेस्ट कर सकते हैं, यानी आप अपने इन्वेस्टमेंट अमाउंट को अलग-अलग मच्योरिटी वाले एक से अधिक FD में इन्वेस्ट कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप 5 लाख रु. इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो आप एक साल, दो साल और इसी तरह पांच साल तक, यानी प्रत्येक FD से एक साल के गैप पर 1-1 लाख रु. इन्वेस्ट कर सकते हैं। इस लैडरिंग स्ट्रैटिजी की मदद से इन्वेस्ट करने पर आपको रेग्युलर इंटरवल पर लिक्विडिटी की सुविधा मिलेगी और लम्बे समय में एक नियमित रियल रेट ऑफ रिटर्न भी मिलता रहेगा। आप अन्य फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट में इन्वेस्ट करने के लिए भी इस लैडरिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसके अलावा, अपनी रिस्क उठाने की क्षमता और अपने फाइनैंशल लक्ष्य के आधार पर आप अपने इन्वेस्टमेंट को अन्य ऐसेट क्लास जैसे इक्विटी और रियल एस्टेट में डाइवर्सिफाई भी कर सकते हैं। लम्बे समय में महंगाई के कारण आपका खर्च बढ़ सकता है, लेकिन उसी समय आपकी इनकम भी उसी के साथ बढ़ सकता है। अपना इनकम बढ़ने पर अपने इन्वेस्टमेंट को समय-समय पर खास तौर पर हर साल बढ़ाते रहना चाहिए जिससे आपको लंबे समय में ज्यादा-से-ज्यादा इन्वेस्ट करने और बड़े-से-बड़े वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इस आर्टिकल के लेखक बैंकबाजार.कॉम के सीईओ हैं।

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