सरकार को 4 PSB के PCA से जल्द बाहर आने की आस

धीरज तिवारी, नई दिल्ली

सरकार को उम्मीद है कि चार पब्लिक सेक्टर बैंक (पीएसबी) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए) फ्रेमवर्क से बाहर आ जाएंगे क्योंकि उनके फाइनैंशल परफॉर्मेंस में सुधार हुआ है। केंद्र सरकार इसका हवाला देकर रिजर्व बैंक से पीसीए में बचे रह गए बाकी के सात बैंकों के लिए शर्तों में ढील देने की मांग करेगी ताकि वे भी इससे जल्द बाहर आ सकें और कर्ज बांटना शुरू करें। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। अभी सरकार और रिजर्व बैंक के बीच जिन मुद्दों पर टकराव चल रहा है, उसमें से एक यह भी है। अधिकारी ने बताया, ‘पीसीए की कुछ शर्तों में ढील दी जाती है तो उससे तेजी से रिकवरी करने में मदद मिलेगी।’

इन चार बैंकों को PCA से बाहर आने की उम्मीद

सरकार का मानना है कि बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और कॉर्पोरेशन बैंक फाइनैंशल परफॉर्मेंस के आधार पर पीसीए से बाहर आ जाएंगे। अभी कुल 11 सरकारी बैंक इस फ्रेमवर्क में रखे गए हैं। अधिकारी ने बताया, ‘तीसरी यानी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के अंत तक इन बैंकों का टर्नअराउंड हो सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने सरकार के साथ जो ऐक्शन प्लान शेयर किया है, वे उसका पालन कर रहे हैं।’ केंद्र पहले ही कह चुका है कि परफॉर्मेंस के आधार पर ही सरकारी बैंकों की फंडिंग की जाएगी।

बैंकों के लिए PCA का मतलब क्या?

जिन बैंकों को पीसीए में डाला जाता है, उन्हें रिस्की ऐसेट्स कम करने पड़ते हैं। उनके बिना रेटिंग वाली कंपनियों को कर्ज देने पर पाबंदी लग जाती है। इसके साथ इन बैंकों को ऐसेट की बिक्री करनी पड़ती है और रिकवरी प्लान बनाना पड़ता है। आरबीआई पीसीए वाले बैंकों की कैपिटल, ऐसेट क्वॉलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी पर नजर रखता है ताकि उनके बैड लोन में और बढ़ोतरी न हो। सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में पब्लिक सेक्टर बैंकों को पीसीए में डाले जाने से लोन ग्रोथ सुस्त पड़ गई है और उसका निवेश पर बुरा असर पड़ रहा है। इससे ग्रोथ तेज नहीं हो पा रही है और रोजगार के मौके नहीं बन रहे हैं।

PCA पर सख्त है RBI

आरबीआई ने पहले पीसीए का मजबूती से बचाव किया था। पिछले महीने रिजर्व बैंक के डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि कमजोर बैंकों के लिए पीसीए की शर्तों में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा था, ‘जोखिम का सामना कर रहे बैंक को बचाने का पहला उपाय उसे पीसीए में डालना है। इन बैंकों के बिजनस मॉडल को लॉन्ग टर्म में ठीक करने के लिए डीप बैंकिंग रिफॉर्म्स की जरूरत है।’ उन्होंने यह बात 26 अक्टूबर की उसी स्पीच में कही थी, जिसमें रिजर्व बैंक की स्वायत्तता से समझौते को लेकर आचार्य ने सरकार को चेतावनी दी थी।

19 नवंबर की मीटिंग पर नजर

इकनॉमिक टाइम्स ने पहले खबर दी थी कि सरकार आरबीआई ऐक्ट के सेक्शन 7 के तहत दर्जनभर मुद्दों पर रिजर्व बैंक से चर्चा चाहती है। पीसीए भी इनमें से एक है। सरकार को उम्मीद है कि 19 नवंबर की रिजर्व बैंक के बोर्ड की अगली मीटिंग में इनमें से कुछ मुद्दों का समाधान निकलेगा। केंद्र का कहना है कि दिवालिया कानून के तहत कई बड़े डिफॉल्टर्स के मामलों को सुलझाया गया है। इससे पीसीए फ्रेमवर्क में डाले गए कुछ बैंकों के बैड लोन में कमी आएगी। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि पब्लिक सेक्टर के बैंक वित्त वर्ष 2019 में 1.8 लाख के लोन रिकवरी टारगेट को पार कर जाएंगे। बैंकों ने इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 36,551 करोड़ के बैड लोन की रिकवरी की थी। वहीं, पिछले वित्त वर्ष में बैंकों की रिकवरी 74,562 करोड़ रुपये रही थी।

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