नोटबंदी के 2 सालः और बुरे हुए हालात, बेरोजगारी के आंकड़ों ने तोड़ा रिकॉर्ड, नई नौकरियां भी गायब

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा देश में नोटबंदी लागू किये आज 2 साल पूरे हो गए हैं। साल 2016 में लागू इस फैसले का असर देश की अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा पड़ा है, इसका अंदाजा देश में पिछले 2 सालों के दौरान लगातार बढ़ रही बेरोजगारी और नौकरी के कम होते अवसरों से चलता है। पिछले दो साल में देश में रोजगार का संकट और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। देश में आर्थिक मामलों की प्रमुख थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) की ताजा रिपोर्ट इस बात की गवाही देती है। सीएमआईई के मुताबिक इस साल अक्टूबर में देश में बेरोजगारी की दर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा है।

सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी का दर 2017 के जुलाई से लगातार बढ़ रहा है। और रोजगार को लेकर सिर्फ यही एक बुरी खबर नहीं है। देश में नौकरियों को लेकर इन दो सालों में हालात और बदतर हो चले हैं, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार इन दो सालों में देश में श्रमिक भागीदारी घटकर 42.4 फीसदी पर पहुंच गयी है। श्रमिक भागीदारी का आंकड़ा नोटबंदी के बाद बहुत तेजी से गिरा है। नवंबर 2016 से पहले यह आंकड़ा 47-48 फीसदी था जो उसके बाद दो सालों में कभी भी हासिल नहीं हो सका।

रिपोर्ट के अनुसार रोजगार में थोड़ा सा सुधार सितंबर महीने में देखने को मिला, लेकिन अगले ही महीने अक्टूबर 2018 में यह सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। इसके साथ ही देश में नई नौकरी पाने वालों का भी आंकड़ा गिरा है। सीएमआईई के मुताबिक 2018 के अक्टूबर में कुल 39.5 करोड़ लोगों के पास रोजगार था। यह रोजगार प्राप्त वयस्क आबादी की सबसे कम संख्या है। यह आंकड़ा पिछले साल यानी अक्टूबर 2017 के आंकड़े से 2.4 फीसदी कम है। अक्टूबर 2017 में यह आंकड़ा 40.7 करोड़ था। यह आंकड़ा साल दर साल रोजगार में स्पष्ट गिरावट को दिखाता है। अक्टूबर महीने में रोजगार दर में यह तेज गिरावट संभवतः श्रम बाजार की सबसे चिंताजनक स्थिति है। रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में आई यह कमी लेबर मार्केट में मांग में आई गिरावट की वजह से है।

एक तरफ जहां देश में रोजगार के अवसरों में भारी कमी आई है, वहीं दूसरी ओर नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ी है। अक्टूबर 2018 में लगभग 3 करोड़ बेरोजगार लोग सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रहे थे, जबकि अक्टूबर 2017 में ऐसे लोगों की संख्या 2 करोड़ 16 लाख के करीब थी। सीएमआईई रिपोर्ट के अनुसार नौकरी पाने की उम्मीद लगाए बेरोजगारों की संख्या में एक साल में बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले साल जुलाई में ऐसे बेरोजगारों की संख्या 1.4 करोड़ थी, एक साल और कुछ महीने में ही बढ़कर दोगुने से ज्यादा हो गई।

ये आंकड़े नोटबंदी के बाद काम बंद होने, रोजगार छिनने की वजह से निराश होकर श्रम बाजार छोड़कर गए श्रमिकों के फिर से बाजार में वापस लौटने की तरफ इशारा करता है। लेकिन इसमें एक चिंता की बात ये भी है कि अगर नोटबंदी के बाद श्रम बाजार छोड़कर गए सभी श्रमिक बाजार में वापस लौट आते हैं, तो बेरोजगारी का ये आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।

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