म्युचुअल फंड उद्योग पर बढ़ेगा निवेश निकासी का दबाव

स्वाति वर्मा /  November 06, 2018

शेयर बाजार में उतारचढ़ाव को देखते हुए निवेशक यह तलाशने लगे हैं कि आखिर निचला स्तर क्या हो सकता है। इन्वेस्को म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटीज) ताहिर बादशाह ने स्वाति वर्मा से म्युचुअल फंड उद्योग के बारे में विस्तार से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश..

मार्च के आखिर तक बेंचमार्क सूचकांक किस स्तर पर नजर आएगा?

विस्तृत इक्विटी बाजार में कैलेंडर वर्ष 2018 की शुरुआत से ही कमजोरी दिख रही है, जिसकी वजह जिंसों की कीमतें, ब्याज दरें और चालू व राजकोषीय खाते हैं। इस पृष्ठभूमि में आय की रफ्तार में सुधार के बिना उच्च मूल्यांकन ने काफी कम गुंजाइश छोड़ी और बाजार में हाल में आई तेज गिरावट की मुख्य वजह यही है। प्रमुख सूचकांकों में मौजूदा स्तर से संभावित तौर पर पांच से सात फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। 

आईएलऐंडएफएस के घटनाक्रम ने बैंकिंग व एनबीएफसी को काफी बड़ा झटका दिया है। क्या हमें गिरावट का इस्तेमाल इनकी खरीद में करनी चाहिए?

एनबीएफसी में आई गिरावट इस क्षेत्र में निवेश का दिलचस्प मौका मुहैया करा सकता है। पिछले घटनाक्रम और ऐसे संशोधित अनुमान के लिए मूल्यांकन पर दोबारा नजर डालने के बाद निवेश के लिहाज से इस क्षेत्र की कंपनियों के बढ़त अनुमान को फिर से देखना होगा। 

इस साल आपकी निवेश की क्या रणनीति है?

इसके तहत मोटे तौर पर निचले स्तर पर आए शेयरों की खरीद हुई है, जिसमें प्रोप्राइटरी इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क से मदद मिली। कंज्यूमर ड्रिस्क्रिश्नरी, फाइनैंशियल, सूचना प्रौद्योगिकी और इंडस्ट्रियल क्षेत्र के शेयरों पर हमारा ध्यान बना रहा। ऐसेट एलोकेशन फंड को छोड़कर हमारे पोर्टफोलियो की नकदी का स्तर सभी परिस्थितियों में पांच फीसदी से ज्यादा नहीं रहता।

पिछले कुछ महीनों में म्युचुअल फंडों में निवेश नरम हुआ है। क्या आप प्रवृत्ति में बदलाव देख रहे हैं?

हाल के महीनों में निवेशकोंं का भरोसा घटा है, हालांकि स्थिति अभी चिंताजनक नहीं है। मासिक एसआईपी निवेश मजबूत बना हुआ है, वहीं एकमुश्त निवेश को रफ्तार पकडऩे में थोड़ा समय लग सकता है।

क्या आपकी योजनाओं को निवेश निकासी का दबाव झेलना पड़ा है?

हाल के महीनों में हमारे इक्विटी कारोबार ने मजबूत व सकारात्मक रफ्तार बनाए रखी है। उद्योग पर निवेश निकासी का दबाव ऐसे परिदृश्य में और बढ़ सकता है जब आर्थिक हालात में और गिरावट देखने को मिले।

अभी बाजारों के लिए सबसे बड़ा अवरोध क्या है?

बाजारों का प्रमुख अवरोध क्रेडिट बाजार और उपभोक्ताओं के की धारणा में संभावित गिरावट के इर्द-गिर्द है, जिससे उपभोग की रफ्तार घट रही है। अगले दो से तीन महीनों में राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जाएंगे, जिस पर निवेशक नजर डालना चाहेंगे।

वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2020 में कंपनियों की आय की रफ्तार कैसी रहेगी?

आर्थिक अनिश्चितताओं के मद्देनजर बढ़त की उम्मीद को नियंत्रण में रखना समझदारी होगी। आधार प्रभाव, आयात पर मुद्रा के फायदे और वैश्विक साइक्लिकल बढ़त को सहारा देंगे, लेकिन हम वैसी स्थिति देखना चाहेंगे जिससे भारतीय कंपनी जगत की आय की रफ्तार में गुणवत्तापूर्ण व सतत सुधार हो सके।

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