Govt vs RBI: वित्तीय बाजारों में सुधार, डेप्युटी गवर्नर पर गर्ग का तंज

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग
नई दिल्ली

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने रिजर्व बैंक के डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य की हाल की टिप्पणियों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि इस समय तो वृहद आर्थिक संकेतकों में सुधार ही दिख रहा है और विनिमय दर 73 रुपए प्रति डॉलर से भी मजबूत हो गई है। आचार्य ने पिछले सप्ताह एक व्याख्यान में कहा था कि केन्द्रीय बैंक की स्वायत्तता को नजरंदाज करने पर सरकारों को भविष्य में वित्तीय बाजारों के आक्रोश का समाना करना पड़ता है।

विरल आचार्य ने रिजर्व बैंक की स्वायत्तता का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि केन्द्रीय बैंक की स्वायत्तता को यदि नजरंदाज किया गया तो यह विनाशकारी हो सकता है। डेप्युटी गवर्नर की टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया। इसने सरकार और केन्द्रीय बैंक के बीच बढ़ती दूरी को सतह पर ला दिया। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने शुक्रवार को ट्विटर पर आचार्य की टिप्पणी पर तंज कसते हुए सवाल किया कि विभिन्न वृहद आर्थिक मानकों में सुधार को क्या ‘बाजारों का आक्रोश’ माना जाए?

सुभाष ने कहा, ‘डॉलर के समक्ष रुपया 73 से ज्यादा मजबूत हो गया है, ब्रेंट कच्चा तेल का भाव 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चल रहा है, सप्ताह के दौरान शेयर बाजार चार प्रतिशत से अधिक ऊपर है और बॉन्ड निवेश पर प्राप्ति घट कर 7.8 प्रतिशत से नीचे चल रहा है, क्या इसे बाजार का आक्रोश माना जाए? आपको बता दें कि अंतर बैंकिंग विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शाम चार बजे डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव 72.50 रुपये प्रति डॉलर पर चल रहा था।

गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बीच उपजे तनाव के बीच दो दिन पहले ही वित्त मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी कर कहा था, ‘रिजर्व बैंक कानून के दायरे में केन्द्रीय बैंक की स्वायत्तता महत्वपूर्ण है और यह स्वीकार किया जाता है कि ऐसा राजकाज के लिए यह आवश्यक है।’ हालांकि, वक्तव्य में इसके आगे यह भी कहा गया था कि सरकार और केन्द्रीय बैंक दोनों को ही अपने कामकाज में सार्वजनिक हित और भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देख कर चलना चाहिए।

सरकार और केन्द्रीय बैंक के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के कमजोर बैंकों के मामले को देखने, बाजार में नकदी की तंगी, बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं में फंसे बैंकों के कर्ज की समस्या का समाधान जैसे मुद्दों को लेकर मतभेद बढ़ गए थे। इन मुद्दों के समाधान के लिये वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक को कम से कम तीन पत्र भेजे थे। ये पत्र रिजर्व बैंक कानून की धारा सात के तहत भेजे गए था। यह धारा केन्द्र सरकार को जनहित में रिजर्व बैंक गवर्नर को निर्देश देने का अधिकार देती है। इससे पहले इस धारा का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया था।

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