रोजगार / 5 साल में जीडीपी 6 फीसदी बढ़ी, लेकिन 70 लाख नौकरियां घट गईं

  • ग्रेजुएट-पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगारों का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से 6 गुना ज्यादा
  • देश की बेरोजगारी दर 5 फीसदी, ढाई से तीन करोड़ लोग बेरोजगार

Dainik Bhaskar

Oct 08, 2018, 02:57 PM IST

नई दिल्ली. देश में रोजगार की कमी को लेकर केंद्र सरकार लगातार सवालों के घेरे में है। देश में नौकरियां बढ़ी हैं या पहले से कम हुई हैं, इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं है। प्रधानमंत्री की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकार ने सिर्फ 2017 में ही 1.28 करोड़ रोजगार पैदा किए। वहीं, अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सस्टेनेबल इम्प्लॉयमेंट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से पहले तीन साल के दौरान लगभग 70 लाख नौकरियां खत्म हो गईं। बढ़ती जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) भी बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने में विफल रही है। शिक्षित युवाओं के सामने सबसे बड़ा संकट रोजगार का ही है। देश की कुल बेरोजगारी दर के मुकाबले ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और उससे ऊपर की शिक्षा पाए लोगों की बेरोजगारों की दर छह गुना ज्यादा है।

आर्थिक विकास के बावजूद नहीं बढ़ीं नौकरियां

रिपोर्ट के मुताबिक, देश की तेज आर्थिक विकास दर के बावजूद नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं। 2011 से लेकर 2015 तक आर्थिक विकास दर 6.8% रही, लेकिन रोजगार में सिर्फ 0.6% इजाफा हुआ। अगर 70 और 80 के दशक से तुलना की जाए तो हालात बेहतर नजर आते हैं। इस दौरान जीडीपी ग्रोथ 3% से 4% थी और रोजगार में सालाना बढ़ोतरी का आंकड़ा 2% के ऊपर था। आज की तुलना में यह तीन गुना तक ज्यादा है। 

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बेरोजगार श्रेणी में शामिल एक वर्ग 15 साल से ज्यादा उम्र के ऐसे लोगों का होता है, जिनके पास छह महीने से कोई रोजगार नहीं है। इस वर्ग में 2015 में बेरोजगारी की दर 5% थी, जो कि बीते 20 साल में सबसे ज्यादा है। 2011 में नेशनल सैंपल सर्वे के मुताबिक यह दर 2.7% और लेबर ब्यूरो के हिसाब से 3.8% थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की मार्च-18 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में तीन करोड़ से ज्यादा बेरोजगार थे। सीएमआईई की रिपोर्ट की मानें तो 2016 से 2017 के बीच रोजगार घटने का आंकड़ा और कम हो सकता है। अकेले नोटबंदी के दौरान ही करीब 35 लाख नौकरियां खत्म हुईं थीं। एसएमई सेक्टर में 35% से 50% तक नौकरियां घटीं।   

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60% बेरोजगार 15-25 साल आयु वर्ग के
सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2015 के बीच सबसे हमारी लेबर फोर्स (श्रम बल) में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 15-29 साल उम्र वाले युवाओं की थी। इस आयु वर्ग में चार करोड़ लोग आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान करीब ढाई करोड़ लोग ऐसे थे, जो छह महीने से नौकरी की तलाश में थे। इनमें से 90 लाख लोग ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और उससे ऊपर की शिक्षा हासिल किए हुए थे। बेरोजगारों की इस संख्या में 60% ऐसे हैं, जिनकी उम्र 15-25 साल है। इनमें भी 60% पुरुष हैं।

क्या 2019 के चुनाव की वजह से जारी नहीं हो रहे रोजगार के आंकड़े?
रोजगार के तिमाही आंकड़ों को काफी भरोसेमंद माना जाता है। यहां तक कि सरकार के विरोधी भी इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानते हैं। इनमें पिछली तिमाही के आंकड़े बताए जाते हैं। लेकिन इस साल अभी तक सरकार ने इन आंकड़ों को जारी नहीं किया है। रोजगार के तिमाही आंकड़ों की दो रिपोर्ट अभी तक लंबित हैं।  

सालाना रोजगार-बेरोजगार सर्वे की 2016-17 की रिपोर्ट 18 महीनों से जारी नहीं की गई है। इससे पहले 2015-16 की रिपोर्ट सितंबर 2016 में प्रकाशित की गई थी। 2014-15 में कोई भी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई थी। कई विशेषज्ञों के मुताबिक बेरोजगारी बढ़ी है, लेकिन 2019 में होने वाले आम चुनाव को देखते हुए सरकार इन आंकड़ों को जारी करने से बच रही है।

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