डॉलर के मुकाबले रुपया फिर गिरा, 71 रुपये का हुआ एक डॉलर

नई दिल्ली: 

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के बीच डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 26 पैसे की गिरावट के साथ 71 रुपये के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया.  अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में डालर के मुकाबले रुपया गुरुवार स्थानीय मुद्रा 70.95 रुपये पर खुला और बाद में 71 रुपये के स्तर पर चला गया. रुपया गुरुवार को 70.74 पर बंद हुआ था. मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, माह के अंत में तेल आयातकों की तरफ से अमेरिकी करेंसी की मजबूत मांग, चीन-अमेरिका के बीच व्यापार तनाव के साथ ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद में विश्व की अन्य प्रमुख मुद्रा की तुलना में डालर के मजबूत होने से घरेलू मुद्रा पर असर पड़ा. कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका तथा घरेलू शेयर बाजार विदेशी संस्थागत निवेशकों की कोष की निकासी से भी रुपये पर असर पड़ा है. एशियाई कारोबार की शुरुआत में मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 78 डॉलर बैरल पर पहुंच गया.     

भारत की अर्थव्यवस्था की हालत कितनी सुधरी?

गुरुवार को भारतीय रुपया कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था. एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 70.81 रुपये पर पहुंची थी. सुबह के सत्र के दौरान करीब 10:00 बजे भारतीय रुपया 70.68 पर पहुंच गया था. इसके बाद यह एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 70.81 के स्तर पर पहुंच गया. इंटरबैंक विदेशी विनिमय बाजार सुबह एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 70.58 रुपये के साथ खुला, लेकिन यह जल्द ही दबाव के चलते 70.65 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया. विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निधि के लगातार निकलने, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के अस्थिर होने से भारतीय रुपया नए निचले स्तर पर पहुंचा है. आनंद राठी शेयर और स्टॉक ब्रोकर्स के शोध विश्लेषक ऋषभ मारू ने कहा, “आयातकों के महीने के अंत में अमेरिकी डॉलर की मांग व कच्चे तेल की कीमतों की वजह से रुपये की कीमत गिरी है.”

रुपये में गिरावट बाहरी कारणों से, चिंता की कोई बात नहीं: सरकार

आपको बता दें कि आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के लिये ‘बाहरी कारणों’ को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि जबतक अन्य मुद्राओं के अनुरूप घरेलू रुपये में गिरावट होती है, इसमें चिंता की कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि यहां तक रुपया 80 रुपये प्रति डालर तक चला जाता है और अगर दूसरी मुद्राओं में भी गिरावट इसी स्तर पर रहती है तो भी कोई “गंभीर चीज” नहीं है. 

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गर्ग ने कहा था कि भारतीय रुपया अभी भी कुछ अन्य मुद्राओं की तुलना में बेहतर स्थिति में है. उन्होंने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन उसका मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कारगर नहीं होगा क्योंकि रुपये में गिरावट का कारण वैश्विक हैं. तीन अगस्त को समाप्त सप्ताह में केंद्रीय बैंक के पास 402.70 अरब डालर का मुद्रा भंडार था. यह पिछले सप्ताह से 1.49 अरब डालर कम है. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि डालर की तुलना में सभी मुद्राएं कमजोर हुई हैं लेकिन अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपये में उतनी गिरावट नहीं आयी है. कुमार ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि रुपया 69 से 70 के बीच स्थिर होना चाहिए क्योंकि अगर आप देश में बांड और शेयर समेत विभिन्न क्षेत्रों में आने वाले निवेश को देखें तो यह स्तर विदेशी निवेश के लिहाज से आकर्षक रहा है’’. आईसीआईसीआई बैंक के बी प्रसन्ना ने कहा कि तुर्की संकट का सभी उभरते बाजारों पर प्रभाव पड़ा है और रुपये पर भी उसका असर है. 

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