सिक्किम : उद्यमिता के जरिए बेरोजगारी से मुकाबला

गंगटोक, 22 जुलाई (आईएएनएस)| हिमाचल की गोद में बसा भारत का छोटा-सा राज्य सिक्किम कई मायने में विशिष्ट है। इसकी सीमा चीन से सटी हुई है। यह भारत का एक मात्र जैविक राज्य है, गंदगी और कचरे कहीं देखने को नहीं मिलते हैं और यहां उच्च साक्षरता दर है।

सिक्किम में महिलाओं के लिए काम करने का बेहतर माहौल है, लेकिन यहां बेकारी की विकट समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रदेश के कई लोग उद्यमिता के पथ पर अग्रसर हैं और वे न सिर्फ अपने लिए रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि राज्य के आकांक्षी युवाओं को भी नौकरियों के अवसर प्रदान कर रहे हैं।

प्रदेश में निजी क्षेत्र की मौजूदगी नगण्य है और सरकारी नौकरियों का पहले से ही अभाव है। ऐसे में युवा उद्यमियों का छोटा, मगर समर्पित समूह मिलकर नवोन्मेषी स्टार्ट-अप के माध्यम से रोजगार सृजन कार्य में जुटे हैं। सिक्किम की आबादी महज 6.10 लाख है, लेकिन दिल्ली और चंडीगढ़ के बाद यह देश का तीसरा सर्वाधिक प्रति व्यक्ति आय वाला प्रदेश है।

सिक्किम 2008 में भारत का पहला ऐसा राज्य बना, जहां खुले में लोग शौच नहीं करते हैं। इसके आठ साल बाद यह देश का पहला और एकमात्र जैविक राज्य बना। वर्ष 2016 में हुए राष्ट्रव्यापी सव्रेक्षण में सिक्किम में महिलाओं के लिए सबसे अच्छा काम करने का माहौल पाया गया। सर्वाधिक साक्षरता दर के मामले में इसका स्थान देश में सातवां है। यहां के युवा शिक्षित हैं, लेकिन बेकारी के शिकार हैं, जिसके कारण वे नशीली पदार्थो के आदी बन रहे हैं और निराशा का जीवन जी रहे हैं।

त्रिपुरा के बाद सिक्किम देश का दूसरा सर्वाधिक बरोजगारी दर वाला राज्य है। वार्षिक रोजगार और बेरोगारी सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2016-17 में सिक्किम में 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में बेराजगारी की दर प्रति हजार 136 थी।

भारत के सबसे कम आबादी वाले इस राज्य की एक और खासियत यह है कि यहां की 10 फीसदी आबादी के पास सरकारी नौकरी हैं, जबकि इस मामले में राष्ट्रीय औसत महज 3.5 फीसदी है।

यही कारण है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने रोजगार की तलाश करने वाले हजारों युवाओं को सलाह दी है कि वे सरकारी नौकरी पाने की इच्छा पालने के बजाय रोजगार के अवसर पैदा करने में राज्य की मदद करें। पचीस साल से राज्य की सत्ता में काबिज मुख्यमंत्री की सलाह मानकर कुछ युवा इस दिशा में प्रयत्नशील हैं।

रेवाज छेत्री ने 30 से ज्यादा उद्यम शुरू किए हैं। इनमें सबसे हाल में उन्होंने टैक्सी चालकों के एक एप ‘एनई टैक्सी’ लांच किया है। उन्होंने 300 रुपये खर्च करके दो साल पहले डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट एनईटैक्सी डॉट इन नामक डोमेन खरीदा और इसको शेयर करना शुरू किया। एनई टैक्सी एक टूरिस्ट कैब सर्विस है, जो पूर्वोत्तर में आने वाले पर्यटकों को कैब सेवा मुहैया करवाती है। उनके पास अभी 26 कर्मचारी हैं और उनका सालाना कारोबार तीन करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसका नाम फोर्ब्स की एशिया की सूची में शामिल है।

छेत्री ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, हमारी अपने बलबूते खड़ी की गई कंपनी है और हम अपने लाभ का उपयोग कंपनी के कारोबार को बढ़ाने में ही करते हैं। हम 2020 के आखिर तक इसे उत्तर भारत में फैलाने वाले हैं।

सरकार की स्टार्ट-अप योजना के बारे में छेत्री ने कहा, मेरा मानना है कि राज्य सरकार मंच प्रदान करती है और अवसर पैदा करती है। हमें उसे हथियाने की जरूरत है।

स्टार्ट-अप योजना के तहत सरकार 20 लाख रुपये तक के निवेश के लिए मूल पूंजी के मद में परियोजना की लागत में 25 फीसद वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जबकि कुछ मामलों में यह 35 फीसदी है।

परियोजना की शेष लागत की व्यवस्था बैंक से कर्ज लेकर हो जाती है।

छेत्री और अन्य नवोदित उद्यमियों ने सिक्किम में ‘आंट्रप्रिन्योर्स हब एंड कंसल्टेशन सेंटर’ शुरू की है, जिसमें सरकार की मदद से स्टॉर्ट-अप के लिए टिकाऊं और मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया गया है।

इस पहल के 3,000 लाभार्थियों में ‘फिजिटी फिंगर्स’ की संस्थापक देविका केरोंगे भी शामिल हैं। केरोंगे ने अपने सामाजिक उद्यम के बारे में कहा, इसके जरिए महिलाओं को दस्तकारी और बुनाई का प्रशिक्षण देकर उनको सशक्त बनाया जाता है। देविका ने बताया कि उनको किसी प्रकार की निवेश की जरूरत नहीं पड़ी और उन्होंने इसके लिए कोई धन नहीं लिया।

देविका ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, इसकी शुरुआत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए किया गया। साथ ही इसका मकसद लुप्त हो रही फाइबरक्राफ्ट (कपड़ा बुनने की कला) को दोबारा शुरू करना और उसे संरक्षित करना है।

यूगन तमांग एक शोधकर्ता, पत्रकार, ब्लॉगर और सामाजिक उद्यमी हैं। मानव विज्ञान में स्वर्ण पदक विजेता और 2013 में सिक्कि स्टेट अवार्ड से सम्मानित तमांग ने अपने मित्र निर्मल मंगर और कबिता शर्मा के साथ मिलकर पिछले साल डिजिटल मीडिया ‘सिक्किम क्रॉनिकल’ की स्थापना की।

तमांग ने बताया, मैं हमेशा ऐसी नौकरी की तलाश में रहता था, जिससे कभी सेवानिवृत्त न हों। उद्यमिता से मुझे वैसा ही काम मिला, जिसकी मुझे तलाश थी। यात्रा करने के प्रति मेरा लगाव और नए लोगों से मिलने व उनसे कुछ सीखने और विचारों का आदान-प्रदान करने में मेरी दिलचस्पी ने ही मुझे सिक्किम क्रॉनिकल शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

इंडियन जर्नल ऑफ साइकियाट्री के 2016 के अध्ययन के अनुसार, सिक्किम में 2006 से लेकर 2015 तक करीब 1,604 आत्महत्या के मामले सामने आए। इनमें अधिकांश लोग बेरोजगार थे।

(यह साप्ताहिक फीचर श्रंखला आईएएनएस और फ्रैंक इस्लाम फाउंडेशन की सकारात्मक पत्रकारिता परियोजना का हिस्सा है।)

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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