मौजूदा वित्तीय वर्ष में आयुष्मान भारत पर खर्च करने होंगे 5000 करोड़

नई दिल्ली, 21 जुलाई (उदयपुर किरण). केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुषमान भारत-राष्ट्रीय सुरक्षा मिशन पर देश के खजाने से मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान 5,000 करोड़ का खर्च आएगा. इसकी शुरुआत हो जाने के बाद आगामी वित्त वर्ष में इस योजना पर 10,000 करोड़ रुपये लगाने पड़ेंगे.
मौजूदा साल में इस योजना का लक्ष्य देश के 8 करोड़ गरीबों को इसके तहत लाना है. अगले साल का लक्ष्य 10 करोड़ लोगों का है. इस बीच सरकार ने यह महसूस किया है कि इस योजना में निजी क्षेत्र की भूमिका बहुत ही सीमित है. इसलिए इस योजना के तहत राज्य सरकारों को बीमा संस्थाओं की तरह काम करने के लिए प्राथमिकता दी जाएगी. यह जानकारी विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने दी है. एबी-एनएचपीएम का लक्ष्य हर गरीब परिवार के सदस्यों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा देना है. इसमें जनगणना के आंकड़े को आधार बनाया जाएगा.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अभी तक 20 राज्यों ने इस योजना को लागू करने की हामी भर दी है. इन राज्यों ने तो केंद्र सरकार के साथ एमओयू पर भी हस्ताक्षर कर दिए हैं. हालांकि इस योजना के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना व वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना का विलय कर दिया जाएगा. हालांकि राज्य सरकारों को इसे लागू करने के लिए एक एजेंसी की जरूरत होगी. राज्य सरकारों के पास पहले से मौजूद इस क्षेत्र में काम करने वाले ट्रस्ट इसका विकल्प हो सकते हैं.
हालांकि विभागीय अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अगर राज्य सरकार बीमा मोड में काम करना चाहती है तो उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए. इस उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य सरकारें ट्रस्ट मोड में काम नहीं कर पाएंगी, क्योंकि योजना में अनियमितता को रोकने की व्यवस्था भी सरकारों को करनी पड़ेगी.
उल्लेखनीय है कि आयुष्मान भारत योजना का दोहरा लक्ष्य है. एक तरफ तो इसके तहत देश में स्वास्थ्य सुरक्षा साधनों का जाल बिछाया जाएगा तो दूसरी तरफ लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी हो पाएगी. साथ ही इस योजना से देश के लगभग 40 फीसदी लोग स्वास्थ्य को लेकर निश्चिंत हो जाएंगे.

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