जब घर-बाहर, हर जगह बंद हो रहे हैं दरवाजे तो भारतीय इंजिनियरों के लिए बाहें क्यों फैलाए है जापान?

सांकेतिक तस्वीर।
नई दिल्ली
भारत में इंजनियरों के लिए रोजगार के अवसर घट रहे हैं, यहां कंपनियां इंजिनियरों की छंटनी कर रही हैं, आव्रजन कानूनों में कड़ाई के कारण विदेशों के दरवाजे भी भारतीय इंजिनियरों के लिए बंद हो रहे हैं तो जापान इनके लिए बांहें फैलाए खड़ा है। दरअसल, जापान को 2 लाख आईटी (सूचना-तकनीक) प्रफेशनल्स की जरूरत है। 2030 तक यह आंकड़ा 8 लाख तक छूने के आसार हैं।

नागासाकी रीजन में जॉब की बहार

नागासाकी परफेक्चुअल असेंबली में इकी सिटी कॉन्स्टिट्यूएंसी के प्रतिनिधि केइसके यमामोटो के मुतबिक, जापान के शहर नागासाकी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 100 कंपनियां अपनी आईटी, शिपिंग और मैन्युफैक्चरिंग सर्विस इंडस्ट्रीज की मजबूती के लिए भारतीय इंजिनियरों को नौकरी पर रखने को तैयार हैं। बुधवार को बेंगलुरु चैंबर ऑफ इंडस्ट्री ऐंड कॉमर्स की ओर से आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि नागासाकी रीजन की 2,000 कंपनियों में से 93 ने प्रफेशनल्स की कमी से निपटने के लिए भारतीय इंजिनियरों को नौकरियां देने की रजामंदी दी है। उधर, नागासाकी की सरकार आईटी, सर्विसेज, शिप-बिल्डिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की भारतीय कंपनियों के लिए इंसेंटिव्स तय कर रही है। यमामोटो ने कहा, ‘हम नागासाकी में अपनी यूनिट लगाने या यहां स्थित कंपनियों के साथ गठजोड़ के लिए भारतीय कंपनियों को बुलावा भेजने का विशेष अजेंडा लाने जा रहे हैं।’

भारत-जापान की जरूरतें

जब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे देश भारतीय इंजिनियरों के आगमन पर रोक लगा रहे हैं तो जापान उनके उलट क्यों चल रहा है? जवाब यह है कि भारत के पास इंजिनियरों की फौज है जबकि जापान में इनका अभाव है। भारत और जापान बिल्कुल अलग-अलग आर्थिक मोर्चे पर खड़े हैं। विकसित देश जापान की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार लंबे समय से मंद पड़ी है। प्रधानमंत्री शिंजो अबे इसमें तेजी लाने का प्रयास कर रहे हैं। इधर, भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था है जिसे ऊंची वृद्धि दर कायम रखने और अपनी बड़ी युवा आबादी को रोजगार देने के लिए मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करना है।

एक-दूसरे की मदद

अलग-अलग अर्थिक स्तर के दोनों देश एक-दूसरे की कई जरूरतें पूरी कर सकते हैं। जापान अपने निवेश को गति देना चाहता है। साथ ही, उसके पास अत्याधुनिक तकनीक भी है और भारत को इन दोनों की जरूरत है। यही वजह है कि बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट पर दोनों देश साथ आए हैं।

अपने खर्चे पर 3 लाख भारतीयों को ट्रेनिंग देगा जापान

भारत और जापान ने ‘टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (टीआईटीपी)’ का समझौता किया है जिसके तहत भारत तीन लाख युवाओं को जॉब ट्रेनिंग देने के लिए जापान भेज रहा है। भारत सरकार की स्किल डिवेलपमेंट स्कीम के तहत इन युवाओं को तीन से पांच सालों तक जापान में ट्रेनिंग मिलेगी। समझौते के तहत टेक्निकल इंटर्न्स के कौशल विकास की लागत जापान उठाएगा। इनमें 50 हजार प्रफेशनल्स को जापान में नौकरियां भी मिल सकती हैं।

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