क्या 'गेम चेंजर' योजनाओं के दम पर 2019 का चुनाव लड़ेंगे मोदी?

साल 2019 में होने वाले आम चुनावों में फोकस इस बात को लेकर नहीं होगा कि नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद ‘इंडिया’ आगे नहीं बढ़ा. चुनावों में इस बात को प्रमुखता से पेश किया जाएगा कि ग्रामीण भारत का किस तरह से विकास हुआ है. सत्ता में आने के चार साल बाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी टीम आगामी 2019 के आम चुनावों की मार्केटिंग के लिए रणनीति तैयार करने में जुटी है. इसके तहत आय में असमानता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सरकार की कोशिशों के बारे में बताया जाएगा.

2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ मिलकर लड़ने की तैयारी कर रहे विपक्ष का मुकाबला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेलिंग प्वाइंट क्या हो सकता है? क्या यह राष्ट्रवाद है? सांप्रदयिकता? या यह मोदी बनाम उस नेतृत्व का मामला होगा, जिसे विपक्ष आगे बढ़ा सकता है?

‘ये योजनाएं हो सकती हैं सही जवाब’

देश की सत्ताधारी पार्टी जहां अपने तरकश में तमाम तरह के तीर इकट्ठा करने की हरमुमकिन कोशिश में जुटी है, वहीं वित्त मंत्रालय के नौकरशाहों का मानना है कि 2019 के चुनावी समर के लिए सरकार की ‘गेम चेंजर’ योजनाएं सही जवाब हो सकती हैं. सरकार की उपलब्धियों के विश्लेषण के मकसद से तैयार नोट में कहा गया है कि 2014 में कुल आबादी के 4 फीसदी हिस्से को सामाजिक सुरक्षा का कवर था, जो 2018 में बढ़कर तकरीबन 40 फीसदी पर पहुंच गया और जाहिर तौर पर यह खास उपलब्धि है. एक सीनियर अधिकारी का कहना था कि यह मुद्दा 2019 के चुनावी लड़ाई में हथियार की तरह इस्तेमाल हो या नहीं, लेकिन वित्तीय समावेशन से जुड़े कार्यक्रमों का असर दिख रहा है. आबादी के उस हिस्से को ध्यान में रखते हुए कई योजनाओं की शुरुआत की गई, जो बैंकिंग सुविधा से वंचित और किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में शामिल नहीं थे.

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सरकारी नोट में कहा गया, ‘वित्तीय समावेशन से संबंधित दुनिया के सबसे बड़े अभियान में से एक प्रधानमंत्री जन धन योजना के कारण 2014-2017 के दौरान 28 करोड़ नए बैंक खाते खोले गए. यह इस अवधि में दुनिया भर में खुले कुल नए बैंक खातों का 55 फीसदी है. जन-धन से जन सुरक्षा पहल के तहत समाज के गरीब तबके को बीमा कवर के सुरक्षित दायरे में लाने के लिए दो योजनाओं की शुरुआत की गई. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना दुनिया की सबसे सस्ती लागत वाली बीमा योजनाओं में से एक है, जिसके तहत महज 12 रुपये सालाना प्रीमियम पर 2 लाख का बीमा कवर मुहैया कराया जाता है. इस योजना के कारण 13.5 करोड़ लोग इस बीमा कवर से जुड़े. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत रोजाना 1 रुपए से भी कम रोजाना के प्रीमियम पर 2 लाख रुपए का बीमा मुहैया कराया जाता है. यह एक और सस्ती बीमा योजना है, जिसे खास तौर पर गरीब आबादी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. अब तक सिर्फ इन दो योजनाओं के जरिए तकरीबन 18.5 करोड़ लोगों बीमा के सुरक्षित दायरे में लाया जा चुका है और मुश्किल घड़ी में 1,19,366 परिवारों को 2,387 करोड़ के मुआवजे के जरिए राहत मिली है.’

योजनाओं पर अमल के लिए मिशनरी अंदाज में हो रहा काम

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विभिन्न मंत्रालयों ने पहले ही इस सिलसिले में भविष्य की योजना के लिए खाका तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सामाजिक सुरक्षा संबंधी योजनाओं को और आगे बढ़ाकर जन भावनाओं को हवा देने की कोशिश में जुटी है. सरकारी मशीनरी इन योजनाओं को लागू करने के सिलसिले में मिशनरी अंदाज में काम कर रही है.

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हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि विपक्ष और सत्ताधारी निजाम के बीच जीडीपी, जॉब ग्रोथ और मैन्युफैक्चरिंग के डेटा को लेकर विवाद चलता रहता है और कांग्रेस सरकार पर आंकड़ों की बाजीगरी का आरोप लगा रही है. आने वाले दिनों में इस सिलसिले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है.
सूत्रों ने नोट का हवाला देते हुए बताया कि सभी संबंधित बैंक खातों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना बीमा कवर और अन्य पैकेज के साथ जोड़ने से यह सुनिश्चित होगा कि देश के हर परिवार को बीमा सुरक्षा का फायदा मुहैया कराया जाएगा. सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना ग्राम स्वराज अभियान के तहत यह लक्ष्य रखा है.

साल 2014 में वित्तीय समावेशन के संबंध में किए गए वादों में महिला कल्याण एक अहम मुद्दा है. इसी साल बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. सरकार के नोट के मुताबिक, ‘रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित और गारंटीड इनकम मुहैया कराने के लिए कम निवेश वाली पेंशन योजना की शुरुआत की गई. इसके तहत 18 से 40 साल के आयु वर्ग को ध्यान में रखते हुए अटल पेंशन योजना को शुरू किया गया. इसके तहत कम से कम 1,000 और अधिकतम 5,000 रुपये प्रति महीना पेंशन दिया जाएगा. इस पेंशन योजना से कुल 1.03 करोड़ लोग जुड़े हैं, जिनमें 40 फीसदी महिलाएं हैं. प्रधानमंत्री वय वंदना योजना 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों की भविष्य में ब्याज संबंधित आमदनी में गिरावट से सुरक्षा मुहैया कराएगा और बुढ़ापे में अधिकतम सामाजिक सुरक्षा देगा.’

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सूत्रों ने बताया कि आबादी के बड़े हिस्से को बीमा और वित्तीय सुरक्षा जागरूकता के दायरे में लाया गया है, जो निश्चित तौर पर आगामी ‘चुनावी महामुकाबले’ में नजर आएगा. विपक्ष जहां सरकारी नीतियों पर हमला करते हुए इस बात के लिए सरकार की आलोचना कर रहा है कि वह रोजगार और ग्रोथ को बढ़ाने में असफल रही, वहीं सूत्रों का कहना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाएं कल्याणकारी नीतियों के प्लेटफॉर्म पर सरकार को फायदा दिला सकती हैं, जिसकी उसे सख्त जरूरत है.

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