सैम पित्रोदा ने कहा- मंदिर, धर्म और जाति पर बहस से नौकरियां नहीं पैदा होंगी

पित्रोदा ने कहा, ''तीन तरह के लोगों की बात आपको नहीं सुननी चाहिए- आपके माता-पिता, टीचर्स और तीसरे, राजनेता। ऐसा इसलिए क्‍योंकि उनके पास तकनीकी रूप से बदल रही दुनिया की सीमित जानकारी होती है।''

मशहूर टेक्‍नोक्रेट सैम पित्रोदा। (Photo: Express Archive)

सैम पित्रोदा ने कहा है कि मंदिर और धर्म पर बहस करके देश में नौकरियां नहीं पैदा होंगी। रविवार (15 जुलाई) को कर्णावती विश्‍वविद्यालय में यूथ पार्लियामेंट के आखिरी दिन, रोजगार और उद्यमशीलता पर बोलते हुए पित्रोदा ने कहा कि भविष्‍य विज्ञान और तकनीक में है। पित्रोदा ने छात्रों से कहा, ”इस देश में मंदिर, धर्म और जाति पर चल रही बहस देखकर मैं चिंतित हो जाता हूं। जब भी आप रोजगार की बात करते हैं, राजनैतिक हस्‍तक्षेप जरूर होता है।”

लोगों से नौकरियों को लेकर अपनी मानसिकता बदलने की अपील करते हुए पित्रोदा ने कहा, ”मंदिरों से युवाओं के लिए नौकरियां नहीं पैदा होने वालीं। हम आंकड़ों की बात करते हैं, हमने अपने युवाओं को गुमराह किया, हमने उन्‍हें गलत रास्‍ते पर ढकेला, हमने उनसे झूठ बोला। मैं कहता हूं कि तीन तरह के लोगों की बात आपको नहीं सुननी चाहिए- आपके माता-पिता, टीचर्स और तीसरे, राजनेता। ऐसा इसलिए क्‍योंकि उनके पास तकनीकी रूप से बदल रही दुनिया की सीमित जानकारी होती है।

पित्रोदा ने कहा कि रोबोटिक्‍स, ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन जैसी आधुनिक तकनीक हर जगह नौकरियों के लिए खतरा पैदा कर रही है। उन्‍होंने कहा, ”अगले 5 साल में, सेल्‍फ-ड्रिवेन कारों का उत्‍पादन 50 मिलियन से घटकर 5 मिलियन प्रतिवर्ष हो जाएगा। आपको कार इंश्‍योरेंस, लाइसेंस, गैराज या फिर पार्किंग लॉट की जरूरत नहीं पड़ेगी। भविष्‍य में, हमें ऑफिस या पार्किंग स्‍पेसेज की जरूरत नहीं पड़ेी क्‍योंकि हम अपने घरों से काम कर रहे होंगे।”

असमानता पर पित्रोदा ने कहा, ”समस्‍या ये है कि दुनिया के सर्वोत्‍तम मस्तिष्‍क अमीरों की समस्‍याएं सुलझाने में लगे हैं। भचिष्‍य चिंतानजक है, जहां हम बहुत अधिक खरबपति पैदा कर लेंगे, जबकि एक बड़ी आबादी गरीब रह जाएगी।”

गौरतलब है कि पूर्व उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी ने भी देश में धर्म के नाम पर हो रहीं हत्‍याओं को गलत ठहराया है। उन्‍होंने रविवार को एक इंटरव्‍यू में कहा कि देश में ‘अतिसतर्कता’ उफान पर है और यदि गौ रक्षक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात भी नहीं सुनते हैं तो यह चिंता का विषय है। अंसारी ने जोर देकर कहा कि समाज में अहिष्णुता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद ही सांप्रदायिक विभाजन उभरा, बल्कि यह काफी लंबे समय से है।

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