मंथली SIP कलेक्शन 7553 करोड़ रुपये के ऑल टाइम हाई पर

प्रशांत महेश, मुंबई
सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए म्यूचुअल फंड्स में आने वाली रकम जून 2018 में मई के मुकाबले 250 करोड़ रुपये बढ़कर 7553 करोड़ रुपये के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई। पिछले दो वर्षों से एसआईपी के जरिए कलेक्शंस में लगातार इजाफा हो रहा है। इस दौरान एक बार व्यवधान आया था, जब आंकड़ा मार्च 2018 के 7119 करोड़ रुपये से घटकर अप्रैल 2018 में 6690 करोड़ रुपये पर आ गया था।

रियल एस्टेट से अच्छा रिटर्न मिलने की गुंजाइश कम रहने, गोल्ड के पिछले पांच वर्षों में सालाना एक पर्सेंट की दर से रिटर्न देने और बैंकों के डिपॉजिट रेट्स में कुछ खास इजाफा नहीं करने की वजह से रिटेल इनवेस्टर्स के पास अपने पैसे के निवेश के विकल्प सीमित हो गए हैं।

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फंड्स इंडिया डॉट कॉम की रिसर्च हेड विद्या बाला ने कहा, ‘इंटरेस्ट रेट चढ़ने के बावजूद बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट रेट्स में ज्यादा इजाफा नहीं किया है। ऐसे में निवेशकों ने एसआईपी के जरिए इक्विटीज में निवेश जारी रखा है।’

कई निवेशक मार्केट की वोलैटिलिटी के बीच एसआईपी के जरिए इक्विटीज में अलोकेशन बढ़ा भी रहे हैं। ये एसआईपी आमतौर पर इक्विटी ओरिएंटेड स्कीमों और हाइब्रिड फंड्स के जरिए किए जाते हैं। मंथली एसआईपी कलेक्शन का लेवल मार्च 2014 के 1206 करोड़ रुपये से मार्च 2016 तक 2719 करोड़ रुपये हो गया था। जून 2018 में यह 7553 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। फाइनैंशल इयर 2017-18 में ओवरऑल एसआईपी कलेक्शन 67190 करोड़ रुपये का रहा, जो उससे पिछले साल में 43921 करोड़ रुपये पर था। इस तरह इसमें 53 पर्सेंट की बढ़ोतरी देखी गई।

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कोटक म्यूचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने कहा, ‘मार्केट की चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बावजूद एसआईपी के जरिए आने वाली रकम की रफ्तार बनी हुई है। इसका श्रेय डिस्ट्रीब्यूटर्स को जाता है, जिन्होंने निवेशकों को शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी को नजरंदाज कर लॉन्ग टर्म के लिए अपना निवेश बनाए रखने की बात समझाई है।’ कई फाइनैंशल प्लानर निवेशकों से कह रहे हैं कि वे अपने एसआईपी लॉन्ग टर्म गोल से जोड़ लें, जिससे उन्हें लंबे समय तक निवेश बनाए रखने में मदद मिलेगी। ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियां और डिस्ट्रीब्यूटर पिछले तीन वर्षों से म्यूचुअल फंड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने में जुटे हुए हैं।

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