सेल के वित्तीय हालात तय करेंगे पेंशन योजना का भविष्य अधिकारी और कर्मचारियों के बीच और बढ़ेंगी दूरियां

भिलाई . स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) पेंशन योजना का भविष्य वार्षिक लाभ और वित्तीय हालात के भरोसे है। कंपनी भविष्य में घाटे में जाती है, तो पेंशन के अंशदान में कटौती की जा सकती है या उसे बंद किया जा सकता है। प्रबंधन ने बैठक में यह बात साफ कर दी है।
सेल को पिछले वित्त वर्ष में नुकसान हुआ, तब प्रबंधन ने अधिकारियों को कंपनी की ओर से दिया जाने वाले अंशदान 9 से घटाकर 3 फीसदी कर दिया। कर्मियों की पेंशन में कंपनी का अंशदान ६ से २ फीसदी कर दिया गया। इस मामले में यूनियन का तर्क है कि एक बार पेंशन योजना शुरू हो जाए, वरना लगतार सेवानिवृत्त होते कर्मचारी इसके लाभ से वंचित रह जाएंगे।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति व त्यागपत्र देेने पर नहीं मिलेगा पेंशन लाभ

नई पेंशन योजना के प्रारूप में बीएसपी कर्मचारी त्यागपत्र देता है या उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाती है तब उसे कंपनी अंशदान का लाभ नहीं मिलेगा। मौजूदा हालात में कर्मियों को त्यागपत्र देने या सेवानिवृत्त किए जाने की आशंका बनी है। इससे वर्षों की नौकरी के बाद भी कर्मी को कंपनी के अंशदान के रूप में एक पाई भी नहीं मिल पाएगी।

कंपनी और हितग्राही का अंशदान

1 जनवरी 2012 से डीए और बेसिक का 6 प्रतिशत योगदान प्रबंधन की ओर से पेंश फंड में दिया जाएगा। कर्मी न्यूनतम २ प्रतिशत अंशदान करेंगे, जिसकी अधिकतम सीमा ४ प्रतिशत होगी। अंशदान बेसिक और डीए के शेष प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा। 1 जनवरी 2012 को सेवा में सेल कर्मचारी दायरे में आएंगे, जिनमें अधिकारी, प्रशिक्षु ट्रेनी हैं।
बैंक वरिष्ठ नागरिक को 9.5 से 9.25 प्रति लाख त्रैमासिक कम्पाउंड इंट्रेस्ट पर सावधि जमा (एफडी) योजना उपलब्ध करा रही है। कर्मी को सेवा के बाद राशि पर पेंशन से ज्यादा रिटर्न मिलेगा और मूलधन भी उसका होगा लेकिन वर्तमान प्रारूप में पेंशन और मूलधन वापसी के विकल्प में संभावित आय सिर्फ 7.58 फीसदी है। एक तरफ बीमा कंपनी को 1800 करोड़ का भारी भरकम फण्ड मिलेगा और दूसरी तरफ वह बाजारू दर से कम रिटर्न देगी।

यह हैं प्रभावित

पेंशन स्कीम का लाभ नहीं मिलने से सेल के 17 हजार अधिकारी प्रभावित हैं। इनमें २००७ से अब तक सेवानिवृत हो चुके करीब २ हजार अधिकारी हैं। इन अधिकारियों में ४ हजार भिलाई इस्पात संयंत्र में हैं। इनको पेंशन का लाभ मिलना है। जिस अधिकारी का बेसिक एक लाख रुपए है, उसके लिए प्रबंधन ९ हजार रुपए संबंधित कंपनी में जमा करेगी।

आप भी समझिए यह गणित – कर्मियों को नुकसान क्यों

पेंशन योजना अधिकारियों के लिए वर्ष 2007 से लागू है जबकि कर्मचारियों के लिए इसे 2012 से लागू किया जा रहा है। इस तरह एक कंपनी में दो वर्गों के लिए एक योजना अलग-अलग तरह से लागू करने का समझौता किया गया है। यह योजना 2012 से लागू होती तो कर्मियों को न्यूनतम 50 हजार से पौने २ लाख रुपए तक का फायदा होता। वो भी तब जब 2007 से 2012 के मध्य पुराने बेसिक और डीए का ही 6 फीसदी अंशदान कंपनी देती और 2012 से नए वेतनमान की कटौती होती। इसी तरह अधिकतम लाभ करीब 830 रुपए प्रति लाख मिल पाएंगे। वहीं सबसे सुरक्षित विकल्प में यह राशि 600 रुपए प्रति लाख प्रतिमाह से भी कम हो जाएगी।

एटक महासचिव विनोद सोनी ने कहा कि लंबे समय तक प्रयास के बाद आखिर कर्मियों को पेंशन दिलाने में एटक यूनियन की कोशिश रंग ला रही है। १९८६ से ८९ तक इस पेंशन के लिए संघर्ष किया गया था।

छत्तीसगढ़ मजदूर संघ के महासचिव अखिल मिश्र ने बताया कि पेंशन को लेकर समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। भविष्य में भी कंपनी के कंट्रिब्यूशन को लेकर समस्या आएंगी। इसका मुख्य कारण पेंशन के ड्रॉप में कर्मियों की मांग के मुताबिक बदलाव नहीं करना है।

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