बेसिक शिक्षा मंत्री को बदहाल मिली रायबरेली की प्राथमिक शिक्षा

आज लखनऊ से इलाहाबाद जा रहीं बेसिक शिक्षामंत्री राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने हाईवे के किनारे के दो परिषदीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। विद्यालय बहुत बदहाल मिले। शिक्षा की खराब गुणवत्ता और विद्यालय में घास-फूस व गंदगी देख वे बहुत नाराज हुईं और प्रधानाध्यापिका तथा शिक्षकों को कड़ी फटकार लगाई। बीएसए पीएन सिंह ने यह कहकर अपना बचाव किया कि मैडम, मैं तो अभी जल्द ही जिले में आया हूं। जल्द ही निरीक्षण करके सब दुरुस्त करूंगा।
बेसिक शिक्षा मंत्री सबसे पहले प्राथमिक विद्यालय सरौरा बछरावां पहुंची, जहां अभी तक बच्चों को नई यूनिफार्म नहीं मिली है। बच्चे गंदे और फटी पुरानी यूनिफार्म में थे। विद्यालय परिसर में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई थी और मध्याह्न भोजन वहां तीन दिन से नहीं बना था। बेसिक शिक्षा मंत्री ने प्रधानाध्यापिक अलका ओझा से पूछा कि बच्चों का भोजन क्यों नहीं बना तो, उनका जवाब था कि कनवर्जन कास्ट नहीं है। इस पर मंत्री ने कहा कि भोजन बनना चाहिए कनर्वजन कास्ट का भुगतान तो हो ही जाता है। यह सरासर आपकी लापरवाही और बदइंतजामी है। मंत्री ने कहा कि जब मिशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की स्थिति सुधारने का अधिकार दिया गया है तो यह स्कूल बदहाल क्यों है। कुछ देर के लिए वे उसी से सटे पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरौरा गईं तो वहां बच्चों को यूनिफार्म मिल चुकी है। करीब सवा घंटे के मंत्री के निरीक्षण में पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई।

शुद्ध हिन्दी तक नहीं लिखे थे कक्षा 5 के बच्चे
 कक्षा 5 में पहुंची बेसिक शिक्षा मंत्री शिक्षक की कुर्सी पर स्वयं बैठीं और बच्चों की सुलेख की कापियां चेक करने लगीं। एक बच्चे ने दिनांक को दीनांक लिखा हुआ था। कुछ और कापियों में भी भाषाई अशुद्धियां मिलीं। इस पर उन्होंने संबंधित शिक्षक को बुलाया और डाटा कि क्या पढ़ाते हो। मुझे गलत दिख रहा है और तुम इसी क्लास में पढ़ाते हो तुम्हें क्यों नहीं दिखा। यह सब नहीं चलेगा। ऐसे ही पढ़ाते हो। खामी से शर्मिंदा शिक्षक कोई जवाब नहीं दे पाया।  
शिक्षामित्र की गैरहाजिरी पर मंत्री को मिला गोलमोल जवाब
शिक्षामंत्री ने उपस्थिति रजिस्टर देखा तो शिक्षामित्र गायत्री देवी की हाजिरी लगी थी, लेकिन वे मौजूद नहीं थीं। इस पर उन्होंने प्रधानाचार्य से पूछा तो उनका जवाब गोल मोल था। कुछ देर के बाद आवागमन रजिस्टर पर लिखा मिला कि वह दवा लेने गई हैं। इस प्रकरण को संदिग्ध और पेशबंदी मानते हुए मंत्री ने इसे अपने निजी सचिव को नोट कराया। 
दौड़ते हांफते पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी
मंत्री के आगमन की भनक तो प्राथमिक शिक्षा विभाग में पहले से थी और सभी अधिकारी अपने अपने प्वाइंट पर बुके और माला फूल लिए मुस्तैद थे। परंतु उन्हें इस बात की जानकारी बाद में मिली कि वे प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल सरौरा में रुक गई हैं। नतीजतन बछरावां के खंड शिक्षा अधिकारी पद्मशेखर मौर्य दौड़ते हांफते तब पहुंचे जब वे स्कूल का निरीक्षण कर रही थीं। बुके तो उन्होंने भेंट की, लेकिन मंत्री ने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी। उनके काम से मंत्री खुश नहीं थीं। घटिया और बदहाल व्यवस्था के साथ उनकी बुके मंत्री को प्रभावित नहीं कर पाई।

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