शिक्षा…

अरे नादां तुम क्या जानों क्या शिक्षा ,
आैर क्या उसकी परिभाषा है।

जीवन का आधार है शिक्षा,
तो मानवता का भाव भी शिक्षा।

गहरे घाव पर मरहम है तो,
रेगिस्तान में छांव भी शिक्षा।

राष्ट्र प्रेम का भाव है शिक्षा तो ,
राष्ट्र भक्त का स्वाभिमान भी शिक्षा।

शिक्षा की है बात निराली ,
जीवन सुधारती व्यक्तित्व बनाती।

ऊंच-नीच का भेद मिटाती,
एकता अखण्डता का पाठ पढ़ाती।

मिल जाए तो जीवन सफल है,
बिन मिले आंखों में पानी।

दीपेश पालीवाल
तहसील – झाड़ोल

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