खुद नहीं बढ़ाई कमाई तो सरकार भी नहीं देगी पैसा

– वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर शहरी निकायों से मांगा आय का ब्योरा

एनबीटी ब्यूरो, लखनऊ

अगर शहरी निकाय अपनी आय में इजाफा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाते हैं तो सरकार भी उनकी आर्थिक मदद पर ब्रेक लगा देगी। राज्य वित्त आयोग ने भी इसकी सिफारिश की थी और अब नगर विकास विभाग ने इस पर अमल शुरू कर दिया है। इसके पहले चरण में सभी शहरी निकायों से उनके द्वारा आय में इजाफे की कोशिश समेत अन्य बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है।

राज्य वित्त आयोग ने शहरी निकायों के सम्बंध में सरकार से की गई सिफारिश में कहा था कि शहरी निकायों को खुद अपनी आय में इजाफा करना चाहिए। ज्यादातर शहरी निकाय अपनी आय को लेकर चिंतित नहीं हैं। हाउस टैक्स समेत अन्य करों की वसूली ठीक से नहीं की जा रही है। इसी वजह से ज्यादातर शहरी निकाय लोगों को सुविधाएं दे पाने में नाकाम हैं। इस सिफारिश के आधार पर सरकार ने आंकड़े जुटाना शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि इस साल सरकार 14वें वित्त आयोग समेत अन्य स्रोतों से शहरी निकायों को दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती कर सकती है।

हाउस टैक्स वसूली में लापरवाही : नगर विकास विभाग को जो जानकारी के मुताबिक कमोबेश सभी शहरी निकाय हाउस टैक्स वसूली में लापरवाह हैं। लखनऊ नगर निगम में पांच लाख से ज्यादा मकान हैं, लेकिन दो लाख से कुछ ज्यादा मकानों को ही हाउस टैक्स के दायरे में रखा गया है। इनमें भी करीब एक लाख मकानों से नियमित हाउस टैक्स नहीं मिलता है। वाराणसी नगर निगम में 30%, कानपुर में 35%, मेरठ में 40%, आगरा में 37% और अलीगढ़ में 27% हाउस टैक्स वसूला जा रहा है। गंदगी पर जुर्माना वसूली में भी निकायों का काम संतोषजनक नहीं पाया गया है।

ये जानकारियां मांगीं

– कितनी कमाई अपने स्रोतों से की और कितना खर्च किया

– आय बढ़ाने के क्या उपाय किए

– कर्मचारियों की तनख्वाह और वेतन पर कितना बकाया है

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