2022 तक कोलकाता में 175000 नौकरियां सृजन करेगा लॉजिस्टिक्स सेक्टर

लॉजिस्टिक क्षेत्र में प्राथमिक रूप से छह लाख करोड़ रुपये का होगा निवेश 

पूरे देश में 30 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार का अवसर

कोलकाता में सात प्राथमिक लाॅजिस्टिक्स उपक्षेत्रों में 82,000 कुशल लोगों की कमी

अमर शक्ति 

कोलकाता : जीएसटी क्रियान्वयन और इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति के साथ उल्लेखनीय निवेश से भारत में लाॅजिस्टिक्स उद्योग में 10.5 सीएजीआर की दर से वृद्धि होगी और इसका सकारात्मक असर महानगर में देखने को मिलेगा. टीमलीज की ओर से पेश की गयी ‘इंडियन लाॅजिस्टिक्स रिवाॅल्यूशन-बिग बेट्स, बिग जाॅब्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग में हो रही सकारात्मक वृद्धि से लाॅजिस्टिक्स सेक्टर में अगले चार वर्षों में कोलकाता में 175,000 नयी नौकरियां और देश में तीन मिलियन नौकरियां पैदा होंगी. यही नहीं, यह प्रभाव सात सब-सेक्टर रोड फ्रेट, रेल फ्रेट, वेयरहाउसिंग, वाटरवेज, एयर फ्रेट, पैकेजिंग और कुरियर सेवाओं में नजर आयेगा. 

रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न सार्वजनिक निवेश एवं विस्तार योजनायें जैसे कि 3476 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 54 किलोमीटर के लिए घोषपुकुर-सलसालाबारी एनएच (1 व 2) का निर्माण और मल्टीमोडल लाॅजिस्टिक्स पार्क जैसी पहल से कोलकाता क्षेत्र में नौकरियों के सृजन में तेजी प्रदान करेंगी. 

2018 से 2022 तक किन-किन क्षेत्रों में मिलेंगे रोजगार के अवसर

आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश और आउटसोर्सिंग में बढ़ोतरी रोड फ्रेट में इंक्रीमेंटल जाॅब के निर्माण में योगदान करेंगी और इसमें 121,779 इंक्रीमेंटल जाॅब्स पैदा होंगे. इसी तरह, नये नियम कारोबार करना आसान बना रहे हैं और इससे कार्गो का विकास हो रहा है.

इसकी मदद से वाटरवेज सब-सेक्टर में 26,000 इंक्रीमेंटल नौकरियां उत्पन्न होंगी, जबकि एयर फ्रेट में 11,000 इंक्रीमेंटल जाॅब्स का संकलन होगा. इस रिपोर्ट में पता चला है कि रेल फ्रेट सबसेक्टर्स अगले चार वर्षों में 4,000 इंक्रीमेंटल नौकरियों का सृजन करेगा. वहीं, पैकेजिंग सब-सेक्टर में 2,000 इंक्रीमेंटल नौकरियां पैदा होंगी, जबकि वेयरहाउसिंग विभाग में 8,000 इंक्रीमेंटल नौकरियां उत्पन्न होने की संभावना है. कुरियर सर्विसेज में 2,000 इंक्रीमेंटल जाॅब्स देखने को मिलेंगे.  

इस रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी पर्याप्त शिक्षण व विकास पहलों की कमी, मुआवजे के कम स्तर, अपर्याप्त फायदों, खतरनाक व बेहद तनाववाली कामकाजी स्थितियों के कारण समय से पहले ही इस सेक्टर को छोड़ देते हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कोलकाता में सात प्राथमिक लाॅजिस्टिक्स उपक्षेत्रों में 82,000 कुशल लोगों की कमी है, जिसमें से 43 प्रतिशत जूनियर लेवल से संबंधित हैं. 

सेक्टर में महिला कर्मियों के अनुपात में भी वृद्धि

इस सेक्टर में महिला कर्मचारियों का अनुपात 2010 के पांच प्रतिशत से बढ़कर मौजूदा समय में 20 प्रतिशत पहुंच गया है. अगले चार सालों में यह 26 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है. नियोक्ता ज्यादा प्रासंगिक समानतावादी प्रतिभा प्रबंधन युग पर ध्यान दे रहे हैं, वे लैंगिक विविधता को प्रोत्साहन दे रहे हैं और नयी टेक्नोलाॅजी को अपना रहे हैं. 

कामकाज की गंदी परिस्थितियां, कार्य-जीवन में असंतुलन, शोषण, छेड़खानी और हिंसा वर्कप्लेस के कुछ ऐसे अवरोधक हैं, जिनके कारण पुरुष उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है. यहीं नहीं, जाॅब रोल में उम्मीदवारों का चयन करने में पक्षपातपूर्ण मानदंड और आरोपित लैंगिंक नियम कुछ बाधायें हैं, जिनसे इस सेक्टर में महिलाओं की सक्रिय प्रतिभागिता सीमित हो जाती है. हालांकि, इस सेक्टर में अब महिला भागीदारी के आशाजनक आंकड़ें एवं लैंगिंग विविधता नजर आने लगी है.

कोलकाता के लिए असीम संभावनाएं

इस संबंध में सुदीप सेन, टीमलीज सर्विसेज में सह उपाध्यक्ष ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में 14,19,000 करोड़ रुपये का लाॅजिस्टिक्स सेक्टर अगले चार वर्षों में तीन मिलियन नयी नौकरियां पैदा करने के लिए तैयार है. 

छह लाख करोड़ रुपये का प्राथमिक निवेश नौकरियों में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक कारक है. जीएसटी क्रियान्वयन सेक्टर को औपचारिक बनायेगा और इससे परिचालन में दक्षता आयेगी. वहीं, कोलकाता पूर्वोत्तर भारत के द्वार के तौर पर अपनी महत्वपूर्ण लोकेशन तथा कोलकाता पोर्ट से अपनी नजदीकी के कारण एक प्रमुख और बढ़ता हुआ बाजार है. 

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