सरकार के रोजगार के आंकड़ों में दूर होगी गड़बड़ी

योगिमा शर्मा, नई दिल्ली

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने हाल ही में शुरू किए गए पेरोल डेटा और लेबर मिनिस्ट्री के तिमाही रोजगार सर्वेक्षण के आंकड़ों में अंतर की जांच करने का निर्देश दिया है। पेरोल डेटा और लेबर मिनिस्ट्री के तहत आने वाले लेबर ब्यूरो के तिमाही रोजगार सर्वेक्षण में देश में बनी नौकरियों की संख्या में बड़ा अंतर था। इसी वजह से PMO ने यह निर्देश दिया है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि PMO ने रोजगार के आंकड़ों पर सुझाव देने के लिए एक टेक्निकल कमिटी बनाई है। इस कमिटी को एक महीने में सुझाव देने के लिए कहा गया है और इसके बाद अगले कदम का फैसला किया जाएगा। कमिटी के सुझावों के आधार पर PMO इनमें से एक डेटा को समाप्त करने या दोनों डेटा को प्रकाशित करने पर फैसला करेगा। अधिकारी ने कहा, ‘PMO ने कमिटी से पेरोल डेटा और तिमाही रोजगार सर्वेक्षण में समानता की सीमा आंकने को कहा है।’ इस वजह से लेबर ब्यूरो के मई में जारी होने वाले आठवें तिमाही रोजगार सर्वेक्षण को रोक दिया गया है।

चार सदस्यीय कमिटी की अगुवाई पूर्व चीफ स्टैटिसटिशियन टी सी ए अनंत कर रहे हैं। इसके सदस्यों में चीफ इकनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमणियन और लेबर मिनिस्ट्री के अधिकारी शामिल हैं। एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के सब्सक्रिप्शन और एंप्लॉयीज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी के डेटा पर आधारित सरकार के पहले पेरोल डेटा में सितंबर 2017 से मार्च 2018 के बीच छह महीनों में फॉर्मल इकॉनमी में 35 लाख से अधिक नौकरियां बनने का अनुमान दिया गया था।

इसके विपरीत, ‌लेबर ब्यूरो के छठे और सातवें रोजगार सर्वेक्षण में बताया गया था कि अप्रैल-सितंबर 2017 के बीच कुल दो लाख नौकरियां बनी थी। हालांकि, दोनों डेटा के बीच अवधि का अंतर होने के कारण इनकी तुलना करना मुश्किल है। इसके अलावा तिमाही रोजगार सर्वेक्षण का डेटा कुछ देरी से आता है और इसकी पहुंच भी केवल आठ सेक्टर्स तक सीमित है, जबकि EPFO का डेटा सभी सेक्टर को कवर करता है। पेरोल डेटा में 10 या अधिक वर्कर्स वाले प्रतिष्ठानों के लिए लगातार तिमाहियों में रोजगार की स्थिति में बदलाव को मापा जाता है। लेबर मिनिस्ट्री ने यह स्वीकार किया है कि तिमाही रोजगार सर्वेक्षण में कुछ कमियां हैं। इसमें 2014 के बाद रजिस्टर्ड हुई यूनिट्स शामिल नहीं हैं क्योंकि यह छठी आर्थिक जनगणना पर आधारित है और इसमें 10 से कम कर्मियों वाले प्रतिष्ठान को शामिल नहीं किया जाता।

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