जानें- पीपीएफ और एफडी में से क्या है निवेश का बेहतर विकल्प

यदि आप अपनी कमाई को बैंक खाते में ही रखते हैं या फिर इसके उलट उसे पूरा खर्च कर देते हैं तो इनमें से कोई भी विकल्प बेहतर नहीं कहा जा सकता। इसकी बजाय पैसे को इस तरह से निवेश किया जाना चाहिए कि भविष्य में आपको जरूरत पड़ने पर ब्याज समेत आपकी पूरी राशि मिल सके। कुछ लोग इसके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट को बेहतर स्कीम मानते हैं। एक वर्ग ऐसा भी है, जो मानता है कि पीपीएफ स्कीम निवेश का बेहतर साधन है।
जानें, दोनों में है क्या समानता और क्या हैं अंतर…

पीपीएफ अकाउंट के हैं क्या फायदे

पीपीएफ जैसी छोटी सेविंग स्कीम्स पर मिलने वाले ब्याज का हर तिमाही में निर्धारण होता है। फिलहाल इस पर सालाना 7.6 फीसदी की दर से निवेशकों को ब्याज मिल रहा है। सालाना चक्रवृद्धि आधार पर इसका ब्याज जोड़ा जाता है।

इनकम टैक्स बेनिफिट: इस स्कीम के तहत आप सालाना न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1 लाख 50 हजार रुपये जमा करा सकते हैं। इनकम टैक्स की धारा 80 सी के तहत पीपीएफ अकाउंट में जमा राशि पर टैक्स में छूट रहती है।

कब हो सकती है निकासी: पीपीएफ अकाउंट 15 साल तक के लिए होता है। अकाउंट खुलने के 7 साल बाद आप किसी आपातकालीन स्थिति में राशि निकाल सकते हैं।

लोन की सुविधा: पीपीएफ अकाउंट खुलवाने के 3 साल बाद आप उसमें जमा राशि के आधार पर लोन भी ले सकते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट: फिक्स्ड डिपॉजिट या एफडी पर बचत खाते के मुकाबले बैंक अच्छा खासा ब्याज देते हैं। एसबीआई, पीएनबी, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई जैसे बैंक एफडी पर 7.25 फीसदी तक का ब्याज दे रहे हैं। एफडी अकाउंट्स को आप फोन बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए भी खुलवा सकते हैं। हालांकि जमा की अवधि के आधार पर अलग-अलग बैंकों ने एफडी की ब्याज दर भी अलग-अलग तय कर रखी हैं।

इनकम टैक्स बेनिफिट: एफडी में 5 साल के लिए निवेश की गई रकम पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

पूर्व निकासी: निकासी की बात करें तो एफडी दो तरह की होती हैं। 1) पूर्व निकासी की सुविधा वाली रेग्युलर एफडी 2) 5 और 10 साल के लॉक-इन पीरियड वाली एफडी। इन पर इनकम टैक्स में भी छूट मिलती है। आमतौर पर बैंकों की ओर से पेनल्टी लिए जाने के बाद ही एफडी की अवधि पूरी होने से पहले निकासी की अनुमति दी जाती है।

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