जरूरतमंद उद्योगों को कर्ज देंगे बैंक

सोमेश झा / नई दिल्ली June 19, 2018

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) ‘वास्तविक’ कंपनियों के कर्ज की जरूरतों को पूरा करने के लिए खाका तैयार करेंगे। वित्त मंत्री पीयूष गोयल के साथ आज हुई बैंकरों की बैठक में यह फैसला किया गया है।  गोयल ने कहा कि बैंक ‘वास्तविक, जरूरतमंद, बेहतर प्रदर्शन करने वाली, बेहतरीन कंपनियनों’ के  कर्ज की जरूरतों को पूरा करने का काम दो स्तर पर करेंगे। पहले स्तर पर सरकारी बैंक करीब 4,500 कंपनियों के कर्ज की जरूरतों पर केंद्रित अध्ययन पर ध्यान देंगे, जिनकी उधारी 20 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये तक की है। दूसरे स्तर पर उन कंपनियों के कर्ज की जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा, जिनकी उधारी 20 लाख रुपये तक की है, जिनमें ज्यादातर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग (एमएसएमई) आते हैं। 

गोयल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सरकारी बैंकों के समक्ष यह विचार सामने आया कि एमएसएमई के साथ उन कंपनियों की मदद की जाए, जो वास्तविक और बेहतरीन कंपनियां हैं और उन्हें कार्यशील पूंजी या स्थायी संपत्ति में निवेश के लिए कर्ज की जरूरत है, जिन्हें बीते वर्षों कठिनाई रही है। बैंकों का सामूहिक प्रयास होगा कि वे टीम बनाकर कारोबार को समर्थन करने का काम करें।’ कार्यकारी वित्त मंत्री ने आज 18 सरकारी बैंकों के मुख्य कार्यकारियों के साथ बैठक की, जिनमें मुख्य कार्यकारी व गैर कार्यकारी चेयरपर्सन, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार व अन्य अधिकारी शामिल थे। 

सरकारी बैंकों ने यह भी फैसला किया है कि कंसोर्टियम और बहुपक्षीय बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से कर्ज लेने की प्रक्रिया आसान करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसमें से एक फैसले के मुताबिक कंसोर्टियम के भीतर 66 प्रतिशत बैंकों द्वारा लिया गया फैसला सभी कर्जदाताओं के लिए बाध्यकारी होगा। यह हाल ही में दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में किए गए संशोधन के मुताबिक है, जो एक अध्यादेश के माध्यम से किया गया था। इस संशोधन के बाद कर्जदाताओं की समिति में विशेष योजनाओं जैसे समाधान से जुड़े मामलों में मतदान का प्रतिशत 75 प्रतिशत से घटाकर 66 प्रतिशत कर दिया गया है। 

कुछ जमीनी नियम तैयार करने के लिए एक मॉडल इंडर क्रेडिटर अरेंजमेंट जल्द ही तैयार किया जाएगा, जिसका पालन कंसोर्टियम में शामिल सभी बैंकों को करना होगा। यह इंडियन बैंक एसोसिएशन और संबंधित बैंकोंं के बोर्ड की सलाह के बाद तैयार किया जाएगा।  भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, ‘बैंकों के बीच औपचारिक समझौते के माध्यम से कंसोर्टियम की कार्यशैली और बहुपक्षीय बैंकिंग व्यवस्था में सुधार का विचार है, जिसके लिए कुछ निश्चित जमीनी नियम होंगे। यह चीज अभी नहीं है। ज्यादातर सरकारी बैंक इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे और एक दूसरे को सहयोग करने के लिए सब कुछ करेंगे।’ बैंक बाहरी समितियां भी गठित करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कर्ज देने की प्रक्रिया, प्रक्रिया में उन्नयन और मानव संसाधन गतिविधियों आदि का पालन हो रहा है।

निजी कंपनियां करती हैं धोखाधड़ी

गोयल ने कहा कि लोगों का पैसा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूरी तरह सुरक्षित है।  गोयल ने कहा कि धोखाधड़ी निजी कंपनियां करती हैं न कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी)। उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों के प्रभावी तरीके से नियमन के लिए रिजर्व बैंक को और अधिकार देने के सवालों को लेकर चर्चा को तैयार है।  गोयल ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लोगों का पैसा बिल्कुल सुरक्षित है। सरकार उनके साथ मुस्तैदी के साथ खड़ी है।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके मन में सवाल उठता है कि उन निजी कंपनियों के पास लोगों का पैसा कितना सुरक्षित है जिनके ऊ पर काफी कर बकाया है और जो जनता से जमा जुटाती हैं। 

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