SIP पर बढ़ा निवेशकों का भरोसा, मई में रिकॉर्ड इनवेस्टमेंट

[ प्रशांत महेश | मुंबई ]

म्यूचुअल फंड्स में सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला पैसा अप्रैल के मुकाबले मई में 9 पर्सेंट बढ़ गया और 7304 करोड़ रुपये के ऑल-टाइम मंथली रिकॉर्ड पर पहुंच गया था। इससे पहले फाइनेंशियल ईयर 2019 के पहले महीने के दौरान एसआईपी कलेक्शंस में गिरावट दर्ज की गई थी।

अप्रैल में एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड्स में आने वाली रकम 6690 करोड़ रुपये पर आ गई थी, जो पिछले वित्त वर्ष के आखिरी महीने यानी मार्च में 7199 करोड़ रुपये पर थी। अप्रैल के मुकाबले मई के आंकड़े में 614 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

इक्विटीज के लिए मई उतार-चढ़ाव वाला महीना रहा। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों, इटली में राजनीतिक स्थिति और बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी ने मार्केट्स पर दबाव बनाए रखा।

अधिकतर निवेशक इक्विटी फंड्स और बैलेंस्ड फंड्स में एसआईपी शुरू करते हैं। मार्च 2014 में मंथली एसआईपी कलेक्शन 1206 करोड़ रुपये था, जो मार्च 2016 में 2719 करोड़ रुपये हो गया और फिर मार्च 2018 में बढ़कर 7304 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के लिए ओवरऑल एसआईपी कलेक्शन 67190 करोड़ रुपये रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष के लिए इसका आंकड़ा 43921 करोड़ रुपये का था। इस तरह इसमें 53 पर्सेंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मिराए एसेट मैनेजमेंट के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर स्वरूप मोहंती ने कहा, ‘इससे पहले केवल इंडिपेंडेंट फाइनेंशियल एडवाइजर्स, बैंक और नेशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स म्यूचुअल फंड बेचा करते थे। पिछले कुछ महीनों में ऐसे स्टॉक ब्रोकर दिखे हैं, जो म्यूचुअल फंड एसआईपी बेच रहे हैं। इससे आंकड़ा बढ़ने में मदद मिल रही है।’ उन्होंने कहा कि मार्केट में करेक्शन के बावजूद निवेशकों ने एसआईपी रोके नहीं हैं और अच्छी बात यह है कि वे इसमें रकम बढ़ा रहे हैं।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री विज्ञापन अभियान भी चला रही है और देशभर में निवेशकों को लंबी अवधि के निवेश और इक्विटीज में पैसा लगाने के फायदे बता रही है।

पिछले तीन वर्षों में एसआईपी के साथ निवेशकों का अनुभव अच्छा रहा है। इससे उन्हें इस तरीके से निवेश जारी रखने और चुने गए प्लान में ज्यादा रकम लगाने का हौसला मिला है।

रूंगटा सिक्योरिटीज के चीफ फाइनेंशियल प्लानर हर्षवर्द्धन रूंगटा ने कहा, ‘सेविंग्स के बारे में जागरूकता बढ़ने और कॉस्ट ऐवरेजिंग से इक्विटी वोलैटिलिटी घट सकने के साथ लंबी अवधि तक निवेश के फायदों की जानकारी मिलने से एसआईपी के आंकड़े में बढ़ोतरी हो रही है।

रिटेल इनवेस्टर्स ने पिछले तीन वर्षों में एसआईपी के जरिए जमकर निवेश किया है। इसका एक कारण इक्विटी से होड़ करने वाली गोल्ड और रियल एस्टेट जैसी एसेट्स से कम रिटर्न मिलना रहा है। एसआईपी से रूपी कॉस्ट ऐवरेजिंग का मौका मिलता है। मार्केट टाइमिंग का असर खत्म हो जाता है। ऐसा इसलिए हो पाता है क्योंकि मार्केट में तेजी हो या गिरावट, निवेशक हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं।

निवेशक ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके से 500 रुपये से भी एसआईपी शुरू कर सकते हैं। एसआईपी को शुरू करने या बंद करने में भी सहूलियत है। इसमें निवेश की जाने वाली रकम किसी भी वक्त बढ़ाई जा सकती है।

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