वित्त मंत्री जेटली ने बताया- कैसे और कहां मिल रहा है रोजगार?

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में हासिल हुई 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर से एक बार फिर से यह स्थापित हो गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. उन्होंने कहा कि अभी यह रुख कई और साल तक बना रहेगा. इसके साथ ही साथ उन्होंने इस बात का भी जवाब दिया कि इस जीडीपी वृद्धि से किस क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिला है. मोदी सरकार की विपक्ष इस बात को लेकर लगातार आलोचना करता है कि 2014 में पीएम मोदी ने यह वादा किया था कि वे हर साल 1 करोड़ लोगों को रोजगार देंगे लेकिन अर्थव्यवस्था में वृद्धि के दावों के बावजूद लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है.

हर साल 1.2 करोड़ भारतीयों को मिल रहा है रोजगार

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को लिखे अपने फेसबुक पोस्ट में इस आलोचना का जवाब दिया है. उन्होंने लिखा है कि ‘हाल ही में जारी हुए डेटा साफ-साफ दिखाते हैं कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर दोहरी संख्या में बढ़ रहा है. यह रोजगार सृजन के लिहाज से एक बड़ा क्षेत्र है. निवेश में वृद्धि हो रही है. घरेलू निवेश भी बढ़ रहा है. एफडीआई अप्रत्याशित ऊंचाई पर है.’

किडनी ट्रांसप्लांट की वजह से फिलहाल छुट्टी पर चल रहे वित्त मंत्री ने आगे लिखा है कि ‘दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत एनपीए का तेजी से निपटारा किया जा रहा है. अचल पूंजी का तेजी से निर्माण हो रहा है. मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोत्तरी हो रही है. हम इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में काफी खर्च कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं में काफी तेजी आई है. सामाजिक कल्याण योजनाओं खासकर वित्तीय समावेशन के कार्यक्रमों से स्व-रोजगार का सृजन हुआ है. इनमें से सब उच्च रोजगार सृजन वाले क्षेत्र हैं.’

जेटली ने अपने ब्लॉग में ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए आकंड़ों के हवाले से ये बातें लिखी हैं. ब्लूमबर्ग ने पिछले हफ्ते ही यह कहा था कि सरकार के डेटा के अनुसार हर साल 1.2 करोड़ से अधिक भारतीय कार्यबल में शामिल हो रहे हैं.

जीएसटी और नोटबंदी को लेकर सरकार के आलोचकों पर निशाना साधते हुए जेटली ने कहा कि नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन के बाद न तो भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में दो प्रतिशत गिरावट आई है और न ही एक पूर्व वित्त मंत्री का कथन सही है कि इससे भारत गरीबी गरीब होगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य उज्जवल

फेसबुक पोस्ट में जेटली ने कहा कि नोटबंदी जैसे संरचनात्मक सुधारों और जीएसटी के क्रियान्वयन और दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता को लागू करने की वजह से हमें दो तिमाही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. जिन लोगों ने यह अनुमान लगाया था कि जीडीपी में दो प्रतिशत की गिरावट आएगी वे गलत साबित हुए.

उन्होंने कहा कि मेरे एक सम्मानित पूर्ववर्ती को भय था कि इससे उन्हें भविष्य में गरीबी का जीवन जीना पड़ेगा. जेटली ने कहा, ‘हमने प्रत्येक भारतीय को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया है. अब अतीत की तुलना में भविष्य अधिक उज्जवल दिख रहा है. यह रुख अगले कुछ साल तक जारी रहेगा.’

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि नोटबंदी से जीडीपी में दो प्रतिशत की गिरावट आएगी. इसी तरह पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों से देश के लोग गरीब हो जाएंगे. जेटली ने कहा कि एक अन्य वित्त मंत्री ने सुझाव दिया है कि सरकर को पेट्रोल, डीजल पर करों में 25 रुपए की कटौती करनी चाहिए. हालांकि, जब वह खुद वित्त मंत्री थे तो उन्होंने ऐसा नहीं किया था. वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबर ने पिछले सप्ताह कहा था कि केंद्र सरकार के लिए पेट्रोल पर करों में 25 रुपए की कटौती करना संभव है लेकिन वह ऐसा करेगी नहीं.


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