दोनों हाथ नहीं, कोई अपना साथ नहीं फिर भी दिखाई दिलेरी भूखा सोया, पर भीख नहीं मांगी

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पिछले कई महीनों से मेरे पिता काम नहीं कर रहे हैं। यों कहें कि वह अब काम कर भी नहीं सकते, क्योंकि मिल में काम करते हुए एक दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए हैं। वह हमारे चार सदस्यीय परिवार में इकलौते कमाने वाले शख्स थे। हमारे पूरे परिवार की जिंदगी बदल देने वाली उस दुर्घटना के बाद मेरा स्कूल छूट गया। मैं चाहकर भी अब स्कूल नहीं जा सकता था। परिवार का पेट पालने के लिए जरूरी था कि घर का कोई न कोई सदस्य काम करे।

मेरे परिवार में पिता के बाद मेरी मां ही इकलौती वयस्क सदस्य थीं। मेरी बहन तो मुझसे बहुत छोटी थी। वह केवल पांच साल की है। मेरी मां की इच्छा थी कि मैं भीख मांगना शुरू करूं, क्योंकि परिस्थितियों के हिसाब से यह सबसे आसान काम था। लेकिन मेरे अपंग पिता इस बात के लिए कभी राजी नहीं हुए कि उनका बेटा भीख मांगे। उनका साफ कहना था कि मैं भीख में मिले चावल खाने से पहले मरना पसंद करूंगा।


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