बैंकों की हर शाखा का ऑडिट नहीं कर सकते: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल
नई दिल्ली

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 13,000 करोड़ रुपये के नीरव मोदी-मेहुल चौकसी फ्रॉड के लिए सिर्फ और सिर्फ पंजाब नैशनल बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। आरबीआई ने पीएनबी पर ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ कंपलियंस रिपोर्ट्स भरने का आरोप लगाया है। संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने पेश हुए RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि सब कुछ नियम मुताबिक हो यह सुनिश्चित करना बैंकों की जिम्मेदारी है। आरबीआई के लिए बैंकों की एक लाख से ज्यादा शाखाओं को ऑडिट करना असंभव है।

आरबीआई गवर्नर ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रभावी तरीके से नियमन के लिए और अधिकारों की मांग की। आरबीआई ने तर्क दिया कि एसबीआई और दूसरे राष्ट्रीयकृत बैंक तो बैंकिंग रेग्युलेशन ऐक्ट के तहत ‘बैंकिंग कंपनियों’ की परिभाषा के दायरे में ही नहीं आते। पटेल ने संसदीय समिति को उन 9 शक्तियों के बारे में भी बताया, जिनकी आरबीआई के पास कमी है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चेयरमैन, निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को हटाने की शक्ति व बैंकों के निदेशक मंडलों में एक ही निदेशकों के होने पर पाबंदी लगाना शामिल हैं।

उर्जित पटेल के इस बयान से आरबीआई और वित्त मंत्रालय बीच एक बार फिर टकराव शुरू हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने पटेल के इसी तरह के दावों को पहले ही नकार चुका है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि बैंकों के प्रमुखों को नियुक्त करने या हटाने का अधिकार सिर्फ वित्त मंत्रालय के पास है। अधिकारियों ने बताया कि वित्त मंत्रालय बैंक्स बोर्ड ब्यूरो और आरबीआई से सलाह-मशविरा के बाद ही बैंकों के प्रमुखों की नियुक्ति करता है या उन्हें हटाता है।

भारतीय स्टेट बैंक सहित देश में कुल 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में सरकारी बैंकों का सामूहिक घाटा 87,300 करोड़ रुपये रहा है। पंजाब नैशनल बैंक को 12,283 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सिर्फ 2 बैंक इंडियन बैंक और विजया बैंक को 2017-18 में मुनाफा हुआ है। वित्त वर्ष के दौरान इंडियन बैंक ने 1,258.99 करोड़ रुपये और विजया बैंक ने 727.02 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। दिसंबर, 2017 के अंत तक पूरे बैंकिंग क्षेत्र की सकल गैर निष्पादित आस्तियां (NPA) 8.31 लाख करोड़ रुपये थीं। पटेल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली समिति से यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निदेशक मंडलों में केंद्रीय बैंक नामित व्यक्ति नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इस बारे में वित्त मंत्रालय से चर्चा कर रहा है।

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